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Showing posts from October, 2012
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सृष्टि को गुलाम बनाने की किसी के प्रयास को विफल करती है प्रकृति 
सैंडी जैसे प्राकृतिक व अमेरिका जैसे तानाशाही मनोवृति से पृथ्वी की रक्षा करने के लिए जरूरत है एक मजबूत विश्व सरकार की
विश्व मानवता व लोकशाही को अपनी जिस ताकत के दम पर अमेरिका द्वितीय विश्व युद्ध के बाद निरंतर रौंद रहा है वह ताकत प्रकृति के एक साधारण से थपेडों ‘सैंड़ी तूफान’ के आगे बेबस, असहाय व शक्तिहीन बना हुआ है। अपने आप को विश्व की एकमात्र महाशक्ति बन कर अपने निहित स्वार्थ के लिए अफगानिस्तान, इराक व लीबिया जैसे देशों को तबाह कर तथा 75 देशों की शांति पर अपने सैन्य ताकत व नाटो व संयुक्त राष्ट्र आदि गिरोह से ग्रहण लगा कर लाखों लोगों को अकाल ही मौत की नींद सुलाने वाले अमेरिकी हुक्मरान इस समय प्रकृति के इस जरा से थेप्पेडों को आगे खुद को बेबश पा कर प्रकृति के रहमोकरम पर जी रहे हैं। यह प्रकृति द्वारा अत्याचारी अमेरिकी हुक्मरान को एक संदेश भी है कि अपने गिरेवान में झांक कर इंसानियत को न रौंदे।परन्तु इस समय अमेरिका के करोड़ों निर्दोष लोगों का जीवन भी संकट में घिरा हुआ है। विश्व जनसमुदाय प्रकृति से लोगों के अमन चैन की दुआयें कर रह…
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देश में 65 साल में पहली बार बना कोई कबीना मंत्री 

-लोकशाही की रक्षा के लिए मिटाना होगा उत्तराखण्ड से जातिवाद का धृर्णित कलंक
- देश का एकमात्र प्रदेश है उत्तराखण्ड जहां बहुसंख्यक समाज को षडयंत्र के तहत लोकशाही के न्यायोचित हक हकूकों से व
ंचित किया गया‘आजादी के 65 साल बाद पहली बार उत्तराखण्ड का कोई राजपूत देष का कबीना मंत्री बना’! मेरे उत्तराखण्ड राज्य गठन जनांदोलन के मित्र व पिथोरागढ़ मूल के पत्रकार व इंजीनियर जगदीष भट्ट ने जैसे ही यह बात कही तो उत्तराखण्ड पत्रकार परिशद के पूर्व महासचिव व टिहरी बडियारगढ़ क्षेत्र के मूल निवासी अग्रणी पत्रकार दाताराम चमोली ने कहा ‘हाॅं नहीं तो अभी तक जितने भी आजादी के बाद उत्तराखण्ड मूल के देष में कबीना मंत्री बने उनमें चाहे गोविन्द बल्लभ पंत हो, या हेमवती नन्दन बहुगुणा, ब्रहमदत्त ,नारायणदत्त तिवारी, कृश्णचंद पंत व भुवनचंद खण्डूडी जैसे नेता रहे हों परन्तु उत्तराखण्ड में राजपूत समाज का 65 साल तक एक भी मंत्री नहीं बना। प्रदेष में जनसंख्या के हिसाब से यह उपेक्षा कहीं उचित नहीं थी। पहली बार मनमोहन सिंह की सरकार के मंत्रीमण्डल में हुए अंतिम फेरबदल में हरीष रावत …
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2014 के चुनावी भंवर में कांग्रेस को डूबने से नहीं बचा पायेगा मनमोहनी मंत्रीमण्डल के विस्तार का टोटका भी

देष की जनता ने सोनिया गांधी के नेतृत्व पर विष्वास करके जनता की आषाओं पर खरा उतरने में असफल रही एनडीए गठबंधन को सत्ताच्युत किया था। देष को सही षासन दे कर विकास की रहा में चलाने का दायित्व निर्वाह करने के बजाय सोनिया गांधी ने अमेरिका के प्रिय मनमोहन सिंह को देष का प्रधानमंत्री बनाने की हिमालयी भूल की। मनमोहन सिंह को बनाने के बाद जिस ढ़ग से देष की बर्बादी की राह में अपने कुषासन से धकेला उससे देष मंहगाई, भ्रश्टाचार, आतंकवाद के  षिकंजे में बुरी तरह से जकड़ गया। आम जनता का जीना दुष्वार हो रखा है परन्तु क्या मजाल आम जनता के हित में काम करने की दुहाई देने वाली कांग्रेस व उसकी आला कमान सोनिया गांधी व राहुल गांधी के कानो में जूॅं तक नहीं रेंग रही है। वह देष व पार्टी के हित में मनमोहन सिंह को अविलम्ब प्रधानमंत्री के पद से हटाने के बजाय उसके कुषासन को ही बढावा दे रही है।  मनमोहन सरकार अमेरिका के हित में व भारतीय हितों को जिस निर्ममता से रौंद रही है उससे उसका एक पल के लिए ही देष का भाग्य विधाता …
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-देशहित में मनमोहन को प्रधानमंत्री पद व गडकरी भाजपा अध्यक्ष पद से हटें

-कांग्रेस की तरह भ्रश्टाचार को आत्मसात कर आत्महत्या न करे भाजपा, 

-गडकरी हटा कर गोविन्दाचार्य को बनाये अध्यक्ष भाजपा 

आज भारत बहुत ही संकट के दौर से गुजर रहा है। यहां देष की एकता व अखण्डता के रक्षक होने साथ साथ  देष में लोकषाही को संचालित करने वाली देष की प्रमुख दोनों  राश्ट्रीय पार्टी कांग्रेस व भाजपा दोनों पर दिषाहीन व कमजोर नेतृत्व होने के कारण संकट के बादल मंडराने लगे है। इसी कारण देष भ्रश्टाचार, मंहगाई, आतंकवाद आदि समस्याओं से बुरी तरह जकड़ गया है उसके लिए मुख्य रूप से जिम्मेदार देष के हितों के प्रति उदासीन अमेरिकापरस्त प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को अविलम्ब अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए। वहीं भ्रश्टाचार के आरोप में बुरी तरह से घिरे देष की मुख्य विपक्षी दल के अध्यक्ष नितीन गड़करी भी तत्काल अपने पद से इस्तीफा दे। अगर दोनों अपने विवेक से षीघ्र इस्तीफा नहीं देते हैं तो प्रधानमंत्री को कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी व गडकरी को संघ तत्काल पद से बर्खास्त करने का काम करें। आज देष के आम जनता का जीना मनमोहन सिंह सरकार के …
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-उत्तराखण्ड मेें जमीनों को आडवाणी की बेटी सहित तमाम एनजीओ को लुटाई जमीनों के पट्टे रद्द हो

-विजय बहुगुणा सरकार व विपक्ष को क्या सांप सुंघ गया 

जिस प्रकार से हरियाणा, हिमाचल व महाराश्ट्र सहित अनैक राज्यों में वहां की सरकारों द्वारा नेताओं व नेताओं के रिष्तेदारों को जमीनें कोडियों के भाव से दी जाने पर बबाल मच रहा है। हिमाचल प्रदेष में प्रियंका गांधी व भ्रश्टाचार के खिलाफ जंग लड रहे अण्णा व केजरीवाल के आंखों के तारे प्रषांत भूशण, हरियाणा में सोनिया गांधी के दामाद बढ़ेरा व राहुल गांधी तथा महाराश्ट्र में भाजपा के राश्ट्रीय अध्यक्ष व संघ के आंखों के तारे गडकरी को जमीने दिये जाने पर बबाल मच रहा है। परन्तु अफसोस हे कि सन 2000 राज्य गठन के बाद उत्तराखण्ड में पहली मनोनीत प्रदेष सरकार के मुखिया नित्यानन्द स्वामी के राज में जिस प्रकार से भाजपा के आला नेताओं के बच्चों व प्यादों वहां की जमीने उनके एनजीओ व अन्य नाम से आवंटित की गयी वह परमपरा कांग्रेस के तिवारी राज से अब तक बहुत ही षर्मनाक  ढ़ग से जारी है। उस मुद्दे पर न तो कांग्रेसी व नहीं भाजपाई मुंह खोलने के लिए तैयार नहीं है। सुत्रों के अनुसार राज…
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भगवान बचाये हर पल दुनिया हमारी

छल प्रपंच और राग-द्वेश से भरी हुई है दुनिया सारी।
तुम्ही बताओ इस दुनिया से कैसे निभेगी हमारी यारी ।।
चारों तरफ हैं इस दुनिया में हुए सत्तासीन भश्टाचारी ।
तुम्हीं बताओ मेरे साथी कैसे सर उठायेगी ईमानदारी ।।
धर्म कर्म और राज काज पर काबिज हुए है दुराचारी।
तुम्हीं बताओं ऐसी दुनिया में कैसे जींदा रहे सदाचारी।।
जाति धर्म व रंगभेद के असुरों से जकडी दुनिया सारी ।
ऐसी दुनिया में कैसे रहेगी एक पल भी श्री षांति प्यारी।।
प्रपंची लोगों को कभी नहीं मिलती है प्रभु कृपा प्यारी।
विना श्री हरि की कृपा से व्यर्थ है ये सारी दुनियादारी ।।
दया धर्म व न्याय प्रेम से रहित प्राणी ही है अत्याचारी
ऐसे लोगो से भगवान बचाये हर पल दुनिया हमारी।।
जो निहित स्वार्थ में डूब कर बनते है धृतराश्ट गंधारी
दुसरों का दुख देने  वालेों को खुद काल बने कसाई।।
दो दिन के जीवन में आओ मिल जुल रहे सब भाई
ना तेरा ना मेरा है जग यहां तो दो पल रेन बसाई।।
-देवसिंह रावत
(षुक्रवार 26 अक्टूबर 2012 प्रात 11 बजे )

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असत्य पर सत्य की जय हो


असत्य पर सत्य की जय हो
अधर्म पर धर्म की जय हो 
अन्याय न कहीं फले फूले
अधर्म भी सर उठा न सके
पाप जग को रूला न सके
ऐसा दीप ज्ञान का ही जले
मन में कभीं राग द्वेश न रहे 
सबके हित में जिन्दगी जीयें
आओ सभी के लिए हम जींये
असत्य पर सत्य की जय करें।
-देवसिंह रावत
(विजय दषमी के पावन पर्व पर 24 अक्टूबर 2012 रात के 9.30 बजे)
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गैरसैंण राजधानी बनने से होगी लोकशाही की जीत 

इससे खुलेगे उत्तराखण्ड विकास के द्वार 

उत्तराखण्ड राज्य गठन जनांदोलन में हमारी प्रमुखतः जो दो माग थी वह था उत्तराखण्ड राज्य का गठन करने व प्रदेश की राजधानी गैरसैंण बनाने की प्रमुखता से थी। प
रन्तु राज्य गठन के बाद जनतंत्र का गला घो।टने वाली सरकारों ने भले ही जन आक्रोश व जनदवाब को देखते हुए भले राज्य का गठन तो कर दिया परन्तु अपना अलोकतांत्रिक चेहरा खुद बेनकाब करते हुए प्रदेश का नाम उत्तराखण्ड रख दिया और राजधानी गैरसेंण बनाने के बजाय उसे षडयंत्र के तहत देहरादून में थोप दिया। यही नहीं राजधानी गैरसेंण न बने इसके लिए जहां एक तरफ राजधानी चयन आयोग जैसे टोटका प्रदेश के लोगों की आंखों में धूल झोंकने के लिए बना कर प्रदेश के करोड़ो रूपये के संसाधन एक दशक तक इस पर बर्बाद किये गये। वहीं दूसरी तरफ गुपचुप करके उत्तराखण्ड से द्रोह करके राजधानी बलात देहरादून में ही थोपते हुए यहां पर इससे सम्बंधित कई भवन तक बना दिये गये।
जब खुद मैने प्रथम निर्वाचित मुख्यमंत्री तिवारी से उत्तराखण्ड निवास में गैरसेंण राजधानी बनाने के लिए आग्रह किया तो उन्होंने गुस्से में तमतमाते …
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नीरो से बदतर साबित हुए सोनिया, मनमोहन, मंत्री व देश के नेता

-भ्रष्टाचार व मंहगाई से आम जनता त्रस्त परन्तु मनमोहन व उनकी सरकार मस्त 

-जयराम में हिम्मत है तो जनता से पहले जनता को खुले में शौंच करने के लिए मजबूर करने वाले हुक्मरानों को डालें जेल 

‘सलमान खुर्शीद प्रकरण पर कांग्रेस आला कमान सोनिया गांधी व मनमोहन सिंह की शर्मनाक मूकता को देख कर व कांग्रेसी नेताओं व मंत्रियों के शर्मसार करने वाले बयानों को सुन कर मेरे मन में एक विचार क्रोंधा नीरो तू मरा नहीं तू आज भले ही रोम में जींदा न हो पर तू भारत में जींदा है। सोनिया व मनमोहन सिंह की सरकार के रूप में आम आदमियों के जख्मों को कुरेद रहा है।
बचपन में मेरी तरह आपने भी सुना होगा कि जब रोम जल रहा था तो उस समय वहां का सत्तालोलुपु शासक नीरों चैन की बंसी बजा रहा था। इस कहावत को पढ़ते या सुनते मुझे लगता था कि शायद यह बहुत ही अतिश्योक्ति पूर्ण कहावत है। सच में ऐसा थोड़ी हुआ होगा। परन्तु आज भारत में सोनिया गांधी के नेतृत्व वाली मनमोहन सिंह की सरकार के कारनामों को देख कर लगता है कि सच में नीरो अब रोम में नहीं भारत में ही जींदा है।  देश में मंहगाई, भ्रष्ट…
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देश की अगली प्रधानमंत्री हो सकती है ममता बनर्जी

-ममता के आगे बौने पडे मुलायम, नीतीश सहित सभी नेता

-विपक्षी नहीं भाजपा के नेता है मोदी की राह के सबसे बडे  रोडे 

‘ऐ मेरे वतन के लोगों जरा आंखों में भर लो पानी, जो शहीद हुए हैं उनकी जरा याद करो कुर्वानी ’ के गीत को गा कर संसद की चैखट राष्ट्रीय धरना स्थल जंतर मंतर से हुंकार भरते हुए बंगाल की मुख्यमंत्री व देश की आम अवाम की रहनुमा बन चूकी ममता बनर्जी ने देश की आम जनता को मंहगाई, कुशासन व भ्रष्टाचार से खून के आंसुओं से रोने के लिए विवश करने वाले कांग्रेस गठबंधन वाली सप्रंग की मनमोहनी सरकार को धिक्कारते हुए कहा कि जब तक उसके शरीर में प्राण है वह देश की रक्षा के लिए जेल जाने व गोली खाने के लिए भी तैयार है। उन्होंने मनमोहन सरकार को बेनकाब करते हुए कहा कि देश में विकास व आर्थिक सुधारों के नाम पर मनमोहन सरकार देश को लुटवा रही है । आम आदमी का जीना दूश्वार कर रही है और मैं और मेरी पार्टी किसी भी कीमत पर देश को लूटने नहीं देगे। बंगाल में जनशाही के नाम पर विगत 3 दशक से कुण्डली जमा कर वहां के विकास को कुंद किये हुए वाममोर्चे की सरकार को उखाड फेंकने का ऐत…
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चीन, अमेरिका व पाक से अधिक खतरनाक है देश का नपुंसक पदलोलुपु नेतृत्व

चीन युद्ध के अमर शहीद व जांबाजो को 50 वीं बरसी पर शतः शतः नमन

1962 में आक्रांता चीन  से भारत की रक्षा करने में अपने प्राणों की शहादत देने वाले व युद्ध भूमि में चीन के मंसूबों का मुंहतोड़ जवाब देने वाले जांबाज वीर सैनिकों को कृतज्ञ राष्ट्रवासियों का शतः शतः नमन्। शांति शांति के नाम पर देश को नपुंसकता की गर्त में धकेलने वाले देश के नेतृत्व व कई शताब्दियों से गुलामी के दंश से अपने गौरवशाली अतीत को भूल कर कायर बने देशवासियों को शक्ति सम्पन्न राष्ट्र होने का महत्व समझाने वाले चीन से युद्ध की 50 वीं वर्षगांठ पर आओ भारत को एक मजबूत व सशक्त राष्ट्र बनाने का संकल्प लें। भले ही 50 साल पहले हमारे पास हथियार न हों परन्तु हमारे देश में उस समय नेतृत्व, सैनिक व जनता के दिलों में राष्ट्र के लिए कुर्वान होने की भावना आज के दिन से कई गुना अधिक थी।  आज देश जहां भ्रष्टाचार के गर्त में आकंण्ठ डूब कर दम तोड़ रहा है। वहीं देश का नेतृत्व न केवल दिशाहीन, नपुंसक व अमेरिकीपरस्त है। अगर आज के दिन 1962 की तरह चीन भारत पर हमला करता है तो हमारे सैनि…
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तिवारी को सपा का प्रमुख बना कर लखनऊ में ही बसायें मुलायम 

तिवारी को ही नहीं मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा को भी उप्र में ले जायें मुलायम 

18 अक्टूबर तिवारी के जन्म दिवस पर जिस प्रकार से मुलायम सिंह यादव ने तिवारी को अपनी कर्म भूमि रही उप्र में बसने का  सार्वजनिक निमंत्रण दिया है उस पर मेरी व मेरे सहित तमाम आंदोलनकारी संगठनों की यही प्रतिक्रिया हो सकती है कि अगर इससे  बढ़ कर एक बडा काम मुलायम सिंह कर सकते हैं तो वे उत्तराखण्ड  मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा जो तिवारी के पद चिन्हों पर चल कर उत्तराखण्ड की जनांकांक्षाओं को तिवारी की तरह ही मुख्यमंत्री बन कर रौंद रहे हैं उनको भी उनकी जन्म भूमि उत्तर प्रदेश में ले जायें। तिवारी को अविलम्ब मुलायम सिंह का आमंत्रण स्वीकार कर उत्तराखण्ड को मुक्ति दें। आम उत्तराखण्डियों की नजर में मुलायम सिंह यादव की तरह एन डी तिवारी दोनों ही उत्तराखण्ड के घोर विरोधी हैं। जहां मुलायम सिंह यादव उत्तराखण्ड राज्य गठन का घोर विरोधी रहने के साथ साथ उत्तराखण्ड राज्य गठन जनांदोलन को रौंदने वाले घोर खलनायक रहे वहीं नारायण दत्त तिवारी भी राज्य गठन के घोर विरोधी रहने के साथ साथ घोर स…
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राजनीति में फिल्मी हीरो को नहीं अपितु सच्चे जनसेवक को स्वीकारती है जनता


टिहरी लोकसभा उपचुनाव में मिले जनादेश का सम्मान करते हुए सच्चे मन से जनांकांक्षाओं को साकार करने का संकल्प लेने के बजाय फिर फिल्मी स्टार की तरह डायलोग बोल कर  कि एक फिल्म के फलाप्त हो जाने से हिरो का केरियर खत्म नहीं होता हो या एक मैच में शून्य पर आउट होने वाले खिलाडी का केरियर समाप्त नहीं होने वाले जुमले बोल कर जनादेश का उपहास उड़ाने वाले विजय बहुगुणा भले ही प्रदेश के मुख्यमंत्री दिल्ली के तिकड़मियों की कृपा से बन गये हों परन्तु अभी उनको न तो लोकशाही का प्रथम पाठ का ज्ञान है कि राजनीति होलीवुड या बोलीवुड नहीं यहां हीरो व्यक्ति नहीं अपितु जनता असली हीरो होती है। जनता ही यहां कुशासकों को जमीन सुंघाती है और जनता ही यहां जनसेवकों को सत्तासीन भी करती है। मुख्यमंत्री भूल गये कि उत्तराखण्ड देवभूमि है और यहां प्रदेश की जनता ने सदियों से अन्यायी कुशासकों को धूल चटायी है। यहां की जनता सहृदयी जनसेवक को तो सर आंखों पर बिठाती है परन्तु सत्तांध व धनमद व धूर्तता से जनता को छल प्रपंच से जनभावनाओं को रौंदने वालों को जमीन भी सुंघात…
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सलमान प्रकरण से बेनकाब हुए मनमोहन, कांग्रेस व व्यवस्था

-केजरीवाल का सराहनीय संघर्ष पर जब तक सलमान इस्तीफा न दे तब तक धरना चलाने की हुकार भरकर भी पहले धरना उठाना गलत

देश के सबसे प्रतिष्ठित समाचार चैनल आजतक  द्वारा खुर्शीद और उनकी पत्नी लुईस द्वारा संचालित डॉक्टर जाकिर हुसैन मेमोरियल ट्रस्ट में 71 लाख रूपये के कथित अनियमितताओं के खुलाशा ने न केवल सलमान खुर्शीद को अपितु देश के प्रधानमंत्री, कांग्रेस पार्टी को ही नहीं अपितु पूरी व्यवस्था को ही पूरी तरह से बेनकाब कर दिया। भारत के ही नहीं अपितु विदेशी भी इस खुलाशे से भौंचक्के हैं कि भारत व्यवस्था सच में इतनी भ्रष्ट व अमानवीय हो गयी है कि वे विकलांग व्यक्तियों के लिए दी जाने वाली सरकारी सहायता पर ही डाका डालने  में तनिक सी भी शर्म नहीं आ रही है। इससे भी शर्मनाक बात यह हे कि न तो प्रधानमंत्री व नहीं सोनिया गांधी में इतना नैतिक साहस रहा कि वे अपने मंत्री को जांच तक पद से इस्तीफा देने की नैतिक साहस दे पाये। लगता है नैतिकता आज भारतीय राजनीति में रही नहीं गयी। गांधी जी कहते थे बडे पद पर आसीन व्यक्ति की नैतिकता व दायित्व भी बडी होती है। जिस देश व क…
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जनता ने सुंघाई सत्तांध मुख्यमंत्री बहुगुणा को जमीनी, 

इस्तीफा दे मुख्यमंत्री

उत्तराखण्ड की प्रबुद्ध जनता की जागरूकता के कारण टिहरी संसदीय उपचुनाव में मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा की तमाम तिकडमों के बाबजूद कांग्रेस को जीत नसीब नहीं हुई। 10 अक्टूबर को टिहरी संसदीय सीट के लिए सम्पन्न हुए संसदीय उपचुनाव की 13 अक्टूबर को मतगणना में भाजपा प्रत्याशी  माला राज लक्ष्मी शाह ने कांग्रेस के प्रत्याशी साकेत बहुगुणा को ं22694 मतों से हराया। इस चुनाव में विजयी रही भाजपा प्रत्याशी माला राज्यलक्ष्मी शाह को 245835 मत मिले व हारे हुए कांग्रेसी प्रत्याशी साकेत बहुगुणा को 223141 मत मिले। यहा ंपर चुनाव जीतने के लिए पूरा सत्ता तंत्र, संसाधन व घात प्रतिघात की तिकड़मी हथकण्डे अपनाने के बाबजूद हर हाल में टिहरी संसदीय सीट से चुनाव जीत कर अपने बेटे को सांसद बनाने में उतारू प्रदेश के मुख्यमंत्री को जनता ने हार का करारा सबक सिखाया। यह हार कांग्रेस के प्रत्याशी साकेत से अधिक प्रदेश के मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा की मानी जा रही है। इस हार को जनता की जीत मानते हुए प्रदेश के मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा के इस्तीफे की मांग आंदोलनक…
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गुजरात में मोदी व हिमाचल में वीर भद्र का ही  बजेगा डंका 

भले ही कांग्रेस व भाजपा सहित तमाम चुनाव समीक्षक कुछ  भी राग अलाप लें परन्तु गुजरात में मोदी व हिमाचल में वीर भद्र का डंका ही इन चुनाव में बजेगा। इस सप्ताह चुनाव आयोग ने 3 अक्टूबर बुधवार को गुजरात और हिमाचल प्रदेश में विधानसभा चुनावों की घोषणा की। इसके तहत दोनों राज्यों के चुनाव परिणाम 20 दिसम्बर को आयेगे। चुनाव आयोग की अ अधिसूचना के तहत जहां हिमाचल में 4 नवम्बर को चुनाव होगे और  गुजरात में दो चरणों में 13 और 17 दिसम्बर को चुनाव कराए जाएंगे। चुनाव आयोग द्वारा हिमाचल व गुजरात के मतगणना में इतना लम्बा अंतर रखना लोकशाही के लिए उचित नहीं माना जा रहा है। जिस प्रकार के पांच राज्यों के कुछ माह पहले हुए चुनाव में उत्तराखण्ड की विधानसभा के चुनाव के एक महिने से अधिक देर बाद इसके परिणाम आये वह आम लोगों का मोह भंग करता है। गुजरात मे 37815306  व हिमाचल प्रदेश में 45लाख 16 हजार 54 मतदाता है। गुजरात में 44496  व हिमाचल में 7252 मतदान केन्द्र है।  वर्तमान में गुजरात  विधानसभा में कुल 182 विधानसभा सीटों व हिमाचल में 68 सीटें है। भाजपा में जहां भा…
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मवेशियों चराने व घासफूस खाकर गरीबी में बचपन गुजारने वाले चीनी साहित्यकार मो येन को मिला नोबेल पुरस्कार

प्रतिभा कभी न तो धनपशुओं व सत्तासीनों और तथाकथित उच्च वर्ग की गुलाम नहीं होती है,  प्रतिभा गरीब की झोपडी में भी रोशन हो सकती है। यह कहावत सच साबित तब हुई जब विश्व प्रतिष्ठित साहित्य का नोबेल पुरस्कार चीन के  मो येन को प्रदान किया गया। बचपन में मवेशियों को चराने व घास फूस खाकर पेट भरने के लिए मजबूर रहे चीनी साहित्यकार मो येन को मिला साहित्य का नोबल पुरस्कार । 57 वर्षीय मो येन पहले चीनी लेखक है जिनको साहित्य का 2012 का नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया। मो येन का असली नाम गाओ शिगजिएन है परन्तु वे मो येन के नाम से साहित्य जगत में विख्यात है। मो येन का चीनी भाषा में अर्थ होता है मत बोलो। साहित्य का 109 वां नोबेल पुरस्कार विजेता मो येन गरीबी के कारण व चीन में सांस्कृतिक क्रांति के दौरान मवेशियों को चराने के साथ साथ पेडों की छाल व घासफूस खा कर जीवन यापन करने के लिए मजबूर भी होना पडा। यही अनुभव उनके जीवन में साहित्य की दिशा देने वाली प्रेरणादायक शक्ति बनी हुई है। चीनी सेना यानी पीपल लिब्र…
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लोकशाही के बेशर्म लूटेरे

क्या कहू इन बेशर्मो को जो कभी चारा तो कभी ताबूत डकारते है।
कभी बफोर्स घोटाला तो   कभी  बर्दी घोटाले से देश को लूटते हो। 
कभी कामनवेल्थ खेल के नाम पर तो कभी कोयला को डकारते हो
कभी सेज के नाम पर जमीने छीन कर  बिल्डिरों से मिल लूटते हो
कभी बारूद घोटाला, तो कभी 2जी घोटाला कर देश को लुटाते हो
इन लूटेरों ने तो माॅ भारती की जुबान भी लगाया है अंग्रेजी ताला ।
जब लूटने से दिल न भरा तो अपने फिरंगी आकाओं को बुला डाला।
इतने खुदगर्ज लूटेरे हैं इन्होंने तो विकलांगों का धन भी उडा डाला। 
कभी दुनिया को न्याय व ईमानदारी का पाठ पढ़ाने वाला भारत आज।
लूटशाही के लूटेरों का ऐशगाह बनकर कर नपुंसक आंसू बहा रहा है।
कोई धर्म तो कोई जाति के नाम पर देखो मेरे भारत को लूट रहा है 
कोई क्षेत्र तो कोई जनसेवा के नाम पर मेरे भारत को लूट रहा है। 
देवसिंह रावत
(मंगलवार 9 अक्टूबर 2012 रात के 11.57)
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पुलिस से नहीं सीबीआई से जांच हो तिवारी प्रकरण की

-कहीं यह तिवारी की सम्पति पर काबिज होने का खतरनाक षडयंत्र तो नहीं है तिवारी को नींद की गोलियां देना

-एफआरआई से दूर बनाया जाय तिवारी का आवास 

देहरादून (प्याउ)। जिस प्रकार से उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी को कई साल से दवाइयों के साथ नींद की गोलियों की ओवरडोज देकर उनका स्वास्थ्य बिगाड़ने के खतरनाक षडयंत्र का सनसनीखेज खुलाशा तिवारी के ही ओएसडी भवानी भट्ट द्वारा किये जाने की खबरें इस पखवाडेत्र उत्तराखण्ड सहित देश के समाचार पत्रों में प्रकाशित हुई। खबरों के अनुसार यह जब वे प्रदेश के मुख्यमंत्री थे उस समय से लेकर जब वे आंध्र प्रदेश के राज्यपाल के पद पर आसीन थे तब भी यह सिलसिला जारी था।  इस खबर के बाद बताया गया कि देहरादून  पुलिस की वरिष्ठ अधीक्षक नीरू गर्ग ने मीडिया में छपी खबरों को संज्ञान में लेते हुए शहर की पुलिस उपाधीक्षक टीडी बैला को इन आरोपों की सत्यता जानने के लिए जांच करके पुलिस अधिकारी बैला,  तिवारी के ओएसडी भट्ट के अलावा उनके निजी स्टाफ और सुरक्षा कर्मियों तथा अन्य संबंधित लोगों से बातचीत कर अपनी रिप…
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पुण्य तिथि पर लखनऊ में याद किये गये आजादी के महानायक चन्द्रसिंह गढ़वाली

लखनऊ में भी अगले साल से उत्तराखण्डी मनायेंगे 2 अक्टूबर को काला दिवस 

लखनऊ से दानसिंह रावल
फिरंगी हुकुमत का सूर्यास्त कभी न होने के दंभ को पेशावर काण्ड से  चूर-चूर करने वाले भारतीय आजादी के महानायक वीर चन्द्रसिंह गढ़वाली की पुण्य तिथि पर भले ही देश के हुक्मरानों ने उनको भूला दिया हो परन्तु आज भी देश के लिए समर्पित लोगों के दिलों में वे राज करते है। उनकी पुण्य तिथि पर उनकी स्मृति को शतः शतः नमन् करने के लिए लखनऊ में भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की गयी। गौरतलब है 25 दिसम्बर 1891 में उत्तराखण्ड के पौड़ी जनपद में जन्मे वीरचन्द्रसिंह गढ़वाली  1 अक्टूबर 1979 में हुआ। आजादी के बाद उनकी घोर उपेक्षा इस बात से ही उजागर होती है कि उन पर डाक टिकट भी सरकार ने जनता की पुरजोर मांग के बाद 1994 में जारी किया।
पर्वतीय महापरिषद के बेनर तले मोनाल सांस्कृतिक संस्था के अध्यक्ष विक्रम सिंह बिष्ट के सोजन्य से लखनऊ के केशरबाग स्थित जयशंकर प्रसाद सभागार में वीर चन्द्रसिंह गढ़वाली की याद में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
इस कार्यक्रम मे…