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कुटिल अमेरिका, पाक व चीन से सावधान रहे भारत पाकिस्तान में हाल में सम्पन्न हुए चुनाव में पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की पार्टी के नेतृत्व में सरकार बनने की संभावनाओं व उसको इमरान खान ीक पार्टी का साथ मिलने की संभावनाओं को देखते हुए जहां एक तरफ भारतीय उत्साहित है। वहीं दूसरी तरफ अपनी भारत यात्रा से पहले चीन के प्रधानमंत्री ली क्विंग भारत और चीन को दोस्ती का हाथ मिलाने के गीत गा रहे हैं। जबकि कुछ ही दिनों पहले लद्दाख क्षेत्र में भारत की सीमा  के 19 किमी अंदर कम से कम दो सप्ताह तक बलात कब्जा जमाने वाला चीन व भारत से जापान अमेरिका के साथ सांझा सैन्य अभ्यास न करने का दवाब डालने वाला चीन अब दोस्ती की गीत गा रहा है। उससे भारतीय नेतृत्व व जनता को अत्यधिक सावधानी बरतनी चाहिए। क्योंकि न केवल चीन व पाक ने अभी तक भारत विरोधी अभियान को बंद किया व नहीं उनके कार्यो से कहीं दूर-दूर तक दोस्ताना रूख दिखाई दे रहा है। यही नहीं भारत विरोधी गतिविधियों को संचालित करने के केन्द्र बन कर उभरे पाकिस्तान का सरपरस्त आका अमेरिका भी भले ही तत्कालीन परिस्थितियों के कारण भारत से दोस्ती की डींग हांक रहा हो परन...
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ऊर्जा के आड़ में निहित स्वार्थी तत्वों का बांधों से उत्तराखण्ड, तबाह करने का खतरनाक षडयंत्र ! विनाश समर्थकों को कब तक संरक्षण देगी सरकार  13 मई को धारी में जो गुण्डागर्दी बांध समर्थन के नाम पर पुलिस प्रशासन के शर्मनाक संरक्षण में धारी देवी को यहां पर बन रहे बांध में डूबने से बचाने के लिए शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे पर्यावरणविद अग्रवाल व भाजपा नेत्री उमा भारती के साथ अभद्रता व गुण्डागर्दी दिखायी गयी उससे उत्तराखण्डी संस्कृति को कलंकित हुई। इस प्रकरण से आहत उमा भारती ने इसे कम्पनी व सरकार दोनों को सीधे दोषी ठहराया। बांध बनाने वाली कम्पनी या प्रदेश के मुख्यमंत्री को उत्तराखण्ड की जरूरत हो सकती है। परन्तु उनके कार्यो को देख कर अब एक पल के लिए उत्तराखण्ड को ऐसे निहित स्वार्थी तत्वों की कोई जरूरत नहीं है। आखिर अपने संकीर्ण स्वार्थ के लिए उत्तराखण्ड को बांधों में डूबोने के लिए उतारू निहित स्वार्थी भैडियों को कब तक संरक्षण देती रहेगी सरकार? आखिर करोड़ों जीव जन्तुओं की निर्मम हत्या, हजारों लोगों को बलात विस्थापित करके और हमारे तीर्थ, धार्मिक, व जन्म भूमि को डूबों कर कब तक बांध के ...
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भारी विरोध के बाद मंत्री हरकसिंह रावत को छोड़ना पडा तराई बीज विकास निगम की  अध्यक्षता भाजपाई ही नहीं कांग्रेसी भी इस इस्तीफ से खुश, पर तबविनि के अध्यक्ष पद पर नौकरशाह की नियुक्ति से खुश नहीं कांग्रेसी देहरादून (प्याउ)। प्रदेश सरकार में कबिना मंत्री होने के बाबजूद तराई बीज विकास निगम सहित दो अन्य अध्यक्षों के पद पर भारी विरोध के बाबजूद बने रहने के लिए अनैक तर्क देने वाले कृषि मंत्री हरक सिंह रावत ने आखिरकार तराई बीज विकास निगम के पद से इस्तीफा दे ही दिया। भले ही प्रदेश सरकार में कबिना मंत्री के पद पर आसीन डा. हरकसिंह रावत द्वारा तीन विभागों के अध्यक्ष पद पर भी आसीन होने का भारी विरोध विपक्षी दल भाजपा कर रही है। भाजपा के वरिष्ठ नेता रमेश पोखरियाल निशंक ने इस विरोध की कमान संभाली हुई थी। भाजपा ने न केवल विधानसभा में अपितु राज्यपाल से लेकर उच्च न्यायालय में डा. हरक सिंह रावत को मंत्री होते हुए लाभप्रद पदों पर आसीन होने के कारण विधानसभा सदस्यता से निरस्त करने की मांग की। हालांकि सरकार को तीनों विभागों के अध्यक्ष पद पर बने रहने की अपने तेजतरार मंत्री के दो टूक हट से उनकी विधान...
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राहुल या मोदी की लोकप्रियता का नहीं अपितु प्रदेश के हितों की रक्षा का है कर्नाटक विस चुनाव  भले ही कर्नाटक की विधानसभा के चुनाव को देश में राजनैतिक दल व समाचार जगत, इसको आगामी लोकसभा चुनाव में भाजपा में प्रधानमंत्री पद के सबसे संभावित प्रत्याशी नरेन्द्र मोदी व कांग्रेस के आला नेता राहुल गांधी के लोकप्रियता के बीच मान रहे है। परन्तु यह चुनाव न तो नरेन्द्र मोदी व नहीं राहुल गांधी या देश की वर्तमान या भावी दिशा देने के लिए हो रहा है। यह चुनाव पूरी तरह से कर्नाटक प्रदेश के अपने हितों की रक्षा के लिए हो रहा है। यहां की जनता के लिए यहां पर सबसे बडा मुद्दा प्रदेश को भ्रष्टाचार की गर्त में धकेल रही वर्तमान भाजपा से बचाने का है। कर्नाटक के चुनाव में प्रदेश की जनता को सबसे बडा मुद्दा इस समय देश को भ्रष्टाचार के गर्त में धकेलने वाली कांग्रेस को सबक सिखाने से बढ़ कर उनके अपने घर यानी प्रदेश को तबाह कर रही भाजपा को सबक सिखाने का है। कर्नाटक की जनता भी जानती है कि कांग्रेस भी भ्रष्ट है। परन्तु उनके पास पहली प्राथमिका उनसे विश्वासघात करके भ्रष्टाचार की गर्त में प्रदेश को धकेलने वाली भाजप...
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भारत को नहीं है जरूरत पवन बंसल जैसे मंत्री व मनमोहन जैसे प्रधानमंत्री की प्यारा उत्तराखण्ड की विशेष रिपोर्ट- मनमोहन सिंह सरकार को सीबीआई के दुरप्रयोग के लिए सर्वोच्च न्यायालय से फटकार मिल रही हो, उनके कई मंत्री भ्रष्टाचार को संरक्षण देने के आरोप में सरकार की भद पिटा रहे हो, चीन भारत की सीमा पर बलात कब्जा करता हो, देश की आम जनता मंहगाई से त्रस्त हो और आतंकवाद भारत की एकता व अखण्डता को तबाह करने में लगे हो। देश को शर्मसार करने वाले ऐसे माहौल में भी देश का प्रधानमंत्री घोर पदलोलुपु हो कर कडे कदम उठाने के बजाय न केवल दोषी मंत्रियों का बचाव कर रहे हो अपितु खुद ही घोर पदलोलुप बन कर आंख व मुह बंद कर मोन साधे हो तो यह देश का दुर्भाग्य नहीं तो क्या। रेलमंत्री के भान्जे सीबीआई द्वारा घुस लेने के आरोप में पकडे गये हो परन्तु गांधी का नाम लेने वाली कांग्रेस ऐसे मंत्री को बर्खास्त करने के बजाय उसका शर्मनाक संरक्षण कर रही हो। सरकारी बैंक काला धन को सफेद करने में लगे हो। सीबीआई जो सर्वोच्च न्यायालय के आदेश व निर्देश पर कोयला घोटाले की जांच कर रही है उसको सही जांच करने देने के बजाय उससे अपनी...
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84 के दंगों के गुनाहगारों को मिले कड़ी सजा  पंजाब को फिर से आतंक की गर्त में झोंकने वालों पर अंकुश लगाये बादल व मनमोहन सरकार  नई दिल्ली।(प्याउ)। दिल्ली की एक अदालत द्वारा 84 के दंगों में सज्जन कुमार की संलिप्तता से मुक्त करने के खिलाफ सिखों का आक्रोष निरंतर बढ़ रहा है। सज्जन कुमार सहित तमाम दोशियों को सजा देने की मांग को लेकर सिखों ने संसद की चैखट राश्ट्रीय धरना स्थल जंतर मंतर पर अनिष्चितकालीन धरना षुरू कर दिया है। इसमें सैकडों की तादाद में सिख व अन्य राजनैतिक दलों के लोग भाग ले रहे है। जंतर मंतर पर अरविन्द केजरीवाल की आम पार्टी द्वारा धरना की षुरू किये जाने के बाद भाजपा ने भी इस आंदोलन में चढ़ बढ़ कर भाग ले रही है। आंदोलनकारियों ने न केवल संसद मार्ग पर अपितु सोनिया गांधी व प्रधानमंत्री के आवास के साथ साथ राश्ट्रपति भवन के समीप विजय चैक पर भी प्रदर्षन किया। सिखों में इस बात का गहरा आक्रोष है कि 84 के दंगो के दोशियों को आज कई वर्श बीत जाने के बाबजूद सजा नहीं मिली। जबकि दिल्ली में ही हजारों की संख्या में निर्दोश सिखों का कत्लेआम किया गया था। वहीं आम आदमी भी चाहता है क...
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मनमोहन जैसे कमजोर नेतृत्व से देश की सीमा , सम्मान व व्यवस्था खतरे में  अमेरिका के चक्रव्यूह में फंस कर तबाह होने से बाल-बाल बचे भारत व चीन 19 किमी अंदर भारतीय क्षेत्र पर 15 अप्रैल से  काबिज  चीन पीछे  हटा , पर भाारत को भी पीछे हटने के लिए किया मजबूर भारतीय भू भाग में कब्जा करने की धृष्ठता करके चीन ने भारतीयों के 1962 के जख्मों को कुरेदा  प्यारा उत्तराखण्ड की विशेष रिपोर्ट- मनमोहन व अटल जैसे कमजोर नेतृत्व का दण्ड भारत जैसे मजबूत सेना वाले देश को कितना भोगना पड़ता है। यह चीन द्वारा इसी माह भारतीय सीमा पर बलात किये गये कब्जे व कुछ वर्ष पूर्व में पाकिस्तान द्वारा भारतीय संसद -मुम्बई पर किये गये आतंकी हमले से साबित हो गया। घोर सत्तालोलुपु नेतृत्व की अक्षमता व कायरता की कीमत किसी भी देश को दशकों तक चुकानी पडती है।किसी देश के समग्र विकास के लिए मजबूत नेतृत्व ही सेना के साथ साथ जनता का भी मनोबल बनाता है और देश की सीमा, सम्मान व हितों की रक्षा भी हो सकती है। नहीं तो मनमोहन सिंह जैसे घोर पदलोलुपु नेतृत्व के कारण जहां देश में भयंकर भ्रष्टाचार की गर्त मे...