Pages

Thursday, February 10, 2011

अटल सरकार ने पाक अध्किृत कश्मीर में क्यों नहीं फहराया तिरंगा


 लाल चैक पर तिरंगा फेहराने का प्रकरण पर
अटल सरकार ने पाक अध्किृत कश्मीर में क्यों नहीं फहराया तिरंगा
भाजपा ही नहीं केन्द्र व जम्मू कश्मीर सरकार दोषी
मेरा स्पष्ट मानना है कि अगर भाजपा गठबंध्न की अटल बिहारी वाजपेयी सरकार ने पाक अध्किृत कश्मीर में तिरंगा पफेहराने का काम किया होता तो उसको आज भारतीय भू भाग वाले कश्मीर में तिरंगा पफेहराने के लिए इतना जिद्दोजहद नहीं छेड़ना पड़ता। इसके  लिए देश की जनता से भाजपा को मापफी मांगनी चाहिए। क्योंकि देश की जनता इस मुद्दे पर पहले ही कांग्रेस को गुनाहगार मानती है। जब भाजपा के हाथ में देश की बागडोर थी तो उसने क्यों पाक अध्किृत कश्मीर को हासिल नहीं किया। क्यों धरा 370 को समाप्त नहीं किया। क्यों कश्मीर में अलगाववादी केन्द्र तहस नहस किये। अब सत्ता से बाहर आने के बाद मात्रा अपनी राजनीति चमकाने के लिए तिरंगा श्रीनगर में फेहराने की ऐलान करने से देश को क्या हासिल होगा?
यह देश का दुर्भाग्य है कि अपने ही देश में देश के राष्ट्रीय झण्डे को देश में ही पफेहराने के नाम पर जो गंदी राजनीति हुई उससे देश का  जो अपमान देश विदेश में हो रहा है उसका भान न तो श्रीनगर के लाल चैक में 26 जनवरी के दिन झण्डा पफेहरान के लिए आंदोलनरत भाजपा का ेथा व नहीं देश की कांग्रेस गठबंध्न वाली सप्रंग सरकार को। जम्मू कश्मीर की सरकार से तो राष्ट्र के सम्मान की आश करना भी ऐसे में नादानी ही होगी। यह सब देश के सम्मान की रक्षा के लिए नहीं अपितु अपनी राजनीतिक रोटियां सैकने के लिए देश के सम्मान से खिलवाड़ किया जा रहा है। देश के सम्मान के प्रतीक तिरंगे झण्डे को पफहराने से रोकने के लिए जहां दलगत विरोध् में अंध्े हो कर केन्द्र व प्रदेश सरकार ने पूरी ताकत झोंकी, वहीं भाजपा ने इस बेमोसम के इस झण्डा राग छेड़ कर एक प्रकार से राष्ट्रीय तिरंगे के अपमान में भागीदार बनी। हजारों की संख्या में सुरक्षा बलों व भाजपा के हजारों कार्यकत्र्ता आमने सामने रहे। देश का कितना आर्थिक व सम्मान की हानि हुई इसका भान न तो भाजपा को रहा व नहीं कांग्रेस को। 26 जनवरी पर इस हाय तौबा के अलावा राष्ट्र को कुछ भी हासिल नहीं हुआ।
जहां तक भाजपा के युवा मोर्चे द्वारा 26 जनवरी जम्मू कश्मीर की राजधनी श्रीनगर के लाल चैक पर देश का राष्ट्रीय झण्डा पफेहराने के ऐलान इस अभियान के औचित्य का सवाल है, उसका जवाब देश की जनता के साथ साथ बिहार के मुख्यमंत्राी नीतीश कुमार ने सही शब्दों में दिया कि इसका इस समय कोई औचित्य ही नही हे। ऐसा नहीं कि श्रीनगर में 26 जनवरी के दिन तिरंगा नहीं लहराया जाता। श्रीनगर में हर साल पूरी शान से तिरंगा पफेहराया जाता है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि आज देश में चारों तरपफ मंहगाई व आतंकवाद तथा भ्रष्टाचार से त्राही -त्राही मची है तो ऐसे समय में वे केन्द्र सरकार का दिल्ली में पुरजोर विरोध् करने के बजाय आतंकवाद ग्रसित कश्मीर में अपनी पूरी ताकत लगा कर क्या हासिल करना चाहते।
श्रीनगर में झण्डा पफेहराने के लिए अभियान चलाने वाली भाजपा से देश की जनता का एक ही सवाल है कि भाजपा को लाल चैक पर झण्डा पफेहराने की सुध् तब क्यों नहीं आयी जब उसकी सरकार केन्द्र में आसीन थी। तब उसकी सरकार को न तो श्रीनगर में सुरक्षित झण्डा पफेहराने की सुध् रही व नहीं देश की संसद पर हमला करने वाले आतंकियों के आका पाक व अमेरिका को करारा सबक सिखाने की ही सुध् रही। भाजपा अगर अपने शासनकाल में श्रीनगर कश्मीर में नहीं पाक द्वारा कब्जाये कश्मीर में झण्डा पफेहराने का अभियान अपने शासन काल के दोरान छेडती तो पूरे देश की जनता उनका साथ देती। अपने शासनकाल में तो भाजपा कारगिल ही नहीं संसद की सुरक्षा तो समय पर नहीं कर पायी। अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल में अमेरिकापरस्ती नीतियों के चलते उनको देश के सम्मान का ध्यान ही कहां रहा। यहां तक की उनके रक्षा मंत्राी जार्ज पफर्नाडिस के कपड़े तक अमेरिका में जांच के नाम पर उतराये गये परन्तु क्या मजाल की वाजपेयी सरकार ने उपफ तक की हो। तब न तो भाजपा को धरा 370 के बारे में याद रही व नहीं समान नागरिक संहिता के बारे में ही याद रहा। भगवान राम तो उनको सत्तासीन होते ही भूल गये। हिन्दी हिन्दु हिन्दुस्तान की भी याद उनको सत्तासीन होने के बाद नहीं रही। भारतीय भाषाओं के लिए संघर्ष करने वाले पुरोधओं को इन्हीं राष्ट्रवादियों के राज में खदेड़ा गया।
भाजपा का सबसे बड़ा शर्मनाक प्रवृति यही रही कि जब भी वह विपक्ष में रहती है तो उसे राष्ट्रवाद याद रहता है। सत्ता में आते ही वह सब कुछ भुल कर कांग्रेस की तर्ज पर देश के संसाध्नों की बंदरबांट करने में जुट जाती है। पूरे देश में रथ यात्रा जिस भगवान राम के मंदिर के निर्माण के नाम पर भाजपा ने चलायी उसको भी सत्ता में आते ही भुला दिया गया। जहां शहीद हुए मुखर्जी वह कश्मीर हमारा है का नारा कह कर समान नागरिक संहिता लागू करने के सब्जबाग जनता को दिखाने वाले भाजपाई सत्ता पाते ही सब कुछ भुल गये। उनको केवल याद रहा तो लाभप्रद नवरत्न उद्यमों को औनेपौने दामों पर अपने चेहतों को निजीकरण के नाम पर देना।
सुशासन व भ्रष्टाचार रहित शासन देने का भाजपा का मुखोटा आज देश की जनता के सामने कांग्रेस की तरह ही बेनकाब हो चूका है। आज भाजपा की उत्तराखण्ड की सरकार के साथ साथ कर्नाटक की सरकार के कारनामें भले ही भाजपा के नेताओं को दिखाई नहीं दे रहे हों परन्तु देश की जागरूक जनता इनके रामराज्य व सुशासन का असली चेहरा देख कर हैरान है। कांग्रेस को बेनकाब होने में दशकों लगे परन्तु भाजपा तो सत्ता के चंद सालों की गलबहियों में पूरी तरह बेनकाब हो गयी। जनता वायदों पर नहीं करनी पर विश्वास करती है।
केन्द्र सरकार व जम्मू कश्मीर सरकार ने भाजपा के इस अभियान को रौकने के लिए जो नाहक कदम उठाये उससे भी देश का अपमान हुआ। इनके नेताओं को सुरक्षा बलों की सुरक्षा में सीध्े लालचैक पर ले जाया जाता और वहां इनसे तिरंगा लहराया जाता या खुद प्रशासन इनसे पहले तिरंगा लालचैक पर पफेहरा देता। भाजपा के अब तक के कार्यकाल से सापफ नजर आता है कि उनको राष्ट्रवाद से नहीं अपनी राजनीति चमकाने से है। भाजपा को एक बात समझ लेनी चाहिए कि अगर उन्होंने केन्द्र में सत्ता में रहते हुए पाक अध्किृत कश्मीर में भारतीय झण्डा पफेहराने का ऐतिहासिक कार्य किया होता तो आज उनको भारतीय श्रीनगर में झण्डा पफेहराने के लिए आंदोलन चलाने के लिए इतना जैहाद नहीं छेडना पड़ता। कुल मिला कर देश का दुर्भाग्य यही है कि यहां की राजनैतिक दलों को देश व देश की जनता की सुध् केवल सत्ता से बाहर रहने पर ही आती है। सत्ता में रहते हुए इनको न तो देश की भान रहती है व नहीं देश की जनता का। वे सब मनमोहन व अटल की तरह सत्तालोलुपता में इतने अंध्े हो जाते हैं कि उनको अमेरिका के अलावा भारत कहीं दिखाई तक नहीं देता। शेष श्रीकृष्ण कृपा। हरि ¬ तत्सत्। श्रीकृष्णाय् नमो।

No comments:

Post a Comment