Pages

Thursday, January 31, 2013


पाक हुक्मरान ही नहीं, भारतीय हुक्मरान भी है कारगिल के गुनाहगार


कारगिल के गुनाहगार केवल पाक के हुक्मरान ही नहीं भारतीय हुक्मरान भी हैं जिन्होंने पहले तो पाक की घुसपेट को नजरांदाज किया, जब भारतीय जांबाज सैनिकों ने अपनी सैकडों शहादत दे कर पाक के नापाक घसेपेटियों को चारों तरफ से से घेर लिया था तो भारतीय हुक्मरानों ने इन भारत के दुश्मनों को अमेरिका के दवाब में आ कर बिना पाक को मजबूर व बेनकाब किये सुरक्षित पाक जाने का रास्ता दे कर भारतीय सैनिकों की शहादत का अपमान किया। भले ही आज पाक के एक कर्नल ने पाक सेना प्रमुख मुशर्रफ सहित पाक हुक्मरानों को खुद ही बेेनकाब किया परन्तु आज भी भारत में पहले नापाक पाक को घुसपेट करने देने व बाद में हमारे सैकडो सेंनिकों की निर्मम हत्या करने के दोषियों को गिरफतार करके पाक को बेनकाब करने के बजाय इन गुनाहगारों को सुरक्षित पाक जाने देने वाले भारतीय हुक्मरानों को कब करेंगे भारतीय बेनकाब? क्या है कारगिल विजय का सत्य-देश के साथ छलावा। दुश्मन हमारे घर में घुसा और उसने हमारे सैकडों जवानों की हत्या की, जब हमारे जांबाज सैनिकों ने चारों तरफ से घेर दिया तो अमेरिका से भारतीय हुक्मरानों पर दवाब डला कर वे नापाक पाक सुरक्षित पाकिस्तान चले गये। इस पर पर्दा डालने के लिए हुक्मरानों ने भारत में मनाया कारगिल विजय ? यह कारगिल विजय थी या देश से हुक्मरानों का विश्वासघात ? पाक के बेनकाब होने के बाबजूद हम भारतीय कब तक कारगिल के गुनाहगारों को बेपर्दा करेंगे? जिस भारतीय जांबाज सेना अधिकारी ने कारगिल में घुसपेट करने की सूचना दी उसको नजरांदाज करने वाले गुनाहगारों को कब करेगा भारत बेनकाब? अगर नापाक पाक की घुसपेट का उसी समय मुहतोड़ जवाब दे दिया जाता तो पाक, भारत की सरजमी पर कब्जा करके सैकडों जांबाज सैनिकों की हत्या नहीं कर पाता।

राजनाथ सिंह अध्यक्ष बनने से उत्तराखण्ड में निशंक के सुधरेंगे दिन


फरवरी में बन जायेगा नया प्रदेश अध्यक्ष 

अभी चीन से मेरे मित्र राजेन्द्र रतूडी  ने मुझसे फेसबुक पर पूछा कि भाई एक बात बताओं कि उत्तराखण्ड का अध्यक्ष कौन बनेगा? मेने उनको तुरंत बताया कि राजनाथ के बनने से उत्तराखण्ड में अध्यक्ष कौन बनेगा परन्तु जो भी बनेगा वह निशंक की सहमति से ही बनेगा। क्योंकि राजनाथ सिंह भले ही सिद्धांत के कितनी ही बातें कहें परन्तु वे गांधीवादी नेताओं में देश में जाने जाते है। उत्तराखण्ड में भले ही प्रदेश के आम जनता ही नहीं  भारतीय संस्कृति के स्वयं भू ध्वजवाहक और सुशासन व रामराज्य लाने के सूरमाओं ने जैसे ही खण्डूडी जी के कहने पर उत्तराखण्ड का भाग्य विधाता  निशंक को मुख्यमंत्री के रूप बनाया था तो  देश के प्रबुध जनता की आंखे फटी की फटी रह गयी थी। पुत्र मोह में जनमांध धृष्टराष्ट को ही नहीं बडे बडे धर्मात्माओं व सिद्धांतवादियों को भी बेनकाब किया था। राजनाथ सिंह तो बडी मुश्किल से कल्याण के न होने के कारण ताजपोशी का शौभाग्य पा गये। निशंक ने अपने शासन में संघ से लेकर राजनाथसिंह सहित भाजपा के तमाम बडे नेताओं के साथ सभी उन लोगों का ख्याल रखा जो उनकी सत्ता पर ग्रहण लगा सकते थे । उन्होंन सत्तासीन होते ही अपने राजतिलक करवाने वाले खण्डूडी जी को जो सम्मान दिया उससे न केवल खण्डूडी जी अपितु खण्डूडी जरूरी का तोता राग जपने वालों को यदि आज भी उन दिनों का स्मरण हो जाये तो उनके इस सर्दी में भी पसीने छूटने लग जायें तो किसी को अश्चर्य नहीं होगा। भला हो ले. जनरल तेजपालसिंह रावत का जिन्होंने एक बार फिर खण्डूडी के तारणहार बन कर अपने भ्रष्टाचार विरोध की ज्वाला से प्रदेश में आसीन निशंक की सरकार को पदच्युत करने में भाजपा के केन्द्रीय नेतृत्व को मजबूर करके खण्डूडी जी की ताजपोशी की। नहीं तो निशंक अगर बने रहते तो खण्डूडी व कोश्यारी को ही नहीं अपितु भाजपा में तमाम समर्पित बडे नेताओं को वनवास भोगना पडता और प्रदेश में पूरी तरह से भाजपा निशंकमय हो जाती।
इन दिनों फिर प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष पद के चुनाव में प्रदेश भाजपा के नेताओं के बीच एक प्रकार का घमासान मचा हुआ है। चतुर निंशक ने जिस प्रकार से खण्डूडी के साथ मिल कर कोश्यारी समर्थकों को अध्यक्ष के पद पर घेराबंदी की उससे लोग हैरान है कि यह खण्डूडी की राजनैतिक तिकडम है या निशंक का। परन्तु दोनों के मेलजोल से प्रदेश में अध्यक्ष पद पर केन्द्रीय नेतृत्व अपना पसंदीदा नेता को आसीन नहीं कर पाया। अब फरवरी माह में प्रदेश अध्यक्ष की ताजपोशी होनी निश्चित है। भाजपा के केन्द्रीय अध्यक्ष के रूप में राजनाथ सिंह की ताजपोशी का असर अब प्रदेश की राजनीति में क्या होगा यह तो कुछ समय बाद भाजपा के संरक्षक संघ को पता चलेगा परन्तु उत्तराखण्ड में राजनाथ सिंह की ताजपोशी होते ही निंशंक व उनके समर्थकों के चेहरे में फेली मुस्कान एक ही बात का संकेत दे रही है कि अब निशंक का बनवास दूर होगा। इसी की आशंका से भाजपा के समर्पित नेताओं के चेहरों पर छायी रहने वाली मुस्कान इन दिनों गायब देख कर सहज ही समझी जा सकती है। अब निशंक के बल्ले बल्ले है।  या तो उनका चेहता अध्यक्ष बनेगा या निशंक नेता प्रतिपक्ष। यानी अब भाजपा में आयेगा उत्तराखण्ड में निशंक राज...। प्रदेश में अब नहीं लगता कि जमीन से जुडे, साफ छवि के अनुभवी मोहनसिंह ग्रामवासी जैसे समर्पित नेताओं का पार्टी की कमान दे कर भाजपा को गुटबाजी से बचाने के लिए भाजपा के दिल्ली के आका निर्णय ले पायेंगे। लगता है दिल्ली में आसीन संघ व भाजपा नेतृत्व की याददास्त कमजोर पड रही है या वे आज भी कुम्भ में निशंक के कौशल, स्टर्जिया व जलविद्युत परियोजनाओं प्रकरण से निपटने के महारथ से गडकरी की तरह गदगद है। उनको आज भी याद आ रही है  खण्डूडी द्वारा निशंक की ताजपोशी के तराने। इससे सहज अंदाज लगाया जा सकता है इन नेताओं को देश प्रदेश व जनता की कितनी चिंता है। ये कुर्सी के लिए प्रदेा देश व जनता को कितनी वरियता देते है। इनको विधानसभा क्षेत्र के परिसीमन, राजधानी गैरसैंण, मुजफरनगरकाण्ड, प्रदेश के जल, जंगल व जमीन पर काबिज हो रहे माफियाओं तथा प्रदेश को भ्रष्टाचार का मच रहा तांडव कहीं दिखाई नहीं दिया। इनको दिखाई दे रही है तो केवल अपनी कुर्सी? इनको चिंता है तो केवल अपनी कुर्सी की। इसके लिए वे कब किसका विरोध करदे व कब किसका साथ खडे हो जायें इसको कोई नहीं जान सकता। आज ऐसे तोते भी हैं जिनको सबकुछ रौद चूके नेता जरूरी लगते हैं प्रदेश की जनांकांक्षाओं को साकार करना जरूरी नहीं लगता।

Monday, January 28, 2013


तेलगांना पर कांग्रेसी विश्वसाघात से भडका व्यापक जनांदोलन


देश के 4 दशकों की सभी दलों की सरकारें गुनाहगार, शीघ्र गठित हो तेलंगाना राज्य

नई दिल्ली। छह दशक से पुरानी तेलांगना पृथक राज्य गठन की मांग पर कांग्रेसी विश्वासघात से पूरे तेलंगाना  में प्रचण्ड आंदोलन भडक गया है। तेलंगाना से सम्बंध रखने वाले कांग्रेस के सात सांसदों ने पृथक राज्य के गठन में विलम्ब के विरोध में संसद और पार्टी, दोनों से एक सप्ताह में तेलंगाना गठित न करने पर इस्तीफा देने का निर्णय ले कर कांग्रेस आलाकमान सहम गयी है। वहीं दूसरी तरफ तेलांगना मुद्दे पर भारत सरकार से वायदा खिलाफी का आरोप लगाते हुए पी चिंदम्बरम के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया। रंगारेड्डी के मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट की कोर्ट में गृहमंत्री के खिलाफ शिकायत दर्ज की गई है। इसमें मांग की गई है कि पी चिंदबरम ने गृह मंत्री रहते हुए 9 दिसंबर, 2009 को अलग तेलंगाना राज्य को लेकर जो वादा किया था उसे पूरा नहीं किया। ये तेलंगाना के लोगों से धोखाधड़ी है। फिलहाल कोर्ट ने इस मामले में पुलिस को एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए हैं।ऐसा नहीं कि केवल यह विश्वासघात कांग्रेस की सरकारों ने ही किया है। यह विश्वासघात देश में चार दशक से अधिक समय तक राज करने वाले तमाम दलों की सरकार ने अपने दलगत हितों के लिए तेलांगना की जनता के विश्वास का गला घोंट कर देश की लोकशाही को कमजोर किया है। देश की सबसे पुरानी मांगों में प्रमुख मांग को सभी सरकारों ने अब तक नजरांदाज किया है। इस आंदोलन में 1000 से अधिक  लोग शहीद हो गये है। पूरा तेलांगना इस मांग के लिए समर्पित है परन्तु सरकारें जनभावनाओं को नजरांदाज कर लोकशाही को कमजोर कर रही है।
 28 जनवरी को गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे की दी डेडलाइन के खत्म खत्म होते ही तेलंगाना में बवाल शुरू हो गया है। 28 जनवरी सोमवार को हैदराबाद में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हुई।
हैदराबाद के इंद्रा पार्क इस वक्त तेलंगाना समर्थकों का गढ़ बना हुआ है। यहां तेलंगाना ज्वाइंट एक्शन कमेटी के सैकड़ों कार्यकर्ता मौजूद हैं। टीआरएस यानि तेलंगाना राष्ट्र समिति के नेता कमेटी के साथ मिलकर आगे की रणनीति बनाने में जुटे हुए हैं।
टीआरएस विधायक और नेता हरीश राव के मुताबिक कांग्रेस के तेलंगाना मंत्रियो को इस्तीफा देना चाहिए। हम लाखों लोगों को इकठ्ठा करके नारा देंगे। चलो असेम्बली। कितनी मीटिंग होगी, हम अपना गुस्सा दिखा कर कांग्रेस को सबक सिखाएंगे।आंध्र सरकार की सभी कोशिशों के बावजूद सड़कों पर प्रदर्शन तेज होता जा रहा है।
कांग्रेस के स्थानीय नेता पार्टी के फैसले से बेहद आक्रोाित हैं। लेकिन अलग तेलंगाना की मांग करने वाले केंद्र सरकार के इस रवैए से खफा है। उधर भाजपा ने इस आंदोलन को अपना पूरा समर्थन देने का ऐलान किया हालांकि भाजपा ने राजग शासनकाल में उत्तराखण्ड, झारखण्ड व छत्तीसगढ़ राज्य तो बनाया परन्तु उसको भी इतना नैतिक साहस नहीं रहा कि वह सबसे पुरानी राज्य बनाने की तेलंगाना  की मांग पर भी नजर दौडा सके। कुल मिला कर राजनैतिक दलों ने न केवल तेलांगना के साथ अपितु देश की लोकशाही के साथ खिलवाड किया है। इसी कारण आज देश की लोकशाही का इतना शर्मनाक स्थिति हो गयी है। देश की सरकार व राजनेताओं में जरा भी लोकशाही के प्रति सम्मान है तो उन्हें अविलम्ब सर्वसम्मति से तेलंगाना राज्य के गठन करके देश की लोकशाही को मजबूत करना चाहिए।

Sunday, January 27, 2013


 भारत को ही नहीं विश्व को आज जरूरत है मोदी जैसे मजबूत नेतृत्व की 


भारत को ही नहीं आज विश्व को भी अमेरिका, चीन व कटरपंथी धर्मांध तत्वों से बचाने के लिए मोदी जैसे मजबूत नेतृत्व की जरूरत है। जिस प्रकार से आज पूरी मानवता इन तत्वों के दंश से कराह रही है उससे मानवता को उबारने के लिए मोदी जैसे मजबूत नेतृत्व की जरूरत है। आज देश को दिशाहीन व खुदगर्ज कांग्रेस या भाजपा जैसे तमाम वर्तमान दलों की उतनी जरूरत नहीं जितना मोदी जैसे मजबूत नेतृत्व की। आज देश के तमाम दलों से देश की जनता का विश्वास एक प्रकार से उठ चूका है। वे देश को इन सत्ता के चंगैजों से मुक्ति नहीं दिला पा रहे हैं। तोगडिया सहित तमाम मोदी विरोधियों को एक बात समझ लेनी चाहिए कि जब एनडीए या भाजपा या कांग्रेस ही नहीं अंग्रेज या मुगल भी नहीं थे तब भी देश था। देश के लिए एक दल नहीं सेकडों दिशाहीन व पदलोलुपु दल कुर्वान किये जा सकते है। परन्तु एक मजबूत नेतृत्व को अपने निहित स्वार्थ के लिए पीछे धकेलने का खमियाजा देश को कई शताब्दियों तक भोगना पड़ता है। मोदी वर्तमान में सभी नेताओं में देश को मजबूत बनाने  के लिए सर्वोत्तम है। देश को आज पाक, अमेरिका व चीन जैसे विदेशी दुश्मनों से अधिक इस देश के जातिवादी, कट्टरपंथी, क्षेत्रवादी व भ्रष्टाचारी जयचंदों से है। मोदी में भी कमियां हो सकती है परन्तु वर्तमान समय में देश के तमाम प्रधानमंत्री के दावेदार सभी दलों के नेताओं में मोदी ही एक ऐसा नाम है जो राष्ट्र को मजबूत व सही दिशा देने में सक्षम  है। देश के तमाम दुश्मन नहीं चाहते हैं कि देश को मजबूत नेतृत्व मिले।  क्योंकि मजबूत नेतृत्व ही भारत को विश्व में ताकतवर व विकसित देश बना सकता है। इसलिए भारत के तमाम दुश्मन नहीं चाहते हैं कि मोदी जैसा मजबूत नेता के हाथ भारत की बागडोर हो। आशा है मोदी बिना किसी भेदभाव के देश के तमाम लोगों को ऐसा सुशासन देंगे कि लोगों को मनमोहन सिंह जैसे कुशासकों के द्वारा दिये गये दंश से उबर कर राष्ट निर्माण के कार्य में समर्पित रहेंगे।  याद रखों देश ही नहीं घर की रक्षा की जिम्मदारी जो कमजोर, विश्वासघाती व भ्रष्टाचारी दिशाहीन नेताओं के हाथों में सौंपना चाहते हैं वह किसी देश को तोड़ने से कम नहीं है। क्योंकि मनमोहन व अटल की तरह का कमजोर नेतृत्व भारत को अमेरिका व पाक के दंशों से ही नहीं अपितु भ्रष्टाचारियों से भी नहीं बचा सकता। जरूरत  है मोदी को देश की जनता का और विश्वास जीतने की।

Saturday, January 26, 2013


जनकल्याणकारी वैज्ञानिक रामप्रसाद से प्रेरणा लें हुक्मरान व युवा


विज्ञान को जन कल्याण के कार्यो में समर्पित करने वाले विश्व के चोटी के वेज्ञानिक राम प्रसाद जी के विचारों, चिंतन व कार्य को शतः शतः प्रणाम। दस साल से अधिक समय तक प्यारा उत्तराखण्ड समाचार पत्र में मैने उनकी असाधारण प्रतिभा को हर अंक में ‘फट्टे की सरकार’नाम से प्रकाशित किया। परन्तु अफसोस होता है कि न तो देश व न उत्तराखण्ड की सरकार व योजनाकारों को उनके जनहित की योजनाओं की तरफ ध्यान देने की सुध तक रही। राम प्रसाद जी के टर्नोड जैसे वैज्ञानिक टेक्नीकल नर्सरी का अनुसरण करके चीन विश्व की महान आर्थिक महाशक्ति बन चूका है। न हमारे समाज व नहीं हमारी सरकार किसी में देश व प्रदेश के हित में सोचने व समझने की कुब्बत है। हम अच्छे जनहित के कार्यो में लगे लोगों को न तो समझ पाते हैं व नहीं सम्मान ही कर पाते है। 82 साल की उम्र में भी वे आज भी युवाओं से अधिक समर्पित हो कर अपने मिशन के लिए समर्पित है। पौड़ी के नैनीडाण्डा क्षेत्र में ध्यानी परिवार में जन्में विश्व के महान वैज्ञानिक आज में इंटरनेट, फेसबुक व अन्य साधनों से विश्व में विज्ञान का जनहित के कार्यो में केसे सदप्रयोग हो। कैसे मानव संसाधनों का वैज्ञानिक ढ़ग से विकास के कार्य में सदप्रयोग किया जाय। वल्र्ड साइंटिफिक वर्कस ऐसोशिएसन के अध्यक्ष व दक्षिण एशिया साइन्टिसट एसोशिएसन के महासचिव रहे वैज्ञानिक रामप्रसाद जी डीआरडीओ सहित देश के कई नामी संस्थान में अग्रणी वैज्ञानिक रहे। सेवानिवृत होने के बाद वैज्ञानिक रामप्रसाद ने अपनी इस सोच को धरातल में उतारने के लिए अपने मयूर विहार दिल्ली स्थित टर्नोड संस्थान को संचालित करके जो अपने मिशन की लौ जला रखी है वो भले ही उत्तराखण्ड सहित देश के हुक्मरानों को न समझ आया हो परन्तु चीन ने अपने विकास की नींव ही वैज्ञानिक राम प्रसाद की टेक्नीकल नर्सरी को अमलीजामा पहना कर विकास की जो कूचालें भर रहा है। परन्तु भारतीय हुक्मरानों ने उनके सतत प्रयासों को नजरांदाज करके देश को जो अहित किया उसके लिए आने वाली पीडि़यां कभी उनको माफ नहीं करेगी। अपने जनहित वैज्ञानिक मिशन के लिए इस उम्र में भी दिन रात समर्पित वैज्ञानिक राम प्रसाद जी के सम्पर्ण व लगन को मैं शतः शतः नमन् करता हूॅ।
 

26 जनवरी को संसद की चैखट जंतर मंतर में दामिनी प्रकरण पर उमडे आंदोलनकारी


बलात्कारियों को फांसी की सजा देने की मांग करते हुए जस्टिस वर्मा

29 जनवरी को जंतर मंतर से इंडिया गेट होगा मार्च 

एक तरफ राजपथ पर 26 जनवरी को सरकार देश का गणतंत्र दिवस हर्षोल्लाश से मना रही थी उसी दिन संसद की चैखट  ‘राष्ट्रीय धरनास्थल जंतर मंतर पर 16 दिसम्बर को दिल्ली की एक बस में सामुहिक बलात्कार की शिकार हुई 23 वर्षीया छात्रा  दामिनी को न्याय दिलाने व महिलाओं के खिलाफ होने वाली हिंसा पर अंकुश लगाने के लिए कठोर कानून बनाने की मांग को लेकर जंतर मंतर पर 16 दिसम्बर क्रांति, आप की छात्र युवा ईकाई व दिल्ली, जवाहर लाल नेहरू सहित कई विश्वविद्यालयों के छात्रों सहित कई संगठनों ने धरना प्रदर्शन किया। 16 दिसम्बर क्रांति के नाम से जंतर मंतर पर इस प्रकरण के विरोध में 24 दिसम्बर से निरंतर धरना प्रदर्शन कर  रहे आंदोलनकारियों ने  पूरे जंतर मंतर को 16 दिसम्बर क्रांति के झण्डे पंम्पलेटों के साथ गगनभेदी नारों से अपने आंदोलन को गणतंत्र दिवस के अवसर पर भी जारी रखते हुए बलात्कार के दोषियों को फांसी की सजा देने की मांग करते हुए जस्टिस वर्मा समिति की सिफारसों को सिरे से नकार दिया। वहीं 16 दिसम्बर क्रांति नाम से संचालित इस निरंतर धरने को अरविन्द केजरीवाल ने संबोधित करते हुए अपना पूरा समर्थन दिया।  वहीं दामिनी के देहान्त के एक माह होने पर 29 जनवरी को 16 दिसम्बर क्रांति संगठन ने जनता से जंतर मंतर से इंडिया गेट तक मार्च करने का ऐलान किया।
वहीं जंतर मंतर पर दिल्ली, जवाहर लाल नेहरू सहित अनैक विश्वविद्यालय के छात्रों ने गणतंत्र दिवस के दिन मण्डी  हाउस से संसद की चैखट जंतर मंतर तक विशाल प्रदर्शन किया। इसमें बड़ी संख्या में माले व इसकी छात्र ईकाई आइसा से जुडे युवाओं ने भाग लिया। इसमें देश विदेश  की मीडिया की उपस्थिति में सैकडों की संख्या में महिलाओं ने भी भाग लिया। ये लोग जस्टिस वर्मा आयोग की सिफारसों को तुरंत लागू करने की मांग भी कर रहे थे।
इसके अलावा जंतर मंतर पर अरविन्द केजरीवाल, मनीष सिसौदिया व गोपाल राय की सरपरस्ती में आम आदमी पार्टी की छात्र युवा  संगठन ने जंतर मंतर पर धरना प्रदर्शन किया। इसमें बडी संख्या में आप पार्टी के कार्यकत्र्ता आप पार्टी की  टोपियां पहने हुए नजर आये। इसमें शहनाज हिन्दुस्तानी के राष्ट्रभक्ति के गीतों से लोगों को इस संघर्ष में चढ़बढ़ कर संघर्ष करने के आवाहन भी लोगों से किया। वहीं आप पार्टी के प्रवक्ता गोपाल राय ने सरकार को दो टूक चेतावनी दी कि अगर फरवरी माह तक सरकार ने सदन में बलात्कारियों को कडी सजा देने वाला कानून नहीं बनाया तो उनकी छात्र युवा संगठन 1 मार्च को जंतर मंतर पर आंदोलन तेज कर देगी।
इसके अलावा जंतर मंतर पर अरविन्द केजरीवाल व उनकी पार्टी के धरने के विरोध करते हुए उनके सहयोगी रहे अग्रणी आंदोलनकारी श्रीओम एवं साथियों ने भी इस संवेदनशील मुद्दे पर राजनीति न करने के नारे व पोस्टर लहराये।
इस अवसर पर जंतर मंतर पर जहां चण्डीगढ़ पुलिस के डीआईजी पर लम्बे समय तक यौन शोषण का आरोप लगाने वाली पीडि़ता भी 12 वें दिन के अनशन के बाद राममनोहर लोहिया अस्पताल में दाखिल होने बाद फिर जंतर मंतर पर लोट आयी। वहीं जंतर मंतर पर दिल्ली में एक पार्षद द्वारा योन शोषण व उत्पीड़न से पीडि़त परिवार ने भी यहां पर अपना धरना जारी रखा। वहीं इनके दोषियों को अविलम्ब गिरफतार करने की मांग करते हुए बाबू सिंह का आमरण अनशन जारी रखा।
इस अवसर पर इस आंदोलन में कई बार अपनी पेंटिंगों व कलाकृर्तियों से समर्थन करने वाले पेंटर व कलाकार चंदर प्रकाश अपने साथियों के साथ यहां पर अपनी पेंटिंग बना कर जनाक्रोश को नयी अभिव्यक्ति देते रहे।
इसके साथ ही यहां पर कई बार अपने सूफी गीतों से इस आंदोलन को नयी दिशा देने के लिए कई संगीतकारों व गीतकारों ने सांयकाल अपने सूफी गीतों की प्रस्तुति दे कर दामिनी को श्रद्धांजलि दी।
इसके बाद सांयकाल 16 दिसम्बर क्रांति के आंदोलनकारियों ने मोमबत्तियां जला कर चलने वाला मार्च गणतंत्र दिवस के दिन भी जोश खरोश के साथ करके दामिनी को अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

Friday, January 25, 2013


26 जनवरी ‘गणतंत्र दिवस’ के शुभ अवसर पर 
स्वतंत्रतासंग्राम के महान सैनानियों व शहीदों 
की पावन स्मृति को शतः शतः नमन्

आओ संकल्प लें कि हम आजादी के 65 साल बाद भी 
देश के हुक्मरानों द्वारा देश की आजादी को अंग्रेजी भाषा की गुलामी 
से आजाद कराने के अपने आप को समर्पित करे। 

विदेशी भाषा, विदेशी तंत्र से  मुक्त होने के बाद ही होगा भारतीय गणतंत्र का सूर्यादय


भारत के लाखों सपूतों ने शताब्दियों तक किये आजादी के सतत् संघर्ष व बलिदान देने के  बाद जो आजादी विदेशी हुक्मरानों को खदेड़ कर हाशिल की थी वह आजादी को देश के चंद लोगों ने अपनी गुलाम मानसिकता के कारण बंधक बना लिया है। 15 अगस्त, 1947 में आजाद होने के बाद देश में आसीन हुक्मरानों ने अपनी संकीर्ण सत्तालोलुपता के कारण देश को परिवार, धर्म,जाति, क्षेत्र, भाषा, लिंग के नाम पर लूट व लुटवा कर बर्बाद कर दिया है। हालत इतनी शर्मनाक है कि देश आजादी के 65 साल बाद भी अपने तंत्र, अपनी भाषा, अपने नाम, अपनी संस्कृति के लिए तरस रहा है। आज हालत यह हो गया है देश में लोकशाही के नाम पर चंगैजशाही का जो अंधा तांडव चल रहा है उससे हर रोज हो रहे अरबों खरबों के देश के संसाधनों को लूटने के घोटालों व कुशासन से देश का आम आदमी मंहगाई, भ्रष्टाचार, आतंकवाद से बेहद पीडि़त है। आम आदमी से न केवल शिक्षा, चिकित्सा, न्याय ही नहीं अपितु रोजगार व सम्मान भी देर हो गया है। जनसेवक बने राजनेता व नौकरशाह ही नहीं उद्यमी व समाजसेवी सहित पूरा तंत्र चंगैजी प्रवृति से ग्रसित हो कर देश को बर्बाद करने में दिन रात लगे हुए है। आम आदमी की चित्कार किसे सुनाई नहीं दे रही है। धर्माचार्य समाज में प्रेम व ज्ञान से आलौकित करने के बजाय दौलत इकठ्ठा करके समाज में घृणा फेलाने में लगे हुए है। आज आम आदमी असहाय हो कर भारत के दुर्भाग्य पर आंसू बहा रहा है। इस देश के हुक्मरानों ने देश में विद्या, चिकित्सा, न्याय व समाजसेवा को व्यापार बना कर आम आदमी का जीना दूश्वार कर दिया है।
हालत इतनी दयनीय हो गयी है कि भले ही देश के बाहरी दुश्मनों से रक्षा करने के लिए माॅं भारती के लाखों जांबाज सपूत सैनिक के रूप में सीमाओं पर दिन रात डटे हुए हैं। परन्तु जिन नेता व नोकरशाह पर देश के भाग्य को बनाने व संवारने के साथ साथ एकता व अखण्डता की रक्षा करने का महत्वपूर्ण दायित्व देश की जनता ने लोकशाही में विश्वास करके सौंपा है वे अपने निहित स्वार्थ के लिए अपने दायित्व का निर्वाह करने के बजाय देश की एकता अखण्डता व स्वाभिमान को अमेरिका, चीन व पाकिस्तान से रौंदवा कर भी नपुंसक बने हुए है। हालत यह है कि भारत के जांबाज सैनिकों के सर नापाक पाक काट ले, देश की संसद सहित शहरों पर आतंकी हमले करें या भारत की लाखों वर्ग किमी भू भाग पर कोई कब्जा कर ले परन्तु भारत के नपुंसक हुक्मरान ऐसे अमेरिका, पाक व चीन जैसे भारत द्रोही दुश्मनों को मुंहतोड़ जवाब देने के दायित्व का निर्वाह करने के बजाय बेशर्मो की तरह उनको गले लगाने के आत्मघाती कृत्यों में ही लगे हुए है।
ऐसे में आज जरूरत है देश को भगवान श्रीकृष्ण के अमरघोष की जो अन्याय के खिलाफ सतत् संघर्ष का नेतृत्व करे। स्थिति इतनी दयनीय हो गयी है कि देश की इस दयनीय हालत से उबारने के लिए जो कुछ रहुनुमा बने है वे इसी फिरंगी गुलामी का लबादा ही नहीं उनकी पूरी मानसिकता ही इसी फिरंगी गुलामी से भरी हुई है। गणतंत्र दिवस के उपलब्ध पर देश के स्वाभिमानी सपूतों का आवाहन करता हॅू कि वे देश से आजादी के 65 साल बाद भी गुलामी के कहार बने तंत्र व उनके कहारों से मुक्त कर भारतीय गणतंत्र की स्थापना करने में ‘भारतीय मुक्ति सेना’ के सैनिक बन कर अपने राष्ट्रीय धर्म का पालन करेंगे। आओ देश की आजादी को फिरंगी कहारों से मुक्त करके फिर से भारत को विश्व के कल्याण के लिए देश पर थोपी गयी फिरंगी गुलामी को हर स्तर से उखाड़ फेंक कर भारत को विश्व गुरू बनाने के संकल्प को पूरा करने के लिए समर्पित करें।
जय हिन्द 
आपका
देवसिंह रावत
भारतीय मुक्ति सेना 

Thursday, January 24, 2013


दामिनी प्रकरण से आहत व आक्रोशित देशवासियों से न्याय नहीं कर पायी जस्टिस वर्मा समिति 


दामिनी प्रकरण जैसे क्रूर पाश्विक घटना ने देश के अधिकांश कानूनविद, राजनेता, समाजसेवी सहित देश विदेश का आम आदमियों को उद्देल्लित कर दिया है। देश के अधिकांश नागरिक एक स्वर में ऐसे अमानवीय क्रूर अपराधियों को केवल मौत की सजा देने की मांग कर रहते हुए देश ही नहीं पूरे विश्व में लाखों लोग इसके लिए आंदोलन भी कर रहे है। देश की जनता एक स्वर में ऐसे प्रकरणों पर अंकुश लगाने के लिए अपराधियों को मौत की सजा व ऐसे अपराधों में लिप्त उम्र की ढाल बना कर नाबालिक अपराधी को कोई छूट न दे कर उसे भी मौत की सजा देने की मांग कर रही थी । परन्तु इस प्रकरण पर कानून को और कडा बनाने के लिए सरकार द्वारा बनायी गयी न्यायमूर्ति वर्मा समिति ने न तो जनभावनाओं से न्याय किया व नहीं देश में अपराधियों के बढ़ते हुए हौसले पर बज्रपात करने के लिए कठोर कानून बनाने की ही सिफारश की। ऐसे जघन्य अपराधियों को जीवित रहने का एक पल का भी अधिकार नहीं है। ऐसे में उनको मौत की सजा के बजाय उम्रकेद दे कर एक प्रकार से जीवनदान ही दिया हैं।
वहीं नाबालिक अपराधियों की उम्र को 18 से कम करने से इनकार करके वर्मा समिति ने देश मे शिक्षा व अपराधिक प्रवृतियों के बाद आये सामाजिक परिवर्तन को नजरांदाज करके पथभ्रष्ट हो चूके 16 साल से उपर के पक्के अपराधियों को एक प्रकार से और अपराध करने की ढाल सोंप दी है। जिस प्रकार का हिंसक अपराधिक कृत्य दामिनी प्रकरण में एक तथाकथित 18 साल से कुछ माह छोटे अपराधी ने किया, उसको देख कर भी देश के भाग्यविधाता बने लोगों की आंखे नहीं खुली तो ऐसे समितियों को बनाने का क्या औचित्य है।
देश की जनता मनमोहनी सरकार व न्यायमूर्ति वर्मा समिति की तमाम सिफारसों को ठुकराते हुए ऐसे अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए दामिनी जेसे हिंसक सामुहिक बलात्कार करने वाले मामले में अंकुश लगाने के लिए केवल मौत की सजा की मांग करते है। इसके साथ जो 18 साल से चंद महिने कम उम्र के सबसे क्रूर अपराधी का नाबालिक बता कर उसको नाबालिक कोर्ट में मामला चलाने यानी उसको चंद साल की सजा देने के षडयंत्र को नकारती है और सोच समझ कर सबसे क्रूरतम अपराधी करने वाले 16 साल से उपर के अपराधी को वयस्क मानते हुए केवल फांसी की सजा देने की मांग कर रही है। देश की जनता सरकार व ऐसे समितियों को सिरे से नकारती है। सरकार व उसके ऐसे हथकण्डे केवल देश की जनता के आक्रोश को बढाने का काम करेगी। वहीं जस्टिस वर्मा समिति ने ऐसे कातिल बलात्कारियों को मौत की सजा देने के बजाय महिलाओं को घूरने व पीछा करने वाले को भी अपराध बना कर एक प्रकार से भ्रष्टाचारी पुलिस को आम आदमी को नाहक लूटने का एक क्रूर हथियार सौंप दिया है। इससे अपराधों पर अंकुश लगने के बजाय अपराध में वृद्धि ही होगी।
 

मुम्बई बमकाण्ड के सूत्रधार रहे खुंखार आतंकी हेडली को अमेरिका ने दिया जीवनदान क्यों?


हेडली को बचाने के  लिए अदालत से उम्रकेद का नौटंकी क्यों?

2008 में मुंबई पर हुए आतंकी हमले जिसमें छह अमेरिकियों समेत 166 लोग मारे गए और सैंकड़ों लोग घायल हुए थे उसके खूंखार सूत्रधार आतंकी डेविड हेडली को अमेरिका ने मौत की सजा से अभयदान दे कर भारत के स्वाभिमान  ही नहीं न्याय का गला घोंटने का घृर्णित कृत्य किया । एक तरफ अमेरिका अपने लादेन सहित अन्य अपराधी आतंकियों को पाकिस्तान, अफगानिस्तान सहित पूरे विश्व में कहीं भी छिपे होने पर वहीं जा कर मौत के घाट उतार रहा है वहीं भारत पर मुम्बई आतंकी काण्ड के मुख्य सूत्रधार को अपने देश में पनाह दे कर उसको अभयदान देने का घृर्णित कार्य करने को तुला है। अमेरिका के  इस कुकृत्य पर न तो भारत की  नपुंसक सरकार विरोध कर रही है व नहीं विश्व समुदाय ही इस दिशा में अमेरिका से प्रश्न ही कर रहा है।
24 जनवरी को अमेरिका की शिकागो अदालत में इस आरोप में बंद हेडली को सजा देने पर अमेरिकी सरकार के मौत की सजा न देने के समझोते से लाचारी प्रकट करते हुए मायूस हो कर कहा कि न्यायमूर्ति लेनेनवेबर ने कहा, मिस्टर हेडली एक आतंकवादी हैं। आपको मौत की सजा सुनाना अधिक आसान होता। आप उसी के हकदार हैं। यह कहते हुए जज ने हेडली को 35 साल की उम्रकेद की सजा सुनायी।
उपरोक्त अदालत के फैसले से पहले ही अमेरिका ने इस आतंकी के साथ समझोता कर लिया था कि उसको मौत की सजा नहीं मिलेगी। इसके लिए हेडली को अमेरिका ने वचन दिया कि उसे न तो भारत, पाक व डेनमार्क को ही सौंपा जायेगा तथा नहीं फांसी की सजा दी जायेगी। इससे खुश हो कर हेडली ने अमेरिका के आतंकवाद के खिलाफ तथाकथित मिशन में सहयोग देने, पाक आतंकी संगठनों की जानकारी देने व आतंकी तहब्बुर राणा के खिलाफ सरकारी गवाह बनने का वचन दिया। हेडली की गवाही के कारण इसी पखवाडे जज लेनेनवेबर ने राणा को 14 साल की सजा सुनाई थी। यही नहीं ं अमेरिकी अटर्नी डेनियल जे कोलिन्स तथा साराह ई स्ट्रेकर ने हेडली के लिए 30 से 35 साल की सजा की मांग की थी।हेडली के वकीलों रॉबर्ट डेविड सीडेर तथा जॉन थॉमस ने  कम सजा सुनाए जाने की गुहार लगाते हुए दलील दी कि हेडली ने लश्कर जैसे आतंकवादी संगठनों और उसके कई नेताओं के खिलाफ अमेरिकी सरकार को काफी सूचना दी है। इसके साथ हेडली ने स्वीकार किया था कि उसने पाकिस्तान में बैठे अपने आकाओं के लिए कई अभियानों को अंजाम दिया था। उसने मुंबई में ताज महल होटेल समेत भारत में कई ठिकानों की विडियोग्राफी की थी, जिस पर लश्कर के दस आतंकवादियों ने हमला किया था। सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक हेडली द्वारा बनाए गए विस्तृत विडियो के आधार पर ही मुंबई हमलों की साजिश रची गई और उसी की जानकारियों  के आधार पर वहां पर हमला कर तबाही मचाई।

पाकिस्तानी मूल के अमेरिकी नागरिक हेडली वास्तव में अमेरिका का ही ऐजेन्ट था जो पाकिस्तानी आतंकी संगठनों के साथ मिल कर भी काम कर रहा था। इसीकारण अमेरिका हेडली को किसी भी कीमत पर भारत को नहीं सोंपेंगे। हेडली के पिता पाकिस्तानी और माॅं अमेरिकी थी उसका असली नाम दाऊद गिलानी है  जिसे उसने भारत की आंखों में धूल झोकने के लिए सनृ 2006 बदल कर हेडली कर लिया था। अतंरराष्ट्रीय खुखार हेडली एक  मादक पदार्थों का डीलर था जो बाद में अमेरिकी ड्रग इनफोर्समेंट एजेंसी का मुखबिर बन गया था। वह अमेरिका के इशारे पर पाकिस्तान व भारत में अपनी गतिविधियां चलाता था।
इस मामले में अपना अपराध स्वीकार करते हुए आतंकी हेडली कबूला कि उसने  पाकिस्तान में 2002 से 2005 के बीच पांच अलग-अलग मौकों पर लश्कर-ए-तैयबा द्वारा संचालित आतंकवादी प्रशिक्षण शिविरों में हिस्सा लिया । 2005 के अंतिम दिनों के दौरान हेडली को लश्कर के तीन सदस्यों की ओर से भारत में खुफियागिरी के लिए जाने का निर्देश मिला। उसने पांच बार खुफियागिरी की।
अमेरिका ने हेडली के भाग्य का फेसला पूरा कर लिया था शिकागो की अदालत में जो कुछ हुआ वह एक प्रकार न्याय नहीं अपितु न्याय का नाटक ही था। जज स्वयं अपने आपको लाचार मान रहा था उनके हाथ अमेरिका व खुखार आतंकी हेडली के बीच हुए समझोते से बंधे हुए थे। सच्चाई यह है कि हेडली अमेरिका का ही ऐजेन्ट है जो पाकिस्तान व भारत में अमेरिकी गतिविधियों का अंजाम देता था। उम्रकेद एक प्रकार का नाटक है असली राणा को सजा देने का हथकण्डा था और पाकिस्तान के बेलगाम आतंकी संगठनों को अंकुश में रखने का हथकण्डा ही है।


Tuesday, January 22, 2013



न्याय मिलने की आश लेकर देश भर के लोगों के लिए जंतर मंतर बना कुरूक्षेत्र 


22 जनवरी को राष्ट्रीय धरना स्थल जंतर मंतर पर मुम्बई के फिल्म निर्माता व एक्टर राॅकसन न्याय की गुहार लगाने आये। उन्होंने यहां पर चल दामिनी को न्याय दो के लिए चल रहे धरना अनशन में सम्मलित हो कर जहां इसका समर्थन किया वहीं अपने साथ देश के गृहमंत्री द्वारा किये गये अन्याय के खिलाफ संघर्ष करने का ऐलान किया। वहीं उनके आने के कुछ ही घण्टे बाद सांयकाल को दिल्ली में किसी पार्षद द्वारा यौन शोषण के पीडि़ता के परिजन बुरी तरह से आरोपी द्वारा पीटे जाने के बाद घायल अवस्था में यहां पर आये। घायल को पुलिस  बाद में अपनी एम्बुलेंस से चिकित्सालय ले गयी। इसी प्रकार यहां पर देश के विभिन्न भागों से न्याय की गुहार लगाने के लिए आने वाले पीडि़तों व संघर्ष की हुंकार भरने वाले योद्धाओं का विगत एक दशक से अधिक समय से निरंतर आने का क्रम जारी है। उस समय यहां पर एक तरफ दामिनी को न्याय दो का जनांदोलन चल रहा था व दूसरी तरफ पंजाब से चण्डीगढ़ पुलिस के डीआईजी द्वारा यौन शोषण की पीडि़ता भी कई दिनों से आमरण अनशन पर डटी हुई थी।
इन दिनों यहां 16 दिसम्बर को दिल्ली में चलती बस में सामुहिक बलात्कार की शिकार हुई 23 वर्षीया दामिनी के विरोध में देश भर में चल रहे धरना प्रदर्शनों के केन्द्र  बिन्दू बने जंतर मंतर पर 22 व 23 दिसम्बर को राष्ट्रपति भवन से इंडिया गेट तक उमडे जनाक्रोश के बाद 24 दिसम्बर से निरंतर धरना प्रदर्शन चल रहे है।  इसके बाद यहां पर कई यौन शोषण के पीडि़तायें यहां पर न्याय की आश से तब आते हैं जब उन्हें अपने यहां शासन प्रशासन सहित अन्य सभी जगह से न्याय मिलने की कोई आश नहीं रहती है। यहां पर भले ही न्याय की आश में गुजरात से 1995-1996 में आयी पार्वतीबाई व उनके पति बिना न्याय मिले यहीं जंतर मंतर पर दर दर की ठोकरें खाते खाते ही प्राण गंवा बेठे परन्तु न तो केन्द्र सरकार व नहीं गुजरात की मोदी सरकार ही उनको न्याय दे पायी। इसके साथ यहां पर विमुक्तिजाति  टपरीवास घुमंतु जाति को जनजाति का दर्जा की मांग करते हुए वर्षो तक संघर्ष करने वाले पंजाब से आये महासचिव रौनकी राम ने भी यहां पर अपने प्राण त्याग दिये उन्हे व उनके संगठन को आज भी न्याय नहीं मिला। इसके अलावा चीन से तिब्बत को आजाद करने की मांग को लेकर दो तिब्बतियों ने इन डेढ़ दशक में इस धरना स्थल जंतर मंतर पर आत्मदाह करके शहादत दे दी । जंतर मंतर के इतिहास में हर रोज यहां पर कई आंदोलनकारी या हजारों लोग देश के कोने कोने से अपनी मांगों की गुहार लगाने आते है। इनमें से केवल उत्तराखण्ड राज्य गठन जनांदोलन के आंदोलनकारी ही ऐसे शौभाग्यशाली रहे जिनको ‘उत्तराखण्ड जनता संघर्ष मोर्चा’ को यहां पर धरना देते देते अपनी मांग को पूरी होने  के बाद जश्न मना  कर आंदोलन समापन करने का अवसर मिला हो। मै इस आंदोलन का छह साल तक एक सिपाई से लेकर अध्यक्ष रहने के साथ जंतर मंतर के हर घटना क्रम, जनांदोलनों, पुलिस दमन का साक्षी ही नहीं एक आंदोलनकारी की तरह भुक्तभोगी भी रहा हॅू।
रहे धरने में कभी अन्याय का गला घोंटने के लिए आतुर दुर्योधन जैसे सत्तांध कुरू हुक्मरानों को सबक सिखाने के लिए भगवान श्री कृष्ण ने कुरूक्षेत्र में महाभारत का संघर्ष करके न्याय की रक्षा की थी। आज उसी देश भारत में जो विश्व की सबसे बड़ी लोकशाही है, न्याय व जनहितों की रक्षा करने में नाकाम रहे हुक्मरानों को लोकशाही का पाठ पढ़ाने के लिए व्यापक जनांदोलन का शंखनाद संसद की चैखट ‘राष्ट्रीय धरना स्थल जंतर मंतर पर कर रहे है।
विश्व को ज्ञान विज्ञान व मानवीय मूल्यों की सनातन गंगोत्री रही भारत में जब भी जनहितों को कुचलने व न्याय का गला घोंटने का काम यहां के हुक्मरानों ने करने की धृष्ठता की तो यहां पर जनहितों के लिए खुद को कुर्वान करने वाले सपूतों ने व्यापक जनांदोलन से सरकारों के नापाक इरादों को जनता ने जमीदोज किया है। चाहे चंगेज के समय हो या सिकंदर या मुगल या फिरंगी आक्रांताओं या देश के जनविरोधी हुक्मरानों के अन्याय का मुहतोड़ जवाब देने की पंरपरा यहां अनादि काल से रही है। द्वापर में भगवान श्रीकृष्ण ने तो त्रेता युग में भगवान राम ने । कलयुग में गुरू तेगबहादूर, गुरू गोविन्दसिंह, झांसी की रानी, चन्द्रशेखर आजाद , भगतसिंह, नेताजी सुभाषचन्द्र बोस, महात्मा गांधी, वीरचन्द्रसिंह गढ़वाली सहित असंख्य महापुरूषों ने अन्याय के खिलाफ सनातन काल से चल रही भारतीय परंपरा का निर्वाह करने का महानतम कार्य किया। आजादी के बाद जय प्रकाश नारायण, व अन्ना हजारे के बाद अब दामिनी को न्याय आंदोलन से भारतीय संस्कृति के अन्याय के खिलाफ सतत् संघर्ष करने के अमरघोष को ही शंखनाद करने की परंपरा का निर्वाहन करके सत्तांधों के खिलाफ व्यापक जनांदोलन चलाया जा रहा है। आज भले ही संघर्ष शांतिपूर्ण ढ़ग से सत्याग्रह के रूप में चलाया जा रहो हो परन्तु इस अन्याय के खिलाफ जनहितों के संघर्ष का कुरूक्षेत्र अब जंतर मंतर बन गया है।

प्रधानमंत्री की दावेदारी की राह को आसान करने के लिए किया  आडवाणी ने गडकरी का विरोध !


लोग हैरान है कि लालकृष्ण आडवाणी ने संघ के प्रिय गडकरी को फिर से भाजपा का फिर से अध्यक्ष बनाने का विरोध क्यों किया। इसी के बाद भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गडकरी ने अपने पद से इस्तीफा दिया । निशंक को पाक साफ बताने वाले व कई विवादों में घिरे वर्तमान अध्यक्ष गडकरी की ताजपोशी पर लगा ग्रहण।  सुत्रों के अनुसार संघ की पहली पसंद होने व पार्टी में संविधान में संशोधन के बाबजूद लालकृष्ण आडवाणी के विरोध के कारण गडकरी फिर से राष्ट्रीय अध्यक्ष नहीं बन पाये। इस प्रकार भाजपा में गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी को प्रधानमंत्री का प्रत्याशी बनाने की चर्चाओं के बीच कभी पीएम इन वेटिंग के रूप में असफल रहे कभी भाजपा के लोहपुरूष समझे जाने वाले लालकृष्ण आडवाणी एक बार फिर प्रधानमंत्री पद के लिए दावेदारी की तरफ मजबूती से एक एक चाल चल रहे है। लोग समझ नहीं पा रहे हें कि आडवाणी ने गडकरी जेसे बेहद कनिष्ट नेता का विरोध क्यों किया? परन्तु आडवाणी संघ के मंसूबों से भयभीत हैं। उनको मालुम है संघ की शक्ति जो प्रदेश स्तर के नेता गडकरी को राष्ट्रीय अध्यक्ष बना सकता है, तो संघ फिर से अध्यक्ष बने गडकरी को प्रधानमंत्री का दावेदार भी बना सकता है। संघ व भाजपा की राजनीति के विशेषज्ञों का मानना है कि आडवाणी इसी आशंका से भयभीत हो कर अपने एकसूत्री मिशन ‘गडकरी हटाओ, प्रधानमंत्री बनने की राह आसान करो ’को साकार करने में लग गये।
संघ की वर्तमान नेतृत्व की गडकरी को तमाम विवादों के बाबजूद फिर से राष्ट्रीय अध्यक्ष के पद पर आसीन करने के लिए भाजपा के वर्तमान संविधान में संशोधन तक कर दिया गया। आडवाणी संघ व भाजपा में वर्तमान नेताओं में से सबसे अधिक प्रखर नेता है, वे राजनीति के दाव पेच को बखूबी से समझते हैं। नेता प्रतिपक्ष पद से जिस प्रकार से जिन्ना प्रकरण के बाद संघ ने हटने के लिए मजबूर किया और आडवाणी के किसी चेहते को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने के बजाय प्रदेश स्तर के नेता नितिन गडकरी को जिस रहस्यमय ढ़ग से संघ ने थोपा गया, संघ के इस दाव का अर्थ चतुर राजनेता आडवाणी बखूबी से समझते है। उनके सीने में आज भी भावी प्रधानमंत्री के पूर्व घोषित दावेदारी से जिस प्रकार आगामी 2014 के लोकसभा चुनाव के लिए संघ व भाजपा ने उसकी दावेदारी को पुन्न न दोहरा कर उनको गहरा आघात दिया। भले ही वे इस अपमान को किसी से व्यक्त न भी कर पाये परन्तु उन्होंने आगामी लोकसभा चुनाव में अपने प्रधानमंत्री की दावेदारी को मजबूत करने वाले तमाम दाव बहुत ही सोच समझ कर चला रहे है। इसी के तहत उन्होंने फिर से रथ यात्रा का दाव चला कर अपने आप को प्रखर दावेदार के रूप में चर्चाओं में रखा। संघ नेतृत्व की आडवाणी को 2014 के लिए प्रधानमंत्री का दावेदारी का खुला समर्थन न करने तथा संघ विहिप के विरोध के बाबजूद जिस प्रकार से गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी तेजी से भाजपा में ही नहीं देश के आम जनमानस के बीच प्रधानमंत्री के सबसे मजबूत उम्मीदवार बन कर उभर रहे है, उससे भी आडवाणी बेहद चिंतित हैं।  परन्तु आडवाणी को मोदी से अधिक खतरा संघ के चेहते बने नितिन गडकरी से लगने लगा था। चतुर राजनीतिज्ञ लालकृष्ण आडवाणी समझते हैं कि मोदी पर तो पार्टी में ही नहीं राजग गठबंधन में एकमत से स्वीकार्यता नहीं है। संघ परिवार में भी एक मजबूत लाबी मोदी की राह में हर संभव कांटे विछाने के लिए कमर कसे हुए है। आडवाणी को अपने प्रधानमंत्री बनने की राह में सबसे अधिक भय अगर किसी से रहा तो वह मोदी नहीं अपितु वह संघ के चेहते गडकरी से था। इसीलिए उन्होंने मजबूती से गडकरी को फिर से अध्यक्ष बनने से रोकने के लिए निर्णायक दाव खेला। उन्हें मालुम था कि अगर आगामी लोकसभा चुनाव में कांग्रेस चुनाव में पराजित हुई और भाजपा सबसे बडा दल बन कर उभरा तो मोदी को तो प्रधानमंत्री बनने से राजग गठबंधन के साथी दल ही रोक देंगे परन्तु मोदी के नाम का विरोध होने पर संघ गडकरी का नाम आगे कर देगा और गडकरी अपने प्रबंध कौशल से आडवाणी व मोदी के होते हुए भी प्रधानमंत्री का दावेदार बन जायेगा। इसी आशंका को पहले ही भांपते हुए आडवाणी ने गडकरी की फिर से अध्यक्ष पद के राजतिलक पर ग्रहण लगा कर ही दम लिया। क्योंकि आडवाणी जानते हैं कोई दूसरा जो भी अध्यक्ष होगा उसमें आडवाणी की राह रोकने के लिए न तो संघ का उतना प्रबल दवाब होगा व नहीं उतना बडा नाम। दुबारा अध्यक्ष बन कर गडकरी अपने प्रबंध कोशल व संघ के आशीर्वाद से भाजपा के सर्वशक्तिमान दावेदार बन जाते। हालांकि भाजपा मे मोदी, आडवाणी के अलावा सुषमा, जेटली ही नहीं राजनाथसिंह व मुरली मनोहर जोशी भी प्रमुख दावेदारों में शामिल है। परन्तु जो संकट आडवाणी की राह में गडकरी खडा कर सकता था वह कोई अन्य नहीं। इसीलिए आडवाणी ने यह दाव चला गडकरी हटाओ प्रधानमंत्री की राह आसान करो। देखना है आडवाणी का यह दाव कितना कारगर साबित होता है या आत्मघाती। परन्तु फिलहाल उन्होंने गडकरी को अपनी राह से हटाने में सफलता हासिल कर ही ली।

बडी धूमधाम से मनायी गयी गढ़वाल हीरोज की हीरक जंयती 


मावलंकर हाल में रही नरेन्द्रसिंह नेगी व हीरासिंह राणा के गीतों की धूम

नई दिल्ली(प्याउ)। देश के नामी फुटबाल क्लब ‘गढ़वाल हीरोज’ ने अपनी स्थापना के 60 वर्ष पूरे होने पर अपनी हीरक जंयती संसद के समीप मावलंकर हाल में बहुत ही धूमधाम से मनाया। इस अवसर पर उत्तराखण्ड के चोटी के गायक नरेन्द्रसिंह नेगी व हीरासिंह राणा के सुमधुर गीतों ने इस सभागार में उपस्थित भारी संख्या में उपस्थित उत्तराखण्डियों का मन ही मोह लिया। समारोह का शुभारंभ उत्तराखण्ड गौरव ‘नरेन्द्रसिंह नेगी व साथियों ने ‘जय अम्बा, जगदम्बा, जय माता राणी .... व शम्भू भोले नाथ.... एवं हिमवंत देश होला, त्रियुगी नारैण.... जैसे तनमन को पवित्र करने वालेे भगवान शिव शक्ति व भगवान विष्ण की दिव्य आराधना वाले गीतों को गाल कर पूरे वातावरण को शिवशक्तिमय बना दिया। उसके बाद महान गायक हीरासिंह राणा ने ‘अचक्याल हरे ज्वाना, मेरी नोली पराण... गा कर लोगों को अपने स्वर में स्वर मिलाने के लिए रंगमत कर दिया। समारोह का संचालन करते हुए प्रसिद्ध पत्रकार व समाजसेवी सुनील नेगी ने देश के नामी फुटबाल क्लब ‘गढ़वाल हीरोज’ के 60 साल के गौरवमय इतिहास के कई उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि गढ़वाल हीरोज के हजारों खिलाड़ी आज पूरे देश में फुटबाल खेल का परचम लहरा रहे हैं वहीं देश सहित सार्वजनिक संस्थानों की विभिन्न टीमों से खेल भी रहे है। समारोह में मुख्य अतिथि व गढ़वाल हीरोज के संरक्षक नैनीताल के सांसद के सी बाबा, टिहरी संसदीय क्षेत्र की सांसद माला राज लक्ष्मी, दिल्ली प्रदेश महिला आयोग की अध्यक्षा बरखा सिंह ने अपने संबोधन में गढ़वाल हीरोज को अपनी हार्दिक बधाई देते हुए खुले दिल से इस क्लब के पदाधिकारियों व खिलाडियों की मुक्त कण्ठ से सीमित साधनों के बाबजूद भी देश में अपने खेल से परचम फहराने के साथ क्लब का नाम भी देश के फुटबाल में दर्ज करा दिया है। इस अवसर पर गढवाल हीरोज के हीरक जयंती के अवसर पर अपेडा के जनरल मनेजर ए एस रावत, उद्यमी के सी पाण्डे, जेएसबी बारगो के जगदीश बिष्ट, जदली फुडस इंडिया लीमिटेड़ के आर एन जदली, सहारा समय के कुलीन गुप्ता, सांई डाटा सेंटर के ए के गुसांई सहित अन्य प्रतिष्ठित समाजसेवियों को सम्मानित किया गया। इस अवसर पर दिल्ली प्रदेश महिला आयोग के अध्यक्षा व रामकृष्ण पुरम से तीन बार लगातार कांग्रेसी की विधायिका रही बरखा सिंह ने स्मृति सम्मान दे कर सम्मानित यिका। समारोह में उपस्थित प्रमुख लोगों में अग्रणी पत्रकार विजेन्द्र रावत, समाजसेवी महावीर राणा, बृजमोहन उप्रेती, चन्द्रपालसिंह रावत, उत्तराखण्ड पत्रकार परिषद के महासचिव अवतार नेगी, सुरेश नोटियाल, प्यारा उत्तराखण्ड के सम्पादक देवसिंह रावत, खुशहाल जीना, डा विनोद बछेती,चारू तिवारी,,विमल उनियाल, वेद उनियाल, दिल्ली पुलिस के एसीपी श्री शर्मा, प्रताप नेगी, हीरो बिष्ट, जगदीश भट्ट, उर्मिलेश भट्ट, अनिल पंत, दिनेश ध्यानी, सतेन्द्र रावत, एस एस नेगी, हुक्मसिंह कण्डारी, आदि प्रमुख थे। इस समारोह में अपने संगीत व नृत्व तथा स्वरों से चार चांद लगाने वालों में द्वारिका प्रसाद नौटियाल, विमल चैहान, अनुराग, कविलास नेगी, कुकरेती, विवेक नौटियाल, उषा नेगी, प्रेम बल्लभ पंत, मंजू सुन्दरियाल आदि कलाकार थे। इस सांस्कृतिक कार्यक्रम का संचालन कुकशाल गणी ने किया।
इस अवसर पर गढ़वाल हीरोज के अध्यक्ष बी एस नेगी, सचिव अनिल कुमार नेगी, कोषाध्यक्ष एम एस पटवाल, रवि राणा, आलम नेगी आदि ने समारोह में पधारे मुख्य अतिथियों का पुष्पमालायें पहना कर अभिनन्दन किया।

सरेआम बिक रहा है प्रतिबंधित जानलेवा गुटका 


दिल्ली, हरियाणा, उत्तराखण्ड सहित कई प्रदेशों में गुटका पर लगे प्रतिबंधों की उड रही धज्जियां

देहरादून (प्याउ)। भले ही दिल्ली, हरियाणा, उत्तराखण्ड सहित कई प्रदेशों ने बडे जोरशोर से वाह वाही लुटने के लिए जानलेवा साबित हो रहे गुटका आदि पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की। परन्तु हकीकत यह है कि आज इन प्रदेशों में अधिकांश हर दुकान पर यह जानलेवा गुटका नये अंदाज से खुलेआम मिल रहा है। ऐसा नहीं कि पुलिस प्रशासन को इसकी भनक नहीं है। यह सब प्रशासन की जानकारी व संरक्षण में हो रहा है। शर्मनाक हालत यह है कि पहले छुप कर गुटका बेचने वाले दुकानदार अब खुलेआम बेच रहे हैं। देश में इसकी क्या हालत है यह दिल्ली में संसद भवन के एक किलोमीटर क्षेत्र में खुलेआम बिक रहे प्रतिबंधित गुटका को देख कर आम आदमी समझ सकता है। हालांकि इस सप्ताह देहरादून में जब पुलिस ने ंउपजिलाधिकारी के नेतृत्व में नगर पालिका की टीम ने तम्बाकू युक्त गुटखे की बिक्री रोक लगाने को लेकर विकासनगर बाजार में अभियान चलाया, तो चंद दुकानों से ही गुटके के असंख्य पाउच बरामाद होने से शासन प्रशासन को इस प्रतिबंध की हकीकत का भान हुआ। इससे साफ हो रहा है कि देश में कानून केवल पुलिस प्रशासन की कमाई का साधन बन कर रह गये हैं।

आंदोलन को दमन से कुचल न पायी सरकार अब कर रही है बदनाम करने का षडयंत्र !

16 दिसंबर को दिल्ली में 23 वर्षीय दामिनी के साथ चलती बस में हुए सामुहिक बलात्कार की विभत्स घटना के बाद 22 व 23 दिसम्बर को सडकों पर उमडे व्यापक जनाक्रोश को दबाने के बाद जहां सरकार पुलिसिया दमन के बाद भी विफल रही। 24 दिसम्बर के बाद देश के हर कोने कोने में ही पूरे विश्व में जिस प्रकार से इस घटना की व्यापक भत्र्सना हो रही है। उसने मनमोहन सरकार को भरी सर्दी के मौसम में भी पसीने ही नहीं छुडवा दिये अपितु इस सरकार व व्यवस्था की चूलें हिला दी है। इस प्रकार की बलात्कार की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए देश की सरकार से अविलम्ब कड़ा कानून बनाने की मांग को लेकर संसद की चैखट जंतर मंतर पर समर्पित आंदोलनकारी एक माह गुजरने के बाद भी लगातार आंदोलन कर रहे है। बिना किसी नेता, संगठन के चलने वाले इस जनांदोलन से सरकार पूरी तरह सहमी हुई है । एक माह बाद भी सरकार जंतर मंतर पर चल रहे आंदोलन को तमाम तिकडमों व दमन के बाद भी तोड नहीं पायी। इस जनाक्रोश को जनता व लोकतंत्र की असली ताकत बताने वाले इस आंदोलन में मूक रहकर सक्रिय भागेदारी निभा रहे अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान दिल्ली के पूर्व सर्जन डा परमजीत सिंह साहनी ने आशंका प्रकट की कि सरकार अब इस आंदोलन को बदनाम करने के औछे हथकण्डे अपना रही है। आंदोलनकारियों को सावधान करते हुए समाजसेवी डा परमजीत सिंह ने कहा कि यहां पर गलत छवि के लोगों का सहारा ले कर आंदोलनकारियों को फर्जी विवाद में प्रताडित किया जा रहा है। उन्होंने आंदोलनकारियों को सावधान करते हुए कहा कि अगर पुलिस जंतर मंतर से जेबकतरों व अन्य प्रकार के अपराधियों को पकड़ सकती है तो जो अवांछनिय तत्वो को पुलिस जानबुझ कर यहां पर क्यों आंदोलनकारियों से विवाद करने के लिए क्यों मूक रह कर संरक्षण दे रही है। उन्होने 19 व 20 जनवरी की घटनाओं पर गहरी चिंता प्रकट की।

Sunday, January 20, 2013


मनमोहनी कुशासन को दूर करने के बजाय बंद करे कांग्रेस चिंतन की नौंटकी 

कांग्रेस के जयपुर चिंतन पर भारी पडा जंतर मंतर का चिंतन

 एक तरफ जयपुर में देश की केन्द्र सहित कई प्रांतों की सत्ता में आसीन कांग्रेस के दिग्गजों का 2 दिवसीय चिंतन शिविर का जयपुर में 19 जनवरी को राहुल गांधी को कांग्रेस पार्टी का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष की घोषणा के हुई और 20 को कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गांधी व मनमोहनसिंह तथा उपाध्यक्ष बने राहुल गांधी के भाषणों के साथ यह चिंतन शिविर का समापन हुआ। वहीं दूसरी तरफ देश की संसद की चैखट, राष्ट्रीय धरना स्थल पर जहां देश की वर्तमान शर्मनाक स्थिति से उबारने  के लिए दिसम्बर से निंरतर जनांदोलन चला हुआ है वहां पर भी 19 जनवरी को बीच सडक में बैठ कर देश की शर्मनाक स्थित पर गहन चिंतन हुआ। इस चिंतन में मेरे अलावा भाग लेने वालों में देश के शीर्ष चिकित्सा संस्थान ‘अखिल भारतीर्य आयुर्विज्ञान संस्थान दिल्ली के सेवा निवृत वरिष्ट सर्जन डा परमजीत सिंह साहनी, वसुंधरा गाजियाबाद से समाजसेवी दीन दयाल शर्मा व दक्षिण भारतीय मूल की वरिष्ट अधिवक्ता व अन्य समाजसेवी। इसमें देश की कानून व्यवस्था, मंहगाई, भ्रष्टाचार, आतंकवाद, जनांदोलनों, देश की राजनीति के शर्मनाक पतन के अलावा विश्व पर मंडरा रहे अमेरिकी वर्चस्व की अंध प्रवृति पर गहरा चिंतन किया गया।
देश की जनता ने कांग्रेस के पास देश को सुशासन देने का जनादेश दिया है। परन्तु वह जनादेश को भूल कर जनता को चिंतन व कोरे आश्वासनों का सब्जबाग दिखाने की नौटंकी कर रहे है। कांग्रेसी भूल गये कि देश की जनता ने चिंतन व भाषणवाजी न करके केवल देश को सुशासन करने का दायित्व दिया है फिर वह क्यों देश को सुशासन देने के बजाय देशवासियों को चिंतन व भाषणा की नौटंकी दिखा रही है ?वह कांग्रेस के कुशासन के प्रतीक प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को हटाने के बजाय यह बता रही है कि कांग्रेस में अब राहुल गांधी नम्बर 2 पर उपाध्यक्ष बना कर आसीन कर दिये गये है। वह सोच रही है  कि देश का मध्य वर्ग ही नहीं आम आदमी मनमोहन सिंह सरकार के कुशासन से देश की जनता का जीना हराम करने वाली मंहगाई, पाकिस्तान, चीन व अमेरिका पोषित आतंकवाद व देश में आकंण्ठ व्याप्त भ्रष्टाचार से निजात पा लेंगे। कांग्रेसी मतिमंदों को आशा है कि देश की जनता 5वें से 8 वें दशक के आम भारतीयों की तरह गांधी नेहरू परिवार के पीछे लट्टू की तरह मर मिट जायेंगे। देश की जनता को मालुम है कि राहुल नम्बर दो नहीं अब नम्बर एक है कांग्रेस मे। परन्तु क्यों करें देश की जनता राहुल का जो मनमोहन सिंह के कुशासन से देश की जनता को मुक्ति तक नहीं दिला पा रहे है। जो मंहगाई, भ्रष्टाचार, आतंकवाद व कुशासन पर मूक बने हुए है। अगर राहुल गांधी अमेरिका परस्त मनमोहन को तुरंत हटा कर देश को उसके कुशासन से मुक्ति दे कर मंहगाई, आतंकवाद, भ्रष्टाचार आदि से निजात दिलाते तो जनता को राहुल के होने का कुछ अहसास होता। राहुल कांग्रेस में क्या हैं इससे जनता को कुछ भी नहीं लेना। जनता को केवल उसी से लेना है जो उनके दुख दर्द को दूर करने के लिए आगे आये और देश की एकता अखण्डता की रक्षा करते हुए देश को विकास के पथ पर अग्रसर करे। परन्तु लगता है कि देश की इस चुनौती को स्वीकार करने का जज्बा न तो राहुल के पास है व नहीं समझ। अगर जरा भी समझ होती तो वे देश को मनमोहन जैसे कुशासन से अब तक कबके मुक्ति दिला देते। देश की जनता को अब दाम प्यारा है न की चाम। वो दिन गुजर गये जब गांधी नेहरू परिवार के नाम पर देश की जनता अंधा समर्थन करती थी। तब नेता व जनता दोनों में देश के लिए कुछ करने का जरा जज्बा बचा हुआ था। अब लोग केवल काम देखते हैं काम। देश की जनता अब कांग्रेस को वोट राहुल या सोनिया के वजह से नहीं अपितु उसके कार्यो के लिए देगी। परन्तु कांग्रेसी नेता जनता से इतने कट गये कि उनको न तो अपने दायित्व का भान है व नहीं देश के सम्मान व हितों का। पाक-अमेरिका व चीन अपने प्यादों से भारत की एकता व अखण्डता तबाह करने पर लगे है परन्तु क्या मजाल कांग्रेसी नेतृत्व को कुछ जनता का दु,ख दर्द ही दिखाई या सुनाई दे रहा हो।

मनमोहनी कुशासन से जनता त्राही त्राही कर रही है। एक तरफ दामिनी को न्याय दिलाने के लिए 24 दिसम्बर से आंदोलन चल रहा है। वहां पर दूसरी तरफ पंजाब से चण्डीगढ़ के डीआई जी द्वारा यौन शोषण की पीडि़ता अनशन कर रही है। वहीं पर समाजसेवी श्रीओम अपने साथियों के साथ क्रमिक अनशन की अलख जगाये हुए है। इसके साथ जंतर मंतर पर विगत कई दिनों से नित्य हवन करने वाले भारत सरकार के  पूर्व अण्डर सेक्रेटरी रामचंद्र आर्य या मानवाधिकार संगठन से जुडे डी के गुप्ता या चिकित्सक छिब्बर आदि आंदोलनकारी समर्पित हैं।
 यह प्राणीमात्र की आदत में सुमार है कि जब आदमी विपरित परिस्थितियों से चारों तरफ से घिरा हो या किसी विषय पर उलझा हो या किसी बडे लक्ष्य को हासिल करने की रणनीति बनानी हो या किसी व्यक्ति या विषय पर मनन करना हो तो प्राणी उस पर अपना दिमाग खपाता  है, इस प्रवृति को चिंतन कहा जाता है। परन्तु जब कांग्रेसी नेतृत्व ही मनमोहन जैसे कुशासक के मोहपाश में बंधी हो तो देश की जनता का जीना हराम होगा ही। कांग्रेस सहित देश के नेताओ ंको चाहिए कि वह ऐसे नौटंकी करने वाले चिंतन व भाषणवाजी करने के बजाय जनहित में कार्य करने का काम करें।

Saturday, January 19, 2013


 अपने  अहम् को नहीं गैरसैंण की तरफ उठ रही आवाज को मजबूत बनायें


दो दशक से अपना सब कुछ दाव पर लगा कर मैं जनहितों के लिए पत्रकारिता, आंदोलनकारी व साहित्य कर्मी बना हॅू। देश, समाज व प्राणीमात्र का कल्याण मेरा पहला मिशन है। मैं लिखता ही नहीं अपितु इसको आत्मसात करते हुए जनजागरण में भी लगा रहता हॅॅू। उपदेश देना या किसी पर प्रश्न उठाना बहुत आसान है। खासकर गैरसैंण वाले मुद्दे पर, पत्रकारों पर। पत्रकार किसी दूसरे ग्रह के जीव नहीं वे भी हमारे समाज के ही अंग है। जहां तक गैरसेंण  का मामला है। जब यह मुद्दा 12 साल से निरंतर जिंदा  रखे हुए है तो वे पत्रकार व यहां के राज्य गठन के कुछ  समर्पित लोग ही है। जिन्होंने निरंतर प्रदेश के हक हकूकों व उसके भविष्य के बारे में जनता को जागृत करने या हुक्मरानों व समाज को दिशा देने के लिए मुजफरनगरकाण्ड, परिसीमन, गैरसैंण, भ्रष्टाचार, जातिवाद, मूल निवास, जल, जंगल जमीन के गंभीर समस्याओं के प्रति सकारात्मक व प्रखर ढ़ग से जीवंत बनाये हुए है। अपनी अज्ञानता या अदूरदर्शिता के कारण पत्रकारों पर  क्यों थोप रहे हो ? क्या आपको नहीं मालुम की 12 साल से उत्तराखण्ड के हक हकूकों को जमीदोज करने वाली सरकारों को गैरसैंण की तरफ सुध लेने की फुर्सत तक नहीं रही। षडयंत्र से तिवारी से लेकर खण्डूडी व निशंक जैसे मुख्यमंत्रियों  ने गैरसेंण के मुद्दे को जमीदोज कर दिया? है हमारे प्रदेश में कोई ऐसा सांसद  या, विधायक जो प्रदेश की राजधानी के मामले में अपना इस्तीफा दे या अपने स्वार्थ से उपर उठ  कर जनहित के लिए प्रखर ढ़ग से आगे आये। अधिकांश सब अपने स्वार्थो के लिए नपुंसक बने हुए है। केवल कुछ समय पहले तक आधे अधूरे मन से चंद  ही नेता ऐसा रहे जो गैरसैंण का नाम  अपनी राजनीति के तहत बोलने का भी साहस कर पा रहे हो। हमारे अधिकांश समाजसेवी संगठनों को प्रदेश के हक हकूकों से अधिक नाचने गाने से फुर्सत नहीं। राजनैतिक दृष्टि से  ही नहीं सामाजिक दृष्टि से हम अपने वर्तमान व  भविष्य के प्रति दूर दूर तक एक कदम भी सकारात्मक दिशा में ठोस कदम नहीं उठा पाये।  अब जब किसी लोग या किसी कारण से वर्तमान बहुगुणा सरकार ने गैरसेंण की सुध लेने का एक कदम उठाया तो उनको गैरसैंण में स्थाई राजधानी बनाने के लिए प्रोत्साहन देने  के लिए प्रेरित करने बजाय विरोध करना कहा प्रदेश के हित में है ? बहुगुणा सरकार भी इस विरोध देख कर गैरसेंण मिशन बंद कर दे  तो क्या प्रदेश का भला होगा? विरोध तो उन लोगों का होना चाहिए जो अब तक की सरकारो ं के खिलाफ तो मुह नहीं खोल पाये अब कोई सरकार इस दिशा में आधे अधूरे मन से कदम भी बढ़ा रही है तो उसका विरोध कर रहे है। अब बहुगुणा के विधानसभा भवन बनाने के निर्णय के बाद गैरसैंण में स्थाई राजधानी बनाने की मांग को बडी मजबूती मिली। इससे पहले कोई भाजपाई व कांग्रेसी मजबूती से गैरसेंण राजधानी बनाने की मांग नही कर पा रहे थे तो अब कई विधायक व विधानसभा अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष भी गैरसेंण में ही राजधानी बनाने के सुर में सुर मिला रहे है। इन स्वार्थ में डूबे नेताओ ंमें कोई अगर सही दिशा  में आवाज उठाने का साहस करता तो उसका हौसला बढा कर अपना लक्ष्य गैरसैंण की तरफ मजबूती हासिल करना ही बुद्धिमता ही है। आज गैरसेंण में विधानसभा भवन बनाने के निर्णय के बाद पूरे प्रदेश ही नहीं देश विदेश का ध्यान गैरसैंण मुद्दे की तरफ गया। देहरादून में ही राजधानी थोपेने को उतारू प्रदेश के सुविधाभोगी नेताओं, नौकरशाहो व माफियाओं  के माथे पर गैरसेंण के नाम से पसीना आ रहा है। गैरसैंण पर सकारात्मक विचारों को प्रमुखता से हवा देना गैरसेंण राजधानी बनाने के लिए जरूरी है। हमारा काम केवल अपने अहं की तुष्टि के लिए किसी का विरोध करके अपने को श्रेष्ठ दर्शना नहीं अपितु किसी भी तरह गैरसेंण को राजधानी बनाने की राह को आसान  करना और इसके पीछे व्यापक जन जागरण करना है।  यह जग जाहिर है कि विजय बहुगुणा के पूर्व कार्यो व प्रवृति के कारण जिस प्रकार से उनकी ताजपोशी मुख्यमंत्री के रूप में की गयी तथा उसके बाद के कई कार्यो का मै उनका प्रखर विरोधी रहा हॅू। परन्तु उन्होंने जो कदम गैरसैण में विधानसभा बनाने के दिशा में किया उसका मैने खुले दिल से समर्थन, गैरसेंण राजधानी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानते हुए किया। मेरा तिवाारी हो या खण्डूडी या निशंक किसी का अंध विरोध करने की प्रवृति नहीं रही। परन्तु जब लगातार वे अपने कृत्यों से जनांकांक्षाओं को रौंदते  रहे तो उनका विरोध करना मैने अपना धर्म समझा। ऐसे में जो काम इन 12 साल की सरकारों में विजय बहुगुणा की सरकार  ने गैरसैंण में विधानसभा भवन बनाने की घोषणा करके किया वह ऐसे निराशा भरे वातावरण में एक  नयी सांस की तरह स्वागत योग्य है। हमारा लक्ष्य गैरसैंण को राजधानी बनाने के मार्ग प्रसस्त करने वाली हर कदम का स्वागत तथा इसकी राह रोकने वाले का विरोध करना है। आज की स्थिति में जब गैरसेंण का मुद्दा यहां की सरकारों ने ठण्डे बस्ते में डाल दिया था उस समय इसको फिर से मजबूती प्रदान करने वालों को मजबूती दे कर प्रदेश की स्थाई राजधानी गैरसैंण बनाना है। इस पर प्रश्न खडा करने वाले खुद बतायें कि आखिर क्यों गैरसैण की तरफ आवाज उठाने वालों  का विरोध करे। इमानदारी की आशा करना इन स्वार्थ में डूबे सत्तालोलुपु बौने राजनेताओं  से खुद से बेईमानी करना सा होगा। ये गैरसेंण की तरफ कदम बढायें यह भी साराहनीय है। जब खासकर जनता, बुद्धिजीवि, नौकरशाह, राजनेतिक दलों  ने इसे भूला दिया हो। हमें याद रखना चाहिए कि हमें कोई भी कार्य अपने अहं की पूर्ति के लिए नहीं अपितु जनहितों के लिए मनसा, वाचा व कर्म से समर्पित
रहना चाहिए।


देश को लूटने व लुटाने में चंगैंज व फिरंगियों को मात दे गये देश के हुक्मरान


धर्म, जाति, क्षेत्र, नस्ल, रंग, लिंग व भाषा के नाम पर अंध तुष्टिकरण देश व समाज के प्रगति में जहां घातक होता है वहीं न्याय का भी गला घोंटता है। जहां तक केवल मुस्लिम समाज के लोगों के लिए उनकी धार्मिक यात्रा के लिए (हज के लिए) सरकारी सहायता देना न केवल अन्य समाज के लोगों में असंतोष पैदा करता है अपितु यह मुस्लिम हज यात्रा के मूल सिद्धांतों के खिलाफ भी है। जिसमें हज यात्रा केवल अपनी मेहनत के धन से की जानी चाहिए। देश में सरकारी सहायता हज यात्रा के लिए देने का शुभारंभ जिसने भी किया वह केवल तुष्टिकरण के लिए किया गया। आपके अनुसार 1973 से सरकार 40 साल से हज यात्रा पर सरकारी सहायता देती है। यहां से हज यात्रा के लिए मक्का जाने के लिए हवाई जहाज इत्यादि के खर्चे के लिए 70 हजार रूपये से अधिक का खर्चा प्रतिव्यक्ति को दे रही है। न्यायालय ने भी इस व्यवस्था पर प्रश्न खडे किये कि केवल धर्म विशेष के लिए इस प्रकार की सहायता देना व अन्य धर्मोवलम्बियों को इस प्रकार की धार्मिक यात्राओं के लिए नहीं देना किसी भी सूरत में सामाजिक न्याय नहीं है। इसके लिए जहां कांग्रेस देश में इन 40 सालों में अधिकांश समय शासन में रहने के कारण मुख्य दोषी हैं परन्तु अन्य दल भी कम दोषी नहीं है। जनता पार्टी के शासनकाल में हो या राजग के शासन काल में या वीपीसिंह, देवगोड़ा, गुजराल इत्यादि के शासन काल में देश की अधिकांश दल देश की सत्ता में आसीन रहे। चलो अन्य दलों पर कांग्रेस की तरह तुष्टिकरण का आरोप लग सकता है परन्तु भाजपा के नेतृत्व में जब वाजपेयी प्रधानमंत्री दो बार राजग शासन में रहे तो उन्होंने क्यों नहीं इस तुष्टिकरण पर अंकुश लगाया। सच्चाई यह है कि इस देश में सत्ता से बाहर रह कर कोई भी दल चाहे देशहित में कितने ही सब्जबाग जनता को दिखाये या आदर्शो व जनहित की बात करे परन्तु सत्ता में आसीन होते ही इन सभी दलों का चरित्र व कार्यप्रणाली का पूरी तरह से कांग्रेसीकरण हो जाता है। सत्ता में आसीन होने के बाद ये दल सभी तुष्टिकरण, भ्रष्टाचार व देश को कमजोर करने वाले उन तमाम हथकण्डों को अपनाते हैं जिसका ये सत्ता में रहने से पहले सडकों या संसद में विरोध करते है। इस देश का दुर्भाग्य यह है कि यहां सत्तासीन होते ही इन नेताओं को देश की नहीं अपनी कुर्सी की ही चिंता हर पल सत्ताती है। तुष्टिकरण ही नहीं भ्रष्टाचार, बंगलादेशी घुसपेटियों, आतंकवाद, खुदरा व्यापार में विदेश निवेश सहित तमाम मुद्दों पर विपक्ष में रह कर गरियाने वाले सत्तासीन होते ही वही कृत्य करने में जुट जाते हैं जिसका वे कुछ समय पहले तक विरोध करते नजर आते थे। इसलिए इस देश के अधिकांश राजनेता ही नहीं आम आदमी का भी इतना पतन हो जाता है कि वह देश, समाज व मूल्यों की चिंता छोड कर केवल अपने निहित स्वार्थ के लिए ही समर्पित रहता है। देश को आज अधिकांश चंगेज व फिरंगियों की तरह सत्तासीन होते ही लूटने में कोई कसर नहीं कर रहे है, सच्चाई तो यह है कि आजादी के बाद इन हुकमरानों (नेताओं, नौकरशाहों, समाजसेवियों, उद्यमियों व अन्य) ने देश को लूटने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। यहां देश के हित में बहुत कम अपने निहित स्वार्थ के लिए ही अधिकांश देश को लूटने व लुटाने  में यह असरदार तबका, चंगैंज व फिरंगियों को भी मात दे रहे है। देश का दुर्भाग्य यह हे कि यहां पर पूरी व्यवस्था एक प्रकार  से आम आदमी की पंहुच कोसों दूर हो गयी है। जो वर्तमान सत्तासीन या व्यवस्था के विकल्प भी बनने की हुंकार भर रहे हैं वो दो कदम चल कर खुद लडखडाने लग जाते है।

Tuesday, January 15, 2013


गैरसेंण राजधानी बना कर प्रायश्चित करें उत्तराखण्डी नेता


अगर प्रदेश के नेताओं को जरा भी शर्म व लोकशाही के प्रति श्रद्धा रहती तो वे 2000 में ही स्थाई राजधानी गैरसेंण घोषित करके यह आयोग बनाते कि गैरसेंण में कितनी जल्दी राजधानी बने परन्तु यहां तो सन 2000 से 2012 तक ऐसे जनविरोधी नेता सत्ता में काबिज रहे जो जन भावनाओं का गला घोंटते हुए राजधानी बलात देहरादून में ही थोपने का षडयंत्र करते रहे। लोकतंत्र में आयोग नहीं जनभावनायें सबसे महत्वपूर्ण होती है। जो राजधानी चयन आयोग ही प्रदेश की जनभावनाओं को रौंदने के लिए बनाया गया था। ऐसे आयोगों को बनाने वालों को जब उत्तराखण्ड राज्य गठन व राजधानी गैरसेंण बनाओं का 1994 से 2000 तक चला व्यापक जनांदोलन ही नहीं दिखायी दिया तो उनसे क्या आशा की जा सकती है। अब देर सबेर चाहे किसी भी भाव से वर्तमान सरकार ने गैरसैंण में विधानसभा भवन बनाने व शिलान्यास करने का ऐतिहासिक काम किया है। यह गैरसेंण राजधानी बनाने के लिए मील का पत्थर उसी प्रकार से होगा जिस प्रकार से पूर्व प्रधानमंत्री देवगोडा जी ने 15 अगस्त के दिन उत्तराखण्ड राज्य गठन करने का राष्ट्रीय संकल्प लिया था। प्रदेश की राजधानी गैरसेंण बनाने के बजाय देहरादून में थोपे रखने का काम करने में लिप्त रहे तिवारी, खण्डूडी व निशंक जैसे मुख्यमंत्रियों के लिए यही अब सबसे उत्तम होगा कि वे गैरसैंण राजधानी बनाने के लिए सरकार पर दवाब बना कर अपना प्रायश्चित करें। शायद इस कार्य से भगवान बदरीनाथ उनके उत्तराखण्ड विरोधी कृत्य को माफ कर दें।

उत्तराखण्ड भाजपा अध्यक्ष के चुनाव में संघ व केन्द्रीय नेतृत्व की अग्नि परीक्षा


प्रदेश अध्यक्ष के लिए 19 को होगा मतदान

देहरादून (प्याउ)। कोश्यारी, खण्डूडी व निशंक यानी तीन गुटों में फंसी उत्तराखण्ड प्रदेश भाजपा में इन दिनों प्रदेश अध्यक्ष के लिए ऐसी कसमकस चल रही है कि उसने भाजपा के अनुशासित पार्टी होने की पूरी तरह हवा ही निकाल ली है। मोदी के विशाल कद के आगे बोने साबित होने के बाबजूद केसे बनेगे प्रधानमंत्री इसी हवाई सपनों व तिकडमों में खोये जनाधार विहिन गडकरी सुषमा, जेटली जैसे केन्द्रीय नेतृत्व को हिमाचल खोने के बाद भी उत्तराखण्ड की सुध लेने की फुर्सत ही नहीं है। यहां पर जमीनी व साफ छवि के मोहन सिंह ग्रामवासी जेसे वरिष्ट नेताओं के हाथों में भाजपा सोंप कर प्रदेश में चल रही आत्मघाती व दिशाहीन गुटबाजी को दूर करने के बजाय केन्द्रीय नेतृत्व अपने अपने प्यादे बने गुटवाज नेताओं को हवा ही दे रहे है। राष्ट्रीय स्तर पर किसी मजबूत जमीनी साफ छवि के वरिष्ठ नेता को अध्यक्ष बनाने के बजाय गडकरी के मोह में मोदी की ताजपोशी की राह को आसान बनाने के बजाय भाजपा का संविधान तक बदलकर मोदी को पुन्न अध्यक्ष पद पर आसीन करके  संघ व भाजपा के कर्णधारों ने मनमोहन के कुशासन से मुक्ति के लिए आक्रोशित देश की जनता व भाजपा कार्यकत्र्ताओं की आशाओं पर एक प्रकार का कुठाराघात ही कर दिया।
उत्तराखण्ड प्रदेश में भाजपा संगठनात्मक ढांचा कोश्यारी के हटने के बाद रसातल में चला गया है। अपने प्यादो ंको महत्वपूर्ण पद पर आसीन करने की अंधी ललक ने प्रदेश भाजपा को बेहद कमजोर कर दिया है। वर्तमान  अध्यक्ष विशनसिंह चुफाल का कार्यकाल सितम्बर में ही समापन हो गया परन्तु गुटबाजी व केन्द्रीय नेतृत्व के उदासीनता के कारण यहां पर भाजपा अब दो माह बाद अध्यक्ष के पद के चुनाव की तिथि घोषित कर पायी है। प्रदेश भाजपा को रसातल में पंहुचाने वालों में से एक रहे वर्तमान केन्द्रीय चुनाव अधिकारी थावर चंद गहलौत ने प्रदेश अध्यक्ष के लिए चुनावों की तिथि घोषित कर दी है। इसके तहत 18 को नामांकन और 19 को चुनाव होंगे। प्रदेश चुनाव प्रभारी केदार जोशी  को बनाया गया हैं भाजपा में सत्तासंघर्ष का यह आलम है कि भाजपा के कुल 22 संगठनात्मक जिलों में से केवल 17 के चुनाव हो पाये। 5 जनपदों में तमाम कोशिशों के बाबजूद कोई अध्यक्ष बना नहीं पाया।  प्रदेश भाजपा अध्यक्ष के लिए मोहनसिंह ग्रामवासी, त्रिवेन्द्र रावत, तीरथ सिंह रावत, धनसिंह रावत , लाखी राम जोशी व नरेश बंसल का नाम चर्चाओं में है। प्रदेश के अधिकांश समर्पित कार्यकत्र्ताओं का ही नहीं वरिष्ट नेताओं की पहली पसंद मोहन सिंह ग्रामवासी जैसे मजबूत, साफ छवि के वरिष्ठ जमीनी तेजतरार नेता को प्रदेश अध्यक्ष बना कर प्रदेश में चल रही आत्मघाती गुटबाजी पर अंकुश लगाने की है। प्रदेश में मोहन सिंह ग्रामवासी ही एक मात्र ऐसे नेता है जिन पर किसी गुट व नेता के गुट की छाप नहीं है। वही एक ऐसे नेता है जिसके आगे किसी गुटबाज नेताओं के दवाब में रह कर नहीं अपितु संगठन के हित के लिए काम करने की कुब्बत है। इसी लिए कोई भी गुटबाज नेता उनको अध्यक्ष के रूप में समर्थन करने का साहस तक नहीं कर पा रहा है। देखना यह है कि अब भाजपा का केन्द्रीय नेतृत्व गुटबाज नेताओं की सुनता है या पार्टी के हित में साफ छवि के जमीनी वरिष्ट बेदाग तेजतरार मोहन सिंह ग्रामवासी को अध्यक्ष बनाता है।

विधानसभा भवन की नीव रख्ना ही होगा गैरसेंण राजधानी बनने के मार्ग में मील का पत्थर


मुख्यमंत्री ने रखी गैरसैंण में विधानसभा भवन की नींव

दो साल में तैयार हो जायेगा विधानसभा भवन

प्रदेश की स्थाई राजधानी गैरसेंण बनाने के मार्ग में मील का पत्थर उस समय रखा गया जब प्रदेश के मुख्यमंत्री ने 14 जनवरी को मकर संक्रांति के दिन गैरसैंण में विधानसभा भवन का शिलान्यास रखा। विधानसभा अध्यक्ष, सांसद सतपाल महाराज, सांसद प्रदीप टम्टा, नेता प्रतिपक्ष,प्रदेश के तमाम मंत्रीमण्डल के अधिकांश वरिष्ठ सदस्यों, अनैक विधायकों व प्रदेश के वरिष्ट नौकरशाहों की उपस्थित में जब प्रदेश के मुख्यमंत्री ने गैरसेंण के भराड़ीसैंण में बनने वाले विधानसभा भवन सहित अनैक परिसरों की नींव गैरसैंण के एक ऐतिहासिक समारोह में हजारों जनसमुदाय के मध्य रखी तो पूरा गैरसेंण ही नहीं देश विदेश में रहने वाले सवा करोड़ उत्तराखण्डियों के चेहरों पर प्रसन्नता की लहर दौड गयी। इस समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने कहा है कि उत्तराखण्ड राज्य गठन के शहीदों व आंदोलनकारियों की भावना के अनरूप हमने इस दिशा में यह महत्वपूर्ण कदम उठाने का प्रयास किया। राजधानी के मसले पर अभी विवाद पैदा नहीं किया जाना चाहिए। उनका कहना था कि गैरसैंण विधानसभा भवन का निर्माण राज्य आंदोलन की मूल भावना के तहत किया जा रहा है। इसलिए इस शुरूआत को सकारात्मक रूप में लिया जाना चाहिए। वहीं सतपाल महाराज ने इसे प्रदेश की जनांकांक्षाओं को पूरा करने का महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री देवगोडा का स्मरण भी किया। इस अवसर पर उन्होंने प्रदेश की जनता को जनांकांक्षाओं को साकार करने में इस महत्वपूर्ण कदम में साथ देने का भी आवाहन किया। वहीं विधानसभा भवन की नींव रखने के लिए अधिकांश वक्ताओं ने मुख्यमंत्री व सांसद सतपाल महाराज के साथ विधानसभा अध्यक्ष कुंजवाल के प्रयासों की भी मुक्त कंठो से सराहना की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि गैरसैंण विधानसभा भवन के निर्माण से पहाड़ों में विकास के नये युग का सूत्रपात होगा। उन्होंने कहा कि गैरसैंण विधानसभा भवन का निर्माण मंत्रिमंडल का सामूहिक निर्णय है। इस पर विवाद नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि दो वर्ष के भीतर विधानभवन का निर्माण पूरा हो जाएगा। उन्होंने कहा कि एक विधानसभा सत्र गैरसैंण भी में संचालित होने से पहाड़ी क्षेत्रों के विकास को बल मिलेगा। अब पहाड़ों में पानी, सड़क, स्कूल, अस्पताल, रोजगार के बुनियादी मसलों के निराकरण की अभिनव शुरूआत भी की जा रही है। श्री बहुगुणा ने कहा कि पर्यटन व जल विद्युत से ही राज्य की आर्थिक समृद्धि का मार्ग प्रशस्त हो सकता है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार महिलाओं व युवाओं को केंद्र में रखकर ही उपयुक्त नीति तैयार कर रही है। उन्होंने कहा कि जनता और हमारी सरकार का रिश्ता केवल वोट का नहीं है, हमारा रिश्ता भावना व विश्वास का है। बहुगुणा ने कहा कि जो भी घोषणाएं सरकार द्वारा की गईं वे धरातल पर उतरने लगी हैं। राज्य में अब नये घोषित पॉलीटेक्निक व इंजीनियरिंग कालेज भी धरातल पर उतर जाएंगे। विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल ने कहा कि अब गैरसैंण को लेकर उम्मीदें जगी हैं। आगे भविष्य बेहतर ही होगा। सांसद सतपाल महाराज ने कहा कि उत्तराखंड की स्थायी राजधानी का निर्धारण न होने से ही गैरसैंण का मसला हाशिये पर गया है। ऐसे में अब गैरसैंण के विकास की पहल हो रही है तो फिर कौशिक समिति के साथ ही दीक्षित आयोग की सिफारिशों को भी केंद्र में रखकर उचित निर्णय लिया जाना चाहिए। सांसद प्रदीप टम्टा ने कहा कि विधान भवन की बुनियाद पड़ने से गैरसैंण राजधानी का मार्ग भी प्रशस्त होगा। उन्होंने कहा कि गैरसैंण ग्रीष्मकालीन राजधानी की बात तब की जाती जब स्थायी राजधानी का निर्धारण हो जाता। कृषि मंत्री डा. हरक सिंह रावत ने भाजपा का नाम लिये बगैर कहा कि जब नेता प्रतिपक्ष के तौर पर उन्होंने दीक्षित आयोग की रपट विधानसभा के पटल पर रखकर गैरसैंण राजधानी की वकालत की थी तो तब भाजपा इस मसले से पीछे क्यों हटी। उन्होंने कहा कि राजधानी का मसला सहमति से होना चाहिए। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष व सिंचाई मंत्री यशपाल आर्य ने कहा कि गैरसैंण पर यह बड़ा कदम है, इसलिए इस पर सियासत के बजाय दलगत राजनीति से ऊ पर उठकर आगे बढ़ा जाना चाहिए। बदरीनाथ के विधायक राजेंद्र सिंह भंडारी ने गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने के साथ ही गैरसैंण जनपद सृजन की मांग उठाई। थराली के विधायक डा. जीतराम ने भी गैरसैंण को राजधानी बनाने की मांग की। इस कार्यक्रम में उपस्थित महत्वपूर्ण लोगों में प्रदेश कबिना मंत्री सुरेन्द्र नेगी, प्रीतम सिंह, प्रीतम पंवार, दिनेश अग्रवाल, मंत्रि प्रसाद नैथानी, विधायक शैला रानी रावत, मदन सिंह बिष्ट, सुबोध उनियाल, पूर्व सांसद महेन्द्रपाल, च महेन्द्र श्रीनगर के विधायक व कफकोट के विधायक आदि उपस्थित थे। संचालन डिप्टी स्पीकर डा. अनुसूया प्रसाद मैखुरी ने किया। इस अवसर पर अनैक महत्वपूर्ण लाोगों के अलावा बड़ी संख्या में आंदोलनकारी भी उपस्थित थे । इनमें उत्तराखण्ड जनता संघर्ष मोर्चा के संयोजक व प्रदेश के अ..महाधिवक्ता अवतार सिंह रावत, जनता संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष देवसिंह रावत, राजेन्द्र शाह उपाध्यक्ष-विनोद नेगी, आई एस रावत व राजपाल बिष्ट सहित अनेक वरिष्ट गणमान्य लोग उपस्थित थे।
 

राज्यों में सबसे मनोहारी होगी उत्तराखण्ड की  राजधानी  ‘गैरसैंण-भराड़ीसेण ’


 ‘गैरसैंण-भराड़ीसेण ’जनता संघर्ष मोर्चा ने किया भराड़ीसैण का अवलोकन किया

देहरादून में नया विधानसभा भवन बनाने की धृष्ठता न हो 

‘गैरसैंण के भराड़ीसैंण में बनने वाली उत्तराखण्ड की राजधानी भारत के सभी राज्यों में सर्वश्रेष्ठ प्राकृतिक सौन्दर्य से भरपूर मनोहारी होगी। प्रदेश सरकार को प्रदेश व देश के दूरगामी हितों की रक्षा के लिए देहरादून का अंधमोह छोड़ कर अविलम्ब जनभावनाओं के अनुरूप प्रदेश की राजधानी गैरसैंण घोषित कर देनी चाहिए।’ प्रदेश के मुख्यमंत्री सहित तमाम राजनैतिक दलों से यह दो टूक खुली मांग उत्तराखण्ड राज्य गठन के अग्रणी संगठन ‘ उत्तराखण्ड जनता संघर्ष मोर्चा’ ने गैरसैंण में मकर संक्रांति के दिन विधानसभा भवन शिलान्यास समारोह में भाग लेने के बाद की।
गैरसैंण-उत्तराखण्ड की विधानसभा भवन के शिलान्यास समारोह की पूर्व संध्या, (13 जनवरी 2013) को विधानसभा भवन के लिए चयनित स्थल का अवलोकन करने उत्तराखण्ड राज्य गठन जनांदोलन के अग्रणी संगठन  ‘उत्तराखण्ड जनता संघर्ष मोर्चा’ का 4 सदस्यीय प्रतिनिधी मण्डल, गैरसैंण के भराड़ीसैंण क्षेत्र का भ्रमण किया।
 उत्तराखण्ड राज्य गठन के लिए ‘संसद की चैखट, राष्ट्रीय धरना स्थल पर 6 साल तक निरंतर ऐतिहासिक सफल धरना प्रदर्शन करने वाले राज्य गठन के प्रमुख संगठन ‘उत्तराखण्ड जनता संघर्ष मोर्चा’ के अध्यक्ष देवसिंह रावत ने एक विज्ञप्ति में बताया कि उनके अलावा इस 4 सदस्यीय प्रतिनिधी मण्डल  में मोर्चा संयोजक व उत्तराखण्ड के अ.महाधिवक्ता अवतार सिंह रावत , उपाध्यक्ष विनोद नेगी व आई एस रावत सम्मलित थे।
गौरतलब है कि उत्तराखण्ड जनता संघर्ष मोर्चा ने विधानसभा भवन के शिलान्यास समारोह में सम्मलित होने के लिए राज्य गठन के ऐतिहासिक संघर्ष स्थली रही संसद भवन की चैखट ‘राष्ट्रीय धरना स्थल जंतर मंतर दिल्ली से गैरसैंण की तरफ 12 जनवरी को शहीदों के सपने को साकार करने के अपने 18 साल के संकल्प की लौ को दिलों में संजो कर उत्तराखण्ड के मान सम्मान व विकास के प्रतीक एवं बाबा मोहन उत्तराखण्ड की शहादत भूमि गैरसैंण के लिए कूच किया था। 12 रामनगर रात्रि विश्राम के बाद मोर्चा का प्रतिनिधी मण्डल 13 को दोपहर को गैरसैंण में पंहुचे। गैरसैंण पंहुच कर मोर्चा के प्रतिनिधीमण्डल से मोर्चा के प्रखर आंदोलनकारी अशोकलाल शाह के अलावा गैरसेंण आंदोलन के प्रखर हस्ताक्षर व पत्रकार पुरूषोत्तम असनोड़ा सहित अनैक साथी भी मिले। इसके बाद सीधे विधानसभा भवन बनाने के लिए चयनित स्थान भराड़ीसैंण की तरफ कूच किया।
 मोर्चा ने 14 जनवरी के विधानसभा भवन शिलान्यास समारोह में सम्मलित होने के बाद दो टूक शब्दों में कहा कि भले ही प्रदेश की सरकारें आज 12 साल बाद भी उत्तराखण्ड की जनांकांक्षाओं, शहीदों व आंदोलनकारियों की भावनाओं एवं विकास व लोकशाही के प्रतीक बन चूके गैरसैंण को प्रदेश की स्थाई राजधानी घोषित करने में विफल रहे हो परन्तु अब वर्तमान बहुगुणा सरकार ने भले ही आधे अधूरे मन से बिना राजधानी घोषित किये हुए भी यहां पर विधानसभा भवन निर्माण करने का जो साहसिक व ऐतिहासिक कदम उठाया वह प्रदेश की राजधानी गैरसैंण में ही बनाने की दिशा में नीव का पत्थर साबित होगी। मोर्चा ने इस कार्य के लिए प्रदेश के मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा, सांसद सतपाल महाराज, विधानसभा अध्यक्ष गोविन्दसिंह कुंजवाल को विशेष रूप से बधाई दी। वहीं प्रदेश की राजधानी गैरसेंण में ही बनाने की पुरजोर मांग करने वाले सांसद प्रदीप टम्टा को भी हार्दिक बधाई दी। इसके साथ इस समारोह में गैरसेंण को स्थाई राजधानी बनाने की खुली मांग करने वाले विधानसभा के उपाध्यक्ष अनुसुया प्रसाद मैखूरी, विधायक राजेन्द्र भण्डारी व प्रो. जीतराम को हार्दिक बधाई दी। इसके साथ गैरसेंण को राजधानी बनाने के लिए पूरा समर्थन देने के लिए नैनीताल के पूर्व सांसद महेन्द्र पाल को भी हार्दिक बधाई दी। इसके साथ इस विधानसभा भवन के शिलान्यास को समर्थन देने के लिए प्रदेश भाजपा को हार्दिक बधाइ्र्र दी। मोर्चा के प्रतिनिधीमण्डल को विधानसभा भवन के शिलान्यास समारोह में जहां मोर्चा मे पूर्व अध्यक्ष व प्रदेश के मंत्री डा. हरक सिंह रावत, मोर्चा के प्रमुख आंदोलनकारी राजेन्द्र शाह  व राजपाल बिष्ट के अलावा प्रदेश के मंत्री प्रीतम सिंह, प्रीतम सिंह पंवार, मंत्री सुरेन्द्रसिंह नेगी व प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष यशपाल आर्य, भाजपा नेता -नेता प्रतिपक्ष अजय भट्ट, विधायक जीतराम व विधायक शैलारानी रावत आदि भी मिले।
मोर्चा ने उत्तराखण्ड क्रांति दल, उत्तराखण्ड रक्षा मोर्चा व उत्तराखण्ड परिवत्र्रन पार्टी सहित उत्तराखण्ड राज्य गठन के सभी आंदोलनकारी संगठनों व समाजसेवियों एवं बुद्धिजीवियों को प्रदेश की वर्तमान सरकार द्वारा प्रदेश की विधानसभा भवन गैरसैंण के भराड़ी सैंण में बनाने के ऐतिहासिक घोषणा को आधार बना कर प्रदेश की राजधानी गैरसैंण में बनाने के आंदोलन को तेज करने का आवाहन किया। मोर्चा ने प्रदेश की सत्ता में आसीन कांग्रेस, विपक्षी दल भाजपा, बसपा सहित तमाम दलों से आवाहन किया कि वे जनभावनाओं व राज्य गठन की मूल भावनाओं का सम्मान करते हुए प्रदेश की राजधानी गैरसेंण में घोषित करके अपने दायित्व का निर्वहन करें। इस अवसर पर मोर्चा ने गैरसेंण में विधानसभा भवन निर्माण करने के ऐतिहासिक कदम उठाने का साहस करने वाले विजय बहुगुणा सरकार को बधाई देते हुए आगाह भी किया कि वे चंद अवसरवादी व उत्तराखण्ड द्रोहियों के देहरादून में ही राजधानी बनाये रखने के षडयंत्र को विफल करते हुए देहरादून में नये विधानसभा भवन निर्माण का कार्य किसी भी सूरत में न करें। देहरादून में नये विधानसभा भवन बनाना न केवल प्रदेश की जनांकांक्षाओं को रौंदने वाला कदम हे अपितु यह प्रदेश के विकास के संसाधनों  का भी खुला दुरप्रयोग है। प्रदेश की स्वाभिमानी जनता किसी भी सूरत में अब राजधानी चयन आयोग गठित करके प्रदेश की राजधानी देहरादून में ही थोपने वाले षडयंत्रकारियों की तरह देहरादून में नयी विधानसभा भवन बना कर प्रदेश की राजधानी गैरसेंण बनाने के मार्ग में अवरोध खडे करने वालों को कभी माफ नहीं करेगी। मोर्चा ने प्रदेश के मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा सहित तमाम राजनेताओं से दो टूक शब्दों में कहा कि प्रदेश की जनता हर हाल में प्रदेश की राजधानी गैरसेंण में ही बनाना चाहती है और लोकतंत्र में जनादेश का सम्मान करना जनप्रतिनिधियों का प्रथम कत्र्तव्य होता है। मोर्चा के अध्यक्ष देवसिंह रावत ने कहा कि जो भी जनभावनाओं के अनुरूप गैरसैंण में राजधानी बनाने के मार्ग में अवरोध खडे करेंगे उसको भगवान श्रीबदरी-केदार कभी माफ नहीं करेंगे। मोर्चा ने प्रदेश की नौकरशाही से भी निवेदन किया है कि वे लोकशाही के अनुरूप कार्य करें व गैरसैंण की राह में रोड़े अटकाने की धृष्ठता न करें।

Friday, January 11, 2013


पाक से कश्मीर मुक्त कराके कड़ा सबक सिखाये भारत 


पूछ में पाकिस्तानी सेना द्वारा भारतीय सीमा के अंदर दो भारतीय सैनिकों की निर्मम हत्या करने के बाद भारत सरकार नापाक पाकिस्तान का मुंहतोड़ जवाब देते हुए तुरंत पाक द्वारा कब्जाये भारत के अभिन्न हिस्से कश्मीर को मुक्त कराने के लिए भारत को सैन्य आप्रेशन शुरू कर देना चाहिए था। परन्तु यह काम करने के बजाय जिस ढुलमूल ढ़ग से भारत सरकार केवल जबानी बयान बाजी कर पाक को प्रत्युतर दे रही है उससे पूरे देश में रोष है और सेना के मनोबल पर दुष्प्रभाव पडेगा। पाकिस्तान का दुशाहस भारतीय हुक्मरानों की नपुंसकता के कारण दिन प्रति दिन बढ़ता ही जा रहा है। कभी उसके गुर्गे संसद पर हमला करते तो कभी मुम्बई, कभी कारगिल में करते तो कभी पूछ़ पर। आखिर भारत सरकार कब तक इस प्रकार की नपुंसकता अपना कर देश के स्वाभिमान व अखण्डता से पाक को खिलवाड़ करने की छूट देते रहेगी। भारत सरकार की नपुंसकता का एक मात्र कारण यह भी देश के प्रबुद्ध जनों को लगता है कि नापाक पाक का आका अमेरिका नहीं चाहता है कि उसके प्यादे पाक पर भारत हमला करे। अमेरिका सदैव पाक से भारत व अफगानिस्तान को अपने शिकंजे में जकड़ने के लिए मोहरे की तरह प्रयोग में लाता है। इसी लिए अमेरिका पाक के सौ खून भी माफ करता है। जिस लादेन व अलकादयदा को मारने के लिए अमेरिका ने अफगानिस्तान व इराक में लाखों लोगों  पर बमों, गोलियों से हमला कर वहां पर कब्जा कर लिया, उसी लादेन को पाक द्वारा पाकिस्तान में ही संरक्षण देने व अमेरिका द्वारा पाक में ही लादेन को मार गिराने के बाद भी अमेरिका ने पाक को माफ ही नहीं किया अपितु उसका शर्मनाक संरक्षण दिया हुआ है। पूरा विश्व हैरान है कि जिस अलकायदा व लादेन से सम्बंधों के कारण अमेरिका ने अफगानिस्तान व इराक में तबाही मचाई हुई है वह उस लादेन को अपने यहां संरक्षण देने वाले पाक को क्यों माफ किये हुए है? इसका एक ही कारण है पाक अमेरिका का प्यादा है इसके द्वारा वह भारत व चीन को तबाह करने का षडयंत्र को परवान देना चाहता है। पाक तो केवल भारत विरोध का मोहरा है असली तबाही का आका तो अमेरिका है। अमेरिका की इसी चाल को भांप कर चीन ने भी पाक को अपना प्यादा बना कर भारत के खिलाफ उसको निरंतर संरक्षण दे रहा है।
 भारत का दुर्भाग्य यह है कि राजग में अटल व कांग्रेस में मनमोहन जेसे अमेरिकी परस्त लोगों के पास देश की शासन की बागडोर रही। इसी के सहारे अमेरिका ने  पाक की तरह भारत में भी अपना पूरा शिंकजा कस लिया है। अटल व मनमोहन सिंह की अमेरिकी परस्ती का दण्ड भारत को संसद, कंधार, कारगिल, मुम्बई व अब पूछ जैसे पाक द्वारा भारत के मान सम्मान व अखण्डता को रौंदने वाले षडयंत्रों को नपुंसकों की तरह मूक हो कर झेलना पड रहा है। अगर भारत सरकार में जरा सा भी देश के प्रति लगाव होता तो वह अमेरिका की तरह पाक के तमाम आतंकी शिविरों पर ऐसा ही हमला करके तबाह करते जैसे अमेरिका कर रहा है। देश की एकता अखण्डता की सुरक्षा करने के अपने दायित्व का निर्वहन करने के बजाय मनमोहन सरकार देशवासियों व सेना का मनोबल बनाये रखने में पूरी तरह असफल रही है।

त्रिपुरा में 14 फरवरी, मेघालय और नागालैंड में 23 फरवरी को होंगे विधानसभा चुनाव


नई दिल्ली (प्याउ)।चुनाव आयोग ने शुक्रवार 11 जनवरी को तीन राज्यों-त्रिपुरा, मेघालय और नागालैंड में होने वाले विधानसभा चुनावों का शंखनाद कर दिया। इसकी घोषणा करते हुए मुख्य निर्वाचन आयुक्त वीएस सम्पत ने खचाखच भरे संवाददाता सम्मेलन में ऐलान किया कि त्रिपुरा में 14 फरवरी को तथा मेघालय व नागालैंड में 23 फरवरी को मतदान होगा। इन तीनों विधानसभा में हुए मतदान की गणना 28 फरवरी को की जायेगी। मेघालय व नागालेण्ड में एससी न होने के कारण यहां एक भी सीटें एससी के लिए आरक्षित नहीं है। वहीं त्रिपुरा की दस सीटे अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हैं। नागालेण्ड विधानसभा की 60 में से 59 सीटें तथा मेघालय में 55 सीटें अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित है। मेघालय में 14,81,473,नागालेण्ड में 11,81,731व त्रिपुरा में 23,52,505 मतदाता है। मेघालय में 2485, नागालेण्ड में 2023 व त्रिपुरा में 3018 मतदान केन्द्र हैं।

प्रदेश में नहीं नेताओं के घर बह रही है विकास की गंगा


आज मुझे उत्तराखण्ड शासन के महत्वपूर्ण पद में आसीन मित्र ने उत्तराखण्ड में विकास की ऐसी गंगा की झलक दिखायी कि मैं भी दंग रह गया। मेरे मित्र ने कहा भई आप लोग बेकार ही हाय तौबा मचा रहे हैं कि उत्तराखण्ड में विकास नहीं हो रहा है। उन्होंने कहा यहां के नेता जो भी शासन में आता है वह विकास के लिए काम करता है। देखा नहीं कांग्रेस की वर्तमान सरकार में सभी प्रदेश के बडे दिग्गज नेताओं ने खुद या अपने परिजनों का विकास कर ही दिया।
मैने एक पल के लिए वर्तमान प्रदेश सरकार पर नजर फेरी तो देखा कि वर्तमान बहुगुणा सरकार में कांग्रेसी दिग्गज नेताओं ने भले ही प्रदेश का विकास करने के बजाय अपना व अपने परिवार का विकास तो कर ही दिया। कितना विकास कर लिया। स्वयं विजय बहुगुणा ने इतनी तिकड़म की कि वह भले ही कांग्रेसी अधिकांश विधायकों के समर्थन न होने के बाबजूद उन्होंने प्रदेश के मुख्यमंत्री की कुर्सी पर विराजमान होने का कीर्तिमान बनाया। यही नहीं उन्होंने विकास के कांग्रेसी राह का अनुशरण करते हुए सबसे पहले प्रदेश के वरिष्ट नेताओं को दरकिनारे लगाते हुए अपने बेटे को टिहरी संसदीय सीट से कांग्रेस का टिकट दिलाया। भले ही वह उन्हें सांसद न बना पाये परन्तु प्रदेश में कांग्रेस के भावी लोकसभा चुनाव के प्रबल दावेदार तो बना ही चूके है। यही नहीं मुख्यमंत्री पद के सबसे प्रबल दावेदार हरीश रावत ने भी अपने बेटे को प्रदेश युवक कांग्रेस का अध्यक्ष बना कर स्थापित कर लिया। प्रदेश के मुख्यमंत्री भले ही वे न बन पाये हों परन्तु वे देश के कबीना मंत्री तो बन ही गये। यहां विश्व में आध्यात्म जगत में अपना परचम फेहराने वाले सतपाल महाराज ने भी विकास की ंगंगा बहाने में कहीं कोई कसर नहीं छोड़ी। वे देश के एक मात्र शीर्ष आध्यात्म गुरू हैं जो सांसद भी बने और देश के मंत्री भी बने। भले ही वे लाख कोशिशों के बाबजूद खुद को प्रदेश के मुख्यमंत्री न भी बना पाये परन्तु वे अपनी धर्मपत्नी को प्रदेश की विधायक ही नहीं कबीना मंत्री के पद पर आसीन करा कर विकास की गंगा बहा चूके है। पर वे अन्य नेताओं की तरह अभी अपने बेटे को शासन प्रशासन में भागेदार नहीं बना पाये । वहीं प्रदेश अध्यक्ष यशपाल आर्य भले मुख्यमंत्री न बन पाये परन्तु वे खुद को मंत्री व अपने बेटे को भी शासन प्रशासन में भागीदार बना ही चूके है। यही इंदिरा हृदेश भी मुख्यमंत्री न बन पायी हो परन्तु प्रदेश की वित्त मंत्री बनने के साथ अपने बेटे को भी शासन प्रशासन में आसीन कर चूकी है। मुझे लगा कि इन नेताओं को  जितनी चिंता अपने व अपने परिजनों के विकास की है उतनी प्रदेश की चिंता रहती तो प्रदेश की जनांकांक्षायें कब का साकार हो जाती।
कांग्रेस में इससे पहले भी विकास का यही राह रही होगी। हम तो चिल्लाते रहे कि देश व प्रदेश का विकास करें परन्तु ये लोग अपना, अपने परिजनों व चम्चों का विकास ही करते गये। चाहे तिवारी रहे या बहुगुणा की सरकार, इसी राह में हुए काम। जहां तिवारी के जमाने में आरेन्द्र से लेकर सैकडों प्यादों का विकास हुआ। वहीं बहुगुणा के जमाने में तो इन नेताओं ने अपने खुद की विकास की कोई कमी छोड़ना ही नहीं चाहते है। बाकी इन नेताओं को कभी प्रदेश के हितों, सम्मान व हक हकूकों की कोई चिंता नहीं रही।
ऐसा नहीं कि विकास की यह परंपरा केवल कांग्रेसी नेताओं में रही। प्रदेश की सत्ता में आसीन रहे भाजपाईयों का भी विकास की नयी परिभाषा गढ़ते रहे। जहां खण्डूडी के राज में सांरगी की तूती वेसे ही बोलती थी जैसे तिवारी के राज में आरेन्द्र की। खण्डूडी के राज में विकास की गंगा बही तो सारंगी से निशंक तक बही। परन्तु जब विकास की नौका के खेवया खुद निशंक बन गये तो उन्होंने प्रदेश में किसका विकास किया यह पौंटी प्रकरण के बाद ही खुलाशा हो पाया। वेसे प्रदेश के अन्य नेताओं की कथा कुछ कम नहीं है। अगर प्रदेश गठन के बाद यहां के विधायकों पर बरसी लक्ष्मी की कृपा की निष्पक्ष जांच की जाय या उनकी तब से अब की तस्वीर केवल एक झलक जनता के समक्ष रखी जाय तो विकास की गंगा कहां बह रही है इसका भान विकास के लिए तरस रही प्रदेश की आम जनता को भली भांति हो जायेगा। ऐसा नहीं कि उत्तराखण्ड की एकमात्र प्रांतीय दल होने का दंभ भरने वाली पार्टी उक्रांद के नेता इस दौड़ में पीछे रहे हों,उन्होंने भी विकास की इस बहती गंगा में जम कर हाथ साफ किया। प्रदेश भाजपा सरकार में मंत्री रहे फिल्ड मार्शल के नाम से ख्याति प्राप्त दिवाकर भट्ट ही नहीं लालबत्ती लिए शासन प्रशासन में आसीन रहे उक्रांद नेताओं ने भी इस विकास की गंगा में स्नान किया। अब बसपा वाले भी सरकार की इस विकास की गंगा में सहभागी है। कुछ मुलायम के कहार रहे नेता भी अब कांग्रेस की विकास की राह के अनुगामी बन कर अपने विकास के लिए समर्पित है। प्रदेश के नेताओं द्वारा प्रदेश के विकास की इस गंगा में प्रदेश के आम आदमी के लिए कहां स्थान है यह तो इनके विकास पर एक नजर फेरने के बाद आदमी खुद ही समझ जायेगा।

Thursday, January 10, 2013


गैरसेंण राजधानी बनने से कोई ताकत नहीं रोक सकती



गैरसेंण राजधानी बनने से रोकने का नापाक षडयंत्र से बाज आये अभागे 

गैरसेंण में प्रदेश की जनांकांक्षाओं को साकार करने का प्रतीक, उत्तराखण्ड की राजधानी गैरसेंण को बनाने की दिशा में प्रथम महत्वपूर्ण कदम यहां पर विधानसभा भवन का शिलान्यास 14 जनवरी को पावन मकर संक्रांति के दिन होने जा रहा है। परन्तु आदत से मजबूर अभागे कांग्रेसी नेता अपने निहित स्वार्थ के खातिर इस ऐतिहासिक कार्य पर भी ग्रहण लगाने की हर संभव कोशिशें कर रहे है। इससे प्रदेश के हितों पर गहरा आघात लग रहा है। भले ही कांग्रेस की वर्तमान विजय बहुगुणा सरकार गैरसेंण राजधानी वाले मुद्दे को मात्र तत्कालीन फायदे के लिए कर रहे हों या प्रदेश के जनविरोधी नेता इस मुहिम को असफल करने में तिकडम कर  रायपुर देहरादून में नयी विधानसभा भवन बनाने का ऐलान कर गैरसेंण में विधानसभा भवन बनाने के रंग में भंग डालने का षडयंत्र रच रहे हों। मै इस बात को भी भली भांति जानता हॅू कि ये सत्तालोलुपु और अपने निहित स्वार्थ में अंधे कोई उत्तराखण्ड की राजधानी गैरसेंण बनाना ही नहीं चाहते है। नहीं प्रदेश की भ्रष्ट जनविरोधी नौकरशाही ही गैरसैंण में राजधानी बनाना चाहती है। ये इसे रोकने के लिए षडयंत्र पर षडयंत्र कर रहे हैं। परन्तु इन अभागों को इस बात का अहसास भी नहीं कि उत्तराखण्ड की जनता की करूण पुकार को भगवान बदरीनाथ हर हाल में सुनेगे। इन्हीं उत्तराखण्ड विरोधियों से राजधानी गैरसेंण बनाने का असंभव समझा जाने वाला काम  करायेगा।
 प्रदेश की कांग्रेस सरकार ने इसकी नींव रखने वाले समारोह में सप्रंग सरकार की प्रमुख सोनिया गांधी को भी आमंत्रण दिया था। परन्तु अभागे कांग्रेसी नेताओं में वर्चस्व की जंग के कारण सोनिया गांधी का यह दोरा भले ही रद्द हो गया हो परन्तु कांग्रेसी व भाजपाई सहित तमाम उत्तराखण्ड की जनभावनाओं को प्रदेश की राजधानी जबरन देहरादून में थोपे रखने वाले दुशासनों को एक बात कान खोल के सुन लें कि बाबा मोहन उत्तराखण्डी सहित राज्य गठन के महान शहीदों व राज्य गठन आंदोलनकारियों का गैरसैंण राजधानी गठन का जो सपना है वह भगवान बदरीनाथ की अपार कृपा से हर हाल में पूरा होगा। चाहे उत्तराखण्ड के विकास के संसाधनों को अपनी अंध सत्तालोलुपता के लिए यहां की अब तक की सरकारें, विधायक, सांसद ना भी चाहे फिर भी महाकाल इन सत्तालोलुपु भेडियों की खाल से भी यह काम करायेगी।जिस प्रकार प्रदेश गठन को ना चाहते हुए भी इन भैडियों को बनाने के लिए मजबूर होना पड़ा। जिस प्रकार से प्रदेश का नाम भी न चाहते हुए बदलना पडा, उसी प्रकार प्रदेश की राजधानी गैरसेंण भी बनाने के लिए इनको मजबूर होना पडेगा। जो विरोधी है उनका प्रायश्चित एक ही है कि वे अपने नापाक कुकृत्यों को तत्काल त्याग कर प्रदेश की स्थाई राजधानी गैरसेंण बनाने में अपना योगदान दे कर महाकाल के श्राप से बचें।  इन सत्ता के भूखे अभागे भैडियों को इस बात का अपने दिलो दिमाग में गांठ बांध लेनी चाहिए कि प्रदेश की राजधानी गैरसेंण ही बनेगी चाहे ये कितने ही षडयंत्र कर लें। राजधानी इनके चाहने या न चाहने से नहीं अपितु यहां की जनता की करूण पुकार को भगवान बदरीनाथ ने सुन ली है। अब इसके मार्ग में जो भी अवरोध खडा करेगा उसे दण्ड तो भोगना पडेगा। यही बात मैने प्रदेश की इस सरकार के मुख्यमंत्री बनने के चंद घंटे पहले हरीश रावत से गैरसेंण मुद्दे पर कही थी कि सरकार में आसीन कोई पार्टी हो या कोई भी मुख्यमंत्री बने परन्तु हमारी मांग राजधानी गैरसेंण ही होगी और यही राजधानी बनेगी। यही बात मैने राव के शासन काल, मुलायम का सत्ताच्युत होने, खण्डूडी व भाजपा की पराजय, मोदी व वीरभद्र के विधानसभा में विजय सहित कई मामलों में की थी। काला बाबा सच ही कहते थे देवी काल कभी किसी को लठ ले कर मारने नहीं जाता वह कारण बनाता है। भगवान श्रीकृष्ण की परम शक्ति को न द्वापर के दुर्योधन समझ पाये व नहीं आज के सत्ता के जनविरोधी भैडिये जिन्होंने राज्य गठन के बाद उत्तराखण्ड की जनांकांक्षाओं और हितौं को रौदेने में कोई कसर नहीं छोड़ी। इनके कृत्यों को भले ही शासन प्रशासन सजा न भी दे परन्तु भगवान के घर कभी अंधेर नहीं है।

Tuesday, January 8, 2013


मनमोहन सरकार शर्म करो, नापाक पाक को दण्डित करो


पाक ने 8 जनवरी को दो जाबांज भारतीय सैनिकों की हत्या कर दी परन्तु भारतीय हुक्मरानों को  पाक से क्रिकेट मैच खेलने व नापाक पाक हुक्मरानों से  गलबहियां करने से फुर्सत ही कहां। 8 जवरी को भारत पाक सीमा पर पाकिस्तान ने सीज फायर का उलंघन करते हुए पूछ के मंढेर सेक्टर पर अकारण गोलीबारी कर सेना के पेट्रोलिंग दस्ते पर हमला करके दो भारतीय सैनिकों की हत्या कर दी और दो घायल हो गये।  एक सैनिक के सर को काट कर हमलावर पाक ले गये। शहीद हुए सैनिक हैं लांस नायक  हेम राज  व सुधाकर सिंह । जहां आम भारतीयों को अपने देश के इन जाबांज शहीदों पर नाज है और वे शहीदों की शहादत को शतः शतः नमन् करते है। वहीं देश के नपुंसक हुक्मरानों जिन्हें पाक द्वारा भारत के संसद से लेकर कारगिल व मुम्बई तक निंरतर हमला किया जा रहा है परन्तु देश के हुक्मरान पाक को अमेरिका की तरह आतंकियों का सफाया करने तक हमला करने के बजाय भारत को तबाह करने पर तुले पाकिस्तान से क्रिकेट मैच खेलने व नापाक हुक्मरानों से निरंतर गल बहियां करके देश के लिए शहीद हुए जांबाजों की शहादत का अपमान करते हुए देश की एकता व अखण्डता से भी शर्मनाक खिलवाड़ कर रहे है। देश का दुर्भाग्य रहा कि इस देश में मनमोहन व अटल जैसे हुक्मरान मिले जो पाक के दुशाहस का इंदिरा गांधी की तरह मुंहतोड़ जवाब देने के बजाय अमेरिका के इशारे पर पाक से शांति वार्ता कर रहे हैं और पाक भारत को तबाह करने में निंरतर लगा हुआ है।