बेदर्द हुक्मरान
बेदर्द हुक्मरान
जिन्होने देष ओर जनता के
वर्तमान और भविश्य को,
अपनी सत्तालोलुपता के
खातिर रौंद कर भी कभी,
उफ तक न की हो,
ऐसे बेदर्द हुक्मरान
जनता की कराह को भी
अपनी षान के खिलाफ
गुस्ताखी मान कर
उनकी जुबान को
लाठी गोली से
रौंद कर सदा के लिए
राजबाला की तरह
लोकषाही को बचाने के
नाम पर सदा के लिए
षांत करा देते हें।
- देवसिंह रावत
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