चंगेजों की लूट पर नहीं सट्टे पर तूफान है 


हवाओं में है खबर पर जुबान पर पहरा है
चंगेजों की लूट पर नहीं सट्टे पर तूफान है ।
यहां की हर साख पर उल्लूओं का ही है डेरा 
मेरे वतन के लूटरो पर क्यों डाल रहे है पर्दा ।।
वतन के लूटेरों के लिए यहां क्यों है सबेरा 
चारो तरफ गुनाहगारों का ही लगा है मेला ।।
दफन कर दिये गये यहां चमन के सब माली
लुटा रहे है तारनहार बन बतन की खुशहाली ।
लूट रहा आबरू, तो कोई सरकारी खजाना
खामोश है जुबान पर देख रही है हर आंखे ।।
नहीं फिक्र जरा  इन्हें भूखे प्यासे बच्चों की 
सनक है केवल देश को लुटने व लुटाने की ।
राज है यहां चंगेजों का हर शहर -गांव में
मत बहा खून के आंसू बेदर्दो के कब्रिस्तान में ।।
देर नहीं अंधेर नहीं यहां महाकाल के द्वार में 
बच नहीं पायेगा कोई अपने कृत्यों के जाल से ।
उठो आवाज उठाओं, वतन बचाओ चंगेजों से 
सतपथ के वीरों की रक्षा करता हर काल से ।।

-देवसिंह रावत 
(31 मई प्रातः 9 बजे कर 11 मिनट)

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