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Showing posts from August, 2012
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भाजपा ही नहीं संघ भी है जिम्मेदार भाजपा के शर्मनाक पतन का

अरूण प्रताप सिंह जैसे जमीनी नेताओं की उपेक्षा का दंश झेल रही है भाजपा 

उत्तर प्रदेश में रामजन्मभूमि आंदोलन के पहले व बाद में प्रदेश की राजनीति में परचम फेहराने वाली भाजपा की आज दुर ्गति कांग्रेस से बदतर हो गयी है। इसके लिए और कोई दूसरा नहीं अपितु भाजपा का शीर्ष नेतृत्व अटल-आडवाणी व उनकी कटोरी के रूप में भाजपा को जनता की नजर में बेगाना बनाने वाली मण्डली ही जिम्मेदार है। जिस जनता ने देश में कांग्रेस के कुशासन को उखाड़ फैंक कर भाजपा के रामराज्य रूपि सुशासन पर विश्वास करके देश व प्रदेश में जनादेश दिया, उस जनादेश का सम्मान करने के बजाय भाजपा के आला नेताओं ने जनांकांक्षाओं व जनविश्वास को इस कदर रौंदा कि जनता ने भाजपा को ऐसा सबक सिखाया कि भाजपा उप्र में अपने कल्याणसिंह के नेतृत्व वाले दिनों के लिए तरस रही है। हालांकि उत्तराखण्ड में भी भाजपा ऐसा ही कार्य करती रही वहां के जमीनी व वरिष्ट संघ समर्पित जनप्रिय नेता भगतसिंह कोश्यारी की उपेक्षा कर जबरन जनता की नजर में उतरे हुए नेताओं को बार बार थोप कर भाजपा की ऐसी दुर्गति कर रहे हैं कि लोगों को…
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तेरी ये खामोशी से देश तबाह हो रहा हे
रहम कर अरे खुदगर्ज अब तो शर्म कर
कायले घोटाले प्रकरण में ‘ मेरी खामोशी ’नामक तुकबंदी का सहारा लेने वाले प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह द्वारा इस घोटाले में उनकी सरकार पाक साफ बताये जाने की परतें खुद ही बेनकाब  हो रही है कभी उनके कबीना मंत्री सुबोधकांत की चिट्ठी से तो अब 57 कोयला ब्लाकों में से 8 कोल ब्लाक नागपुर के किसी मनोज जायसवाल की कम्पनियां को आवंटन के नाम पर ए हालांकि इस खुलासे के बाद वर्तमान कोयला मंत्री उनको अपना दूर का रिश्तेदार बता रहे है।
आज देश का आम देशभक्त जानता है कि मनमोहन सिंह के कुशासन में देश के हितों पर कितना कुठाराघात हो चूका है। क्यों मनमोहन सिंह देश की आम जनता की आशाओं पर बज्रपात व अमेरिका की आंखों के तारे बने है। दुर्भाग्य यह है कि जिस कांग्रेस आला नेतृत्व में देश की जनता ने इंदिरा व राजीव की सी छवि देख कर उनको देश की बागडोर संभालने का जनादेश दिया है, उन्होंने उस जनादेश को मनमोहन नाम अमेरिका के प्रिय प्यादे को सोंप दिया है। आज देश की जनता मनमोहन सिंह सरकार के कुशासन से मंहगाई, भ्रष्टाचार, आतंकवाद सहित सभी क्षेत्रों में हो रही भयंकर त…
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अरविन्द केजरीवाल के प्रधानमंत्री व गडकरी के आवास प्रदर्शन से कांग्रेस को मिली बड़ी राहत

-कोयला घोटाले में केजरीवाल टीम द्वारा भाजपा को भी बराबर का दोषी बताने से कोयला घोटाले में आकंठ घिरी मनमोहन सरकार ने प्रसन्न हो कर दी टीम केजरीवाल को सोनिया, मनमोहन व गडकरी के आवास तक प्रदर्शन की इजाजत

देश में व्याप्त भ्रष्टाचार से मुक्त करने के लिए टीम अण्णा के नेतृत्व में चलने वाला ‘जनलोकपाल’ रूपि देशव्यापी आंदोलन ने जहां केन्द्र में सत्तासीन कांग्रेस पार्टी की नींद हराम कर दी थी। वहीं इसी टीम के राजनैतिक विकल्प देने के प्रणेता व टीम अण्णा के सर्वशक्तिमान सेनापति अरविन्द केजरीवाल के नेतृत्व में कोयला घोटाले के खिलाफ देश की राजधानी दिल्ली में 26 अगस्त रविवार को चलाया गया ‘‘प्रधानमंत्री मनमोहन व भाजपा के  अध्यक्ष नितिन गडकरी के आवास का घेराव का  आंदोलन, कांग्रेस के लिए वरदान साबित हुआ। अरविन्द केजरीवाल की टीम ने कोयला घोटाला में कांग्रेस के साथ भाजपा व अन्य दलों को भी दोषी मान कर एक प्रकार कांग्रेस को राहत दे दी। इस प्रदर्शन से देश की जनता में एक साफ संदेश चला गया कि कोयला घोटाले में केवल कांग्रेस ही…
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सत कमे करो तुम

ईश्वर हैं कण कण के वासी, 
फिर भी क्यों छायी है उदासी।
क्यों जीवन जप तप में गंवाते
धन दौलत पद के पीछे भागते । 
फिर भी मिले न सुख अविनाशी
सुख  है श्रीकृष्ण कृपा की गंगा ।
क्यों ढ़ूढ रहे उसे जग एैश्वर्य में
लूट खसोट से दौलत कमा कर ।
राग द्वेष से ये पद नाम कमा कर
सोच रहे यहां सुख शांति मिलेगी ।
प्रभु स्वरूप प्राणी को दुख दे कर 
सुख शांति कभी नहीं यहां मिलती ।
सुख शांति की चाहत है तो साथी
जड़ चेतन को मन से अपना लो।
किसी निदोर्ष का कभी शोषण करके 
सुख शांति  जग में नहीं मिल पाती ।
प्रभु को पाना है तो सुनो मनमोहन
जगहित में जीवन समर्पित कर दो।।
देवसिंह रावत
(24 अगस्त 2012 प्रात 8 .55)
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वक्त के मोहरे है यहां सभी अण्णा हो या रामदेव

वक्त के मोहरे है यहां सभी ं अण्णा हो या रामदेव
सबको जमीन सुंघाता है सिकंदर हो या जार्ज बुश
इतना न गिरो साथी जग में दो कदम चलने पर
तुम्हारी तस्वीर ही तुमको उजाले में भी डराने लगे
तुम्हारे शब्द ही तुम्हारी राह के कांटे बन कर डसे
आरती जिनकी उतारने चले वे कहां थे कहां खडे
स्वार्थ के पुतलों को न मशीहा बताओ तुम तो जरा
यहां काल पल में इन पुतलों को बेनकाब करता है 
देवसिंह रावत
(23 अगस्त 2012 प्रातः 9.47)

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वो दिन तो आयेगा गिर्दा ...

चले थे साथ हम इसी राहों में साथ,
तुम चले गये तो तुम बरबस याद आये
जिन्दगी है एक सफर इस जहां में
किस मोड़ पर मिल कर कोन बिछुड़ जाये।
तुम भी कहते थे अपनी की धून में
एक दिन तो आलो दिन या दुनि माॅं
पर हमें क्या मालूम था कि कि वो दिन
दलालों, राजनीति के गिरगिटों के लिए 
चैदवीं का चांद बन कर आयेगा
हमारे संघर्षो व बलिदान से गठित 
राज का ताज सजे न द्रोहियों के सर
पर साथी आंसू न बहा सपनों को लुटते हुए
भगवान बदरीनाथ का आशीष रहते हुए
इन दलालों को भी राव मुलायम की तरह
उत्तराखण्ड द्रोह का दण्ड भुगतना पडेगा
तिवारी, खण्डूडी व निशंक ने तो भुगत लिया
बहुगुणा भी इनकी राह चलेगा तो जायेगा
उत्तराखण्ड की जनांकांक्षाओं को रौंदने का 
जो भी करेगा दुशाहस उसको महाकाल 
कभी सपने में भी माफ नहीं करेगा।
शहीदों व आंदोलनकारियों का संघर्ष
व्यर्थ कभी नहीं जायेगा मेरे साथियों 
तुम्हारा वो दिन तो आयेगा इस दुनि मैं
जिसके हम सबने सपने देखे थे कभी।।
देवसिंह रावत 
(उत्तराखण्ड राज्य गठन जनांदोलन के अपने वरिष्ठ आंदोलनकारी साथी व अग्रणी जनकवि, की पावन पुण्यतिथि पर उनकी स्मृति को शतः शतः नमन्।  उन्हीं की स्मृति पर समर्पित यह श्रद…
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रामदेव पर प्रतिशोध में जुल्म ढाने से सरकार खुद हो रही है जनता में बेनकाब

-बंगलादेशी घुसपैटियों व अपने एक सांसद पर शर्मनाक मूक रखने वाली सरकार का रामदेव के सहयोगी बालकृष्ण पर कहर क्यों?

एक तरफ भारत सरकार देश में भ्रष्टाचार व काले धन के खिलाफ खुद कार्यवाही का दम भर रही है परन्तु देश की जनता यह देख कर हैरान है कि सरकार काले धन के खिलाफ व भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ी कार्यवाही करने के बजाय जो व्यक्ति देश की जनता को कई सालों से इस मांग के खिलाफ व्यापक जनांदोलन छेड़े हुए है उसी व्यक्ति बाबा रामदेव के खिलाफ आयकर सहित तमाम सरकारी ऐजेन्सियां ताड़व तोड़ कार्यवाही कर रहे है। वह भी उस बाबा रामदेव के खिलाफ जिसके राष्ट्रहित में की जा रही सेवाओं को देख कर देश विदेश की तमाम सरकारें व खुद मनमोहनसिंह की यह यूपीए सरकार के चार मंत्री हवाई अड्डे पर जा कर स्वागत करते है।
स्वामी राम देव कोई देशद्रोही कार्य या कानून के खिलाफ कार्य कर रहा था तो उनको पहले अब तक क्यों छोड़ा गया। भारतीय संस्कृति व भारतीय योग, भारतीय वस्तुओं का बडे स्तर पर जनता को रोजगार देते हुए बडा कार्य करना कहां कानून का उलंधन है। क्या कानून का उल…
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काला बाबा के मक्कर से नहीं बच पायेगी मनमोहनी सरकार



-भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट में हुआ खुलाशा

 ‘देवी काल कभी किसी को डण्डा लेकर मारने नहीं आता है वह कारण बनाता है। आदमी दुनिया के चक्करों से तो बच सकता हॅ परन्तु काले के मक्कर से नहीं बच सकता है। दुनिया में काला धन मसहूर है और मैं अपनी गुनाहगारी में प्रसिद्ध हॅू। बक्त पर सारा काला धन काला का होता है।’ भारतीय संस्कृति व राजनीति को रहस्यमय ढ़ग से पर्दे के पीछे रह कर देश व दीन दुनिया की सेवा करने काला बाबा की बरबस यादें मुझे रह रह कर इन दिनों उद्देल्लित करती है। वे देश, दुनिया, समाज को सत्तामद से रौदने वालों के लिए साक्षात काल थे। देश में व्याप्त भ्रष्टाचार व कुशासन के खिलाफ वे कई बार व्यथित हो कर प्रकृतिदत्त अपनी रहस्यमय शक्तियों के बल पर दुशासन बने कुशासकों को करारा सबक भी सिखाते थे।
 इन दिनों देश का आम नागरिक देश में व्याप्त भ्रष्टाचार, मंहगाई, आतंकवाद व कुशासन से पूरी तरह त्रस्त है। एक तरफ आज अण्णा हजारे के जनांदोलन व दूसरी तरफ बाबा रामदेव का काले धन के खिलाफ आंदोलन को देख कर बाबा भले ही पाखण्ड का तो विरोध करते…
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कब मिलेगी  भारतीय सेना को अंग्रेजी दमनकारी अफसरी राज से मुक्ति

भ्रष्ट व अमानवीय फिरंगी मानसिकता के अधिकारियों से सेना को मुक्त कर भारतीय व मानवीयकरण करे सरकार 

देश भले ही आजाद हो गयी परन्तु फोज में आज भी वहीं फिरंगी कालीन अफसरी शासन चलता है। जरा भी इसमें परिवर्तन नहीं आया। वहीं फिरंगी भाषा अंग्रेजी आज भी देश के अफसरों की जुबान में चढ़ कर देश के लिए कुर्वानी देने वाले जाबांज जवानों को अपमानित व दमन करने का हथियार बना हुआ है। देश के हुक्मरानों को देश के लिए अपना सर्वस्व निछावर करने वाले जांबाज जवानों की सुध लेने की कहां फुर्सत हें। वहां अधिकारी आज भी उनके साथ वही दमनकारी व्यवहार करते थे जैसे ब्रिटिश काल में होता था।
इसी पखवाडे संसद में जब पाकिस्तान सीमा पर तैनात भारतीय सेना की एक टुकड़ी में सेना के जवानों व अधिकारियों के बीच हुए चंद मिनटों के संघर्ष पर गहरी चिंता प्रकट करके सरकार से भविष्य में इस प्रकार की किसी घटना के न होने को कह रहे थे। सरकार की तरफ से रक्षा मंत्री ने इसे गंभीर मामला बताते हुए सभी सदस्यों से इस संवेदनशील मामले को ओर तुल न देने की अपील की। उन्होंने जोर दे कर कहा कि विश…
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असम प्रकरण के लिए पाक से अधिक गुनाहगार हैं देश के हुक्मरान

-अपनी असफलता के लिए सोशल मीडिया के सर पर दोष न मंढ़े सरकार

-हुक्मरानों द्वारा देश के हितों व ज्वलंत समस्याओं को नजरांदाज करने व देशद्रोही तत्वों को संरक्षण देने से हुई देश की स्थिति विस्फोटक





असम में बंगलादेशी आतंकी घुसपेटियों द्वारा किये गये हिंसक हमले के बाद जिस प्रकार से मुम्बई, लखनऊ, इलाहाबाद सहित उत्तर प्रदेश के कई शहरों में हुए  हिंसक प्रदर्शनों व इन घटनाओं के बाद जिस प्रकार से बंगलोर, हेदराबाद सहित देश के कई भागों से पूर्वोत्तर के छात्रों व लोगों ने पलायन के  लिए भारत सरकार ने पाकिस्तान व उसके अतिवादियों द्वारा संचालित सोशल मीडिया को जिम्मेदार ठहराया वह अपने आप में सरकार द्वारा अपनी जिम्मेदारी से बचने का गैरजिम्मेदाराना कृत्य ही है। सरकार को चाहिए था कि उस की मूल जड़ में जा कर दोषियों को सजा दे ओर इस समस्या का ठोस निदान करे। परन्तु सरकार लगता है इस सभी प्रकरण के लिए पाकिस्तान के अतिवादी तत्वों द्वारा संचालित सोशल मीडिया को जिम्मेदार बता कर फिर इस गंभीर समस्या से आंख मूंदना चाहती है। सरकार की यही कृत्य आने वाले समय में दे…
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बंगलादेशी घुसपेटियों के संरक्षक बन कर देश में अशांति फेलाने वाले सांसद व नेताओं पर कड़ी कार्यवाही करे सरकार 


असम में बंगलादेशी घुसपेटियों को अंध समर्थन देने के कारण उपजी हिंसा का विरोध करने के बजाय  जिन सांसदों व नेताओं ने समाज में तनाव फैलाने वाली धार्मिक टिप्पणियां या बयान दिये उनके खिलाफ सरकार अभी तक कार्यवाही क्यों नहीं कर रही है? जिन नेताओं ने बंगलादेशी आतंकी घुसपेटियों को देश में शर्मनाक संरक्षण दे रखा है उनके खिलाफ कार्यवाही के साथ पूर्वाेत्तर के छात्रों व कामगारों को पूरे देश में सुरक्षा देने के लिए देश के तमाम राजनैतिक दलों व प्रबुद्ध जनता को आगे आना चाहिए। मनमोहन सरकार इसको दलगत राजनीति से उपर उठ कर राष्ट्र रक्षा के लिए अपने दायित्व के रूप में कार्य करे। जनता भी तमाम प्रकार की अफवाहों को न तो फैलाये व नहीं उस पर कहीं ध्यान दें। पूर्वोत्तर के लोगों को भी इस बात का भरोसा रखना चाहिए कि पूरा राष्ट्र उनके साथ है उनको किसी प्रकार से इन अफवाहों से घबरा कर पूर्वोत्तर की तरफ कूच नहीं करना चाहिए। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह व सप्रंग प्रमुख सोनिया गांधी को उन बंगलादेशी घुसपेटियों के संरक्…
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मेरी बर्बादी का जश्न

(भारत माता की भारत पाक के सत्तांधों से करूण फरियाद)


कितने ना समझ हो तुम..
कितनी खुशी से कह रहे हो मुझसे
आओ! जश्ने आजादी का मनाओ।।

तुम्हें याद हो या न हो.......
क्योंकि तुम तो डूबे रहते हो सत्तामद में,
इसी दिन मेरे जिस्म के टुकडे किये थे तुमने,
मेरी संतानों का कत्ले आम कराया था तुमने,
मैं तड़फ रही थी, मैं बिलख रही थी,
पर तुम और तुम्हारे साथी,
जश्न मना रहे थे।।

गुलामी में मैं जिंदा तो थी...
इसी आश में..,
कि कभी तो मैं भी आजाद हॅूगी,
परन्तु आजाद होने से पहले ही
मुझे कत्ल किया तुमने ।
आज में जिंदा लांश हॅू और
मेरे जख्म नासूर बन गये।
मेरी जुबान पर लगा दिया 
तुमने फिर अंग्रेजी का ताला।
और तो और तुमने तो 
मेरा नाम ही मिटा दिया।।

अब तो मेरी इस हालत पर तो तरस खाओं
मेरे नाम से मेरी बर्बादी के दिन पर 
मेरे बेटो जश्न तो न मनाओ।
पर तुम क्या जानो माॅं की ममता का दर्द!
तुम्हें तो सत्ता चाहिए केवल सत्ता
चाहे इसके लिए खून की दरिया क्यों न बहे।।

-देवसिंह रावत
(एक दशक पूर्व लिखी अपनी इस कविता को आज फिर भारत माॅं के चरणों में सादर समर्पित कर रहा हॅू।www.rawatdevsingh.blogspot.com)
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आखिर कब होगा भारत में आजादी का सूर्याेदय

हम भारतीय विगत 65 सालों से फिरंगियों से मिली स्वतंत्रता को स्वतंत्रता दिवस के रूप में पूरे देश में बहुत ही धूमधाम से मनाते हैं, परन्तु मै छह ं दशकों से आज भी भारत अपनी आजादी के सूर्योदय को देखने के लिए भी तरस रहा है। क्या इसी चंगेजी व भारतीय अस्मिता को मिटाने वाले राज को आजादी कहते है? क्या आम जनता को लुटने वालों को गणतंत्र के सेवक कहते है? क्या देश को गुलामी से बदतर गुलाम बनाने वाले तंत्र को गणतंत्र कहते है? मेरा भारत आजादी के छह दशक बाद भी आज अपनी आजादी को तरस रहा है। आजादी के नाम पर पिफरंगी नाम इंडिया व पिफरंगियों की जुबान अंग्रेजी तथा देश को जी भर कर लुटने की पिफरंगी प्रवृति के अलावा इस देश को क्या मिला? आज भारत को न तो विश्व में कोई उसके नाम से पहचानता है व नहीं उसकी जुबान से। आज भी भारतीय पहचान व सम्मान को उसी बदनुमा पिफरंगी गुलामी के कलंक के नाम से जाना जा रहा है। आजादी के छह दशक बाद हमारी स्वतंत्राता के समय ही अपना सपफर नये ढ़ग से शुरू करने वाले इस्राइल, चीन व जापान आज विश्व की महाशक्तियां बन गयी है। परन्तु हम कहां खड़े हैं गुलामी के कल…
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-जनविरोधी हुक्मरानों व राजनेताओं को बेनकाब करने में सफल रहे बाबा रामदेव


  -महाजनक्रांति के लिए देशव्यापी आंदोलन का शंखनाद करके संसद कूच करते हुए गिरफ्तार हुए बाबा रामदेव के तैवरों से सरकार व पुलिस के छूटे पसीने






गत वर्ष अपने रामलीला मैदान के आंदोलन में सरकारी दमन व अपनी रणनीति की कमियों से सबक ले कर बाबा रामदेव ने 9 अगस्त 2012 से  रामलीला मैदान में ‘ कालेधन को देश में वापस लाने व देश को भ्रष्टाचार मुक्त बना कर फिर से विश्व की महाशक्ति बनाने ’  चलाये जा रहे व्यापक जनांदोलन रूपि सांकेतिक उपहास का सम्मानजनक दिशा देते हुए 13 अगस्त 2012 की सुबह संसद कूच का ऐलान किया। वे संसद की चैखट पर धरना देने के लिए संसद कूच कर रहे है। वहीं दूसरी तरफ दिल्ली पुलिस उनको  जंतर मंतर या संसद तक मार्च करने के  बजाय गिरफतार करने की रणनीति बनायी है। वहीं रामदेव ने भी पहले ही ऐलान कर दिया कि जहां पर भी पुलिस रोकेगी वहीं पर वे गिरफ्तारी देंगे। स्वामी रामदेव इसे सत्ता परिवर्तन का नहीं अपितु व्यवस्था परिवर्तन का महान जनक्रांति रूपि जनांदोलन बता रहे हैं। बाबा रामदेव खुली जीप में सवार हो कर रामलीला मैदान की तरफ अपने स…
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देशद्रोहियों के  जघन्य कृत्यों पर भी मौन रखना देशद्रोह है

क्यों नपुंसकों की तरह मूक बनी हुए है सरकार, बुद्धिजीवी, पत्रकार व  कथित धर्मनरिपेक्षवादी समाजसेवी

एक तरफ असम में बंगलादेशी घुसपेटिये आतंकियों ने देश में छुपे हुए अपने आस्तीन के सांप संरक्षकों की शह पर असम के बडे भू भाग पर कब्जा करने के बाद भारतीयों का नरसंहार करके देश की एकता अखण्डता को रौंद रहे हैं, दूसरी तरफ उनके कृत्यों को जायज ठहराने के लिए धर्म के नाम पर उनको खुला समर्थन देने के लिए मुम्बई में शनिवार 11 अगस्त को हिंसा का तांडव मचाने का दुशाहस किया गया, उस पर देश की सरकार, मुम्बई की सरकार, मीडिया, बुद्धिजीवी व तथाकथित धर्मनिरपेक्षवादी समाजसेवी क्यों दोषियों के कृत्यों पर नपुंसकों की तरह मूक बने हुए है।
इनकी मूकता के कारण दिल्ली में सुभाष मैदान में न्यायालय के आदेशों की खुले आम अवेहलना करके बनाया जा रहा विवादस्थ ढांचा बनाने का दुशाहस कट्टरपंथियों ने की। परन्तु क्या मजाल की पुलिस, प्रशासन, राजनेता, पत्रकार व धर्मनिरपेक्षता का लबादा ओड़ने वाल समाजसेवियों ने उफ तक की हो।
देश में जनभावनाओं  को रौंदने की इजाजत व देश की संस्कृति, म…
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जनहितों व जनांदोलनों को जानबुझ कर उपेक्षा करने वाली सरकार होती है लोकतंत्र की दुश्मन 



अण्णा व रामदेव के नेतृत्व में चले शांतिपूर्ण आंदोलन की उपेक्षा से व्मनमोहनी सरकार ही नहीं व्यवस्था के खिलाफ लोगों में भड़का असंतोष

जिस शर्मनाक ढ़ग से द
ेश की वर्तमान मनमोहनी सरकार अण्णा व बाबा रामदेव के नेतृत्व में देश को भ्रष्टाचार मुक्त व देश को मजबूत बनाने के लिए लिए चलाये गये राष्ट्रवादी शांतिपूर्ण जनांदोलनों की घोर उपेक्षा कर रही है उससे न केवल लोगों का मनमोहनी कांग्रेस सरकार के खिलाफ आक्रोश भड़क रहा है अपितु देश की वर्तमान व्यवस्था से भी मोह भंग हो रहा है। यह देश में लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए सबसे खतरनाक संकेत है। देश की जनता हैरान है कि आखिर देश में व्याप्त भ्रष्टाचार से देश की पूरी व्यवस्था मृतप्राय सी हो गयी है, उस पर अंकुश लगाने के लिए ठोस कानून लोकपाल के रूप में बनाने की अण्णा हजारे की मांग को स्वीकार करने में सरकार क्यों कतरा रही है? इसके साथ देश के तमाम भ्रष्टाचारियों ने दशकों से जो भ्रष्टाचार की काली कमायी विदेशी बैंकों में जमा की है उसको देश में वापस लाने के लिए चलाये जा रहे बाबा रामदे…
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जनहितों को रौंदने वाले कंस व दुशासनों को हर हाल में स्वयं दण्डित करता है महाकाल 

अण्णा व रामदेव आंदोलनों के हस्र से निराश न हो अपितु इन जनांदोलनों में खुल कर भाग लें जनता

‘अण्णा हजारे व बाबा रामदेव के नेतृत्व मे अलग अलग ढ़ग से ंचल रहे भ् रष्टाचार के खिलाफ देश व्यापी जनांदोलन को निरंकुश व अलोकतांत्रिक ढंग से देश की सरकार व राजनैतिक दलों द्वारा शर्मनाक उपेक्षा को अपनी जीत मान कर अहंकार में उपहास उडाने वाले देश के हुक्मरानों व उनके प्यादों को एक बात गांठ बांध लेनी चाहिए कि उनके कुशासन की लंका का हर हाल में ढहेगी और उन सभी दुशासन रूपि कंशों व रावणों को उनके जनविरोधी कुशासन का दण्ड महाकाल स्वरूप भगवान श्री कृष्ण स्वयं देंगे।’ इसके साथ देश की भ्रष्टाचारी मनमोहनी कुशासन व भ्रष्टाचार को बनाये रखने में अपना राजनैतिक धर्म ईमानदारी से नहीं निभाने वाले राजनैतिक दलो सहित पूरी व्यवस्था से त्रस्त देश की जनता को देश में चल रहे भ्रष्टाचार के खिलाफ जनांदोलनों के हस्र को देख कर निराश नहीं होना चाहिए। क्योंकि दुनिया की अदालतें भले ही इन गुनाहगारों को कटघरे में खड़ा करने में असहाय रहे परन्तु महाकाल किसी भी …
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प्रकट भये हरि,  कृष्ण स्वरूपा

प्रकट भये हरि,  कृष्ण स्वरूपा
सकल सृष्टि के भाग्य ही जागे 
कृष्ण कृष्ण हरि जप ले मन मेरे 
अन्याय, असत से जंग कर प्यारे
दया, सत्य को मन में कर धारण
यही कृष्ण भक्ति का मर्म है प्यारे
श्रीकृष्ण कृष्ण हैं हर कण-कण में
तभी मिलेगें यहां मेरे श्रीकृष्ण कृपालु
जब जड़ चेतन को कृष्णमय देखोगे
तभी मिलेगी परम शांति की श्रीगंगा
-देवसिंह रावत
 ( बृहस्पतिवार 9 अगस्त 2012 रात्रि के 11.00 बजे)

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-राजधानी गैरसेंण बनाने के लिए 8 अगस्त को शहादत देने वाले महान शहीद बाबा मोहन उत्तराखण्डी की पावन शहादत को शतः शतः नमन्

-गैरसैंण राजधानी न बनाने वाले हुक्मरानों को धिक्कार रही और जनता से निर्णायक संघर्ष के लिए आवाहन कर रही है बाबा की शहादत


बाबा मोहन उत्तराखण्डी की 8 अगस्त 2004 को शहादत आज भी प्रदेश के तमाम हुक्मरानों व राजनेताओं को धिक्कार रही है। वहीं प्रदेश के लोगों को अपने सम्मान व विकास के प्रतीक गैरसेंण राजधानी बनाने के लिए निर्णायक संघर्ष करने के लिए आवाहन कर रही है। आज भी मेरी आंखों में उनकी अंतिम यात्रा में उमडे उत्तराखण्डियों का जनशैलाव का दृश्य बार-बार मुझे उद्देल्लित कर रहा है। भले ही उनकी शहादत के बाद आज 2012 तक भी प्रदेश के हुक्मरानों को गैरसेंण राजधानी बनाने की सुध नहीं है परन्तु उनकी शहादत से हजारों नोजवानों ने 
प्रदेश की राजधानी गैरसेंण बनाने का संकल्प ले लिया है। उनकी शहादत को नमन् करते हुए प्रदेश के आंदोलनकारियों ने शपथ लिया कि हर हाल में प्रदेश की राजधानी गैरसेंण बनाने के लिए अंतिम सांस तक समर्पित रहेंगे। 
2 अक्टूबर 94 को राव मुलायम की अलोकतांत्रिक सरकारों की सह पर जिस प…
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पलायन नहीं, भ्रष्टाचार के खिलाफ नये सिरे से जनांदोलन का नेतृत्व करे अण्णा 

सरकार नहीं जनता करेगी पथभ्रष्ट हो चूकी देश की राजनीति की सफाई

नया राजनैतिक दल बना कर नहीं अपितु राजनीति की दिशा बदलने से होगा देश में भ्रष्टाचार का खात्मा  

देश की तमाम राजनैतिक दलों की तमाम सरकारों के कुशासन से व्याप्त भ्रष्टाचार, मंहगाई, आतंकवाद से गत डेढ़ दशक से व्यथित देश की जनता को गांधी व जय प्रकाश नारायण के बाद तारनहार बन कर उभरे महान समाजसेवी अण्णा हजारे ने जैसे ही  6 अगस्त को  देश में भ्रष्टाचार के खिलाफ जनलोकपाल कानून बनाने के लिए गत डेढ़ वर्ष से हुए देश व्यापी जनांदोलन का नेतृत्व करने वाली टीम अण्णा को भंग करने का ऐलान करके देश की जनता को गहरा सदमा पंहुचाया। देश को भ्रष्टाचार की गर्त में धकेल रहे तमाम राजनैतिक दलों में अण्णा की इस घोषणा से चारों तरफ खुशी का जश्न झलक रहा है।
देश में भले ही भ्रष्टाचार के प्रतीक विदेशों में जमा काला धन वापस लाने के नाम पर बाबा रामदेव भी आंदोलन कर रहे हैं परन्तु जो विश्वास देश की जनता को अण्णा हजारे के नेतृत्व वाले आंदोलन में रहा वह न तो बाबा रामदेव के आंदोलन में है व नहीं…