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आजादी के 65 साल बाद भी फिरंगी भाषा की गुलामी का कलंक क्यों ढो रहे हैं भारतीय  सर्वोच्च न्यायालय में कब मिलेगा भारतीय भाषाओं में न्याय सर्वोच्च न्यायालय में भारतीय भाषाओं को लागू करने के लिए सोनिया के दर पर पुलिसिया दमन के बाबजूद 4 दिसम्बर से  श्यामरूद्र पाठक व साथियों का सत्याग्रह जारी आजादी के 65 साल बाद भी देश में अंग्रेजी गुलामी ढोना किसी देशद्रोह से कम नहीं भले ही देश को अंग्रेजों की गुलामी से मुक्ति मिले 65 साल हो गये हैं परन्तु आज भी भारत के सर्वोच्च न्यायालय में भारतीय भाषाओं में नहीं अपितु अंग्रेजों की भाषा में दिया जाता है। इसी कलंक को दूर करने की मांग को लेकर यानी देश के सर्वोच्च न्यायालय में भारतीय भाषाओं को लागू करने की मांग को लेकर सप्रंग सरकार की मुखिया सोनिया गांधी के आवास 10 जनपत नई दिल्ली पर देश के अग्रणी वैज्ञानिक व भारतीय भाषा आंदोलन के पुरोधा श्यामरूद्र पाठक के नेतृत्व  भारतीय भाषाओं के लिए समर्पित आंदोलनकारियों का सत्याग्रह 4 दिसम्बर के बाद पुलिसिया दमन के बाबजूद निरंतर जारी है। परन्तु न तो कांग्रेस प्रमुख सोनिया गांधी एक सप्ताह ...
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21 दिसम्बर 2012 को नही होगी महाप्रलय माया संस्कृति की कालगणना से आशंकित हैं पश्चिमी दुनिया  भले ही अमेरिका सहित पश्चिमी दुनिया के लोग माया सभ्यता की काल गणना के अनुसार 21 दिसम्बर को 2012 महाप्रलय होने की आशंका से भयभीत है। परन्तु हजारों सालों से विश्व को ज्ञान व सभ्यता के दिव्य ज्ञान से आलौकित करने वाली सनातनी संस्कृति के ध्वजवाहक भारतीय पश्चिमी दुनिया के आधे अधूरे ज्ञान को देख कर इनकी मूर्खता पर हंस रहे है।उन्हें मालूम हैं कि अभी निकट भविष्य में भी कहीं सृष्टि में प्रलय नहीं आ रही है। उसका एक निश्चित समय है और वह समय अभी हजारों हजार साल दूर है।  भारतीय संस्कृति में अनादिकाल से कालगणना का एक ऐसा दिव्य ज्ञान रहा है जिसके आगे वर्तमान विज्ञान भी नतमस्तक है।यहां सृष्टि के लय व प्रलय के साथ साथ दिन महिने साल आदि का बहुत ही वैज्ञानिक विधान हजारों सालों से विद्यमान है। जिस समय पश्चिमी दुनिया सहित पूरा विश्व अज्ञानता के अंधियारे में खानाबदोशी जीवन जी रहे थे उस समय भी भारतीय समाज अपने ज्ञान विज्ञान के आलौक में जी रहा था। समर्पित पत्रकार इमरान देशभक्त द्वारा प्रेषित इस आशय की एक...
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लोगों को देख कर सतमार्ग से विचलित न हों इस सृष्टि में जितने दृश्य जीव हैं उससे कई हजार गुना अदृश्य जीव विद्यमान हैं जिनको हम अपनी इस आंखों से देख नहीं पाते। इस दृश्य सृष्टि में भी लाखों प्रकार के जीव हैं जो मनुष्य की तरह ही इस सृष्टि में  हैं। परन्तु मनुष्य ही एक ऐसा आततायी जीव है जिसने सबके लिए बनी इस सृष्टि में अधिकांश भू-जल व थल पर ही नहीं अंतरिक्ष पर भी अपना शिकंजा कस कर या तो अधिकांश जीवों की निर्मम हत्या कर रहा है या अधिकांश को या तो गुलाम बना दिया या ये मनुष्य के रहमोकरम पर जी रहे हैं। ऐसे में भी इस विस्तृत ब्रह्माण्ड का करोड़वां अंश पृथ्वी पर रहने वाला मनुष्य को भले ही अभी इस समग्र ब्रह्माण्ड की कोई थाह तक नहीं है परन्तु वह अपने आप को सारे ब्रह्माण्ड का का एकमात्र सरताज समझ कर अन्य जीव जन्तुओं का जीना दुश्वार कर रखा है। भगवान श्री कृष्ण ने भी इस दिशाहीन मानव के ज्ञान चक्षु खोलने के लिए यह बताया था कि मैं ही इस ब्रह्माण्ड के हर जड चेतन और कण कण में विद्यमान हॅू। यानी सभी को इस संसार में जीने का उतना ही हक हैं जितना मनुष्य को। परन्तु मनुष्य ने जल, थल व नभ में विचरने वाल...
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सैनिकों को नहीं तो नेताओ व नौकरशाह को क्यों हो विदेशी से शादी की अनुमति ? सेना जब अपने एक अधिकारी मेजर को अपनी विदेशी(श्रीलंका) प्रेमिका से विवाह करने की इजाजत कोर्ट की फटकार के बाद इस शर्त पर देने को राजी हुई कि सेना अधिकारी को सेना की सेवा से कार्यमुक्त तभी किया जायेगा जब वह एक तो उक्त विदेशी युवती से कोर्ट में विवाह का प्रमाण पत्र तथा आईएमए में पूरे प्रशिक्षण का खर्च भरेगा। इससे पहले सेना इस अधिकारी को विदेशी युवती से शादी की इजाजत नही दे रही थी। न ही उसको सहजता से कार्यमुक्त ही कर रही थी? सेना के इस रवैये के बाद उक्त अधिकारी ने कर्नाटक उच्च न्यायालय में फरियाद किया। जहां न्यायालय ने उसे यह न्याय दिलाया। यह बात समझ से परे हैं कि सेना ने यह विरोध क्या जिस युवती से सेना अधिकारी शादी करना चाहता है, उसके विदेशी होने पर किया या कोई अन्य कारण रहे? अगर सेना का यह नजरिया है कि किसी भी सैनिक को विदेशी से शादी करने से देश की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है या देश के हित में ठीक नहीं है तो राजनेताओं व नौकरशाहों सहित सभी नागरिकों के लिए भी ऐसी ही आदर्श नियम होने चाहिए। एक सैनिक के साथ विदेश...
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 लोकसभा में मतदान में जीत कर भी नैतिक दृष्टि से हारी मनमोहन सरकार  एफडीआई पर सपा-बसपा भी जनता के समक्ष बेनकाब  गांधी ने आर्थिक स्वतंतता हासिल करने के लिए किया विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार आर्थिक स्वतंत्रता के बिना देश की स्वतंत्रता अर्थहीन महात्मा गांधी जिनके नाम से कांग्रेस देश में सत्ता का विगत 65 साल से जम कर दोहन कर रही है उन्होंने अमेरिका को मानवीय मूल्यों व हिंसा का पक्षधर मानते हुए अमेरिका के बार बार आमंत्रण मिलने के बाबजूद अमेरिका में कदम रखने से मना कर दिया। उन्होंने भारतीय मूल्यों व वस्तुओं को रक्षा करने के लिए विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार का राष्ट्रव्यापी ऐलान किया। महात्मा गांधी का यह आहवान देश के स्वाभिमान व राष्ट्रीय आर्थिक हितों की रक्षा को देखते हुए थे। उनको इस बात का भान था कि किसी व्यक्ति, समाज व राष्ट्र की आजादी बिना आर्थिक स्वतंत्रता के बिना कोई अर्थ नहीं रखती है। इसी लिए उन्होंने स्वदेशी तंत्र व स्वदेशी उत्पादों को आत्मसात करने का आवाहन किया। देश के महान प्रधानमंत्री रहे लाल बहादूर शास्त्री ने रेल मंत्री के अपने कार्यकाल में एक रेल दुर्घटना...
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राजधानी गैरसेंण के लिए एकजूट हों राजनेता व आंदोलनकारी  प्रदेष की स्थाई राजधानी गैरसेंण में बनायी जानी चाहिए। इस आषय के लिए कई संगठन राज्य गठन से पहले ही से लेकर आज तक निंरतर आंदोलन कर रहे है। सत्ता में रहते हुए इस मांग पर मूक रहने वाला उक्रांद (डी) भी इस मांग के समर्थन में आंदोलन की हुकार भरने लगा है। विधानसभा सत्र के पहले दिन विधानसभा के समक्ष अनषन से अपने गैरसेंण राजधानी बनाओं आंदोलन की पुन्न षंखनाद कर रहा है। इस आंदोलन के समर्थन में उक्रांद के तमाम घटक, रक्षा मोर्चा, परिवर्तन पार्टी, उत्तराखण्ड जनता संघर्श मोर्चा, महिला मंच, पूर्व सैनिक संगठन, छात्र व कर्मचारी संगठन सहित तमाम आंदोलनकारी संगठन इस मांग के समर्थन में लामबंद है। अनैक सामाजिक संगठन भी निरंतर इस मांग को उत्तराखण्ड की अस्मिता से जोड़ कर आंदोलन कर रहे हे। दिल्ली हो या देहरादून, लखनऊ हो या मुम्बई हर जगह गैरसेंण की मांग की अलख जगाने वाले लखनऊ के अधिवक्ता दानसिंह रावल इस मुद्दे को मंजील तक पंहुचाने के लिए कमर कसे हुए है।  हालांकि सरकार ने भी गैरसेंण में विधानसभा भवन बनाने का ऐलान कुछ समय पहले यहां पर हुई मंत्रीम...
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श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति अध्यक्ष बने गोदियाल देहरादून(प्याउ)। धार्मिक दृश्टि से पूरे विष्व में हिन्दुओं के सर्वोच्च धाम श्रीबदरीकेदार नाथ धाम की सेवा संचालित श्री बदरीनाथ- केदारनाथ मंदिर समिति के अध्यक्ष पद पर श्रीनगर के विधायक गण ेष गोदियाल की नियुक्ति से कांग्रेसियों ने प्रसन्नता प्रकट की। गौरतलब है कि इस पद पर किसी गैरकांग्रेसी व्यक्ति को नियुक्ति की होने की अटकलों का काफी विरोध हो रहा था। इसी को देखते हुए प्रदेष के मुख्यमंत्री ने विवाद से बचते हुए इस प्रतिश्ठित संस्था के अध्यक्ष गणेश गोदियाल को आसीन किया। श्री गोदियाल ने श्रीबदरी केदार मंदिर समिति के अध्यक्ष पद पर नियुक्त पर प्रसन्नता प्रकट करते हुए 3 दिसम्बर को समिति के मुख्यालय जोषीमठ पंहुच कर कार्यभार ग्रहण कर लिया। उन्होंने नृसिंह भगवान के दर्शन के साथ ही नव दुर्गा मंदिर में पूजा वंदना करने के बाद कहा कि भगवान बदरीनाथ तथा केदारनाथ के अपार कृपा से उनको इस धाम की सेवा करने का मौका मिला है वे इस धाम का देष विदेष में प्रचार प्रसार करने में कोई कसर नहीं छोडेंगे और यहां पंहुचने वाले लाखों तीर्थ यात्रियों की यात्रा को म...