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Thursday, February 24, 2011

निशंक को हटाने के लिए भाजपा नेतृत्व पर भारी दवाब


निशंक को हटाने के लिए भाजपा नेतृत्व पर भारी दवाब
निशंक को बनाये रखने से होगा भाजपा का उत्तराखण्ड में लोक सभा की तरह सफाया
नई दिल्ली। दिल्ली में जिस प्रकार से कभी घोर विरोध्ी रहे भाजपा के वरिष्ठ नेताओं कोश्यारी व खडूडी के गठजोड़ के बाद दिल्ली में शुरू किये गये निशंक हटाओं अभियान से एक बार पिफर उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्राी निशंक के चुनाव से पहले मुख्यमंत्री की कुर्सी से हटाने की अटकलें लगाये जाने लगी। सुत्रों के अनुसार दिल्ली में निशंक को मुख्यमंत्राी के पद पर आसीन रखने के मजबूती घेराबंदी को देख कर कभी एक दूसरे के घोर राजनैतिक विरोध्ी रहे भाजपा 
नेता भगतसिंह कोश्यारी व खंडूडी ने प्रदेश में भाजपा की निरंतर गिरती हुई छवि को बचाने के लिए दिल्ली दरवार में संयुक्त रूप से निशंक हटाओं भाजपा बजाओ अभियान शुरू कर दिया हे। दोनों नेता हालांकि पूर्व मुख्यमंत्राी रहने के साथ साथ मुख्यमंत्राी के मजबूत दावेदार भी माने जा रहे है। परन्तु जब प्रदेश की निशंक सरकार के एक के बाद एक घोटालों में घिरे होने से से जनता के बीच में भाजपा की छवि को निरंतर गिरते देख कर दोनों नेताओं ने प्रदेश में भाजपा बचाने व प्रदेश के विकास को बचाने के लिए अपने मतभेदों को विराम देते हुए गठजोड करने का निर्णय लिया। इसकी भनक लगते ही निशंक खेमें में हड़कम्प ही मचा हुआ है। निशंक के सरपरस्त नेताओं ने भी दिल्ली में कमान संभाली हुई है। परन्तु सबसे दिक्कत यह आ रही है कि प्रदेश में एक के बाद जो घोटालों की परत खुल रही है उसमें भले ही न्यायालय कीदेहरी में निश्ंाक सरकार किसी तरह अपना दामन बचा ले परन्तु जनता की नजरों में भाजपा की छवि निरंतर ध्ूमिल हो  रही है। इससे प्रदेश में पिफर से सत्तासीन होने की आश पर ग्रहण लग गया हे। इसी कारण संघ भी  भ्रष्टाचार में आकंठ पफंसे निशंक सरकार से खुश न होने से निशंक के दिल्ली में बैठे हुए संरक्षकों को निशंक का बचाव करना भारी पड़ रहा है। 
इसके तहत निशंक को चुनाव से पहले ठीक उसी तरह स्वामी की तरह हटाने की भी रणनीति पर भाजपा के दिग्गज विचार कर रहे है। भाजपा के जमीनी नेताओं को इस बात का अहसास हो गया है कि निशंक के कारण अब प्रदेश में पिफर से सत्तासीन होने की आशाओं पर बज्रपात ही होगा। 
वहीं दूसरी तरह दिल्ली में एक मजबूत तबका अपने निहित स्वार्थाे के कारण निशंक के बचाव में कमर कसे हुए हे।। भले ही निशंक मोह में बशीभूत हो कर भाजपा के आला नेताओं में विधनसभा चुनाव की दहलीज में खडे अपनी पार्टी की उत्तराखण्ड सरकार के मुखिया को अभयदान देने की होड़ लगी हो परन्तु प्रदेश सरकार के मुखिया निशंक से प्रदेश की जनता का पूरी तरह से मोह भंग हो गया है। चुनाव से पहले ही प्रदेश की जनता के मंसुबों को भांप कर व आगामी विधनसभा चुनाव में भाजपा के बचे खुचे आधर को बचाने के लिए भाजपा के दो ध्ुर विरोध्ी रहे वरिष्ठ नेता व पूर्व मुख्यमंत्राी भगतसिंह कोश्यारी व भुवनचंद खंडूडी ने एकजूट हो कर दिल्ली में भाजपा बचाओं अभियान छेड़ दिया है। जनता की इसी गहरी नाराजगी को भांपते हुए दोने घुर विरोध्ी समझे जाने वाले कोश्यारी व खंडूडी ने संघ से लेकर भाजपा के तमाम वरिष्ठ नेताओं से इस मामले में अपने दो टूक रूख का वयान कर दिया है। सुत्रों के अनुसार दोनों नेताओं ने दिल्ली में भाजपा के आला नेताओं को दो टूक शब्दों में बता दिया है कि उत्तराखण्ड की जनता किसी भी कीमत पर भ्रष्टाचार को सहन नहीं करती है। वह आगामी विधनसभा चुनाव में किसी भी सूरत में निशंक के सरपरस्ती में भाजपा के पक्ष में मतदान नहीं करेगी। 
सरकार के में आम जनता में प्रदेश की भाजपा सरकार के मुखिया निशंक के खिलापफ पनप रहा जबरदस्त जनाक्रोश न दिखाये दे रहा हो, परन्तु प्रदेश में जिस प्रकार से प्रदेश के विभिन्न भागों से भाजपाई नेता पार्टी को छोड़ कर दूसरे दलों का दामन थाम रहे हैं उससे आगामी विधनसभा चुनाव से पहले ही प्रदेश में बड़ी तेजी से बह रही भाजपा विरोध्ी लहर के सापफ संकेत मिलने लग गये है। यह संकेत उसी प्रकार के हैं जिस प्रकार लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा के आलाकमान ने प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्राी भुवनचंद खंडूडी को जनभावनाओं को नजरांदाज कर बलात थोपे रखा। इससे आक्रोशित जनता ने लोकसभा चुनाव में पूरी तरह से भाजपा का सपफाया ही कर दिया। इस समय भी कई भ्रष्टाचारों में आकंठ घिरी प्रदेश की निशंक सरकार भले ही न्यायालय के दर पर अपने आपक को किसी तरह बचाने में सपफल हो गयी हो परन्तु जनता की नजरों में निशंक सरकार अपने पूर्ववर्ती खंडूडी सरकार से बदतर लगने लगी है। जनता उत्तराखण्ड के हितों की घोर उपेक्षा करने वाली किसी भी सरकार को किसी भी सूरत में बर्दास्त नहीं करेगी। अब निर्णय भाजपा के आला नेताओं को करना है कि वह प्रदेश में लोकसभा चुनाव की तर्ज पर प्रदेश से भाजपा का सपफाया करने की इंतजारी करते हैं या पिफर अविलम्ब जनता में बेनकाब हो चुके प्रदेश के मुख्यमंत्राी निशंक को हटा कर प्रदेश में भाजपा के बचे खुचे जनाधर को बचाने का काम करते है। देखना यह है कि अब भाजपा आलाकमान प्रदेश में लोकसभा चुनाव से पहले निशंक को हटाने की बु(िमता पूर्ण कदम उठाता है या पिफर अपनी हेकड़ी में निश्ंाक को बनाये रखकर लोकसभा चुनाव की तरह पूरे प्रदेश से भाजपा का सपफाया होते देखने का कृत्य करता है। वैसे निशंक सरकार के कारनामों को देख कर उत्तराखण्डी राजनीति के जानकारों को इस बात का पूरा भरोसा है कि उत्तराखण्ड की जनता कभी किसी जनविरोध्ी सरकार को किसी भी हालत में स्वीकार नहीं करती है। चाहे वह इंदिरा गांध्ी द्वारा बहुगुणा को चुनौती देना रहा हो या तिवारी द्वारा प्रदेश के हितों को रौंदने का कारनामा हो, प्रदेश की जनता ने तमाम प्रलोभनों को दरकिनारे करते हुए जिस प्रकार से सत्तांधे को सत्ता से उखाड़ पफैंका उसके सामने निशंक सहित तमाम जन विरोध्ी नेताओं के मनसूबे कहां सपफल होंगे। इसी आशंका से आशंकित भाजपा का नेतृत्व चुनाव से पहले निशंक को हटा कर भाजपा मे ंसुशासन के पर्याय रहे भगतसिंह कोश्यारी को एक बार पिफर चुनाव के लिए मुख्यमंत्राी की कुर्सी पर आसीन कर सकता है तथा पूर्व मुख्यमंत्राी भुवनचन्द्र खडूडी को प्रदेश के अध्यक्ष के पद पर आसीन किया जा सकता है। क्योंकि खंडूडी के बाद निशंक की ताजपोशी करने के बाद कुमाऊं मण्डल में लोगों की नाराजगी भाजपा से कापफी बड़ गयी है। इस कारण संगठन व जनता में व्याप्त तमाम नाराजगी दूर करने के लिए भाजपा के 
रणनीतिकारों ने यह पफामूर्ला भाजपा नेतृत्व के सामने रखा है। 
अब देखना हे भाजपा नेतृत्व भाजपा व 
प्रदेश के हितों की रक्षा का निर्णय लेता है या पिफर अपने निहित स्वार्थों में मूक रहते हुए 
प्रदेश से लोकसभा चुनाव की तरह विधनसभा चुनाव में भी भाजपा का सपफाया होते देखना चाहता। कुल मिला कर भाजपा नेतृत्व के पास समय ज्यादा नहीं है। अगर इसी माह बजट से पहले भाजपा ने प्रदेश सरकार का मुखिया  नहीं बदला तो पानी सर से गुजर जायेगा। 

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