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Thursday, July 28, 2011

कानून बनाने से ही नहीं अपितु जनता से जागने से होगा भ्रष्टाचार दूर

कानून बनाने से ही नहीं अपितु जनता से जागने से होगा भ्रष्टाचार दूर
चोर तिजोरी का रखवाला बन जाय और उसके हाथों में बंदुक भी दे दी जाय तो उसकी बंदुक की गोली किसी चोर पर नहीं अपितु उसकी चोरी को पकड़ने वाले व प्रश्न उठाने वाले ईमानदारी आदमी पर ही चलेगी। इसलिए चाहे जन लोकपाल बने या ठोकपाल तब तक देश का भला नहीं होने वाला, जब तक यहां की आम जनता जाग कर देश में अपने दायित्वों व अधिकारों का निर्वहन न करे। ऐसा न होने पर चाहे कितने भी लोकपाल आदि कानून बना लो, ये कानून इन जनविरोधी हुक्मरानों के चरणों में वर्तमान में कानूनों की तरह दम तोडते रहेंगे।www.rawatdevsingh.blogspot.com

Wednesday, July 27, 2011

गुनाहगार पाक नहीं अपितु देश के नपुंसक भारतीय हुक्मरान हैं

कारगिल, संसद व मुम्बई हमलों के असली गुनाहगार पाक नहीं अपितु देश के नपुंसक भारतीय हुक्मरान हैं जो अमेरिका और उसके प्यादे पाक के भारत को तबाह करने वाले नापाक आतंकी मंसूबों का मुंहतोड़ जवाब देने के बजाय इनसे दोस्ती की याचना करके देश की एकता, अखण्डा व स्वाभिमान को रौंद रहे हैं। www.rawatdevsingh.blogspot.com

Saturday, July 23, 2011

मानवीय समाज पर कलंक

बच्चों को विद्यालयी शिक्षा में यह भी पढ़ाया जाना चाहिए कि जाति, धर्म, लिंग, क्षेत्र, रंग व भाषा के नाम पर किसी का शोषण करने वाले, ध्रुमपान करने वाले, शराब पीने वाले व बनाने वाले तथा निरपराध पशुओं की हत्या करने वाले राक्षस व मानवीय समाज पर कलंक होते हैं।
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Friday, July 22, 2011

राहुल को प्रधानमंत्री बनने के मार्ग में सबसे बडे अवरोधक बने कांग्रेसी मठाधीश

राहुल को प्रधानमंत्री बनने के मार्ग में सबसे बडे अवरोधक बने कांग्रेसी मठाधीश
नई दिल्ली( प्याउ)।मनमोहन सिंह को अविलम्ब न हटाने वाले व राहुल गांधी को तुरंत प्रधानमंत्री न बनाने की सलाह देने वाले इस देश व कांग्रेस के सबसे बड़े गुनाहगार साबित होंगे। मनमोहनसिंह के कुशासन के कारण पूरा देश बेलगाम मंहगाई, देश की पूरी व्यवस्था को ग्रसने वाला भ्रष्टाचार व अमेरिका पाक पोषित आतंकवाद से बर्बादी के कगार पर खड़ा है। आम जनता का जीना ही दुश्वार हो रखा है। एक पल के लिए भी मनमोहन को बनाये रखना देश व कांग्रेस दोनों के लिए सबसे बड़ी हिमालयी भूल होगी। मनमोहनसिंह के कुशासन से अराजकता की मुहाने पर खडे भारत देश लोकशाही की रक्षा के लिए अविलम्ब कांग्रेस की कार्यकारी आलाकमान राहुल गांधी को प्रधानमंत्री की कमान सौंप देनी चाहिए थी। परन्तु कांग्रेस के निहित स्वार्थी मठाधीश जो नहीं चाहते हैं कि राहुल गांधी तुरंत प्रधानमंत्री बन कर मनमोहन सिंह की आड़ में चल रही उनकी मठाधीशी पर ग्रहण लगे, वे अपने निहित स्वार्थ की पूर्ति के लिए सोनिया गांधी को गुमराह कर रहे हैं कि मनमोहन सिंह को अभी हटाना व राहुल गांधी को प्रधानमंत्री के पद पर आसीन करना उचित नहीं होगा। वे सोनिया गांधी को गुमराह कर रहे हैं कि आगामी 2014 में देश में होने वाले लोकसभा के आम चुनाव में कांग्रेस भारी मतों से अपने दम पर सत्तासीन होगी व राहुल गांधी को तब प्रधानमंत्री बनाया जायेगा। जबकि जमीनी हकीकत यह है कि मनमोहन सिंह के कुशासन ने कांग्रेस को आम जनता से पूरी तरह से काट दिया है। आज कांग्रेस के पास जहां बिहार, उप्र तो पूरी तरह से छिटके हुए हैं परन्तु आंध्र, महाराष्ट्र, तमिलनाडू , उत्तराखण्ड, राजस्थान, आदि जिन राज्यों में कांग्रेस सत्तासीन हुई उन राज्यों में कांग्रेस का पूरी तरह से सफाया होने की संभावना है। इस तरह न तो कांग्रेस व नहीं सप्रंग गठबंधन के दलों की जीत की संभावनायें दूर दूर तक दिखाई दे रही हैं। भाजपा भी सत्तारूढ़ नहीं होगी, प्रधानमंत्री तीसरे मोर्चे का ही बनेगा। ऐसी स्थिति को रोकने के लिए व दूरगामी रणनीति के तहत अविलम्ब राहुल गांधी को प्रधानमंत्री के पद पर आसीन करके जनहित के कार्यों पर ताडबतोड़ कार्य करना चाहिए। तभी पतन के गर्त में डूब रही कांग्रेस व देश को उबारा जा सकता हैं। देश में मजबूत जननेता लोकशाही का प्रमुख हो न की थोपशाही का मोहरा। देश का हित इसी बात में है कि मनमोहन सिंह जैसे गैर लोकतंात्रिक व्यक्ति से देश को मुक्ति मिले। सोनिया गांधी के चंद आत्मघाति सलाहकार जो उनको 2014 तक मनमोहन सिंह को ढोने व राहुल को 2014 में प्रधानमंत्री बनाने की सलाह दे रहे हैं वे नहीं चाहते हैं कि कांग्रेस में राहुल गांधी जैसे मजबूत जननेता सत्तासीन हो कर उनके निहित स्वार्थों की दुनिया पर ग्रहण लगाये। आज जहां अमेरिका भी नेहरू परिवार को सत्ता से दूर रखने का षडयंत्र कर रहा है वहीं कांग्रेसी आत्मघाति मठाधीश भी इसी दिशा में षडयंत्र में देश व राहुल का रास्ता रोक रहे है। सोनिया गांधी को एक बात समझ लेनी चाहिए कि आज देश की जनता मनमोहन सिंह जैसे जनविरोधी सरकार को एक पल के लिए सहने के लिए तैयार नहीं है। हर हाल में देश की जनता मनमोहन सिंह के कुशासन से मुक्ति चाहती है।

Thursday, July 21, 2011

आईएसआई को खलनायक ही बता कर भारत की आंखों में धूल झांकने की हास्यास्पद

सो चूहे खा कर पाक साफ बन रहा है अमेरिका/
भारत की आंखों में धूल झोंक रहा है अमेरिका/

दशकों से पाकिस्तान के कंधे में बंदुक रख कर भारत को अपनी धृर्णित, खौपनाक व मानवता को शर्मसार करने वाली नापाक आतंकी गतिविधियों से बर्बाद कर रहे अमेरिका को ही जब स्वयं निर्मित आतंक की आंच से झुलसने लगा तो वह भारत का हमदर्द बन कर पाक की खुपिया ऐजेन्सी आईएसआई को खलनायक ही बता कर भारत की आंखों में धूल झांकने की हास्यास्पद भौंड़ी हरकत करने पर उतर आया। सबसे हैरानी की बात यह है कि अमेरिका अपने आप को भारत का सबसे बड़ा हमदमर्द बता रहा है और पाकिस्तान को भारत का दुश्मन। यह सच में हकीकत को दफन करने जैसा कदम है। जिस डा गुलाम फई व जहीर अहमद को अमेरिका अब आईएस आई का ऐजेन्ट व अमेरिकी सांसदों व जनमत को कश्मीर के पक्ष व भारत के विरोध में करने का दोषी मान रहा है वह और कोई नहीं अपितु अमेरिका की छत्रछाया में कश्मीर मुद्दे पर अमेरिका का ही ऐजेन्डा संचालित कर रहा था। डा. गुलाम नबी फई भी हेडली की तरह अमेरिकी ऐजेन्ट हैं। हकीकत यह है कि आईएसआई या किसी अन्य जांच ऐजेन्सियों की ही नहीं खुद पाक की भी इतनी हिम्मत नहीं है कि वे अमेरिका में या अमेरिका के इच्छा के खिलाफ एक कदम भी उठा सके। गौरतलब है कि इसी सप्ताह अमेरिका की संधीय जांच ऐजेन्सी एफबीआई ने कश्मीरी अमेरिकन कांउसिल के कार्यकारी निर्देशक डा गुलाम नबी फई को अमेरिका के सांसदों को अवैध धन का लालच देकर व वहां पर सेमिनार करने तथा भारत विरोधी माहौल बनाने का आरोप में जेल में बद कर दिया । जिन लोगो को अमेरिकी गतिविधिया भारत के हितैषी लग रहे है। परन्तु हकीकत यह है कि भारत को आतंकी भट्टी में तबाह करने वाले पाक को इस दिशा में लगाने का काम ही नहीं अपितु उसे शर्मनाक संरक्षण भी भी अमेरिका आज तक कर रहा है। अगर अमेरिका हकीकत से विश्व से आतंक का सफाया चाहता है तो उसे विश्व जनसमुदाय से अपने गुनाहों के लिए माफी मांगते हुए अपनी ऐसी तमाम गतिविधियों पर अविलम्ब लगाम लगा देनी चाहिए। भले ही अमेरिका आईएसआई पर अंकुश लगा कर पाकिस्तान व दुनिया को एक संदेश देना चाहते हैं कि अमेरिका अब आतंकी पाक से कोई समर्थन व संरक्षण नहीं है। परन्तु हकीकत यह है कि दुनिया को यह मालुम है पाक या आतंकी कुछ नहीं अपितु सारा आतंक अमेरिका का है।

Wednesday, July 20, 2011

राजधानी गैरसैंण व मुजफरनगर काण्ड के दोषियों को दण्डित करने के लिए नया जांच आयोग बनाने के लिए तैयार हो रही है कांग्रेस

राजधानी गैरसैंण व मुजफरनगर काण्ड के दोषियों को दण्डित करने के लिए नया जांच आयोग बनाने के लिए तैयार हो रही है कांग्रेस/
उत्तराखण्ड राज्य की स्थाई राजधानी गैरसैंण बनाने व मुजफरनगर काण्ड-9 4 के अभियुक्तों को दण्डित कराने के लिए एक नया जांच आयोग गठन करने की मांग के समर्थन मे ं मैंने आज 20 जुलाई 2011 को सांय सवा सात बजे उत्तराखण्ड राज्य गठन के शीर्ष नायक व वरिष्ठ सांसद सतपाल महाराज से उनके दिल्ली स्थित संसदीय निवास पर विशेष वार्ता की। सतपाल महाराज ने गैरसैंण राजधानी बनाने की मुहिम का समर्थन करते हुए कहा कि वे कांग्रेस के अधिवेशन में गैरसैंण में विधानसभा का अविलम्ब विशेष अधिवेशन का प्रस्ताव रखा था जिसे अधिवेशन में ध्वनिमत से समर्थन किया गया।
वहीं जब मैने सतपाल महाराज से मुजफरगनर काण्ड के अभियुक्तों को दण्डित करने के लिए गुजरात दंगों व 1984 के सिख दंगों के दोषियों को सजा दिलाने के तर्ज पर नये सिरे से नया जांच आयोग गठित करने की जरूरत पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जिस मुजफरनगर काण्ड को इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने नाजी अत्याचारों के समकक्ष रखते हुए उसके लिए तत्कालीन केन्द्र की राव व उप्र की मुलायम सिंह दोनों सरकारों को दोषी ठहराते हुए सीबीआई द्वारा दोषी ठहराये गये तत्कालीन जिलाधिकारी अनन्त कुमार सिंह,, पुलिस अधिकारी बुआसिंह व नसीम सहित अन्य पुलिस प्रशासन के अधिकारियों को कड़ी सजा देने का निर्णय लिया था, उस मुजफरनगर काण्ड के एक भी अभियुक्त को इस काण्ड के 17साल बाद भी सजा देने में भारत की पूरी व्यवस्था असफल रही। सबसे शर्मनाक बात यह रही कि शहीदों की शहादत पर गठित उत्तराखण्ड राज्य की सरकार ने इन दोषियों को सजा दिलाने में ईमानदारी से पहल करने की बजाय दोषियों को शर्मनाक संरक्षण व बचने की राह दी।
मुजफरनगर काण्ड के दोषियों को सजा दिलाने के लिए नये जांच आयोग के गठन की मांग के सुझाव पर तत्काल सहमति देते हुए पूर्व केन्द्रीय मंत्री व सांसद सतपाल महाराज ने इस मांग को कांग्रेस के चुनाव घोषणा पत्र में सम्मलित करने व कांग्रेस के सत्ता में आते ही नये जांच आयोग के गठन कर दोषियों को सजा देने का आश्वासन दिया।
इस अवसर पर सतपाल महाराज के साथ उत्तराखण्ड सरकार के पूर्व मंत्री मंत्री प्रसाद नैथानी, कांग्रेसी नेत्री जया शुक्ला, पत्रकार गिरीश बलुनी व समाजसेवी श्याम सिंह रावत भी उपस्थित थे।
गौरतलब है कि मुजफरनगर काण्ड के दोषियों को सजा देने की मांग को लेकर हर साल 2 अक्टूबर को उत्तराखण्ड राज्य गठन आंदोलनकारी संगठन संसद की चैखट पर काला दिवस मनाते हुए राष्ट्रपति को ज्ञापन देते है। इसी पखवाडे केन्द्रीय कृषि व संसदीय कार्य राज्य मंत्री हरीश रावत के निवास पर आयोजित पत्रकारो सम्मान में आयोजित भोज में भी दोनों मांगों की तरफ कांग्रेस के केन्द्रीय महासचिव व प्रभारी चैधरी वीरेन्द्र सिंह के सम्मुख व श्री रावत के आवास पर ही आंदोलनकारियों के सम्मान में आयोजित भोज में मैने प्रमुखता से दोनों मांगों पर अपने विचार प्रकट किये थे। आशा है कि कांग्रेस 2012 के विधानसभा चुनाव में इस मांगों को मान कर इसे साकार करके जनांकांक्षाओं को पूरी करने का काम करेगी।

Tuesday, July 19, 2011

गद्दारों के काले कारनामों का इतिहास देश के विद्यालयों में पढ़ाया जाना चाहिए

विदेशी हुक्मरानों के प्यादों, देशद्रोही ,गद्दारों व शहीदों के खिलाफ सरकारी गवाह बनकर शहीदों को सजा दिलाने वाले गद्दारों के काले कारनामों का इतिहास देश के विद्यालयों में पढ़ाया जाना चाहिए ताकि देश का कोई सत्तालोलुप व सिरफिरा हुक्मरान ऐसे गद्दारों को सम्मानित करने की धृष्ठता करके देश के माथे पर कलंक लगाने का दुशा हस न कर सके। -देवसिंह रावत
(अमर शहीद भगत सिंह के खिलाफ गवाही देने वा ले अंग्रेजों के टटृ बन कर गवाह बने सर शोभासिंह क ो सम्मानित करने की सरकार की मंशा पर टिप्पणी करते हुए )

अमेरिकीपरस्त हुक्मरानों ने बनाया भारत को आतंकियों की ऐशगाह


अमेरिकीपरस्त हुक्मरानों ने बनाया भारत को आतंकियों की ऐशगाह/
-मुम्बई बम धमाकों के लिए मनमोहनसिंह इस्तीफा दें/


-इसी पखवाडे मुम्बई में हुए आतंकी हमले ने एक बार देश की जनता को सोचने के लिए विवश कर दिया कि क्यों आतंकी बार बार भारत में आतंकी हमला करने में सफल हो रहे हैं और अमेरिका में एक बार हमला करने के बाद क्यों तमाम नापाक कोशिश करने के बाबजूद व तमाम गीदड सी धमकियों देने के बाबजूद आतंकी अमेरिका पर हमला करने में सफल नहीं हो पा रहे है। क्यों इसी प्रकार की तमाम कोशिशों के बाबजूद
इस्राइल ही नहीं चीन में भी आतंक फेलाने में तथाकथित जैहादी आतंकी सफल नहीं हुए। क्यों रूस में ये आतंकी मुंह की खा रहे है। परन्तु भारत में आतंक दिन प्रतिदिन ऐसा विकराल रूप ग्रहण कर रहा है। दिन प्रतिदिन आतंक का शिकंजा अपने आगोश में और मजबूती से जकड़ रहा है।
सबसे हैरानी की बात तो यह है कि भारतीय हुक्मरान व राजनेता ही नहीं प्रबुद्व लोग भी इस मुद्दे पर जिस संकीर्ण नजरियें से सोच रहे हैं और इस सबसे खतरनाक समस्या को निहित स्वार्थों में उलझ कर उपेक्षा कर रहे हैं यह देश की एकता व अखण्डता के लिए हर पल और अधिक खतरनाक साबित हो रहा है। देश के हुक्मरान यहां चाहे किसी भी दल के हों उनको यह नहीं दिख रहा है कि जब अमेरिका की चार भवनों पर आतंकी हमला हुआ था तो पूरा अमेरिका एकजूट हो कर आतंक को मुहतोड़ जवाब देने के लिए सरकार के साथ खड़ा था। अमेरिकी सरकार ने सात समुद्र पार कर हजारों किमी दूर अफगानिस्तान की तालिबानी सरकार को न केवल उखाड़ फेंका अपितु आतंक का पर्याय बने ओसमा बिन लादेन को मार गिरा कर अमेरिका की तरफ आंख उठाने के दुसाहस करने के लिए दण्डित किया। अमेरिका की मजबूत व मुंहतोड़ कार्यवाही की दहशत से व कड़े सुरक्षा कदमों से आत्मघाति आतंकी दस्तों वाले आतंकी संगठन अलकायदा, तालिबान सहित कुकरमुत्तों की तरह पूरे विश्व में आंतक के झण्डाबरदारों को अपने बिलों में ही छुपे रहने के लिए विवश कर दिया। परन्तु दूसरी तरफ नपुंसक भारतीय हुकमरान चाहे राष्ट्रवादी होने का दंभ भरने वाली भाजपा के अटल बिहारी-आडवाणी के नेतृत्व वाली राजग सरकार रही हो या सोनिया -मनमोहनसिंह के नेतृत्व वाली वर्तमान सप्रंग सरकार हो। जिस प्रकार से इस दौरान भारत की सर्वोच्च संस्थान संसद पर आतंकी हमले हुए, जिस प्रकार से कारगिल पर हमला किया गया, जिस प्रकार से देश की राजधानी दिल्ली व आर्थिक राजधानी मुम्बई में आतंकी हमला किया गया, देश के सैकड़ों बुगुनाह आम लोगों को कत्ल किया गया। उसके बाबजूद क्या मजाल है भारत इन दोनो सरकारानें ने अमेरिका की भांति इन आतंकियों के कमांडर पाकिस्तान को अमेरिका की तरह देश की एकता व अखण्डता की रक्षा के लिए मुंहतोड़ जवाब देने का साहस तक नहीं जुटा पाये। जब भारतीय हुक्मरान अगर भारत को तबाह करने वाले आतंकियों के कमाण्डर पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब देने की हिम्मत नहीं जुटा पाया तो वह कहां इस आतंक का प्रेरणा सुत्र, संरक्षव व माई बाप अमेरिका से इस विषय पर सीधी बातचीत तक करने की हिम्मत रखते। उल्टे राजग व यूपीए दोनों सरकारें भारत को आतंकी हमलों से तबाह करने वाले आतंकियों के कमाण्डर पाक व संरक्षक अमेरिका से नपुंसकों की तरह दोस्ती का आत्मघाति शर्मनाक याचना करके आतंकियों को भारत पर और आतंकी हमले करने के लिए प्रत्यक्ष रूप से प्रोत्साहित करते रहे। यह ी नहीं भारत के हुक्मरानों की इतनी शर्मनाक व आत्मघाति संकीर्ण मनोदशा हो गयी है कि वे देश की सुरक्षा के लिए तथा इस भयंकर खतरे से निपटने के लिए संयुक्त रूप से ठोस मुहतोड़ राष्ट्रीय नीति बनाने के बजाय ऐसे संवेदनशील मुद्दे पर भी संकीर्ण दलीय स्वार्थो की पूर्ति के लिए धर्म के नाम पर खिलवाड़ कर रहे है। जिस आतंकियों ने देश के सम्मान को रौंदा, संसद से लेकर आम आदमियों को इन्होंने अपने नापाक मंसूबों का शिकार बनाया, देश के इन अपराधियों को दण्डित करने में अब इन हुक्मरानों के हाथ कांप रहे हैं।
मैं इसका एक ही कारण मानता हॅू कि इंदिरा व राजीव गांधी के बाद देश के तमाम हुक्मरानों की आत्मघाति नपुंसक व अमेरिकी परस्त नीतियां जिम्मेदार रही। जब तक दे
13 जुलाई 2011 को सांय सात बजे के करीब मुम्बई में हुए तीन स्थानों में हुए बम धमाकों के लिए भारत की नपुसंक मनमोहन सिंह की सरकार जिम्मेदार हैं। जो सरकारें संसद पर हमले के दोषी सहित देश को तबाह करने वाले आतंकियों को सजा देने के बजाय शर्मनाक संरक्षण दे रही है तथा देश हित शांतिपूर्ण आंदोलन करने वालों को लाठी व बंदुक के बल पर दमन कर रोंद रही है। मनमोहन सरकार अपनी पूर्ववती अटल की सरकार की तरह भारत को तबाह करने वाले अमेरिका व पाक द्वारा संयुक्त रूप से भारत को तबाह करने के लिए दशकों से आतंकी कार्यवाही जारी रखे हुए है व भारत की सरकारें आतंक को जड़ से तबाह करने के बजाय, ( आतंक के माई बाप अमेरिका व पाक से दो टूक बात करने के बजाय) नपुंसकों की तरह दोस्ती की शर्मनाक याचना कर रही है। अगर भारत सरकार आतंकियों को अमेरिका की तरह मुंहतोड़ जबाब देती तो आतंकी दूबारा भारत की तरफ आंख उठा कर देखने का साहस तक नहीं जुटा पाते। परन्तु भारतीय हुक्मरानों को अपनी तुच्छ सत्तालोलुपता के कारण देश हितों से खिलवाड़ करने वाले आतंकियों को भी वोट का मोहरा मसझ कर उनका संरक्षण कर रहे है। भारतीय हुक्मरान जब तक अमेरिका व पाक के सांझा भारत विरोधी आतंक का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए ठोस कदम नहीं उठायेंगे तो तब तक देश में ऐसे ही आतंकी हमले का शिकार होना पडेगा। अमेरिकी मोह में अंधे भारतीय हुक्मरानों को हेडली प्रकरण से आंखें न खुलना देश का दुर्भाग्य के साथ साथ इनके अमेरिकी हाथों की कठपुतली होने को ही साबित करता है।
मुम्बई बम धमाकों के इस प्रकरण के बाद प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अमेरिकी परस्त नीतियां ही सीधे रूप से जिम्मेदार है। उनको अविलम्ब प्रधानमंत्री के पद से इस्तीफा दे देना चाहिए। अगर मनमोहन अमेरिका की तरह अपने देश के स्वाभिमान का जरा सा भी ध्यान रहता तो वह भी पाक स्थित आतंकी अड्डों को तबाह करने का काम करते। परन्तु देश के दुर्भाग्य यह है कि देश में मनमोहन सिंह व अटल जैसे नपुंसक अमेरिकी परस्त हुक्मरानों को भी ढोना पड़ रहा है।
शेष श्रीकृष्ण कृपा। हरि ओम तत्सत्। श्रीकृष्णाय् नमों।

Monday, July 18, 2011

-मनमोहन से बेहतर प्रधानमंत्री होते टाटा

-मनमोहन से बेहतर प्रधानमंत्री होते टाटा/
-टाटा का चमत्कार 32 हजार रू. में घर/
- टाटा को ही सौंपे सरकार इंदिरा आवास बनाने की योजना/



मेरे मन मैं एक विचार आया कि अगर मनमोहन सिंह की बजाय सोनिया गांधी टाटा को देश का प्रधानमंत्री बनाते तो देश का इतना शर्मनाक हालत नहीं होती। देश में इतना भ्रष्टाचार व अंधेरगर्दी नहीं होती। इतना आतंकवाद नहीं होता । कर्मचारियों में इतनी कामचोरी नहीं होती। देश में हड़ताल व असंतोष की ज्वाला नहीं देखने को मिलती। देश म ें कहीं पर मिलावट का दैत्य लोगों के जीवन से खिलवाड ़ करने का काम तो कम से कम नहीं करता।
भई मेरे मन मैं ये विचार यकायक क्रांेधा जब मैने कि टाटा ने गरीबों के लिए 32 हजार रूपये में मकान ब नाने की योजना बनायी है। हालांकि इससे पहले टाटा ने एक लाख में कार बनाने का चमत्कार कर कई गरीब लोगों की कार रखने की हसरत पूरी की। परनतु उसने मुझे इतना उत्साहित नहीं हुआ । जिस देश में आम लोगों के सर पर छत न हो, खाने के लिए दो वक्त का अन्न ना हो वहां पर कार रखने की बात सोचना भी मेरे जैसे आदमी के सोच यानी कल्पना से बाहर की बात है । पर अब मेने सुना की टाटा गरीब लोगों के लिए 32 हजार रूपये में घर बनाने का ऐलान कर चूके ह ैं तो मुझे उपरोक्त विचार यकायक मेरे मन में उमडा। पहले मेने सोचा कि क्यों न इस देशमें गरीब लोगों के लिए बनने वाले मकानों का पूरा ठेका ह ी टाटा को सौंप दिया जाय।
आपने सुना इस मंहगाई के जमाने में टाटा समूह अब 32,000 रुपये की कीमत वाला घर पेश करने की तैयारी में है। इसी को कहते हैं टाटा, विश्वसनियता व मानक का नाम टाटा। भले ही लोग एक बार भारत सरकार व अन्य कम्पनियों के माल पर तोल मोल व उसकी गुणवता पर शंका करें पर टाटा के माल को लोग आंखें बद कर खरीदते हैं व उसकी गुणवता पर भी आंख मूद कर विश्वास करते है। कुछ समय पहले लखटकिया कार ‘नैनो ’ पेश करने के बाद टाटा समूह अब 32,000 रुपये की कीमत वाला घर पेश करने की तैयारी में है। जैसे ही मेने यह सुना तो मुझे लगा कि देश में यह टाटा की गरीबों को एक बरदानी सौंगात है। जिसे आजादी के 64 साल बाद भी भारत सहित देश विदेश की सरकारें कल्पना में भी पूरा करने की सौच भी नहीं पाती है उस सपने को साकार करने का ऐतिहासिक कार्य टाटा ने कर दिखाने का ऐलान किया। टाटा समुह ने कभी अन्य उधमियों की तरह जैसे तैसे लोगों की जेब काटने का काम नहीं किया। अपितु अपनी गुणवता से पूरे विश्व में अपना स्थान बनाया।
देश में यह समूह ग्रामीण बाजार को ध्यान में रखकर सस्ते आवास की योजना बनाई है। अगले साल के अंत तक पेश किया जा सकता है। टाटा स्टील के ग्लोबल रिसर्च प्रोग्राम की आवासीय परियोजना देश के भर के 30 स्थानों पर टेस्टिंग लेवल पर है। फिलहाल कॉयर बोर्ड, जूट बोर्ड जैसी विभिन्न एजेंसियों तथा राज्य सरकारों से बातचीत कर रहे हैं।
सुत्रों के अनुसार टाटा द्वारा प्रस्तावित आवास का निर्माण पहले से तैयार सामान के आधार (प्री-फैब्रिकेटेड फॉरमेट) पर किया जाएगा जिसके तहत कंपनी छत, दरवाजा, खिड़की जैसे सामान से युक्त किट उपलब्ध कराएगी। इसके आधार पर मकान को खड़ा किया जा सकता है। इस योजना के सुत्रधार टाटा कम्पनी को विश्वास है कि अगर आपके पास जमीन है तो इस आवास को सात दिन में बना सकते हैं। 20 वर्ग मीटर के मॉडल पर आधारित सीधा छत (फ्लैट रूफ) की लागत करीब 500 यूरो (करीब 32,000 रुपए) होगी। टाटा कम्पनी इन उन्नत 30 वर्ग मीटर मॉडल पर खर्च 700 यूरो करेगी। इंदिरा आवास योजना का यही मॉडल है। कम्पनी के अनुसार इसी प्रकार, घर की छत पर सौर पैनल युक्त कई और मॉडल हो सकते हैं।जैसे की सन् 2001 की जनसंख्या के आधार पर देश में 1.48 करोड़ ग्रामीण आवास की कमी है। इस लिहाज से टाटा की योजना काफी सफल हो सकती है।
अगर वास्तव में टाटा की यह योजना धरती में साकार हो गयी तो भारत सरकार को देश में चलने वाली सरकारी गरीबों को आवास की योजना को पूरा दायित्व ही टाटा को सौंप देना चाहिए। आज इंदिरा आवास इत्यादि योजनाओं के तहत निर्माण हो रहे मकानों के लिए सरकारें चाहे 25 से 40 हजार रूपये या इसके आसपास सहयोग देती है परन्तु गरीब आदमी इस मंहगाई में इतनी लागत में इस मकान को बनाने में असफल रहता है औ र इसी का लाभ विकासखण्ड के भ्रष्ट अधिकारी से लेकर ग्राम प्रधान इसमें अपना हिस्सा डकारने के लिए तत्पर रहता है ।
अब मुझे इस विचार ने पूरी तरह से बैचेन ही कर दिया। आप कहेंगे रावत जी आप लोकशाही का अपमान कर रहे है कि पूंजीपति को ला ेकशाह ी की बागडोर सोंपने की बात करके। हां सच में सोच अवश्य ऐसी ही लगती। पर आप ही बताये अपने वर्तमान प्रधानमंत्र ी मनमोहन सिंह जी कौन से जनता ने प्रधानमंत्री के रूप में चुना। उनको तो कांग्रेस की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने चुना। कांग्रेस आलाकमान सोनिया गांधी ने किया। मनमोह न सिंह का कभी पूरे देश क्या अपनी गली के लोगों के साथ शायद ही सामाजिक सम्पर्क रहा हा े। कांग्रेस का कोई अदना कार्यकत्र्ता क्या बड़े नेता भी उनके पास न तो किसी समस्या के समाधान के लिए जाना चाहता। केवल ओपचारिकतावश ही लोग मनमोहन सिंह से मिलते होंगे। शायद ही उनके मित्र रिश्तेदारों से भी मनमोहन सिंह का सामाजिक जीवंत सम्बंध रहे होंगे। मनमोहन सिंह का आम लोगों से अधिक किताबों से रहा है। इसी कारण वे आम आदमी के दर्द को संमझने में प ूरी तरह असफल रह े। उनके शासनकाल में पूरे देश में मंह गाई, आतंकवाद व भ्रष्टाचार से कोहराम मचा हुआ है। परन्तु क्या मजाल की मनमोहन सिंह उफ तक करें। केवल लोगों की समस्या के समाधान के बजाय मनमोहन सिंह आंकड़ों की राहत रूपि मरह म लगाने का प्रयास करते तो लोगा ें को यह अपने जख्मों पर नमक छिडकने की हरकत सी लगती है। अगर मनमोहन की जगह टाटा को देश की बागडोर सा ैंप दी जाती ता े टाटा कम से कम देश में भ्रष् टाचार तो मिटाता। हाला ंकि उनको इस तंत्र को सुधारने के लिए पुराना सारा सरकारी तंत्र में लगे कर्मचारियों को या तो वीआरएस दे कर, अपने मानकों के अनरूप कर्मचारियों की भर्ती करके देश की व्यवस्था को सुधारने का ईमानदारी से पहल तो करता। ला ेगा ें को सरकारी तंत्र के बजाय टाटा के तंत्र में समय पर कार्य व गुणवता के साथ देश तेजी से विकास के पथ पर अ ग्रसर होता मिलता।
यह कल्पना है। लोकशाही के इस विकृत रूप को सुधारने की तरफ यह सही विकल्प भले ह ी न हो परन्तु इस सड़ी व्यवस्था में दम तोड ़ रहे आम आदमी की आश को नई किरण के रूप में तो ह ोती। आज देश के इस तंत्र मे ं जब आम आदमी को शिक्षा, चिकित्सा, न्या य व रोजगार से वं िचत सा हो गया है। ऐसे में जब अ मेरिका के हाथों में यह तंत्र की कमान सी आ गयी हो तो उस हालत में अगर टाटा के हा थों में कमान होती तो यह बेहतर होत ा।

-महान गायक नरेन्द्र नेगी व भाजपा नेता जनरल रावत के भ्रष्टाचार के खिलाफ कूदने से प्रदेश की राजनीति में भूचाल

उत्तराखण्ड में भ्रष्टाचारी निशंक सरकार के खिलाफ खुल जंग का ऐलान
--महान गायक नरेन्द्र नेगी व भाजपा नेता जनरल रावत के भ्रष्टाचार के खिलाफ कूदने से प्रदेश की राजनीति में भूचाल
भ्रष्टाचार के खिलाफ इस मुहिम में मीडिया की शर्मनाक चुप्पी से जनता में मीडिया भी बेनकाब

देहरादून(प्याउ)। उत्तराखण्ड में निशंक सरकार के आकंठ भ्रष्टाचारों से त्रस्त्र उत्तराखण्ड की ंजनता को उस समय सुखद आशा की किरण दिखाई दी जब 17जुलाई 2012 को देहरादून में उत्तराखण्ड को भ्रष्टाचार से बचाने के िलए ‘ प्रदेश के अग्रणी लोकगायक नरेन्द्रसिंह नेगी, भाजपा नेता जनरल टीपीएस रावत, जनकवि अतुल शर्मा,सहित अग्रणी प्रबुध जनों ने संयुक्त रूप से खुले अभियान चलाने का संकल्प लिया। प्रदेश की जनता को उस समय हैरानी हुई कि प्रदेश की राजनीति में भूचाल लाने वाली इस प्रखर खबर को प्रदेश के अधिकांश मीडिया ने पूरी तरह से नजरांदाज कर दिया । इससे साफ हो गया कि प्रदेश में मीडिया जनहितों के साथ नहीं अपितु अपने निहित स्वार्थ के साथ है। इससे लोगों की यह धारणा और मजबूत हो गयी कि यहां का मीडिया सहित पूरा तंत्र आज जनता के साथ नहीं अपितु अपने निहित स्वार्थ के लिए प्रदेश की उस भ्रष्ट सरकार के साथ है जिसके भ्रष्टाचार से प्रदेश की जनता त्रस्त है।
उल्लेखनीय है कि 17जुलाई 2012 को देहरादून में राजन टडोरिया व चंदन सिंह राणा के नेतृत्व वाले ‘उत्तराखण्ड जनमंच ’ ने देहरादून में मधुवन के समीप रूलक ओडोटोरियम में ‘भ्रष्टाचार पर अपनी खुली मुहिम का शुभारंभ करते हुए प्रातः 11 बजे से सांय 7 बजे तक एक गहन सम्मेलन का आयोजन किया । इसको संबा े िधत करते हुए महान लोक गायक नरेन्द्रसिंह नेगी ने ‘प्रदेश की भ्रष्ट सरकार के मुखिया निशंक पर करारा प्रहार करते हुए उनको प्रदेश की भविष्य पर मठ्ठा डालने के लिए मुख्यमंत्री के पद पर आसीन करने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद खंडूडी को दोषी ठहराते हुए, निशंक को उत्तराखण्ड की जनता के लिए मुख्यमंत्री के रूप में आभूषण देने का व्यंग कसा। वहीं भाजपा के पूर्व सांसद व वरिष्ठ नेता टीपीएस रावत ने दो टूक शब्दों में कहा कि वे किसी भी सूरत में भ्रष्टाचार को सहन नहीं करेंगे चाहे उसकी कोई भी कीमत क्यों न चुकानी पडे। उत्तराखण्ड की आम जनता के जनमानस को झकझोरने वाले नरेन्द्रसिंह नेगी व पूर्व सैनिक बाहुल्य प्रदेश में साफ छवि के दिग्गज जनरल तेजपाल के एक स्वर में प्रदेश में आसीन सरकार के भ्रष्टाचार पर खुले प्रहार से प्रदेश की राजनीति मे ं एक भूचाल आ गया है। भले ही प्रदेश सरकार के प्रबंधकों ने इस समाचार को किसी भी समाचार पत्र मे ं प्रमुखता से न आने देने में अपनी सफलता मान कर चैन की नींद सौ रहे हों परन्तु प्रदेश कीं जनता को इस खबर का भान होने से प्रदेश की जनता सड़कों पर उतरने व प्रदेश से भाजपा के इस भ्रष्ट सरकार को उखाड़ फेंकने के लिए कमर कस चूकी है।
इस समारोह में नरेन्द्रसिंह नेगी ंके भ्रष्टाचार के गीतों ‘अब कत्या खोला’ व जाग जाग उत्तराखण्डियो... के कालजयी गीतों व कवि अतुल शर्मा के क्रांतिकारी गीतों की गूंज ंसे सभागार गूंजायमान हो गया। सभ् ाा में प्रोफेसर एन एस बिष्ट, प्रो. सकलानी, प्रो. प्रभात उप्रेती व प्रोफेसर आर पी नेगी सहित अनैक वरिष्ट प्रबुध जन उपस्थित थे । सभा को भाजपा के युवा नेता रघुवीर बिष्ट ने भी संबोधित किया। सभा में भाजपा के दायित्वधारी राजेन्द्र भण्डारी भी उपस्थित थे। सभा में ऐलान किया गया कि ऐसी जनसम्मेलन श्रीनगर, देहरादून सहित प्रदेश के हर बड़े शहर में करके प्रदेश की भ्रष्टाचार से रक्षा करने के लिए किया जायेगा। इस सभा के बारे में प्यारा उत्तराखण्ड से दूरभाष पर बातचीत करते हुए महान गायक नरेन्द्रसिंह नेगी ने प्रदेश की जनता व सामाजिक संगठनों से दलगत राजनीति से उपर उठ कर भ्रष्टाचार से उत्तराखण्ड की रक्षा करने के लिए आगे आने का खुला आवाहन किया।

Sunday, July 17, 2011

उत्तराखण्ड जमीन की खुली लूट की रक्षा एकजूट हों उत्तराखण्डी

उत्तराखण्ड जमीन की खुली लूट की रक्षा एकजूट हों उत्तराखण्डी/
राजधानी गैरसैंण बनाने व मुजफरनगर काण्ड के अभियुक्तों को सजा दिलाने का लिया संकल्प/ राज्य गठन जनांदोलनकारियों को केन्द्रीय मंत्री रावत ने किया सम्मानित/ नई दिल्ली( प्याउ)। उत्तराखण्ड के हितों की रक्षा के लिए यदि उत्तराखण्डी ईमानदारी से करना चाहते हैं तो उन्हें दलगत राजनीति से उपर उठ कर प्रदेश की जमीनों को बेचने पर उतारू सरकारों पर अंकुश लगाना होगा।
यह खुला आवाहन कांग्रेस के केन्द्रीय महासचिव व उत्तराखण्ड प्रभारी चैधरी बीरेन्द्रसिंह ने किया। वहीं आंदोलनकारियों ने गैरसैंण राजधानी बनाने व मुजफरनगर काण्ड के दोषियों को हर हाल में सजा दिलाने का संकल्प लिया। श्री सिंह ने दलगत राजनीति को दरकिनारे छोड़ते हुए दो टूक शब्दों में कहा कि अगर प्रदेश के लोगों ने अपने जमीनों को बचाने के लिए एकजूटता नहीं दिखायी तो एक दिन उत्तराखण्ड के भविष्य पर पूरी तरह ग्रहण लग जायेगा।’ कांग्रेसी महासचिव ने कहा कि आज जरूरत है प्रदेश गठन के बाद जो प्रदेश की जमीनों को बड़ी संख्या में गैर उत्तराखण्डियों को खराद की तरह बांटी गयी उस पर एक श्वेत पत्र जारी करने की। उन्होंने कहा कि प्रदेश में 60 प्रतिशत भू भाग पर जंगल है इसका यहां के विकास में सदप्रयोग करना चाहिए। उन्होंने यहां के जल संसाधनों को मिनरल बाटर व छोटे हाइथ्रो प्रोजेक्ट आदि लगाने प्रदेश के लोगों को भी प्रदेश में औद्योगिक विकास में मिलने वाले सरकारी सहयोग की तरह समर्थन व संरक्षण मिले तो यहां की तकदीर ही बदल सकती है। उन्होने साफ शब्दों में कहा कि प्रदेश के लोगों को दलगत राजनीति से उपर उठ कर ऐसे दल को मतदान करना चाहिए जो वहां की जनभावनाओं व हितों की रक्षा करने के लिए समर्पित हो। उन्होने आश्वासन दिया कि उनके प्रभार में कांग्रेस उत्तराखण्डियों की जनभावनाओं को साकार करने का काम करेगी। इसके साथ ही चैधरी बीरेन्द्रसिंह ने उत्तराखण्ड के नेता भी अपने छुद्र अहं की राजनीति को छोड़ कर प्रदेश के हित में काम करेंगे।
चैधरी बीरेन्द्रसिंह 17 जुलाई की सांय को केन्द्रीय मंत्री हरीश रावत के नई दिल्ली स्थित आवास पर उत्तराखण्ड राज्य गठन आंदोलनकारियों व पत्रकारों की एक विशेष बैठक को संबोधित करते हुए कही। इस बैठक का आयोजन केन्द्रीय मंत्री हरीश रावत ने दिल्ली में राज्य गठन के आंदोलनकारियों के सम्मान मे दिल्ली आयोजित एक का उत्तराखण्ड राज्य गठन जनांदोलन के प्रखर संगठनों को (जिन्होंने देश की राजधानी दिल्ली सहित पूरे उत्तराखण्डी समाज को अपने समर्पित ऐतिहासिक संघर्षो व प्रखर तेवरों से उत्तराखण्ड राज्य गठन के आंदोलन को देश के राज्य गठन के इतिहास में देश की राजधानी को सबसे लम्बे समय से झकझोरने का कीर्तिमान स्थापित करके तत्कालीन सरकार को पृथक उत्तराखण्ड राज्य गठन के लिए मजबूर किया।) केन्द्रीय कृषि व संसदीय कार्य राज्य मंत्री हरीश रावत अपने दिल्ली निवास पर रविवार 17 जुलाई 2011 को सम्मानित किया। सांय साढे तीन बजे अपने निवास 9 तीनमूर्ति लेन स्थित निवास पर रखे भोज में आमंत्रित संगठनों में उत्तराखण्ड राज्य गठन के लिए संसद की चैखट पर 6 साल तक संसद की चैखट जंतर मंतर पर निरंतर सफल धरना प्रदर्शन करने वाला उत्तराखण्ड जनता संघर्ष मोर्चा, उत्तराखण्ड महासभा, उत्तराखण्ड जनमोर्चा व उत्तराखण्ड राज्य लोक मंच आदि प्रमुख है। इस अवसर पर राज्य आंदोलन के लिए सर्मिर्पत कवियों की नव प्रकाशित पुस्तकों का भी विमोचन किया । कार्यक्रम का संचालन आयोजक समिति के प्रमुख हरिपाल रावत ने किया। कार्यक्रम में प्रथम वक्ता के रूप में अपने संबोधन में उत्तराखण्ड की अलख जगाने वाले व संसद की चैखट पर छह साल तक ऐतिहासिक धरना देने वाले उत्तराखण्ड जनता संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष देवसिंह रावत ने साफ शब्द ों में कहा कि उत्तराखण्ड राज्य का गठन राज्य की बहादूर जनता के संघर्षो ंसे गठित हुआ न की किसी राजनैतिक दल की बैशाखियों की बदालत मिला। उन्होंने कहा राज्य गठन का आंदोलन राज्यगठन आंदोलन में केन्द्रीय मंत्री हरीश रावत का हमने पुरजोर विरोध किया। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि प्रदेश की राजधानी गैरसैंण बनाने व मुजफरनगर काण्ड-94 के दोषियों को दण्डित कराने के साथ साथ प्रदेश में व्याप्त भ्रष्टाचार को समाप्त करके ही आंदोलनकारी दम लेंगे। इसके लिए राजनैतिक दल चाहे इसका विरोध करें या समर्थन आंदोलनकारी इसको हाशिल करके रहेंगे। उन्होंने कहा कि राज्य गठन के बाद उत्तराखण्ड सरकार ने जो काम करना चाहिए था वह काम केन्द्रीय मंत्री द्वारा किये जाने पर आंदोलनकारियों में यह आशा जागी है कि चलो अगर आगामी 2012 में प्रदेश में कांग्रेस की फिर सरकार सत्तासीन होगी तो कांग्रेसी अपनी पूर्व की प्रदेश सरकार की तरह इस बार भी राज्य गठन आंदोलनकारियों के सपनों को साकार करने के दायित्व का निर्वहन करेगी।
इस सम्मान भोज में राज्य गठन जनांदोलन के प्रमुख आंदोलनकारी प्रमुखों में सर्वोच्च न्यायालय के विख्यात अधिवक्ता व उत्तराखण्ड जनता संघर्ष मोर्चा के संयोजक अवतार रावत व अध्यक्ष देवसिंह रावत, जनमोर्चा के अध्यक्ष जगदीश नेगी व रवीन्द्र बिष्ट, महासभा के अध्यक्ष हरिपाल रावत व उत्तराखण्ड राज्य लोकमंच के अध्यक्ष बृजमोहन उप्रेती ंमंचासीन थे। इसके अलावा मंचासीन होने वालों में उत्तराखण्ड मानवाधिकार संगठन के एस के शर्मा, संयुकत संघर्ष समिति की उमा जोशी, पी एफ कमीशनर बी एन शर्मा व पत्रकार अरविन्दसिंह व अवतार नेगी मंचासीन थे। इस अवसर पर देश के अग्रणी पत्रकार अरविन्द सिंह को राज्य गठन जनांदोलन में अमर उजाला में रहते हुए आंदोलन को मजबूती देने के लिए विशेष रूप में कांग्रेस महासचिव व केन्द्रीय मंत्री ने संयुक्त रूप से सम्मानित किया। इस अवसर पर सम्मानित होने वाले आंदोलनकारियों में जनता संघर्ष मोर्चा के संयोजक अवतार रावत, पूर्व अध्यक्ष व्योमेन्द्र नयाल व खुशहाल सिंह बिष्ट, महासचिव जगदीश भट्ट, विनोद नेगी, दिनेश बिष्ट,रामप्रसाद भदूला, श्री राम रतूड़़ी, देशबंधु बिष्ट, देवेन्द्र चमोली, कुलदीप कुकरेती, राजेन्द्र रतूडी, एल डी पाण्डे, केशर सिंह पटवाल व श्री गुसांई आदि प्रमुख थे। उत्तराखण्ड महासभा के हरिपाल रावत,हर्षपति मंमगाई, रामेश्वर गोस्वामी, अनिल पंत, वेद भदोला,सुशीला चैहान, खेमराज कोठारी, प्रेमसिंह चैहान, श्री काण्डपाल, चिरागुद्दीन, दिनेश कुकरेती, आदि प्रमुख थे। सुश्री जनमोर्चा के अध्यक्ष जगदीश नेगी, रवीन्द्र बिष्ट, नरेन्द्र बिष्ट, डा बसलियाल, हर्ष बर्धन खण्डूडी, रामभरोसे ढौडियाल, के बी जोशी, हुकमसिंह कण्डारी, बीना बिष्ट, रामी भारद्वाज, रिखी रावत,सिन्दुरी बडोला, सावित्री चैनियाल, बिमला नेगी, आरती चैहान, कमला रावत, फागुनी रावत, बिमला शर्मा, शकुन्तला रावत, रामेश्वरी रावत, सत्या रावत, सीता पटवाल, जयबीर रावत, उषा नेगी, पुरूषोत्तम चैनियाल, पोखरियाल, अर्जुन रावत, डब्बलसिंह, सच्चिदानन्द नौटियाल, आदि प्रमुख थे। उत्तराखण्ड राज्य लोकमंच के अध्यक्ष बृजमोहन उप्रेती, महासचिव दिनेश ध्यानी, पंचम रावत, बीरेन्द्र नेगी, राणा, आर पी चमोली, श्री रावत आदि प्रमुख थे। संयुक्त संघर्ष समिति की उमा जोशी, कमला रावत, प्रताप सिंह राणा, महावीर राणा , भण्डारी व धर्मपाल कुंमई, एम एस रावत, सुश्री मोहनी रौतेला, नन्दन रावत, किशोर रावत, संयोगिता ध्यानी, बाली मनराल, शंकर रावत, के पंत , नन्दन घुघत्याल, पुष्पा घुघत्याल, बीना बहुगुणा बछेती, बीना आर्य, प्रेम कुमाउनी, प्रेमसिंह, हरीश आर्य आदि प्रमुख रूप से सम्मानित हुए। इस अवसर पर कांग्रेसी नेता के एम पाण्डे ने प्रदेश की राजनीति में हरीश रावत को मुख्यमंत्री न बनाये जाने पर अप्रसन्नता प्रकट करते हुए तभी सम्मान लेने की बात कही जब तक हरीश रावत को प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाया जायेगा। इस अवसर पर उत्तराखण्डियों के लिए उत्तराखण्ड राज्य गठन जनांदोलन में शहीद स्थलों की शहीदंों की खून से सनी हुई मिट्टी को गत 16 साल से अपने पास रखने वाले प्रख्यात कवि भगवती प्रसाद मिश्र ने सदा प्रेरणा देने के लिए बनाये जाने वाले शहीद स्थल में रखने के लिए उत्तराखण्ड के शीर्ष नेता हरीश रावत व कांग्रेस प्रभारी चैधरी बीरेन्द्रसिंह को भैंट की। इस अवसर पर डा. भगवती प्रसाद मिश्र की ‘गपोडनि-शंक’ व पृथ्वीसिंह केदारखण्डी की ’मुखड़ी बुरांश त्येरी’ पुस्तकों का दोनों नेताओं ने विमोचन किया। इस अवसर पर उत्तराखण्ड राज्य गठन जनांदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले पत्रकारों को सम्मानित किया गया। इसमें हिन्दुस्तान बिजेन्द्र रावत, जनसत्ता के हरीश तिवारी, सहारा के रोशन, अमर उजाला के हरीश लखेड़ा, खुशहाल जीना व श्रीमती जीना, डा बिहारी लाल जलंधरी, अनिल पंत, वेद भदोला प्रमुख थे। इस अवसर पर राज्य आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले तत्कालीन दैनिक जागरण के पत्रकार ज्ञानेन्द्रसिंह को भी विशेष रूप से सम्मानित किया गया, उनकी तरफ से पुरस्कार उनके भतीजे व एनडीटीबी के पत्रकार कुंवर विक्रांत सिंह ने ग्रहण किया। इस अवसर पर सहारा समय के मंजीत नेगी को भी सम्मानित किया गया। इस अवसर पर जहां अवतार रावत ने राज्य गठन के बाद प्रदेश में हो रही बंदरबांट पर अपना आक्रोश प्रकट किया, वहीं जगदीश नेगी, बिना बिष्ट, मोहनी रोतेला व एस के शर्मा ने राजधानी गेरसैंण व मुजफरनगर काण्ड के दोषियों को सजा देने की बात कही। इस अवसर पर बृजमोहन उप्रेती ने कांग्रेस महामंत्री से दिल्ली में रहने वाले उत्तराखण्डियों को दिल्ली की राजनीति में सम्मानजनक प्रतिनिधित्व देने की पुरजोर मांग की। समारोह के सम्पन्न के साथ केन्द्रीय मंत्री हरीश रावत ने सम्मान भोज में सभी का स्वागत किया। समारोह के समापन के समय उक्रांद नेता प्रताप शाही, मोहनसिंह नेगी, प्रेम सुन्दरियाल, अखिल भारतीय उत्तराखण्ड महासभा के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष जयसिंह रावत, पत्रकार गिरीश बलूनी, सतेन्द्र रावत सहित बड़ी संख्या में भारी संख्या में समाजसेवी उपस्थित ंहुए।

Friday, July 15, 2011

गुरू पूर्णिमा को शंकराचार्य माधवाश्रम जी महाराज का भव्य वंदन

गुरू पूर्णिमा को शंकराचार्य माधवाश्रम जी महाराज का भव्य वंदन


आदिशंकराचार्य जी महाराज के पथ पर चल कर्र गोरक्षा व सनातन मर्यादाआ ें के लिए मठों की चार दिवारी से निकल कर ताउम्र सड़क पर उतर कर भी संघर्ष करने वाले देश के एकमात्र शंकराचार्य माधवाश्रम जी महाराज का हजारों भक्तों ने शुक्रवार 15 जुलाई 2011 गुरू पूर्णिमा के पावन पर्व पर 7 शंकराचार्य मार्ग सिविल लाइन दिल्ली में भव्य अभिनन्दन व पूजन किया । भारी वर्षा के बाबजूद हजारों की संख्या में सनातन धर्मावलम्बियो ंने शंकराचार्य माधवाश्रम जी महाराज का गुरू पूर्णिमा के अवसर पर भव्य प ूजन वंदन किया। इस अवसर पर यूपी ए सरकार की चियरमेन व कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गांधी के निजी सहायक माधव के अलावा अनैक प्रबुध जनों ने भाग लिया। भाग लेने वालों में सैकड़ों की संख्या में साधु संतों व भक्तों ने भाग लिया। इस अवसर पर शंकराचार्य के परम भक्त प्रेमचंद गुप्ता व उनके सुपुत्र पराग गुप्ता जो मानसी मोटर्स प्रामा ेटर्स प्रा.लिमिटेड़ ने शंकराचार्य के भक्तों के लिए विश ेष भ ण्डारे व गुरू पूर्णिमा पूजन की पूरी व्यवस्था की। गुरू पूर्णिमा के अवसर पर जहा ं भक्तों ने शंकराचार्य माधवाश्रम जी महाराज ने पूजन किया। वहीं भक्तों ने माधवाश्रम जी महाराज के प्रिय शिष्य स्वामी परमानन्द तीर्थ जी महाराज से भी आशीष ली। गौरतलब है कि स्वामी परमानन्द जी महाराज गत 21 साल से जहां मौन वर्त धारण किये हैं वहीं ेे वे अन्न क ो त्याग कर केवल फलाहार ही करते है। इस अवसर पर कांग्रेसी नेता वीरेन्द्र बिष्ट, एकता मशाल के मालिक आनन्द प्रकाश बंशल, उत्तराखण्ड कांग्रेस के महासचिव वीर ेन्द्र बिष्ट, प्यारा उत्त्राखण्ड के सम्पादक देवसिंह रावत, शिव प्रसाद पुरोहित, आशीष वशिष्ट, समाजसेवी दीन दयाल, जगदीश भट्ट,
प्रकाश बिष्ट आदि गणमान्य लोग उपस्थित थे।

Wednesday, July 13, 2011

उत्तराखण्ड राज्य आंदोलनकारी जगमोहन रावत को पत्नी शोक

उत्तराखण्ड राज्य गठन जनांदोलन के प्रमुख संगठन ‘उत्तराखण्ड जनता संघर्ष मोर्चा के वरिष्ठ आंदोलनकारी जगमोहन सिंह रावत की धर्मपत्नी का 12 जुलाई को सांय 7 बजे निधन हो गया। युवा अवस्था में ही लम्बी बीमारी के बाद उनके निधन से उनके परिजन मर्माहित है। शोकाकुल परिवार में उनके एक बेटा व एक बेटी है जो दिल्ली के रामकृष्ण पुरम में निवास करते है। दिवंगत श्रीमती रावत का अंतिम संस्कार निगम बोध घाट में किया गया। इस अवसर पर उनके परिजनों, मित्रों व सम्बंधियों के अलावा बड़ी संख्या में राज्य गठन आंदोल नकारियों उनकी अंतिम यात्रा में सम्मलित हुए। इसमें सम्मलित होने वालों में राज्य गठन के प्रमुख संगठन उत्तराखण्ड जनता संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष देवसिंह रावत,, खुशहाल सिंह बिष्ट, जगदीश भट्ट, देशबंधु बिष्ट, रवीन्द्र बत्र्वाल, सतेन्द्र रावत व सूरत सिंह राणा आदि उपस्थित थे। इस अवसर पर जगमोहन सिंह रावत के विशेष सहयोगी व राष्ट्रीय जनांदोलनों के समन्वयक भूपेन्द्र रावत, डा रवि, पत्रकार दाताराम चमोली, व इन्द्रचंद रजवार,, हुक्मसिंह कण्डारी आदि भी सम्मलित थे।

Tuesday, July 12, 2011

-देश को अब माफ करें मनमोहन

-देश को अब माफ करें मनमोहन/
-देश के लिए आत्मघाति साबित हो रहे हैं प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह
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राहुल गांधी की किसान महा पंचायत की सफलता के बाद इस सप्ताह देश की जनता को आशा थी कि कांग्रेस आलाकमान देश के हितों पर अपने निकम्मेपन से ग्रहण लगा चूके मनमोहन सिंह को देश की जन भावनाओं का सम्मान करते हुए प्रधानमंत्री की कुर्सी से हटाने का विवेकपूर्ण व साहसिक निर्णय लेगी। परन्तु देश की जनता

के विश्वास को उस समय गहरा धक्का लगा जब सोनिया गांधी ने देश को पतन के गर्त में धकेल रहे मनमोहन सिंह को बनाये रखने का आत्मघाति निर्णय ले कर केन्द्रीय मंत्रीमण्डल में नये विस्तार की मंजूरी दे दी। केन्द्रीय मंत्रीमण्डल के विस्तार को होता देख कर लोगों को ऐसा लगा कि मानो सोनिया गांधी मनमोहन सिंह को बनाये रख कर देशवासियों के गहरे जख्मों में नमक छिड़ने का काम जानबुझ कर रही है। देश की जनता आज मनमोहन सिंह के नक्कारेपन्न से जहां एक तरफ बेलगांम मंहगाई से त्रस्त है वहीं देश को तबाह कर रहे भ्रष्टाचार से भी मर्माहित है। इससे अधिक शर्मनाक बात दूसरी क्या हो सकती है कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के मंत्रीमण्डल के कई साथी, समर्थक दल के सांसद, कांग्रेसी सांसद या तो आज भ्रष्टाचार के मामले में तिहाड़ जेल में है या तो जाने के लिए तैयार खडे है। परन्तु क्या मजाल है कि मनमोहन सिंह जूं की तरह अपनी कुर्सी पर बेशर्मी से चिपके हुए है। ईमानदारी का ढ़ोंग करने वाले मनमोहन सिंह की आत्मा न जाने पदलोलुपता की आंधी मेें कहां दम तोड़ चूकी है। मनमोहन सिंह को तो देश व देशवासियों से लेना ही क्या परन्तु सोनिया गांधी को लगता है अब न तो कांग्रेस से ही कुछ लेना देना व नहीं देश से। अगर उन्हें अपने कर्तव्य का बोध होता तो वे मनमोहन सिंह को तुरंत पदमुक्त कर देश व जनता की रक्षा के लिए राहुल गांधी को प्रधानमंत्री पद पर आसीन कर देती। देश की जनता व समय अब मनमोहन सिंह को एक पल के लिए भी प्रधानमंत्री पद पर आसीन देखना ही नहीं चाहती। देश की वर्तमान शर्मनाक स्थिति का अगर कोई एकमात्र दोषी है तो प्रधानमंत्री जैसे महान पद पर आसीन हुए पदलोलुप मनमोहन सिंह। इस कारण मंत्री मण्डल को बदलना केवल देश की जनता की नजरों में धूल झोंकना व उनके जख्मों को कुरेदना ही होगा।
लगता हैं कांग्रेस आलाकमान को देश की हवाओं में बह रहे जनसंदेश को भांपने में असफल हैं या वह अमेरिका के भारी दवाब के कारण इतनी लाचार है कि वह देश व कांग्रेस को पतन के गर्त में धकेलने वाली अपनी सरकार के सबसे नक्कारे साबित हो चूके प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को तत्काल हटाने के बजाय केन्द्रीय मंत्रीमण्डल में ही बदलाव करने को समर्थन कर रही है। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को तत्काल हटा कर उनके कुशासन के कारण बेलगाम मंहगाई, भ्रष्टाचार व आतंकवाद से अराजकता के गर्त में पंहुच चूके देश को बचाने के लिए तत्काल राहुल गांधी को प्रधानमंत्री बना कर देश व कांग्रेस की रक्षा करने के अपने दायित्व का निर्वाह करना चाहिए। वहीं दूसरी तरफ प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह आज से अपनी छवि सुधारने के नाम पर देश के वरिष्ठ सम्पादकों से मिलने कर अपनी व अपनी सरकार की छवि सुधारने का काम कर रहे हैं, मनमोहन सिंह का यह टोटका भी कहीं काम नहीं आने वाला। क्योंकि मनमोहन सिंह ने देश की हालत इतनी शर्मनाक कर दी है कि इसका कोई प्रायश्चित नहीं है। वैसे भी जिन स्वनामधन्य सम्पादकों से वे मिल रहे हैं या मिलेंगे, वे ही ंनहीं देश के तमाम तथाकथित मीडिया धरानों के अधिकांश पत्रकार भी आज देश की आम जनता से पूरी तरह से कटे हुए हैं। आज ंका सम्पादक व पत्रकार अब मीडिया के लिए समर्पित पत्रकार नहीं अपितु एक सेल्समेन से ज्यादा नहीं रह गया है। वेसे भी आज के अधिकांश पत्रकार देश की उस 50 प्रतिशत से अधिक जनसंख्या का प्रतिनिधित्व करने वाली गरीबी के रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाली जनता के सुख दुखों से ही नहीं उनकी दुनिया से पूरी तरह से अनजान हैं जिनके जीवन पर मनमोहनसिंह सरकार ने मंहगाई व भ्रष्टाचार से पूरी तरह ग्रहण लगा दिया है। देश के दूरस्थ क्षेत्रों की बात तो रहने दें देश की राजधानी दिल्ली में ही आज इस लोकशाही के तथाकथित चोथे स्तम्भ को इतना भान नहीं है कि दिल्ली की आम जनता किस कदर से परिवहन के लिए संचालित डीटीसी की बसों से पीड़ित है। यह तो बहुत जमीनी बात है मीडिया के अधिकांश वर्ग को लोकशाही पर लगाये सरकार की वंदिशों का ही भान नहीं होगा। इन मीडिया के तथाकथित पंचतारा संस्कृति के सम्पादकों व पत्रकारों के भरोसे प्रधानमंत्री सोचते हैं कि वे अपनी व अपनी छवि उस आम जनता के नजरों में सुधार देंगे तो यह उनकी हिमालयी भूल है। उनकी देश सेवा के लिए एक ही विकल्प रह गया कि वे देश व कांग्रेस के हित में यह सर्वोच्च काम कर सकत हैं कि वे अपने पद से इस्तीफा दे कर देश की सच्ची सेवा करें। लगता है प्रधानमंत्री मनमोहन अब इतने सत्तालोलुप हो गये हैं कि उनको अपनी सरकार से देश की ंहो रही ंभयंकर दुर्दशा भी नहीं दिखाई देगी। वैसे भी मंत्रीमण्डल में बदलाव के नाम पर सरकार से जन नेता व ईमानदार छवि के लोगों को दूर करके उन प्यादों को जोड़ा जायेगा जिनका मनमोहनसिंह की तरह आम जनता से कभी कोई सरोकार ही नहीं रहा। मंत्रीमण्डल के बदलाव के नाम पर उन लोगों को मंत्रिमण्डल व बड़े पदों पर आसीन किया जायेगा, जो अपने आकाओं की पूजा कर सके, लगता है मनमोहन सिंह मंत्रीमण्डल में बीरभद्र सिंह जेसे ईमानदार व जननेताओं के बजाय आनन्द शर्मा जैसे हवाई नेताओं की ज्यादा जरूरत है। आज जिस प्रकारं से कांग्रेस में आस्कर फर्नाडिस जैसे जनता के लिए समर्पित नेताओं की उपेक्षा मंत्रीमण्डल में हो रही है वह कांग्रेस नेतृत्व की सोच को ही कटघरे में रख रही है। राहुल गांधी को प्रधानमंत्री बनाने व मनमोहन की विदाई में कांग्रेस जितनी भी देर करेगी, देश व कांग्रेस के लिए एक एक पल बहुत ही खतरनाक साबित हो रहे है।
शेष श्री कृष्ण कृपा।
हरि ओम तत्सत्। श्रीकृष्णाय् नमो।

-देश को अब माफ करें मनमोहन

Sunday, July 10, 2011

अगली शताब्दी में विश्व में फेहरायेगा भारतीयता का परचम

अगली शताब्दी में विश्व में फेहरायेगा भारतीयता का परचम
भले ही हिन्दूवादी लोग भारत में ईसायत व मुसलिम धर्मान्तरण को लेकर काफी चिंतित हैं। परन्तु आने वाली शता ब्दी यानी 22 वीं शताब्दी पूरे विश्व में हिन्दू धर्म की होगी। भले ही भारत में हिन्दू धर्म के ठेकेदार बने मठाधीश जातिवादी धृर्णित मानसिकता व भगवान को अपने स्वार्थपूति का मोहरा बना कर रखने के कारण आज भी भारत में आम जनमानस हिन्दू धर्म की तरफ मुंह फेरता नजर आता हो या देश की सरकारे विश्व के इस सबसे प ्राचीन भारतीय संस्कृति को दफन करने का आत्मघाति शिक्षा का षडयंत्र करके भारत की संतति को भारतीय मूल्यों से हटा कर पश्चिमी मूल्यों का गुलाम बना रही हो। परन्तु इसके बाबजूद आने वाले शताब्दी भारतीय सनातन संस्कृति की है जो जड़ चेतन में परमात्मा के सबसे बडे समाजवादी कालजयी उदघोष से युगों से पूरे विश्व का पथ प्रर्दशन कर रही है। विश्व में संचार क्रांति और वैज्ञानिक क्रांति के कारण पश्चिमी देशों के प्रबुद्व लोगों को अपने जीवन व जिज्ञाशा के तमाम प्रश्नों का समाधान न तो ईसायत में मिल रहा है व नहीं इसका समाधान मुसलिम धर्म सहित अन्य किसी प्रमुख धर्मो में कहीं दूर-दूर तक मिल रहा है। इसी कारण पश्चिमी देशों के प्रखर स्वतंत्र विचारक व प्रबुद्वजन वैज्ञानिक व जीवन पद्वति के तमाम जिज्ञाशा को शांत करने में सबसे अनकुल पाते हे। इसी कारण विश्व के तमाम प्रबुद्व लोग बढी संख्या में भारतीय जीवन पद्वति को अपना रहे है । मामला चाहे योग का हो या आध्यात्म का विश्व में वर्तमान में भी भारतीय जीवन दर्शन के संतों ने पूरे विश्व को अपने प्रभाव में ले रखा है। इससे ईसायत व मुसलिम धर्मालम्बी मठाधीशों के माथे पर शिकन साफ दिखाई दे रही है। हालत यह हो गयी है कि चर्चो में प्रबुद्व जनों की विमुखता बढ़ती जा रही है।
वहीं दूसरी तरफ भारत मंें देश के हुक्मरानों की पश्चिमी जीवन दर्शन की अंधे मोह के कारण भारतीय जीवन पद्वति को बुजुर्गा संस्कृति का प्रतीक मानते हुए भारतीय शिक्षा व जीवन पद्वति को जमीदोज कर पश्चिमी शिक्षा, चिकित्सा व कानून व्यवस्था को ही नहीं जीवन दर्शन को भी आत्मसात कर दिया। इसकारण आज देश के बच्चों को भारतीय संस्कार देने के बजाय पश्चिमी संस्कार दिये जा रहे है। देश की भावी संतति को देश के इतिहास, संस्कार व संस्कृति से ही नही भाषा व जीवन मूल्यों से षडयंत्र के तहत दूर किया जा रहा है। इस कारण देश में अधिकाश नौजवान या तो पश्चिमी संस्कृति के चकाचैध में न घर के रहते है व न घाट के तथा कुछ इस विकृति संस्कृति की चपेट में आ कर वाममार्गी बन कर भारतीय संस्कृति के सबसे बडे निंदक व तोड़क बन गये है। शर्मनाक बात यह है कि उनको इस चीज का अहसास जीवन पर्यन्त नहीं होता। क्योंकि भारतीय जीवन दर्शन व संस्कृति से उनको मकाले शिक्षा पद्वति ने उनको मन को इतना मलिन कर दिया होता है कि वे भारतीय दर्शन को सबसे निकृष्ठ समझ कर उसका तिरस्कार करने में वैज्ञानिक दृष्टिकोण व प्रबुद्व समझते हैं।
इन सबके बाबजूद भारतीय संस्कृति के जीवंत मूल्यों के कारण जिस तेजी से पश्चिमी जगत के प्रबुद्व जन भारतीय संस्कृति की तरफ बढ़ रहे हैं उसे देख कर भारत में भी तेजी से भारतीयता के प्रति लोंगों के विचारों मे ं आमूल परिवर्तन आ रहा है। भारतीय संस्कृति के परिवर्तन का अहसास पहले भले ही हरे राम हरे कृष्णा, बालयोगेश्वर महाराज के डिवाइन आंदोलन से हो गया था परन्तु अब जिस तेजी से बाबा रामदेव ने प्राचीन भारतीय योग विज्ञान तथा रविशंकर आदि संतों के चमत्कारी जीवन दर्शन को सुन कर ही पश्चिमी जगत में एक प्रकार का भूकम्प ही आ गया है। वहां एक प्रकार से भारतीय जीवन दर्शन की सुनामी का प्रकोप इतना प्रबल है कि इससे अपने ढह रहे दुर्गो को बचाने के लिए पश्चिम में ईसायत व अरब में मुसलिम जगत के धर्माेचार्य खुल कर योग को धर्म विरोधी बताने की असफल कोशिश कर रहे हैं। इसके बाबजूद लोग जिस तेजी से भारतीयता को आत्मसात कर रहे हैं उससे लगता है कि आगामी शताब्दी भारतीयता की होगी, हिन्दू धर्म, जैन, बोद्व व सिख धर्म के सांझे स्वरूप भारतीय संस्कृति का परचम विश्व में फेहरायेगा। इससे ही भारतीय चिकित्सा पद्वति आयुर्वेद आदि की तरफ तेजी से विश्व समुदाय का ध्यान आकृष्ठ हो रहा है वह आने वाले समय में भारतीय संस्कृति की दिग्विजयी पताका फेहराने का साफ संकेत दे रहा है। इस विश्व में परचम फहराने की ऐतिहासिक सफलता में एकांश भी देश के हुक्मरानों व धार्मिक मठाधीशों का नही अपितु भारतीय संस्कृति के जीवन मूल्यों का आकर्षण का ही एकमात्र योगदान है। शेष श्रीकृष्ण कृपा। हरि ओम तत्सत्। श्री कृष्णाय् नमो।

Friday, July 8, 2011

देश की जनता रोती है

देश की जनता रोती है
श्रीराम, राष्ट्र, जन, भाषादि मुद्दे भूले, भूले भारत माॅं की शान,
सत्तासीन होते ही इनको रहा केवल कुर्सी व अपना ही ध्यान
देश की जनता रोती रही, मंहगाई, भ्रष्टाचार से हो कर त्रस्त
अमेरिका की जय करते रहे मनमोहन हो या संघ प्रिय अटल
अमेरिका पाक के आतंकी रौंदते रहे संसद, मुम्बई सहित देश
अटल मनमोहन बढ़ाते रहे अमेरिका पाक से दोस्ती की पींग।।
देवसिंह रावत www.rawatdevsingh.blogspot.com

मुजफरनगर काण्ड के दोषियों को सजा दिलाने व राजधानी गैरसैंण बनाने के लिए कांग्रेस पर बढ़ा दवाब

मुजफरनगर काण्ड के दोषियों को सजा दिलाने व राजधानी गैरसैंण बनाने के लिए कांग्रेस पर बढ़ा दवाब/
केन्द्रीय मंत्री हरीश रावत के आवास पर उत्तराखण्डी पत्रकारों के भोज में कांग्रेस प्रभारी चैधरी वीरेन्द्र के सम्मुख प्रखरता से उठा मामला/

नई दिल्ली( प्याउ)। नई दिल्ली में केन्द्रीय कृषि राज्यमंत्री हरीश रावत के आवास पर दिल्ली में रहने वाले उत्तराखण्ड के पत्रकारों के लिए 8 जुलाई की रात 8 बजे आयोजित एक विशेष भोज में कांग्रेस के केन्द्रीय महासचिव व उत्तराखण्ड प्रभारी चै. वीरेन्द्रसिंह व मुजफरनगर काण्ड-94 के दोषियों को सजा दिलाने व प्रदेश की स्थाई राजधानी गैरसैण बनाने की मांग प्रमुखता से उठी। इस मांग को उठाते हुए उत्तराखण्ड राज्य गठन के अग्रणी आंदोलनकारी व प्यारा उत्तराखण्ड के पत्रकार देवसिंह रावत ने कांग्रेस प्रभारी चैधरी वीरेन्द्रसिंह का ध्यान आकृष्ठ करते हुए कहा कि एक तरफ कांग्रेस मानवता व न्याय की रक्षा के नाम पर गुजरात दंगों के दोषियों को सजा दिलाने व 1984 के सिख दंगों के पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए जांच आयोग गठित कर रही है परन्तु अफसोस है कि देशभक्त उत्तराखण्डियों के साथ मुजफरनगर में 2 अक्टॅूबर 1994 में जो जघन्य काण्ड पुलिस प्रशासन ने किया, उसके दोषियों को आज 17 साल बाद भी सजा देनी तो रही दूर उनको ईमानदारी से कटघरे पर खड़ा करने में भारत की व्यवस्था असफल रही। सम्पादक देवसिंह रावत ने कहा कि इस बात के लिए प्रदेश की वर्तमान सरकार ही नहीं अपितु उत्तराखण्ड की मुख्यमंत्री नारायणदत्त तिवारी के नेतृत्व में आसीन रही प्रथम निर्वाचित कांग्रेसी सरकार भी पूरी तरह इन दोषियों को सजा दिलाने के बजाय इनकों शर्मनाक संरक्षण देने में लिप्त रही। श्री रावत ने प्रदेश प्रभारी से मांग की कि आगामी विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस प्रदेश की जनता से वायदा करे कि अगर कांग्रेस प्रदेश में सत्ता में आती है तो वह मुजफरनगर काण्ड-94 के दोषियों को सजा दिलाने के साथ साथ प्रदेश की स्थाई राजधानी जनभावनाओं के अनरूप गैरसैंण बनायेगी। श्री रावत ने केन्द्रीय प्रभारी चै. वीरेन्द्रसिंह का ध्यान मुजफरनगर काण्ड-94 पर इलाहाबाद उच्च न्यायालय की टिप्पणी पर भी दिलाया, जिसमें इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने तत्कालीन केन्द्र की नरसिंह राव सरकार व उप्र की मुलायम सिंह सरकार के इस कृत्य को नाजी अत्याचारों के समकक्ष रखा। श्री रावत ने अफसोस प्रकट किया कि जिस काण्ड पर जिन दोषियों को हाईकोर्ट ने ही नहीं अपितु देश की सर्वोच्च जांच ऐजेन्सी सीबीआई, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, महिला आयोग सहित तमाम निष्पक्ष मानवाधिकार संगठनों ने दोषी ठहराया था उन दोषियों को आज 17 साल बाद भी देश की व्यवस्था दण्ड देने में असफल रही।
केन्द्रीय मंत्री हरीश रावत के यहां पत्रकारों के लिए आयोजित इस भोज में बड़ी संख्या में दिल्ली के उत्तराखण्डी पत्रकारों ने भाग लिया। इनमें देश के अग्रणी पत्रकार भारत भूषण, हिन्दुस्तान दैनिक के कार्यकारी सम्पादक गोविन्द सिंह, पंजाब केशरी के एम एस मेहता, पूर्व सम्पादक पपनैं, लोकसभा चैनल के ज्ञानेन्द्र पाण्डे, दूरदर्शन के पूर्व समाचार सम्पादक राजेन्द्र धस्माना, व्योमेश जुगरान, सुनील नेगी, जनसत्ता के राकेश तिवारी, उमाकांत लखेड़ा, दाताराम चमोली, एनडीटीवी के सुशील बहुगुणा, भूपेन्द्र सिंह, हर्ष डोभाल, सहारा समय के मंजीत नेगी, राष्ट्रीय सहारा के रोशन गौड, देवेन्द्र उपाध्याय, अवतार नेगी, अमर उजाला के हरीश लखेडा,स्टार न्यूज से मनू पंवार, राजेश डोबरियाल साधना न्यूज, शिवानन्द चंदोला, खुशहाल जीना व श्रीमती नीलम जीना, एडीटीवी के हरीश जोशी, अर्चना ज्योति, अमर उजाला से वेद उनियाल, पीटीआई से विवेक जोशी, डेक्कन हेरड से दीपक उप्रेती, एन एस नेगी, उत्तर उजाला से के एन जोशी, अनिल पंत, वेद भदोला, नीरज जोशी गिरीश बलूनी, जगदीश भट्ट, चारू तिवारी, टाइम पास के कैलाश धुलिया सहित अनैक वरिष्ठ पत्रकार उपस्थित थे। इस भोज में सम्मलित होने वाले अग्रणी समाजसेवियों में प्यारा उत्तराखण्ड के प्रबंधक सम्पादक महेश चंद्र भी सम्मलित थे। यहां पर भाग लेने वाले पत्रकारों का स्वागत करने वालों में वरिष्ठ कांग्रेसी नेता एम एस रावत, हरिपाल रावत व नन्दन सिंह घुघत्याल, हरीश रावत के बड़े बेटे वीरेन्द्र रावत, करण सिंह बुटोला, एस के जैन, रवीन्द्र नेगी, हरीश रावत के साहयक श्री जीना व शंकर सिंह रावत, हरीश आर्य, हुकमसिंह कण्डारी आदि प्रमुख थे।

Thursday, July 7, 2011

भ्रश्टाचार के मामले में 18 जुलाई को सर्वोच्च न्यायालय के कटघरे में निषंक सरकार

भ्रश्टाचार के मामले में 18 जुलाई को सर्वोच्च न्यायालय के कटघरे में निषंक सरकार/
सैकड़ों करोड़ रूपये के स्टर्जिया भूमि घोटाले में पूरी तरह से आकंठ फंसी उत्तराखण्ड भाजपा की निषंक सरकार को भले ही देष की मीडिया, भाजपा-संघ व कांग्रेस के षर्मनाक निहित स्वार्थी गठजोड़ के कारण षर्मनाक संरक्षण मिला हुआ है परन्तु इस मामले में मुख्यमंत्री निषंक व उनकी सरकार सर्वोच्च न्यायालय में कटघरे में खड़ी है। इस मामले को हाईकोर्ट से सर्वोच्च न्यायालय में उत्तराखण्ड की निषंक सरकार को पूरी तरफ से बेनकाब करने वाले, उत्तराखण्ड राज्य गठन जनांदोलन के लिए संसद की चैखट जंतर मंतर पर निरंतर 6 साल तक धरना प्रदर्षन करने अग्रणी संगठ न, उत्तराखण्ड जनता संघर्श मोर्चा की तरफ से गुहार लगाने वाले सर्वोच्च न्यायालय के प्रख्यात अधिवक्ता अवतार सिंह रावत ने बताया कि 18 जुलाई को सर्वोच्च न्यायालय इस मामले की सुनवायी होगी। इस वाद पर न केवल प्रदेष की आम जनता का अपितु भाजपा व कांग्रेस सहित तमाम सियासी दलों की नजर गड़ी हुई है।

Wednesday, July 6, 2011

every moment is birth and every moment is death

today is neither my nor my body birthday
.
i am happy to see my friends wish their heartly precious moments of life to share with my memorable moments . but sorry to all friends to tell u one secret that i never celebrate my birthday as yet. neither i know when i come in this universe into this body. this is neither my nor this body birthday. I am neither body nor name, I am only kind of god. i thanks god who give me a precious chance to share with all my dearest innocent friends this way.yes i am happy, i know every moment is birth and every moment is death. i know our life is countable breathe. i am happy u share yr love this way with me. jai shri krishna.

Tuesday, July 5, 2011

तेलांगना न बना कर लोकशाही का गला घोंट रहे हैं हुक्मरान

तेलांगना न बना कर लोकशाही का गला घोंट रहे हैं हुक्मरान
हैदराबाद(प्याउ)। दशकों से चल रही तेलांगना राज्य की सर्वसम्मत मांग को स्वीकार न कर सरक ार ने देश की लोकशाही का एक प्रकार से गला ही घोंट दिया । यह केवल वर्तमान सरकार का गुनाह नहीं अपितु अब तक की तमाम सरकारों ने इस जनसमर्थित मांग को नकार कर देश की लोकशाही का एक प्रकार से अहित ही किया । इस कारण प्रदेश में कई हजार करोड़ व जानमाल का नुकसान आंदोलनों से हो चूका है। सरकार की इसी हटघर्मिता से आहत हो कर तेलांगना क्षेत्र के तमाम कांग्रेसी सांसदों व विधायकों ने अपना इस्तीफा दे दिया है। इससे यह मामला फिर देश के आम जनता के मानसपटल पर छा गया है।
पृथक तेलंगाना राज्य के मुद्दे पर आंध्र प्रदेश में राजनीतिक संकट गहराता जा रहा है। अब तक राज्य के कुल 73 विधायकों व 10 सांसदों ने अपने-अपने पदों से इस्तीफे दे दिए हैं। सरकार ने कहा है कि पृथक राज्य के मसले पर अंतिम फैसला लिया जाना
बाकी है।
इस बीच, तेलंगाना संयुक्त कार्य समिति ने मंगलवार और बुधवार को क्षेत्र में 48 घंटे के बंद किया । अलग तेलंगाना राज्य के लिए विधेयक मानसून सत्र में ही लाने की मांग को लेकर समिति ने लगातार विरोध-प्रदर्शन का आह्वान किया है। समिति ने आठ और नौ जुलाई को रेल बंद करने का भी आह्वान किया है।
इस्तीफा देने वालों में कांग्रेस के सांसद और विधायक आगे हैं। कांग्रेस के नौ लोकसभा सदस्यों व एक राज्यसभा सदस्य ने इस्तीफा दिया है जबकि इस्तीफा देने वाले उसके 36 विधायकों में 11 मंत्री शामिल हैं। तेदेपा खेमे से चार विधायकों ने रविवार को ही इस्तीफा दे दिया था। इसके साथ ही इस्तीफा देने वाले तेलंगाना क्षेत्र के विधायकों की कुल संख्या 73 हो गई।
294 सदस्यीय राज्य विधानसभा में तेलंगाना क्षेत्र से 119 विधायक हैं। इसमें प्रजा राज्यम पार्टी (पीआरपी) सहित कांग्रेस के 52 विधायक शामिल हैं। पीआरपी का हाल ही में कांग्रेस में विलय हुआ था। तेदेपा के इस क्षेत्र से 37 विधायक हैं, जबकि तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) के 11 विधायक हैं।
सोमवार को तेदेपा के सभी 33 विधायकों और कांग्रेस के 36 विधायकों ने विधानसभा उपसभापति मल्लू भट्टी विक्रमार्का को अपना इस्तीफा सौंप दिया, क्योंकि विधानसभा अध्यक्ष एन. मनोहर अमेरिका में हैं।
294 सदस्यीय विधानसभा में कांग्रेस के कुल 174 सदस्य हैं। इसमें प्रजा राज्यम पार्टी के 18 विधायक शामिल हैं। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि यदि विधानसभा अध्यक्ष ने कांग्रेस के 36 विधायकों का इस्तीफा स्वीकार कर लिया तो सरकार अल्पमत में आ सकती है। कांग्रेस विधायकों एवं मंत्रियों का नेतृत्व कर रहे वरिष्ठ मंत्री के. जना रेड्डी ने संवाददाताओं से कहा कि उनके इस्तीफे कोई संवैधानिक या राजनीतिक संकट पैदा करने के लिए नहीं हैं, बल्कि जनभावनाओं के अनुकूल पृथक राज्य हासिल करने के लिए हैं। रेड्डी ने विधानसभा भवन के बाहर कहा, उनकी लड़ाई तेलंगाना क्षेत्र के स्वशासन और आत्मसम्मान की लड़ाई है। विधानपरिषद के 12 कांग्रेसी सदस्यों ने भी विधानपरिषद सभापति के. चक्रपाणि को अपना इस्तीफा सौंप दिया।
लेकिन एक मंत्री के. वेंकट रेड्डी ने कहा कि चूंकि मंत्रियों ने विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है,
इस आंदोलन में तेजी का कारण यह भी है कि लोगों को अहसास हो गया है कि पृथक तेलंगाना राज्य के गठन के लिए नौ दिसम्बर, 2009 को दिए गए वादे से पीछे हट रही है तथा यह आंदोलन एक प्रकार से प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को भी चेतावनी दी है।

smile and enjoy every moment of this precious life

u have not learn from book, first of all u should learn yr self.
see what u have , earn or gain in yr life , its these all are yr own affords or achievement.
see which body u have that is not yr creation,
in which wind you breathe to live that is not yr creation
in which earth u stay that is n ot yr creation
in which sun or rain u enjoy or live that is not yr creation
even which name u take that is not yr th at all are gift of god
see how kind he and how lovely way he give u different happiness and how wonder universe he provide u to live . why bost and why cry, enjoy happiness and kind of god which he has been providing u without taking any thing else. smile and enjoy every moment of this precious life.

चुनाव से पहले फिर एक होगा उक्राद

चुनाव से पहले फिर एक होगा उक्राद


देहरादून(प्याउ)। विधानसभा चुनाव से पहले उक्रांद के दोनों गुटों में फिर एका होने की उम्मीद केवल पार्टी के कार्यकत्र्ता ही नहीं अपितु ंप्रदेश के राजनीति की नब्ज को जानने वाले लोग भी कर रहे है। लोगों की यह उम्मीद मात्र हवाई नहीं है। इससे पहले भी उक्रांद के ये दोनों गुट कई बार बिखर कर फिर एक हुए थे। हालांकि मुन्नासिंह चैहान द्वारा ऐरी गुट की बातचीत व दिवाकर गुट के साथ खंडूडी की बातचीत से भले ही ऐसा लगे कि दोनों गुट दूर हो गये है। परन्तु दोनों दलों के भले ही कभी दिल ना भी जुडे रहे परन्तु दोनों के सांझे सपने के कारण दोनों को कुछ दिनों दूर रहने के बाद एक होने को मजबूर होना पड़ा।
गौरतलब है कि इन दिनों उत्तराखंड के एक मात्र मान्यता प्राप्त क्षेत्रीय राजनीतिक दल उत्तराखंड क्रांति दल के दोनों धड़ों की नजर चुनाव चिन्ह पर टिकी हुई है। चुनाव चिन्ह की यह लड़ाई इस समय भारत निर्वाचन आयोग में लड़ी जा रही है। गौरतलब है कि पहली जनवरी 2011 से उत्तराखंड क्रांति दल के बीच विभाजन की रेखा खिंचनी शुरू हुई थी। राज्य सरकार से समर्थन वापस लेने के साथ ही पार्टी के अध्यक्ष त्रिवेंद्र सिंह पंवार ने दिवाकर भट्ट को उक्रांद से निलंबित कर दिया था और 4 जनवरी को उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया। 16 जनवरी को दिवाकर भट्ट ने आम सभा बुलाकर खुद को उक्रंाद का अध्यक्ष घोषित किया था और त्रिवेंद्र पंवार को पार्टी से बाहर करने की घोषणा कर दी थी। टिहरी में नगर पालिका अध्यक्ष के उपचुनाव के मद्देनजर राज्य निर्वाचन आयोग में दोनों गुटों ने अपने को असली घोषित करते हुए अपना पक्ष रखा था। राज्य निर्वाचन आयोग ने अंतरिम निर्णय देते हुए उक्रांद का सिंबल कुर्सी को जब्त कर दिया था। उसके बाद यह मामला भारत निर्वाचन आयोग में ले जाया गया। दोनों गुटों ने भारत निर्वाचन आयोग में अपने अपने दस्तावेज जमा कर दिए थे। चुनाव आयोग का चाहे कोई भी निर्णय आये परन्तु उक्रांद के अब तक के इतिहास को जानने वालों को आशा है कि देर न सबेर दोनों गुट फिर एकजुट होंगे।

निशंक के मुख्यमंत्री रहते नहीं बचापायेंगे भाजपा को राजनाथ

निशंक के मुख्यमंत्री रहते नहीं बचापायेंगे भाजपा को राजनाथ


भले ही भाजपा आलाकमान व उत्तराखण्ड प्रदेश के भाजपा के सत्तालोलुप नेता, पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह को उत्तराखंड विधानसभा चुनाव की कमान सौंपे जाने से प्रदेश में निशंक कुशासन के कारण डुबती हुई नौका को पार लगाने की आश में फूले नहीं समा रहे हों परन्तु हकीकत यह है उत्तराखण्ड की स्वाभिमानी जनता किसी भी हालत में अब निशंक के कुशासन को शर्मनाक संरक्षण देने वाली भाजपा को एक पल के लिए बर्दास्त करने के लिए तैयार नहीं है। जिस प्रकार लोकसभा चुनाव के समय उत्तराखण्ड की महान जनता ने लोकशाही का रौद रहे भुवनचंद खंडूडी को भाजपा के अधिकांश विधायकों के विरोध के बाबजूद थोपने की धृष्ठता के कारण प्रदेश की जनता ने पूरी तरह से प्रदेश से लोकसभा चुनाव में भाजपा का सफाया ही कर दिया था। जनता के इस करारे सबक से भी नहीं लगता है भाजपा ने जरा सी भी सीख ली हो। उसके बाद भाजपा ने अपनी भूल को सुधारने की बजाय प्रदेश में जातिवाद व क्षेत्रवाद की घिनौना हथकण्डा अपनाते हुए प्रदेश भाजपा के वरिष्ठ व साफ छवि के भगतसिंह कोश्यारी, केदारसिंह फोनिया व मोहनसिंह ग्रामवासी जैसे नेताओं को दरकिनारे करते हुए डा रमेश पोखरियाल निशंक को प्रदेश का मुख्यमंत्री के पद पर थोप कर जनता के आगे अपने राष्ट्रवाद व सुशासन के दावों की खुद ही हवा निकाल दी । जिस ढ़ग से निशंक के शासन में प्रदेश में कदम कदम पर भ्रष्टाचार का तांडव मचा हुआ है उसकी गूंज भले ही अपने निहित स्वार्थो में आकंठ डूबे हुए भाजपा के धृष्टराष्ट्र बने आडवाणी, गडकरी व संघ का ना भी सुनायी दे या सुनते हुए न सुनने का ढ़ोग कर रहे हों परन्तु पूरे देश ही नहीं देश की सर्वोच्च न्यायालय व उच्च न्यायालय में साफ सुनायी दे रहा है। आज स्थिति इतनी दयनीय हो गयी है कि निशंक को सत्तासीन करके प्रदेश के हितों को अपनी संकीर्ण सौच के कारण गला घौटने वाले पूर्व मुख्यमंत्री भुवनचंद खंडूडी भी अब प्रायश्चित हो कर प्रदेश से निशंक को मुक्ति दिलाने के लिए कई बार केन्द्रीय आला कमान के दर पर गुहार लगा चूके है। जब खंडूडी ने देखा की केन्द्रीय नेतृत्व अपने निहित स्वार्थ के लिए पूरी तरह से निश्ंाक के मोहपाश में बंध कर प्रदेश में किसी तरह का बदलाव करने के लिए तैयार नहीं है तो खंडूडी इन दिनों गंभीरता से प्रदेश से निशंक की मुक्ति के लिए उक्रांद सहित तमाम संभावित संभावनाओं पर चिंतन मनन कर रहे है। यह केवल खंडूडी का आक्रोश नहीं , प्रदेश भाजपा के सबसे बडे जननेता व पाक साफ छवि के नता भगत सिंह कोश्यारी भी किसी भी कीमत पर निशंक की पालकी को ढोने के केन्द्रीय आकाओं के फरमान के आगे सर झुकाने के लिए तैयार नहीं है। यही नहीं पूर्व सैनिक बाहुल्य प्रदेश में पूर्व सैनिकों में सबसे जमीनी नेता पूर्व मंत्री टीपीएस रावत भी भाजपा की दुर्दशा देख कर किसी भी सूरत में निशंक के रहते रहते भाजपा का प्रत्याशी भी बनने को अपनी शान के खिलाफ समझ रहे हैं। ऐसी ही मंशा प्रदेश के सबसे वरिष्ठ भाजपा नेता मोहनसिंह ग्रामवासी ने भी पहले ही श्रीनगर में ताल ठोक दी है। वे भी प्रदेश भाजपा में चल रहे कुशासन से इस कदर हैरान व आक्रोशित है कि उन्होंने प्रदेश में खंडूडी के बाद निशंक के शासन में प्रदेश योजना आयोग के प्रमुख का पद तक ठुकरा दिया। श्री ग्रामवासी ही नहीं प्रदेश भाजपा के संघ के वरिष्ठ स्वयंसेवक व कार्यकत्र्ता भी प्रदेश में जातिवाद व भ्रष्टाचार को केन्द्रीय नेतृत्व से मिल रहे अंध समर्थन से हैंरान है।
हालांकि भाजपा ने उत्तराखंड में अब कुछ ही महीनों बाद होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले ही इस विखराव को पाटने के लिए रणनीति को अमल में लाना आरंभ कर दिया है। प्रदेश चुनाव प्रभारी के रूप में पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह और उनके सहयोगी के रूप में वरिष्ठ नेता धर्मेद्र प्रधान की नियुक्ति को इसी क्रम में देखा जा रहा है।
राजनाथ सिंह की नियुक्ति के मूल में राज्य में पार्टी की इन अंदरूनी परिस्थितियों से निबट कर चुनाव में पूरी ताकत के साथ उतरने की क्षमता मुख्य कारण मानी जा सकती है। परन्तु अब प्रदेश की दयनीय स्थिति में लगता नहीं राजनाथ सिंह भी कुछ कर पायेंगे। जब वे लोक सभा चुनाव के समय अपने अध्यक्ष रहते नहीं कर पाये तो अब क्या करेंगे दूसरी बात आज पूरे प्रदेश की जनता के सम्मुख भाजपा का राष्ट्रवाद व सुशासन के दावे अब पूरीं तरह से तार तार हो चूका है। जनता एक ही सवाल कर रही है अगर यही रामराज्य है तो भाजपा को प्रदेश में अब कोई स्थान नहीं दे पायेगी यहां की सम्मानीत जनता। यहां की जनता किसी भी कीमत पर भ्रष्टाचारियों व पाखण्डियों को स्वीकार नहीं करती। कम से कम इंदिरा गांधी के शासनकाल में बहुगुणा वाले चुनाव के समय यह पूरी तरह से जग जाहिर हो गया है। भाजपा के इस विश्वासघात का जनता आने वाले चुनाव में करारा सबक सिखायेगी। शेष श्रीकृष्ण कृपा। हरि ओम तत्सत्। श्री कृष्णाय नमो।

Sunday, July 3, 2011

जो रोशन करते थे जमाने को

जो रोशन करते थे जमाने को
चोट खा कर भी दीवाने हार नहीं मानते हैं,
वो प्यार की दरिया में ही फिर कूद जाते हैं।
उनको पाने या खोने का गम नहीं होता कभी,
बस इक लौ दिल में वो सदा जलाये रखते हैं।।
जख्म दिल के ना तुम कुरेदों साथी इतना,
ये जख्म, दिल में अब नासूर बन चूके हैं।
रहने दो इक अहसास उन लम्हों का,
जो रोशन करते थे कभी जमाने को।।
-देवसिंह रावत