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Tuesday, May 31, 2011

-इंदिरा नहीं, देश व कांग्रेस के गुनाहगार है राव व मनमोहन

-इंदिरा नहीं, देश व कांग्रेस के गुनाहगार है राव व मनमोहन
-इंदिरा गांधी पर अगुली उठाने के कारण सोनिया व प्रणव इस्तीफा दें
नई दिल्ली(प्याउ)। कांग्रेस की 125 वीं साल गिरह पर वरिष्ठ कांग्रेसी नेता प्रणव मुखर्जी के सम्पादन में जिस कांग्रेसी पुस्तक में कांग्रेस को कमजोर करने के लिए इंदिरा गांधी को गुनाहगार माना है, उस किताब का यह आरोप देश विदेश के करोड़ों की संख्या में आम समर्पित कांग्रेसियों के गले ही नहीं उतर रही है। आम कांग्रेसी इस बात से हैरान है कि जिस इंदिरा गांधी के राष्ट्रहित व आम जनमानस के कार्यो की दुहाई दे कर वर्तमान सत्तांध कांग्रेसी देश की सत्ता में काबिज है आज बेशर्मो की तरह उसी इंदिरा गांधी को कटघरे में रखने की धृष्ठता कोई कांग्रेसी सरकार कैसे कर सकती है। आम कांग्रेसी कार्यकत्र्ताओं की नहीं देश की आम जनमानस की भी यह भावना है कि इंदिरा गांधी ने भले ही अपने राजनैतिक विरोधियों को पछाड़ने के लिए कुछ भी किया हो परन्तु उन्होंने कभी देश व आम जनता के हित से किसी भी कीमत पर खिलवाड़ नहीं होने दिया। जबकि आज देश की स्थिति इतनी शर्मनाक है कि देश में चारों तरफ मंहगाई, भ्रष्टाचार व आतंक की भीषण ज्वाला में दहक रहा है और बेशर्मों की तरह मनमोहन सिंह सरकार देश की आम जनता का तमाशा देख रही है। ऐसी निकम्मी सरकार जो देश के हितों को अमेरिका के आगे रौंदवा रही हो उस सरकार के एक प्रमुख कबीना मंत्री प्रणव मुखर्जी के सम्पादन में प्रकाशित कांग्रेस संगठन की पुस्तक में इंदिरा गांधी जैसे देश हितों के लिए अमेरिका से टक्कर लेने वाली महानायिका पर प्रश्न उठाने का दुसाहस एक प्रकार से कांग्रेस व देश के हितों से खिलवाड करने की धृष्ठता है। खासकर उस समय जब इंदिरा गांधी आपात काल लगा रही थी उस समय प्रणव मुखर्जी क्यों मूक रहे। क्यों उसके जब इंदिरा गांधी 1878 के बाद सत्ता में आयी तो प्रणव मुखर्जी सत्ता में सहभागी बने। गौरतलब है कि इस विवादस्थ कांग्रेसी किताब में दिवंगत प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के देश में आपातकाल लगाने के निर्णय की कड़ी आलोचना करने के साथ ही उसे खतरनाक, ऐतिहासिक भूल और भयावह अनुभव करार देते हुए संजय गांधी और उनकी मंडली की संविधानेत्तर सत्ता पर निशाना साधा गया है।इस पुस्तक का प्रकाशन पार्टी की स्थापना के 125 वर्ष पूरे होने के अवसर पर किया गया है। इस पुस्तक के विभिन्न अध्यायों में स्वतंत्र लेखकों ने अपना योगदान दिया है और इसमें वर्ष 1964 से 1984 के उस दौर में घटी घटनाओं का विश्लेषण किया गया है जिसमें इंदिरा गांधी का देश की राजनीतिक परिदृश्य पर प्रभुत्व था।।
कांग्रेस ने पार्टी के वरिष्ठ नेता प्रणव मुखर्जी के नेतृत्व वाले संपादकों के समूह द्वारा कांग्रेस के इतिहास के पांचवें अंक में व्यक्त विचारों को व्यक्तिगत लेखकों एवं इतिहासकारों की राय बताते हुए कहा है कि इसे पार्टी के विचार के रूप में नहीं लिया जा सकता।
भले ही अब इस विवाद के तुल पकड़ने पर कांग्रेस इस पुस्तक में इस लेख को स्तभ लेखक इंदर मल्होत्रा के अपने विचार बता कर पल्ला छाड रही हो परन्तु आम कांग्रेसी ही नहीं आम आदमी भी हैरान यह हे कि ऐसा लेख कांग्रेसी पुस्तक में कैसे स्थान पा सका।आपात काल की गलती का अहसास इंदिरा गांधी को भी स्वयं था। परन्तु ऐसी परिस्थितियां का निर्माण राजनैतिक दलों ने किया था उसके लिए वे लोग भी कम जिम्मेदार नहीं थे। इस पुस्तक ने साफ कर दिया कि कांग्रेस नेतृत्व इतना दिशाहीन हो चूका है कि उसे आत्म चिंतन के नाम पर अपनी कमजोरियों को छूपाने के लिए मनमोहन सिंह व राव जैसे जनविरोधी शासकों की तरफ अंगुली उठाने का साहस तक नहीं रहा और कांग्रेसी का प्राण समझी जाने वाली इंदिरा गांधी को कटघरे में खडा कर आत्महत्या करने को कैसे उतारू हो रही है, यही देखने की सबसे बड़ी बात है।

-काश ममता बनर्जी से सबक लेते देश को बर्बाद करने वाले राजनेता

-काश ममता बनर्जी से सबक लेते देश को बर्बाद करने वाले राजनेता/
-कार्यालय के नवीनीकरण की लागत चुकायी खुद ममता ने/

‘मेरे कक्ष और बगल के कई कमरों में चित्र लगाने, आंतरिक साज-सज्जा तथा फर्नीचर खरीदने पर लगभग दो लाख रुपये खर्च आए। मैंने निजी खाते से इस राशि के चेक राज्य के मुख्य सचिव (समर घोष) को सौंप दिए हैं। राज्य चूंकि गंभीर वित्तीय संकट के दौर से गुजर रहा है, इसलिए मैं नहीं चाहती कि मेरे कक्ष के नवीनीकरण पर आया खर्च सरकार वहन करे। यह दो टूक अनुकरणीय बात तीन दषक से अधिक समय पर बंगाल की सत्ता पर काबिज वाम मोर्चा सरकार को अपदस्थ करने वाली ममता बर्नजी ने मुख्यमंत्री बनने के 10 दिन बाद बनर्जी 30 मई को सोमवार को पहली बार अपने नवीनीगत कक्ष में बैठने पर कही। हालांकि इस कक्ष के नवीनकरण का कार्य पिछले कई दिनों से चल रहा था और आधिकारिक तौर पर नवीनीकरण कार्य कराने की जिम्मेदारी लोक निर्माण विभाग की है। इसके बाबजूद ममता बनर्जी ने ऐसा कार्य करके देष के संसाधनों को अपने निवास व कार्यालय के लिए पानी की तरह बहा कर बर्बाद करने वाले नेताओं के लिए एक करारा जवाब दिया। मैने दिल्ली में मंत्रियों व सांसदों के निवास व कार्यालयों का नवीनीकरण व साज सज्जा पर नाहक ही करोड़ा रूपया बर्बाद होते देखा है, उस समय इस बर्बादी को देख कर मुझे बड़ा दुख होता । खासकर भारत जैसे देष में जहां करोड़ बच्चे धनाभाव में अपनी षिक्षा दीक्षा से बंचित रहते हैं, करोड़ों लोग धनाभाव के कारण चिकित्सा से वंचित रहते हों तथा यहां करोड़ों लोग धनाभाव के कारण निवास सुविधाओं से वंचित रहते हैं ऐसे देष के जनसेवा में उतरे हुए तथाकथित जनसेवकों को अपने निवास व कार्यालय में देष के विकास का करोड़ों धन इस तरह लुटाने में जरा सी भी षर्म नहीं आती है।
बेवजह इन सांसदों व मंत्रियों के घर में लगा हुआ कुछ ही समय पहले लगा फर्नीचर व साज सज्जा को कबाड़ कीं तरह वहां से हटा कर नयी बहुकीमती फर्नीचर इत्यादि से सजाया जाता है। इन जनसेवकों की आत्मा षायद मर गयी होती। अच्छे भले घरों व कार्यालयों को नाहक ही तोड़ फोड़ करके सार्वजनिक निर्माण विभाग नये सिरे से इसका निर्माण व साजसज्जा करने में देष का करोड़ों रूपया बर्बाद करती है। यही नहीं दिल्ली की सड़कों खासकर नई दिल्ली की सड़कों पर बहुकीमती टायलें व पत्थर चंद सालों बाद ही बेवजह उखाड़ फैंका जाता है। उसकी जगह पर नई टाइलें लगायी जाती। ऐसे ही कारनामें देष में अन्य कार्यों में किये जाते हैं।
मै गत षनिवार को देहरादून गया। वहां पर मैने रविवार को एक समारोह में देहरादून के परेड़ ग्राउंड स्थित हिन्दी भवन सभागार में सम्मलित होने का अवसर मिला। उसकी जीर्ण षीर्ण हालत देख कर मुझ बड़ा दुख हुआ कि एक मुख्यमंत्री अपने आवास व कार्यालय के साज सज्जा पर करोड़ों रूपये खर्च कर सकता है। परन्तु उसे प्रदेष की महत्वपूर्ण भवनों की जीर्ण षीर्ण हालत को देखने व सुधारने की एक पल की फुर्सरत भी नहीं है। हालांकि अभी प्रदेष की राजधानी का विधिवत घोशणा भी नहीं हुई परन्तु जनभावनाओं व नैतिकता को दर किनारे करके देहरादून में जबरन मुख्यमंत्री का निवास बनाने में 16 करोड़ रूपये खर्च करने से साफ हो गया कि प्रदेष के हुक्मरानों को कहीं दूर-दूर तक जनभावनाओं व लोकषाही की कोई इज्जत तक नहीं है। ऐसे में बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का यह निर्णय देष के तमाम हुकमरानों को एक सबक ही होगा । ममता बनर्जी ने इसके अलावा पहले ही अपनी गाड़ी के लिए कहीं पर भी यातायात न रोकने का आदेष जारी कर चूकी है। ऐसा ही उन्होंने कई नेक काम किये। कई बार सांसद व केन्द्रीय मंत्री बनने के बाबजूद उनके पास आज भी वही दो कमरों वाला मकान है। वहीं साधारण धोती व वही रबड़ की चप्पल। यही है सादगी का पर्याय। जनता से जुड़ी व माॅ माटी व मानुश के लिए हर पल संघर्शरत नेताओं की पहचान। जो नेता व प्रबुद्व लोग आम जनता के साथ जुडने व जमीन पर साथ बैठने पर कतराते हों ऐसे लोग क्या लोकषाही का सम्मान करेंगे व क्या वे लोकभावनाओं का सम्मान करेंगे।
उत्तराखण्ड जैसे नव गठित प्रदेष की माली हालत भी दयनीय है परन्तु यहां के अधिकांष नेता व नौकरषाह चंद षालों में करोड़पति व अकूत सम्पति के मालिक बन गये है। चंद सालों में बिना किसी उद्यम के इन पर हुइ्र कुबैर के खजाने की बरसा को देख कर प्रदेष में भ्रश्टाचार इस तेजी से पनपा की आज उत्तराखण्ड देष के सबसे भ्रश्टत्तम प्रदेषों में जाना जाने लगा है। परन्तु यहां के नेताओं व नोकरषाहों की फिजूलखर्ची का कोई जवाब नहीं। मुख्यमंत्री व उनके मंत्री आदि दिल्ली का दौरा ऐसा करते हैं जेसे दिल्ली ही उत्तराखण्ड की राजधानी हो। मुख्यमंत्री का होलीकप्टर से क्षेत्र का भ्रमण तो समझा जाता। परन्तु बहाना बना कर अपने प्यादों के निजी समारोहों में उत्तराखण्ड से भारत के अन्य कोनों में जाना प्रदेष के खजाने पर कितना भार डालता है षायद इसका उनको कहीं दूर दूर तक भान भी नहीं होगा। जनहितों की पूर्ति या जनसेवा के लिए समर्पित रहने के बजाय इन नेताओं को अपनी सम्पति व वेषभूशा का ही एक मात्र ख्याल रहता है। इनके पहनावे से साफ हो जाता है कि इनका कहीं दूर-दूर तक जनता से कोई सरोकार नहीं है। नहीं इनके दिल में जनसेवा के लिए कहीं दूर दूर तक कोई सम्मान है। यही नहीं ममता बनर्जी ने अपने चित्रों की प्रदर्षनी लगा कर उसकी विक्री से अर्जित 1 करोड़ रूपये को भी वह राजकोश में दान कर चूकी है। ऐसी प्रवृति अगर देष के नेताओं में होती तो देष की आज ऐसी दुर्गति नहीं होती।
षेश श्री कृश्ण ।
श्रीकृश्णाय् नमो। हरि ओम तत्सत्।

-रामदेव के जनांदोलन से सहमी मनमोहन सरकार

-रामदेव के जनांदोलन से सहमी मनमोहन सरकार
-रामदेव के आंदोलन को कमजोर करने के लिए अण्णा हजारे को भी आंदोलन के लिए मजबूर कर रही है सरकार
-लोकपाल के दायरे में प्रधानमंत्री, रक्षा मंत्रालय व न्यायाधीशों को रखने से पलटी सरकार
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योगगुरू से देष को भ्रश्टाचार मुक्त करने के देष व्यापी जनांदोलन चलाने वाले बाबा रामदेव के 4 जून को होने वाले आमरण अनषन से लगता है देष को अपने कुषासन से मंहगाई, भ्रश्टाचार व आतंक के गर्त में धकेलने वाली मनमोहनी सरकार बुरी तरह से भयभीत हो गयी है। वह अब बाबा रामदेव के अनषन की धार कमजोर करने के लिए अण्णा हजारे को भी भ्रश्टाचार के मुद्दे पर समान्तर आंदोलन चलाने के लिए मजबूर कर रही है। सरकार कीरणनीति के तहत भ्रश्टाचार के खिलाफ इन दोनों सेना पतियों की आपसी द्वंद में यह जनांदोलन भी दम तोड़ कर रह जाय। इसी रणनीति के तहत सरकार ने यकायक अपने पक्ष से पलटी मारते हुए प्रधानमंत्री, रक्षा मंत्रालय व उच्चत्तम न्यायपालिका को प्रस्तावित लोकपाल के दायरे से बाहर रखने की मंषा जग जाहिर की। सरकार को इस बात का अंदाज है कि इन तीना बातों के न मानने से अण्णा हजारे मजबूरी में आंदोलन करेंगे, यही सरकार चाह रही है।
बाबा रामदेव के व्यापक जनांदोलन से भयभीत सरकार को अपनी खुफिया तंत्र से इस बात का अंदाजा लग गया है कि इस आमरण अनषन में देष के हर कोने से लाखों लोग सम्मलित होने आ रहे है। यही नहीं देष के हर कस्बे व हर षहर में इस आंदोलन के समर्थन में व्यापक जनांदोलन चलाये जा रहे है। यह देख कर केन्द्र सरकार किसी भी तरह से बाबा रामदेव के दिल्ली के रामलीला मैदान में होने वाले आमरण अनषन को रोकने के लिए तरह तरह के कृत्य कर रही है। इसके पहले महत्वपूर्ण कदम में केन्द्र सरकार की रणनीति के तहत ही बाबा रामदेव के आमरण अनषन स्थल की स्वीकृति को दिल्ली पुलिस द्वारा रद्द किया। परन्तु जब पूरे देष में इसकी कड़ी भ्रत्र्सना हुई तो हार कर केन्द्र सरकार ने इस को पुन्न स्वीकृति प्रदान किन्तु परन्तु करके प्रदान कर ही दी।
अपनी इस रणनीति को असफल होते देख कर केन्द्र की जनविरोधी मनमोहनी सरकार ने आंदोलन के प्रति लोगों का ध्यान बंटाने के लिए सरकार ने यकायक अन्ना हजारे के नेतृत्व वाली समिति को अपने इस बात का यकायक खुलाषा किया कि सरकार लोकपाल कानून में प्रधानमंत्री, न्यायपालिका व रक्षा मंत्रालय को इसके दायरे में किसी भी कीमत पर नहीं रख सकती। सरकार को मालुम है कि अण्णा व उनके साथी अब चाह कर भी इस मांग पर सहमत नहीं हो सकते हैं व वे फिर से आंदोलन की राह पकड़ेगे।
अण्णा हजारे व साथी फिर से आंदोलन करे यह सरकार की रणनीति का अगला महत्वपूर्ण हिस्सा है। सरकारी रणनीतिकारों का मानना है कि अण्णा हजारे व साथियों का अनषन ठीक उसी समय षुरू होने से बाबा रामदेव के चल रहे आमरण अनषन के प्रति देष के लोगों का ध्यान बंटेगा। इससे जहां ये दोनों आंदोलन अपने जनसमर्थन के अभाव में आपस में टकरा कर दम तोड़ देंगे। गौरतलब है कि सरकार की मंषा को भाप कर अण्णा हजारे व उनके सभी साथी नाराज है। नाराज अन्ना 6 जून की बैठक के बाद कर सकते हैं बहिष्कार । वहीं मूल मुद्दे नहीं मानने से अन्ना की प्रतिष्ठा लगी दांव लगी है। परन्तु सरकारी पक्ष का कहना है कि किसी एक व्यक्ति की प्रतिश्ठा को बचाने के खातिर देष के प्रधानमंत्री को लोकपाल के हवाले करके देश को मुसीबत में नहीं डाला जा सकता । संयुक्त समिति में सरकारी पक्ष देश की सुरक्षा का हवाला देते हुए रक्षा मंत्रालय के अफसरों को सरकार ने लोकपाल के दायरे से बाहर रखने का सुझाव दे रहे है।
छह जून को होने वाली अगली बैठक के बाद वह लोकपाल मसौदे के लिए बनी संयुक्त समिति की बैठकों का बहिष्कार भी कर सकते हैं। अन्ना को सरकार की यह बात रास नहीं आई है कि लोकपाल के दायरे में प्रधानमंत्री को लाने से सरकार देश को ठीक से नहीं चला सकती। वहीं उच्चत्तर न्यायापालिका को भी लोकपाल से बख्शने के लिए सरकार की यह दलील भी कि थोड़े ही जज भ्रष्ट हैं अन्ना ने खारिज कर दी है। जहां सरकार प्रधानमंत्री और बड़े जजों को तथा संसद के भीतर सांसदों के कृत्यों को लोकपाल की मार से बाहर रखने की जिद कर रही है वहीं अन्ना ने भी दो टूक कह दिया है कि बिना इसके मजबूत लोकपाल नहीं बनेगा। इसलिए वह सरकार के साथ इन मुद्दों पर हरगिज समझौता नहीं करेंगे। अन्ना के साथी सरकार की इस पलटी से न केवल अन्ना अपितु उसके सभी समर्थक भी भौचंक्के हैं।
वहीं दूसरी तरफ बाबा रामदेव के भ्रश्टाचार के खिलाफ व्यापक जनांदोलन के समर्थन में पूरे देष से लाखों लोगों के जुटने की तैयारियां जोरों पर है। स्वयं बाबा रामदेव पूरा देष भ्रमण कर चूके है। उनका संगठन पूरे देष के लोगों को इस आंदोलन में जोड़ने की रणनीति को अंतिम रूप दे चूका है। अब देखना है कि बाबा रामदेव को सरकार अण्णा हजारे की तरह अपने किसी दाव में फांसती है या बाबा रामदेव सरकार को अपनी बातों को स्वीकार करने के लिए मजबूर करते। निर्णय जो भी हो इस बात से कोई इनकार नहीं कर सकता है कि बाबा रामदेव व अण्णा हजारे ने पूरे देष के जनमानस को भ्रश्टाचार के खिलाफ संघर्श करने के लिए लामबंद कर दिया है। मृतप्राय देष को जीवंत कर दिया हैं। इसी कारण पूरे देष के हुक्मरान सहमें हुए है। षेश श्रीकृश्ण। श्री कृश्णाय नमो। हरि ओम तत्सत्।

रामदेव के जनांदोलन से सहमी मनमोहन सरकार

-रामदेव के जनांदोलन से सहमी मनमोहन सरकार/
-रामदेव के आंदोलन को कमजोर करने के लिए अण्णा हजारे को भी आंदोलन के लिए मजबूर कर रही है सरकार/
-लोकपाल के दायरे में प्रधानमंत्री, रक्षा मंत्रालय व न्यायाधीशों को रखने से पलटी सरकार/

योगगुरू से देष को भ्रश्टाचार मुक्त करने के देष व्यापी जनांदोलन चलाने वाले बाबा रामदेव के 4 जून को होने वाले आमरण अनषन से लगता है देष को अपने कुषासन से मंहगाई, भ्रश्टाचार व आतंक के गर्त में धकेलने वाली मनमोहनी सरकार बुरी तरह से भयभीत हो गयी है। वह अब बाबा रामदेव के अनषन की धार कमजोर करने के लिए अण्णा हजारे को भी भ्रश्टाचार के मुद्दे पर समान्तर आंदोलन चलाने के लिए मजबूर कर रही है। सरकार कीरणनीति के तहत भ्रश्टाचार के खिलाफ इन दोनों सेना पतियों की आपसी द्वंद में यह जनांदोलन भी दम तोड़ कर रह जाय। इसी रणनीति के तहत सरकार ने यकायक अपने पक्ष से पलटी मारते हुए प्रधानमंत्री, रक्षा मंत्रालय व उच्चत्तम न्यायपालिका को प्रस्तावित लोकपाल के दायरे से बाहर रखने की मंषा जग जाहिर की। सरकार को इस बात का अंदाज है कि इन तीना बातों के न मानने से अण्णा हजारे मजबूरी में आंदोलन करेंगे, यही सरकार चाह रही है।
बाबा रामदेव के व्यापक जनांदोलन से भयभीत सरकार को अपनी खुफिया तंत्र से इस बात का अंदाजा लग गया है कि इस आमरण अनषन में देष के हर कोने से लाखों लोग सम्मलित होने आ रहे है। यही नहीं देष के हर कस्बे व हर षहर में इस आंदोलन के समर्थन में व्यापक जनांदोलन चलाये जा रहे है। यह देख कर केन्द्र सरकार किसी भी तरह से बाबा रामदेव के दिल्ली के रामलीला मैदान में होने वाले आमरण अनषन को रोकने के लिए तरह तरह के कृत्य कर रही है। इसके पहले महत्वपूर्ण कदम में केन्द्र सरकार की रणनीति के तहत ही बाबा रामदेव के आमरण अनषन स्थल की स्वीकृति को दिल्ली पुलिस द्वारा रद्द किया। परन्तु जब पूरे देष में इसकी कड़ी भ्रत्र्सना हुई तो हार कर केन्द्र सरकार ने इस को पुन्न स्वीकृति प्रदान किन्तु परन्तु करके प्रदान कर ही दी।
अपनी इस रणनीति को असफल होते देख कर केन्द्र की जनविरोधी मनमोहनी सरकार ने आंदोलन के प्रति लोगों का ध्यान बंटाने के लिए सरकार ने यकायक अन्ना हजारे के नेतृत्व वाली समिति को अपने इस बात का यकायक खुलाषा किया कि सरकार लोकपाल कानून में प्रधानमंत्री, न्यायपालिका व रक्षा मंत्रालय को इसके दायरे में किसी भी कीमत पर नहीं रख सकती। सरकार को मालुम है कि अण्णा व उनके साथी अब चाह कर भी इस मांग पर सहमत नहीं हो सकते हैं व वे फिर से आंदोलन की राह पकड़ेगे।
अण्णा हजारे व साथी फिर से आंदोलन करे यह सरकार की रणनीति का अगला महत्वपूर्ण हिस्सा है। सरकारी रणनीतिकारों का मानना है कि अण्णा हजारे व साथियों का अनषन ठीक उसी समय षुरू होने से बाबा रामदेव के चल रहे आमरण अनषन के प्रति देष के लोगों का ध्यान बंटेगा। इससे जहां ये दोनों आंदोलन अपने जनसमर्थन के अभाव में आपस में टकरा कर दम तोड़ देंगे। गौरतलब है कि सरकार की मंषा को भाप कर अण्णा हजारे व उनके सभी साथी नाराज है। नाराज अन्ना 6 जून की बैठक के बाद कर सकते हैं बहिष्कार । वहीं मूल मुद्दे नहीं मानने से अन्ना की प्रतिष्ठा लगी दांव लगी है। परन्तु सरकारी पक्ष का कहना है कि किसी एक व्यक्ति की प्रतिश्ठा को बचाने के खातिर देष के प्रधानमंत्री को लोकपाल के हवाले करके देश को मुसीबत में नहीं डाला जा सकता । संयुक्त समिति में सरकारी पक्ष देश की सुरक्षा का हवाला देते हुए रक्षा मंत्रालय के अफसरों को सरकार ने लोकपाल के दायरे से बाहर रखने का सुझाव दे रहे है।
छह जून को होने वाली अगली बैठक के बाद वह लोकपाल मसौदे के लिए बनी संयुक्त समिति की बैठकों का बहिष्कार भी कर सकते हैं। अन्ना को सरकार की यह बात रास नहीं आई है कि लोकपाल के दायरे में प्रधानमंत्री को लाने से सरकार देश को ठीक से नहीं चला सकती। वहीं उच्चत्तर न्यायापालिका को भी लोकपाल से बख्शने के लिए सरकार की यह दलील भी कि थोड़े ही जज भ्रष्ट हैं अन्ना ने खारिज कर दी है। जहां सरकार प्रधानमंत्री और बड़े जजों को तथा संसद के भीतर सांसदों के कृत्यों को लोकपाल की मार से बाहर रखने की जिद कर रही है वहीं अन्ना ने भी दो टूक कह दिया है कि बिना इसके मजबूत लोकपाल नहीं बनेगा। इसलिए वह सरकार के साथ इन मुद्दों पर हरगिज समझौता नहीं करेंगे। अन्ना के साथी सरकार की इस पलटी से न केवल अन्ना अपितु उसके सभी समर्थक भी भौचंक्के हैं।
वहीं दूसरी तरफ बाबा रामदेव के भ्रश्टाचार के खिलाफ व्यापक जनांदोलन के समर्थन में पूरे देष से लाखों लोगों के जुटने की तैयारियां जोरों पर है। स्वयं बाबा रामदेव पूरा देष भ्रमण कर चूके है। उनका संगठन पूरे देष के लोगों को इस आंदोलन में जोड़ने की रणनीति को अंतिम रूप दे चूका है। अब देखना है कि बाबा रामदेव को सरकार अण्णा हजारे की तरह अपने किसी दाव में फांसती है या बाबा रामदेव सरकार को अपनी बातों को स्वीकार करने के लिए मजबूर करते। निर्णय जो भी हो इस बात से कोई इनकार नहीं कर सकता है कि बाबा रामदेव व अण्णा हजारे ने पूरे देष के जनमानस को भ्रश्टाचार के खिलाफ संघर्श करने के लिए लामबंद कर दिया है। मृतप्राय देष को जीवंत कर दिया हैं। इसी कारण पूरे देष के हुक्मरान सहमें हुए है। षेश श्रीकृश्ण। श्री कृश्णाय नमो। हरि ओम तत्सत्।

Thursday, May 26, 2011

भगवान राम के नहीं अपितु निषंक की षरण में है भाजपा- संघ

भगवान राम के नहीं अपितु निषंक की षरण में है भाजपा- संघ/
अपने निहित स्वार्थो के लिए भाजपा का बेडा गर्क करने पर तुले हैं गड़करी व आडवाणी

एक समय था जब भाजपा व उसकी मातृ संस्था देष की जनता को भ्रश्टाचार रहित सुषासन व रामराज्य स्थापित करने के सपने देष की जनता को दिखाते थे। आज समय है कि भाजपा व संघ के नेता भारतीय संस्कृति की उदगम स्थली देवभूमि उत्तराखण्ड में वर्तमान में आसीन भाजपा सरकार के मुख्यमंत्री रमेष पोखरियाल की षरण में है। हाई कोर्ट से लेकर सर्वोच्च न्यायालय में निषंक सरकार के भ्रश्टाचार के मामले चल रहे हैं, प्रदेष के वरिश्ठ व जनाधार वाले पूर्व मुख्यमंत्री भगतसिंह कोष्यारी व भुवनचंद खंडूडी लम्बे समय से भाजपा हाईकमान से निरंतर इन भ्रश्टाचार आदि मामलों से जनता की नजरों में पूरी तरह से बेनकाब हो चूके रमेष पोखरियाल निषंक को तत्काल बदलने की मांग कर रहे हैं। परन्तु क्या मजाल की रामराज्य व सुषासन की बात करने वाली भाजपा व संघ किसी भी कीमत पर निषंक को हटाने के लिए तैयार ही नहीं है। पार्टी जाय भाड़ में, नैतिक मूल्य जाय भाड़ में परन्तु आला नेताओं आडवाणी, गडकरी व थावर चंद गहलोत की नाक व हितों पर आंच नहीं आनी चाहिए। इसी लिए 26 मई को गड़करी ने निषंक, खंडूडी व कोष्यारी की दिल्ली में बैठक ले कर अपना धृतराश्ट्रीय फरमान सुना डाला की निषंक को मुख्यमंत्री की कुर्सी से चुनाव से पहले किसी भी कीमत पर नहीं हटाया जायेगा। भले ही जनता की आंखों में धूल झोंकने के लिए गडकरी ने चुनाव निषंक, खंडूडी व कोष्यारी के संयुक्त नेतृत्व में लड़ा जायेगा और मुख्यमंत्री कौन बनेगा इसका चयन विधानसभा चुनाव के बाद निर्वाचित विधायक करेंगे। गड़करी जी जनता को बेवकूफ समझ रहे हैं उन्हें मालुम है कि गत विधानसभा चुनाव में भाजपा के 24 विधायकों का एक मत था भगतसिंह कोष्यारी को प्रदेष के मुख्यमंत्री बनाने की। तब भाजपा नेतृत्व ने अपनी जातिवादी संकीर्ण राजनीति को अंजाम दे कर देवभूमि में जातिवाद व क्षेत्रवाद का घिनौना जहर घोल दिया। इसके बाद भी जबरन जातिवादी व क्षेत्रवादी संकीर्णता के तहत ही पूर्व मंत्री केदारसिंह फोनिया जैसे ईमानदार व वरिश्ठ विधायक को नजरांदाज कर निषंक को मुख्यमंत्री के पद पर आसीन कर के प्रदेष की जनता को गहरा सदमा दिया। अब गड़करी जी को विष्वास है कि भाजपा ने सत्ता में तो आना नहीं इसलिए अपनी हार को सम्मानजनक बनाने के लिए कोल्हू के बैल की तरह खंडूडी व कोष्यारी को भी अपने प्यादे निषंक के साथ जोड़ ने का हथकण्डा अपना रहे है। गड़करी से देष की जनता को आषा थी उन्होंने अपने चंद दिनों में ही अपने ऐसे ही कार्यो से उसमें पानी फेर दिया। अब वह दिन दूर नहीं जब वे बंगारू लक्ष्मण, बैंकटया नायडू व राजनाथ सिंह की तरह भूतों की पंक्ति में सुषोभित होंगे।
गड़करी जी षायद यह भूल गये कि इन चुनाव का फेसला ं भाजपा के कार्यकत्र्ताओं ने नहीं अपितु उत्तराखण्ड की उस महान जनता ने करना है जिसने मुगल, फिरंगी, इंदिरा, राव, मुलायम व तिवारी जैसे जन विरोधी हुक्मरानों को तमाम नापाक कोषिषों को जमीदोज करने का काम किया। ऐसा ही सबक उत्तराखण्ड की जनता भाजपा को लोकसभा चुनावों में भी पूरी तरह है सफाया करने के बाद भी सिखा चूकी है। उत्तराखण्ड की जनता कभी अन्यायी, भ्रश्टाचारी, जातिवादी व क्षेत्रवादी सत्तांधों को एक पल के लिए नहीं सहती। इसका भान होने के बाबजूद क्यो आडवाणी व गड़करी अपने अभी तक कराये चुनाव पूर्व सर्वेक्षणों की रिपोर्ट देखने के बाबजूद उत्तराखण्ड के हितों को निर्ममता से रौंद रहे निषंक को मुख्यमंत्री की कुर्सी पर दल के वरिश्ठ नेताओं व तमाम कार्यकत्र्ताओं को नजरांदाज करते हुए अपने निहित स्वार्थो के लिए अभय दान दे रहे है। संघ नेतृत्व क्यों मौन हैं उत्तराखण्ड देवभूमि हैं यहां के लोगों ने अपने स्वाभिमान के खातिर मुगलों की दासता स्वीकार करने के बजाय दुर्गम पहाड़ों की खाक छाननी श्रेयकर समझा। ऐसे स्वाभिमानी जनता व देवभूमि के हितों के साथ खिलवाड़ करने का दण्ड भाजपा ने पहले भी चुकाया और आने वाले समय में भी चुकाना पड़ेगा। उत्तराखण्ड देवभूमि हैं इसके अभिषाप से कोई नहीं बच पाया। आडवाणी जी अब भी समय है देवभूमि के हितों से खिलवाड़ न करें, भगवान बदरीनाथ केदारनाथ, हरि हर की देव भूमि है। गंगा यमुना की उदगम स्थली है। नरसिंह भैरव सहित 84 करोड़ मुमुक्षुओं व दिव्यात्माओं की तपस्थली है। इसके अभिषाप से कोई नहीं बच सकता है। मेरी इच्छा थी कि भाजपा को लोकसभा चुनाव में देष की सत्ता में आसीन कराने की परन्तु यही षर्मनाक अहंकार व जनविरोधी तैवर भाजपा व संघ नेतृत्व का रहा तो राम ही जाने कितना षर्मनाक पतन होगा भाजपा का।

dharam ke nam par sabhi muslmano ko gali dene wale kabhi insan nahi ho sakte

dharam ke nam par sabhi muslmano ko gali dene wale kabhi insan nahi ho sakte

dharam ke nam par sabhi muslmano ko gali dene wale kabhi insan nahi ho sakte, bhartiya nahi ho sakte, hindu nahi ho sakte, Dharam or jati or chhetra or bhasha or gender ke nam par achha or bura nahi hota. Bhartiya Itihas gawah hai, jay chand, mansingh, atal or manmohan to hindu hain, shahid bhagat singh ke sath fanshi par chadhne wala bhi ek dharam se mushlman hi tha, pak ke sath udha main patant tanko ko dhwath karne wala capt hamid bhi ek muslman tha, bharat pak ka bantwara karne ke khilap aawaj uthane wala mollana abdul aajad or simant gandhi bhi ek musalman rahe, or bharat ko maha shakti banane wale Dr abdul Kalam bhi dharam se musalman hi hai. ye sab un rajnetawon se badhkar bhartiya or nek insan hain jinhone kaha tha ram lala hum aate hain mandir wahin banayenge, soghandh ram ki khate hain mandir wahin banayenge, or jese hi rajsata mili or kahne lage, mandir banana humare agende main nahi hai. www.rawatdevsingh.blogspot.com
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Tuesday, May 24, 2011

अन्ना हजारे की 1 जून कोे उत्तराखण्ड यात्रा से सहमी भ्रश्टाचारों में आकंठ घिरी सरकार

अन्ना हजारे की 1 जून कोे उत्तराखण्ड यात्रा से सहमी भ्रश्टाचारों में आकंठ घिरी सरकार/
खंडूडी व निषंक में सत्ता संघर्श तेज

एक जून को अन्ना हजारे की दून यात्रा का स्वागत करते हुए भाजपाइयों ने कहा कि हजारे के अभियान को समर्थन दिया जाएगा। जिस समय 24 मई को खंडूडी के यहां पर बैठक हो रही थी उसी समय प्रदेष के मुख्यमंत्री निषंक भी अपने मंत्रिमण्डल की बैठक ले रहे थे। इस पर कई कायस लगा रहे हैं कि मुख्यमंत्री ने अपने मंत्रियों को खंडूडी खेमें में जाने से रोकने के लिए यह कार्य किया। बात में कितनी सच्चाई हैं यह तो मुख्यमंत्री ही जाने परन्तु निषंक के राजनैतिक दावों से न केवल प्रदेष के वरिश्ठ भाजपा नेताओं के अपितु कांग्रेस सहित पूरी व्यवस्था व पत्रकारिता पर अपना मजबूत षिकंजा जकड़ लिया है। इसे देख कर लोग कह रहे हैं कि निषंक के मोहपाष में भाजपा संघ का आला नेतृत्व ही नहीं अपितु कांग्रेस के दिल्ली मठाधीष भी बंध चूके है। इसी कारण कांग्रेस ी जहां बड़े जोर षोर से भ्रश्टाचार के मुद्दे पर कर्नाटक के मुख्यमंत्री को आये दिन घेरते हैं परन्तु उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री को एक प्रकार से अभय दान सा दे रहे है। उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री के कारनामों का उल्लेख तक करने में कांग्रेसी मठाधीषों व प्रवक्ताओं को सांप संुध रहा है। यह देख कर निषंक सरकार के भ्रश्टाचार को हाईकोर्ट में बेपर्दा करने वाले सर्वोच्च न्यायालय के वरिश्ठ अधिवक्ता अवतार सिंह रावत भी दंग है। कांग्रेसी नेताओं की इस निर्लज्जता पूर्ण व्यवहार से राजनीति के समीक्षक इसे कांग्रेसी मठाधीषों की जातिवादी सोच को जिम्मेदार मान रहे है।
उत्तराखण्ड की राजनीति में कांग्रेस पार्टी के सांसदों सहित बड़े नेता प्रायः निषंक के भ्रश्टाचार पर बोलने पर कतरा रहे है। अपने सांसदों की मूकता पर नेता प्रतिपक्ष डा हरक सिंह रावत भी दंग है। वहीं दूसरी तरफ निषंक का राजतिलक कराने वाले मेजर जनरल खंडूडी की राजनैतिक जमीन को निषंक द्वारा पूरी तरह से कब्जाने से आहत हो कर पूर्व मुख्यमंत्री खंडूडी अपने आप को हाषिये में महसूस कर रहे है। इसी को भांपते हुए उन्होंने अपने समर्थकों की एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन अपने निवास देहरादून में किया। इस बैठक में पूर्व विधायक भारत सिंह रावत, पूर्व विधायक व दायित्वधारी तीरथ सिंह रावत, बदररीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के अध्यक्ष अनुसूया प्रसाद भट्ट, महिला आयोग की अध्यक्ष सुशीला बलूनी, देहरादून के मेयर विनोद चमोली, रविंद्र जुगरान, मोहल लाल बौंठियाल, टिहरी के जिला पंचायत अध्यक्ष रतन सिंह गुनसोला, उमेश अग्रवाल, ऋषिराज डबराल, पौड़ी के जिला पंचायत अध्यक्ष एम एस नेगी, राज्य सहकारी बैंक के अध्यक्ष उमेश त्रिपाठी , चमोली के विनोद करपवाण सहित ऊधमसिंह नगर, चंपावत, उत्तरकाशी आदि से कई भाजपाई मौजूद थे। इस बैठक के बाद खंडूडी व निषंक के बीच सत्ता संघर्श तेज हो गया है। सुत्रों के अनुसार पूर्व मुख्यमंत्री खंडूडी ही नहीं कोष्यारी भी भाजपा के आला नेतृत्व द्वारा निषंक का षर्मनाक संरक्षण करने पर हैरान ही है। क्योंकि खंडूडी के संरक्षक रहे ये नेता अब मुख्यमंत्री के पद पर निषंक के आसीन होने के बाद खंडूडी से उन्होंने अपनी कृपा दृश्टि एक प्रकार से हटा दी हे। राजनीति के इस सबक को देख कर खंडूडी जी जहां उमा भारती के हस्र को देख कर पार्टी से अलग हट कर राजनीति करने के अपने समर्थकों के भारी दवाब के बाबजूद भी स्वीकार करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे है। वहीं दूसरी तरफ भाजपा के आला नेतृत्व व अपने द्वारा बनाये गये मुख्यमंत्री निषंक द्वारा अपनी हो रही उपेक्षा से खंडूडी जी बहुत दुखी ही नहीं खिन्न भी हैं। इसी हालत में उन्हें अपना कोई हमदर्द नजर आ रहा है तो वह है कभी उनके राजनैतिक धुर विरोधी रहे पूर्व मुख्यमंत्री कोष्यारी। आज खंडूडी जी उस घड़ी को कोस रहे हैं जिस घड़ी उन्होंने अपने मुख्यमंत्री के पद पर हटने के बाद कोष्चारी के बजाय निषंक को प्रदेष के मुख्यमंत्री बनाने का निर्णय लिया। अपनी इस भूल को वह अपने राजनैतिक जीवन की सबसे बड़ी भूल बताते हुए अब नये सिरे से कोष्यारी के साथ निषंक को प्रदेष की सत्ता से हटाने के लिए केन्द्रीय नेतृत्व पर निरंतर दवाब बना रहे हे। खंडूडी ही नहीं कोष्यारी भी इस बात से हैरान हैं कि कैसे भ्रश्टाचार के विरोध में रही भाजपा का नेतृत्व आज उनके तमाम तर्को को नजरांदाज करते हुए निषंक को मुख्यमंत्री के पद पर आसीन होने का फरमान सुना रहे हैं। इसके साथ आला कमान जहां विधानसभा चुनाव से पहले ही प्रदेष की राजनीति से खंडूडी को केन्द्रीय संगठन का उपाध्यक्ष बना कर हाषिये में डालने का काम कर रहे हैं वहीं कोष्यारी की संगठन व आम जनता के बीच पकड़ को भुनाने के लिए उन्हें फिर निषंक के मुख्यमंत्रित्व में ही प्रदेष अध्यक्ष के पद पर आसीन करा कर निषंक को अभय दान देना चाह रहा है। भाजपा आला नेतृत्व की इस मंषा को भांप कर भले ही
दोनों पूर्व मुख्यमंत्रियों ने दो टूक षब्दों में इसे ठुकरा दिया हो परन्तु अभी आला नेतृत्व इतनी आसानी से हार मानने वाला नहीं। वह अपने वरिश्ठ इन दोनों नेताओं को अनुषासन का पाठ पड़ाने के लिए कृत संकल्प है। वहीं ंप्रदेष की हालत यह हो गयी हैं कि कांग्रेस के टिहरी क्षेत्र के तेज तरार नेता व प्रदेष के पूर्व मंत्री तथा वर्तमान विधायक किषोर उपाध्याय ने प्रदेष सरकार के भ्रश्टाचार को उजागर करने के कारण अपनी जान को मुख्यमंत्री व उनके लोगों से खतरे का आरोप लगाया। इस स्थिती में सहज है कि प्रदेष का सत्ता संघर्श कुछ दिनों में अपने उफान पर होगा। इस स्थिति के लिए भाजपा आला कमान के साथ साथ कांग्रेस के मठाधीष भी जिम्मेदार होंगे जो निषंक सरकार के कारनामों का मूक समर्थन कर रहे हैं।

चमत्कारी कोठुलेश्वर महादेव में भगवान हनुमान की मूति स्थापित


चमत्कारी कोठुलेश्वर महादेव में भगवान हनुमान की मूति स्थापित

नारायणबगड़(ंप्याउ)। भगवान शिव के चमत्कारी व प्राकृतिक कोठुलेश्वर महादेव में एकादश रूद्र के रूप में विश्व में वंदित भगवान हनुमान की मूर्ति की स्थापना मंगलवार 24 मई को पूरे विधि विधान से की गयी। इस अवसर पर सीमान्त जनपद चमोली के इस बदरीनाथ क्षेत्र की सीमा में स्थित नारायण बगड़ विकास खण्ड के आदर्श गांव कोठुली के कोठुलेश्वर महादेव मंदिर परिसर में ही भगवान हनुमान का मंदिर बनाय गया। चमत्कारी कोठुलेश्वर महादेव के श्रीमहंत खीमा भारती जी महाराज ने बताया कि 23 मई से हनुमान जी की पावन मूर्ति की स्थापना हेतु यहां पर विधिवत पूजा अर्चना हुई। 25 मई को भगवान हनुमान की पावन मूर्ति को पूरे विधि विधान से यहां पर स्थापित की गयी। इसमें कड़ाकोट व कपीरी पट्टियों के सेकड़ों भक्त भगवान कोठुलेश्वर महादेव में भगवान शिव व भगवान हनुमान के आर्शीवाद लेने यहां पंहुचे। 25 मई को ही यहां पर विशाल भण्डारे का आयोजन किया गया। इसमें बड़ी संख्या में कोठुली, कोथरा, सुनभी, भटियाणा, चिरखून, कोट, सैंज, कफातीर व पाट्टियों के ग्रामीणों के अलावा इस आयोजन के मुख्य यजमान कपीरी पट्टी के सुणे गांव के मंगसीरी देवी व भगतसिंह मनराल दम्पति थी। इस दम्पति की इस चमत्कारी कोठुलेश्वर महादेव में अथाह श्रद्वा है। इससे पहले भी यह दम्पति यहां पर महाकाल भैरव की मूर्ति की भी स्थापना कर चूका है। गौरतलब है कि कोठुलेश्वर महादेव में भगवान शिव के इस चमत्कारी मंदिर में जो भी भक्त जो भी सच्चे मन से मनोकामना करता है भगवान शिव सदा उनकी मनोकामनाएॅं पूर्ण करता है। नारायणबगड़ विकासखण्ड के भाजपा अध्यक्ष पुरूषोत्तम शास्त्री के अनुसार कोठुलेश्वर महादेव में भगवान शिव न केवल मनोकामनाएं ही पूर्ण करते हैं अपित वे दुष्टों को तत्काल दण्डित भी करते है। भगवान शिव की इस पावन परिसर में अगर कोई दुरात्मा इसकी पावनता को नष्ट करने की धृष्ठता करता है तो उसको तत्काल इसका दण्ड भगवान शिव देते है। भगवान शिव का यह चमत्कारी धाम कोठुलेश्वर महादेव, रहस्यमय रामचाणा की तलहटी में तथा पतित पावनी गंगा की सहभगिनी मंदाकिनी व पिण्डर नदियों के मध्यक्षेत्र कड़ाकोट पट्टी के कोठुली गांव में सदियों से अपने भक्तों की श्रद्वा का केन्द्र रहा है। भगवान शिव के इस द्वार पर आ कर आज तक कोई भी सच्चा भक्त निराश नहीं हुआ। भगवान शिव के चमत्कारों के किस्से यहां के लोगों की जुबानों में आये दिन चर्चा में सुनाई देते है। यही नहीं इस क्षेत्र के दर्जनों गांवों के ग्रामीणों पर जब व्यक्तिगत या सामुहिक विपतियां आती है तो वे कोठुलेश्वर महादेव से फरियाद करने उनके दर पर आते हे। अकाल, व्याधि हो या सूखा आदि विपत्तियों का निवारण करने हेतु दशकों से लोग भगवान शिव के इस द्वार पर आते हे। इस मंदिर में स्थित भगवान शिव स्वरूप आपलिंग दक्षिणायन को दक्षिण दिशा में तथा उत्तरायण में उत्तर दिशा की तरफ आंशिक रूप से ढला रहता हैं। इस आपलिंग को और ऊंचा करके भव्य मंदिर बनाने के यहां के विख्यात श्रीमहंत रहे स्वामी श्री सिद्वगिरी बाबा जी के तमाम प्रयास असफल रहे। क्योंकि 10 फुट शिवलिंग के आस पास खुदान के बाबजूद भी शिवलिंग की ऊंचाई उतनी ही रही जितनी पहले थी। इसके बाद भगवान शिव ने श्री महंत को सपने में आदेश दिया कि उनसे किसी प्रकार का छेड़छाड़ न करें। इसके बाद यह खुदाई बंद कर दी गयी। इस खुदाई में यहां पर कई देवी देवताओं की दुर्लभ मूर्तियां मिली जो यहां मंदिर परिक्रमा व मंदिर परिसर में आज भी भक्तों के दर्शन के लिए विद्यमान है। आज वर्तमान मंदिर को देख कर इस सच्चाई से सभी दर्शनार्थी स्वयं भी रूबरू होते है। वर्तमान श्रीमहंत खीमा भारती जी महाराज के अनुसार कोठुलेश्वर महादेव में भगवान शिव साक्षात विद्यमान है। यहां पंहुचने के लिए भक्त कर्णप्रयाग व नन्द प्रयाग के बीच में स्थित सुनला से जीप मार्ग द्वारा कोठुलेश्वर महादेव पंहुचने के लिए बिनायक ग्वाड़ पंहुच सकते हैं। यहां से 2 किमी पैदल चल कर यहां कोठुलेश्वर महादेव पंहुचा जा सकता है। दूसरा रास्ता कर्ण प्रयाग से कपीरी कनारा जीप से पंहुच कर यहां से 6 किमी पैदल राह चल कर भगवान शिव के साक्षात दर्शन किये जा सकते है। तीसरा रास्ता कर्णप्रयाग से ग्वालदम रोड़ पर नारायण बगड़ से 6 किमी पहले नलगांव से 10 किमी पैदल रास्ते से यहां पंहुचा जा सकता है। इसके अलावा एक अन्य रास्ता जो नारायणबगड़ से जीप मार्ग द्वारा रेंस-चोपता पंहुच कर 5 किमी पैदल चल कर कोठुलेश्वर महादेव में पंहुचा जा सकता है। हालांकि एक रास्ता घाट विकास खण्ड से बारों मोख होते हुए ब्रह्मपुरी के जंगलों से 10 किमी का रास्ता तय कर यहां पंहुचा जा सकता है।

Monday, May 23, 2011

भारत में आतंक अमेरिका के इशारे पर फेला रहा था पाक व हेडली

भारत में आतंक अमेरिका के इशारे पर फेला रहा था पाक व हेडली
मुम्बई हमलों की साजिश रचने के लिए दोषी समझे जाने वाले अमेरिका में बद तहब्बुर राणा व डेविड हेडली को अमेरिकी एटार्नी सराह स्ट्रीकर द्वारा शिकागो की अदालत में पाकिस्तान की खुफिया ऐजेन्सी आई एस आई से सम्बंध होने की बात को जिस तरह से भारतीय मीडिया में प्रचार किया जा रहा है। वह भारत को आतंक की भट्टी में धकेलने वाले असली गुनाहगार को बचाने में ही मददगार साबित हो रहा है। असल में भारत में आतंक की तबाही का असली सूत्र धार न तो आतंकी है व नहीं पाक, दोनों ही अमेरिका के इशारे पर भारत ही नहीं अफगानिस्तान में भी आतंक को अंजाम दे रहे है। पाकिस्तान की सेना, नोकरशाह, सत्तासीन ही नहीं आतंकी संगठन भी अमेरिका के प्यादे मात्र है। इसका खुलाशा हेडली को अमेरिका द्वारा भारत को न सोंपने से ही हो जाता है। क्योंकि जिस हेडली को आईएसआई का ऐजेन्ट बताया जा रहा है वह हकीकत में अमेरिका का ही ऐजेन्ट है। वह आईएसआई में कार्यरत अमेरिका के सीआईए का ऐजेन्ट है। इसीलिए अमेरिका ने अपने ऐजेन्ट को किसी भी हालत में न तो मुम्बई हमलों का षडयंत्रकारी होने के बाबजूद न भारत को सौंपा व नहीं भारतीय ऐजेन्सियों को सही ढ़ग से उससे जांच करने की ही इजाजत दी। इसलिए भारतीयों व भारतीय हुक्मरानों को केवल आईएसआई या पाक को गरियाने से इस समस्या का समाधान नहीं निकलेगा। भारत में आतंक की असली जड़े अमेरिका द्वारा पोषित व संरक्षित होती है। ये साधन भले ही पाक या अन्य माध्यमों के माध्यम से प्रदान किये जाय परन्तु असल में भारत को आतंक से कमजोर करने के लिए अमेरिका एक दो साल से नहीं दशकों से लगा हुआ है। भारत में चाहे पूर्वोत्तर का आतंक हो या कश्मीर का, खालिस्तानी आतंक हो या अन्य इन सभी आतंको को संरक्षण व पोषण करने का काम केवल अमेरिका ने ही किया। जिस प्रकार से संसद व कारगिल प्रकरण के बाद अमेरिका ने अपने प्यादे पाक की ढ़ाल बन कर भारतीय हुक्मरानों को पाक को सबक सिखाने से रोका उससे उसका चेहरा पूरी तरह से बेनकाब हो चूका था परन्तु जब भारत में अटल व मनमोहन सिंह जेसे अमेरिकी मोह में अंधे धृतराष्ट्र सत्तासीन हों तो देश के हितों को रौंदने के लिए दुश्मनों की क्या जरूरत।

असुरक्षित पाक की परमाणु शक्ति को तत्काल नष्ट करे अमेरिका

आतंकी पाक की परमाणु शक्ति को तत्काल नष्ट करे अमेरिका
-कराची नौ सेनिक अड्डे पर हुए आतंकी हमले ने साबित किया कि पाक के परमाणु हथियार भी असुरक्षित हैं

रविवार 22 मई को तालिबानी आतंकियों द्वारा पाकिस्तान व अमेरिका द्वारा अपने आका ओसमा बिन लादेन की हत्या के लिए जिम्मेदार ठहराते हुए उसका बदला लेने के लिए पाकिस्तान के तटीय शहर कराची स्थित नौसेना के मेहरान हवाई ठिकाने पर विनाशकारी हमला किया। इस हमले से न केवल पाकिस्तानी हुक्मरान अपितु अमेरिका सहित भारतीय सुरक्षा ऐजेन्सियां सहम सी गयी।इस हमले से एक बात साफ हो गयी कि पाकिस्तान के परमाणु अस्त्र अब सुरक्षित नहीं हैं उन पर कभी भी आतंकी कब्जा कर सकते है। इसलिए अमेरिका जिसने पाकिस्तान को आणविक अस्त्रों से सुसज्जित व विश्व को तबाह करने वाला आतंकी देश बनाया, उसका अब सर्वोच्च दायित्व बनता है कि वह अविलम्ब पाकिस्तानी परमाणु अस्त्रों को कब्जा कर लादेन की तरह तबाह कर दे। यही अमेरिका के पाक को विश्व के लिए सबसे बड़ा खतरनाक देश बनाने की अक्षम्य भूल की प्रायश्चित होगा। लादेन की हत्या के बाद जिस प्रकार से लोगों को यह भ्रम हो गया था कि अमेरिका ने आतंकवाद की कमर तोड़ दी परन्तु आतंकियों ने पाकिस्तान की सेना पर उसके अड्डे पर ही हमला करके अपने मंसूबों व ताकत को जग जाहिर कर दिया कि अब भी वे कमजोर नहीं है। हालांकि इस आतंकी हमले पर कई घण्टों की मुठभेड़ के बाद काबू पा लिया है। इस हमले में सेना के कम से कम 12 जवान मारे गए, जबकि हमलावरों ने चीनी सैन्य कर्मियों सहित कुछ लोगों को बंधक बना लिया था।
पाकिस्तानी तालिबान ने इस हमले की जिम्मेदारी लेते हुए इसे अलकायदा सरगना ओसामा बिन लादेन की मौत का इंतकाम करार दिया है।
इस हमले के बाद अमेरिका सहित विश्व की सुरक्षा के लिए एक ही विकल्प शेष रह जाता है कि अमेरिका अपने प्यादे पाकिस्तान के तमाम परमाणु अस्त्रों को यथाशीघ्र ही कब्जे में लेने के लिए लादेन पर किये जैसे ही हमला करे। क्योंकि लादेन की तरह ही पाकिस्तान को भी अमेरिका की कृपा व सहयोग से ही आज विश्व शांति के लिए खतरा बन गया है। अपने इन कुकृत्यों के लिए विश्व जनसमुदाय से माफी मांगते हुए अमेरिका को प्रायश्चित करने के लिए तत्काल पाकिस्तानी परमाणु अड्डों को तबाह कर परमाणु अस्त्रों को आतंकी हाथों में पंहुचने के लिए लादेन पर किये गये छापामार हमला करना चाहिए। इसमें जरा सी भी अमेरिका ने देर लगायी तो यह अमेरिका के साथ साथ विश्व शांति के लिए भी खतरा हो सकता है।
इस प्रकरण पर भारत सहित विश्व के आतंकवादी गतिविधियों पर गहरी नजर रखने वाले सभी समीक्षक बार बार इस बात को दोहरा रहे थे कि अमेरिका के शह पर ही न केवल लादेन अपितु उसका अलकायदा व पाक भी विश्व की शांति के लिए एक गंभीर खतरा बन गया है। इसके साथ साथ अमेरिका ने विश्व में अपना परचम फहराने के लिए व रूस व चीन तथा भारत पर अंकुश लगाने के लिए पाकिस्तान को अपना जो अंध समर्थन दिया और उसे रूस के खिलाफ अफगानिस्तान व भारत के खिलाफ दशकों तक संरक्षित व मजबूत बनाता रहा आज उसी का परिणाम है कि पाकिस्तान अमेरिका की सुरक्षा के लिए ही नहीं अपितु पूरे विश्व की सुरक्षा के लिए लादेन व अलकायदा से भी भयंकर आतंकी बन गया है। लादेन व अलकायदा का तो कोई एक ठोर ठिकाना नहीं था परन्तु पाकिस्तान तो एक राष्ट्र की तरह आज पूरे विश्व के अमन चैन पर ग्रहण लगाने वाला आतंकी राष्ट्र ही बन गया है।
वहां पर अमेरिका के अंध संरक्षण में ऐसा कठरपंथी समाज व जमात तैयार हो गयी है जो अब किसी भी तरह अमेरिका सहित किसी के अंकुश मानने के लिए तैयार नहीं हे। वह पूरे विश्व में इस्लाम का परचम फेहराने के लिए समर्पित आतंकियों की फेक्टरी ही बन गयी है। ऐसे में चाहे पाक में सेना हो या राजनैतिक दल, सामाजिक संगठन हो या धार्मिक संगठन, विधालय हो या अन्य खेल इत्यादि संगठनों का भी एक प्रकार से आतंकीकरण हो गया है। इसका प्रत्यक्ष उदाहरण अमेरिका के सम्मुख तक सामने आया जब अमेरिका को मालुम हुआ कि जिस लादेन को वह पूरे विश्व में तलाश रहा है वह लादेन कहीं नहीं अपितु उसके आस्तीन के सांप साबित हो चूके उसके मित्र पाक ने ही अपनी मिलेटरी के संरक्षण में सुरक्षित पनाह दे रखी है।
अब जब लादेन मारा गया। तो अमेरिकियों की आंखें खुली या खुलने का ढोंग कर रहा है। उसके बाद जिस प्रकार से पाक व अमेरिका में लादेन को आतंकी बनाने व अलकायदा को विश्व का सबसे खतरनाक आतंकी जमात बनाने के सम्बंध में आरोप एक दूसरे पर लगा रहे है। परन्तु इस दृष्टि से साफ है कि लादेन के साथ साथ अलकायदा को आतंकी संगठन बनाने में जहां अमेरिका का ही एक मात्र हाथ है, उसने सीधे साधे मुस्लिमों की धार्मिक भावनाओं को भड़का कर उसे रूस के खिलाफ अपने स्वार्थों के लिए भड़काया। इसके साथ ही उसने पाकिस्तान को भी उसकी भारत विरोधी भावनाओं को हवा व संरक्षण दे कर भड़काने का काम किया। अमेरिका ने न केवल लादेन व अलकायदा के साथ पाकिस्तान को भी अपने निहित स्वार्थो के खातिर आतंक की गर्त में धकेल कर भ्रष्मासुर बनाया। आज जब यह भ्रष्मासुर खुद अमेरिका को ही ग्रसने के लिए मुंह खोल रहा है तो तब अमेरिका को लगा कि उससे भूल होगयी।
लादेन व अलकायदा ने देखा कि जिस अमेरिका ने मुस्लिमों का हमदर्द बन कर अफगानिस्तान में काबिज रूस को भगाने के लिए उनको जंग की आग में झोंका था वह जंग फतह करने के बाद अफगानिस्तान में काबिज उसी ढंग से होना चाह रहा है जिस प्रकार से रूस अपने प्यादों के सहयोग से अफगानिस्तान में काबिज होना चाह रहा था। ऐसे में अमेरिका के खिलाफ उसके अपने ही बनाये गये भ्रष्मासुर लादेन व अलकायदा आदि आतंकी जमात हो गयी। जिन लोगों को वह रूस के साथ जंग करते समय महान बहादूर बताता था उन्हीं को अमेरिका ने अपनी कलई खुलते देख कर आतंकी बताना शुरू कर दिया। यही नहीं पाक को भी अमेरिका ने पूरी तरह से अपना गुलाम बना रखा है। वहां पर वह कभी भी लोकतंत्र स्थापित नहीं होने देता। उसने अपने प्यादों को तानाशाह व लोकशाही के नाम पर यहां पर आसीन कर वहां अमेरिका के हितों का अड्डा ही बनाया। ऐसे में अमेरिका के खिलाफ पाकिस्तान की आम अवाम में गुस्सा होना जाहिर हे। पाकिस्तानी अवाम को जब यह दिखाई देता कि उनके मूल देश भारत में विकास व लोकशाही का परचम फहरा रहा है व उनके देश में लूटशाही व तानाशाही का ही राज चल रहा है। इससे लोगों की नजरों में अमेरिका का असली चेहरा सामने आ गया। ऐसे में पूरे पाकिस्तान की आम अवाम में अमेरिका के प्रति गुस्सा दिन प्रति दिन बढ़ता ही जा रहा है। अमेरिका के शह पर ही पाकिस्तान ने भारत को तबाह करने के उद्देश्य से परमाणु अस्त्र बनाये हुए है। परन्तु आज जब अमेरिका को लग रहा है कि अब पाकिस्तान उसके लिए खतरा बन गया है तो वह भारत के कंधे में बंदुक रख कर पाक के साथ उसको भीड़ा कर दोनों मुल्कों को तबाह कर अपना हित साधना चाहता है।
जो भी हो वह किसी भी कीमत पर मजबूत भारत को नहीं देख सकता। क्योंकि मजबूत भारत उसके सम्राज्य के एकाधिकार को खुली चुनौती दे सकता है। इसी कारण अमेरिका वक्त आने पर भारत व पाक को भीड़ा कर दोनों को तबाह करना चाहता है। दोनों को कमजोर करना चाहता है। इसके अलावा अमेरिका को एक और डर सता रहा है कि पाकिस्तान के परमाणु हथियार कहीं भूल भटके किसी तरह अगर आतंकी जमातों के हाथ लग गये तो वे अमेरिका को इन परमाणु बमों से तबाह कर सकते है। इसी दुविधा व आशंका से भयभीत हो कर अमेरिका में इन दिनों यह जनमत बन रहा है कि हर हालत में पाकिस्तान के परमाणु अस्तों को ठीक लादेन पर किये गये हमले की तरह ही हमला कर नष्ट या कब्जे में ले कर पाकिस्तान को परमाणु अस्त्र से मुक्त किया जाय। उसकी परमाणु क्षमता को कुंद किया जाय।
इसी आशंका को भांपते हुए पाक ने भी अपनी सुरक्षा की तैयारी के लिए चीन का भी सहयोग मांगा है। हालांकि चीन भी किसी भी कीमत पर अमेरिका के जंग में टांग नहीं अडायेगा। क्योंकि उसे मालुम है कि देर न सबेर पाकिस्तान के आतंकी उसके लिए भी सरदर्द बन जायेंगे।
इसके अलावा अमेरिका को इस बात की भी आशंका है कि पूरे विश्व के मुसलमान उसके खिलाफ होने लगे है। परन्तु उसके सैन्य दृष्टि से कोई भी विरोध करने का साहस तक नहीं जुटा पा रहा है। जिस प्रकार से लादेन के कत्ल को पूरे इस्लामी जगत में शहादत माना जा रहा है। जिस प्रकार से पाकिस्तान ही नहीं पूरे अरब जगत के अलावा भारत के श्रीनगर क्षेत्र में बड़ी संख्या में मुस्लिमों ने प्रदर्शन किया। लादेन की मौत पर विशेष प्रार्थना व प्रदर्शन किया उससे साफ हो गया है कि आने वाले समय में लादेन विश्व मुस्लिम जगत के लिए एक बडे शहीद का दर्जा अमेरिका ने दे ही दिया है।
ऐसी स्थिति में अब अमेरिका के पास एक ही रास्ता बच गया है कि वह अपनी व विश्व की रक्षा के लिए अविलम्ब पाकिस्तान के परमाणु अड्डों को तबाह कर दे। नहीं तो आने वाले समय में ये ही अस्त्र अमेरिका सहित पूरे विश्व की शांति के लिए सबसे बड़ा खतरा बन जायेगा।
आज जरूरत है अमेरिकी नेतृत्व को अपनी पुरानी भूलों को सुधारने की। विश्व जनमत से अपने पापों के लिए माफी मांगने की। विश्व की शांति पर ग्रहण लगाने के अपने कृत्य का प्रायश्चित कर अमेरिका केवल पाक पर तत्काल हमला कर उसके परमाणु अस्तों को लादेन की तरह शिकंजे में लेने की। यही अमेरिका के लिए सबसे बड़ी विश्व सेवा होगी। शेष श्री कृष्ण कृपा। हरि ओम तत्सत्। श्रीकृष्णाय् नमो।

Sunday, May 22, 2011

अनुदान ने लगाया समाजवाद की प्राणवायु श्रमदान पर ग्रहण

अनुदान ने लगाया समाजवाद की प्राणवायु श्रमदान पर ग्रहण
गैरसैंण राजधानी श्रमदान से बनाने को तैयार हैं उत्तराखण्डी

उत्तराखण्ड की सामाजिक सहभागिता जैसी अनुकरणी परंपरा पर आज सरकारी कोष से मिलने वाले अनुदान ने एक प्रकार से ग्रहण ही लगा दिया है। लम्बे समय से मेरे मन में इस विषय पर एक गहरी टिश थी। इसको हवा दिया उत्तराखण्ड के पूर्व मुख्यमंत्री राज्य सभा सांसद भगत सिंह कोश्यारी ने यह कह कर कि अनुदान ने श्रमदान व्यवस्था को समाप्त कर दिया है। ऐसे में किसान व पशुपालक पूरे मनोयोग से दुग्ध क्षेत्र में नई श्वेत क्रांति का सूत्रपात करें। उत्तराखण्ड के जमीनी नेताओं में अग्रणी जननेता श्री कोश्यारी बेतालघाट के ग्राम मझेड़ा में उत्तराखंड सहकारी डेयरी फेडरेशन के तत्वावधान में चार करोड़ की लागत से बनने वाले प्रशिक्षण संस्थान के शिलान्यास समारोह में बतौर मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए अपनी इस वेदना को भले ही मजाक में कहा हो परन्तु यह हकीकत है कि आज इस सरकारी अनुदान को हड़ने की प्रवृति ने उत्तराखण्ड में शताब्दियों से सच्चे समाजवाद को संचालित करने वाले प्राणवायु श्रमदान को नष्ट कर दिया। इस समारोह में श्री कोश्यारी ने कहा कि गौ पालन के क्षेत्र में रोजगार की अपार संभावनाएं हैं। वह स्वयं भी इस कार्य में दुग्ध उत्पादकों को पूरा सहयोग देंगे। श्री कोश्यारी ने चुटकी लेते हुए कहा वह तो गोपाल सिंह के पुत्र हैं तो उनके तो खून में ही गोपाल बसे हैं। उन्होंने फेडरेशन के कार्यालय भवन के निर्माण को सांसद निधि से पांच लाख रुपए देने की घोषणा भी की।
इस अवसर पर फेडरेशन के अध्यक्ष डॉ.मोहन सिंह बिष्ट ने कहा कि डेयरी प्रशिक्षण संस्थान के निर्माण को राज्यसरकार ने पहली किस्त के रूप में एक करोड़ निर्गत किए हैं। यह संस्थान हिमालयी राज्यों में एक खास प्रशिक्षण केंद्र है। इससे क्षेत्रीय युवाओं व पशुपालकों के साथ ही आने वाली पीढ़ी को भी बड़ा लाभ मिलेगा। श्री बिष्ट के इस वक्तव्य को यह संस्थान कहां तक साकार करता है परन्तु एक बात स्पष्ट है कि आज पूरे उत्तराखण्ड में भ्रष्टाचार को आत्मघाति तौर पर दावानल की तरह बढ़ने के कारण अनुदान के कारण श्रमदान परंपरा का ह्रास होना भी है।
प्रदेश के लोग एक दूसरे व सार्वजनिक निर्माण के लिए अनुदान पर नहीं श्रमदान पर विश्वास करते थे। उत्तराखण्ड के महान लोगों ने प्रदेश में अब तक तमाम मार्ग व स्कूल तथा नहरें इत्यादि भी श्रमदान से ही बनायी थी। इसमें चाहे नहर निर्माण हो या किसी आम गरीब आदमी के मकान गौशाला इत्यादि का निर्माण हो। एक दशक पहले तक उत्तराखण्ड में श्रमदान की विलक्षण परमपरा विद्यमान थी। यह केवल पुरूषों में ही नहीं अपितु उत्तराखण्ड की मूल रीढ़ समझी जाने वाली महिलाओं में भी बड़ी स्तर पर विद्यमान थी। पहले गांवों में यह देखने को प्रायः आता था कि किसी की खेत गोडाई या फसल कटाई समय पर अन्य लोगों के साथ नहीं हो पाती तो पूरा गांव की महिलायें उस महिला के साथ निस्वार्थ श्रमदान के रूप में काम पूरा करती थी। यही स्थिति गांव में खेत की जुताई के समय भी होता था। कभी कभार गांव के किसी व्यक्ति का समय पर खेत हल जुताई नहीं होती थी या उसके पास उस समय बेल जोतने के लिए न हो, या अन्य किसी कारण से किसी के खेत हल लगाने से रह जाते थे तो पूरे गांव के लोग अपने अपने घर से खाना खा कर अपने बेलों को लेकर उसके खेतों को जोत देते थे। कहीं कहीं तो देखने में यह भी आता था कि लोग अपने ही घर से जब किसी के पास बीज न हो तो बीज को लेकर उसके खेतों को आबाद करते थे। यही सहभागिता हर सुख दुख में होती थी। गांव के लोगों का सुख दुख सांझा होता था। पहले जमाने में भले ही वहां के लोगों में अशिक्षा व धनाभाव हो परन्तु उनमें सामाजिकता व मानवीयता कूट-कूट कर भरी होती थी। चाहे गरीब प्रतिभाशाली बच्चे को पढ़ाना हो या किसी गरीब बेटी की शादी करनी हो सब मिल कर करते थे। सहयोग से करते थे। एक की बेटी सबकी बेटी होती थी। बिना बोले ही सब उस कार्य को हर हाल में सम्पन्न कराने में लगे रहते थे। लोगों का चुल्हा सांझा था। एक घर में आग जलती तो उससे पूरे गांव में आग बांटी जाती थी। किसी के घर में बनी सब्जी से दूसरे के घर की रोटियां भी मिल बांट कर खाई जाती थी। एक दूसरे को खाने के लिए पूछने की एक आदर्श परंपरा थी। यहां खाना ही नहीं नमक तक मिल जुल कर बांट कर खाने की आदर्श परंपरा थी।
अगर आज हमने एक बार फिर उत्तराखण्ड सहित भारतीय समाज को एक आदर्श समाज बनाना है तो हमें सरकारी अनुदान पर बंदरबांट करने के बजाय समाज में श्रमदान की पद्वति को दुबारा से पुन्न स्थापित करनी होगी। सहभागिता के बिना समाज का निर्माण हो ही नहीं सकता। इसी श्रेष्ठ परंपरा को सिख धर्म में आज भी अंगीकार कर रखा है। आज भी सिख पंथ में जो भी बड़े काम होते हैं वहां हर आदमी कार सेवा यानी श्रमदान करने में अपना बड़ा सौभाग्य समझता है। सरकारी अनुदान की बैशाखियों ने हमें अपाहिज ही नहीं अपितु भ्रष्ट बना दिया है। समाज को चाहिए कि वह श्रमदान की पद्वति को बढ़ावा दें। हमारे पूर्वजों ने अपनी स्कूले, मंदिर, नहरे, सड़क ही नहीं पंचायती घर से लेकर चिकित्सालय तक श्रमदान से बनाया था। अगर उत्तराखण्ड सरकार में जरा सी भी प्रदेश से लगाव होता तो वह गैरसैंण में राजधानी बनाने के लिए लोगों को श्रमदान के लिए आवाहन करती तो पूरे प्रदेश के लोग ही नहीं देश विदेश के उत्तराखण्डी भी यहां पर श्रमदान करने के लिए अपना बड़ा सौभाग्य समझते। आज अनुदान की बैशाखियों ने हमें भ्रष्ट व जमीन से काट दिया है। जिस देव भूमि में पहले जो खायेगा पंच अंश वो होगा निवंश जैसे आदर्श को सिरोधार्य करके समाजसेवा करते थे वहां आज विकास के संसाधनों को दोहन व बंदरबांट करने के लिए समाजसेवा में लोग आ रहे है। फिरंगी व चंगैजों से बदतर ये समाजसेवी व नेता नोकरशाहों की जमात भले ही शिक्षित हों परन्तु वे हकीकत में हमारे उन पूर्वजों जो भले ही निरक्षर हों उनके समक्ष कहीं नहीं टिकते हैं। आज की इस शिक्षा ने हमें सच में एक प्रकार से इन्सान से हैवान ही बना कर रख दिया है। आज जरूरत है युवाओं को अपनी सोच व दिशा पर एक बार फिर से गंभीरता से विचार करने की। नहीं तो यह देखने में आ रहा है कि आज का युवा जमीन ही नहीं समाज से पूरी तरह से कट कर केवल आत्म केन्द्रीत हो गया है। यह समाज व देश के लिए ही नहीं मानवता के लिए काफी दुखदाई प्रवृति है। इसके लिए हमारे विद्यालयों से लेकर समाज में श्रमदान को एक बार फिर से बढावा देना होगा, अंगीकार करना होगा तभी हमारा समाज फिर अपनी श्रेष्ठ दिशा पर चल पायेगा। शेष श्री कृष्ण कृपा। हरि ओम तत्सत्। श्री कृष्णाय् नमो।

शराब कबाब की पार्टी में नहीं गरीब बच्चों की पढ़ाई में खर्च करें समाज

शराब कबाब की पार्टी में नहीं गरीब बच्चों की पढ़ाई में खर्च करें समाज
पौड़ी(प्याउ)। ‘हमें जन्म दिन, साल गिरह आदि आयोजनों में अपने धन को शराब कबाब की पार्टियों में संसाधनों को बर्बाद करने के बजाय अपने क्षेत्र में गरीब जरूरत मंद बच्चों को कापी, फीस, गणवेश, इत्यादि रचनात्मक कार्यो में हाथ बढ़ा कर मनाना चाहिए। ’ यह बेहद ही सराहनीय बात, तेजी से रचनात्मक कार्यो में जुटा म्यर उत्तराखण्ड के महासचिव सुदर्शन सिंह रावत ने प्यारा उत्तराखण्ड से फेस बुक में में उनके द्वारा इसी सप्ताह अपने प्रवास के दौरान अपनी शादी की साल गिरह पर अपने जनपद पौड़ी के धुमाकोट क्षेत्र स्थित पटोटियाडांडा इंटर कालेज में गरीब बच्चों को कापी पेन दि वितरित करके मनाया। श्री रावत ने बताया कि सरकार की उदासीनता से आज इस इंटर कालेज में केवल आधा दर्जन ही अध्यापक हैं, जिससे यहां पर अध्ययनरत सैकड़ों बच्चों के भविष्य के साथ गंभीर खिलवाड़ किया जा रहा है। दिल्ली में एक प्रतिष्ठित बहु राष्ट्रीय कम्पनी में कार्यरत सुदर्शन रावत ने कहा कि उन्हें गर्व है कि इसी पटोटियाडांडा स्कूल से शिक्षा ग्रहण कर इस वर्ष देश की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षा आईएएस में उत्र्तीण करने वाले मंगलेश घिल्डियाल ने पूरे उत्तराखण्ड का नाम रोशन किया इसी लिए उन्होंने इस कालेज में जा कर वहां के गरीब बच्चों को प्रोत्साहन करने का निर्णय लिया। इसी के साथ युवा समाजसेवी सुदर्शन ने बताया कि वह अपने गांव के इंटर कालेज में आगामी सितम्बर माह में इसी प्रकार का एक बड़ा आयोजन करके हल्दूखाल में किया जायेगा। भले ही यह एक छोटी सी पहल आम लोगों को नजर आये परन्तु अगर समाज में इस प्रकार की छोटी छोटी पहल करना शुरू करे तो समाज में कोई भी गरीब बच्चा शिक्षा से वंचित व कोई भी मजबूर अपने को असहाय नहीं समझेगा। प्यारा उत्तराखण्ड समाचार पत्र युवा समाजसेवी सुदर्शन रावत की इस सराहनीय प्रयाश को शतः शतः नमन् करता है।

केवल रूद्रनाथ में ही होती है भगवान शिव के मुख की पूजा

केवल रूद्रनाथ में ही होती है भगवान शिव के मुख की पूजा
गोपेश्वर(प्याउ)। सारे विश्व में जहां प्रायः भगवान शिव की लिंग रूप में पूजा होती है वहीं पंच केदारों में एक भगवान रूद्रनाथ में ही केवल भगवान शिव की मुख की पूजा होती है।ऐसी मान्यता है कि यहां पर पाडवों को भगवान शिव के मुखारबिन्द के दर्शन दिये थे। इस पावन तीर्थ रूद्रनाथ सड़क से 18 किलोमीटर की दूरी पर समुद्रतल से 2286 मीटर उंचाई पर लालमाटी पर्वत पर स्थित है। शीतकाल के बाद चारों धामों के कपाट खुलने के साथ ही भगवान श्री रूद्रनाथ के कपाट भी भक्तों के लिए खोल दिये गये है। कपाट खुलने के अवसर व उसके बाद यहां पर हजारों श्रद्धालुओं ने रूद्रनाथ की पूजा अर्चना व दर्शन कर अपना जीवन धन्य कर रहे है। मध्य हिमालय की गोद में स्थित पंच केदारों में अग्रणी मदमहेश्वर व रूद्रनाथ ही आज भी दुर्गम पर्वत पर स्थित है।

Saturday, May 21, 2011

लाखों जीवों की हत्या कराकर देश को कलंकित कर रही है सरकार

लाखों जीवों की हत्या कराकर देश को कलंकित कर रही है सरकार
भारत में लाखों निरापराध, असहाय जीवों को दो टके के लालच में आजादी के बाद की तमाम सरकारों ने (चाहे वे कांग्रेस की रही हो या भारतीय संस्कृति के स्वयंभू ध्वजवाहक संघ द्वारा पोषित-संरक्षित भाजपा के महानायक अटल आड़वाणी के नेतृत्व वाली सरकारें रही हो या अन्य दलों की सांझी सरकार रही हो) हर रोज गो वंश सहित अन्य पशुओं की निर्मम हत्या कराने के लिए देश में सैकड़ों कत्लखाने ही खोल रखे हैं। यह भारतीय भारतीय संस्कृति, ईश्वरी विधान व मानवता के प्रति घोर अपमान हैं। पश्चिमी देशों में तो अज्ञानता का ही शिकंजा कसा रहा, अरब में भी ज्ञान का दिव्य प्रकाश अभी तक नहीं पंहुच पाया। परन्तु भारत में जहां जड़ चेतन में भगवान का परम स्वरूप बताने वाले भगवान श्री कृष्ण, भगवान राम, गौतम बुद्व व महावीर जैन जैसी दिव्यात्मा की अवतरण व कर्म भूमि रही है वहां पर दो टके के खातिर निरापराध जीवों की निर्मम हत्या होनी देश के हुक्मरानों व यहां की जनता को धिक्कार रहा है। भारत में कत्लगाह होना ही भारत के माथे पर बदनुमा कलंक से भी बदतर है।

Thursday, May 19, 2011

खुदा की ऐसी मेहर

खुदा की ऐसी मेहर रही साथी,
हर तुफाने भंवर से बची मेरी कश्ती।
तुम मुस्कराते रहो इसी तरह,
हम हर सितम सह लेगें हंसते हंसते।।
देवसिंह रावत

खून का आंसू रोणिया च मेरा उत्तराखण्डी

जागी जावा जागी मेरा उत्तराखण्डी वीरो,
जागी जावा जागी मेरी देव भूमि का सपूतो।।
चंगेजी लूटेरों ला देखो लूटी मेरो पहाड़,
कोडियों का दाम बेची यो ना धरती माॅं।।
मुजफरनगर के जख्म हमें धिक्कार रहे हैं।
शहीदों की शहादत को भी ये रौंद रहे हैं।।
गैरसैंण राजधानी को ये नादिर रोक रहे है,
जाति-क्षेत्रवाद के ये कीड़े चंगेज बने हैं।।
माॅ माटी मानुष से इनको जरासा प्रेम नहीं है,
वतन को लुटने लुटाने में ही दिन रात लगे है।
जागो मेरो बदरी नाथ जाग भोला केदार,
जागो मेरो नरसिंह जागो त्रिकाल भैंरों।।
माॅं भवानी जागी जाओ जागो हरि हर,
नेताओं का भेंष माॅं आज घुसी लूटेरा।।
नौकरशाही मां भी घुसी गया बटमार,
जनसेवा का नाम पर लूट मची भारी।।
दिल्ली दरवार में घुसी गेना पत्तीधारी,
रक्षा करो बीर बजरंगी रक्षा करो ग्वेल।।
रक्षा करो चक्रधारी तुम मेरो श्री कृष्ण,
आयां तेरी शरण माॅं सभी उत्तराखण्डी।।
पाखंडी लूटेरों से रक्षा करो माॅं चण्डी।
खून का आंसू रोणिया च मेरा उत्तराखण्डी।।
जागी जावा जागी मेरा उत्तराखण्डी वीरो।
जागी जावा जागी मेरी देवभूमि का सपूतो।।
-देवसिंह रावत ़(19-20 मई 2011)

good and bad time

every moment is right to do right work and every time is bad for doing bad work. belive whenever we do right work that time god bless with us. and whenever we do bad work that time god anger with us.

Tuesday, May 17, 2011

उत्तराखण्ड के हितों से खिलवाड़ करने से बाज आये आडवाणी, गडकरी व संघ

उत्तराखण्ड के हितों से खिलवाड़ करने से बाज आये आडवाणी, गडकरी व संघ
-उत्तराखण्ड के हितों से खिलवाड़ करने वालों को ले डूबता है देवभूमि का अभिशाप

लगता है जनविरोधी कुशासन को तमिलनाडू व बंगाल में जनता द्वारा उखाड़ फेंकने के बाबजूद भी सत्तामद में चूर भाजपा व संघ नेतृत्व की कुम्भकर्णी नींद नहीं जागृत हो रही है। आज सुबह भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष गड़करी ने उत्तराखण्ड में पूरी तरह बेनकाब हो चूके भाजपा मुख्यमंत्री निशंक को शर्मनाक संरक्षण देने के लिए प्रदेश के वरिष्ठ जननेता व पूर्व मुख्यमंत्रियों भगतसिंह कोश्यारी व भुवनचंद खंडूडी के साथ मुख्यमंत्री निशंक की उपस्थिति में बैठक की। इस प्रकरण से भाजपा का आम कार्यकत्र्ता ही नहीं प्रदेश की जागरूक जनता जानना चाहती है कि भाजपा आला कमान लालकृष्ण आडवाणी व राष्ट्रीय अध्यक्ष गड़करी को प्रदेश के कोश्यारी, फोनिया, ले. जनरल तेजपाल सिंह रावत व मोहनसिंह ग्रामवासी जैसे ईमानदार नेतृत्व को दर किनारे करके निशंक को बनाये रख कर प्रदेश व भाजपा की जड़ों में मट्ठा क्यों डालने को उतारू है। इसके साथ जनता को इस बात की भी हैरानी है कि भारतीय संस्कृति, सुशासन व रामराज्य की बात करने वाले भाजपा की मातृ संगठन संघ प्रदेश में राष्ट्रवाद व सुशासन के बजाय जातिवाद, क्षेत्रवाद व भ्रष्टाचार को मूक सहमति देने के लिए क्यों विवश है। एक बात भाजपा व संघ के मठाधीशों को स्पष्ट समझ लेना चाहिए कि उत्तराखण्ड न केवल देवभूमि है अपितु यहां के लोग अपने स्वाभिमान व राष्ट्रभक्ति के लिए सदियों से विख्यात है। इस लिए अगर अभी भाजपा नेतृत्व ने अपनी संकीर्णता को त्याग करके उत्तराखण्ड के हितों के साथ खिलवाड़ करने से बाज नहीं आये तो आने वाले विधानसभा चुनाव में लोकसभा चुनाव की तरह उत्तराखण्ड की स्वाभिमानी जनता प्रदेश से भाजपा का पूरी तरह से सफाया कर देगी। उत्तराखण्डी जनता जब देश की रक्षा के लिए सदियों से शहादतें देते आये। उत्तराखण्ड की जनता ने न केवल आततायी मुगलों, फिरंगियों, इंदिरा गांधी की तानाशाही, मुलायम व राव के दमनकारी कुशासन का मुंहतोड़ जवाब दिया । इसलिए भारतीय संस्कृति की पावन गंगोत्री उत्तराखण्ड को अपनी अंधी सत्तालोलुपता व संकीर्णता का खिलोना बनाने से बाज आयें। उत्तराखण्ड की पावन धरती से खिलवाड़ करने वालों का हस्र राव, मुलायम व तिवारी की तरह ही होता है। खंडूडी जी ने इन्हीं की राह में चल कर उत्तराखण्डी हितों को रोंदने व निशंक को सत्तासीन करके उत्तराखण्ड के साथ छल किया, उनको भी अपने किये का दण्ड प्रकृति दे रही है। अभी भी समय है भाजपा नेतृत्व को प्रायश्चित करने का।

महानायक महेन्द्र सिंह टिकैत को शतः शतः नमन्

महानायक महेन्द्र सिंह टिकैत को शतः शतः नमन्
सिसौली(प्याउ)। सिसौली के संत व लाखों किसानों के महानायक चैधरी महेन्द्र सिंह टिकैत को 16 मई को सोमवार को लाखों किसानों ने अश्रुपूर्ण अंतिम विदायी दी। भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष के रूप में भारतीय किसानों की एक मजबूत आवाज बने टिकैत जिनकी एक दहाड़ से दशकों तक दिल्ली दरवार के हुक्मरानों के पसीने छूटते थे का अंतिम संस्कार उनके गांव में किया गया।
टिकैत का जन्म 1935 में मुजफ्फरनगर के सिस©ली गांव में एक जाट परिवार में हुआ था। 76 वर्षीय बाबा टिकैत काफी समय से कैंसर तथा किडनी के रोग से पीड़ित थे। रविवार की सुबह मुजफ्फरनगर आवास पर उनका निधन हो गया था। तभी उनका पार्थिव शरीर पैतृक गांव सिसौली लाया गया था। कैंसर अ©र लीवर की समस्य्ाा से जूझ रहे महेन्द्र सिंह टिकैत का वजन 95 किल¨ से घटकर 55 किल¨ रह गय्ाा था। टिकैत करीब आठ महीने से शैय्य्ाा पर पड़े हुए थे। किसान¨ं के हक में सतत संघर्षरत रहे टिकैत कई बार गिरफ्तार किय्ो गये अ©र विवाद¨ं से भी घिरे रहे लेकिन इन सबके बावजूद उनके निधन से किसान आंद¨लन क¨ गहरा झटका लगा है। व¨ट क्लब पर टिकैत के नेतृत्व में आय्ा¨जित धरना प्रदर्शन से दिल्ली में आसीन सरकारों की चूलें हिल गयी थी यह धरना इतना व्य्ाापक अ©र अनुशासित था कि इसके बाद य्ाहां विर¨ध प्रदर्शन के आय्ा¨जन पर र¨क लगा दी गई। वे किसान हितों के संघर्ष में कइ्र्र बार जेल गये। दिल्ली व उत्तर प्रदेश की सरकारें उनकी एक हुंकार से भयभीत हो जाती थी। भाकियू सुप्रीमो के सबसे बड़े सुपुत्र नरेश टिकैत ने उन्हें मुखाग्नि दी। उनके साथ छोटे बेटे और भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत और पौत्र गौरव टिकैत के अलावा परिवार व भाकियू के पदाधिकारी थे।इस बीच बाबा टिकैत अमर रहें। बाबा तेरा यह बलिदान, याद करेगा हर किसान। जब तक सूरज चांद रहेगा, बाबा तेरा नाम रहेगा- आदि नारे गूंजते रहे। इससे पूर्व आंसुओं के बीच हजारों लोगों ने बाबा के दर्शन कर उन्हें अपनी श्रद्धांजलि दी। हरियाणा के मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा, हरियाणा विस के पूर्व स्पीकर डॉ. रघुवीर कादियान, वरिष्ठ कांग्रेसी चैधरी इंद्र सिंह हुड्डा, यूपी सरकार की ओर से कृषि मंत्री चै. लक्ष्मी नारायण, कर्नाटक के नजुंडा स्वामी, पूर्व सांसद हरेंद्र मलिक, पूर्व मुख्यमंत्री जगदंबिका पाल, सहित बड़ी संख्या में अलावा उत्तराखण्ड, हरियाणा, पंजाब तथा उत्तर प्रदेश से भाकियू के तमाम पदाधिकारी-कार्यकर्ताओं ने किसानों के महानायक को अपनी अंतिम विदाई दी।

काश उत्तराखण्ड में भी होती माॅ, माटी व मानुष के लिए संघर्ष करने वाली ममता

काश उत्तराखण्ड में भी होती माॅ, माटी व मानुष के लिए संघर्ष करने वाली ममता
काश उत्तराखण्ड में भी एक ममता बनर्जी होती जो प्रदेश की जनांकाक्षाओं का सम्मान करते हुए यहां के ‘मां, माटी, मानुष‘के हितों को निर्ममता से रौंद रहे दिल्ली दरवार के प्यादा बने कांग्रेस व भाजपा के सत्तालोलुप बौनी मानसिकता के नेताओं के चुंगल फंसे उत्तराखण्ड की रक्षा करती। ममता बनर्जी ने 34 साल से बंगाल की सत्ता में काबिज हुए वामदलों की निरंकुश व जनविरोधी सत्ता को जिस अदम्य साहस व संघर्ष की बदोलत उखाड़ फैंका उसके लिए उत्तराखण्ड की जनता की तरफ से मैं उनको शतः शतः नमन् करता हूॅ। इसके साथ पूरे देश में भ्रष्टाचार व परिवारवाद के प्रतीक बन चूके करूणानिधी के नेतृत्व वाले द्रुमुक कुशासन को दो तिहाई से अधिक बहुमत से भारी विजय हाशिल करने वाली अन्नाद्रुमुक की प्रमुख जय ललिता को भी पूरे देश की जनता हार्दिक बधाई देती है। असम में तरूण गोगई के नेतृत्व में कांग्रेस ने अपनी सत्ता को बरकरार रख कर देश के चुनावी समीक्षकों को भी हैरान कर दिया है। वहीं केरल में वाम गठबंधन को सत्ताच्युत कर कांग्रेसी गठबंधन को
ऐतिहासिक सफलता मिली। चुनाव में हार जीत तो दशकों से होती रहती। परन्तु ंिजस तरह से संघर्ष के दम पर ममता बर्नजी ने बंगाल में 34 साल से सत्ता पर जूंक की तरह चिपके वामदलों को सत्ताच्युत किया उसको देख कर पूरे देश के लोगों की नजर में वह एक महानायिका बन गयी है।
ऐसे ऐतिहासिक समय में मुझे लगता कि काश उत्तराखण्ड में भी एक ममता बनर्जी होती। जो दिल्ली दरवार के आकाओं के हाथों का मोहरा न हो हर यहां के माॅं माटी व मानुष के लिए राजनीति करती। नहीं तो उत्तराखण्ड का दुर्भाग्य यह रहा कि यहां पर अब तक जो नेतृत्व मिला उसने चंगैज से बदतर उत्तराखण्डी हितों व जनांकांक्षाओं को निर्ममता से रौंदा। आज प्रदेश राज्य गठन के 11 साल बाद भी अपनी स्थाई राजधानी गैरसैंण के लिए तरस रहा है। जनभावनाओं का सम्मान न करते हुए नौकरशाहों से मिल कर यहां के जनविरोधी सरकारें जबरन देहरादून में ही स्थाई राजधानी थोपने का षडयंत्र कर रही है। प्रदेश के आत्म सम्मान को 1994 में राज्य गठन आंदोलन के दौरान मुजफरनगर काण्ड-94 में रौंदने वालों को दण्डित करने में यहां की सरकारें पूरी तरह विफल ही नहीं निश्क्रिय भी रही। यही नहीं यहां पर उत्तराखण्डियों की राजनैतिक भविष्य को सदा के लिए दफन करने के लिए हुए ‘जनसंख्या पर आधारित विधानसभाई परिसीमन’ पर यहां के सत्तासीनों ने शर्मनाक मौन रखकर उत्तराखण्ड के साथ अक्षम्य अपराध किया। यही नहीं उत्तराखण्ड के हितों को दर किनारे रख कर यहां के संसाधनों की बंदरबांट की जा रही है। प्रदेश में सुशासन के बजाय संकीर्ण राजनैतिक हितों का साधने के लिए जातिवाद व क्षेत्रवाद की घृर्णित राजनीति की जा रही है। यही नहीं भ्रष्टाचार को यहां पर शिष्टाचार बना कर स्थापित किया गया है। आज यहां के निर्वाचित मुख्यमंत्री रहे नेताओं की कारगुजारी पर नजर दौडायें तो इस बात का दुख होता कि तिवारी, खंडूडी व निशंक जैसे नेताओं ने उत्तराखण्ड को किया भ्रष्टाचार, जातिवाद,क्षेत्रवाद में बुरी तरह से तबाह किया। तो एक टिस सी उठती है कि काश उत्तराखण्ड में होती एक ममता जैसी नेता जो बचाती देवभूमि को। स्वतंत्रता सेनानी प्रोमिलेश्वर बनर्जी की बेटी ममता ने अपने जुझारू स्वभाव के जरिए सचमुच कमाल कर दिया और अकेले दम पश्चिम बंगाल में वाम मोर्चा का किला ढहा दिया। इंदिरा गांधी की कट्टर समर्थक ममता बनर्जी का जन्म 5 जनवरी, 1955 को कोलकाता के एक मध्यम वर्गीय परिवार में पैदा हुआ। ममता छात्र जीवन से ही राजनीति में सक्रिय हो गई थीं। 70 के दशक में वह कांग्रेस (इंदिरा) से जुड़ीं। अपने समर्थकों के बीच दीदी के नाम से मशहूर ममता पहली बार उस समय सुर्खियों में आई, जब उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के खिलाफ कोलकाता में रैली करने आए लोकनायक जयप्रकाश नारायण के काफिले के आगे लेट कर उसे आगे बढ़ने से रोक दिया था। जेपी अपने संपूर्ण क्रांति आंदोलन के सिलसिले में पश्चिम बंगाल के दौरे पर थे। तब से अब तक तृणमूल सुप्रीमो का राजनीतिक जीवन बेहद संघर्षपूर्ण रहा है। उन्होंने पिछले तीन दशकों के अपने राजनीतिक सफर के दौरान कई उतार-चढ़ाव देखे हैं। बंगाल की अग्निकन्या के नाम से मशहूर ममता के ‘मां, माटी, मानुष‘के नारे ने पिछले लोकसभा चुनाव में तो रंग दिखाया ही था। इस बार भी इसी नारे ने उन्हें राज्य की सत्ता तक पहुंचा दिया है। संघर्ष और आंदोलन की पर्याय मानी जाने वाली ममता पिछले 23 वर्षो से वाममोर्चा सरकार के खिलाफ सतत संघर्ष कर रही थीं जिसका अब उन्हें फल मिला है।
- कांग्रेस कार्यकर्ता के रूप में 1970 राजनीतिक जीवन शुरू करने वाली मामता बर्नजी, ने 1984 माकपा के कद्दावर नेता सोमनाथ चटर्जी को जादबपुर सीट से हराकर देश के सबसे युवा सांसदों में एक बनीं। इसी साल वह आल इंडिया युवा कांग्रेस की महासचिव भी निर्वाचित हुईं।1989 जादबपुर सीट से लोकसभा चुनाव हार गईं लेकिन 1991 में दक्षिण कोलकाता सीट से निर्वाचित होकर नरसिम्हा राव सरकार में मानव संसाधन विकास, खेल व युवा मामलों की राज्य मंत्री बनीं। वह बंगाल में वामदलों के कुशासन से मुक्ति के लिए संघर्ष करना चाहती परन्तु कांग्रेस पार्टी अपने दलीय स्वार्थों के लिए उसे इसकी पूरी इजाजत नहीं देती। इसी से आहत हो कर उसने 1997 में कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया और 1998 एक जनवरी को आल इंडिया तृणमूल कांग्रेस की स्थापना की।
1999 भाजपा के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार में शामिल हुईं, जिसमें उन्हें रेलमंत्री का पदभार सौंपा गया। सन्2001 पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में वाममोर्चा सरकार से लोहा लेने के लिए राजग से नाता तोड़ कांग्रेस से गठबंधन किया। लेकिन गठबंधन को मुंह की खानी पड़ी और सिर्फ 86 सीटें ही मिल पाईं।2004 लोकसभा चुनाव में निर्वाचित होकर संसद पहुंचने वाली तृणमूल की एकमात्र सांसद बनीं।
2006 बंगाल में बांग्लादेशियों की घुसपैठ पर उनके स्थगन प्रस्ताव को अनुमति नहीं दिए जाने पर लोकसभा के तत्कालीन डिप्टी स्पीकर चरणजीत सिंह अटवाल की तरफ अपना त्यागपत्र फेंका। सबसे अधिक उनके राजनैतिक जीवन के संघर्ष में निर्णायक संघर्ष 2007 पूर्व मेदिनीपुर जिले के नंदीग्राम में केमिकल हब के निर्माण के प्रस्ताव के विरोध में आंदोलन का शुभारंभ रहा। इसी आंदोलन के क्रम में नंदीग्राम में 14 मार्च को पुलिस फायरिंग की घटना हुई जिसमें 14 लोगों की मौत हो गई।2008: पंचायत चुनाव में तृणमूल ने काफी अच्छा प्रदर्शन करते हुए दो जिला परिषद पर जीत हासिल की। हुगली के सिंगूर में टाटा के नैनो कारखाने के लिए किसानों से जबरन उनकी जमीन लिए जाने के विरोध में आंदोलन शुरू किया।
2009: लोकसभा चुनाव में कांगे्रस से गठबंधन कर तृणमूल ने बंगाल में वामदुर्ग की जड़ें हिला दी और 19 सीटों पर कब्जा जमाया। संप्रग सरकार के दूसरे कार्यकाल में ममता बनर्जी दूसरी बार रेलमंत्री बनीं।
2011: तृणमूल कांग्रेस ने कांग्रेस के साथ एक बार फिर गठबंधन कर विधानसभा चुनाव लड़ा और बहुमत हासिल कर बंगाल में वाममोर्चा शासन का सफाया कर दिया। ऐसे संघर्षों से निकल कर प्रदेश की सत्ता को संभालने वाली सादगी व संघर्ष की प्रतीक तथा भ्रष्आचार के खिलाफ सदैव आवाज उठाने वाली ममता बनर्जी को एक बार फिर ‘मां, माटी, मानुष‘ के प्रति उनके अद्म्य प्रेम व समर्पण के लिए शतः शतः नमन्
करते हैं।

Monday, May 16, 2011

भाजपा -कांग्रेस के बीच नहीं अपितु तिवारी व हरीश रावत के बीच होगा 2012 का विधानसभा चुनाव!

विधानसभा चुनाव से पहले ही हरीश रावत ने चटायी अपने विरोधियों को धूल
-भारी मतों से विजयी होकर हरीश रावत के पुत्र आनन्दसिंह रावत को मिली प्रदेश युवक कांग्रेस अध्यक्ष की कमान
-भाजपा -कांग्रेस के बीच नहीं अपितु तिवारी व हरीश रावत के बीच होगा 2012 का विधानसभा चुनाव!



भले ही दिल्ली में बैठे कांग्रेसी नेता उत्तराखण्ड के दिग्गज कांग्रेसी नेता हरीश रावत को हर समय हाशिये में डालने का काम करे परन्तु हरीश रावत अपने विरोधियों के तमाम षडयंत्रों को नाकाम करते हुए सदा ही अपने विरोधियों पर 21 ही साबित होते है। इन तमाम प्रकरणों से एक बात स्पष्ट हो गयी कि अगर विधानसभा चुनाव तक भाजपा मठाधीश जनभावनाओं को रौंदते हुए अपने निहित स्वार्थ के कारण निशंक को प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाये रखते हैं तो आगामी विधानसभा चुनाव का मुकाबला भाजपा कांग्रेस के बीच में न हो कर तिवारी व हरीश रावत के बीच में होना तय है। क्योंकि निशंक के मुख्यमंत्री रहने से भाजपा पहले ही चुनावी दंगल के मैदान से बाहर हो कर दहाई के अंक को छूने के लिए भी मोहताज हो जायेगी।
इसका एक नजारा इस सप्ताह युवक कांग्रेस के चुनाव में देखने को मिला। उत्तराखण्ड में प्रदेश युवक कांग्रेस के चुनाव में साबित हो गया। जहां हरीश रावत के मंझोले बेठे आनन्द सिंह रावत के युवक कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष के लिए चुनाव में ताल ठोकते देख कर प्रदेश कांग्रेस के सभी दिग्गजों ने एकजूट हो कर उनको पछाड़ने के लिए कमर कस ली। परन्तु अपनी जमीनी पकड़ व संगठन में उनके दशकों से सीधे पकड़ के महारथ के कौशल का प्रदर्शन करते हुए हरीश रावत ने पर्दे के पीछे रह कर अपने तमाम विरोधियों को चारों खाने चित ही कर दिया। इस चुनाव में प्रदेश अध्यक्ष यशपाल आर्य, नेता प्रतिपक्ष डा हरकसिंह रावत, मुख्यमंत्री के सबसे मजबूत दावेदारों में से एक सतपाल महाराज ही नहीं अपितु विजय बहुगुणा भी हरीश रावत के विरोध में पर्दे के पिछे एकजूट थे। यह युवक कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष का चुनाव एक प्रकार से हरीश रावत व उनके चिर प्रतिद्वंदि नारायणदत्त तिवारी के बीच में बर्चस्व के संग्राम में तब्दील हो गया। हालांकि तिवारी भले ही पर्दे के पीछे रहे परन्तु उनके करीबी क्षत्रपों ने इसकी कमान संभाल रखी थी। इसके बाबजूद हरीश रावत ने विधानसभा चुनाव से पहले हुए इस सबसे बड़े शक्ति परीक्षण में अपने विरोधियों को संयुक्त रूप से चारों खाने चित ही कर दिया। इससे एक बात साफ हो गयी है कि हरीश रावत आज भी अपने तमाम विरोधियों के मुकाबले प्रदेश के संगठन व आम जनता में पकड़ की दृष्टि से 21 ही हैं।
उल्लेखनीय है कि 16 मई सोमवार को हुए युवक कांग्रेस की प्रांतीय कमेटी के चुनाव में अध्यक्ष पद पर केंद्रीय राज्य मंत्री हरीश रावत के पुत्र आनंद सिंह रावत ने एकतरफा जीत दर्ज की। उन्होंने 556 मत हासिल कर इस कुर्सी पर कब्जा जमाया। उपाध्यक्ष पद पर ज्योति रौतेला विजयी रहीं, उन्हें 115 मत हासिल हुए। संग्राम सिंह पुंडीर(91), ओमप्रकाश सती बब्बन(60) व प्रदीप तिवारी ओपन वर्ग से महासचिव चुने गए। मुख्य चुनाव अधिकारी आबिद खान के मुताबिक चुनाव में 1218 मतदाताओ में से 1150 ने मताधिकार का प्रयोग किया।प्रांतीय कमेटी के लिए सर्वाधिक 556 वोट अर्जित करने पर आनंद सिंह रावत को अध्यक्ष निर्वाचित घोषित किया गया। दूसरे स्थान पर सबसे अधिक वोट पाने वाली ज्योति रौतेला (115) को उपाध्यक्ष घोषित किया गया। ओपन वर्ग में संग्राम सिंह पुंडीर (91), ओमप्रकाश सती बब्बन (60) व प्रदीप तिवारी (52) महासचिव निर्वाचित हुए। वहीं अनुसूचित जाति-जनजाति के लिए आरक्षित महासचिव पद पर राजेश नौटियाल (42), अल्पसंख्यकों के लिए आरक्षित महासचिव पद पर तैफ अली खान (39) व ओबीसी को आरक्षित महासचिव पद पर वरुन चैधरी (21) चुने गए। इसके साथ क्षेत्रीय कमेटियों का चुनाव में पौड़ी में हिमांशु बिजल्वाण (73), अल्मोड़ा में भूपेंद्र सिंह (98), हरिद्वार में तेलूराम (105) व टिहरी लोस क्षेत्र कमेटी में जसविंदर पाल सिंह गोग्गी (85) नैनीताल लोस क्षेत्र कमेटी में भुवन चंद्र कापड़ी (79), अध्यक्ष चुने गए। इसके अलावा अन्य पदाधिकारी भी निर्वाचित घोषित किए गए।
इस चुनाव से एक बात भी साफ हो गयी है कि भले ही कांग्रेसी नेता व प्रभारी चोधरी वीरेन्द्र सिंह लाख घोषणायें कांग्रेसी एकजूटता के कर लें परन्तु आगामी विधानसभा चुनाव में प्रदेश क्षत्रपों की मुख्यमंत्री बनने की अंधी लालशा के चलते कांग्रेसी नेता एकजूट हो कर प्रदेश में भाजपा को चुनाव में परास्त करने के बजाय एक दूसरे को ही हराने में जुटे रहेंगे। इसी कारण कांग्रेस गत विधानसभा चुनाव में बहुमत के करीब नहीं पंहुच पायी व आगामी विधानसभा चुनाव में भी यही पुनरावृति हो जाय तो किसी को आश्चर्य नहीं होगा। जिस प्रकार से तिवारी के सबसे करीबी सहायक रहे आरेन्द्र शर्मा ने डोईवाला विधानसभा चुनाव से ताल ठोकी है उससे एक बात स्पष्ट हो गयी कि आगामी विधानसभा चुनाव परिणाम के बाद अगर कांग्रेस सत्तासीन होती है तो तिवारी ने प्रदेश के मुख्यमंत्री के पद के लिए विजय बहुगुणा को अपना आर्शीवाद दे दिया है। क्योंकि डोईवाला विधानसभा सीट पर बिजय बहुगुणा की संसदीय सीट का हिस्सा होने के साथ साथ उनकी तिवारी से निकटता जग जाहिर है। प्रदेश अध्यक्ष यशपाल आर्य तो सदैव तिवारी के ही कृपा पात्र रहे, वे तिवारी की इच्छा के खिलाफ एक कदम भी उठाने की जरूरत भी नहीं कर सकते है। सतपाल महाराज ही नहीं हरक सिंह रावत भी तिवारी से आज के दिन भी दूरियां नहीं बना सकते है। इस लिए आगामी विधानसभा चुनाव भले ही कहने को भाजपा व कांग्रेस के बीच होगा असल में यह चुनाव तिवारी व हरीश रावत के बीच में ही खेला जायेगा। इन चुनाव में एक यही महत्वपूर्ण बदलाव हुआ कि तिवारी की कभी दाहिना हाथ समझी जाने वाली इंदिरा हृदेश आज हरीश रावत की प्रमुख सिपाहे सलार बनी हुई है।
गत विधानसभा चुनाव में भी जब हरीश रावत ने प्रदेश में कांग्रेस सरकार के गठन के लिए जरूरी विधायकों का प्रबंध कर लिया था वे अपने समर्थक विधायकों को लेकर प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनाने के लिए अगले ही दिन राज्यपाल के समक्ष विधायकों की परेड़ भी कराने ही वाले थे कि तभी तत्कालीन कांग्रेसी मुख्यमंत्री नारायणदत्त तिवारी व उनके दिल्ली में मठाधीश बने बंद कमरों के मठाधीशों ने कांग्रेस आलाकमान को गुमराह कर प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनने से रोक दिया। इसी कारण प्रदेश में भाजपा की सरकार बनी। तिवारी व उनके दिल्ली बैठे नेताओं को प्रदेश में भाजपा की सरकार मंजूर थी परन्तु किसी भी हालत में वे प्रदेश में हरीश रावत को मुख्यमंत्री के पद पर बेठे हुए देखना किसी भी कीमत पर मंजूर नहीं था। कांग्रेसी मठाधीशों के इस दाव का कांग्रेस ने पूरे देश में खमियाजा भुगतना पड़ा। इसके बाद यहीं पर नहीं रूका। केन्द्र में कांग्रेस सरकार बनने के बाद भी देश के अग्रणी जननेताओं में विख्यात वरिष्ठ कांग्रेसी नेता हरीश रावत को दरकिनारे करके उनको राज्यमंत्री के पद पर आसीन कर श्रम मंत्रालय में आसीन किया गया। जबकि उनसे कहीं कनिष्ठ व जनता से कटे हुए लोगों को कबिना मंत्री व स्वतंत्र प्रभार के महत्वपूर्ण मंत्रालयों में आसीन किया गया। यही नहीं हरीश रावत की पूरे देश की आम जनता व संगठन में पकड़ को देखते हुए उनको संगठन व सरकार में महत्वपूर्ण दायित्व सोंप कर कांग्रेस को मजबूत किया जाना चाहिए था। परन्तु दिल्ली में आसीन जातिवादी व बंद कमरों के सूरमाओं को ऐसा कोई नेता फूटी आंखों से नहीं सुहाता जो जनता में मजबूत पकड़ रखता हो। इसी कारण प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष पद पर हरीश रावत को इस तथ्य के बाद भी दूर रखा गया कि प्रदेश में आसीन भाजपा सरकार को उखाड़ फैंकने में अगर कोई आम कांग्रेसी कार्यकत्र्ताओं के साथ जनता को भी लामबद करने में हरीश रावत वर्तमान में मुख्यमंत्री के दावेदार बने सभी नेताओं पर 21 ही साबित होते है। इन तमाम तथ्यों को सामने रखते हुए अगर आलाकमान आगामी विधानसभा चुनाव की कमान साफ रूप से हरीश रावत के हाथों में नहीं सौंपती है तो आने वाले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की गत विधानसभा जैसी दुर्गति हो जाय तो राजनीति के किसी भी समीक्षकों को आश्चर्य नहीं होगा।

Sunday, May 15, 2011

मंहगाई से देश को अराजकता के गर्त में धकेलने वाले प्रधानमंत्री मनमोहन के आवास पर धरना दें राहुल गांधी

मंहगाई से देश को अराजकता के गर्त में धकेलने वाले प्रधानमंत्री मनमोहन के आवास पर धरना दें राहुल गांधी
जब राहुल गांधी ने देश की राजधानी दिल्ली से सटे हुए उप्र के आद्योगिक शहर नौएडा में मायावती सरकार के पुलिसिया दमन से पीड़ित गांव में एक दिन का धरना दिया था, मैने उसका पुरजोर समर्थन किया था। परन्तु मुझे यह देख कर बहुत आश्चर्य हो रहा है कि मनमोहन सिंह के कुशासन के कारण आज देश बेलगाम मंहगाई, आतंक व भ्रष्टाचार से तबाही के कगार पर है। परन्तु राहुल गांधी अपनी इस सरकार के मुखिया मनमोहन सिंह के आवास पर एक पल के लिए धरना पर क्यों नहीं बैठ रहे है। क्या उनको यह नहीं दिख रहा है कि उनकी सरकार के इस नक्कारेपन से देश के करोड़ों लोगों का जिन्दगी दुश्वार हो गयी है। राहुल गांधी को यह सबकुछ दिखेगा ही नहीं क्योंकि न तो उनको कभी मंहगाई का भान है व नहीं उनके सलाहकारों को मंहगाई का ज्ञान है। सभी अरबों की दौलत पर कुण्डली मारे हुए है। अगर राहुल गांधी व उनके सलाहकारों को इस बात का भान रहता तो वे नौएडा में धरना देने के बाद या पहले सबसे पहले देश के लिए नक्कारा साबित हो चूके प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के आवास पर ठीक उसी तरह का धरना देते जिस प्रकार का धरना उन्होंने गत सप्ताह नोयडा में दिया था। नोयडा में तो सैकड़ों परिवार ही पीड़ित हैं परन्तु मनमोहन सिंह सरकार के नक्कारेपन के कारण आज देश के 100 करोड़ से अधिक आम गरीब जनता दिन रात खून के आंसू बहा रही है। इनके खून के आंसू राहुल गांधी को क्यों नहीं दिखाई दे रहे है, इसी बात का मुझे आज आश्चर्य है। परन्तु क्या मजाल की राहुल गांधी के चेहरे पर देश के इन करोड़ों गरीबों के लिए जरा सी भी हमदर्दी तक हो। जबकि इन्हीं गरीबों का हितैषी बन कर कांग्रेस ने पांच दशक से अधिक समय तक इस देश पर शासन किया। आज हालत इतनी शर्मनाक है कि
बेलगाम मंहगाई से आम लोगों का जीना ही दुश्वार हो गया है। चारों तरफ त्राही-त्राही ही मची हुई है। भ्रष्टाचार व आतंकबाद से पहले ही देश की नींव ही जरजर हो गयी है। परन्तु सत्तामद में धृतराष्ट्र बने सत्तालोलुप मनमोहन सिंह व उनकी सप्रंग सरकार इस पर अंकुश लगाने के लिए कोई ठोस कदम तक नहीं उठा रही है। परन्तु इसे देख कर भी देश की आम जनता के हितों की रक्षा के लिए अपने आप को समर्पित होने का दावा करने वाले राहुल गांधी ने मनमोहन सिंह सरकार से इस पर रोक लगाने के लिए एक बार भी ईमानदारी से गुहार लगाने का काम तक किया हो। देश को भ्रष्टाचार, आतंकवाद व मंहगाई से अराजकता की गर्त में धकेलने वाले देश के प्रधानमंत्री मनमोहनसिंह को अविलम्ब हटाने के लिए राहुल गांधी को 7 रेसकोर्स रोड़ स्थित प्रधानमंत्री आवास पर अविलम्ब धरना देना चाहिए। इसके साथ कांग्रेस आला कमान के सलाहकार बन कर कांग्रेस व देश का बेडागर्क करने को तुले वातानुकुलित कमरों में बैठ कर कागची सलाहकारों से भी कांग्रेस को आजाद कराये।यही उनकी देश की सबसे बड़ी सच्ची सेवा होगी।

शहीदों की शहादत व लोकशाही का अपमान है देहरादून में 16 करोड़ का मुख्यमंत्री आवास बनाना

शहीदों की शहादत व लोकशाही का अपमान है देहरादून में 16 करोड़ का मुख्यमंत्री आवास बनाना
इसी शुक्रवार 13 मई को प्रदेश की अस्थाई राजधानी देहरादून में प्रदेश के मुख्यमंत्री के लिए 16 करोड़ रूपये लागत से बने मुख्यमंत्री आवास भवन में मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल के प्रवेश से प्रदेश की अब तक की सरकारों का उत्तराखण्ड विरोधी चेहरा पूरी तरह से बेनकाब हो गया। एक तरफ प्रदेश सरकार ने अभी प्रदेश की स्थाई राजधानी का फेसले का ऐलान नहीं किया वहीं गुपचुप तरीके से प्रदेश के सभी महत्वपूर्ण कार्यालय का निर्माण देहरादून में ही करके प्रदेश की जनभावनाओं के साथ प्रदेश की स्थाई राजधानी गैरसैंण बनाने की मांग करते हुए शहीद हुए राज्य गठन आंदोलनकारियों की शहादत का घोर अपमान है। देहरादून में बने प्रदेश की जनता के विकास के 16 करोड़ रूपये खर्च करके जो मुख्यमंत्री का आवास बनाया गया उससे साफ हो गया कि प्रदेश के अब तक के तमाम हुक्मरानों को न तो प्रदेश की जनभावनाओं का एक रत्तीभर भी सम्मान है व नहीं उनको नैतिक मर्यादा तथा लोकशाही में तनिक सा भी विश्वास नहीं है। अगर उनको लोकशाही व नैतिक मूल्यों के लिए जरा सा भी सम्मान रहता तो वे स्थाई राजधानी का विधिवत ऐलान करने से पहले किसी भी सूरत में मुख्यमंत्री निवास सहित तमाम महत्वपूर्ण भवनों का निर्माण नहीं करते। इस प्रकरण से साफ हो गया कि न केवल नारायणदत्त तिवारी व भुवन चंद खंडूडी जैसे पूर्व मुख्यमंत्रियों को ही नहीं अपितु वर्तमान मुख्यमंत्री रमेश पौखरियाल निशंक को भी उत्तराखण्ड की जनभावनाओं व नैतिक मूल्यों के लिए एकांश भी सम्मान नहीं है। ये अपनी अंधी सत्तालोलुपता के लिए उत्तराखण्ड की जनभावनाओं को जिस शर्मनाक ढ़ग से रौंद रहे हैं उससे इनको जितनी भी लानत भेजी जाय कम है।

राज्य आंदोलनकारियों के सम्मान के नाम पर अपमान करने से बाज आये सरकार

राज्य आंदोलनकारियों के सम्मान के नाम पर अपमान करने से बाज आये सरकार
नई दिल्ली ं(प्याउ)।15 मई को उत्तराखण्ड राज्य गठन जनांदोलनकारी प्रमुख संगठनों की दिल्ली के गठवाल भवन में एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। बैठक में राज्य गठन के बाद अब तक की तमाम सरकारों द्वारा राज्य जनांकांक्षाओं को निर्ममता से रौंदे जाने पर जहां गहरा आक्रोश प्रकट किया वहीं राज्य आंदोलनकारियों के सम्मान के नाम पर जो अपमानजनक मापदण्ड अपनाये गये हैं उसकी कड़ी भत्र्सना की । इस बैठक में राज्य गठन जनांदोलन में संसद की चैखट में ऐतिहासिक 6 साल का सफल धरना देने वाले उत्तराखण्ड जनता संघर्ष मोर्चा के अलावा उत्तराखण्ड जनमोर्चा व उत्तराखण्ड राज्य लोकमंच के प्रमुख आंदोलनकारियों ने भाग लिया। बैठक में सर्व सम्मत से प्रदेश सरकार से मांग की गयी कि अगर सरकार ने आंदोलनकारियों को ईमानदारी से चिन्हित ही करना है तो उसे तत्काल राज्य गठन आंदोलन के प्रमुख संगठनों से उनके प्रमुख आंदोलनकारियों के नामों को आंमंत्रित करना चाहिए। इस अवसर पर समस्त आंदोलनकारियों ने इस बात पर गहरी नाराजगी प्रकट की कि राज्य गठन के ग्यारह साल बाद भी प्रदेश के अब तक की भाजपा व कांग्रेस की सरकारों ने राज्य गठन आंदोलन के प्रमुख सैनानियों तक को चिन्हित नहीं कर पायी। वहीं राज्य गठन आंदोलनकारियों के नाम से इन दोनों दलों की सरकारों ने आंदोलनकारियों को सम्मानित करने के नाम पर शासन प्रशासन से मिल कर अपने प्यादों को चिन्हित करके राज्य गठन के प्रखर आंदंोलनकारियों की शर्मनाक उपेक्षा कर रखी है। उत्तराखण्ड राज्य गठन के आंदोलनकारियों ने दो टूक शब्दों में कहा कि उन्हें न तो सरकार से किसी सम्मान या पदक की जरूरत है परन्तु अगर सरकार राज्य गठन आंदोलनकारियों के नाम से चिन्हित करने का काम कर रही है तो उसे सही आंदोलनकारियों को चिन्हित करना चाहिए। राज्य आंदंोलनकारी राजेन्द्र शाह द्वारा आहुत इस बैठक की अध्यक्षता जनमोर्चा के अध्यक्ष जगदीश नेगी ने की व संचालन डा एस एन वसलियाल ने किया। बैठक को संबोधित करने वालों में राजेन्द्र शाह के अलावा उत्तराखण्ड राज्य लोकमंच के संयोजक उदय राम ढौंडियाल, उत्तराखण्ड मानवाधिकार संगठन के प्रमुख एस के शर्मा, उत्तराखण्ड जनता संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष देवसिंह रावत, उत्तराखण्ड पत्रकार परिषद के पूर्व महासचिव दाताराम चमोली, उजसमों के उपाध्यक्ष विनोद नेगी, बृजमोहन सेमवाल, जनमोर्चा के दलवीर रावत, पंजाब से आये हुए बी एस रावत, आंदोलनकारी हरकसिंह रावत आदि ने संबोधित किया। सभा का समापन करते हुए उजसमों के पूर्व अध्यक्ष खुशहाल सिंह बिष्ट ने सभी आंदोलनकारियों को एकजूट हो कर राज्य जनांकांक्षाओं को साकार करने का आवाहन किया। इस बैठक में उपस्थित होने वाले प्रमुख आंदोलनकारियों में उत्तराखण्ड जनता संघर्ष मोर्चा के महासचिव जगदीश भट्ट, उत्तराखण्ड राज्य लोकमंच के बृजमोहन उप्रेती, राजेन्द्र नेगी, हुकमसिंह कण्डारी, श्री चैनियाल, जोशी, फरतियाल, आर एस नेगी, जगमोहन सिंह रावत, श्री थपलियाल, रिखी रावत, रामी भारद्वाज, सुन्दरी बडोला व सत्या रावत सहित कई प्रमुख आंदोलनकारी नेत्री भी उपस्थित थे।

Saturday, May 14, 2011

प्रधानमंत्री मनमोहनसिंह अविलम्ब इस्तीफा दें

देश को मंहगाई, आतंक व भ्रष्टाचार की गर्त में धकेलने वाले हुक्मरान देश के लिए बाहरी दुश्मनों से बड़ कर खतरनाक होते हैं। देश को बेलगाम मंहगाई से अराजकता की गर्त में धकेलने वाले देश के प्रधानमंत्री मनमोहनसिंह अविलम्ब इस्तीफा दें। www.rawatdevsingh.blogspot.com

Friday, May 13, 2011

बंगाल, तमिलनाडू की महान जनता को उनके ऐतिहासिक जनादेश को शतः शतः नमन्

बंगाल, तमिलनाडू की महान जनता जिसने जनहितों को रौंद रही सत्तासीनों के कुशासन को उखाड़ फेंका है, उनके ऐतिहासिक जनादेश को शतः शतः नमन्। उत्तराखण्ड की जनता भी आगामी विधानसभा चुनाव में यहां पर सत्तासीन भाजपा की भ्रष्ट व उत्तराखण्ड विरोधी निशंक सरकार को उखाड़ फेंकने व दिल्ली में आसीन भाजपा-संघ के धृतराष्ट्र बने मठाधीशों को सबक सिखाने के लिए बेसब्री से विधानसभा चुनाव का इंतजार कर रही है।

Tuesday, May 10, 2011

आतंकी पाक की परमाणु शक्ति को तत्काल नष्ट करे अमेरिका

आतंकी पाक की परमाणु शक्ति को तत्काल नष्ट करे अमेरिका
-लादेन व पाक को खूंखार आतंकी बना कर विश्व शांति को ग्रहण लगाने के लिए विश्व से माफी मांगे अमेरिका
-लादेन को बनाया अमेरिका ने इस्लामी जगत में शहीद

पाकिस्तानी परमाणु शक्ति विहिन करने के लिए अमेरिका को यथाशीघ्र ही परमाणु अस्त्रों को कब्जे में लेने के लिए लादेन पर किये जैसे ही हमला करना चाहिए। क्योंकि लादेन की तरह ही पाकिस्तान को भी अमेरिका की कृपा व सहयोग से ही आज विश्व शांति के लिए खतरा बन गया है। अपने इन कुकृत्यों के लिए विश्व जनसमुदाय से माफी मांगते हुए अमेरिका को प्रायश्चित करने के लिए तत्काल पाकिस्तानी परमाणु अड्डों को तबाह कर परमाणु अस्त्रों को आतंकी हाथों में पंहुचने के लिए लादेन पर किये गये छापामार हमला करना चाहिए। इसमें जरा सी भी अमेरिका ने देर लगायी तो यह अमेरिका के साथ साथ विश्व शांति के लिए भी खतरा हो सकता है।
हालांकि भारत सहित विश्व के आतंकवादी गतिविधियों पर गहरी नजर रखने वाले सभी समीक्षक बार बार इस बात को दोहरा रहे थे कि अमेरिका के शह पर ही न केवल लादेन अपितु उसका अलकायदा भी विश्व की शांति के लिए एक गंभीर खतरा बन गया है। इसके साथ साथ अमेरिका ने विश्व में अपना परचम फहराने के लिए व रूस व चीन तथा भारत पर अंकुश लगाने के लिए पाकिस्तान को अपना जो अंध समर्थन दिया और उसे रूस के खिलाफ अफगानिस्तान व भारत के खिलाफ दशकों तक संरक्षित व मजबूत बनाता रहा आज उसी का परिणाम है कि पाकिस्तान अमेरिका की सुरक्षा के लिए ही नहीं अपितु पूरे विश्व की सुरक्षा के लिए लादेन व अलकायदा से भी भयंकर आतंकी बन गया है। लादेन व अलकायदा का तो कोई एक ठोर ठिकाना नहीं था परन्तु पाकिस्तान तो एक राष्ट्र की तरह आज पूरे विश्व के अमन चैन पर ग्रहण लगाने वाला आतंकी राष्ट्र ही बन गया है।
वहां पर अमेरिका के अंध संरक्षण में ऐसा कठरपंथी समाज व जमात तैयार हो गयी है जो अब किसी भी तरह अमेरिका सहित किसी के अंकुश मानने के लिए तैयार नहीं हे। वह पूरे विश्व में इस्लाम का परचम फेहराने के लिए समर्पित आतंकियों की फेक्टरी ही बन गयी है। ऐसे में चाहे पाक में सेना हो या राजनैतिक दल, सामाजिक संगठन हो या धार्मिक संगठन, विधालय हो या अन्य खेल इत्यादि संगठनों का भी एक प्रकार से आतंकीकरण हो गया है। इसका प्रत्यक्ष उदाहरण अमेरिका के सम्मुख तक सामने आया जब अमेरिका को मालुम हुआ कि जिस लादेन को वह पूरे विश्व में तलाश रहा है वह लादेन कहीं नहीं अपितु उसके आस्तीन के सांप साबित हो चूके उसके मित्र पाक ने ही अपनी मिलेटरी के संरक्षण में सुरक्षित पनाह दे रखी है।
अब जब लादेन मारा गया। तो अमेरिकियों की आंखें खुली या खुलने का ढोंग कर रहा है। उसके बाद जिस प्रकार से पाक व अमेरिका में लादेन को आतंकी बनाने व अलकायदा को विश्व का सबसे खतरनाक आतंकी जमात बनाने के सम्बंध में आरोप एक दूसरे पर लगा रहे है। परन्तु इस दृष्टि से साफ है कि लादेन के साथ साथ अलकायदा को आतंकी संगठन बनाने में जहां अमेरिका का ही एक मात्र हाथ है, उसने सीधे साधे मुस्लिमों की धार्मिक भावनाओं को भड़का कर उसे रूस के खिलाफ अपने स्वार्थों के लिए भड़काया। इसके साथ ही उसने पाकिस्तान को भी उसकी भारत विरोधी भावनाओं को हवा व संरक्षण दे कर भड़काने का काम किया। अमेरिका ने न केवल लादेन व अलकायदा के साथ पाकिस्तान को भी अपने निहित स्वार्थो के खातिर आतंक की गर्त में धकेल कर भ्रष्मासुर बनाया। आज जब यह भ्रष्मासुर खुद अमेरिका को ही ग्रसने के लिए मुंह खोल रहा है तो तब अमेरिका को लगा कि उससे भूल होगयी।
लादेन व अलकायदा ने देखा कि जिस अमेरिका ने मुस्लिमों का हमदर्द बन कर अफगानिस्तान में काबिज रूस को भगाने के लिए उनको जंग की आग में झोंका था वह जंग फतह करने के बाद अफगानिस्तान में काबिज उसी ढंग से होना चाह रहा है जिस प्रकार से रूस अपने प्यादों के सहयोग से अफगानिस्तान में काबिज होना चाह रहा था। ऐसे में अमेरिका के खिलाफ उसके अपने ही बनाये गये भ्रष्मासुर लादेन व अलकायदा आदि आतंकी जमात हो गयी। जिन लोगों को वह रूस के साथ जंग करते समय महान बहादूर बताता था उन्हीं को अमेरिका ने अपनी कलई खुलते देख कर आतंकी बताना शुरू कर दिया। यही नहीं पाक को भी अमेरिका ने पूरी तरह से अपना गुलाम बना रखा है। वहां पर वह कभी भी लोकतंत्र स्थापित नहीं होने देता। उसने अपने प्यादों को तानाशाह व लोकशाही के नाम पर यहां पर आसीन कर वहां अमेरिका के हितों का अड्डा ही बनाया। ऐसे में अमेरिका के खिलाफ पाकिस्तान की आम अवाम में गुस्सा होना जाहिर हे। पाकिस्तानी अवाम को जब यह दिखाई देता कि उनके मूल देश भारत में विकास व लोकशाही का परचम फहरा रहा है व उनके देश में लूटशाही व तानाशाही का ही राज चल रहा है। इससे लोगों की नजरों में अमेरिका का असली चेहरा सामने आ गया। ऐसे में पूरे पाकिस्तान की आम अवाम में अमेरिका के प्रति गुस्सा दिन प्रति दिन बढ़ता ही जा रहा है। अमेरिका के शह पर ही पाकिस्तान ने भारत को तबाह करने के उद्देश्य से परमाणु अस्त्र बनाये हुए है। परन्तु आज जब अमेरिका को लग रहा है कि अब पाकिस्तान उसके लिए खतरा बन गया है तो वह भारत के कंधे में बंदुक रख कर पाक के साथ उसको भीड़ा कर दोनों मुल्कों को तबाह कर अपना हित साधना चाहता है।
जो भी हो वह किसी भी कीमत पर मजबूत भारत को नहीं देख सकता। क्योंकि मजबूत भारत उसके सम्राज्य के एकाधिकार को खुली चुनौती दे सकता है। इसी कारण अमेरिका वक्त आने पर भारत व पाक को भीड़ा कर दोनों को तबाह करना चाहता है। दोनों को कमजोर करना चाहता है। इसके अलावा अमेरिका को एक और डर सता रहा है कि पाकिस्तान के परमाणु हथियार कहीं भूल भटके किसी तरह अगर आतंकी जमातों के हाथ लग गये तो वे अमेरिका को इन परमाणु बमों से तबाह कर सकते है। इसी दुविधा व आशंका से भयभीत हो कर अमेरिका में इन दिनों यह जनमत बन रहा है कि हर हालत में पाकिस्तान के परमाणु अस्तों को ठीक लादेन पर किये गये हमले की तरह ही हमला कर नष्ट या कब्जे में ले कर पाकिस्तान को परमाणु अस्त्र से मुक्त किया जाय। उसकी परमाणु क्षमता को कुंद किया जाय।
इसी आशंका को भांपते हुए पाक ने भी अपनी सुरक्षा की तैयारी के लिए चीन का भी सहयोग मांगा है। हालांकि चीन भी किसी भी कीमत पर अमेरिका के जंग में टांग नहीं अडायेगा। क्योंकि उसे मालुम है कि देर न सबेर पाकिस्तान के आतंकी उसके लिए भी सरदर्द बन जायेंगे।
इसके अलावा अमेरिका को इस बात की भी आशंका है कि पूरे विश्व के मुसलमान उसके खिलाफ होने लगे है। परन्तु उसके सैन्य दृष्टि से कोई भी विरोध करने का साहस तक नहीं जुटा पा रहा है। जिस प्रकार से लादेन के कत्ल को पूरे इस्लामी जगत में शहादत माना जा रहा है। जिस प्रकार से पाकिस्तान ही नहीं पूरे अरब जगत के अलावा भारत के श्रीनगर क्षेत्र में बड़ी संख्या में मुस्लिमों ने प्रदर्शन किया। लादेन की मौत पर विशेष प्रार्थना व प्रदर्शन किया उससे साफ हो गया है कि आने वाले समय में लादेन विश्व मुस्लिम जगत के लिए एक बडे शहीद का दर्जा अमेरिका ने दे ही दिया है।
ऐसी स्थिति में अब अमेरिका के पास एक ही रास्ता बच गया है कि वह अपनी व विश्व की रक्षा के लिए अविलम्ब पाकिस्तान के परमाणु अड्डों को तबाह कर दे। नहीं तो आने वाले समय में ये ही अस्त्र अमेरिका सहित पूरे विश्व की शांति के लिए सबसे बड़ा खतरा बन जायेगा।
आज जरूरत है अमेरिकी नेतृत्व को अपनी पुरानी भूलों को सुधारने की। विश्व जनमत से अपने पापों के लिए माफी मांगने की। विश्व की शांति पर ग्रहण लगाने के अपने कृत्य का प्रायश्चित कर अमेरिका केवल पाक पर तत्काल हमला कर उसके परमाणु अस्तों को लादेन की तरह शिकंजे में लेने की। यही अमेरिका के लिए सबसे बड़ी विश्व सेवा होगी। शेष श्री कृष्ण कृपा। हरि ओम तत्सत्। श्रीकृष्णाय् नमो।

Monday, May 9, 2011

बाबा मोहन उत्तराखण्डी की शहादत व अण्णा का अनशन! आखिर कब तक शहीदों की शहादत पर मूक रहेंगे उत्तराखण्डी

बाबा मोहन उत्तराखण्डी की शहादत व अण्णा का अनशन!
आखिर कब तक शहीदों की शहादत पर मूक रहेंगे उत्तराखण्डी
मैं इस बात से हैरान हॅू कि जहां देश में भ्रष्टाचार के खिलाफ पूरे देश में एक व्यापक माहौल हैं परन्तु भ्रष्टाचार में आकंण्ठ डूबे उत्तराखण्ड में सरकारी भ्रष्टाचार पर जिस शर्मनाक ढ़ग से यहां की मीडिया व राजनेतिक दलों ने शर्मनाक मौन रखा है उससे पूरे देश के चिंतकों को चिंतित कर दिया है। लोगों को समझ में नहीं आ रहा है कि दिल्ली में तो भ्रष्टाचार के मुद्दे पर मात्र 98 घंटे की आमरण अनशन पर दिल्ली सरकार जाग गयी थी। अण्णा देश के महानायक बन गये। देश की जनता ने उनको हाथों हाथ लिया । परन्तु उत्तराखण्ड में बाबा मोहन उत्तराखण्डी की राजधानी गैरसैंण बनाने की मांग को लेकर चले 29 दिन के आमरण अनशन पर अपनी शहादत देने के बाबजूद तत्कालीन धृतराष्ठ से बने मुख्यमंत्री नारायणदत्त तिवारी की वासना के गर्त में मरी आत्मा ही जाग पायी व नहीं प्रदेश की जनता ही जागी। वहीं 68 दिनों तक हरिद्वार में भ्रष्टाचार के खिलाफ आमरण अनशन करने वाले स्वामी निगमानंद के अनशन ने भाजपा की वर्तमान प्रदेश सरकार ही जागी व नहीं देश में भ्रष्टाचार के खिलाफ हुकार भरने वाले संघ व भाजपा के आला नेताओं की आत्मा को ही झकझोर पायी। नहीं प्रदेश की जनता सकड़ों पर उतरी। स्वामी निगमानंद की कुशलक्षेम पूछने के लिए उमा भारती तो दिल्ली से डोईवाला स्थित हिमालयन हॉस्पिटल जौलीग्रांट इसी सोमवार को पहुंची । गौरतलब है कि स्वामी निगमानंद ने हरिद्वार में भ्रष्टाचार के खिलाफ 68 दिनों तक अनशन किया था। हालत बिगड़ने पर उन्हें दो मई को आईसीयू में भर्ती कराया गया था। चिकित्सकों का कहना है कि स्वामी निगमानंद की हालत स्थिर बनी हुई है। यह सब उत्तराखण्ड में की वर्तमान हालत को ही दर्शता है कि लोग आज किस प्रकार से जड़ हो गये है। इस प्रकार की स्थिति को देखते हुए सवाल होता है कि क्या उत्तराखण्ड के लोगों की जिन्होंने सदियों तक इस देश के स्वाभिमान व आत्मसम्मान के लिए अपना सर्वस्व निछावर किया था। जिनकी वीरता व ईमानदारी का डंका पूरे संसार में बड़े ही सम्मान से लिया जाता था। वहां राज्य गठन जनांदोलन में उत्तराखण्ड के स्वाभिमानी लोगों ने उत्तराखण्डी आत्म सम्मान को रौंदने वाले तत्कालीन उप्र के मुख्यमंत्री मुलायम व केन्द्र सरकार के मुखिया राव के अमानवीय दमन को बहादूरी से संगठित हो कर विफल कर देश के हुक्मरानों को पृथक राज्य गठन के लिए विवश कर दिया था। जिस उत्तराखण्ड ने मुगलों व फिरंगी सहित तमाम विदेशी आक्रांताओं को मुंहतोड़ जवाब दिया था। जिस उत्तराखण्ड की बहादूर जनता ने इंदिरा गांधी की थोपशाही के खिलाफ गढ़वाल लोकसभा उपचुनाव में मुहतोड़ जवाब दिया। जिस उत्तराखण्ड की जनता ने उत्तराखण्ड विरोधी नारायणदत्त तिवारी के कुशासन को उखाड़ फेंका था। आज वही उत्तराखण्ड की जनता प्रदेश में एक के बाद एक हो रहे भ्रष्टाचार पर मूक क्यों है। वह क्यों प्रदेश की राजनैतिक ताकत व भविष्य को सदा के लिए जमीदोज करने वाले प्रदेश विधानसभाई परिसीमन को जनसंख्या पर आधार पर थोपने वाले तिवारी व खंडू डी सहित कांग्रेसी नेताओं के कुकृत्य को मूक रह कर सह रहे हैं। वह क्यों प्रदेश की जनांकांक्षाओं की कूंजी स्थाई राजधानी गैरसैंण न बनाने पर तुले प्रदेश की अब तक की सरकारों के षडयंत्रों पर अपना विरोध प्रत्यक्ष रूप से प्रकट क्यों नहीं कर पा रही है। वह क्यों अपने स्वाभिमान को मुजफरनगर काण्ड-94 में रौंदने वाले अपराधियों को दण्डित करने के बजाय मूक रह कर बचाने के कृत्य करने वाले अब तक के शासकों को धिक्कार नहीं रहे है। आखिर अपने स्वाभिमान व हक हकूकों को रोंदने वाले तिवारी से लेकर निशंक तक के तमाम सत्तासीनों से दो टूक सवाल क्यों नहीं किया। आज यह सवाल वर्तमान के लिए ही महत्वपूर्ण नहीं है अपितु यह सवाल उत्तराखण्ड के भविष्य को भी प्रभावित करेंगे। जिस प्रकार से निशंक सरकार के भ्रष्टाचार व कुशासन एक के बाद एक उच्च न्यायालय में खुल रहे हैं उस पर शर्मनाक ढ़ग से उनको राजनैतिक संरक्षण मिल रहा है तथा मीडिया का मूक समर्थन मिल रहा है वह उत्तराखण्ड के भविष्य के साथ साथ देश की लोकशाही के लिए काफी खतरनाक है।
आखिर आमरण अनशन में ही शहादत देने वाले श्री देव सुमन की शहादत के बाद टिहरी की जांबाज जनता ने टिहरी से राजशाही का कलंक सदा के लिए दफन कर लोकशाही का स्थापित कर दिया था। परन्तु आज शहादत से गठित हमारे प्रदेश में, देश भूमि कहलाये जाने वाली पावन धरती उत्तराखण्ड में आज यहां की जनता को क्या हो गया कि वह प्रदेश के हितों को निर्ममता से रौंदे जाने पर भी मूक क्यों हैं। आज यहां इन सत्ता के सौंदागर प्रदेश के हक हकूकों को अपने निहित स्वार्थ के लिए जिस प्रकार से बंदरबांट कर रहे है। यहां पर प्रतिभा के बजाय जातिवाद व क्षेत्रवाद का जो अंधा कुशासन चल रहा है वह प्रदेश के विकास को ही नहीं यहां पर सदियों से स्थापित समाजिक सौहार्द को भी तहस नहस कर दिया। यहां की प्रतिभाओं को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी देने के बजाय अपने प्यादों व दिल्ली के आकाओं के प्यादों को उत्तराखण्ड में थोपा जा रहा है। ऐसे में प्रदेश की जनता जो कभी अपनी ईमानदारी के लिए विश्व विख्यात रही। ऐसे उत्तराखण्ड की जनता लगता है चुनाव के समय भ्रष्टाचारियों को कड़ा सबक सिखायेगी। परन्तु चुनाव में तो जनता अवश्य इनके मनसूबों को तहस नहस करने के लिए खुल कर न केवल आवाज उठायेंगी अपितु इन कुशासकों के भ्रष्टाचार को मूक समर्थन देने वाली मीडिया पर भी सही जवाब देगी। शेष श्रीकृष्ण कृपा। हरि ओम तत्सत्। श्रीकृष्णाय् नमो।

अग्रणी चिंतक व राजनेता केसी शोषित का निधन

अग्रणी चिंतक व राजनेता केसी शोषित का निधन
नई दिल्ली(ंप्याउ)। उत्तराखण्ड राज्य गठन आंदोलन व भारतीय समाजवादी जनचेतना के अग्रणी पूंज के सी शोषित ‘शर्मा’ जी का निधन गत सप्ताह उनके दिल्ली निवास दयालपुर में हो गया। उनका अंतिम संस्कार निगम बोध घाट में किया गया। वे छटे दशक में सोसलिस्ट पार्टी दिल्ली के प्रदेश सचिव भी रहै। उन्होंने दिल्ली में न केवल उत्तराखण्डी समाज अपितु देश के गरीब, शोषित, मजदूर व उपेक्षित समाज को एकजूट करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उत्तराखण्डी मूल के अग्रणी समाजसेवी के शी शोषित इंडियन एक्सप्रेस से भी लम्बे समय से जुड़े रहे। उन्होंने उत्तराखण्डियों को एकजूट करने के लिए एक समाचार पत्र भी दिल्ली में प्रकाशित किया था। लम्बे समय तक वे प्यारा उत्तराखण्ड के माध्यम से उत्तराखण्डी समाज को जागृत करते रहे। वे देश के अग्रणी चिंतक के साथ साथ आम जनहितों के लिए संघर्ष करने वाले देश के अग्रणी समाजवादी राजनेता रहे। प्यारा उत्तराखण्ड समाचार पत्र को उनके निधन की खबर उनके सुपुत्र ने दूरभाष से दी। इसके बाद समाजवादी नेता प्रेम सुन्दरियाल ने भी उनके निधन की पुष्टि करते हुए गहरो शोक प्रकट किया। उनकी तेरहवीं 12 मई को उनके दिल्ली दयाल पुर स्थित आवास डी-2/52 में होगा। उनके निधन पर अनैक सामाजिक संगठनों ने गहरा शोक प्रकट करते हुए उनकी पावन स्मृति को शतः शतः नमन् किया। शोकाकुल परिजनों को अपनी संवेदनाएं प्रकट की।

इस साल भी नहीं कर पाये कपाट खुलने वाले दिन मुख्यमंत्री निशंक भगवान बदरीनाथ के दर्शन

श्री बदरीनाथ धाम सहित चारों धामों के खुले कपाट
इस साल भी नहीं कर पाये कपाट खुलने वाले दिन मुख्यमंत्री निशंक भगवान बदरीनाथ के दर्शन

,बदरीनाथ(प्याउ)। 9 मई के पावन ब्रह्म मूर्हत में 5.35 मिनट पर पूरे वैदिक मंत्रों व भगवान श्री बदरीनाथ की जय हो! के गगनभेदी जयकारों के बीच छह माह के शीतकालीन प्रवास के बाद आम भक्तों के लिए भगवान बदरी विशालके कपाट खोल दिये गये। गौरतलब है कि भगवान श्री बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने के एक दिन पहले भगवान केदारनाथ के भी कपाट खुल गये। इसके साथ ही चार धामों के नाम से विश्व विख्यात पावन धामों के कपाट खुलते ही प्रदेश में देश विदेश से भक्तों का दर्शनार्थ तांता ही लग गया।
उत्तराखंड के सीमान्त जनपद चमोली में 3,133 मीटर की ऊंचाई पर स्थित इस हिन्दू धर्म के सर्वोच्च धाम के कपाटइस अवसर पर प्रथम दिन ही देश विदेश से आये 25 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने अखंड ज्योति के साथ ही भगवान के दर्शन किए। वहीं प्रदेश के मुख्यमंत्री गत वर्ष की तरह इस वर्ष भी भगवान श्री बदरीनाथ के दर्शन कपाट खुलने के दिन नहीं कर सके। गौरतलब है मुख्यमंत्री बनने के बाद वे गत वर्ष कपाट खुलने के पावन पर्व पर गत वर्ष भी भाजपा के आला नेता लाल कृष्ण आडवाणी के साथ भगवान बदरीनाथ के दर्शन करने का मन बना चूके थे परन्तु उस दिन प्रदेश भर व बदरीनाथ क्षेत्र में आयी वर्षा व तुफान ने मुख्यमंत्री की इच्छा पर पानी ही फेर दिया। इस साल भी जहां वे भगवान श्री केदारनाथ के कपाट खुलने के दिन केदारनाथ पंहुचे परन्तु इस इस साल भी भगवान श्री बदरीनाथ के दर्शन कपाट खुलने के दिन नहीं कर पाये। अब चारों धामों के कपाट श्रद्धालुओंके लिए खुल गए हैं। इसके जो भी कारण हो परन्तु इसे राजनै ितक क्षेत्रों में शुभ नहीं माना जा रहा है। क्योंकि इस साल सदियों से भगवान श्रीबदरीनाथ धाम के पावन कपाट खुलने के रोज पूरे बदरीनाथ क्षेत्र, जो बदरीनाथ के समीप नीति माणा से नारायणबगड़ विकासखण्ड के कोठुली क्षेत्र तक माना जाता है, वहां वर्षा की न हल्की व नहीं भारी बौछारें पड़ी।
वहीं सोमवार 9 मई सुबह कपाट खुलने के बाद रावल केशव प्रसाद नम्बूदरी ने महालक्ष्मी की प्रतिमा को मंदिर के गर्भ गृह से बाहर निकाल महालक्ष्मी मंदिर में विराजमान किया। इसके उपरांत उद्धव व कुबेर को गर्भ गृह में प्रवेश कराकर बदरीश पंचायत की पूजा शुरू की गई। इस साल भगवान श्रीबदरीनाथ धाम के कपाट खुलते समय गत वर्षों की भांति ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य माधवाश्रम की बजाय विहिप समर्थित शंकराचार्य वासुदेवानंद सरस्वती, धर्माधिकारी जगदंबा प्रसाद सती, आपदा प्रबन्धन मंत्री खजान दास, बदरीनाथ के विधायक केदार सिंह फोनिया ,मंदिर समिति के अध्यक्ष अनुसूया प्रसाद भट्ट, यूकेडी के अध्यक्ष त्रिवेन्द्र पंवार, सहित बड़ी संख्या में देश विदेश से आये वैष्णव भक्त व प्रशासनिक अधिकारियों के साथ मंदिर समिति के अधिकारी भी उपस्थित थे।

चुनावी जंग को जीतने के लिए निशंक चल सकते हैं नये जनपद गठन का दाव

चुनावी जंग को जीतने के लिए निशंक चल सकते हैं नये जनपद गठन का दाव
जैसे-जैसे प्रदेश में आगामी वर्ष में होने वाले विधानसभा चुनाव का समय नजदीक आता जा रहा है प्रदेश में नये जिले बनाने की मांग को लेकर चल रहे आंदोलनों के तेवर भी बदलते जा रहे है। इन आंदोलनकारियों को विश्वास है कि विधानसभा चुनाव से पहले सरकार राजनेतिक दाव खेल कर हर हाल में प्रदेश में कुछ नये जिलों का गठन करेगी। इन नये संभावित गठित होने वाले जिलों में जहां काशीपुर, धुमाकोट, रानीखेत, यमुनाघाटी व रूड़की का नाम प्रमुखताः से लिया जा रहा है।
इसी आशा में प्रदेश में नये जनपदों के गठन की मांग का आंदोलन इन स्थानों के अतिरिक्त कई अन्य स्थानों में भी जारी है। हालांकि नये जिलों की मांग को लेकर रामगंगा, पिण्डर, कोटद्वार, नरेन्द्र नगर, डीडीहाट सहित कई अन्य नाम बड़ी तेजी से जुड़ रहे है। परन्तु जिस तीब्रता से रानीखेत जिला बनाओं आंदोलन संयुक्त संघर्ष समिति के बैनर तले साढ़े तीन माह से चल रहा है उसको देख कर लग रहा है कि अगर प्रदेश सरकार ने नया जिला बनाने की मांग को विधानसभा चुनाव से पहले नहीं मा नी तो यह भाजपा के लिए बहुत ही घातक हो सकता है। इसके साथ विश्वसनिय सुत्र यह दावा भी कर रहे हैं कि रानीखेत व काशीपुर से लेकर यमुनाघाटी जिला बनाने के लिए प्रदेश भाजपा सरकार मन पूरी तरह से बना चूकी है। इसके अलावा अन्य जनपदों के बनाये जाने के नफा नुकसान का आंकलन करके इस सूचि में नये नाम भी जुड़ सकते हैं।
वहीं रानीखेत में धरना-प्रदर्शन एसडीएम कार्यालय में जारी है। इसके साथ जिस प्रकार से धुमाकोट जिला बनाने की मांग को लेकर धुमाकोट क्षेत्र के सैंकड़ों लोगों ने राजधानी देहरादून में धुमाकोट जिला बनाओं संघर्ष समिति के संरक्षक महेश चंद्रा के नेतृत्व में प्रचण्ड प्रदर्शन किया तथा उसमें नेता प्रतिपक्ष डा. हरक सिंह रावत से लेकर आधा दर्जन कांग्रेसी विधायकों ने प्रदर्शन में सम्मलित हो कर गेद भाजपा के पाले में डाल दी है। अब अगर भाजपा प्रदेश में नये जनपदों का गठन करती है तो उसके लिए धुमाकोट को नजरांदाज करना चुनावी वर्ष में आत्मघाती ही साबित होगा। अगर नये जनपदों के गठन में जरा सी भी चूक होती है तो निशंक सरकार का यह सियासी दाव आत्मघाती भी साबित हो सकता है। परन्तु अगर सही पड़ गया तो यह दाव विधानसभा चुनाव में प्रदेश की सत्तासीन भाजपा के लिए फिर से प्रदेश में सत्तासीन होने के मंसूबों को साकार करने में काफी हद तक मददगार साबित हो सकते हैं।

Sunday, May 8, 2011

विश्व शांति के लिए आतंकी पाक की परमाणु शक्ति तत्काल नष्ट करे अमेरिका

विश्व शांति के लिए आतंकी पाक की परमाणु शक्ति तत्काल नष्ट करे अमेरिका
पाकिस्तानी परमाणु शक्ति विहिन करने के लिए अमेरिका को यथाशीघ्र ही परमाणु अस्त्रों को कब्जे में लेने के लिए लादेन पर किये जैसे ही हमला करना चाहिए। क्योंकि लादेन की तरह ही पाकिस्तान को भी अमेरिका की कृपा व सहयोग से ही आज विश्व शांति के िलए खतरा बन गया है। अपने इन कुकृत्यों के लिए विश्व जनसमुदाय से माफी मांगते हुए अमेरिका को प्रायश्चित करने के लिए तत्काल पाकिस्तानी परमाणु अड्डों को तबाह कर परमाणु अस्त्रों को आतंकी हाथों में पंहुचने के लिए लादेन पर किये गये छापामार हमला करना चाहिए। इसमें जरा सी भी अमेरिका ने देर लगायी तो यह अमेरिका के साथ साथ विश्व शांति के लिए भी खतरा हो सकता है।- देवसिंह रावत

दुश्मन से बदतर हुए हुक्मरान

दुश्मन से बदतर हुए हुक्मरान
जिस देश में देशद्रोहियों का संरक्षण तथा अन्न उत्पादक किसानोें, मजदूरों व आम राष्ट्र भक्तों का दमन किया जाता है। उस देश को दूश्मनों की क्या जरूरत। उस देश के शासकों को एक पल भी सत्ता में रहने का नैतिक हक नहीं है।

भारत में मातृ दिवश मनाने का किसी को नैतिक हक नहीं

भारत में मातृ दिवश मनाने का किसी को नैतिक हक नहीं

जिस देश में मातृ भाषाओं को रौंदते हुए फिरंगी भाषा की गुलामी की जाती हो, जिस देश में गौ माता का निर्ममता से कत्ल किया जाता हो, जिस देश में भारत माता से द्रोह करने वालों को सम्मान दिया जाता हो और जिस देश में धरती माता पर अवैध कब्जा करने वाले पाक व चीन को गले लगाया जाता हो, उस देश में मातृ दिवश मनाने का किसी को नैतिक हक नहीं है।-देवसिंह रावत www.rawatdevsingh.blogspot.com

Friday, May 6, 2011

जब सोनिया को दिलाया ताज व भाजपा को फंसाया मक्कर में काला बाबा ने

जब काला बाबा के मक्कर में फंसी भाजपा,
जब सोनिया को दिलाया ताज व भाजपा को फंसाया मक्कर में काला बाबा ने
महान रहस्ममय शक्तियों के स्वामी काला बाबा
जनविरोधी नेताओं के साक्षात काल थे कालाबाबा
इतिहास की दिशा बदलने की ताकत रखने वाले काला बाबा को समझ नहीं पायी दुनिया

‘340 सांसदों के समर्थन से मैं देश में सोनिया गांधी का राज कराऊंगा’ जेसे ही रहस्यमय शक्तियों के महान चमत्कारी ‘काला बाबा’ ने 13 वीं लोकसभा चुनाव से एक साल पहले जब मध्य प्रदेश सहित चार राज्यों की विधानसभा चुनाव में भाजपा का परचम फेहराने की खबर पर तत्काल प्रतिक्रिया प्रकट करते हुए कहा ‘देवी अब फंसे भागती जनता पार्टी वाले मेरे मक्कर में (बाबा भाजपा को भागती जनता पार्टी ही कहते थे)। काल का चक्कर चलता है और काला का चलता है मक्कर। काल के चक्कर से तो कोई बच भी सकता है परन्तु काला के मक्कर से कोई नहीं बच सकता। अब मैं अपने मक्कर के चक्कर में भाजपा को फंसा कर छह माह पहले ही मध्यावति चुनाव कराऊंगा और 340 सांसदों के बहुमत से देश में सोनिया गांधी का राज चलाऊंगा।’ बाबा यही नहीं रूके उन्होंने अपनी रो में कहा देवी मैं अब किसी भी कीमत पर कांग्रेस से सपा व बसपा का चुनावी समझोता नहीं होने दूंगा।
तो मुझे हंसी आ गयी। क्योंकि उस समय देश में चारों तरफ भाजपा का ही परचम लहरा रहा था। उसी समय मध्य प्रदेश सहित चार राज्यों के विधानसभा चुनाव में भी भाजपा ने ही कांग्रेस को पराजित करके अपना डंका ही बजा दिया था। ऐसे समय में 340 सांसदों के समर्थन से सोनिया जी का शासन देश में चलाने की घोषणा करना एक प्रकार से मेरे लिए ही नहीं आम राजनीति के जानकारों के लिए भी मजाक से कम नहीं था। परन्तु मुझे काला बाबा पर उनके चमत्कारों को देख कर विश्वास था। बाबा की इस युगान्तकारी भविष्यवाणी के कई साक्षी रहे। इनमें वर्तमान में संसद में मुख्य चिकित्साधिकारी व करीबी भक्तों में अग्रणी डा. जयप्रकाश, पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा दिल्ली के कनाट प्लेस में स्थापित संस्था ‘बाल सहयोग’ के तत्कालीन सचिव डा शर्मा, कांग्रेस सेवा दल के पूर्व राष्ट्रीय उपाध्यक्ष उमेद सिंह राठी सहित देश के कई वरिष्ठ राजनेता इस घोषणा के राजदार थे। मैने उसी समय प्यारा उत्तराखण्ड साप्ताहिक समाचार पत्र में इस खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया। मैने समझने में जरा भूल की कि सोनिया 340 सांसदों के समर्थन से प्रधानमंत्री बनेगी। मैने बाबा की भविष्यवाणी को अक्षरशः प्रकाशित किया था। उस भविष्यवाणी की खबर पर कोई विश्वास ही नहीं मान रहा था। कांग्रेस मुख्यालय में कांग्रेसी नेता भी इस खबर को मजाक समझ रहे थे। परन्तु जैसे ही वाजपेयी प्रधानमंत्री वाले एनडीए सरकार ने छह माह पहले ही लोकसभा मध्यावति चुनाव की घोषणा की तो मुझे लगने लगा कि काला बाबा की भविष्यवाणी सही साबित होने की दिशा में बढ़ रही है। उस समय मेने कई बार इस बारे में समाचार प्रकाशित किया तो इसका असर यह हुआ कि सोनिया गांधी के निजी सहायक माधवन भी दिल्ली के सुपर बाजार स्थित बाल सहयोग में जहां काला बाबा रहते थे वहां उनसे मिलने गये। परन्तु जिस प्रकार कुरू सभा में भगवान श्री कृष्ण को नहीं पहचान पाये थे, उसी प्रकार सोनिया ही नहीं उनके कोई दरवारी भी काला बाबा को नहीं पहचान पाये। हालांकि पुराने दरवारी जिनमें धवन थे वे इतना जानते थे कि काला बाबा इंदिरा गांधी से मिलते रहते थे। परन्तु उनको भी काला बाबा की रहस्यमय शक्तियों का शायद ही भान हो। इसके अलावा अधिकांश नेता काला बाबा को काल ही मान कर उनकी भृकुटी से भयभीत रहते थे। काला बाबा के परमकृपा से उप्र के मुख्यमंत्री पद पर आसीन रहे हेमवती नन्दन बहुगुणा जी की सुपुत्री रीता बहुगुणा जो उन दिनों 24 अकबर रोड़ कांग्रेस मुख्यालय में अखिल भारतीय महिला कांग्रेस की अध्यक्षा के पद पर आसीन थी, वह भी काला बाबा को ढूढने गयी परन्तु बाबा उनको नहीं मिले। परन्तु उनको भी शायद ही उनकी रहस्यमय शक्तियों का भान हो। शायद रीता बहुगुणा, बाबा को बहुगुणा जी का मात्र समर्थक समझती थी। परन्तु बाबा तो बहुत ही रहस्यमय थे।
उनकी भविष्यवाणी अक्षरशः 2004 में सम्पन्न हुए लोकसभा चुनाव परिणाम से जब मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री बने व सोनिया गांधी यूपीए की चियरपरसन बनी तो तब साकार हुआ। इसी लोकसभा चुनाव के दौरान भाजपा की नेत्री सुषमा स्वराज इत्यादि भाजपा को दो तिहाई बहुमत की दहाडें मार रही थी। कांग्रेस का समझोता लाख चाहने के बाबजूद सपा-बसपा से नहीं हो पाया। भले ही प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह बने हो परन्तु राज देश में आज भी सोनिया गांधी का ही चल रहा है। बाबा की एक नहीं दर्जनों भविष्यवाणी का मैं साक्षी रहा हूॅ। उप्र के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष जगदम्बिका पाल व हरियाणा से सांसद के चुनाव जीते शर्मा सहित कितने ही नेताओं को मैने अपनी आंखों से देखा। पर बाबा सदा कहते थे कि आज राजनीति भी धर्म, शिक्षा की तरह व्यापार बना दिया है। नेताओं पर कटाक्ष करते हुए वे सामने कहते थे क्यों घोटाला करने के लिए राजनीति में आ रहे हो। वो नेताओं को देखते ही कहते थे जय हो घोटाले वालों की। बाबा की सहजता व रहस्यमयता को आज याद करता हॅू तो उनको देख कर मुझे रामकृष्ण परमंहंस व सांई बाबा की याद आती है। बहुत ही सहज व रहस्यमय शक्तियों के स्वामी थे। वे कहते थे कि बिना मेरी इजाजत के हवा, पानी भी मेरे पास फटक नहीं सकते। मैं प्रकृति से डंडा दे कर काम कराना जानता हॅू। दुनिया में तमाम बाबा, पादरी, मोलवी, तांत्रिकोे ने दुनिया को पाखण्ड में फंसा कर इनको जड़ बना दिया है। वे अंधविश्वास, पाखंड व षोषण के सदा खिलाफ रहते थे। वे कहते थे कि पत्थर को पूज पूज कर इनके दिमाग भी पत्थर बन गये। इन्हें इंसानों से कोई दया धर्म निभाना नहीं आता।
आज भाजपा की दुर्दशा को देख कर मुझे याद आते हैं काला बाबा। मुझे ऐसा लगता है कि बाबा कहते हैं कि देवी देखा भाजपा आज भी मेरे मक्कर में फंसी है। बेटे मेरा नाम ही काफी है इन समाज विरोधियों को मजा चखाने के लिए। आज बाबा के वह शब्द मेरे कानों में बार बार गुंजता है कि देवी कृष्ण का अर्थ होता है काला। मैं ही काल हॅू और कृष्ण हूॅ। आज भले ही कांग्रेसी नेतृत्व इस महान युगान्तकारी काला बाबा से अनजान हो परन्तु भाजपा की जो दुर्दशा हो रही है मुझे विश्वास है कि उनका मक्कर आज भी भाजपा को पतन के गर्त में धकेल रहा है। भाजपा नेतृत्व भी अपने पतन का कारण नहीं जान पाया। बाबा कहते भी थे देवी काल कभी डण्डा ले कर किसी को मारने नहीं जाता वह कारण बनाता है। मै तो काला बाबा हूॅ, सारा काम प्रकृति को डण्डा दे कर कराता हॅू। काला बाबा ने अपनी इसी रहस्यमय ताकत से नरसिंह राव द्वारा सत्ता मद में अमेठी के समीप नरोरा सम्मेलन कराने के बहाने गांधी परिवार को अपनी ताकत दिखाने की प्रवृति को बाबा ने आंधी तूफान से पूरा सम्मेलन स्थल तबाह कर होने ही नहीं दिया था। ऐसा ही कार्य उन्होंने लखनऊ में वाजपेयी के चुनाव में अपनी भृकुटी तान कर की थी। बाबा भले ही आज अपने स्थूल देह में न हो परन्तु वे कहते थे देवी मैं तो सदा रहूूंगा तुम मुझे जहां भी पुकारोगे मैं सदा साथ रहूॅंगा। काला बाबा के बारे में यह महसूर था साफ आसमान में जब चाहे भारी वर्षा करा देते थे और जब चाहे भारी वर्षा को रोक देते थे। वे किसी निरापराध का शोषण के इतने खिलाफ थे। वे राजनीति को लूटेरों व अंग्रेजों से बदतर लूटेरां बताते थे। वे कहते थे ये आजादी नहीं हरामजादी हो गयी। वे भाजपा को धर्म व जाति की राजनीति करने के बहुत खिलाफ थे। इसी लिए उन्होंने बाबरी मस्जिद प्रकरण को सदा के लिए समाप्त करने का निर्णय भी लिया । वे कहते थे बीजेपी को मंदिर से कोई लेना देना नहीं उनको तो राजनीति करनी है, इसी लिए उन्होंने कहा न रहेगा बांस व न रहेगी बांसुरी। भाजपा की वर्तमान दुर्दशा को देख कर मुझे काला बाबा की याद बरबस आती है। उन्हीं की तर्ज में उत्तराखण्ड से इस लोकसभा चुनाव में भाजपा की जातिवादी अलोकशाही का सफाया करने में मैं समर्पित रहा। कांग्रेस भी भाजपा की तरह बदतर है परन्तु उसका मुखोटा पूरी तरह जनता के सामने बेनकाब है परन्तु भाजपा ने जनता के विश्वास के साथ धोखा दिया। जब तक भाजपा अपनी तरफ से प्रायश्चित नहीं करेगा उसको मुक्ति नहीं मिलेगी। यह बाबा का मक्कर है। यह देश की जनविश्वास के साथ किये गये छल का श्राप भी है। उन्होंने जातिवादी व क्षेत्रवादी ताकतों को देश के लिए खतरा बताते थे। मानवता के लिए शोषक बताते थे। इसी कारण वे सपा व बसपा से कांग्रेस का समझोता नहीं होने देते थे। भले ही कांग्रेसी व सपा-बसपा नेतृत्व लाख कोशिश करते रहे। पर क्या मजाल बाबा के मक्कर से ये तीनों भी उबर पाये। बाबा कांग्रेस के पथभ्रष्ट मानते परन्तु फिर भी बाबा वर्तमान में कांग्रेस को विकल्प न मिलने तक सहारा देश हित में देते रहते। उनको इंदिरा जी भाई मानती थी। परन्तु वे सदा जनहित के कार्यो के लिए इंदिरा जी को प्रेरित करते रहे। मुझे लगता है कि इलाहाबाद के कोरांव तहसील के सुहास गांव के मूल निवासी काला बाबा आज भी देश व मानवता की रक्षा के लिए मेरे से कार्य कराने के लिए तत्पर हैं।उनकी पावन यादों को अपने जीवन में संजोये हुए मैं आज इस कुरूक्षेत्र में भगवान श्रीकृष्ण की अपार कृपा व काला बाबा के आर्शीवाद से जनविरोधियों को परास्त व बेनकाब करने के लिए समर्पित हॅू। यही मेरी सबसे बड़ी ताकत व पूंजी है। शेष श्री कृष्ण कृपा। हरि ओम तत्सत्। श्रीकृष्णाय् नमो।