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Friday, April 29, 2011

देश में इंडिया व इंग्लिश को थोपना सबसे बड़ा भ्रष्टाचार है

देश में इंडिया व इंग्लिश को थोपना सबसे बड़ा भ्रष्टाचार है
देश में आर्थिक भ्रष्टाचार से बड़ा खतरनाक भ्रष्टाचार है देश की भाषाओं को वंचित करके गुलामी के प्रतीक फिरंगी भाषा अंग्रेजी व इंडिया नाम थोपकर भारतीय संस्कृति की जड़ों में मट्ठा डालना है। आओ देश में सबसे बड़े भ्रष्टाचार अंग्रेजी व इंडिया नाम को मिटा कर भारत की आजादी को मुक्त करें।

Wednesday, April 27, 2011

-लीबिया में अमेरिका द्वारा किये जा रहे नरसंहार पर मूक क्यों हैं पोप

-लीबिया में अमेरिका द्वारा किये जा रहे नरसंहार पर मूक क्यों हैं पोप
अमेरिका के नेतृत्व में उसके प्यादा नाटो संगठन की लीबिया में भयंकर बमबारी पर अमेरिका व नाटो देषों के धर्मगुरू पोप के मौन पर उन सभी लोगों के विष्वास पर गहरा झटका लगा जो ईसायत को षांति व प्रेम का धर्म मानते है। गौरतलब है कि अमेरिका के दवाब मै भले ही संयुक्त राश्ट्र संघ ने लीबिया पर ढुलमुल रवैये का फायदा उठाते हुए अमेरिका व उनके प्यादों ने लीबिया पर कर्नल गद्दाफी से मुक्ति के नाम पर भारी हमला कर रहे हैं। गुड़ फ्राइडे व इस्टर के पवित्र त्योहारों के अवसरों में भी जिस प्रकार से हमला किया गया। उस पर पोप का मूक रहना सभी को दुख ही प्रदान करता है। लीबिया से कर्नल गद्दाफी से मुक्ति के नाम पर व लोकषाही को लाने के नाम पर किये जा रहे हमलों को किसी भी अर्थो में सही नहीं ठहरा जा सकता हे। अगर इस मामले को जायज ठहराया जाता है तो आज पूरे विष्व में मानवता व नरसंहार के लिए अगर कोई दोशी है तो वह अमेरिका हे। आज पूरे विष्व की लोकषाही के लिए अगर कोई खतरा हे तो वह अमेरिका है। इसके बाबजूद अमेरिका की हिटलरषाही पर कोई प्रष्न तक नहीं उठा पा रहा है। क्यों ऐसी कार्यवाही संयुक्त राश्ट्र संघ अमेरिका के खिलाफ दे सकता हे। जो अमेरिका ने बलात इराक, अफगानिस्तान व अब लीबिया में खुलेआम हमला किया हुआ है। ऐसे में पूरा विष्व के हुक्मरानों ने जो षर्मनाक मौन रखा हुआ है इसी से अमेरिका की अमानवीय हमले िनरंतर पूरे विष्व को रौंदने के लिए बढ़ रहे है। लीबिया की राजधानी त्रिपोली में हुए हवाई हमले में सोमवार 25 अप्रैल को मुअम्मर गद्दाफी का एक कार्यालय ध्वस्त हो गया। घटनास्थल पर मौजूद एक लीबियाई अधिकारी ने बताया कि इस हमले में 45 लोग घायल हुए हैं जिनमें 15 की हालत गंभीर है। इस हम3लों के बारे में कहा जा रहा है कि यह हमला गद्दाफी की हत्या करने का एक प्रयास था। नाटो के विमानों द्वारा स्थानीय समयानुसार 12 बज कर 10 मिनट पर की गई यह बमबारी इतनी जबरदस्त थी कि इससे वह होटल भी थर्रा गया जिसमें विदेशी संवाददाता ठहरे हुए हैं।गौरतलब है कि नाटो शुक्रवार से ही त्रिपोली को लक्ष्य बना कर हवाई हमले कर रहा है। इस हमले के तुरंत बाद सरकारी टेलीविजन को बंद कर दिया गया। कुछ मिनट बाद प्रसारण शुरू किया गया।
आज जिस प्रकार से दबे हुए स्वर में रूस,चीन, भारत सहित कुछ देषों ने अमेरिका की इस मामले में भत्र्सना की । परन्तु कोई भी देष अमेरिका का ईमानदारी से प्रखर ढ़ग से विरोध नहीं कर पा रहा है। इसी कारण आज अमेरिका की सेना 70 से अधिक देषों की लोकषाही को रौंदने में लगी हुई है। सवाल लीबिया में लोकषाही का नहीं अपितु सवाल आज विष्व में मानवता व लोकषाही को बचाने की। आज इस पर पूरे ढंग से अमेरिका के नापाक इरादों से इस पर ग्रहण लग चूका हे। लीबिया में लोकषाही होनी चाहिए परन्तु लोकषाही के नाम पर जिस प्रकार से अमेरिका अपने पिठ्ठुओं ने पूरे विष्व की मानवता को रौंद रखा है उससे साफ लग रहा है कि अमेरिका का पूरे विष्व में कभी भी लोकषाही पर विष्वास ही नहीं रहा। अमेरिका ने हमेषा विष्व में तानाषाहों का ही संरक्षण किया। पूरे विष्व की मानवता को रौंदा। जिस अलकायदा व लादेन को आज अमेरिका विश्व शांति के लिए खतरा बता रहा है वही अमेरिका न केवल अलकायदा अपितु लादेन का संरक्षक व पोषण रहा है। वही अंमेरिका आज विश्व में आतंक की फेक्टरी बन चूका पाकिस्तान का शर्मनाक संरक्षक हैं। इस लिए आज लीबिया पर अमेरिका का हमला किसी भी तरह से लोकशाही का समर्थक होने के कारण नहीं अपितु अमेरिका के नापाक कृत्यों का विरोध करने वाले लीबिया के प्रमुख कर्नल गद्दाफी के सफाया करने के लिए ही है। चाहे अमेरिका इस मामले को कोई भी नाम दे परन्तु सच्चाइ्र यही है कि वह पूरे विश्व को अपना गुलाम बनाना चाहता है। इसके लिए बहाना चाहे कुछ भी हो।

Tuesday, April 26, 2011

कलमाड़ी से गुनाहगार है भारत पर राष्ट्रमण्डल का कलंक लगाने वाले

-कलमाड़ी से गुनाहगार है भारत पर राष्ट्रमण्डल का कलंक लगाने वाले
-कलमाड़ी पर फंदा तो शीला पर मौन क्यों?
आज देष के सम्मुख राष्ट्रमंडल खेलों में हुए भ्रश्टाचार से बढ़ कर यह सवाल है कि देष पर गुलामी के इस बदनुमा कलंक राश्ट्रमण्डल की सदस्यता व एक स्वतंत्र देष में गुलामी के बदनुमा प्रतीक राश्ट्रमण्डल खेलों का आयोजन ही क्यों किया जा रहा है। देश में भ्रष्टाचारियों से बढ़कर सबसे बड़े गुनाहगार हैं वो लोग जिन्होंने देष में गुलामी के बदनुमा प्रतीक राश्ट्रमण्डल की सदस्यता व राश्ट्रमण्डल खेलों का आयोजन
कराने वाले।
यह न केवल देष के स्वतंत्रता संग्राम सैनानियों का अपमान है इसके साथ ही यह मानवता के भी गुनाहगार हैं। जिस देष में 45 प्रतिषत से अधिक लोग गरीबी की रेखा से नीचे जीवन बसर कर रहे हों, करोड़ों लोग दो जून की रोटी के लिए मोहताज हो, षिक्षा -चिकित्सा आदि से वंचित हों तो ऐसे देष में करोड़ों लोगों के पेट पर लात मार कर चंद लोगों के मनोरंजन व देष पर गुलामी का बदनुमा कलंक लगाना है।
राश्ट्रमण्डल खेलों में हुए भ्रश्टाचार के मामले में सीबीआई के षिकंजे में जकड़े कलमाड़ी के बयानों से दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित, उपराज्यपाल तेजेंद्र खन्ना समेत पूर्व खेलमंत्री एम एस गिल व कई केंद्रीय मंत्रालयों के दस से ज्यादा बड़े अधिकारियों के लिए मुश्किल हो सकती है। केंद्र सरकार के कई अधिकारी आयोजन समिति के फाइनेंस, प्रशासन, निगरानी जैसी विभिन्न समितियों में मौजूद थे। वहीं खेलों की निगरानी करने वाली केंद्रीय मंत्रियों की समिति और प्रधानमंत्री कार्यालय तक की भूमिका पर कलमाड़ी के बयान महत्वपूर्ण होने वाले हैं। राष्ट्रमंडल खेल महासंघ अध्यक्ष के माइक फेनेल और माइक हूपर को लेकर कलमाड़ी क्या बताते हैं यह देखना दिलचस्प होगा। राश्ट्रमण्डल खेलों के आयोजन में हुए भ्रश्टाचार के आरोप में जहां सीबीआई ने अब तक जांच एजेंसियों की पकड़ से बचते रहे राष्ट्रमंडल खेल आयोजन समिति के पूर्व अध्यक्ष सुरेश कलमाड़ी पर आखिरकार सीबीआइ का शिकंजा कसने के बाद उन्है छह महीने की जांच के बाद सीबीआइ ने सोमवार 25 अप्रैल को उन्हें एक स्विस कंपनी को दिए गए 107 करोड़ रुपये ठेके में भ्रष्टाचार के आरोप में गिरफ्तार कर लिया। परन्तु वहीं इस खेल के आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही दिल्ली सरकार की भूमिका पर प्रधानमंत्री के आदेष से इन खेलों मंे हुए भ्रश्टाचार की जांच के लिए बनी षुगलू कमेटी की रिपोर्ट में कटघरे में बुरी तरह से घिरी दिल्ली सरकार की मुखिया षीला दीक्षित पर मौन रखने से लोगों की नजर में सीबीआई सहित पूरी प्रक्रिया ही संदेह की घेरे में खडी हो गयी है। दिल्ली सरकार व केन्द्रीय खेल मंत्रालय की भूमिका पर स्वयं कलमाड़ी भी खुले आम प्रष्न उठा चूके है। सबसे हैरानी की बात यह है ़कि दिल्ली सरकार व उसकी मुखिया पर षुगलू कमेटी ने काफी कठोर टिप्पणियां की है। इसके साथ जिस प्रकार से दिल्ली सरकार के एक मंत्री राजकुमार चैहान की भूमिका पर भी कांग्रेस आलाकमान सहित दिल्ली की मुख्यमंत्री ने षर्मनाक मौन रखा हुआ है, इससे लोगों को दाल ही पूरी तरह से काली नजर आ रही है। क्योंकि अगर कलमाड़ी ही नहीं इन खेलों में भ्रश्टाचार कराने वाले तमाम लोगों को सरकार को एक ही डण्डे से हांकना चाहिए। कानून की नजर में सब समान होने का जुलमा प्रत्यक्ष व्यवहार में भी दिखाई देना चाहिए। दूसरी तरफ अपने को पाक साफ दिखाते हुए कांग्रेस पार्टी ने भले ही कलमाड़ी को कांग्रेस से बाहर कर दिया हो परन्तु इससे कांग्रेस पर लगे दाग अन्य लोगों को संरक्षण देने से नहीं धूलने वाले। इस जांच से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि स्विटजरलैंड की कंपनी स्विस टाइमिंग को राष्ट्रमंडल खेलों के दौरान टाइम, स्कोर व रिजल्ट ख्टीएसआर, सिस्टम लगाने के लिए दिए गए ठेके में कलमाड़ी के शामिल होने के ठोस सुबूत मिलने के बाद उन्हें गिरफ्तार करने का फैसला लिया गया। इस मामले में गड़बड़ी के संकेत जांच एजेंसी को बहुत पहले मिल गए थे और जनवरी के पहले हफ्ते में एफआइआर भी दर्ज कर ली गई थी। पहली गिरफ्तारी 23 फरवरी को आयोजन समिति के महासचिव ललित भनोट और महानिदेशक वीके वर्मा के रूप में हुई। इसके बाद कलमाड़ी की गिरफ्तारी तय मानी जा रही थी। सीबीआइ ने सोमवार को कलमाड़ी के साथ ही आयोजन समिति के अतिरिक्त महानिदेशक खरीद, सुरजीत लाल और संयुक्त निदेशक ख्खेल, एसबी प्रसाद को भी गिरफ्तार कर लिया है।
सुत्रों टीएसआर का काम करने वाली स्विस टाइमिंग द्वारा फरीदाबाद की कंपनी जेम इंटरनेशनल के माध्यम से 23 करोड़ रुपये की रिश्वत दिए के बारे में अहम सुराग हाथ लगे हैं। गौरतलब है कि दैनिक जागरण ने तीन मार्च को श्स्विस कंपनी से कलमाड़ी को 30 करोड़ रुपये रिश्वत मिलने के संकेतश् शीर्षक खबर में बताया था कि किस तरह से स्विस टाइमिंग से मिली रकम को जेम इंटरनेशनल ने सिंगापुर स्थित एशियन एथलेटिक्स फेडरेशन को भेज दिया था, जिसके अध्यक्ष खुद सुरेश कलमाड़ी हैं। साथ ही स्विस टाइमिंग द्वारा आंध्र प्रदेश की एक कंपनी को मिले लगभग 13 करोड़ की रकम भी कलमाड़ी तक पहुंचने के संकेत मिल रहे हैं।
हिरासत के दौरान इन सभी लेन-देन के बारे में कलमाड़ी से विस्तार से पूछताछ की जाएगी। इसके साथ ही उनसे लंदन में हुए क्वींस बेटन रिले के दौरान एएम फिल्म्स व एएम कार्स व वैंस को दिए ठेके के बारे में पूछताछ की जाएगी। सीबीआइ की एक उच्च स्तरीय टीम लंदन से इस मामले में अहम दस्तावेज लेकर लौटी है। राष्ट्रमंडल खेल के केंद्र में रहे सुरेश कलमाड़ी की गिरफ्तारी पूरे प्रकरण को नया मोड़ दे सकती है। सामूहिक जिम्मेदारी की बात कर खुद को बचाने में जुटे कलमाड़ी के बयान तय करेंगे कि राष्ट्रमंडल घोटाला और किस-किस को लपेटेगा है। वैसे उनका पिछला रुख बरकरार रहा तो दिल्ली और केंद्र सरकार के कई बड़े नेताओं समेत अधिकारियों के लिए कलमाड़ी के बयान मुसीबत होंगे।
षेश श्री कृश्ण कृपा। हरि ओम तत्सत्। श्री कृश्णाय् नमो।

Tuesday, April 19, 2011

चुहा वोटर, नेता बिल्ली

चुहा वोटर, नेता बिल्ली
चुहा अगर वोटर होता तो
बिल्ली भी गिड्गिडाती
म्यांऊ म्यांऊ कर हाथ जोड़कर
बडी विनय से शीश झुकाती,
पर चुहे का वोट हासिल कर
बिल्ली कुर्सी पर जम जाती
फिर चुहे को देख कर बिल्ली
नाश्ता समझ खा जाती।।

>भारत रत्न, अच्चुत सामंत से प्रेरणा ले समाज व सरकार

भारत रत्न, अच्चुत सामंत से प्रेरणा ले समाज व सरकार
13 हजार गरीब आदिवासी बच्चों को निशुल्क शिक्षा प्रदान कर रहे हैं सामंत

चार साल की उम्र में ही जिस गरीब बच्चे के सर से बाप का साया उठ गया हो, जिसने अपनी विधवा गरीब मां का सहारा बनने, परिवार की दो जून की रोटी के लिए तथा अपनी पढ़ाई के लिए सब्जी इत्यादि बेच कर तमाम विपरित परिस्थितियों को झेलते हुए भी केमेस्ट्री से न केवल एमएससी किया अपितु उत्कल विश्वविद्यालय के महर्षि महाविधालय में अध्यापन करने के बाद, आज पूरे विश्व में सबसे बड़ा ऐसा दूरस्थ अत्याधुनिक विश्वविद्यालय ‘कैट’ स्थापित कर दिया है जिसमें उस जैसे 13000 गरीब आदिवासी बच्चों को पहली कक्षा से स्नातकोत्तर की शिक्षा होस्टल भोजनादि सहित निशुल्क प्रदान किया जाता है। अनाथ बचपन में गरीबी की थप्पेड़ो ने उनको इतना विचलित कर दिया की उन्होंने ताउम्र शादी न करने का ऐलान कर अपना पूरा जीवन ऐसे ही बच्चों को निशुल्क शिक्षा देने के लिए समर्पित कर दिया है। प्यारा उत्तराखण्ड समाचार पत्र 19 अप्रैल 1965 को स्व. अनादि चरण सामंत व श्रीमती निलिमा रानी सावंत के उडिसा के कटक जनपद के कलरबंका गांव में जन्मे असली भारत रत्न को उनके जन्म दिवस के अवसर पर शतः शतः नमन करता है।
उनके महान कार्य के लिए पूरे विश्व के नेता व सरकारें उनकी मुक्त कण्ठों से सराहना कर रही है। उनकी प्रतिभा का सम्मान करने के लिए ही अगले साल जनवरी में होने वाला राष्ट्रीय विज्ञान कांग्रेस भी उनके भुवनेश्वर में स्थित विश्व विख्यात ‘कलिंगा इंस्टिट्यूट औफ इंडस्ट्रियल टेक्नोलजाॅजी में ही होगा। 800 करोड़ रूपये की इस विश्व के दूरस्थ विश्वविघालयों में अग्रणी संस्थान की स्थापना अच्युत सामंत ने 1993 में शुरू किया। उन्होने अपने संस्थान की स्थापना दूसरी शिक्षा की दुकानों की तरह धनपशुओं के बच्चों को पढ़ाने के लिए नहीं अपितु गरीब आदिवासी बच्चों को निशुल्क शिक्षा देने के लिए की है। अपने जीवन के अपने इस संकल्प को साकार करने के लिए उन्होंने ताउम्र अविवाहित रहने की भीष्म प्रतिज्ञा की है। वे अपने पूरे जीवन को उन्होने अपने गरीबों के लिए निशुल्क शिक्षा के लिए ‘कलंगा इंस्टिटयूट आॅफ सोशल साइंसेज की स्थापना की। इसी किस संस्थान में वह गरीब बच्चों को न केवल निशुल्क पहली से स्नातकोतर आधुनिक शिक्षा देते हैं अपितु उन्होने यहां उडिसा के दूरस्थ क्षेत्रों के 62 जाति के आदिवासी गरीब बच्चों आत्म निर्भर होने के साथ साथ वोकेशनल टेªनिंग भी देते है। इन बच्चों द्वारा बनाया गया समान उनका दूसरा संस्थान किट ही खरीद लेता है। इससे हुई आय को उन गरीब बच्चों के माता पिता को भी भेजी जाती है। इस तरह सामंत के इस महान कार्य से न केवल गरीब आदिवासी बच्चों को उच्च शिक्षा मिल रही है अपितु उनके परिजनों की बदहाली भी दूर हो रही है।
उनके संस्थान में इंजीनियरिंग, एमबीए, मेडिकल सहित तमाम व्यवसायिक शिक्षा प्रदान की जाती है। जो विश्व स्तरीय तमाम आधुनिक सुविधाओं से युक्त है। परन्तु इसके बाबजूद यह महानायक अच्युत सावंत एक साधारण मकान में संतों की तरह रहते हैं। अपनी इसी लगन से आज उन्होने अपने संस्थान को गरीब आदिवासी बच्चों को निशुल्क शिक्षा देने वाला संसार का सबसे बड़ा संस्थान के रूप में स्थापित कर दिया है। आज प्रतिवर्ष उनके संस्थान में 50 हजार बच्चे शिक्षा के लिए प्रार्थना करते हैं, सभी बच्चों को प्रवेश न देने की टिश के कारण ही वे अब राज्य में इस प्रकार के कई अन्य विधालय और भी खोलना चाहते है। उनकी लगन व प्रतिभा को सम्मानित करने के लिए ही भारत सरकार ने उनको यूनिवर्सिटी ग्रांट कमिशन का सदस्य नियुक्त करके उनके अनुभवों व सुझावों से पूरे राष्ट्र को लाभान्वित करना चाहते है। देश विदेश के अनेक महत्वपूर्ण सम्मानों से सम्मानित डा अच्युत सावंत के कार्यो की मुक्त कण्ठों से सराहना करने वालों में पूर्व राष्ट्रपति डा अब्दुल कलाम जहां उनको अपने भारत 2020 के मिशन के महानायक मानते हैं, वहीं भारत में अमेरिकी राजदूत थिमोथी उनको गांधी जी के सपनों को धरती पर साकार करने वाला महानायक बताते है। पूर्व शिक्षा मंत्री अर्जुन सिंह उनको मदन मोहन मालवीय की उपाधि से नमन् करते हैं तो भारत ही नहीं पूरे विश्व के शिक्षाविद व समाज शास्त्री उनके कार्यो को देख कर गदगद है। संसार में उनकी निष्ठा व गरीबों को शिक्षा संस्कार देने के कार्यो को देख कर मन में एक ही टिश उठती है कि काश ऐसा अच्युत संसार के हर शहर में होता तो विश्व को स्वर्ग बनाने के संकल्प को साकार करने से कोई नहीं रोक पाता। आज भारत का शौभाग्य है कि यहां पर अच्युत सांवत व बिहार के सुपुर -30 के संस्थापक आनन्द कुमार जेसे महानायक है। ऐसे ही महानायकों की बदौलत आज भारत इस देश को लुटने खसोटने में लगे हुक्मरानों की चंगेजी प्रवृति के बाबजूद जीवंत है। आज देश के हुक्मरानों को जरा भी शर्म होती तो वह देश को अपने हाल पर छोड़ कर अपनी सारी सम्पति ऐसे संस्थानों को अर्पित कर राजनीति से सन्यास ले लेते। आज देश में शिक्षा की जो दयनीय स्थिति है उसके लिए इस देश के हुक्मरान काफी हद तक जिम्मेदार है। हमारे समाज में आज कई सामाजिक संगठन हैं परन्तु ये मात्र नाच गाना करने व शराब पी कर हुदडंग मचाने व देश को लुटने खसोटने वाले राजनेताओं व माफियाओं को मंचासीन कर उनके गले में माला डालने के अलावा शायद ही कोई दूसरा काम करते है। ऐसे ही सामाजिक संगठनों व देश के भ्रष्ट हुक्मरानों के कारण देश की आज ऐसी शर्मनाक स्थिति हो रखी है।
इसके बाबजूद निराशा भरे संसार में जहां चारों तरफ लुट खसोट तथा हिंसा का माहौल हो ऐसे में अच्युत सांवत जैसे महानायकों को देख कर जीवन में आशा की नयी किरण दिखाई देती है। सावंत के सफलता के इस मिशन में कई बार भारी विपतियां आयी। आर्थिक अभावों के कारण वे आत्महत्या करने जैसे विकल्प भी सोचने लगे परन्तु उनके बैक में कार्यरत एक मित्र के सहयोग ने उनको इस विचार को छोड़ कर फिर पूरे मनोयोग से अपनी मिशन को सफल बनाने में जुट गये। आज उनकी सफलता उनके लिए ही नहीं अपितु लाखों गरीब बच्चों के लिए आशा के सूर्य के रूप में चमक रही है।
ओरों को हंसते देखों मनु,
हंसो और सुख पाओ।
अपने सुख को विस्तृत कर लो
सबको सुखी बनाओ।।
सबके सुख में अपना सुख देखने वाले ही सच्चे अर्थो में महापुरूष होते हैं।वहीं सच्चे अर्थो में भारत रत्न होते है। सर्वभूत हिते रता के भगवान श्रीकृष्ण के पावन आदर्श को जीवन में सिरौधार्य करने वाले महानायक अच्युत सावंत को उनके 47 वें जन्म दिवस पर हार्दिक बधाई। मैने जैसे इस महामानव का जीवन वृत पढ़ा मेरा मन गदगद हो गया। भारत रत्न केवल वही नहीं जो भारत सरकार सम्मानित करे, असली भारत रत्न वे हैं जो सर्व भूत हिते रता की प्राचीन भारतीय संस्कृति को आत्मसात करते हुए अपना जीवन समर्पित करके लाखों लोगों के जीवन को रोशन कर दे। ऐसे महा नायक भारत रत्न व सच्चे संत को मैं एक बार फिर शतः शतः नमन् करते हुए भगवान श्री कृष्ण से प्रार्थना करता हॅू कि वे पूरे विश्व के गरीब बच्चों को पढ़ाने के लिए सक्षम हो कर विश्व में खुशहाली की नींव रखने में सफल हों। शेष श्री कृष्ण कृपा। हरि औम तत्सत्। श्री कृष्णाय् नमो।

Monday, April 18, 2011

स्वर्ग अल्प अंत दुख दाई

स्वर्ग अल्प अंत दुख दाई
दिव्य ज्ञानी लोग स्वर्ग व नरक दोनों को दुखदाई मान कर केवल प्रभु के चरणों का चिंतन करके जड़ चेतन के कल्याण हेतु निष्काम कर्म करते हें। क्योंकि वे जानते हैं कि स्वर्ग सोने की बेडियों के समान है तो नरक लोहे की बेडियों के समान। बंधन तो दोनों है। भारतीय दर्शन के अनुसार भी स्वर्ग जाने वालों के भी नेक कर्म फलों का उपभोग करने के बाद भी जीव को पुन्न जन मरण के बंधन में बंधना पड़ता है। इसी तरह नरक गामी व्यक्ति को भी अपने कृत्यों का उपभोग करने के बाद फिर जनम मरण के चक्र में फंसना पड़ता है। इसलिए तत्व ज्ञानी पुरूष कभी भी पाप पुण्य की दृष्टि से कर्म न करते हैं वे सदा जड़ चेतन को परमात्मा का स्वरूप मान कर उनकी खुशी के लिए कर्म रूपि पूजा करते है। यही निष्काम कर्म जीव को जन्म मरण के बंधन से सदा मुक्ति देता है तथा सदा के लिए श्रीचरणों में लीन हो जाता है। -श्रीकृष्ण प्रिय देव

Saturday, April 16, 2011

भारत को गुलामी से मुक्त करने के लिए आगे आयें देशभक्त

भारत को गुलामी से मुक्त करने के लिए आगे आयें देशभ>क्त
जिस देश के हुक्मरान अपने निहित स्वार्थ में अंधे हो कर देश के दुश्मन देशों के हितों की पूर्ति हेतु देश की भाषा, नाम, संस्कृति व इतिहास को रौंद रहे हों। देश के स्वाभिमान, देश की एकता-अखण्डता से निर्लज्जता से खिलवाड करें हुए मंहगाई, आतंकवाद तथा भ्रष्टाचार के गर्त में देश को धकेल कर देश की जनता का जीना हराम कर रहे हों तो ऐसे हुक्मरानों से देश हितों की आश करना भी एक प्रकार से नासमझी ही होगी।
जब ऐसे देशद्रोही ही हुक्मरान बन जाय तो वहां देशभक्त ही देशद्रोही ही बता कर दण्डित किये जाते रहेंगे और देशद्रोही व असामाजिक लोग देश के हुक्मरान बन कर देश को चंगैज व फिरंगियों से अधिक निर्ममता से देश को लुटेंगे ही। यही कारण है कि आज भारत दुनिया में एक ऐसा अभागा देश है जो आजाद होने के 64 साल बाद भी अपने नाम, भाषा, संस्कृति व इतिहास से न केवल वंचित है अपितु दुनिया में एक मात्र ऐसा देश भी हो गया है जो अपनी जड़ों में अपने आप ही मठ्ठा डाल रहा है। ऐसे समय समाजसेवा के नाम पर खड़े संगठनो सहित प्रमुख संस्थानों के महत्वपूर्ण पदों में आसीन असामाजिक तत्व देशभक्तों की उपेक्षा कर देशद्रोहियों की चरण वंदना कर समाज व देश को पथभ्रष्ट बनाते रहते है। वास्तव में भले ही देश 1947 में फिरंगियों की गुलामी से मुक्त हो गया हो परन्तु आज 64 साल बाद भी भारत आजादी से वंचित है। देश आज भी अपनी आजादी के लिए तरस रहा है। फिरंगियों से देश को नहीं यहां के चंगैजों के वंशजों को आजादी मिली देश को लुटने के लिए। देशद्रोहियों को आजादी मिली देश के संसाधनों को लुटने के लिए। हकीकत यह है कि आज भी देश अपने नाम, भाषा, संस्कृति व इतिहास से वंचित है। लोकशाही का मुखोटा भले ही देश में जबरन पहनाया गया हो परन्तु हकीकत यह है कि लोकशाही में भी लोकभाषा पर उसी फिरंगी भाषा की लगाम लगी हुई है जिससे मुक्ति के लिए देश के लाखों सपूतों ने अपनी शहादत दी थी। जिस देश में उसकी अपनी भाषा में न्याय, शिक्षा व सम्मान तीनों से वंचित रखा जाय तो ऐसे देश को आजाद कहना एक प्रकार आजादी का अपमान करना ही है। हकीकत तो यह है कि देश आज भी आजादी के लिए 1947 की तरह ही तरस रहा है। यहां पर गुलामी पहले से भी अधिक बदतर स्थिति में देश के आत्मसम्मान को रौंद रही है।

Friday, April 15, 2011

सन् 1994 के बाद से कोडियों भाव एनजीओ को लुटवायी उत्तराखण्ड की भूमि जब्त करे सरकार

सन् 1994 के बाद से कोडियों भाव एनजीओ को लुटवायी उत्तराखण्ड की भूमि जब्त करे सरकार
उत्तराखण्ड राज्य गठन के बाद यहां की जमीनों व संसाधनों को अपने दिल्ली बैठे राजनैतिक आकाओं, माफियाओं व अन्य बाहरी लोगों को करोड़ों मूल्य की जमीन कोड़ी के भाव समाजसेवी संस्थाओं व आदि जनहित के नाम से आवंटित की गयी। जो इस प्रदेश की जनता के हक हकूकों पर सीधा डाका ही नहीं इस सीमान्त प्रदेश की सुरक्षा के लिए व पर्यावरण के लिए भी गंभीर खतरा है। अब यहां की जनता सरकार से मांग करती है कि 1994 के बाद से ही यहां पर एनजीओ व आदि को कोडियों के भाव में आवंटित की गयी जमीनों पर श्वेत पत्र जारी कर उनको अविलम्ब जब्त किया जाय। प्रदेश के हक हकूकों को अपने बाप की सम्पति समझ कर लुटवाने का किसी भी सरकार को कोई हक नहीं है। जिन संगठनों का कोई सामाजिक सेवा व यहां की धरती पर कोई कार्य जनता की नजरों में नहीं है। उस भूमि को अविलम्ब जब्त की जाय। सभी नेताओं, नौकरशाहों आदि द्वारा यहां पर कोडियों के भाव ली गयी जमीनें भी जब्त की जाय।

Wednesday, April 13, 2011

अविलम्ब संसद का विशेष सत्र बुला कर पारित करे जनलोकपाल


अविलम्ब संसद का विशेष सत्र बुला कर पारित करे जनलोकपाल 
 भ्रष्टाचार से देश तबाही व आरजकता की गर्त में फंसा


भले ही केन्द्र सरकार अण्णा हजारे के आमरण अनशन के समापन पर राहत की सांस ले रही हो परन्तु उसकी नियत कहीं दूर दूर तक भ्रष्टाचार के गर्त में मरणाशन पड़े भारत को उबारने की नहीं है। अगर सरकार जरा सी भी ईमानदार होती तो इस जन लोकपाल बिल पर आमरण अनशन कर रहे समाजसेवी अण्णा हजारे के साथ हुए समझोते पर  सरकारी पक्ष का नेतृत्व कर रहे कबीना मंत्री कपित सिब्बल जन लोक पाल बिल का इस प्रकार से उपहास नहीं उडाते।  सबसे हेरानी की बात तो यह है कि न तो सरकार व  नहीं इस जन लोक पाल विल के रूप में भ्रष्टाचार के खात्मा करने के लिए आंदोलन कर रहे लोगों ने इस बात का ध्यान नहीं दिया कि इस बिल के लिए तत्काल संसद का विशेष अधिवेशन एक माह के अंदर बुला कर देश में भ्रष्टाचार के खिलाफ निर्णायक जंग अभी इसी पल से शुरू की जाय।  विधेयक का प्रारूप समिति एक सप्ताह की बैठक में ही इसको अंतिम रूप दे सकती है। क्योंकि सरकार व इस जन लोकपाल को बनाने वाली दोनो समुहों ने इस विल के अधिकांश तैयारी करी ही हुई है। इसके बाद विशेष अधिवेशन बुलाने की जरूरत क्यों नहीं समझी गयी। क्यों देश मानसून सत्र या 15 अगस्त तक का इंतजार करे। क्या तब तक देश की छाती में भ्रष्टाचार की मूंग दलने दी जाय। इस जनलोकपाल बिल को सरकार पारित करेगी इस में मुझे ही नहीं अण्णा हजारे व केजरीवाल को भी संदेह हें। क्योंकि जिस प्रकार से अण्णा हजारे के अनशन के  समापन के 48 घण्टे के अंदर ही जंतर मंतर में सैकड़ों की संख्या में एक नई राजनीति पार्टी के लोगों ने इस बिल को संविधान व लोकशाही का विरोधी बताते हुए प्रदर्शन किया। वहीं मुम्बई में भी इस बिल का विरोध में रेली निकालने का ऐलान किया जा रहा हैं इस बिल के पारित होने की आशंका से ही देश के सभी भ्रष्टाचारी आशंकित है। उन्हें डर है कि इस कानून की फांस उनके गले में एक न एक दिन जरूर आयेगा इसी आशंका को दूर करने के लिए वे भले ही सामने इसका विरोध नहीं कर पा रहे हों परन्तु अंदर से वे किसी भी कीमत पर इस विधेयक को पारित नहीं होने देने के लिए कमर कस चूके हे।
मैं इस अनशन के समर्थन में 5 अप्रैल से 9 अप्रैल तक अपने साथ जगदीश भट्ट के साथ यहां डटा रहा। हमारे साथ इस आंदोलन में सम्मलित राष्ट्रीय जनांदोलनों के राष्ट्रीय संयोजक भूपेन्द्र रावत, जगमोहन रावत, डा राजेन्द्र रवि, हुकमंसिंह कण्डारी, उषा नेगी, सतेन्द्र प्रयासी, प्रेम सुन्दरियाल, प्रताप शाही, सुरेश नौटियाल,  सहित अनैक साथी रहे। इस धरने में कई अन्य साथी भी मिले। आमरण अनशन में बैठने वालों में गोपाल राय व नरेन्द्र सिंह नेगी आदि प्रमुख थें मेरे अनैकों जानकार भी इस आंदोलन में  अनैक लोग बड़ी संख्या व बड़े उत्साह से सम्मलित हुए। मैने महसूस किया कि  सरकार के निकम्मेपन से देश की पूरी व्यवस्था जहां भ्रष्टाचार के शिकंजे में जकड़ कर मृतप्रायः हो गयी है। वहीं बेलमाग मंहगाई व आतंकबाद से भी देश की जनता पूरी तरह त्रस्त हैं। देश की जनता को लोकशाही में भी अपने जनप्रतिनिधी या सरकार किसी  के भी दल हों परन्तु देश की आम जनता को ये सरकारें किसी भी तरह से अपनी नहीं लगती हैं। ऐसी शर्मनाक स्थिति से देश को उबारने के लिए भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए जनलोकपाल कानून बनाने की मांग को लेकर 5 अप्रैल 2011 से संसद की चैखट, राष्ट्रीय धरना स्थल जंतर मंतर पर आमरण अनशन प्रारम्भ कर केन्द्रीय सरकार की चूलें ही हिला दी। ऐसे में देश के हुक्मरानों से त्रस्त जनता को भ्रष्टाचार के खिलाफ अण्णा हजारे आज का गांधी बन कर अपना सच्चा तारन हार नजर आने लगा। इसी कारण पूरे देश की जनता अण्णा हजारे के साथ  आंधी की तरह उमड़ कर खडे हो रही है। जो भ्रष्टाचार से त्रस्त जनता का आक्रोश, अण्णा हजारे के नेतृत्व की आंधी से सुमानी बन कर देश के भ्रष्टाचारी कुशासनों की लंका को मिश्र की तरह उखाड़ कर फेंकने का काम भी कर सकती है। शायद इसी आशंका से ही सरकार ने अण्णा हजारे की मांग को मानते हुए किन्तु परन्तु करते हुए इसे स्वीकार कर दिया। 42 साल में 8 बार संसद की पटल पर आ कर यह लोकपाल बिल नहीं बन पाया
अण्णा हजारे तीसरे दिन के अनशन से ही मनमोहनी कुशासन की चूलें हिल गयी। जनाक्रोश को बढ़ने की आशंका से भयभीत सरकार ने अण्णा हजारे से एक संयुक्त ड्राफटिग कमेटी बनाकर आगामी मानसून सत्र  में रखने का केवल आश्वान देना चाहती है। परन्तु अण्णा हजारे एवं उनके आंदोलनकारी साथी स्वामी अग्निवेश व अरविन्द केजरीवाल के अनुसार 7 अप्रैल को कबीना मंत्री कपिल सिब्बल से हुई वार्ता में सरकार अन्ना हजारे की इस मांग को भी मानने के लिए सहमत नहीं है कि सरकार इसके लिए सरकारी नोटिफिकेशन इस जनलोकपाल विधेयक के प्रारूप को बनाने के लिए संयुक्त ड्राफिटंग कमेटी के गठन के लिए जारी किया जाय। सरकार अंत में 8 अप्रैल को आंदोलनकारियों की सारी मांग मानने में सहमत हो गयी। मैने पहले ही भांप लिया था कि  सरकार इस लोकपाल विधेयक को मानसून सत्र के लाने का मात्र कोरे आश्वास का झांसा दे कर अण्णा हजारे का अनशन खत्म करने का षडयंत्र रच रही है। सरकार इस मामले में भी ईमानदारी से अपनी जिम्मेदारी निर्वाह करने के बजाय बला टालने के नाम पर केवल हवाई आश्वासन देने की नोटंकी कर देश को धोखा दे रही है। क्योंकि सरकार इस बात से आशंकित थी कि कहीं यह जनाक्रोश उनकी लंका को ढहा न दे। ंिजस प्रकार से यह अनशन लोकपाल विधेयक लाओ  से शुरू हुआ था वह धीरे धीरे मनमोहन व सोनिया हटाओं जनाक्रोश में तब्दील हो रहा था। सरकारी ऐजेन्सियों ने सरकार को आगाह कर दिया था कि अण्णा के इस ऐतिहासिक आमरण अनशन से जहां आज देश की भ्रष्टाचार से मृतप्राय जनता की आत्मा एक प्रकार से जागृत हो कर वह अण्णा को गांधी मान कर देश से भ्रष्टाचार का समूल नाश करने के लिए आज सड़कों पर उतरने का मन बना चूकी हे। ऐसे में अण्णा हजारे व उनके दोनों सहयोगियों स्वामी अग्निवेश व अरविन्द केजरीवाल को  भी एक बात साफ समझ लेनी चाहिए कि वह इस निर्णायक में सरकार के झांसे में आ कर मानसून सत्र के नाम पर इस मामले को टालने के बजाय अविलम्ब इसी माह संसद का विशेष सत्र बुला कर इस को कानून बनाने पर ही सरकार पर दवाब डालना चाहिए। इस विशेष सत्र की जरूरत इस बात से है कि आज देश में पूरी व्यवस्था भ्रष्टाचार से मृतप्राण सी हो गयी है। इस लिए देश की रक्षा के लिए तथा देश को बचाने के उद्देश्य से इस आपात समाधान की आज नितांत जरूरत है। इसलिए संसद का विशेष सत्र देश को बचाने के नाम पर इसी माह बुला कर लोकपाल कानून बना कर भ्रष्टाचार के शिकंजे में जकड़े दश की रक्षा की जाय। 
इससे पहले समिति गठित करने संबंधी अधिसूचना जारी करने की हजारे की मांग माने जाने के बाद लोकपाल विधेयक का मसौदा तैयार करने के लिए सामाजिक कार्यकर्ताओं और मंत्रियों की दस सदस्यीय समिति गठित करने की अधिसूचना जारी करने की मांग सरकार द्वारा मान लेने पर विख्यात सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने 98 घंटे तक चला अपना आमरण अनशन शनिवार 9 अप्रैल को तोड़ दिया लेकिन उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ और चुनाव प्रणाली में सुधार के लिए बड़ी लड़ाई लड़नी है। यहां जंतर मंतर पर 73 वर्षीय हजारे ने अपने हजारों उत्साही समर्थकों के बीच सरकार की ओर से अधिसूचना जारी करने को जनता की जीत करार देते हुए चेतावनी दी कि अगर 15 अगस्त तक लोकपाल विधेयक पास नहीं किया जाता है तो वह तिरंगा लेकर एक बार फिर आंदोलन शुरू करेंगे। भ्रष्टाचार के मुद्दे पर जारी आमरण अनशन के पांचवें दिन एक छोटी बच्ची के हाथों नींबू पानी पीकर अनशन तोड़ने के बाद हजारे ने अपने संबोधन में कहा कि यह मेरे लिए सबसे बड़ा दिन है। यह लोगों की जीत है लेकिन अभी सही आजादी प्राप्त करने के मार्ग में लम्बा रास्ता तय करना है। हालांकि उनके द्वारा दिये गये पांच नामों पर सबसे ज्यादा विरोध इस समिति में रखे गये अण्णा हजारे, केजरीवाल, व न्यायमूति हैगड़े के नाम पर नहीं अपितु पिता पुत्र की जोड़ी पूर्व कानून मंत्री शांति भूषण व उनके सुपुत्र सर्वोच्च न्यायालय के अधिवक्ता प्रशांत भूषण के नाम पर था। लोगों का मानना था कि इससे जहां वंशवाद का गलत संदेश जा रहा है तथा अन्य प्रमुख कानूनविदों राम जेठमलानी, सुब्रमण्यस्वामी, मेधा पाटेकर, किरण वेदी, आदि में से एक को भी सम्मलित किया जाना चाहिए था। कुल  मिला कर इस देश में जिस प्रकार भ्रष्टाचार से देश त्रस्त है तथा उसके विरोध में देश की जनता एक बार सड़कों में उतरने का मन बना चूकी थी तो ऐसे में उसको ठण्डे बस्ते में डालने के लिए मानसून या 15 अगस्त तक का इंतजार करना एक प्रकार से इसके मार्ग में अवरोध ही खड़ा करना है। इसके लिए संसद का विशेष सत्र बुलाना चाहिए था। भ्रष्टाचार को इस देश में एक पल के लिए भी बनाये रखने की इजाजत देना किसी भी हालत में उचित नहीं है। शेष श्री कृष्ण कृपा। हरि ओम तत्सत्। श्रीकृष्णाय् नमो। 
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Tuesday, April 12, 2011

अण्णा के चमत्कार से फट्टी सी रह गयी अमेरिका सहित विश्व की आंखे


अण्णा के चमत्कार से फट्टी सी रह गयी अमेरिका सहित विश्व की आंखे
आज अमेरिका सहित पूरा विश्व के लोग भारत के नये जननायक अण्णा हजारे को किसी आश्चर्य से कम नहीं मान रहे है। पूरा विश्व यह नहीं समझ पा रहा है कि जिस प्रकार भ्रष्टाचारी व निरंकुश हुक्मरानों को झुकाने में मिश्र, अरब देशों व लीबिया में इतना खुन खराबा करने के बाद भी ऐसी महत्वपूर्ण सफलता नहीं मिली, वह सफलता भारत में मात्र 98 घण्टे के आमरण अनशन के बाद 72 वर्षीय समाजसेवी अण्णा हजारे ने पूरी सरकार को झुका कर हासिल कर दिया। इस विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र की जनविरोधी सरकार को झुकाने के लिए किसी भी आंदोलनकारी को एक गोली व बंदुक या टैंक या लाठी नहीं चलानी पड़ी। अभी तक गांधी के रूप में भारत की इस अदभूत आत्मशक्ति से परिचित शेष विश्व इस को किसी अदभूत घटना से कम नहीं मान रहा है। पूरे विश्व में जिस प्रकार से भ्रष्टाचार का आतंक मचा हुआ है। सरकारें जन विरोधी व लोकतंत्र विरोधी हो रही है, ऐसी स्थिति में संसार को मार्ग दर्शन देने के लिए शंाति के मार्ग पर एक नयी राह दिखाने का काम भारत के एक साधारण सा समझा जाने वाले संत अण्णा हजारे ने किया।
 ‘संभवामी युगे युगे...के वचन को मेरे जैसे साधारण व्यक्ति को आगे करके परमात्मा ने साकार किया। यह सब परमात्मा की अपार कृपा है नहीं तो यह काम करना मेरे बस मैं कहां है’। यह कथन देश की सरकार के अपने आमरण अनशन से  घुटने  टिकाने वाले देश के नये जननायक अण्णा हजारे ने उस समय कहे जब वे संसद की चैखट पर मिली अपनी ऐतिहासिक सफलता के बाद पहली बार महाराष्ट्र स्थित अपने गांव रालेगान सिद्धी पंहुच रहे थे। उनके साथ आईबीएन 7 के संवाददाता ने जब उनकी ऐतिहासिक सफलता पर उनसे प्रश्न किया तो उसके उत्तर में अण्णा जी ने दो टूक शब्दों में उपरोक्त उत्तर दिया, इसी उत्तर से उनकी महानता व उनके प्रभु के अनन्य शक्ति को आत्मसात करने का पता चलता है।
इस 98 घण्टे के आमरण अनशन की बदौलत ही देश में गांधी व जयप्रकाश नारायण से जनजनायकों की पंक्ति में रखे जाने वाले महानायक अण्णा हजारे का जीवन भी आजकल के आधुनिक किसी संत व महात्माओं को भी  सीख देने वाला नहीं है।  भले ही वे उनको आज के शिक्षित लोग अल्प शिक्षित व साधारण ड्राइवर समझ कर हल्के में लें परन्तु उन्होने अपने जीवन को लोकोपकार व अन्याय के खिलाफ सदैव समर्पित करने का जो कार्य किया  उसी ने ही उनको देश के महान संतों से उपर व विलक्षण जननायकों की श्रेणी में धु्रव तारे की तरह स्थापित कर दिया है।
भारतीय जनमानस में महानायक की तरह उभरे अण्णा हजारे ने देश की रक्षा के लिए सेना में 1960में  भर्ती हो कर शुरू किया था। सेना में वे ड्राइवर के पद पर कार्यरत रहे। चीन के साथ यु( में शामिल रहे अण्णा हजारे का असली नाम किसन बाबुराव हजारे है, जिन्हें लोग अब अण्णा हजारे के नाम से जानते हे।
1975 अण्णा हजारे ने अपने गांव में स्वैछिक सेवा निवृति के बाद रहने लगे। परन्तु उन्होंने शादी न करने का फेसला करते हुए मंदिर को अपना रहने का ठोर बनाया। आज उनके पास न तो कोई सम्पति है व नहीं कोई बैंक एकाउन्ट। पूरे गांव नहीं क्षेत्र के विकास के बाद उन्होंने यहां पर भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए अपना आंदोलन प्रारम्भ कर दिया।  उनके अनशनों से महाराष्ट्र की राजनीति में कई मंत्रियों व अधिकारियों को इस्तीफा देना पड़ा। अण्णा के क्रांतिकारी पहल से इस क्षेत्र की काया ही पलट गयी। अण्णा किसी भी राजनीतिक पार्टी से न जुड कर सभी भ्रष्टाचारियों को निर्ममता से दूर करने के लिए तीन दशक से संघर्ष करते रहे, उनके निशाने पर एनसीपी, कांग्रेस, भाजपा-शिवसेना के नेता तथा नौकरशाह रहे। उनके जीवन पर स्वामी विवेकानन्द, आचार्य विनोवा भावे, महात्मा गांधी व महान संत ज्ञानेश्वर का गहरा प्रभाव पड़ा।  उनके आमरण अनशन से 1995 में राज्य के दो कबीना मंत्रियों को इस्तीफा देने के लिए मजबूर होना पड़ा। सन् 2003 में भी चार मंत्रियों के खिलाफ उन्होंने आमरण अनशन उनके विरोधियों ने उनको मारने के लिए सुपारी तक दी। इसका खुलाशा होने पर इस प्रकरण पर राजनेताओं का भारी विरोध हुआ। वर्तमान समय में उनके अनशन के समर्थन में उनके कट्टर विरोधी शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे ने भी खुला समर्थन दिया।
अण्णा हजारे के समर्थन में उनके अनशन तक उनका विरोध करने वाली राकांपा भी अब जनभावनाओं के आगे झुकते हुए उनको देश का नायक मान रही है।
जहां तक अण्णा को गांधी या जयप्रकाश नारायण के समकक्ष मानने की तो इसका सबसे बड़ा प्रतिकार स्वयं अण्णा हजारे ने ही किया। उन्होंने कहा कि उनका गांधी जी से कहीं भी तुलना नहीं की जा सकती वे अपने आप को अल्प शिक्षित तथा गांधी जी को उच्च शिक्षित मानते हैं। विनम्र व दृढ़ इच्छा शक्ति के महानायक अण्णा हजारे ने कहा कि महात्मा गांधी महान चिंतक, युग पर्वतक के साथ साथ उच्च शिक्षित थे।
भगवान पर अटूट विश्वास रखने वाले अण्णा हजारे ने अपने गांव पंहुचने वाले दिन अपने मंदिर में अपने भगवान की चरणों में नमन् करने से पहले कुछ भी ग्रहण नहीं किया।
आज उनके विरोधी भले ही उनको गांधी मानने पर इतराज करते हुए कहते हैं कि जब महाराष्ट्र में उत्तर भारतीयों पर गुण्डे अत्याचार कर रहे थे या मुम्बई व गुजरात मंें दंगे हो रहे थे तो अण्णा मूक क्यों रहे। अगर उनमें गांधी का एंकाश भी होता तो वे तुरंत इन दंगों व निरपराध लोगों को मारने वालों का प्रतिकार करने में आगे आते।
यह सही है अण्णा हजारे गांधी जैसे भले न हो परन्तु आज के युग में जब देश के हुक्मरान देश को अपने निहित स्वार्थों व पदलोलुपता के लिए दाव पर लगा रहे हों। चारों तरफ भ्रष्टाचार व हिंसा का तांडव मचा हो, ऐसे में अण्णा जैसे जननेता आगे आ कर आमरण अनशन देश को बचाने के लिए करे तो देश की जनता उनमें गांधी या जय प्रकाश नारायण जैसा तारन हार समझले तो इसमें जनता की बड़ी भूल नहीं होगी। यह सही है कि गांधी का दर्शन व संघर्ष बड़ा महान था परन्तु गांधी हो या जय प्रकाश सभी भारतीय दर्शन के एक सिपाई मात्र रहे, इसी भारत की धरती में कब भगवान किसे गांधी बना दे व कब किसे अण्णा यह सब उसकी ही माया है। एक बार फिर विश्व में अन्याय व अत्याचार के खिलाफ सदैव कुरूक्षेत्र में संघर्षरत रहने का अमर घोष करने वाले भगवान श्रीकृष्ण को इस बात के लिए नमन् करता हॅू कि उन्होंने अपने वचनों को अण्णा के द्वारा साकार करा कर निराश हुए भारतीयों व विश्व को सही दिशा दी।

पर्यावरण व देश की सुरक्षा के लिए खतरनाक है सीमान्त क्षेत्र में बस्ती बसाना


पर्यावरण व देश की सुरक्षा के लिए खतरनाक है  
सीमान्त क्षेत्र में बस्ती बसाना

किसके लिए बसायी जा रही है बदरीनाथ के समीप यह नगरी
प्रदेश गठन के बाद यहां पर दी गयी एनजीओ तमाम भूमि सौदों को रद्द करे
बदरीनाथ केदारनाथ समिति बदरी नाथ और गौरकुण्ड के पास जिस अस्थाई नगरी को बसाने जा रही है उसकी भनक लगते ही लोगों के कान खडे हो गये।इस अस्थाई नगरी बसाने की योजना का खुलाशा तब हुआ जब श्री बदरीनाथ मंदिर समिति के अध्यक्ष अनुसूया प्रसाद भट्ट ने गत सप्ताह  बद्रीनाथ और गौरीकुंड के पास एक अस्थायी नगरी बनाने का ऐलान किया। उनके अनुसार इसके लिये निविदा जारी करने की प्रक्रिया भी शुरू की जा चुकी है। भट्ट ने बताया कि इस अस्थायी नगरी में करीब 2000 लोगों को समायोजित किया जायेगा, इसके लिए गत दिनों मंदिर समिति की एक बैठक में यह फैसला किया गया है। श्री भट्ट ने बताया कि  कहा कि अगले महीने से शुरू होने वाले चारधाम यात्रा के दौरान ही मुफ्त में भोजन और आवास की व्यवस्था की जायेगी। उत्तराखंड में बद्रीनाथ-केदारनाथ समिति ने तीर्थयात्रा पर आये गरीब लोगों को मुफ्त में भोजन और आवास मुहैया कराने का फैसला किया है। पर्यावरण व धार्मिक महत्व की दृष्टि से इस क्षेत्र में किसी प्रकार की नयी बस्ती बसाना एक प्रकार से इसके स्वरूप से खिलवाड़ ही होगी। वैसे भी यह स्थान न केवल सनातन धर्मावलम्बियों के लिए अपितु पर्यावरण की दृष्टि से बहुत ही संवेदनशील है। इस क्षेत्र में किसी प्रकार का निर्माण या स्थाई या अस्थाई नगरी बसाना एक प्रकार से किसी खतरे से कम नहीं है। वैसे भी उत्तराखण्ड के लोग सरकार की इस प्रकार की योजनाओं से पहले से उद्देल्लित हे। प्रदेश के लोग जनसंख्या के आधार पर हुए विधानसभाई परिसीमन के बाद ऐसे मामलों को बहुत ही बारिकी से नजर रखे हुए है। वे प्रदेश की स्थाई राजधानी गैरसैंण के अलावा पर्वतीय क्षेत्र में कहीं भी किसी और नगरी बसाने की किसी भी कीमत पर इजाजत किसी सरकारों को नहीं ंदेगे। खासकर जिस प्रकार से राज्य गठन के बाद उत्तराखण्ड की जमीन व घाटियों को समाजसेवा के नाम पर पंजीकृत बड़े नेताओं के चेहतों को कोडियों के भाव में आवंटित करके लुटवा दि गयी हो। अब लोगों को जैसे जैसे इसकी भनक लग रही है। यहां पर विकास के नाम पर बन रही योजनाओं के लिए घाटियों को चंद लोगों के हवाले कर स्थानीय लोगों के हक हकूकों पर सेंध लगा दी गयी हो। ऐसे में अब पावन बदरीनाथ धाम व गौरीकुण्ड के समीप बनायी जाने वाली अस्थाई नगरी के बारे में लोगों के कान खडे होने स्वाभाविक है। सरकार की इस योजना की आड में यहां पर किन लोगों का पोषण किया जा रहा है।  गौरतलब है कि पहले भी बदरीनाथ  क्षेत्र में जैन मंदिर बनाने का प्रयास किये गये जिसको जनता की जागरूकता से असफल किया गया। इसके बाद इस योजना को ठण्डे बस्ते में डाल दिया गया। 
अब सरकार जिस अस्थाई नगरी को बसा रही है उसके पीछे किन्ही लोगों को यहां पर काबिज कराने की योजना तो नहीं है। सरकार की इस योजना पर उत्तराखण्ड की जनता को करीबी से नजर रखना होगा। क्योंकि जिस प्रकार राज्य गठन के बाद विकास के नाम पर यहां की जमीन व प्राकृतिक संसाधनों को निहित स्वार्थी व बाहरी लोगों को लुटवाया जा रहा है, उसको देखते हुए प्रदेश की जनता को जागरूक होना जरूरी है। वैसे भी श्री बदरीनाथ धाम प्रदेश के ही नहीं देश का संवेदनशील सीमान्त क्षेत्र में है। यहां  पर यकायक 2000 लोगों की विशाल बस्ती बसने से एक तो यहां के पर्यावरण को असंतुलित कर देगा दूसरा इस क्षेत्र की सामाजिक समरसता को बदल कर रख देगा। इन तमाम आशंकाओं को देखते हुए सरकार को चाहिए कि वे उत्तराखण्ड के किसी भी पर्वतीय क्षेत्र में इस प्रकार की किसी भी संवेदनशील योजना को न बनाये जो यहां के सामाजिक ताना बाना व प्राकृतिक संतुलन को पूरी तरह से बदल कर रख दे। ऐसे शहर बसाने के बाद यहां पर लोगों को आसाम व कश्मीर के लोगों की तरह अपने ही क्षेत्र में अल्पसंख्यक होने का खतरा भी मंडराने लगेगा। प्रदेश की जनता को चाहिए कि वे सरकार से राज्य गठन के बाद प्रदेश की भूमि को किन किन लोगों को औने पौने दामों में आवंटित हुए उसकी सूचि तत्काल सार्वजनिक करे। 
आने वाली सरकारें किसी की भी हो परन्तु जनता को चाहिए कि वे तमाम राजनेताओं पर दवाब डाले की राज्य गठन के एक दो साल पहले व गठन  के बाद प्रदेश की भू सम्पति के इस प्रकार के तमाम बंदरबांट को रद्द किया जाय। यहां पर जिस प्रकार से राज्य गठन के बाद खासकर देश के नेताओं के रिश्तेदारों व उनके चेहतों की तथाकथित सामाजिक संगठनों को उत्तराखण्ड की हजारों एकड़ जमीन को कोडियों में लुटायी गयी, उस सूचि का सार्वजनिक होना जरूरी है। क्योंकि इन में से अधिकांश समाजसेवी लोगों का इस प्रदेश में इससे पहले कभी एक पल के लिए समाजसेवा करने का इतिहास तक नहीं है। राजनेताओं व नौकरशाहों की मकड़जाल में फंसा उत्तराखण्ड आज इस प्रकार से लुट रहा है उस पर यहां के हर जागरूक आदमी को बहुत ही गंभीरता से नजर रखना होगा। नहीं तो आने वाले समय में उत्तराखण्ड के लोग उत्तराखण्ड में ऐसे ही असुरक्षित व अल्पसंख्यक हो जायेंगे जिस प्रकार असम व कश्मीर में वहां के मूल निवासी। क्योंकि प्रदेश की सत्ता में आसीन हुक्मरानों ने अपनी अंधी सत्ता लोलुपता के लिए प्रदेश के संसाधनों की जो शर्मनाक बंदरबांट की उसका खुलासा यहां पर बांटी गयी सूचि से स्वयं ही हो जायेगा। इस जमीनों को आने वाले समय में प्रदेश की सरकारों को वापस ले कर प्रदेश के हितों की रक्षा करनी चाहिए। तथा किसी भी तर्क के आड में सीमान्त क्षेत्र बदरीनाथ में नया शहर बसाने की इजाजत नहीं दी जानी चाहिए। क्योंकि इससे यहां का पर्यावरण सहित सामाजिक ताना बाना के साथ देश की सुरक्षा के लिए भी गंभीर खतरा उत्पन्न हो सकता है। सीमान्त क्षेत्र में सेना के अलावा किसी प्रकार की बस्तियां बसाने पर हर हाल में रोक होनी चाहिए।  शेष श्रीकृष्ण कृपा। हरि ओम तत्सत्। श्री कृष्णाय् नमो।

Sunday, April 10, 2011

विदेश में पैदा होने मात्रा से करना एक प्रकार से भारतीय संस्कृति का अनादर करना ही है।

भारतीय संस्कृति कभी स्व व पर की लडाई की आज्ञा नहीं अपितु सदैव सत व असत के संघर्ष की आज्ञा देती है। महाभारत ही नहीं अपितु राम रावण संग्राम भी केवल सत असत की लड़ाई पर लडा गया। कौन कहां, किस जाति, ध्र्म, लिंग, स्थान, रंग या जीव में पैदा हो गया यह ईश्वर की इच्छा है। इस आधर पर किसी को श्रेष्ठ व किसी को तुच्छ मानने वाले ईश्वर के ही नहीं अपितु भारतीय संस्कृति के विरोध्ी होते है। सोनिया का विरोध् उसके गुण व दोष के आधर पर किया जा सकता है परन्तु उसका विरोध् विदेश में पैदा होने मात्रा से करना एक प्रकार से भारतीय संस्कृति का अनादर करना ही है।

नक्कारे हुक्मरानों के कारण वरदान साबित हो सकने वाली जनशक्ति बनी अभिशाप


नक्कारे हुक्मरानों के कारण वरदान साबित हो सकने वाली जनशक्ति बनी अभिशाप
भारत की जनसंख्या 1.21 अरब
उत्तराखण्ड की हुई 1.67करोड़
ॅभारत के महापंजीयक व जनगणना आयुक्त सी. चंद्रमौली ने सन्2011  की जनगणना की घोषणा करते हुए देश की  जनसंख्या अब 1 अरब 21 करोड़ हो गया है। तथा देश की राजधानी दिल्ली की जनसंख्या 1 करोड़ 67 लाख से अधिक हो गयी है तथा देश के पर्वतीय राज्य उत्तराखण्ड प्रदेश की जनसंख्या 10116752 हो गयी है। संसार में जिस महान जनशक्ति का सही सदप्रयोग करके आज चीन विश्व को अपना गुलाम बनाने को तुले हुए स्वयं भू विश्व सम्राट अमेरिका के बर्चस्व को खुली चुनौती देने की स्थिति में है। उसी अपार जनशक्ति की घोर उपेक्षा करके विश्व के चीन के बाद के सबसे बड़े आबादी वाले देश भारत में यह वरदान साबित हो सकती जनशक्ति अभिशाप सी बन गयी है। देश के हुक्मरानों के गैरजिम्मेदार व राष्ट्रघाती निर्णयों के कारण आज देश के आम आदमी जहां मंहगाई, भ्रष्टाचार व आतंकी हिंसा से पीड़ित है। वही आधी सी अधिक जनता शिक्षा, चिकित्सा व मानक जीवन जन सुविधाओं से वंचित है। देश की सत्ता में काबिज नेता, नोकरशाह व दलालों के नापाक गिरोह के कारण देश की सारी सम्पति जो देश के विकास के काम में आ सकती थी वह विदेश व देश में काले धन के रूप में छुपी हुई है। देश के हुक्मरान खेल तमाशों में ही मस्त है उनको देश की दयनीय स्थिति से कोई लेना देना नहीं है। देश के आधे से अधिक लोग गरीबी की रेखा के नीचे जीवन यापन करने में विवश हैं। आज जहां आस्ट्रेलिया से लेकर यूरोप, जापान सहित विश्व के कई विकसित देश अपनी जनसंख्या दर में बढ़ोतरी न होने के कारण परेशान है वहीं भारत अपनी विश्व में सबसे अधिक युवा, तकनीकी, शिक्षित जनशक्ति का सदप्रयोग कर देश के विकास की मजबूत नींव तक रखने की हिम्मत तक नहीं जुटा पा रहा है।वहीं  देश की जनसंख्या विगत दस सालों में 17.64 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। हालांकि यह आजादी के बाद की तमाम जनगणनाओं की दृष्टि से सबसे कम बढ़ोतरी हुई। इसमें गत जनगणना के मुकाबले 4 प्रतिशत कम बढ़ोतरी हुई। इस प्रकार जहां जनसंख्या के आधार पर उत्तराखण्ड देश का 20 वां तथा साक्षरता की दृष्टि से देश का 17 वां राज्य बन गया है। केंद्रीय गृह सचिव जीके पिल्लै और भारत के महापंजीयक सी. चंद्रमौलि ने बताया कि इस जनगणना में देश के 35 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के सभी 640 जिलों को शामिल किया गया । इस जनगणना पर 2200 करोड़ रूपये का खर्च आया। वहीं घर-घर जाकर देश के हर नागरिक को जनगणना के कार्यक्रम में करीब 27 लाख कर्मचारी लगाए गए थे। देश की इस 15वीं जनगणना का यह कार्यक्रम दो चरण में पूरा किया गया। पहला चरण अप्रैल से सितंबर, 2010 और दूसरा चरण 9 से 29 फरवरी, 2011 के बीच संपन्न हुआ।
वहीं उत्तराखण्ड राज्य की जनगणना के आंकडों पर प्रकाश डालते हुए प्रदेश की निदेशक स्नेहलता शर्मा ने गत सप्ताह सन् 2011 की जनगणना का ऐलान करते हुए बताया कि वर्ष 2001 में उत्तराखंड की आबादी 8489349 थी, जो वर्ष 2011 में 16 लाख से अधिक बढ़कर 10116752 हो गयी है। इसमें पुरूषों की संख्या 5154178 और महिलाओं की आबादी 4962574 है। इन आंकड़ों के अनुसार प्रदेश के पर्वतीय जनपदों की तुलना में मैदानी जनपदों देहरादून, नैनीताल, हरिद्वार और उधमसिंहनगर जिलों की आबादी में अच्छी खासी बढ़ोत्तरी हुई है।  जनगणना के अनुसार उत्तराखंड में साक्षरता दर में भी 8प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। वर्ष 2001 में यह 71 प्रतिशत थी, जो अब बढ़कर 79.63 फीसदी हो गयी है।प्रदेश में लिंगानुपात में  अल्मोड़ा जिले ने देश भर में दूसरा स्थान हासिल किया है,  लिंगानुपात में अल्मोड़ा जिला पूरे देश के लिए प्रेरणादायक बनकर उभरा है। यहां पर प्रति एक हजार पुरुषों पर 1142 महिलाएं हैं। साक्षरता दर में जहां महिलाओं का अनुपात 60 फीसदी से भी कम था, वहीं अब यह आंकड़ा 70 फीसदी पार कर गया है।  देश में साक्षरता की दृष्टि से 74 फीसदी आबादी साक्षर हो चुकी है। लेकिन शर्मनाक बात है कि इस दौरान गर्भ में बच्चियों की हत्या के कारण छह साल तक की आबादी में इस समय एक हजार लड़कों के मुकाबले  गत जनसंख्या में 927 से घटकर 914 लड़कियां ही हैं।
उत्तर प्रदेश 20 करोड़ आबादी के साथ अब भी पहले स्थान पर बना हुआ है। इस अकेले राज्य की आबादी ब्राजील से ज्यादा है। 11.23 करोड़ के साथ महाराष्ट्र दूसरे और 10.38 करोड़ के साथ बिहार तीसरे नंबर पर है। सबसे कम आबादी लक्ष्यद्वीप की है। यहां कुल 64,429 लोग हैं।
वर्तमान जनगणना के अनुसार प्रति हजार पुरुषों के मुकाबले महिलाओं का औसत पहले के 933 के मुकाबले बढ़ कर 940 हो गया है। सिर्फ बिहार, गुजरात और जम्मू-कश्मीर ही ऐसे तीन राज्य रहे, जिनमें महिलाओं का औसत कम हुआ है।  पिछली जनगणना के 927 से भी घट कर 914 हो गया है। छह साल तक की आबादी में लड़कियों के औसत के मामले में हरियाणा और पंजाब 830 और 846 के औसत के साथ सबसे निचले पायदान पर हैं।
जनगणना के ताजा आंकड़ों के मुताबिक देश में सात साल से ऊपर की आबादी में 74 फीसदी लोग अब साक्षर हो चुके हैं। 2001 में हुई जनगणना के दौरान देश भर में सिर्फ 64.83 फीसदी लोग ही साक्षर पाए गए थे। साक्षरता के मामले में बिहार और अरुणाचल प्रदेश 63.82 और 66.95 फीसदी साक्षरता के साथ सबसे निचले पायदान पर हैं। जबकि 93.91 फीसदी के साथ केरल अव्वल है। तेजी से साक्षर बनने के मामले में महिलाओं ने पुरुषों से बाजी मारी है। जहां पुरुषों में साक्षरता दर 6.88 फीसदी ही बढ़ी, वहीं महिलाओं में यह 11.79 फीसदी की दर से बढ़ी।
 अगर देश के हुक्मरान देश की जनसंख्या का सही ढ़ग से सदप्रयोग करते तो आज विश्व के तमाम बाजारों में चीन के साथ साथ भारत के उत्पादों का बर्चस्व भी बना रहता।  हमारे हर हाथ को काम मिलता व हम विश्व में अपना महत्वपूर्ण योगदान देने का ही काम नहीं करते अपितु विश्व को सही दिशा देने का भी काम करते।
शेष श्रीकृष्ण कृपा। हरि ओम तत्सत्। श्री कृष्णाय् नमो।

Saturday, April 9, 2011

लोकपाल बिल पर संयुक्त कमेटी में रामजेठमलानी से परहेज क्यों?



बाबा रामदेव का ही नहीं अपितु पूरे देश की लोकशाही मूल्यों व भ्रष्टाचार के खिलाफ निष्पक्ष लोगों का विचार है कि लोकपाल बिल पर संयुक्त कमेटी में अन्ना हजारे की तरफ से बाप बेटे दोनों को रखने के बजाय जन आंदोलनों की नायिका मेघा पाटेकर, स्वामी अग्निवेश या अन्य किसी महत्वपूर्ण न्याय व भ्रष्टाचार के मामलों के खिलाफ लडने वाले योग्य व्यक्ति को रखना चाहिए। फिर योग्य अधिवक्ता रामजेठमलानी से परहेज क्यों? 


उत्तराखण्ड से भ्रष्टाचार के खिलाफ राष्ट्र व्यापी अभियान का शुभारंभ करे अण्णा हजारे


उत्तराखण्ड से भ्रष्टाचार के खिलाफ राष्ट्र व्यापी अभियान का शुभारंभ करे अण्णा हजारे
विश्व संस्कृति की पावन गंगोत्री व पतित पावनी गंगा-यमुना की पावन अवतरण धरती उत्तराखण्ड की पोने दौ करोड़ जनता आधुनिक गांधी अण्णा हजारे से पुरजोर अपील करते हैं कि वे भ्रष्टाचार के खिलाफ अपना राष्ट्र व्यापी अभियान का शुभारंभ भ्रष्टाचार से आकण्ठ मर्माहित उत्तराखण्ड से करके जनता को भ्रष्टाचार से मुक्ति प्रदान करे।  क्योंकि यहां भाजपा-संघ का आला नेतृत्व के शर्मनाक संरक्षण से ही सत्तासीन प्रदेश सरकार के भ्रष्टाचार पर जिस प्रकार से देश की अग्रणी मीडिया,  पक्ष विपक्ष सहित पूरा तंत्र ही नपुंसकों की तरह मूक है।

Friday, April 8, 2011

देश को गांधी सा जननायक अण्णा हजारे मिल गया


जननायक अण्णा हजारे
देश को गांधी सा जननायक अण्णा हजारे  मिल गया 
संसद की चैखट, राष्ट्रीय धरनास्थल जंतर मंतर पर 5 अप्रैल से आमरण अनशन करके देश की आम जनता के हितों को रौंदने वाली प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की निकम्मी सरकार को  जनलोकपाल विधेयक को स्वीकार करने के लिए मजबूर करने वाले देश के आधुनिक गांधी अण्णा हजारे को शतः शतः नमन्। अब देश को गांधी व जयप्रकाश नारायण के बाद एक ऐसा जननायक मिल गया जो जनविरोधी सरकारों की नाकों में नकेल डालने का काम करेंगे। आशा है अण्णा हजारे देश के साथ साथ उत्तराखण्ड की भ्रष्ट सरकार से भी जनता को मुक्ति दिलायेंगे।

Thursday, April 7, 2011

जन लोकपाल कानून बनाने के लिए अविलम्ब संसद का विशेष सत्र बुलाया जाय



सरकार नहीं ंजागी तो अण्णा के नेतृत्व की आंधी से जनाक्रोश सुमानी बन जायेगी
जन लोकपाल कानून बनाने के लिए अविलम्ब संसद का विशेष सत्र बुलाया जाय
 सरकार के निकम्मेपन से देश की पूरी व्यवस्था जहां भ्रष्टाचार के शिकंजे में जकड़ कर मृतप्रायः हो गयी है। वहीं बेलमाग मंहगाई व आतंकबाद से भी देश की जनता पूरी तरह त्रस्त हैं। देश की जनता को लोकशाही में भी अपने जनप्रतिनिधी या सरकार किसी  के भी दल हों परन्तु देश की आम जनता को ये सरकारें किसी भी तरह से अपनी नहीं लगती हैं। ऐसी शर्मनाक स्थिति से देश को उबारने के लिए भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए जनलोकपाल कानून बनाने की मांग को लेकर 5 अप्रैल 2011 से संसद की चैखट, राष्ट्रीय धरना स्थल जंतर मंतर पर आमरण अनशन प्रारम्भ कर केन्द्रीय सरकार की चूलें ही हिला दी। ऐसे में देश के हुक्मरानों से त्रस्त जनता को भ्रष्टाचार के खिलाफ अण्णा हजारे आज का गांधी बन कर अपना सच्चा तारन हार नजर आने लगा। इसी कारण पूरे देश की जनता अण्णा हजारे के साथ  आंधी की तरह उमड़ कर खडे हो रही है। जो भ्रष्टाचार से त्रस्त जनता का आक्रोश, अण्णा हजारे के नेतृत्व की आंधी से सुमानी बन कर देश के भ्रष्टाचारी कुशासनों की लंका को मिश्र की तरह उखाड़ कर फेंकने का काम भी कर सकती है। 
अण्णा हजारे तीसरे दिन के अनशन से मनमोहनी कुशासन की चूलें हिल गयी। जनाक्रोश को बढ़ने की आशंका से भयभीत सरकार ने अण्णा हजारे से एक संयुक्त ड्राफटिग कमेटी बनाकर आगामी मानसून सत्र  में रखने का केवल आश्वान देना चाहती है। परन्तु अण्णा हजारे एवं उनके आंदोलनकारी साथी स्वामी अग्निवेश व अरविन्द केजरीवाल के अनुसार 7 अप्रैल को कबीना मंत्री कपिल सिब्बल से हुई वार्ता में सरकार अन्ना हजारे की इस मांग को भी मानने के लिए सहमत नहीं है कि सरकार इसके लिए सरकारी नोटिफिकेशन इस जनलोकपाल विधेयक के प्रारूप को बनाने के लिए संयुक्त ड्राफिटंग कमेटी के गठन के लिए जारी किया जाय। सरकार इसके लिए भी आज रात तक तैयार नहीं है। सरकार इस लोकपाल विधेयक को मानसून सत्र के लाने का मात्र कोरे आश्वास का झांसा दे कर अण्णा हजारे का अनशन खत्म करने का षडयंत्र रच रही है। सरकार इस मामले में भी ईमानदारी से अपनी जिम्मेदारी निर्वाह करने के बजाय बला टालने के नाम पर केवल हवाई आश्वासन देने की नोटंकी कर देश को धोखा दे रही है। 
अण्णा के इस ऐतिहासिक आमरण अनशन से जहां आज देश की भ्रष्टाचार से मृतप्राय जनता की आत्मा एक प्रकार से जागृत हो कर वह अण्णा को गांधी मान कर देश से भ्रष्टाचार का समूल नाश करने के लिए आज सड़कों पर उतरने का मन बना चूकी हे। ऐसे में अण्णा हजारे व उनके दोनों सहयोगियों स्वामी अग्निवेश व अरविन्द केजरीवाल को  भी एक बात साफ समझ लेनी चाहिए कि वह इस निर्णायक में सरकार के झांसे में आ कर मानसून सत्र के नाम पर इस मामले को टालने के बजाय अविलम्ब इसी माह संसद का विशेष सत्र बुला कर इस को कानून बनाने पर ही सरकार पर दवाब डालना चाहिए। इस विशेष सत्र की जरूरत इस बात से है कि आज देश में पूरी व्यवस्था भ्रष्टाचार से मृतप्राण सी हो गयी है। इस लिए देश की रक्षा के लिए तथा देश को बचाने के उद्देश्य से इस आपात समाधान की आज नितांत जरूरत है। इसलिए संसद का विशेष सत्र देश को बचाने के नाम पर इसी माह बुला कर लोकपाल कानून बना कर भ्रष्टाचार के शिकंजे में जकड़े दश की रक्षा की जाय। 

Wednesday, April 6, 2011

भ्रष्टाचार का विरोध न करना एक प्रकार से उसको समर्थन देना ही है

भ्रष्टाचार का विरोध न करना एक प्रकार से उसको समर्थन देना ही है

देश भ्रष्टाचार में तबाह हो रहा है  देश को भ्रष्टाचार से बचाने के लिए नया गांधी अण्णा हजारे देश की संसद की चैखट राष्ट्रीय धरना स्थल पर 5 अप्रैल से आमरण अनशन पर बैठे है। और भारतवासी मूक अपने घरों में ही दुबके बैठे हैं। अन्याय के खिलाफ इस जंग में जो मूक रहेगा वह भ्रष्टाचारी से बदतर देशद्रोही ही कहलाया जायेगा। भ्रष्टाचार का विरोध न करना एक प्रकार से उसको समर्थन देना ही है। आओ देश व भारत की संस्कृति की रक्षा के लिए भ्रष्टाचार के खिलाफ इस जंग में इसी पल से समर्पित हो कर देश के वर्तमान व भविष्य की रक्षा करने के अपने दायित्व का निर्वहन करें। 
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Monday, April 4, 2011

अन्ना हजारे के नेतृत्व में भ्रष्टाचार के खिलाफ संसद की चैखट पर ऐतिहासिक जंग शुरू


 अन्ना हजारे के नेतृत्व में भ्रष्टाचार के खिलाफ संसद की चैखट पर ऐतिहासिक जंग शुरू 
जन लोक विधेयक बनाने की मांग को लेकर आमरण अनशन पर कुरूक्षेत्रा में अनशन पर बैठें अन्ना हजारे
भ्रष्टाचार के रसातल में जमीदोज हुए भारत की रक्षा के लिए देश के लाखों देशभक्तों ने निर्णायक जंग का ऐलान महान समाजसेवी अन्ना हजारे के नेतृत्व में संसद की चैखट, राष्ट्रीय ध रना स्थल से 5 अप्रैल  को आमरण अनशन शुरू कर के कर दिया है।  यह अनशन रूपी आंदोलन जनांदोलन का रूप ग्रहण करते हुए देश के 450 शहरों में प्रारम्भ हो गया है। देश की राजधानी दिल्ली में राष्ट्रीय धरनास्थल  जंतर मंतर में प्रधानमंत्री सहित तमाम अपीलों को दर किनारे करते हुए भ्रष्टाचार से देश को बचाने के संघर्ष का नेतृत्व करने वाले गांधी के तुल्य समाजसेवी अन्ना हजारे ने अपने ऐतिहासिक आमरण अनशन का शंखनाद कर दिया है। देश में लोकशाही का कुरूक्षेत्र समझे जाने वाले जंतर मंतर में प्रारम्भ हुए देश के गांधी तुल्य समाजसेवी अन्ना हजारे के इस महाभियान में देश के लाखों लोगों के साथ सहभागी बनने के लिए देश के प्रमुख समाजसेवी स्वामी अग्निवेश, मेघा पाटेकर,बाबा रामदेव, श्री रविशंकर,किरण वेदी, अनिल केजरीवाल, सहित देश के तमाम प्रखर समाजसेवी खुल कर आगे आ गये है।   हालांकि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अन्ना हजारे से अपना आमरण अनशन प्रारम्भ न करने की अपील की थी। परन्तु उनकी अपील को यह कह कर अन्ना हजारे ने ठुकरा दिया कि उन्होंने प्रधानमंत्री मनमोहन व सोनिया गांधी सहित देश के वरिष्ठ नेताओं व सरकार के उच्च पदों पर आसीन व्यक्तियों को इस आशय के लम्बे समय से कई पत्र भेजे जिस पर सरकार ने अभी तक कोई ठोस कार्य ही नहीं किया तथा इन पत्रों का उतर तक नहीं दिया। वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे सरकार की इस निष्क्रियता से आक्रोशित थे कि भ्रष्टाचार निरोधी लोकपाल विधेयक का स्वरूप तय करने में नागरिक समाज को शामिल किए जाने की उनकी मांग  मांग पर सरकार ने अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया। अपने इस कदम का ऐलान करने के लिए उन्होनंे दिल्ली के प्रेस क्लब में एक विशाल सम्वाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि ‘‘चूंकि प्रधानमंत्री ने लोकपाल विधेयक का स्वरूप तय करने के लिए नागरिक समाज के लोगों के साथ एक संयुक्त समिति गठित किए जाने की मांग को अस्वीकार कर दिया है, इसलिए पूर्व में की गई घोषणा के अनुसार मैं आमरण अनशन पर बैठूंगा। ‘यदि इस दौरान मेरी जिंदगी भी कुर्बान हो जाए तो मुझे इसका अफसोस नहीं होगा। मेरा जीवन राष्ट्र को समर्पित है।’’5 अप्रैल मंगलवार सुबह सबसे पहले सुबह जंतर मंतर धरना स्थल पर आने के बाद अन्ना हजारे गांधी  जी की समाधी को नमन करने नौ बजे राजघाट गये व  फिर उसके बाद इंडिया गेट में जा कर शहीदों को नमन् किया। इसके बाद उन्होंने जंतर-मंतर पर पंहुच कर अपना उपवास प्रारम्भ किया। उनके इस उपवास में हजारों लोगों ने समर्थन दे कर सरकार की चूलें ही हिला दी। उनके उपवास को समर्थन  करते हुए सामाजिक कार्यकर्ता अरविंद केजरीवाल ने कहा, ‘‘मैं देश की जनता से अपील करता हूं कि वे इस भूख हडम्ताल में शामिल हों और भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन को अपना समर्थन दें।’’
इंडिया अगेंस्ट करप्शन  के इस अभियान का संयोजन कर रहे अरविंद केजरीवाल के मुताबिक दिल्ली के अलावा देश भर में चार सौ जगहों पर लोग अनशन पर बैठ गये है। देश भर से साढ़े छह लाख लोगों ने हेल्पलाइन नंबर पर रजिस्टर कर इस आंदोलन को अपना समर्थन किया है। इसी तरह फेसबुक पर इंडिया अगेंस्टर करप्शन के इस अभियान को 30 हजार से ज्यादा लोगों ने इसे समर्थन किया है।  वहीं स्वामी अग्निवेश ने साफ शब्दों में कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ आम आदमी की पहली जंग का बिगुल बज गया है। श्री अग्निवेश अन्ना हजारे के साथ संवाददाता सम्मेलन में दिल्ली प्रेस क्लब में पधारे हुए थे। उनके साथ राष्ट्रीय जनांदोलनों के संयोजक भूपेन्द्र रावत, उत्तराखण्ड आंदोलन के प्रमुख संगठन उत्तराखण्ड जनता संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष देवसिंह रावत, महासचिव जगदीश भट्ट व कोषाध्यक्ष जगमोहन सिंह रावत ने भी तमाम लोगों से इस आंदोलन में भाग लेने की अपील की। अन्ना हजारे के अनशन के समर्थन में बड़ी तदाद में लोग यहां जंतर-मंतर पर जुटे हैं। देश विदेश से अनेक धार्मिक, सामाजिक और राजनीतिक नेताओं ने उनके इस अभियान का समर्थन करने का ऐलान किया है।इस अभियान का प्रमुखता से नेतृत्व कर रही देश की पहली महिला आइपीएस अधिकारी किरण बेदी ने कहा कि जिस तरह क्रिकेट विश्व कप के लिए पूरा हिंदुस्तान एकजुट हुआ वैसी ही एकजुटता इस मुद्दे पर भी दिख रही है। क्रिकेट का कप तो सिर्फ चार साल के लिए है, मगर यह ऐसा कप होगा, जिसका फायदा हिंदुस्तान को हमेशा मिलता रहेगा। सबसे प्रसन्नता की बात यह है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ इस जंग में देश के हर वर्गो व समुदाय का भारी समर्थन मिल रहा है। हजारों की संख्या में लोग जुटे हुए है।
अन्ना हजारे के राष्ट्रीय धरना स्थल पर शुरू किये गये इस आमरण अनशन को स्वामी अग्निवेश किरण बेदी, योग गुरु बाबा रामदेव, श्री श्री रवि शंकर, मुस्लिम नेता महमूद मदनी, आर्क बिशप विसेंट एम. कौंसेसाउ, अरविन्द केजरी वाले सहित देश के तमाम प्रमुख सामाजिक कार्यकत्र्ताओं ने अपने समर्थन देने का ऐलान किया है। वहीं उनके इस कदम से पूरी सरकार में हडकंप सा मच गया है। इससे पहले भी प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह खुद मुलाकात कर अन्ना को आंदोलन स्थगित करने का अनुरोध कर चुके हैं। अन्ना हजारे की मांगों  लिए रक्षा मंत्री एके. एंटनी की अध्यक्षता में मंत्रियों की एक उप समिति भी बनाई गई है।वहीं पूरे महाराष्ट्र की राजनीति ही नहीं वहां की जनता भी अन्ना हजारे के आमरण अनशन से पूरी तरह उद्देल्लित हो गयी है।  अन्ना के अनशन को रोकने के लिए सरकार ने कई स्तर पर कोशिश शुरू कर दी है। सोनिया गांधी की अध्यक्षता वाली राष्ट्रीय सलाहकार समिति ने लोकपाल विधेयक के मसौदे पर विमर्श शुरू कर अन्ना को शांत करने की कोशिश की। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चह्वाण और राज्य कांग्रेस अध्यक्ष माणिक राव ठाकरे को खास तौर पर अन्ना को मनाने के लिए लगाया गया। प्रधानमंत्री कार्यालय भी इस काम में जुट गया है।  भाजपा, सहित तमाम राजनैतिक दलों  ने अन्ना के इस अभियान को समर्थन देने का एलान किया है। कुल मिला कर अन्ना हजारे का अनशन देश से भ्रष्टाचार मिटाने के अभियान में निर्णायक साबित होगा। देश के तमाम लोगों को आगे आ कर इस महान आंदोलन में सहभागी बन कर देश हितों व देश को भ्रष्टाचार के गर्त में धकेल रही हुक्मरानों के नापाक इरादों पर अंकुश लगाने के अपने नागरिक दायित्वों का निर्वहन करना चाहिए। शेष श्रीकृष्ण कृपा। हरि ओम तत्सत्। श्री कृष्णाय् नमो।

अनशनास्त्र के संधान से हरीश रावत ने किया चार पालों को पस्त



अनशनास्त्र के संधान से हरीश रावत ने किया चार पालों को पस्त
ें किशोर के अनशन से हरीश रावत ने फिर मात दी अपने विरोधियों को
विधायक ने अपना 14 दिन पुराना अनशन समाप्त किया
देहरादून(प्याउ)। उत्तराखण्ड की राजनीति में अपने आंदोलनों व अनशन से आये दिन हलचल मचाने वाले कांग्रेसी विधायक किशोर उपाध्याय ने आखिरकार अपना 14 दिन से चला अनशन सोमवार 4 अप्रेल को मुख्यमंत्री के आश्वासन पर समाप्त कर दिया। इस अनशन से जहां टिहरी की राजनीति में एक प्रकार का उबाल सा आ गया था वहीं टिहरी में कई स्थानों में कांग्रेस व भाजपा सडकों में एक दूसरे के विरोध में उतर गये थे।इस अनशन से जहां प्रदेश कांग्रेस की राजनीति में भी हडकंप सा मचा दिया था। इस अनशन को भले ही सरसरी तौर पर लोग टिहरी के विकास के साथ जोड़ रहे हों पर इस इसमें टिहरी के विकास से अधिक प्रदेश में क्षत्रपों का आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए मची बर्चस्व की जंग  भी है। इस अनशन से अब तक चार पालों के साथ जंग में पिछड़ रहे कांग्रेसी दिग्गज ने अपने सेनानायक किशोर उपाध्याय के अनशनास्त्र संघान से अपने विरोधियों को पस्त कर दिया है।
देहरादून के बीजापुर अतिथि गृह में 4 अप्रैल को मुख्यमंत्री निशंक ने उपाध्याय को जूस पिलाकर उनका अनशन तुड़वाया। निशंक ने उपाध्याय को आश्वस्त किया कि उनकी मांगों पर राज्य सरकार जल्द ही कार्यवाही करेगी और उपायाय द्वारा अपने विधानसभा क्षेत्र के विकास के लिए रखी गयी 25 मांगों को मान लिया जाएगा। माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया कि टिहरी के रानी चोरी क्षेत्र में एक कृषि विश्वविद्यालय या वानिकी वनौषधि संस्थान स्थापित किया जाएगा । इससे पहले  उपाध्याय से गत एक अप्रैल को कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी के विशेष दूत के रुप में राजस्थान के सांसद जितेन्द्र भंवर ने मुलाकात की थी। उपाध्याय पिछले 14 दिनों से आमरण अनशन पर बैठे हुए थे।
गौरतलब है कि राजनैतिक क्षेत्रों में किशोर उपाध्याय को कांग्रेसी दिग्गज व केन्द्रीय कृषि मंत्री हरीश रावत का खासमखास सिपाहे सलाहकार माना जाता है। परन्तु जिस प्रकार किशोर के धरने में हरीश रावत के घोर राजनैतिक विरोधी धुरी के दिग्गज नेता नारायणदत्त तिवारी ने भी समर्थन दे कर नये समीकरणों को हवा देने की पहल की वहीं इस अनशन को अपनी प्रतिष्ठा का प्रश्न बना कर इसको मुख्यमंत्री से गरीमामय ढ़ग से समापन कराने में टिहरी, देहरादून व दिल्ली की परिक्रमा करने में हरीश रावत ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा कर अपने विरोधियों को पछाड़ने सफल रहे। टिहरी की राजनीति में जहां किशोर ने अपने तमाम प्रतिद्वंदियों को पछाड़ते हुए अपने आप को टिहरी का सबसे बड़ा जननेता साबित कर दिया है जिसे अपने पद की नहीं अपितु जनहितों की राजनीति से लगाव है। इस मामले में किशोर ने टिहरी के सांसद विजय बहुगुणा सहित तमाम नेताओं को एक प्रकार से बोना सा साबित कर दिया है। वही प्रदेश की राजनीति में किशोर के अनशन के बहाने हरीश रावत, अपने विरोधियों को एक बार फिर मात देने में सफल रहे। भले ही यह अनशन टिहरी की 25 मांगों को लेकर था। परन्तु जिस प्रकार से प्रदेश विधानसभा चुनाव में इन दिनों कांग्रेसी राजनीति का धुव्रीकरण हरीश रावत के विरोध में चार पालों ने मजबूत चक्रव्यूह बना कर हरीश रावत को एक प्रकार से पुरी तरह से घेर लिया था, उसी चक्रव्यूह से बाहर निकलने के लिए हरीश रावत ने अब जिस राजनैतिक कुशलता व पराक्रम से अपने सेनानायक समझे जाने वाले किशोर उपाध्याय को आगे कर अनशनास्त्र का संधान किया उससे कांग्रेस में उनके चार पालों वाला मजबूत खेमा भी भौचंक्का सा रह गया है। कांग्रेसी चार पालों के नाम से विख्यात प्रदेश कांग्रेस की हरीश रावत विरोधी समझे जाने वाली वर्तमान प्रदेश कांग्रेस में हरीश रावत के इस अनशनास्त्र प्रहार से एक प्रकार से खलबली सी मची हुई है। चार पालों में प्रदेश राजनीति के प्रमुख क्षत्रप सतपाल महाराज, उनके खेमे के प्रमुख सेनानायक यानी प्रदेश कांग्रेस के वर्तमान अध्यक्ष यशपाल आर्य, नैनीताल के पूर्व सांसद महेन्द्रसिंह पाल के अलावा चोथे पाल के रूप में अब कांग्रेसी नेता प्रदेश युवक कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष रहे व कभी हरीश रावत के खासमखास रहे राजपाल बिष्ट का नाम लिया जा रहा है। सुत्रों के अनुसार एक दशक से अधिक समय तक हरीश रावत की छाया की तरह रहने वाले वर्तमान में राहुल गांधी की युवा टीम के प्रमुख सदस्यों में से एक राजपाल सिंह बिष्ट को  अब प्रदेश की राजनीति में सतपाल महाराज व यशपाल खेमे के करीब समझा जा रहा है। राजपाल बिष्ट के हरीश रावत खेमे से दूर होने के कारण प्रदेश भर से उनके सम्पर्क में रहे तमाम युवा भी वर्तमान पाल ब्रिगेड़ से जुड़ गये है। सुत्रों के अनुसार कुछ समय से हरीश रावत खेमें में अपनी उपेक्षा से आहत हो कर प्रदेश के प्रमुख क्षत्रप सतपाल महाराज खेमें के करीब से चला गये हैं। देखना यह है कि अब विधानसभा चुनाव के मुहाने में खड़ी कांग्रेस की यह आपसी जंग 2011 में विधानसभा चुनाव फतह करने के केन्द्रीय कांग्रेस कमान की आशाओं में कहां तक खरी उतरती है। यह बात स्पष्ट है कि अगर आलाकमान ने इन क्षत्रपों पर अंकुश नहीं लगाया तो प्रदेश में गत विधानसभा चुनाव में जनादेश के न मिलने पर भी  भाजपा को फिर से प्रदेश की सत्ता में आसीन होने से नहीं रोका जा सकता है। वहीं कांग्रेस में मचे मैं मुख्यमंत्री मैं मुख्यमंत्री बनने के द्वंद देख कर प्रदेश की सत्ता में आसीन निशंक खेमें में काफी उत्साह बना हुआ है।



गांधी के विरोधी ही नहीं समर्थक भी रह गये भौचंक्के



गांधी के विरोधी ही नहीं समर्थक भी  रह गये भौचंक्के
गांधी जी को चाहे जीते जी ही नहीं उनकी हत्या की जाने के कई दशक बाद भी आज दुनिया में उनके चाहने वालों की जो जबरदस्त कसक है उसको देख कर उनके आलोचकों की जहां बोलती बंद हो जाती है अपितु उनके शर्म से बरबस सर भी झुक जाते है। महात्मा गांधी के विरोधी फिरंगी हुकुमत के अलावा भारत में वे तमाम लोग सामिल थे जो गांधी के संकीर्ण धर्मवाद  से उपर उठ कर हर भारतीय को गले लगाने का विरोध करने वाली जमात भी थी। आज जहां गांधी के कार्यो को नमन करने वालों में संसार के सबसे ताकतवर देश अमेरिका के राष्ट्रपति बराक औबामा सहित असंख्य लोग हैं। वहीं ऐसे समय में भी गांधी पर किचड़ उछाल कर अपने को विख्यात करने वाले लेखकों व राजनेताओं की कोई कमी नहीं है। अभी कुछ सप्ताह पहले एक फिरंगी लेखक ने महात्मा को अपनी कुठीत व संकीर्ण मानसिकता का शिकार बनाया। इससे पूरे देश में एक प्रकार का विवाद किताब ही छीड़ गया। गुजरात की भाजपा सरकार ने बिना समय गंवाये इस पुस्तक पर प्रतिबंध ही लगा  दिया। इस मामले ने एक बार फिर भारतीयों को ही नहीं अपितु दुनिया के तमाम   समझदार लोगांें को  गांधी  पर चचा्र करने के लिए मजबूर कर दिया।  इस बहस ने भी महात्मा की महानता को अपने  आरोपों के  बादलों के आगोश में लेने में असफल  रहे। अभी यह प्रकरण सचांलित ही हो रहा था कि  एक फिरंगी ने गांधी  के चरित्र को नष्ट करने के उद्देश्य से एक किताब ही प्रकाशित कर दी। यह विवाद भारत में संचालित था कि   तभी  एक खबर आयी कि गांधी की एक चिट्ठी को किसी फिरंगी  ने महात्मा गांधी का एक पत्र निलामी में 8 लाख रूपये में  ख रीद कर सबकी बोलती ही बंद कर दी।                                                                                                                                                             हिंदू-मुस्लिम एकता पर जोर देने वाले राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के इस एक पत्र को गत मंगलवार को लंदन में 11400 पौंड (करीब आठ लाख रुपये) में नीलाम हुआ। एक अज्ञात अंग्रेज ने इसे खरीदा है। नीलामीकर्ता बोनहम्स ने इस दस्तावेज को पिछले तीस साल में बाजार में आए गांधीजी के खास पत्रों में से एक करार दिया है।
15 दिसंबर, 1919 को लिखे इस पत्र में गांधीजी ने ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ भारत में निष्क्रिय प्रतिरोध और हिंदू-मुस्लिम एकता की जरूरत पर जोर दिया है। गांधीजी ने पत्र में लिखा है, ‘मैं भारत के मुसलमानों को अपनी भावनाओं को संतुलित तरीके से व्यक्त करने की सलाह देता हूं। साथ ही हिंदुओं को भी सलाह है कि इस साझा प्रयास में वे उनकी मदद करें।’ पत्र में गांधीजी ने घोषित किया कि उन्होंने सत्य की लगातार वकालत की है।
उन्होंने ब्रिटिश सरकार के अलावा खिलाफत आंदोलन के प्रति अपने दृष्टिकोण की व्याख्या की। यह पत्र लाहौर-2 मोजांग रोड के पते से भेजा गया था। इसमें अंग्रेज पत्रकार व उपन्यासकार एडमंड कैंडलर के सवालों का जवाब दिया गया है। इस पत्र के लाखों यपये में निलाम होने की खबर से उनके विरोधी ही नहीं उनके समर्थक भी भौचंक्के  रह गये है। इस प्रकरण से यह साफ हो गया कि आज भले ही एक बड़ी जमात उनके कार्यो में मीन मेख निकालें परन्तु वे आज भी महात्मा गांधी न केवल भारत में अपितु पूरे विश्व सृष्ठि को अपना कायल ही कर दिया है।

विश्व में बच्चों के एकमात्र त्यौहार हैं ‘कटम कूड़ी बाघे दाड़ व अंग्यार पूजे’


विश्व में बच्चों के एकमात्र त्यौहार हैं ‘कटम कूड़ी बाघे दाड़ व अंग्यार पूजे’ 
बाघ व नयी कोंपलों के जहर से रक्षा के लिए करते हैं अंग्यार पूजे 
‘कटम कूड़ी बाघे दाड़ व अंग्यार पूजे’ ये दो त्योहार केवल उत्तराखण्ड  में ही नहीं अपितु संभवतः देश विदेश में बच्चों का एकमात्र ऐसे जुडवा त्योहार होगें जिसको केवल बच्चे मनाते ही नहीं  अपितु खानपान सहित तमाम पकवान तक खुद ही बनाते है। हालांकि फूलदे माई भी बच्चों का गांव भर के घरों में फूल डाल कर वहां से खाजा मांगने का त्योहारों में है। कई स्थानों में फूलदे माई का त्योहार भी इन दोनों त्योहारों से जुड़ा रहता है। इस फूलदे माई के दिन बच्चों को मिले खाजा रूपी अन्न का ही अंग्यार पूजे के दिन बच्चे पकवान बनाने में प्रयोग में लाते हैं।परन्तु फिर भी फूलदे माई त्योहार में  वह व्यापकता नहीं है जो  ‘कटम कूड़ी बाघे दाड़ व अंग्यार पूजे’ जैसे त्योहारों में देखने को मिलती है। यह दोनों त्योहारों में बच्चे न केवल त्योहार मनाते हैं अपितु अंग्यार पूजे’ के दिन तो बच्चे अपने घर इत्यादि स्थान छोड़ कर जंगल में नाना प्रकार के पकवान बनाते है।
भले ही देश विदेश में सरकारें बाघ को बचाने के लिए हर संभव कड़े कानून बना रहे है। वहीं हिमालयी राज्यों के निवासियों में अनादिकाल से बाघ, रीछ व जंगली सुअर सहित तमाम हिंसक जानवरों से सदैव खतरा बना रहता है। उत्तराखण्ड सहित हिमालयी राज्यों में सबसे ज्यादा खतरे की आशंका अगर किसी से रहती है तो वह बाघ से। बाघ न केवल लोगों के जीवन चक्र के आधार समझे जाने वाले गाय, बैल व कुत्तों को अपना निवाला बनाता है अपितु कई बार तो यह आदमियों को भी अपना शिकार बनाने से गुरेज नहीं करता। शायद इसी भय से आशंकित हिमालयी क्षेत्र के लोग सबसे अधिक बाघ से भयभीत रहते है। बच्चों को डराने के लिए भी प्रायः  गांवों में उनकी माॅं सहित बड़े बुजुर्ग बाघ आ गया कहते हैं। वहीं सीमान्त जनपद चमोली में बाघ के भय से उबरने व वसंत के आगमन पर जंगली अंग्यार पर आयी नयी कोंपलों के जहर से बचने के लिए अंग्यार पूजे व बाघ पूजे किया जाता हैं। इस पूजा की विशेषता यह है कि यह बसंत के आगमन पर ही होता है तथा इस त्योहार को बच्चे ही मनाते हैं।  बच्चे जंगल में बसंत के आगमन पर जंगली पैड़ों पर  आयी नई कोंपलों के जहर से तथा बाघ के आतंक से अपने पालतु पशुओं की रक्षा हेतु   चैत माह की 15 गते को अग्यार झाडने के लिए सांयकाल बच्चे गांव के एक चैक में  एकत्रित होते है। वहां पर सभी छोटे बच्चे अपने अपने घरों से कटोरे में चांवल से बने भूट खाजा  को लेकर जाते है। वहां पर गांव के सभी बच्चे थोडे से चांवल को पठाली में रख कर उसे एक पत्थर  से ‘कटम कूड़ी बाघे दाड़’ -2  जोर  जोर से चिल्लाते हुए कूटते हैं। उसी समय एक वयस्क आदमी जो बाघ बना होता है वह बाघ बन कर बाघ की सी हुकार भरते हुए वहां पर आता है तो बच्चे उसको वहां ंसे सुखे गोवर के टुकड़े(ग्वसा) को जला कर बाघ बने हुए व्यक्ति पर प्रहार कर भगाते है। यह कटम कूड़ी बाघे दाड नाम का पूरा पर्व इस आशा व विश्वास के साथ मनाया जाता है कि ग्रामीणों के पशुओं की बाघ व बसंत में जंगली पैड़ पोधों पर आयी नयी कोंपलों से रक्षा की जायेगी। इस अवसर पर बाघ बने हुए व्यक्ति को ग्वसों को मारते हुए अन्य एक व्यक्ति यह जोर जोर से कहता है कि हमारे पशुओं पर न तो बसंत में आयी नयी कोंपलों का जहर लगे व नहीं बाघ आदि हिंसक जंगली जानवरों का भय रहे। यह पर्व एक प्रकार से अंग्यार झाडने के नाम से मनाया जाता हे।  इस पर्व का अंतिम भाग इसके पांच दिन बाद यानी चैत माह की 20 गते को अंग्यार पूजे के नाम से मनाया जाता है। इस पर्व को भी केवल बच्चे ही मनाते हैं। वह भी प्रायः 14 साल से छोटी उम्र के बच्चे अपनी अपनी दस बारह बच्चों की टोलियों में अपने अपने घरों से दुध, घी, चांवल, आटा, तेल, दाल, गुड़ इत्यादि ले जा कर गांव के समीप जंगल में जाते है।  छोटे बच्चे ही जंगल में जा कर खीर, कलेऊ, पूरी इत्यादि पकवान बना कर  अंग्यार की पूजा करते हैं। इस अंग्यार पूजे में भी एक बच्चा बाघ बनता है व उसे अन्य बच्चे जलते हुए ग्वसा से इस आश से भगाते हैं कि इससे उनके पशुओं की नयी कोंपलों व जंगली हिंसक जानवर बाघ से रक्षा होगी। आज टीबी व दूरसंचार के युग में जहां आम बच्चे ही नहीं बड़े बुजुर्ग भी अपनी परंपराओं को भुल कर भूमण्डलीयकरण की आंधी में अपने त्यौहार व परंपरायें भूलते जा कर संतोषी माता का वर्त, कडवा चैथ का वर्त, फादर डे व मदर डे, क्रिकेट तथा बेलेन्टाइन डे जैसे पर्वो को मनाने में लगे है, ऐसे में ‘कटम कूड़ी बाघे दाड़ व अंग्यार पूजे’ जैसे बच्चों के प्राचीन उत्तराखण्डी पर्व को लोग प्रायः भूल से गये हे। जब पूरा देश विश्व कप क्रिकेट जीतने की खुमारी ले रहा था ऐसे समय में उत्तराखण्ड के चमोली जैसे दूरस्थ सीमान्त जनपद के गांवों के बच्चे 3 अप्रैल 2011 को अंग्यार पूजे को मनाने में मस्त थे।

Saturday, April 2, 2011

सच्चे सुख के साथी श्रीकृष्ण


सच्चे सुख के साथी  श्रीकृष्ण
जीतने बाले को हंसते देखा, हारने वाले को भी रोते
हार जीत से उपर उठ कर कर्म करे जो होता है यति
श्रीकृष्ण की सीख  मान जो करे जीवन में सम व्यवहार 
हार जीत को स्वप्न मान कर बने कृष्ण चरण अनुरागी; 
जपो हर पल श्री राधे कृष्ण वो ही सचे सुख के साथी
हरि छोड़कर जो रखे जग से आशा वो होगा दुखभागी
(देवसिंह रावत 2 अप्रैल 2011 पोने बारह बजे भारत के विश्व कप विजय होने पर)

रूडकी के जिंदा शहीद प्रकाश कांति को आंदोलनकारी न मानने वाली उत्तराखण्ड सरकार शर्म करो


रूडकी के जिंदा शहीद प्रकाश कांति को आंदोलनकारी न मानने वाली उत्तराखण्ड सरकार शर्म करो
इस सप्ताह मुझे हरिद्वार जनपद के रूड़की क्षेत्र में निवास करने वाले उत्तराखण्ड राज्य गठन जनांदोलन के एकमात्र जिंदे शहीद प्रकाश कांति की धर्मपत्नी का मार्मिक पत्र आया। उस पत्र में ना चाहते हुए भी  उन्होंने  राज्य गठन जनांदोलन में पुलिसिया गोली से जिंदा शहीद हुए अपने पति को राज्य गठन आंदोलनकारी न मानने पर उत्तराखण्ड आंदोलनकारियों के सम्मान का डंका पीट रही प्रदेश सरकार को बेनकाब ही कर दिया।  जो सरकारें व समाज अपने शहीदों, आंदोलनकारी सैनानियों व प्रतिभाओं का सम्मान करने के बजाय अपमान करती है ऐसी जनविरोध्ी व आत्मघाति सरकारों को सत्ता में बने रहने का एक पल का भी कोई नैतिक आधर  नहीं हो सकता। राज्य गठन जनांदोलन में उत्तराखण्ड के आत्मसम्मान व राज्य गठन जनांकांक्षाओं को निर्ममता व निरंकुशता से रौंकने के तत्कालीन राव-मुलायम सरकारों की सरपरस्ती में भारतीय संस्कृति को  कलंकित करने वाले ‘मुजफ्रपफरनगर काण्ड-94’ के विरोध् में उपजे जनांक्रोश के दमनकारी सरकारी अत्याचार का शिकार हुए रूड़की निवासी प्रकाश कांति  भी हुए। शोभाग्य से वे पुलिसिया गोली लगने के शिकार होने के बाबजूद जिंदा बच गये परन्तु कमर से नीचे का उनका पूरा शरीर विकलांग हो गया। ऐसे महान जिंदा शहीद को राज्य गठन आंदोलनकारी न मानने वाली अब तक की उत्तराखण्ड की तमाम सरकारों को मैं किन शब्दों में लानत भेजूं, जिनके कारण आज न केवल राज्य गठन जनांदोलन के एक मात्रा जिंदा शहीद प्रकाश कांति, उनके परिजन ही नहीं अपितु पूरे देश विदेश के तमाम आंदोलनकारियों को ही नहीं अपितुं जनतंत्रा में विश्वास रखने वाले तमाम प्रबुद्व जनों के विश्वास को भी गहरा आघात पंहुचाया।