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Wednesday, September 28, 2011

I hope USA president Obama and all peoples dedicate themself to make true dream of one world goevernment



so great inspiration to student, american has great fate who has great president like obama, who has keen interest to make forever strong and super power USA . I see no other country head showing such keen heartly interest like Obama to make bright future of their kids . i am beliving such saying kids are future of our society, nation and world. I hope Obama who is not only great super power country president but also one great visionary men also, must do to build one world Government to save humanity and democracy in world . UNO and other organisation does not can make true this dream, so USA should lead this dream to success, what use now more than two hundred country who are mostly spoil their own resources to purchases war weapons, instead to give proper education, meals, clothes, medical facilities, seltter, and oppertunity to serve and show thier own services. so we need one world govt. who make true this dream to develop over all potential of our kids and make heaven to this earth. where no hate of religios, caste, race, colour, language and gender, only save to human race we dedicate our dream to make this earth as heaven. I hope not only from USA president Obama but also all people of this universe dedicate thier self to make true this dream to one government in this earth to save this earth and make its like real heaven to all being .

Tuesday, September 27, 2011

िनशंक के कुशासन से उत्तराखण्ड को मुक्ति दिलाने वाले अधिवक्ता अवतार रावत को नमन्

िनशंक के कुशासन से उत्तराखण्ड को मुक्ति दिलाने वाले अधिवक्ता अवतार रावत को नमन्
उत्तराखण्ड में विधानसभा चुनाव से चंद महीनों पहले भारतीय जनता पार्टी ने अचानक अपने मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक को हटाकर भुवनचंद खंडूडी को पदासीन करके पूरे देश को अचम्भित कर दिया। हालांकि इसका कारण भारतीय जनता पार्टी ने कुछ भी बताने से इंकार कर दिया हैं इसके बावजूद इस पूरे प्रकरण के पीछे अगर कोई महत्वपूर्ण कारण रहा तो वह निशंक सरकार के नाक के नीचे हुआ स्टर्जिया घोटाला। जिसने न केवल भाजपा सरकार को बेनकाब कर दिया अपितु आला नेतृत्व को भी शर्मसार कर दिया। इस पूरे प्रकरण को उजागर करने में जिस एक व्यक्ति ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई वह है सर्वोच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता अवतार सिंह रावत , जो राज्य गठन जनांदोलन के अग्रणी आंदोलनकारी भी रहे। उन्होंने इस मुद्दे पर पूरी भाजपा को ही बेनकाब कर दिया। मामला अभी सर्वोच्च न्यायालय में चल रहा है।
उत्तराखण्ड राज्य गठन जनांदोलन के अग्रणी पुरोध व सर्वोच्च न्यायालय के प्रसिद्ध अधिवक्ता अवतार सिंह रावत को उत्तराखण्ड की निशंक सरकार को बेनकाब करने के लिए शतः शतः नमन्। उस निशंक सरकार को जिसके कारनामों का खुलाशा करने में देश के अधिकांश समाचार पत्रों व समाचार चैनलों के मालिकों के हाथ कांपते है। उनके अखबारों व उनके चेनलों में इस सरकार के कारनामों के खुलासा करने पर शर्मनाक मौन छा जाता हो। जहां विरोधी दलों के नेताओं की जुबाने भी जिस निशंक सरकार के कारनामों को सही समय पर उठाने के लिए बंद हो जाती हो, ऐसी निशंक सरकार के खिलापफ नैनीताल हाईकोर्ट में जनहित याचिका के माध्यम से दमदार पैरवी करके ऋषिकेश के जमीन घोटाले पर निशंक सरकार को हाई कोर्ट में वाद की 29 नवम्बर को पड़ने वाली तारीक से पहले बहुत ही नाटकीय ढंग से 27 नवम्बर को ही कपंनी द्वारा गुमराह करने के नाम पर खारिज करने के लिए विवश कर दिया। मामला अब सर्वोच्च न्यायालय में है। इसके लिए अधिवक्ता अवतार रावत को कोटी कोटी बधाई। इसके साथ इस जनहित याचिका को दायर करने वाले स्वामी दर्शन भारती व निशंक सहित तमाम भ्रष्टाचारों पर मुखर प्रकाशन करने वाले पत्रकारों, राजनेताओं व बुद्धिजीवियों को भी सादर नमन् करता हॅू।
हालांकि यह प्रदेश की वर्तमान सरकार के पूर्व मुखिया रमेश पोखरियाल निशंक की पुरानी रणनीति है। पहले आनन पफानन में प्रदेश के संसाध्नों की बंदरबांट करों। जब हल्ला हो ओर कोई बचने का चारा न दिखे तो उस मामले में कोर्ट से बाहर ही आनन पफानन में वापस ले लो या खारिज कर दो। इससे पहले भी निशंक सरकार ने ऐसा ही कार्य प्रदेश में कुछ माह पहले प्रदेश के जल विद्युत परियोजनाओं की बंदरबांट करने वाले प्रकरण में की। तब भी आरोप लगे कि निशंक सरकार ने चंद बाहरी लोगों के हितों की पूर्ति के लिए इन परियोजनाओं की बंदरबांट की। तब इस मामले को प्रमुखता से उठाने वाले चैनलों के प्रहारों व इस मामले के मजबूत दस्तावेज विरोध्ी पक्ष के हाथ लगने की से तिलमिलाये निशंक ने जब देखा की उनको बचने का एक ही रास्ता है वह है इस पूरे मामले को खारिज करना। उन्होंने इन जल विद्युत परियोजनाओं के विवादस्त प्रकरण को ही खारिज कर दिया।
उस मामले के बाद लगता है मुख्यमंत्राी निशंक ने बहुत ही सुझबुझ से कदम आगे बढ़ाये। परन्तु लोगों की पैनी निगाह से वे बच नहीं पाये। इस बार ऋषिकेश स्थित जमीन घोटाला प्रकरण में जिस प्रकार से प्रदेश सरकार पूरी तरह कटघरे में आ घिरी। जिस प्रकार से प्रदेश सरकार ने 1अक्टूबर 2009 को इस विवादस्थ जमीन को एक निजी कम्पनी को बेचा। 24 घंटे के अंदर इसक जमीन की यूज बदलने की स्वीकृति दी गयी। जिस प्रकार से मुख्यमंत्राी ने विशेषाध्किार का इस्तेमान कर इस जमीन को बेचने इत्यादि प्रकरण हुए उससे पूरा प्रकरण संदेह के घेरे में आ गया। इस मामले में प्रदेश की विधनसभा में कापफी हो हल्ला हुआ। विपक्ष ने इस घोटाले की सीबीआई जांच व सरकार के इस्तीफे की मांग की। परन्तु निशंक सरकार ही नहीं भाजपा के आला नेता इस प्रकरण पर मुख्यमंत्राी निशंक को बचाने के लिए लामबंद हुए। यही नही स्वयं राष्ट्रीय अध्यक्ष गड़करी ने निशंक सरकार को पाक सापफ बताया तथा जिस प्रकार से निशंक खुद इस प्रकरण पर अपनी सरकार को पाक सापफ बताते हुए इस प्रकरण पर सरकार को कटघरे में लेने वालों तथा इसे घोटाला कहने वाले पत्राकारों पर कार्यवाही करने की दिल्ली से लेकर देहरादून में ध्मकियां देते रहे उससे भाजपा का पूरा चेहरा ही बेनकाब हो जाता है। इस प्रकरण को देख कर सापफ हो गया है कि भाजपा के नेताओ में न तो कोई नैतिकता रही व नहीं कोई मर्यादा। संघ की नैतिकता तो निशंक के मुख्यमंत्री बनने पर ही कटघरे में है।
जिस प्रकार से पूर्व मुख्यमंत्री निशंक ने विपक्ष ही नहीं प्रदेश व देश की मीडिया में इस प्रकरण पर रहस्यमय चुप्पी साध्ने की इन्द्रजाल पफैका। उसका जादू पूरे देश की मीडिया पर चला। न जाने किस मोह में अंध्े हो कर प्रदेश व देश की मीडिया ने न तो मुख्यमंत्राी को बेनकाब करने वाले पूरे प्रकरण में वर्तमान में चुप्पी साध्ी रखी। यह मोह विज्ञापनों का था या अन्य मोह यह तो वे ही जाने। परन्तु इस प्रकरण पर देश के तथाकथित सच्चाई को उजागर करने के दावा करने वाले पत्राकार व मीडिया चैनलों ने नपुंसकता दिखाई। यही नहीं कर्नाटक व अन्य प्रकरणों पर आसमान उठाने वाला कांग्रेस इस मामले में रहस्यमय राष्ट्रीय स्तर पर चुप्पी साध्े रखा। इस प्रकरण पर निशंक को इस जमीन सौदे को रद्द करने के लिए मजबूर करने वाले जांबाज सर्वोच्च न्यायालय के अध्विक्ता अवतार सिंह रावत का सर्वोच्च सम्र्पण, उत्तराखण्ड के उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश का न्यायप्रियता वाला रूख ही निशंक को अपने तथाकथित सही कदम को वापस खिंचने के लिए मजबूर किया।
जिस प्रकार से प्रदेश की सत्ता पर रमेश पोखरियाल निशंक काबिज रहे उससे लोकशाही के लिए किसी भी दृष्टि में हितकारी नहीं है। इस प्रकरण का फैसला चाहे अदालत जो भी दे परन्तु जनता की अदालत में इस सौदे में निशंक ने अपने कदम वापस खिंच कर यह साबित कर दिया कि इस दाल में कुछ काला ही नहीं अपितु यह पूरी दाल ही काली है। जनता को जब इस सच्चाई का पता चला तो प्रदेश से भाजपा का सुपड़ा ही साफ होने की आशंका भयभीत भाजपा आलाकमान ने अभिलंब निशंक को हटाकर खंडूडी की ताजपोशी की।
निशंक के मायाजाल को छिन्नभिन्न करके जनता की अदालत में उनको अपना नकाब खुद हटाने के लिए मजबूर करने वाले उत्तराखण्ड राज्य आंदोलन के महानायक अवतारसिंह रावत को एक बार फिर से शतः शतः नमन्। शेष श्री कृष्ण कृपा।
हरि ऊँ तत्सत्। श्री कृष्णाय् नमो।

-पाक से अधिक विश्व शांति पर ग्रहण लगाने का गुनाहंगार है अमेरिका

-पाक से अधिक विश्व शांति पर ग्रहण लगाने का गुनाहंगार है अमेरिका
-अब अपना प्यादा ‘ पाक’ भी भष्मासुर नजर अाने लगा अमेरिका


अपनी सुरक्षा व हितों पर पाक द्वारा ग्रहण लगते देख कर अब अमेरिका को ंअपने सबसे करीबी प्यादे पाकिस्तान से भी डर लगने लगा है । ंपूरे विश्व के अमन शांति को ंग्रहण लगाने वाले ंतालिबानी व अलकायदा के आतंकियों का सरपरस्त ही नहीं संरक्षक रहा अमेरिका अपने कृत्यों से दुनिया की आंख में धूल झोंकने के लिए अब अपने ही प्यादे पाकिस्तान कंो बलि का बकरा बनाना चाहता है। इसी घटनाक्रम में वह अपने सभी प्यादों अलक ादयदा, तालिबान, ंआईएसआई के बाद अब पाक को भी अपने आक्रोश का शिकार बनाना चाहता है। इन ंसभी को अमेरिका ने अपना सम्राज्य विस्तार के लिए न केवल हथियार, सहायता अपितु संरक्षण भी दिया। खासकर सोवियत संघ को अफगानिस्तार से खदेडने के लिए जो अमेरिका ने ये भ्रष्मासुर तेंयार किये थे वे सभी भ्रष्मासुर भारत, अमेरिका सहित पूरे विश्व की अमन शांति को ंअपने आगोश में ले चूके है । अमेरिकी ंखुमार तब टूटा जब उस पर 9/11 को अमेरिका में उसके इन प्यादों ने हमला किया। ं तब तक बहुत देर हो चूकी थी। जो मुस्लिम कट्टरपंथी को अपने संकीर्ण हितो ंके लिए ंविश्वघाति हवा दी वह आज ऐसी भयानक हो गयी कि अमेरिका अपने ंस्वयं निर्मित भस्मासुरों से ंअपने आप को बचाने के लिए पसीने आ रहे है। इसी के तहत भले ही उसने ंओसमा ंबिन लादेन का खात्मा कर दिया हो, पर जो जहर व खुखारपन की फेक्टरी अमेरिका ने ंसोवियत संघ व भारत को तबाह करने के लिए पाक में ंसंरक्षित की थी वह फेक्टरी आज अमेरिका की अमन ंशांति को ग्रहण लगाने का मूल कारण बन गया हे।
इसी कारण अब अमेरिका पाक से अपना दामन बचाना चंाहता है। ंपंरन्तु पाक को अमेरिका के दामन ंसे दूर हटने पर अब ंचंींन का मजबूत साथ मिल गया है। अपने जंजाल से मुक्ति के लिए अंमेरिका अब पाक ंपर आतंकियों को संरक्षण देने का आरोप लगा रहा है । जबकि हकीकत यह है कि ंपाक से अधिंक गुनांहगार खुद अमेरिका है। ंअब अमेरिका में अफगानिस्तान में मिल रही करारी ंचंोटों से ंतिलमिलाते हुए ंपाक ंपर ंअफगानिस्तांनी आतंकियों को संरक्षण देने का आरोप ंलगाया । ं अमे रिका ने दो टूक शब्दों में पाक को चेतावनी दी है कि पाकिस्तान को आतंकवादियों, खासकर हक्कानी नेटवर्क, से रिश्ते खत्म करने होंगे। ओबामा प्रशासन पाक को दी जाने वाली सहायता के भविष्य पर विचार कर रहा है।वहीं ंअमेरिका की सितम से बचने के लिए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी की ओर से बुलाई गई । इसमें पाकिस्तानी सेना और खुफिया एजेंसियों के प्रतिनिधि भी शामिल हुए। बैठक में अमेरिका और पाकिस्तान के बीच तनाव के चलते भविष्य की कार्रवाई पर फैसला लिया ंगया। ंगौरतलब है कि भारतीय संसद पर अंमेरिकी ं द्वारा संरक्षित पाक आतंकियों ने हमला किया तो उस समय तत्कालीन प्रधानमंत्री ंअटल को पाक पर ंसेना की कार्यवाही करने से रोकते हुए अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति बुश ने चेतावनी देते हुए धमकाया था कि अमेरिका इस समयं ंआतंक के खिलाफ ंविश्वव्यापी ंअभियान छेड़े हुए है तथा पाकिस्तान अमेरिका का सहयोगी है, उस पर हमला करना एक प्रकार से आतंकवाद के खिलाफ ंअभियान पर हमला माना जायेगा। आप अपने संसद पर हमले की आड में पाक पर हमला नहीं कर ंसकते ं। एक सांल तक भारतीय फोजें ंसरहद पर ंअपने हुक्मरानों के आदेश की प्रतिक्षा में डटी रही। परन्तु नपुंसक भारतीय हुक्मरानों को इतनी हिम्मत नही ं रही कि अमेरिका को आइना दिखा सके। यही काम अमेरिकी राष्ट्रपति बुश ने कारगिल पं्रकरण में जब ंभारतीय से नां द्वारा पाकिस्तानी घुसपेटियों को ंचारों तरफ से घेर लिया था, तब भी वाजपेयी से इसी तर्ज में बात कर ंअमेरिका ने इन ंअपरंाधियों को सुरक्षित पाक जाने के लिए सुरक्षित रास्ता भारतीय हुक्मराने से दिलाया था। अब ऐसा ही कृत्य ंअपने डब्ंबल ंऐजेन्ट हेडली की गिरंफतारीं ंके अवसरं पर किया। ंकुल मिला कर विश्व शांति पर ग्रहण लगाने के लिए अमेरिका पाक से अधिक गुनाहंगार हे। पाकिस्तान ंको तो ं इंदिरा गांधी के नेतृत्व में ंबग्लादेश बना कर रौंद ही दिया था। ंपरन्तु अमेरिका ने कश्मीर मुद्दे पर ंहवा दे कर यहा बांद के भारतीय सत्तालोलुपु हुक्मरानों को पाक की तरह अपना प्यादा बना कर पश्चिम ऐशिया की शांति को ही नहीं विश्व शांति पर ग्रहण ही लगा दिया । ंअमेरिका ने ंअफगानिस्तान, ंइंराक, ंलीबिया में तो ंसैनिक कार्यवाही करके विश्व ंशांित को रोंदा अब वह ंफिंलिस्तीन मुद्दे पर विश्व जनमत ंकी भावना को रौंद रहा है। 70 से अधिक देशों में अपनी सैन्य उपस्थिति व विश्व बैक तथा नाटों के दम पर पूरे विश्व लोकशाही को रौद कर अंमेरिका ंविश्व की शांति को क्यों ग्रहण लगा रहा हैं? इसी कारण आज अमेरिकी ंअर्थव्यवस्था ही नहीं अमेरिकी पूरे विश्व में संबसे असुरक्षित खंुद को महसूस कर रहे है।

-संसद की चैखट पर 2 अक्टूबर को मनाया जायेगा काला दिवस

-मुजफ्फरनगर काण्ड के अभियुक्तों को द िण्डत न क र पाने से लगा भारतीय व्यवस्था पर सवालिया निशान
-राव मुलायम से बदतर साबित हुए उत्तराखण्डी हुक्मरान
-खण्डूडी क ो 50 हजार मुआवजे व निशंक को आंदोलनकारी तकमा लेने की सुध रही, शहीदों की नहीं
-संसद की चैखट पर 2 अक्टूबर को मनाया जायेगा काला दिवस



मुजफ्फरनगर काण्ड के विरोध मे ं आगामी 2 अक्टूबर को देश विदेश में रहने वाले सवा करोड़ उत्तराखण्डी काला दिवस के रूप में देश की व्यवस्था से 17 साल बाद भी इस काण्ड के दोषियों को सजा न दे पाने के विरोध में मनायेगी। मुख्य समारोह संसद के समक्ष उत्तराखण्ड राज्य गठ न आंदोलनकारी संगठनों द्वारा काला दिवस के रूप में मना कर राष्ट्रपति को रोषयुक्त ज्ञापन सौंपा जायेगा।
ंउत्तराखण्डियों को इस बात से हैरानी है कि प्रदेश के वर्तमान मुख्ंयमंत्री खंडूडी को आंदोलन के दौरान ंमिले 50000 रूपये मुआवजे लेने को तो वे भूल नहीं पाये, परन्तु उनको आंदोलन में प्रदेश के सम्मान व देश की संस्कृति व मानवता को शर्मसार करने वाले मुजफरनगर काण्ड के अभियुक्तों क ो दण्डित करने की सुध तक नहीं आयी। वहीं पूर्व मुख्ंयमंत्रीं निशंक ंको खुद को आंदोलनकारी का तकमा हासिल करने की हडबड़ीं ंरही परन्तु उनको उत्तराखण्ड का यह दर्द कहीं नहीं दिखाई दिया। स्वामीं या तिवारी से आश करना भी मूर्खता होगी। परन्तु जो घडियाली आंसू बहा रहे थे उनका राज देख कर एक ही बात लगी कि ये मुलायम व ंराव से बदतर िनकले।
जिस मुजफ्रपफर नगर काण्ड-94 के अभियुक्तों को इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने मावनता व देश की लोकशाही का कातिल बताया, जिस मुजफ्रपफरनगर काण्ड-94 को इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने तत्कालीन केन्द्र सरकार व राज्य सरकार दोनों को दोषी मानते हुए उनके कृत्य को नाजी अत्याचारों के समकक्ष रखा, जिस मुजफ्रपफरनगर काण्ड के अभियुक्तों को देश की सर्वोच्च जांच ऐजेन्सी सीबीआई, मानवाध्किार आयोग सहित अन्य स्वतंत्रा ऐजेन्सियों ने भी गुनाहगार ठहराया था उस काण्ड के एक भी दोषी को आज इस काण्ड के 17 साल बीत जाने के बाद भी सजा देने में देश की पूरी व्यवस्था अक्षम क्यों हुई। सजा देने की बात तो रही दूर इन अपराध्यिों को देश की व्यवस्था में महत्वपूर्ण पदों पर आसीन कर के एक प्रकार से सम्मानित करके जहां पीडितों की न्याय की आशाओं का निर्ममता से गला घोंटा वहीं दूसरी तरपफ देश की पूरी व्यवस्था पर ही कालिख पोत दिया।
जिस कौन देगा सवा करोड़ देश भक्त उत्तराखण्डियों के इस सवाल का जवाब । शायद कोई नहीं। गत सोलह साल से 2 अक्टूबर के दिन हर साल उत्तराखण्डी संसद की चैखट जंतर मंतर के आगे इसी सवाल को लेकर देश की व्यवस्था के प्रमुख राष्ट्रपति के समक्ष देश की व्यवस्था द्वारा न्याय का गला घोंटने के विरोध् में काला दिवस मनाते हुए एक ज्ञापन भेंट करते हैं। ज्ञापन में देश के राष्ट्राध्यक्ष से एक ही सवाल पूछा जाता है कि क्यों देश की व्यवस्था मुजफ्रपफरनगर काण्ड-94 के अभियुक्तों को दण्डित देने में अक्षम्य है?
इन सोलह साल से राष्ट्रपति को ज्ञापन देते देते उत्तराखण्डियों की न्याय की आशा भी दम तोड़ चूकी है। इन सोलह सालों के ज्ञापनों का मैं प्रमुखता से साक्षी रहा हॅू। सवा करोड़ उत्तराखण्डियों की तरपफ से देश के राष्ट्राध्यक्ष से न्याय की गुहार लगायी जाती रही। परन्तु क्या मजाल इन सोलह सालों में एक भी ज्ञापन का प्रत्युतर देश के व्यवस्था की तरपफ से हमें मिला हो, जिसमें व्यवस्था द्वारा न्याय देने का वायदा किया हो या न्याय न देने का ऐलान ही किया हो।
आज एक सवाल हर उत्तराखण्डियों के जेहन में ही नहीं अपितु देश के प्रबु(जनों के जेहन में भी रह रह कर उठ रहा होगा कि क्या इस देश में आम आदमियों को कोई न्याय है भी नहीं? क्यों सर्वोच्च न्यायालय ने अपनी आंखों के आगे घटित हुई इस विभत्स घटना पर न्याय करने का साहस तक नहीं जुटा पाया। क्यों देश की व्यवस्था अपने सवा करोड़ देशभक्तों को न्याय देने में अपने आपको नपुंसक सा पाती है।
इस काण्ड का दण्ड सर्वोच्च सत्ता ने ऐसा दिया कि इसके बाद देश में राजनैतिक अस्थिरता का माहौल ही छा गया। जनता की नजर में इस काण्ड के दोनों खलनायकों राव व मुलायम पूरी तरह से बेनकाब हो गये। राव का भले ही देहान्त हो गया हो परन्तु आज भी उनके कुकृत्यों से आम उत्तराखण्डी उनके नाम से भी ध्ृणा करता है। मुलायम पर तो महाकाल की वक्रदृष्टि ऐसी पड़ी है की उनको समझ में ही नहीं आ रहा है। वाजपेयी ने राज्य का गठन तो किया परन्तु इसका नाम, राजधनी, क्षेत्रा इत्यादि में ऐसा मक्कड़ जाल बुना की उत्तराखण्ड की आत्मा आज भी उनके इस दंश से व्यथित है, उनकी दशा आज खुद क्या हे। उत्तराखण्ड द्रोह करने की सजा नारायणदत्त तिवारी को इस उम्र में कैसे भोगनी पड़ रही है इसका बखान क्या करें सबको मालुम है। खंडूडी जी को अवसर मिला उन्होंने भी तिवारी की राह पर चल कर उत्तराखण्ड के हितों का गला ही घोंटा, अपने शासनकाल में उन्होंने मुजफ्रपफरनगर काण्ड के अभियुक्तों को दण्डित करने के लिए कोई ठोस पहल तक नहीं की, यही नहीं उनके शासनकाल में इस काण्ड का एक खलनायक को उत्तराखण्ड की ध्रती पर उनके प्रशासन ने लाल कालीन बिछा कर स्वागत करने का दुशाहस किया। उसका दण्ड उनको भोगना पड़ा। जिस राज्य का गठन लोगों ने अपनी शहादतें दे कर किया उस राज्य की राजनैतिक भविष्य को जनसंख्या पर आधारित विधनसभाई परिसीमन को मूक रह कर स्वीकार करने तथा प्रदेश की स्थाई राजधनी गैरसैंण बनाने के बजाय देहरादून बनाने के षडयंत्रा को खंडूडी जी विपफल नहीं कर पाये। कुल मिला कर उनके शासन में उत्तराखण्ड की उन आशाओं पर बज्रपात हुआ जिसके लिए उत्तराखण्ड राज्य का गठन किया गया। उसके बाद अब निशंक मुख्यमंत्राी बने। उनमें को गंभीरता कहीं दूर-दूर तक दिखाई ही नहीं दे रही है। उनसे मैने खुद मुजफ्रपफरनगर काण्ड के अभियुक्तों को दण्डित करने के लिए 84 के सिख दंगों व गुजरात में पफर्जी मुठभेड़ जैसे मामलों में नये सिरे से बने जांच आयोग का गठन करने की मांग की। परन्तु मुझे बहुत ही दुख के साथ यह मालुम हो गया कि उत्तराखण्ड के किसी भी मुख्यमंत्राी को उत्तराखण्ड के मान सम्मान व यहां की जनांकांक्षाओं की कहीं दूर-दूर तक ललक नहीं है। अगर इनमें जरा सा भी जमीर होता तो वे आठ साल तक मुजफ्रपफरनगर काण्ड के अंभियुक्तों को सलाखों की पीछे लाने के लिए दिन रात एक कर दिये होते। परन्तु ये सभी सत्ता के भूखे हैं। सत्ता ही इनके लिए सबकुछ है। इन्हीे के कारण आज उत्तराखण्ड आंदोलनकारियों के हत्यारे को कांग्रेस में ससम्मान सम्मलित किया है व भाजपा सरकार ने मुजफ्रपफरनगर काण्ड के दोषियों को कानूनी संरक्षण देने के लिए न्याय का गला घोंटने वाले को महत्वपूर्ण पद पर आसीन किया हुआ है।
परन्तु ये सभी लोग भूल जाते हैं कि दुनिया की अदालतों के उपर भी एक बड़ी अदालत होती है। जहां हर गुनाहगार को सजा मिलती है। इस अदालत में न तो किसी गवाह व न किसी सबूत की बेसाखियों की जरूरत होती है। इसलिए मुझे विश्वास है कि भले ही ये अपराध्ी दुनिया की इन कमजोर अदालतों की आंखों में ध्ूल झोक कर स्वतंत्रा सा घूम लें परन्तु काल की अदालत में इनको हर हाल में दण्ड मिलेगा। कुछ को मिल रहा है व कुछ को मिलने वाला है। परन्तु सत्तामद में इन्सान को इन्सान न समझने वाले ये हुक्मरान भले ही सत्तामद में कितने ही प्रपंच क्यों न करलें परन्तु इनके पापों का घड़ा अब भर चूका है, इनको इनके गुनाहों की सजा हर हाल में मिलगी। मैने वर्तमान मुख्यमंत्राी निशंक से भी यही सलाह दी है कि भगवान बदरीनाथ अंध्े नहीं है। वे न्याय करते हैं व करेंगे। उनके दर पर न देर है व नहीं अंध्ेर। अपने महान शहीद साथियों की पावन स्मृति को शत् शत् नमन् करते हुए सभी पीड़ितों को एक ही आश्वासन देता हॅू कि महाकाल ही सदा न्याय करता है। इस काण्ड में भी कर रहा है व भविष्य में भी करेगा। एक भी दोषी उसके न्याय से बच नहीं पायेंगे। दोषी ही नहीं जनांकांक्षाओं को रौंदने वाले उत्तराखण्ड के हर हुक्मरान भी महाकाल की अदालत में गुनाहगार हो कर अपनी सजा की याचना करेंगे।
शेष श्रीकृष्ण कृपा। हरि ऊँ तत्सत्। श्री कृष्णाय् नमो।

Sunday, September 25, 2011

खुश रहो मनमोहन पर अमेरिका में ही रहो

खुश रहो मनमोहन पर अमेरिका में ही रहो


आपके इस जन्म दिन पर
और क्या आशीष दें मनमोहन
आपके कुशासन से मरणासन
कभी विश्व के सिरमौर रहे
भारत की दीन हीन जनता।।
ंदेश की जनता का
जीना हराम करके भी
आप सदा खुश रहो
पर भांरत में नहीं
आप अपने प्यारे
अमेरिका में ही रहो
सदा सदा के लिए।।
है प्रभ्ंाु इतनीं कृपा कर दो
अमेरिका के इस मनमोहन से
भारत को मुक्ति दिला दो ।।
देवसिंह रावत (26 सितम्बर 2011 ंप्रात 7.36)

Thursday, September 22, 2011

-देवभूमि की पावनता की रक्षा की फिर भगवान बदरीनाथ ने- निशंक के बाद मनंमोहन को भी जाना होगा

-देवभूमि की पावनता की रक्षा की फिर भगवान बदरीनाथ ने/
-राव, मुलायम, तिवारी, वाजपेयी, खंडूडी व निशंक के बाद मनंमोहन को भी जाना होगा/


भगवान बदरीनाथ ने फिर एक बार देवभूमि उत्तराखण्ड की पावनता की रक्षा की। मैने कई बार यहां के अपनी सत्तालोलुपता में अंधे हो कर देवभूमि के हितों का गला घोंटने वाले सत्तांधों को समझाया ही नहीं प्यारा उत्तराखण्ड में भी प्रमुखता से सम्पादकीय में प्रकाशित भी किया था कि वे भगवान बदरीनाथ को अंधा न समझें। अपने नापाक कृत्यों के कारण उत्तराखण्ड विरोधी रहे राव, मुलायम, वाजपेयी, तिवारी, खंडूडी ंके बाद ंअब निशंक को भी महाकाल ने ऐसा ंसबक सिखाया की उनको दिन में तारे नजर आये। मैं भगवान श्रीबदरीन केदार, भगवान ंनरसिंह, भगवान सदाशिव, जगत जननी माॅं भवानी, महा काल भैरव, सहित उत्तराखण्ड के कण कण में विराजमान सिद्व-मुनियों, ग्वेल देवता, बजरंगबली हनुमान ंसहित 33 करोड़ ंदेवी देवंताओं को नमन् करता हॅू कि जो काम यहा की व्यवस्था नहीं कर पायी वो इन जनविरोधी ंतत्वों को समय समय पर दण्डित करके आप लोगों ने ंदेवभूमि के निवासियों को जहां उबारां ंवहीं गंगा यमुना की ंपावन अवतरण स्थली उत्तराखण्ड की ंपावनता की रक्षा ंकी, मैं ंसवा करोड़ उत्तराखण्डियों की तरफ से उत्तराखण्ड की पावनता की रक्षा के लिए सदैव सक्षात काल व ंमुक्ति दाता परम ब्रह्म भगवान श्रीकृष्ण्ंा स्वरूप सभी देवी देवताओं को शतः शतः नमन् करता हूॅ। ंक्योंकि इन सत्तांधों से उत्तराखण्ड की रक्षा के लिए मैने संसद की चैखट पर राज्य गठन जनांदोलन में अपने 6 साल के निरंतर धरना प्रदर्शन ंआंदोलन रूपि तपस्या में भी ंआपने ही ंलाज रखी थी, आज भीं आप ंलाज रख रहे है। आपके ही ंआर्शीवाद से आज भी मैं विश्व लोकशाही ं, मानवता व भारतीय संस्कृति का परचम फहराने के लिए कुरूक्षेत्र की इस धरती से ंप्यारा उत्तराखण्ड नामक सुदशर््ंान चक्र से जनविरोधी मनमोहन संहित तमाम सत्तांधों ंको आपंके आदेशानुसारं बेनकाब कर रहा हॅू।

उत्तराखण्ड में रहते धोनी, परिमार्जन व राणा तो गुमनामी की गर्त में जमीदोज रहते

-उत्तराखण्ड में प्रतिभाओं का नहीं अपितु प्यादों का होता सम्मान/
- उत्तराखण्ड में रहते धोनी, परिमार्जन व राणा तो गुमनामी की गर्त में जमीदोज रहते/
-उत्तराखण्ड राज्य के सपने को साकार करने के लिए देश विदेश में प्रतिभा का परचम फेहराने वालों का मार्ग दर्शन ले सरकार/


भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान महेन्द्रसिंह धोनी, यिश्व प्रसिद्व निशानेबाज जसपाल राणा, विश्व प्रसिद्व शतरंज के खिलाड़ी परिमार्जन नेगी व अंडर 19 में भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान उन्मुक्त चंद सहित उत्तराखण्ड मूल के प्रसिद्व खिलाड़ी जो आज विश्व में भारत की खेल प्रतिभा का परचम फहरा रहे हैं अगर उत्तराखण्ड की धरती पर ही ं रहते तो उनको गुमनामी के गर्त में ंजीने के लिए अभिशापित होना पड़ता। क्योंकि उत्तराखण्ड में खेल में ही नहीं शासन प्रशासन सहित तमाम क्षेत्र में प्रतिभाओं का सम्मान व महत्वपूर्ण स्थान देने के बजाय यहां भाई भतीजाबाद, जातिवाद-क्षेत्रवाद व भ्रष्टाचार का शर्मनाक सम्राज्य बन गया है। यहां राज्य गठन के ग्यारह सालों में यहां के हुक्मरानों ने यहां कीं प्रतिभाओं का शर्मनाक उपेक्षा कर यहा ंपर अपने आकाओं व अपने निहित स्वार्थ के प्यादों को ंशंासन प्रशासन के महत्वपूर्ण संस्थानों में ंथोप दिये हैं। इससे यहां की स्थापित प्रतिभाओं में भारी कुंठा व्याप्त है। राज्य गठन के बाद यहां प्रथम मुख्यमंत्री स्वामी से लेकर प्रथम निर्वाचित मुख्यमंत्री तिवारी का खासमखास सर्वशक्तिमान सलाहकार, जो तिवारी के नाम परं ंएकक्षत्र सत्ता ंको संचालित कर रहे थे। ंईमानदारी का डंका बजवाने वाले ंमुख्यमंत्री खंडूडी को भी उत्तराखण्ड के प्रबुद्व जनों के बजाय ं ंउडिसा के सारंगी का अंध मोह प्रदेश पर किसी ग्रहण से कम नहीं लगा। इसके साथ ही प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे निशंक की बात ही क्या करें उन पर तो भाजपा, संघ व उसकी आनुवांसिक संगठनों का इतना दवाब था कि वो प्रदेश की सेवा करने की बजाय इनकी ही सेवा बजाते रहे।
उत्तराखण्ड राज्य गठन के ग्यारह साल होने पर भी प्रदेश की सत्ता में आसीन रहे किसी भी सरकार ने प्रदेश की दिशा व दशा के लिए वर्षों तक संघर्षरत प्रमुख राज्य गठन आंदोलनकारी संगठनों तक ंसे संवाद करने की सुध नहीं रही। जबकि राज्य गठन के बाद प्रदेश की सत्ता में आसीन प्रथम से लेकर हर सरकार का प्रथम दायित्व होता कि वह उन तमाम प्रमुख आंदोलनकारी संगठनों को प्रदेश की दिशा व दशा पर तथा राज्य के नव निर्माण पर उनके विचार, सुझाव व संकल्पनाओं ंको आमंत्रित करते, राज्य आंदोलनकारियों की एक पखवाडे की इस आशय की महत्वपूर्ण चिंतन शिविर का सरकार ने आयोजन करना चाहिए था। इस पर खुली बहस, चिंतन व मंथन के बाद प्रदेश की दिशा तय की जाती।
इसके साथ उत्तराखण्ड के विंकास में हिमाचल के अनुभव का ंलाभ उठाया जाता। प्रदेश के विधानसभा में हिमाचल के ंप्रथम मुख्यमंत्री ंव ंउसकी सुशासनयुक्त विकास की ठोस नींव रखने वाले यशवंत सिंह परमार के सपनों को धरती पर मजबूती से उतारने वाले हिमाचल के पूर्व मुंख्यमंत्री वीरभद्र को प्रदेश में सुशासन व ंविकास की ठोस नींव रखने के लिए एक सप्ताह का विशेष ंमार्गदर्शन सत्र का आयोजन किया जाना ंचाहिए। इसके साथ प्रदेश में हिमाचल की तरह की कृषि, बागवानी, फल उत्पादन ंआदि में ंजमीनी ंमार्गदर्शन के लिए हिमाचल में विशेष प्रशिक्षण लेने की आज भी जरूरत है ।
ंउत्तराखण्ड सरकार को चाहिए था कि वे ंसाठ लाख से अधिक देश विदेश में पलायन कर चूके प्रतिभावान उत्तराखण्डियों, खासकर जो विभिन्न क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा का डंका बजा चूके हैं प्रदेश के नवनिर्माण के लिए उनकी ंसेवाओं का ंविशेष लाभ उठाया जा सकता था। प्रदेश में किस प्रकार से नौकरशाही पर लगाम कसनी हे उसके लिए दिल्ली नगर निगम के विख्यात ंकमीशनर रहे बहादूर राम टम्टा, जिनकी प्रतिभा से विश्व प्रसिद्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी भी कायल थी, का मार्ग दर्शन लिया जा सकता था। उंत्तराखण्ड राज्य गठन के बाबजूद यहां की पुलिस का ंचरित्र ंभी अपने पूर्ववर्ती राज्य उत्तरप्रदेश से भी बदतर हो गया। उत्तराखण्ड की पुलिस में व्याप्त भ्रष्टाचार व दिशाहिनता पर अंकुश लगाने के लिए दिल्ली पुलिस के आर्थिक अपराध ंके आयुक्त रहे ंभारतीय पुलिस सेवा के ंवरिष्ठ अधिकारी ंदिनेश भट्ट की सेवाओं से लाभांन्वित होना चाहिए था। ंवहीं प्रदेश की पटरी से नीचे उतर चूकी न्याय व्यवस्था को ंप्रदेश हितों की रक्षा के लिएं स्थापित करने के लिए सर्वंोच्च न्यायालय के वरिष्ट अधिवक्ता अवतार सिंह रावत ंका मार्गदर्शन की नितांत ंजरूरत है। प्रदेश की ंसंवाद ंव्यवस्था को ंसही दिशा देने के लिए देश ंके सबसे ईमानदार व वरिष्ठ पत्रकारों में अग्रणीय डा गोविन्द सिंह की सेवाओं से लाभान्वित होना चहिए था। उत्तराखण्ड के उत्पादों का विदेश में व्यापार के द्वार खोलने के लिए भारतीय विदेश व्यापार सेवा के सबसे ईमानदार उच्चाधिकारी रंहे अतिरिंक्त महानिदेशक विदेश व्यापार महेश चन्द्रा की सेवाओं से लाभान्वित ंकिया जा सकता था। प्रदेश में पर्यावरण व ग्लोबल वार्मिग से बचाव के लिए एक गंगा यमुना ंजल-जंगल व पंर्यावरण की ठोस नीति बनाने के लिए संयुक्त राष्ट्र संघ की नोबेल सम्मान से सम्मानित समिति के वरिष्ठ वैज्ञानिक ंएच एंस कर्पवान ंकी प्रतिभा से लाभान्वित होना चाहिए था। ंप्रदेश में कला, संगीत को दिशा देने के लिए नरेन्द्रसिंह नेगी, हीरासिंह राणा व चन्द्रसिंह राही का मार्ग दर्शन ंलिया जाना चाहिए । प्रदेश में देव भाषा संस्कृत का विश्व में परचम फहराने के लिए विश्व के अग्रणी संस्कृति विद्वान व दिल्ली संस्कृत अकादमी के डेढ़ दशक तक संस्कृत का ंपरचम फेहराने वाले श्रीकृष्ण सेमवाल ंकी सेवायें ली जानी चांिहए थी। वहीं प्रदेश को ऊर्जा प्रदेश बनाने के लिए दशकों तक हाइथ्रो प्रोजेक्टों को ंदेश भर में ंबनाने का कीर्तिमान स्थापित करने वाले हाइथ्रो पावर ंकारपोरेशन ंके एमडी रहें ंगजेन्द्र रावत की सेवाओं से लाभान्वित किया जाना चाहिए। उत्तराखण्ड की शिक्षा प्रणाली में सुधार के लिए डा खडक सिंह बलदिया, प्रोफेसर पुष्पेश पंत, ंजवाहर लाल नेहरू विश्व विद्यालय के ंपूर्व प्राफेसर डा विमल , भारतीय विद्याभवन के पूर्व प्रद्यानाचार्य जी एस नेगी ंका सांझा मार्ग दर्शन लिया जा सकता था। परन्तु प्रदेश के हितों की रक्षा का काम करने व प्रदेश की प्रतिभाओं को स्थान देने के बजाय ंदिल्ली के आकाओं के रिश्तेदारों, प्यादों व ंसंकीणर््ंा मानसिकता के लोगों को थोप कर प्रदेश के हितों के साथ घोर खिलवाड़ किया जा रहा है। बाहरी व निहित स्वार्थ में अंधे हुए लोग केवल उत्तराखण्ड को अपनी तिजोरी भरने के अलावा अगर कुछ करते हैं तो वह है प्रदेश की पूरी व्यवस्था पर ग्रहण लगाने का काम ही किया। स्वयं मेने दर्जनों पत्रकारों के बीच पूर्व मुख्यमंत्री ंनिशंक ने जब कहा कि ये तो प्रदेश के विकास पर चार चांद लगा रहे है। जब मेने तत्कालीन मुख्यमंत्री निशंक का ध्यान इस तरफ ंखिंचा तो वे बहुत ही कुर्सी की धनक से ंइस ंबात को नये सिरे से ही नकारने लगे। परन्तु ंहकीकत यह है उत्तराखण्ड गठन के बाद अगर किसी की सबसे अधिक शर्मनाक उपेक्षा हुई। यहां की उत्कृष्ठ प्रतिभाओं को नजरांदाज करके अपने नक्कारे प्यादों को आसीन किया । राज्य गठन के इन ग्यारह सालों में प्रदेश की सरकारों ने उत्तराखण्डी हितों परिसीमन, गेरसैंण राजधानी बनाने, मुजफरनगर काण्ड प्रकरण व भ्रष्टाचार आदि का कोई जनहितों के लिए ंकोई ईमानदारी से एक रत्ती भर का काम नहीं किया। अंत में मेरे मस्तिष्क में एक ही बात क्रोंध रही है कि उत्तराखण्ड में प्रतिभा की नहीं जातिवाद-क्षेत्रवाद , भाई भतीजाबाद व भ्रष्टाचार का ही बोलबाला हे। यहा ंपर प्रतिभायें दम तो़ड रंही है। जो प्रदेश से बाहर ंबस गये हैं उनंकी प्रतिभायें ही विश्व में भारत का नाम रोशन कर रही है। ंवह तो भगवान श्रीबदरीनाथ, नरसिंह, भैरव, ंजगदम्बे, हरि हर आदि ंदेवी देवताओं का अभिशाप ही राव, मुलायम, तिवारी, खण्डूडी व निशक जैसे सत्तालोलुपुओं की आशाओं पर बज्रपात ंकर दण्डित करते ंहै । एक सवाल मेरा आपसे भी है कि ंहम कब तक इन सत्तालोलुपुओं को उत्तराखण्ड रौंदने के लिए ंखुली छूट देंगे। राज्य गठन के लिए संसद पर निरंतर 6 साल तक धरना देने का ऐतिहासिक धरना प्रदशर््ंान ंकरने के बाद आज मैं इस मुकाम पर पंहुचा की ंउत्तराखण्डियों के हितों की यहां स्थापित भाजपा व कांग्रेस को कोई ंफ्रिक तक नहीं है । हमें अपने राज्य का निर्माण के ंिलए अब कांग्रेस व भाजपा की बैशाखियों की जरूरत नहीं अपितु अपनी माटी के दर्द वाला मशीहा अपने बीच में से ही तराशना होगा। तभी उत्तराखण्ड राज्यं गठन के शहीदों व आंदोलनकारियों के सपनों के आदर्श उत्तराखण्ड राज्य का गठन साकार होगा। शेष श्रीकृष्ण कृपा। हरि ओम तत्सत्। श्री कृष्णाय् नमो।

Tuesday, September 20, 2011

उत्तराखण्ड की जनता की नजरों में कुशासक ही नहीं मीडिया भी बेनकाब

उत्तराखण्ड की जनता की नजरों में कुशासक ही नहीं मीडिया भी बेनकाब
देहरांदून(प्याउ)। उत्तराखण्ड में ं भाजपा व कांग्रेस के भ्रष्टाचारी कुशासन से उत्तराखण्ड की रक्षा के लिए ंचलाये जा रहे उत्तराखण्ड रक्षा मोर्चे के भ्रष्टाचार विरोधी रेलियों में उमड़ी भीड़ की खबरों को इलेक्ट्रोनिक मीडिया द्वारा कवरेज करने के बाबजूद ंन दिखाये जाने से ंजनता में ंमीडिया जहां पूरी तरह बेनकाब हो चूकी है वहीं लोगों को साफ लग ंरहा है कि विज्ञापन के लिए ंसत्तासीनों को खुश करने ंया सत्तासीनों के इशारों पर यह ंमीडिया का लोकशाही का गलाघोंटने वाला आत्मघाति चेहरा देख कर लोग भौंचंक्के हैं। निशंक राज की तरह विरोधियों की खबरों ंकंो गांयब ंकरने की खण्डूडी ं राज में चलं रही कलाकारी व महारथ को देख कर ंभी लोगों को भाजपा के सुशासन रूपि बदलाव पर ही ंप्रश्नचिन्ह लग गया है। ंगौरतलब है कि ंभाजपा राज में हो रहे ंशर्मनाक भ्रष्टाचार पर भ ाजपा आला नेतृत्व की शर्मनाक मौन से ंआहत हो कर पूर्व सांसद ले. जनरल तेजपालसिंह रावत ने उत्तराखण्ड की भ्रष्टाचार से रक्षा के लिए उत्तराखण्ड रक्षा मोर्चा ंबनांया। इसमें प्रदेश के शीर्ष लोक गायक नरेन्द्रसिंह नेगी, पूर्व आईएएस. सुरेन्द्रसिंह पांगती, मेजर जनरल शैलेन्द्र राज बहुगुणा सहित दर्जनों ले. जनरल, मेजर जनरल आदि सेना के वरिष्ठ ंसेवानिंवृत अधिकारियों के साथ प्रदेश के लिए समर्पित समाजसेवी, प्रबुद्वजन, छात्रं, महिलायें ंवं राजनेता जुड़े हुए है। इसंकी रेलियों में भारी संख्ंया में उमड़ी भीड़ से पूर्व सैनिक बाहुल्य प्रदेश की कमान चुनाव ंसे ऐनवक्त पहले ंजनता की नजरों में पहले से ही ंउतर चूके पूर्व मुख्ंयमंत्रंी खंण्डूडी कंांे मुख्यमंत्री बना कर ंअपना जनाधंांर बचाने की नापाक ंकोंशिश की। परन्तु इसंके बाबजूद भाजपा से जनता का मोह इस क दर भंग हो गया है कि खंडूडी के सत्तासीन होेने के बाबजूद 12 ंसितम्बर को ही वरिष्ठ भाजपा नेता व टिहरी जनपद के जिला ंपंचायत अध्यक्ष ंरतन सिंह ंगुनसोला ने भाजपा से इस्तीफा देने का ऐलान कर दिया। देहरादून, श्रीनगर, ंहल्द्वानी, ंटिहरी के बाद 19 ंसितम्बर को ंधुमाकोट व 20 सितम्बर को ंकोटद्वार में आयोजित हजारों की जनता युक्त विशाल रेलियों को ंकवरेज करने के बाबजूद ंभ्रष्टाचार को मिटाने का दंभ भरने वाला व ंलोकशाहीं का चैथा स्तम्भ कहंलंाने वाला ंमीडियां ने लोकशाही के प्राण जनता कंे आक्रोश को न दिखा कर ंजनता के ंिवश्वास को ही डिगा दिया । ंउत्त्ंाराख्ंाण्ड में नेताओं के इशारे पर या स्वयं नेताओं को खुश करने के लिए सत्ता विरोधियों की महत्वपूर्ण खबरें भी ंसियार के सिंग की तरह गायब करने का निकृष्ठ ंव लोकशाही की हत्या करने वाला कृत्य करने के लिए मीडिया दागदार हो गयी है। आज ंप्रींट मीडिया व इलेक्ट्रोनिक मीडिया जहां देश में अण्णा हजारे का गुणगान करके अपने आप को लोकशाही का ंझण्डेबरदार बता रहे हैं वहीं देवभूमि उत्तराखण्ड में उनका भ्रष्टाचारी सत्ता समर्थक व जनभावनाओं को रौंदने का काम बहुत ही निर्लज्जता से कर रहा है। ंपरन्तु मीडिया की इन नापाक हरकतों व भ्रष्ट अलोकशाही सत्ता प्रतिष्ठानों के इन कुकृत्यों का उत्तराखण्ड की जनता मुंहतोड़ जवाब देना जानती है वह आगामी विधानसभा चुनाव में मीडिया के इन लाडलों को उनकी औकांत बता कर मीडिया को पूरी तरह से बेनकाब करेगी।

नव प्रभात शुभ प्रभात हो

नव प्रभात शुभ प्रभात हो


नव प्रभात शुभ प्रभात हो
जड़ चेतन का कल्याण हो
सूरज की पहली किरण से
मनमंदिर को आलौकित कर दो
ऐसे सुविचार संचारित हो मस्तिष्क में
शुभागमन परम शांति का हो जग में
मिटे राग द्वेष का तम इस जग से
प्रभु ऐसी सुप्रभात ही अब कर दो
जग में इस जीवन यात्रा में
हर ंतन मन को निर्मल कर दो
ंइस जग में बहे सदा निर्मल प्रेम की गंगा
श्रीकृष्ण ऐसा ही वरदान दे दो जग को ।।
(देवसिंह रावत -21 सितम्बर 2011 ंप्रातः सात बजे)

निशंक सरकार के भ्रष्टाचार पर पर्दा डाल रही है खंडूडी सरकार क्यों मेहरवान है अण्णा के सिपाहेसलार

ऐसे लोकायुक्तों से कैसे लगेगा भ्रष्टाचार पर अंकुश/
-एनजीओ व मीडिया को जनलोकपाल से बाहर रखने से बढ़ेगा भ्रष्टाचार/
-निशंक सरकार के भ्रष्टाचार पर पर्दा डाल रही है खंडूडी सरकार क्यों मेहरवान है अण्णा के सिपाहेसलार/


देहरादून(प्याउ)। जन लोकपाल से देष मेें भ्रश्टाचार पर अंकुष लगाने का दावा करने वाले अण्णा हजारे के सहयोगी ंअरविन्द केजरीवाल व प्रषांत भूशण भले ही उत्तराखण्ड में भ्रश्टाचार में आकण्ठ फंसी भाजपा की सरकार की पीठ थपथपा रहे हो परन्तु ंजमीनी हकीकत यह है कि देश में भ्रश्टाचार पर अंकुष लगाने के लिए बनाये गये लोकायुक्त जब खुद ही कर्नाटक के लोकायुक्त की तरह खुद ही भ्रश्टाचारियों को संरक्षण देने व बढ़ाने के काम में लग जायें तो कानून क्या करेगा। जिस समय अण्णा हजारे के प्रमुख्ंा सिपंाहे सलार देहरादून में प्रदेष ंभाजपा सरकार के नये निजाम खंडूडी व उनकी सरकार द्वारा ंबनाये जाने वाले ंलोकपाल ंबिल ंपर संतोश जता रहे थे उसी समय कर्नाटक में ंमहज ंदो माह पहले बने लोकायुक्त षिवराज पाटिल ंद्वारंा अपने पद से ंदो आवासीय ंभूखण्डों के ंआवंटन के ंविवाद में फंसकर इस्तीफा देने के लिएं मजबूर हो गये। उत्तराखण्ड में जो लोकायुक्त बनाया उनके बारंे में ंकहने की ंजरूरत ही नहीं। ंऐसे में एक बात ंउभर कर सामने का आरही है ंकि ंकानून बनाने मात्र या लंोकायुक्त ंनियुक्त करने मात्र से भ्रश्टाचार पर अंकुष नहीं लग ं सकता है, जब तक भ्रश्टाचार पर अंकुष लगाने के लिए ंबनायंां गयंा लंोकायुक्त व्यक्तिगत रूप से ईमानदार नहीं है। ं खंडूडी जी व उनकी सरकार से प्रदेष की जनता को भ्रश्टाचार रोकने की भले ही काफीं आषायें हों परन्तु हकीकत यह है कि वे ंइस मामले में कितने ईमानदार हैं इसका प्रमाण उनके ंपूर्व मुख्ंयंमंत्री कार्यकाल में सांरगी व निषंक ंप्रेम से ंपूरी तरह से बेनकाब हो जाता है। हाॅं यह दूसरी बात हे कि दूर दराज के ंआम लोगों को आज भीं ऐसा भ्रम है कि खंण्डूडी जी भ्रश्टाचार को मिटा कर ंप्रदेष को भ्रश्टाचार मुक्त बना दें। पंरन्तु मुझे ं इसमें कहीं दूर-दूर ं तक ंआषा कि किरण तक नजर नहीं आती। अगर वास्तव में ंखण्डूडी जी ंको उत्तराखण्ड से जरा सी भी लगाव होता या भ्रश्टाचार मिटाने के लिए जरा सी भी ललक होती तो वे अभी तक ंअपने ंपूर्ववर्ती मुख्यमंत्री निषंक के कार्यकाल में प्रदेष को व खुद ंउनको व्यथित करने वाले प्रकरणों की सी बीआई जांच ंकराने की षिफारिस कर देते। परन्तु उंनकी प्राथमिकतायें षायद न तो कहीं दूर दूर तक उत्तराखण्ड हैं व नहीं ंप्रदेष को भ्रश्टाचार पर अंकुष लगाने की। उनकी प्राथमिकता तो केवल ंमुख्यमंत्री की कुर्सी पर आसीन ंहोना व ंआगामी विधानसभा चुनाव में हर हाल में भाजपा को विजय बना कर अपनी कुर्सी मजबूत करना है। जबकि पूर्व मुख्यमंत्री निषंक ने उन पर अपनी सरकार व खुद को बदनाम करने के लिए ंहाई कोर्ट में विवादं खडा करने का आरोप न केवल केन्द्रीय नेतृत्व के समक्ष लगाया अपितु उन्होंने ईटीवी पर भी इसका ंखुले आम प्रसारण भीं कराया। परन्तु सत्तासीन होने के बाद खंडूडी इस मामले को दफन कर अब भ्रश्टाचार पर अंकुष ंलंगाने के लिए कानून बनाने की बात कर रहे है। कानून भी बनाये परन्तु जनविष्वास को फिर से बहाल करने के लिए अपने भरत के कारनामों को ंजब तक वे ंअविलम्ब सीबीआई से जांच करने के लिए सिफारिष नही ं करेंगे तो लोग उनकी तमाम कार्यवाहियों को हवाई ही मानेंगे।
संविधानिक पदों पर आसीन लोकायुक्त भी किस प्रकार भ्रष्टाचार को पर अंकुश लगाने के बजाय भ्रष्टाचार मिटाने की ही आशाओं पर ग्रहण लगा सकते हैं इसका एक जीता जागता उदाहरण है कर्नाटक के लोकायुक्त उन्होंने पदभार ग्रहण करने के महज डेढ़ महीने बाद ही इस्तीफा देना पडा, कर्नाटक के लोकायुक्त शिवराज पाटिल नियमों का उल्लंघन कर दो आवासीय सहकारी सोसायटी से दो रिहाइशी भूखंडों का आवंटन हासिल करने से जुड़े एक विवाद में फंस गए हैं। बहरहाल, उच्चतम न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश पाटिल ने खुद का बचाव करते हुए कहा है कि इनमें से एक भूखंड उनकी पत्नी ने खरीदा था। न्यायमूर्ति पाटिल को वर्ष 1994 में कर्नाटक राज्य न्यायिक विभाग कर्मचारी आवास भवन सहकारी सोसायटी ने अल्लालासंद्रा में 9,600 वर्ग फुट का भूखंड आवंटित किया था। व्यालीकावल आवासीय निर्माण सहकारी सोसायटी ने वर्ष 2006 में नगावारा में करीब 4,012 वर्ग फुट का एक अन्य भूखंड उनकी पत्नी अन्नपूर्णा को आवंटित किया। इसी विवाद का स्तह पर आने पर उनको अपने पद से इस्तीफा देना पडा। वहीं उत्तराखण्ड में अण्णा या रामदेव की टीम से लोगों को कोई आशा नहीं है। जिस प्रकार ने रामदेव प्रदेश को भ्रष्टाचार की गर्त में धकेलने के लिए कुख्यात रहे भाजपा के पूर्व मुख्यमंत्री निशंक से निकट अच्छे सम्बंध रहे थे यही नहीं बार बार उन से निशंक सरकार के भ्रष्टाचार पर मूक रहने के लिए प्रश्न उठने के बाबजूद वे इस मामले में मुंह खोलने से सदा कतराते रहे। वहीं दूसरी तरफ अण्णा की टीम के प्रमुख सिपाहे सलार शांति भूषण तो स्टर्जिया मामले में सरकारी पक्ष को जायज ठहराते हुए हाईकोर्ट में भ्रष्टाचार को उजागर कर रही जनहित याचिका कत्र्ता के वकील उत्तराखण्ड राज्य गठन जनांदोलन के अग्रणी नेता अवतार सिंह रावत को ही डपट रहे थे । अण्णा टीम द्वारा देहरादून में जा कर स्टर्जिया, जल विधुत परियोजनाओं, कुुभ घोटालों सहित अन्य घोटालों में लिप्त रही भाजपा सरकार द्वारा इन काण्डों के मुख्य दोषी को कटघरे में खडा करने के बजाय लोगों की आंखों में धूल झोंकने के उद्देश्य से बनाये जा रहे जन लोकपाल विधेयक पर ही चर्चा करने में उलझे रहे। प्रदेश की जनता को आशा थी कि ये अण्णा टीम तो मुंह खोलेगी। परन्तु वे भी देहरादून में एनजीओ वालों व सरकारी आवभगत में ही घिरे रहे। वे भी बाबा राम देव की तरह भ्रष्टाचार से व्यथित उत्तराखण्डियों के स्वर में अपना स्वर मिलाने के बजाय प्रदेश को भ्रष्टाचार की रसातल में धकेल रहे भाजपा सरकार के कुशासन के जाल में फंसे रहे। भले ही भाजपा ने मात्र चुनाव जीतने के उदेश्य से अपना निजाम बदला, परन्तु भाजपा ने प्रदेश की नीति व नियत नहीं बदली। इसके बाबजूद आज तक न तो रामदेव उनसे घूस की मांग कर रहे मंत्री का नाम ही उजागर कर पाये व नहीं अण्णा की टीम प्रदेश को स्टर्जिया, जल विद्युत,कुम्भ आदि घोटालों से दागदार करने वालों को सिकंजे में जकड़ने की सीधी दो टूक मांग तक बदले हुए निजाम से कर पाये। जनता को उनसे आशा थी कि वे भ्रष्टाचार पर पर्दा डालने के लिए भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए कानून बनाने की बात कर रहे भाजपा के नये निजाम से भाजपा शासनकाल में हुए शर्मनाक घोटालों के दोषियों को कटघरे में खडा करने की दो टूक फटकार लगाते। परन्तु लगता है दूर के ढोल सुहाने लगते है। क्या अगर जनलोकपाल भी प्रदेश में गठित 56 घोटालों की जांच कर रहे आयोग की तरह होगी तो उससे किसको न्याय की आश रहेगी। यह तो जनलोकपाल विधेयक की बात करते हुए भ्रष्टाचार के प्रतीक बन चूके एनजीओ व मीडिया को जनलोकपाल के दायरे से बाहर रखने वाले अण्णा व भारतीय सरकार ही बता सकती है। भाजपा शासनकाल में जिस कुम्भ के आयोजन में तत्कालीन मुख्यमंत्री नोबेल पुरस्कार की मांग तक करने की धृष्ठता कर रहे थे उस भाजपा सरकार ने कुुभं में सनातनी धर्मावलम्बियों को पतित पावनी गंगा के पानी के बजाय कैसे पावन जल से स्नान कराया। अगर यही काम कोई कांग्रेसी या अन्य सरकार करती तो अभी भाजपा समर्थित संगठन उस सरकार को जनाजा तक निकाल देते। परन्तु अपनों के पापों को ढकने का जो कृत्य भाजपा व संघ संगठन करते हैं उसी के कारण आज भाजपा की स्थिति दयनीय हो गयी है।

-मोदी के उपवास ने बेनकाब किया भारतीय राजनेताओं का धृर्णित चेहरा

-उपवास से उपहास तक
-मोदी के उपवास ने बेनकाब किया भारतीय राजनेताओं का धृर्णित चेहरा


इस सप्ताह गुजरात में मोदी के उपवास ने भारतीय राजनीति के मुखोटे को पूरी तरह से बेनकाब कर दिया। भले ही कांग्रेसी व भाजपाई इस उपवास को अपने अपने राजनैतिक नजरिये से समर्थन व विरोध करने में तुले हों परन्तु हकीकत यह है मोदी के उपवास ने भारतीय राजनेताओं के चेहरे पर लगे लोकशाही के नकाब को पूरी तरह से बेनकाब कर दिया।
उपवास भारतीय संस्कृति का आत्म चिंतन व मंथन के साथ साथ सांस्कृतिक व धार्मिक परंपरा का अभिन्न अंग रहा है। परन्तु जब से देश में छद्म लोकशाही का पदार्पण हुआ तब से देश में उपवास का अर्थ ही बदल गया। गुजरात में जन्मे विश्व मानवता के अटल धु्रव बन कर दमकने वाले महात्मा गांधी ने उपवास को अपना महत्वपूर्ण अस्त्र बना कर देश की शताब्दियों से मृतप्रायः आत्मा को जागृत करने का ऐतिहासिक कार्य किया था। वे चिंतन व प्रायश्चित के लिए भी इस प्रकार का उपवास करते थें परन्तु आज आजादी
के 64वें साल में ही देश की राजनीति इतनी दुषित हो गयी कि उपवास का अर्थ ही आत्म चिंतन व पावनता से बदल कर उपहास व रागद्वेष बदलने वाला बन गया। उपवास वास्तव में एक आध्यात्मिक परंपरा है। इसका सदप्रयोग प्रायः व्यक्ति अपने मन को राग, द्वेष इत्यादि से दूर होने व मन को निर्मल करने के लिए किया जाता है। इससे विश्व कल्याण के साथ परमात्मा से आत्मा के मिलन व चिंतन के लिए किया जाता है। परन्तु आज गांधी से मोदी तक उपवास के 64 साल के इस सफर में उपहास तक बदल जाना एक छोटी घटना ना हो कर वास्तव में भारतीय राजनीति व आम जनमानस का असली चेहरे को बेनकाब करने की शर्मसार करने वाली घटना है। मोदी के उपवास ने साबित कर दिया कि आज भारत में राजनेताओं में इतनी सी भी नैतिकता नहीं रह गयी कि वे अपनी अहं से उपर उठ कर आम जनमानस के लिए समर्पित होने के लिए आत्म चिंतन भी कर पाये।
सवाल गांधी या मोदी का नहीं अपितु यहां सवाल है कि भारतीय संस्कृति का। भारतीय संस्कृति के विराट दामन में अनादि काल से कितने गांधी व मोदी पैदा हो कर काल कल्वित हो गये। शायद इसका सहज ज्ञान भी भारतीयों को नहीं है। मोदी को भी देश के आम आदमियों की तरह लोकतंात्रिक अधिकार है कि वे उपवास करे परन्तु उपवास करने वाले व्यक्ति से आम भारतीय जनमानस इतनी तो उम्मीद करता रहा कि वे अपने कृत्यों का बहुत ही निष्पक्ष व राग द्वेष से मुक्त हो कर चिंतन करके अपने भावी जीवन में उपवास के बाद नये ढंग से निष्पक्ष व देश हित में समर्पित करे।
हालांकि अहमदाबाद में अपनी छवि में बदलाव का प्रयास करते हुए गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने साम्प्रदायिक सौहार्द के लिए तीन दिन से रखे गए उपवास का 19 सितम्बर सोमवार को समापन किया। उन्होंने दावा किया कि उनकी सरकार ने अल्पसंख्यक और बहुसंख्यक समुदाय के बीच कोई भेद नहीं किया। हालांकि, भाजपा की ओर से खुद के प्रधानमंत्री पद की दौड़ में होने के मुद्दे को वह टाल गए। मोदी ने वोट बैंक की राजनीति खत्म करने का संकल्प जताते हुए कहा कि इस सद्भावना मिशन के पीछे प्रेरणा राष्ट्रनीति है, न कि राजनीति। इससे पहले, मोदी ने शाम करीब सवा छह बजे अपना उपवास तोड़ दिया। वहीं इस अवसर पर गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने यहां अपने तीन दिनी सद्भावना उपवास के दौरान पिराना गांव में एक छोटी दरगाह के मौलाना सैयद इमाम शाही सैयद ने कल यहां मोदी के उपवास स्थल पर मंच पर जाकर उनसे मुलाकात की थी। मौलाना ने मोदी को टोपी पहनने की पेशकश की पर मुख्यमंत्री ने विनम्रता से उसे पहनने से मना कर दिया और उसके बजाय शॉल ओढ़ाने को कहा। इमाम ने मोदी को शॉल ओढ़ाया जिसे उन्होंने मंजूर कर लिया। सैयद ने आज कहा, ‘ मोदी का टोपी पहनने से इनकार करना मेरा नहीं बल्कि इस्लाम का अपमान है।’ उन्होंने कहा,‘ मैं सद्भावना मिशन के बारे में सुनकर आया था और जब मैंने उन्हें टोपी की पेशकश की तो उन्होंने कहा कि वह इसे नहीं पहनेंगे। मोदी को टोपी पहनी चाहिए या नहीं। परन्तु जब वे शाॅल ओढ़ सकते हैं तो उनको टोपी भी एक पल के लिए पहन लेनी चाहिए थी। इससे आहत व्यक्ति व विरोधियों को यह प्रचारित करने का मोका नहीं मिलता की मोदी मुसलमानों से नफरत करते है। वेसे राजनीति में टोपी पहनने से कोई आदमी पाक नहीं होता। परन्तु जब समाज में व्यक्ति के खिलाफ दुराग्रह हो तो उन दुराग्रहों को दूर करने का फर्ज हर समाज के उस व्यक्ति का होता है जो समाज, प्रदेश या देश की रहुनुमाई करता है। मोदी को दंगों में निर्दोष मारे गये लोगों को भी श्रद्वाजलि देनी चाहिए थी। आहत समाज से माफी भी मांगनी चाहिए थी। वहीं उन्होंने साफ शब्दों में ऐलान भी करना भी चाहिए था कि देश में किसी भी व्यक्ति को देश की अस्मिता से खिलवाड करने की छूट नहीं दी जा सकती है चाहे वह अल्पसंख्यक हो या बहुसंख्यक । देश की अखण्डता से खिलवाड करने वालो के साथ केवल देशद्रोहियों का सा सलूक किया जाना चाहिए। कुल मिला कर मोदी ने उपवास के पावन अवसर पर आहत समाज के जख्मों पर मरहम लगाने का अवसर अपनी अहं के कारण गंवा दिया। मोदी को साफ समझ लेना चाहिए कि हिन्दू धर्म कभी द्वेष, नफरत की इजाजत नहीं देता। उनकी दृढ़ इच्छा शक्ति व ईमानदारी तथा सही दिशा में राज चला कर उन्होंने आम भारतीयों के दिलों में जगह बना ली है। परन्तु उनको साफ समझ लेना चाहिए कि उनको प्रधानमंत्री बनने की राह में मुसलमान या विरोधी दल नहीं अपितु भाजपाई व उनके राजग गठबंधन ही सबसे बड़े अवरोधक है। उनके प्रधानमंत्री बनने के मार्ग में आज भाजपा के बंद कमरों में बेठ कर गोटियां फिट करने वाले नेत्री व नेता अभी से ऐसा ताना बाना बना चूकी है कि मोदी की राह में ऐसे अवरोध खडे हो जाय। जबकि मोदी को चाहिए था कि उपवास को सादगी, निष्पक्ष व रागद्वेष से मुक्त हो कर करते। गांधी के उपवास ने आम भारतीयों को उनसे अपने आप को इसी लिए जोड़ा की उनके उपवास में पावनता, सादगी व नैतिकता होती थी। जो न तो मोदी के उपवास में दिखाई दी, न रामदेव व नहीं शंकरसिंह बघेला के उपवासों में दिखाई दी। आज के नेता पंचतारा संस्कृति व रागद्वेष मानसिकता के हो गये है। रागद्वेष से युक्त हो कर उपवास करना एक प्रकार उपवास का उपहास उडाना ही है।

इस सप्ताह गुजरात में मोदी के उपवास ने भारतीय राजनीति के मुखोटे को पूरी तरह से बेनकाब कर दिया। भले ही कांग्रेसी व भाजपाई इस उपवास को अपने अपने राजनैतिक नजरिये से समर्थन व विरोध करने में तुले हों परन्तु हकीकत यह है मोदी के उपवास ने भारतीय राजनेताओं के चेहरे पर लगे लोकशाही के नकाब को पूरी तरह से बेनकाब कर दिया।
उपवास भारतीय संस्कृति का आत्म चिंतन व मंथन के साथ साथ सांस्कृतिक व धार्मिक परंपरा का अभिन्न अंग रहा है। परन्तु जब से देश में छद्म लोकशाही का पदार्पण हुआ तब से देश में उपवास का अर्थ ही बदल गया। गुजरात में जन्मे विश्व मानवता के अटल धु्रव बन कर दमकने वाले महात्मा गांधी ने उपवास को अपना महत्वपूर्ण अस्त्र बना कर देश की शताब्दियों से मृतप्रायः आत्मा को जागृत करने का ऐतिहासिक कार्य किया था। वे चिंतन व प्रायश्चित के लिए भी इस प्रकार का उपवास करते थें परन्तु आज आजादी
के 64वें साल में ही देश की राजनीति इतनी दुषित हो गयी कि उपवास का अर्थ ही आत्म चिंतन व पावनता से बदल कर उपहास व रागद्वेष बदलने वाला बन गया। उपवास वास्तव में एक आध्यात्मिक परंपरा है। इसका सदप्रयोग प्रायः व्यक्ति अपने मन को राग, द्वेष इत्यादि से दूर होने व मन को निर्मल करने के लिए किया जाता है। इससे विश्व कल्याण के साथ परमात्मा से आत्मा के मिलन व चिंतन के लिए किया जाता है। परन्तु आज गांधी से मोदी तक उपवास के 64 साल के इस सफर में उपहास तक बदल जाना एक छोटी घटना ना हो कर वास्तव में भारतीय राजनीति व आम जनमानस का असली चेहरे को बेनकाब करने की शर्मसार करने वाली घटना है। मोदी के उपवास ने साबित कर दिया कि आज भारत में राजनेताओं में इतनी सी भी नैतिकता नहीं रह गयी कि वे अपनी अहं से उपर उठ कर आम जनमानस के लिए समर्पित होने के लिए आत्म चिंतन भी कर पाये।
सवाल गांधी या मोदी का नहीं अपितु यहां सवाल है कि भारतीय संस्कृति का। भारतीय संस्कृति के विराट दामन में अनादि काल से कितने गांधी व मोदी पैदा हो कर काल कल्वित हो गये। शायद इसका सहज ज्ञान भी भारतीयों को नहीं है। मोदी को भी देश के आम आदमियों की तरह लोकतंात्रिक अधिकार है कि वे उपवास करे परन्तु उपवास करने वाले व्यक्ति से आम भारतीय जनमानस इतनी तो उम्मीद करता रहा कि वे अपने कृत्यों का बहुत ही निष्पक्ष व राग द्वेष से मुक्त हो कर चिंतन करके अपने भावी जीवन में उपवास के बाद नये ढंग से निष्पक्ष व देश हित में समर्पित करे।
हालांकि अहमदाबाद में अपनी छवि में बदलाव का प्रयास करते हुए गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने साम्प्रदायिक सौहार्द के लिए तीन दिन से रखे गए उपवास का 19 सितम्बर सोमवार को समापन किया। उन्होंने दावा किया कि उनकी सरकार ने अल्पसंख्यक और बहुसंख्यक समुदाय के बीच कोई भेद नहीं किया। हालांकि, भाजपा की ओर से खुद के प्रधानमंत्री पद की दौड़ में होने के मुद्दे को वह टाल गए। मोदी ने वोट बैंक की राजनीति खत्म करने का संकल्प जताते हुए कहा कि इस सद्भावना मिशन के पीछे प्रेरणा राष्ट्रनीति है, न कि राजनीति। इससे पहले, मोदी ने शाम करीब सवा छह बजे अपना उपवास तोड़ दिया। वहीं इस अवसर पर गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने यहां अपने तीन दिनी सद्भावना उपवास के दौरान पिराना गांव में एक छोटी दरगाह के मौलाना सैयद इमाम शाही सैयद ने कल यहां मोदी के उपवास स्थल पर मंच पर जाकर उनसे मुलाकात की थी। मौलाना ने मोदी को टोपी पहनने की पेशकश की पर मुख्यमंत्री ने विनम्रता से उसे पहनने से मना कर दिया और उसके बजाय शॉल ओढ़ाने को कहा। इमाम ने मोदी को शॉल ओढ़ाया जिसे उन्होंने मंजूर कर लिया। सैयद ने आज कहा, ‘ मोदी का टोपी पहनने से इनकार करना मेरा नहीं बल्कि इस्लाम का अपमान है।’ उन्होंने कहा,‘ मैं सद्भावना मिशन के बारे में सुनकर आया था और जब मैंने उन्हें टोपी की पेशकश की तो उन्होंने कहा कि वह इसे नहीं पहनेंगे। मोदी को टोपी पहनी चाहिए या नहीं। परन्तु जब वे शाॅल ओढ़ सकते हैं तो उनको टोपी भी एक पल के लिए पहन लेनी चाहिए थी। इससे आहत व्यक्ति व विरोधियों को यह प्रचारित करने का मोका नहीं मिलता की मोदी मुसलमानों से नफरत करते है। वेसे राजनीति में टोपी पहनने से कोई आदमी पाक नहीं होता। परन्तु जब समाज में व्यक्ति के खिलाफ दुराग्रह हो तो उन दुराग्रहों को दूर करने का फर्ज हर समाज के उस व्यक्ति का होता है जो समाज, प्रदेश या देश की रहुनुमाई करता है। मोदी को दंगों में निर्दोष मारे गये लोगों को भी श्रद्वाजलि देनी चाहिए थी। आहत समाज से माफी भी मांगनी चाहिए थी। वहीं उन्होंने साफ शब्दों में ऐलान भी करना भी चाहिए था कि देश में किसी भी व्यक्ति को देश की अस्मिता से खिलवाड करने की छूट नहीं दी जा सकती है चाहे वह अल्पसंख्यक हो या बहुसंख्यक । देश की अखण्डता से खिलवाड करने वालो के साथ केवल देशद्रोहियों का सा सलूक किया जाना चाहिए। कुल मिला कर मोदी ने उपवास के पावन अवसर पर आहत समाज के जख्मों पर मरहम लगाने का अवसर अपनी अहं के कारण गंवा दिया। मोदी को साफ समझ लेना चाहिए कि हिन्दू धर्म कभी द्वेष, नफरत की इजाजत नहीं देता। उनकी दृढ़ इच्छा शक्ति व ईमानदारी तथा सही दिशा में राज चला कर उन्होंने आम भारतीयों के दिलों में जगह बना ली है। परन्तु उनको साफ समझ लेना चाहिए कि उनको प्रधानमंत्री बनने की राह में मुसलमान या विरोधी दल नहीं अपितु भाजपाई व उनके राजग गठबंधन ही सबसे बड़े अवरोधक है। उनके प्रधानमंत्री बनने के मार्ग में आज भाजपा के बंद कमरों में बेठ कर गोटियां फिट करने वाले नेत्री व नेता अभी से ऐसा ताना बाना बना चूकी है कि मोदी की राह में ऐसे अवरोध खडे हो जाय। जबकि मोदी को चाहिए था कि उपवास को सादगी, निष्पक्ष व रागद्वेष से मुक्त हो कर करते। गांधी के उपवास ने आम भारतीयों को उनसे अपने आप को इसी लिए जोड़ा की उनके उपवास में पावनता, सादगी व नैतिकता होती थी। जो न तो मोदी के उपवास में दिखाई दी, न रामदेव व नहीं शंकरसिंह बघेला के उपवासों में दिखाई दी। आज के नेता पंचतारा संस्कृति व रागद्वेष मानसिकता के हो गये है। रागद्वेष से युक्त हो कर उपवास करना एक प्रकार उपवास का उपहास उडाना ही है।

‘अब कथगा खैल्यो’ से किया भाजपा सरकार का भ्रष्टाचारी चेहरा बेनकाब

-नौछंमी नारेण से कांग्रेसी विकासपुरूष को बेनकाब करने के बाद महान गायक नरेन्द्र सिंह नेगी ने/
‘अब कथगा खैल्यो’ से किया भाजपा सरकार का भ्रष्टाचारी चेहरा बेनकाब

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विगत विधानसभा चुनाव में जिस प्रकार से उत्तराखण्ड के अग्रणी गायक नरेन्द्रसिंह ंनेगी ंके कालजयी प्रस्तुति ‘ नौछमी नारैण’ की विडियो एलबम व गीत ने कांग्रेस के वरिश्ट नेता व उत्तराखण्ड के तत्कालीन मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी के तथाकथित विकाष पुरूश के दषकों से पहने नकाब को बेनकाब करके उनका असली चेहरा जनता के सम्मुख रख कर कांग्रेस से सत्ताच्युत करने में ऐतिहासिक सफलता हासिल की थी। वहीं आगामी विधानसभा चुनाव में प्रदेष में आसीन भाजपा के षासनकाल में मची भ्ंा्रश्टाचार की अंधीं लूट को बेनकाब करने वाला नरेन्द्र सिंह नेगी जी ने एक ओर कालंजयी गीतमाला ‘अब कथगा ख्ंौल्यो’ को बना कर भाजपा का तथा कथित ंसुषासन व रामराज्य वाले नकाब को बेनकाब कर कर दिल्ली दरवार के आला भाजपा नेताओं में भी हडकंप मचा दिया । नेगी जी के गीत की ही गूंज से भाजपा आला कमान इतना आषंकित हो गया ंिक उन्होंने ंआनन फाननं में ंसौ चुहे खा कर बिल्ली चली हज को की तर्ज पर ं उत्तराखण्ड को भ्रश्टाचार के गर्त में धकेलने के लिए ंकुख्ंयात हुए ंमुख्यमंत्री के पद पर उन खंडूडी को ही आसीन करने का हास्यास्पद कार्य किया जिन्होंने ंनिषंक को प्रदेष ंके मुख्यमंत्री के पदं पर ंआसीन करने में ंसबसे घिनौना कार्य किया। अब अपने मुखोटे को विधानसभा चुनाव से पहले पूरीं तरह से बेनकाब होते देख कर भाजपा आला नेतृत्व ने आननफानन में ंमुख्यमंत्री बदल कर ंजनता की आंखों में धूल झोंकने का ंकार्य किया। परन्तु उत्तराखण्ड की जनता की तरह उत्तराखण्ड की संस्कृति के षीर्श ंगायक नरेन्द्रसिंह नेगी पर भी कोई प्रभाव नहीं पड़ा ओर उन्होंने भाजपा की कुटिल चाल को भांपते हुए
‘ अब कथ्या खेला’ गीतमाला का विडियो एलबम आगामी विधानसभा चुनाव से पहले निकालंने के लिए कमर कस ली है। महान गायक नरेन्द्रंसिंह नेगी ने कहा कि अपनी मातृभूमि की भ्रश्टाचार व कुषासन से रक्षा करने के अपने प्रथम दायित्व से वे किसी भी कीमत पर पीछे नहीं हट सकते हैं। इस एलबम के बनने से पहले ही इसमें गाये गये ‘कमीशन की मीट-भात, रित को रैलो.. बस कर भंडि न सपोड़, अब कतिगा खैलो’ आदि गीतो की गूंज से भाजपा के मठाधीषों के उसी प्रकार कंपकपी ंमची हुई है जैसे गत विधानसभा चुनाव में कांग्रेसी नेता तिवारी व उनके प्यादों ंमें ‘आज भी नौछमी नारैण’ के गीत क्या इस गीत का नाम सुनते ही मची रहती है। ंउत्तराखण्डी गीत संगीत ही नहीं ंसंस्कृति व राजनीति के अग्रणी ध्वज वाहक बने नरेन्द्र सिंह ंनेगी ने ंउत्तराखण्ड की हर पहलुओं को गहरायी को छूने वाले गीत आज कई दषकों से देष विदेष में रहने वाले करोड़ों उत्तराखण्डियों के ंसुख दुख के सच्चे साथी बने हुए ंहैं। नरेन्द्रसिंह नेगी ने बिना किसी लालच व संकीर्ण स्वार्थों से उपर उठ कर उत्तराखण्ड राज्य ंजांदोलन से लेकर यहंां की हर समस्या व पहलुओं पर अपने गीतों को स्वर दे कर ंजनता का ऐसा मार्ग दर्षन किया जिसको करने में यहां पर सत्ता पर काबिज भाजपा व कांग्रेस ंसहित तमाम राजनैतिक एवं बुद्विजीवी, समाजसेवी आदि करने में भी नितांत असफल रहे। भले ही खंडूडी को चुनाव के चंद माह पहले प्रदेष का मुख्यमंत्री बना कर भाजपा उनर्को इंमानदार व साफ छवि का कुषंल प्रषासक बताने का ंढपोर षंख्ंा बजा रही है परन्तु उत्तराखण्ड की जनता को अब खंडूडी के नाम पर बेवकूफ ंनही ं बनाया जा सकता है। क्योंकि उत्तराखण्ड की जनता ने मुंख्यमंत्री पद पर आसीन रहते हुए जो भ्रश्टाचार, अलोकषाही व कुषासन की निर्मम ंसा ंरगी बजायी थी उसी ंसे व्यथित हो कर उत्तराखण्डियों ने पूरे प्रदेष से लोकसभा चुनाव में ंभाजपा का पूरी तरह से सफाया करके एक प्रकार से खण्डूडी के कुषासन के खिलाफ अपना गुस्सा प्रंदर्षित किया था, इसी को भांप कर भाजपा नेे खंडूडी को प्रदेष की सत्त्ंाा से बेदखल किया परन्तु ंख्ंांडूडी ने उत्तराखण्डियों को संबक सिखाने के लिए कभी अपने सबंसे नापसंद नेता निषंक को प्रदेष ंका मुख्यंमंत्री बना कर उत्तराखण्ड की जनता के भविंश्य के साथ खिलवाड़ करने का अक्षम्य अपराध किया। षायद इसी रूप ंको देख कर नरेन्द्रसिंह ंनेगी जेसे अग्रणी गायक का मोह अब खंडूडी से पूरी तरह से भंग हो चूका है। इसी लिए वे आगामी विधानसभा चुनाव से पहले राम राज्य ंव ंसुषासन का ढपोर षंख बजा कर जनता के विष्वास को हरने वाली भाजपा का असली भ्रश्टाचारी चेहरा भी सामने लाने ंके लिए कृतसंकल्प है। हालांकि इस केसेट में मनमोहन सरकार के कुषासन व भ्रश्टाचार पर भी कडे प्रहार किये गये परन्तु जिस प्रकार से भ्रश्टाचार का तांडवं ंभाजपा की प्रदेष सरकार में उत्तराखण्ड में मचाई उसने उत्तराखण्ड ंके लोगों के जन जीवन को ंपूरी तरह से ंप्रभावित कर दिया है। ऐसे में आगामी विधानसभां चुनाव में प्रदेष की जनता हर हाल में विष्वासघातियों व भ्रश्टाचारियों को संरक्षण देने वाली भाजपा को ंप्रदेष से सफाया करना चाहती है। वहीं ंआगामी लोकसभां चुनाव में कांग्रेस को भी सबक सिखाने के लिए प्रदेष की जनता अभी से मन बना चूकी है। भले ही नरेन्द्र नेगी अब इस केसट का नाम थोडा सा बदल दें परन्तु लोगों के जहन में एक बात साफ अमिट हो गयी कि अब कितना ंलूटोगे नेताओं उत्तराखण्ड को। उत्तराखण्ड की इस महान सेवा करने के लिए महान गायक नरेन्द्रंसिंह नेगी को षतः ष्ंातः प्रणाम।
षेश श्रीकृश्ण कृपा। हरि ओम तत्सत्। श्रीकृश्णाय् नमो।

Sunday, September 18, 2011

मुजफ्फरनगर काण्ड-94 के दोषियों को सजा देने के बजाय शर्मनाक संरक्षण देने वाली व्यवस्था के खिलाफ रोषयुक्त ज्ञापन

मुजफ्फरनगर काण्ड-94 के दोषियों को सजा देने के बजाय शर्मनाक संरक्षण देने वाली व्यवस्था के खिलाफ रोषयुक्त ज्ञापन




श्रीमती प्रतिभा देवीसिंह पाटिल जी,
महामहिम राष्ट्रपति -भारत
नई दिल्ली
महोदया,

ज्ञापनः-भारतीय संस्कृति व लोकशाही को कलंकित करने वाले मुजफ्फरनगर काण्ड-94 के दोषियों को
सजा देने के बजाय शर्मनाक संरक्षण देने वाली व्यवस्था के खिलाफ रोषयुक्त ज्ञापन

जय हिन्द! जैसे की आपको विदित ही होगा कि देश की एकता, अखण्डता व विकास के लिए समर्पित रहे ‘उत्तराखण्ड राज्य गठन जनांदोलन’ में गांधी जयंती की पूर्व संध्या 1 अक्टूबर 1994 को, 2 अक्टूबर 1994 को आहुत लाल किला रेली में भाग लेने आ रहे शांतिप्रिय हजारों उत्तराखण्डियों को, मुजफ्फरनगर स्थित रामपुर तिराहे पर अलोकतांत्रिक ढ़ग से बलात रोक कर जो अमानवीय जुल्म, व्यभिचार व कत्लेआम उत्तर प्रदेश की तत्कालीन मुलायम सिंह सरकार व केन्द्र में सत्तासीन नरसिंह राव की कांग्रेसी सरकार ने किये, उससे न केवल भारतीय संस्कृति अपितु मानवता भी शर्मसार हुई। परन्तु सबसे खेद कि बात है कि जिस भारतीय गौरवशाली संस्कृति में नारी को जगत जननी का स्वरूप मानते हुए सदैव वंदनीय रही है वहां पर उससे व्यभिचार करने वाले सरकारी तंत्र में आसीन इस काण्ड के अपराधियों को दण्डित करने के बजाय शर्मनाक ढ़ग से संरक्षण देते हुए पद्दोन्नति दे कर पुरस्कृत किया गया।
सबसे हैरानी की बात है कि जिस मुजफ्फरनगर काण्ड-94 को इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने मानवता पर कलंक बताते हुए इसे शासन द्वारा नागरिकों पर किये गये बर्बर नाजी अत्याचारों के समकक्ष रखते हुए इस काण्ड के लिए तत्कालीन मुजफ्फनगर जनपद(उप्र) के जिलाधिकारी व पुलिस अधिकारियों को सीधे दोषी ठहराते हुए इनके खिलाफ कड़ी कार्यवाही करने का ऐतिहासिक फैसला दिया था। यही नहीं माननीय उच्च न्यायालय ने केन्द्र व राज्य सरकार को उत्तराखण्ड के विकास के प्रति उदासीन भैदभावपूर्ण दुरव्यवहार करने का दोषी मानते हुए दोनों सरकारों को यहां के विकास के लिए त्वरित कार्य करने का फैसला भी दिया था। जिस काण्ड पर देश की सर्वोच्च जांच ऐजेन्सी सीबीआई ने जिन अधिकारियों को दोषी ठहराया था, जिनको महिला आयोग से लेकर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग दोषी मानता हो परन्तु दुर्भाग्य है कि इस देश में जहां सदैव ‘सत्यमेव जयते’ का उदघोष गुंजायमान रहता हो, वहां पर उच्च न्यायालय के ऐतिहासिक फैसले के बाद अपराधियों व उनके आकाओं के हाथ इतने मजबूत रहे कि देश की न्याय व्यवस्था उनको दण्डित करने में आज 17साल बाद भी अक्षम रही है। भारतीय व्यवस्था के इसी बौनेपन से आक्रोशित देश विदेश में रहने वाले सवा करोड़ उत्तराखंडी 1994 से निरंतर आज तक देश की व्यवस्था के शीर्षपदों पर आरूढ़ सत्तासीनों की सोई हुई आत्मा को जागृत करने के लिए एवं उनको उनके दायित्व बोध कराने के लिए निरंतर 2 अक्टूबर को गांधी जयंती के दिन काला दिवस मना कर न्याय की गुहार लगाते है
इस काण्ड से पीड़ित उत्तराखण्ड की सवा करोड़ जनता को आशा थी कि राज्य गठन के बाद उत्तराखण्ड की राज्य सरकार इस काण्ड के दोषियों को सजा दिलाने को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का काम करेगी। परन्तु हमारा दुर्भाग्य रहा कि वहां पर स्वामी, कोश्यारी, तिवारी, खंडूडी व निशंक जैसे पदलोलुप नेता मुख्यमंत्री की कुर्सी पर आसीन रहे। इनके शासन में इस काण्ड के अपराधियों को दण्डित करने के बजाय उनको संरक्षण देने की शर्मनाक कृत्य किया गया।
महोदया, हमें आपकी देश भक्ति व न्यायप्रियता पर गर्व है परन्तु आश्चर्य है कि अभी तक आपने एक महिला होते हुए भी महिलाओं के साथ भारतीय शासन व्यवस्था द्वारा किये गये जघन्य अत्याचार पर न्याय करने के लिए अपने प्रभाव का क्यों सदप्रयोग नहीं किया। हमे आशा है कि अब भी आप अपने अन्तर आत्मा की आवाज सुन कर देश की व्यवस्था व मानवता को कलंकित करने वाले इस काण्ड के अपराधियों को दण्डित करने का कार्य करेंगी।
आपसे न्याय की यही आश लगाये सवा करोड़ उत्तराखण्डियों की तरफ से न्याय की एक फरियाद!

उत्तराखण्ड आंदोलनकारी संगठनों की समन्वय समिति
उत्तराखण्ड जनता संघर्ष मोर्चा उत्तराखण्ड जन मोर्चा उत्तराखण्ड राज्य लोकमंच उत्तराखण्ड महासभा
एवं म्यर उत्तराखण्ड सहित उत्तराखण्ड के लिए समर्पित संगठन

Saturday, September 17, 2011

उत्तराखण्ड के लिए नहीं अपितु अपनी कुर्सीं ंके लिए चिंतित रहते है भाजपा -कांग्रेस के नेता

-उत्तराखण्ड रक्षा मोर्चा की हुंकार से भयभी भाजपा व कांग्रेस के नेता पर्वतीय सीट छोड़ मैंदान की तरफ भागने के फिंराक में
- उत्तराखण्ड के लिए नहीं अपितु अपनी कुर्सीं ंके लिए चिंतित रहते है भाजपा -कांग्रेस के नेता
-सैनिक रंहते हुए देष के दुष्मनों से देष की रक्षा की अब भ्रश्टाचारियों से उत्तरांखण्ड की रक्षा करूंगा
-19 को धुमाकोट व 20 सितम्बर को कोटद्वार में मोर्चा की हुंकार रेली
-उत्तराखण्ड रक्षा के लिए समर्पण देख पूर्व सैनिकों व कर्मचारियों ने किया एक माह की पंषन का ऐलान


ंरामनगर(प्याउ)ं। उत्तराखण्ड रक्षा मोर्चा ने भाजपा व कांग्रेस को उत्तराखण्ड का घोर विरोधी बताते हुए इस बात का खुलाषा किया है कि उत्तराखण्ड रक्षा मोर्चा की हुंकार से भयभीत भाजपा कांग्रेस के वरिश्ठ नेता उनके खिलाफ लैन्सीडोनं से ंविधानसभा ंचुनाव लड़ंने से घबरा कर ंमैदानी क्षेत्र की ंतरफ ंभाग ंरहे है। उनके षीर्श नेताओं को खुली चुनौती दी है कि अगर उनमें हिम्मत है तो वे विधानसभा चुनाव नैनीडाण्डा विधानसभा क्षेत्र से लडें। गौरंतलब है कि उत्तराखण्ड रक्षा मोर्चा के अध्यक्ष पूर्व ले. जंनरल ंव पूर्व सांसद तेजपाल सिंह रावत ने ंभाजपा ंव कांग्रेस पर भ्र्रश्टाचारियों ंको ंप्रमुख्ंा संवैधानिक पदों परं आसीन कर प्रदेष को भ्रश्टाचार के गर्त में धकेल कर तबाह करने का आरोप लगाते हुए उत्तराखण्ड की रक्षा के लिए समस्त उत्तराखण्डियों से एकजूट हो कर ‘उत्तराखण्ड रक्षा मोर्चा से जुड़ने का खुला आवाहन किया। ंरामनगर से प्यारंा उत्तराखण्ड से दूरभाश से ंइस ंविशय पर ंबेबाक टिंप्पणी करते ंहुए उत्तराखण्ड रक्षा मोर्चा के ंविषेश सलाहकार व युवा नेता रघुवीर सिंह बिश्ट ने बताया कि 19 ंसितम्बर को धुमाकोट व 20 सितम्बर को कोटद्वार में उत्तराखण्ड रक्षा मोर्चा की विषाल ंरैली है।
उन्होंने साफ षब्दों में कहा कि आज ंउत्तराखण्ड राज्य गठन ंके दस साल बाद यहां की ंसत्ता मेें आसीन रहे भाजपा व कांग्रेस दोनों दंलों को प्रदेष के हिंतों की रत्तीभर भी चिंता नहीं है। ये दोनों दल उत्तराखण्ड के हितों को दाव पर लगा करे आकाओं के संकीर्ण हितों के लिए समर्पित रहते है। इसी कारण इन दलों के आका साफ छवि व जनहितों के लिए समर्पित नेताओं के बजाय घोर पदलालुप, भ्रश्ट व उत्तराखण्ड विरोधी नेताओं को प्रमुख्ंा संवेधानिक पदों पर आसीन कर लोकषाही का गला घोंट रहे हैं। इसी के विरोध में उन्होंने पहले कांग्रेस से सोनिया गांधी के तमाम प्रलोभनों देने के बाबजूद व अब भाजपा के आला नेताओं द्वारा तमाम प्रलोभनों देने के बाबजूद जनता में बेनकाब हो चूके लोगों को राज्य के प्रमुख संवेधानिक पदों पर आसीन करने के विरोध में इस्तीफा ंदे कर उत्तराखण्ड के हितों की रक्षा के लिए एक सषक्त राजनैतिक विलल्प देने के लिए उत्तराखण्ड के तमाम समर्पित बुद्विजीवियों, प्रतिभाओं व पूर्व सैनिक व सेवा निवृत ंसाफ छवि के आला अधिकारियों के मार्गदर्षन में ंउत्तराखण्ड रक्षा मोर्चा का ंगठन कियां हैं। उन्होंने साफ षब्दों में कहा कि ंअगर खंडंूडी जी को प्रदेष के हितों की जरा सी भी चिंता रहती तो वे निषंक सरकार के कार्यकाल में हुए सटर्जिया, जलविद्युत परियोजनाओं व प्रदेष की जमीनों में बड़े स्तर पर हुए घोटाले के दोशियों को ंसजा दिलाने के लिए अब तक सीबीआई की जांच करने का आदेष तक दे देते।
श्री बिश्ट ने कहा कि उत्तराखण्ड के लिए ंसमर्पित प्रतिभाओं का एक ऐसा मोर्चा है जिसने अपने जीवन काल में अपंने कार्यो से उत्तराखण्ड का नाम पूरे विष्व में रोषंन किया है। ंइसी को देखते हुए उत्तराखण्ड गौरव से सम्मानित व उत्तराखण्ड के स्वर सम्राट नरेन्द्रंसिंह नेगी, पूर्व भारतीय प्रषासनिक सेवा के पूर्व अधिकारी सुरेन्द्रंसिंह पांगती, ंमेजर जनरल ष्ंौलेन्द्र राज बहुगुणा, ंभांजपा के ंपूर्व दर्जाधारी व ंजनरल टीपीएस के षीर्श ंसिपांहेसलार ंराजेन्द्र ंभण्डारी, गत सप्ताह ही ंभाजपा ंसे इस्तीफा देने का ऐलान करने वाले टिहरी जिला पंचायत अध्ंयक्ष रतन सिंह गुनसोला, उत्तराखण्ड पूर्व सैनिक संगठन के पीसी थपलियाल व उत्तराखण्ड राज्य गठन जनांदोलन में ंअग्रणी छात्र नेता रहे डा एस पीएस सत्तीं सहित अनैक ंप्रतिभायें मोर्चे को उसकी मंजिल पंरं पंहुचाने के लिए रातदिन एकजुट हंै। ंमोर्चे ने अपनी स्थापना के बाद देहरादून, श्रीनगर, हल्द्वानी व टिहरी में ंअपने ंजो महत्वपूर्ण सम्मेलन किये उंनमें उमड़ी भारी भीड़ से भाजपा ंव कांग्रेस में हडकंप ही मच गया। खासकर श्रीनगर में मोर्चे के सम्मेलन में उमड़ी अपार जनसैलाब की गूंज ने भाजपा व कांग्रेस ंके मठाधीषों ंतक बेचेन कर दिया। इस ंरैली से भाजपा इंतनी भयभींत हुई कि उसको ंअपने ंलाडले रमेष पोखरियाल निषंक को तत्काल बर्खास्त कर ंहडबडी में जनता की नजरों में पहले ही बेनकाब हो चूके ंसंेना के पूर्व मंेजर जनरल भुवनचंद खण्डूडी को मुख्ंयमंत्री बना दिया। चुनाव से ंऐल ंवक्त पहले मुख्ंयमंत्री को बदले जाने की घटना से भाजपाई ही नहीं अपितु कांग्रेस भी हस्तप्रद ंहो कर इसे भाजपा का आत्मघाति कदम मान रहे है। वहीं भाजपा ंआला सुत्रों के अनुसार यह ंबदलाव ंपूर्व सैनिकों ंका भाजपा से हो रहे मोह भंग के नाम पर यह ंकंह कर लिंया गया कि ंटीपीएस ंभी खंडूडी के समर्थक हैं, खंडूडी की ंताजपोषी से उनकी वंापंसी ंतय ंहै। परन्तु भाजपा नेताओं को ंउस समय मुंह की ंखानी पड़ंीं जब टीपीएस ने दो टूक षब्दों में कहां उनकी प्राथमिकता उत्तराखण्ड के हित हैं ंकोई कुर्सीं नहीं। इसके बादं टिहरी सम्मेलन में जब भाजपां के जिला पंचायत अध्ंयक्ष ंरतन सिंह ंगुनसंोलां ने भाजपा से इस्तीफा देने का ऐलान किया तो भाजपा के आला ंनेता भौचंक्के रह गये। टीपीएस ने ंदंो टूक षब्दों में कहा कि ंउनकी प्राथमिकता भाजपा कांग्रेस को बचाने में नहीं अपितु ंउत्तरांखण्ड बचाने में है। ंउन्होंने कहा कि सेना में उन्होंने अपनां ंपूरा ं जीवन देषं की रक्षा के लिए ंसमर्पित किया। सेवा निवृत के बाद वे ंउत्तराख्ंांण्ड की सेवा के लिए कांग्रेस व भाजपा में जुडा, परन्तु वंहां मेेने देखा कि वे उत्तराखण्ड के हितों की ंरक्षा करने के बजायं भ्रश्टाचार व अपने दिल्ली के आकांओं के लिए समर्पित हो ंरहे हैं। जब कांग्रेस व भाजपां ने प्रदेष में ंसंवेधानिक पदों पर गलत ंलोगों को आसीन कियां तो उन्होने तमाम प्रलोभनों को ठुंकराते हुए ंदोनों दलों से इस्तीफा देने में एक पल की भी देर नहीं की। ं

Friday, September 16, 2011

सूरज की किरण का संदेष



सूरज की किरने कहती हैं
ंआओ ओर मुस्कराओ
जीवन को धन्य कर लो,
मिल कर प्रेम बढ़ाओ।
जीवन में हर पल मुस्करा कर
जीवन खुषहाल बनाओ
इक पल इस जीवन से अपने
मातृभूमि के हित में भी बिताओ
-देवसिंह रावत 17ं सितम्बर 2011 सुबह की 10. 30

बिजी जाओ बिजी ंप्रभु श्री ंबदरी केदार

बिजी जाओ बिजी ंप्रभु श्री ंबदरी केदार,
बिजी जाओ बिजी मेरा हरि को हरिद्वार,
गंगा माता रोणी च, रोणी यमुनां मायी
निरदयी कूपूतों लं ंयंख अनर्थ मचायंीं।
बिजी जाओ बिजी मेरा नरसिंह भगवान
बिजी जाओ बिजी मेरो भूमि को भूमियाल


बिजी जाओ बिजी मेरी माता सिंह भवानी
ंबिजी जाओ बिजी मेरा महाकाल भैरव,ं
तुमारी षरण आंयो देवभूमि उत्तराखण्ड
निषाचर बनी गेना राजनीति नेता
ंकोई नौछमी बनी के कोई बनी कलंक
कोई कालनेमी बनी कर मचैणियो च उधम,
अधम से अधम बनी देव भूमि लूटियोणा
त्राही त्राहीं कणियों च देवभूमि वासी
आओ मेरो ंवीर बजरंगी, आंओ ंमेरा ग्वैल
यों की ंलंका ढाह ं कर रक्षा करो महादेव
षराबी, दुराचारी ये च जातिवादी राक्षस
भ्रश्टाचारी बनी कर मचांईं च खुली लूट।
देवभूमि ंस्वंर्ग भूमि बणेल यों न नरक।
बिजी जाओ बिजी ंप्रभु श्री बदंरी केदार
देवसिंह रावत 17 सितम्बर 2011 प्रातः 8.17

वरिश्ठ पत्रकार डा. गोविन्द सिंह ने किया पत्रकारिता को गौरवान्वित

वरिश्ठ पत्रकार डा. गोविन्द सिंह ने किया पत्रकारिता को गौरवान्वित



यह उत्तराखण्ड मुक्त विष्वविद्यालय का ही नहीं उत्तराखण्ड के साथ-साथ विष्व पत्रकारिता का भी सौभाग्य है कि उत्तराखण्ड गौरव से सम्मानित देष के अग्रणी व पत्रकारिता के आदर्ष मानदण्डों में धु्रव के समान सम्मानित वरिश्ठ पत्रकार डा. गोविन्द सिंह ंने उत्तराखण्ड मुक्त विष्वविद्यालय में पत्रकारिता एवं जनसंचार का विभागाध्ंयक्ष बन कर गौरवान्वित किया। देष के षीर्श ंसमाचार पत्रों-इलेक्ट्रोनिक चैनल नवभारत, ंदैनिक हिन्दुस्तान, आजतक, अमर उजाला सहित ंअमेरिका की प्रतिश्ठित पत्रिका आदि में अपनी प्रतिभा का परचम फहरा कर पत्रकारिंता के साथ साथ उत्तराखण्डं,ं भारत व विष्व पत्रकारिता को गौरवान्वित किया। भारतीय भाशाओं को अंग्रेजी की गुंलामी से मुक्ति के लिए ं‘भारतीय भाशा ंसंरक्षण संगठन ंद्वारा संघ लोकसेवा आयोग दिल्ली के द्वार पर एक दषक से अधिक समय तक चलाये गये ऐतिहासिक ंआंदोलन में तथा उत्त्ंाराखण्ड राज्य गठन जनांदोलन के दौरान 1994 से 2000 ंतक राज्य प्राप्ति तक संसद की चैखट पर उत्तराखण्ड जनता संघर्श मोर्चा के सिपाई के तौर पर मैे डा. गोविन्द सिंह ंसहित देष की पत्रकारिता को कंरीब से ंदेखने व संमझने का ंसाक्षी रहां हॅू। भारतीय पत्रकारिता को अपनी प्रतिभा से गौरवान्वित करने के कारण ही दिल्ली की मुख्यमंत्री षीला दीक्षित ने एक दषक पहले उनको दिल्ली के प्रतिंिश्ठंत ंसभागार ‘ंकमानी’ में उत्त्ंाराखण्ड गौरव से सम्मानित किया। उत्तराखण्ड राज्य गठन के लिए व्यापक जनजागरण करने के लिए 1993 से प्रकाषित ‘प्यारा उत्तराखण्ड ’समाचंार पत्र के प्रारम्भ उनके मार्गदर्षन में ही प्रारम्भ किया। जो आज उत्तराखण्ड के हर ंविकासखण्ड से लेकर देष के हर कोने में रहने वाले उत्तराखण्ड के समर्पित समाज का एक सूत्रधार भंी है। मैं ंआषा करता हॅू कि डा गोविन्द सिंह के मार्गदर्षन में उत्तराखण्ड मुक्त विष्वविद्यालय पत्रकारिता के क्षेत्र में आदर्ष कीर्तिमान स्थापित करेगा।

Wednesday, September 14, 2011

Secret of Universe



God is only a real parent, friend, teacher, lover and body guard of every being and universe, never forget him. who know this truth, enjoy of life, who forget this truth always live with tear. www.rawatdevsingh.blogspot.com

IF OBAMA MEET ME

I WILL REQUEST HIM PLS MAKES ONE WORLD GOVT TO SAVE MANKIND AND THIS WONDERFUL UNIVERSE, SEE HOW BADLY COUNTRY WAR WITH ANOTHER COUNTRY. SEE MILLIONS OF MILLIONS KIDS SPOILING THEIR LIFE WITHOUT EDUCATION, MEDICAL, SELTTER, JOB AND RIGHT TO HONOUR. MOST OF RESOURCES OF THIS UNIVERSE SPOILING IN WAR AND WEAPONS, . IF THERE IS ONE WORLD GOVT. ALL RESOURCES TO DEVELOP KIDS AND PEOPLE WHO HAS NOT. ONE WORLD MILITARY WHO PROTECT THIS UNIVERSE FROM ATTACK OF ANOTHER CIVILISATION FROM THIS MILKYWAY. ITS ONLY WAY TO SAVE MANKIND ON THIS EARTH, OTHERWISE PEOPLE QUERRELLING AND WARING WITH ANOTHER COUNTRY AND RELIGIONS. ONLY ONE WAY TO SAVE UNIVERSE. USA HAS LEAD THIS DREAM TO TRUE, NOW UNO OUT OF DATED, OBAMA HAS REAL VISIONARY LEADER OF THIS EARTH WHO CAN MAKE THIS DREAM TRUE, .

निशंक की विदाई की खबरों से प्रफुल्लित उत्तराखण्डियों की खुशियों पर लगा जातिवादी ग्रहण

बार-बार क्यों चढ़ाई जा रही है जातिवादी काठ की हांडियां?
-निशंक की विदाई की खबरों से प्रफुल्लित उत्तराखण्डियों की खुशियों पर लगा जातिवादी ग्रहण/


आखिर 10 सितम्बर को निशंक की विदाई की बेला जो खबरिया चैनलों से छन छन कर आ रही थी वह प्रदेश के मुख्यमंत्री निशंक द्वारा राज्यपाल को अपना इस्तीफा सोंपने के बाद व पूर्व मुख्यमंत्री भुवनचंद खंडूडी द्वारा सांय शपथ ग्रहण करने के बाद साकार हो सकी। निशंक विदाई का प्रदेश की जनता बहुत ही बेसब्री से इंतजार कर रही थी। परन्तु निशंक को बदल कर दो साल पहले ही हटाये गये पूर्व मेजर जनरल खंडूडी को फिर से आसीन किये जाने का भाजपा के आला नेतृत्व का निर्णय, प्रदेश की जनता के गले ही नहीं उतर रहा है। काठ की हांडी बार बार नहीं चढाई जा सकती परन्तु उत्तराखण्ड में भाजपा नेतृत्व बार बार जातिवाद की उस हांडी को चढ़ाने की धृष्ठता कर उत्तराखण्ड में लोकशाही का गला ही घोंट रहा है जिसे प्रदेश की जनता ने ठुकरा दिया है। खासकर खंडूडी पर मुख्यमंत्री के रूप में जातिवाद -क्षेत्रवाद व अलोकशाही के आरोप लगे थे। इसी कारण प्रदेश की जनता ने लोकसभा चुनाव में पूरी तरह से सफाया ही कर दिया था। क्या खंडूडी को सत्तासीन करने के भाजपा नेतृत्व का दाव, जातिवाद -क्षेत्रवाद व भ्रष्टाचार से बुरी तरह से आहत प्रदेश की जनता के जख्मों को कुरेदने वाला आत्मघाति कृत्य ही साबित होगा। प्रदेश में ईमानदार जननेता के नाम से ख्यातिप्राप्त कोश्यारी, वरिष्ठ भाजपा नेता केदार सिंह फोनिया आदि नेताओं को नजरांदाज करके फिर से खंडूडी को ही मुख्यमंत्री बनाने का भाजपा का दाव, प्रदेश में होने वाले विधानसभाई चुनाव में लोकसभा की तरह पूरी तरह आत्मघाति ही साबित होगा। प्रदेश की जनता किसी भी कीमत पर जातिवादी, भ्रष्टाचारी व क्षेत्रवादी नेता के बजाय विकासोनुमुख साफ छवि का जमीनी पकड़ वाला मुख्यमंत्री देखना चाहते हैं। प्रदेश की राजनीति में भाजपा की जातिवादी व थोकशाही उत्तराखण्ड की लोकशाही पर एक प्रकार का ग्रहण ही साबित हो रही है।
गौरतलब है कि मण्डल कमीशन के लागू होने के बाद पूरे भारत में एकमात्र उत्तराखण्ड ही देश का एक राज्य है जहां बहुसंख्यक समाज शासन प्रशासन से षडयंत्र के तहत बलात दूर रखा गया। इसके लिए प्रदेश की जनता को कांग्रेस व भाजपा दोनों ही गुनाहगार नजर आती है। क्योंकि जिस प्रकार से कांग्रेस ने उत्तराखण्ड विरोधी रहे नारायणदत्त तिवारी को मुख्यमंत्री बनाया, जबकि उस समय अधिकांश जनता तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष हरीश रावत को प्रदेश का मुख्यमंत्री देखना पसंद कर रही थी। तिवारी के कुशासन को सबक सिखाते हुए प्रदेश की जनता ने जब कांग्रेस को सत्ता से उखाड़ फेंका तो भाजपा के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष भगतसिंह कोश्यारी को प्रदेश के मुख्यमंत्री बनाने के लिए भाजपा के अधिकांश विधायकों की पहली पंसद होने के बाबजूद जिस प्रकार से भाजपा नेतृत्व ने खंडूडी जी को ईमानदार व कुशल प्रशासक के नाम पर मुख्यमंत्री की कुर्सी पर आसीन किया , तो जनता अपने आप को ठगी सी महसूस करने लगी। उसके बाद प्रदेश के मंत्रीमण्डल गठन से लेकर शासन प्रशासन में खंडूडी जी ने प्रदेश के ईमानदार वरिष्ठ भाजपा नेता केदारसिंह फोनिया व जमीनी नेता मोहनसिंह ग्रामवासी व मुन्ना सिंह चोहान आदि को नजरांदाज किया, उससे प्रदेश की जनता में राष्ट्रवाद के नाम पर भाजपा का घिन्नौना जातिवादी चैहरा देख कर भौचंक्के से रह गये। उनके अलोकशाही प्रवृति से न केवल आम जनता अपितु भाजपा के कार्यकत्र्ता ही नहीं विधायक व उनके मंत्रीमण्डल के साथी भी बेहद आहत थे। भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के नाम पर प्रदेश में भाजपा के उप प्रभारी व सारंगी के गठजोड़ ने राजनीति में उनके कट्टर समर्थकों का भी खंडूरी से मोह भंग हो गया। उनको बदलने के अधिकांश विधायकों की पुरजोर मांग को दर किनारा करते देख कर प्रदेश की जनता ने लोगसभा चुनाव में भाजपा का पूरा सफाया ही कर दिया। उसके बाद जनभावनाओं को सम्मान करने की गुहरा लगाते हुए जब विधायकों की फरियाद को भाजपा आला नेतृत्व ने दरकिनारे कर दिया तो मजबूरी में कोश्यारी ने राज्यसभा की सांसदी से इस्तीफा दे डाला , जिससे मजबूरी में भाजपा नेतृत्व ने खंण्डूडी को तो प्रदेश के ताज से बेताज कर दिया परन्तु जननेता व साफ छवि के भगतसिंह कोश्यारी को, (जो संघ के सबसे वरिष्ठ समर्पित स्वयंसेवक भी हैं,) अपमानित व दण्डित करने के लिए जनता की नजरों में पहले से दूर हुए निशंक को प्रदेश का मुख्यमंत्री बना कर उत्तराखण्डियों को अचम्भित सा कर दिया। प्रदेश की जनता निशंक के तमाम तिकडमों के बाबजूद उनको किसी भी रूप में मुख्यमंत्री के रूप में दिल से स्वीकार नहीं कर पाये।
शायद भाजपा में निशंक के संरक्षक बने भाजपा के आला नेताओं को आगामी विधानसभा चुनाव में निशंक की सरपरस्ती में पार्टी का लोकसभा की तरह सफाया होने की आशंका सत्ता ही रही थी कि उस आशंका को पार्टी द्वारा गुपचुप कराये गये सर्वेक्षण ने तो उनकी नींद ही उडा दी। जैसे ही निशंक सरकार में हो रहे भ्रष्टाचार पर केन्द्रीय नेतृत्व द्वारा मूक समर्थन देने के कारण इस पूर्व सैनिक बाहुल्य प्रदेश में भाजपा के पूर्व सांसद ले. जनरल टीपीएस रावत ने पार्टी से इस्तीफा देकर पूरे प्रदेश में भाजपा का मुखोटा पूरी तरह से बेनकाब कर दिया। इसी भारी दवाब से मजबूर आला नेतृत्व ने रहा सहा जनाधार बचाने के खातिर खंडूडी को प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाने का मन बनाया। इस पर निर्णय चंद मिनटों या दिनों बाद इस फेसले का ऐलान कर सकते है। परन्तु सवाल प्रदेश की उस जनता का है जिसने खंडूडी के अलोकशाही वृति के कारण लोकसभा चुनाव में प्रदेश से भाजपा का सफाया कराया था। प्रदेश की जनता जो प्रदेश के हितों पर खंडूडी द्वारा निशंक को प्रदेश का भाग्य विधाता बनाये जाने से बेहद आहत हैं, वे इस बात से हैंरान थे कि खंडूडी ने जातिवाद व क्षेत्रवाद में धृतराष्ट्र बन कर निशंक को प्रदेश के मुख्यमंत्री की ताजपोशी की थी। जब निशंक ने अपना असली चेहरा खंडूडी को ही दिखाया तो खंडूडी को तब अपनी भूल का अहसास हुआ। परन्तु उनमें इतना नैतिक साहस भी नहीं रहा कि वे प्रदेश की जनता से अपने कृत्य के लिए माफी मांगते हुए निशंक के कुशासन से मुक्ति दिलाने की अपनी तमाम गुहारों को नजरांदाज कर रहे आला नेतृत्व से अपने सीनियर जनरल टीपीएस की तरह दलगत निहित स्वार्थों से उपर उठ कर उत्तराखण्ड की रक्षा के लिए एक वीर सैनिक की तरह खुल कर मैंदान में उतरने का साहस दिखाते। अपनी पदलोलुपता व दलीय स्वार्थो के लिए अपने मुख्यमंत्री काल में भी परिसीमन के दंश से उत्तराखण्डी की रक्षा करने, मुजफरनगर काण्ड के अभियुक्तों को दण्डित कराने, प्रदेश की राजधानी गैरसैंण बनाने आदि महत्वपूर्ण मुद्दो पर शर्मनाक मूक रहे। अब निशंक द्वारा प्रदेश की राजसत्ता से दूर किये जाने पर उनकी जो छटपटाहट दिखी वह केवल पदलोलुपता के लिए। इसमें भ्रष्टाचार का कहीं दूर दूर तक रिस्ता नहीं। अगर वे इतने संवेदनशील होते तो अपने शासनकाल में उन्होंने न तो कांग्रेस शासन काल में हुए 52 घोटालों की जांच के लिए कोई महत्वपूर्ण निर्णय नहीं लिया। यहीं नहीं वे सारंगी के मोह में मूक रहे। केवल उनको एक ही बात का अहसास हुआ होगा कि सत्ता रहते हुए जनता को अपनी जनरली हनक नहीं दिखानी चाहिए। अबस सवाल यह है कि क्या भाजपा नेतृत्व का राष्ट्रवाद केवल जातिवाद ही है। क्या उनको जाति विशेष के अलावा अन्य जाति के लोगों की प्रतिभा पर विश्वास नहीं है। प्रदेश की जनता उनसे एक ही सवाल कर रही है क्या भाजपा सदियों से एक परिवार की तरह आपस मे मिल जुल कर रहने वाले उत्तराखण्डी समाज में जातिवाद का घिनौना जहर अपने संकीर्ण दलीय व जातिवादी संकीर्णता के खातिर घोल रही है। प्रदेश की जनता जनहितों के लिए समर्पित रहे स्व. बहादूर राम टम्टा जेसे नेतृत्व को सहज ही स्वीकार करती रही परन्तु वह कभी उत्तराखण्ड विरोधी रहे तिवारी व संकीर्ण अलोकशाही प्रवृति के भुवनचंद खंडूडी को कतई स्वीकार नहीं कर सकती। निशंक को तो प्रदेश का आम आदमी भी नेतृत्व की बागडोर सोंपने के भाजपा नेतृत्व के निर्णय को अभी तक दिल से स्वीकार नहीं कर पाया। कुल मिला कर भााजपा नेतृत्व का राष्ट्रवाद व भ्रष्टाचार विरोधी असली चेहरा देख कर भौचंक्के ही रह गये है ।
एक बात भाजपा नेतृत्व को समझ लेना चाहिए कि प्रदेश की जनता किसी को भी प्रदेश में भ्रष्टाचार, जातिवाद व क्षेत्रवाद का कलंक लगाने के कृत्य को सहन करने के लिए कभी तैयार नहीं है। प्रदेश में जनता न तो बहुसंख्यकों पर आधारित अंधजातिवाद ही स्वीकार करेगी व नहीं प्रतिभाहीन व जनहितों के विरोधी किसी जातिविशेष का राज ही स्वीकार करेगी। प्रदेश में जाति, क्षेत्र, धर्म व भाई भतीजावाद से आधार पर पक्षपात वाला शासन एक पल के लिए स्वीकार नहीं करेगी। जिन लोगों के दामन भ्रष्टाचार, उत्तराखण्ड राज्य गठन की मूल अवधारणा के खिलाफ कार्य करने व दुराचार से दुषित हो उसे किसी भी कीमत पर प्रदेश का नेतृत्व करने की भाजपा कांग्रेस सहित तमाम राजनैतिक दलों की थोपशाही का पुरजोर विरोध किया जायेगा। खासकर उत्तराखण्डी सदैव स्वाभिमानी हैं उसको धन व पद की धौंस से खरीदने का दीवास्वप्न देखने वालों को सदैव मुंह की ही खानी पड़ेगी। आशा है खंडूडी जी को निशंक प्रकरण से सबक सीखने के बाद अब अपने दूसरे कार्यकाल में पूर्व कार्यकाल में लगे तमाम आरोपों को झुटलाते हुए प्रदेश के हितों की रक्षा के लिए समर्पित हो कर कार्य करेंगे। उनसे प्रदेश की जनता आशा कर रही है कि वे कार्यभार संभालने के एक पखवाड़े के अंदर निशंक सरकार के कार्यकाल में हुए तमाम घोटालों की सार्वजनिक जांच कराते हुए निशंक को मधु कोडा की तरह शिकंजें में जकड़ना चाहिए। शेष श्रीकृष्ण कृपा। हरि ओम तत्सत्। श्रीकृष्णाय नमो।

Tuesday, September 13, 2011

हिन्दी दिवस मनाना देष के षहीदों व सम्मान का घोर अपमान है

भारत में आजादी के 64 साल बाद भी उसी राश्ट्र भाशा सहित भारतीय भाशाओं की षर्मनाक उपेक्षा करके उसी फिरंगी भाशा अंग्रेजी से देष को हांकना देष की आजादी का गला घोटने के समान व देष में लोकषाही व जनतंत्र का निर्मम हत्या करने के समान देषद्रोह है, जिस फिरंगियों ने सेकड़ों साल तक भारत को गुलाम बनाया था। ऐसे में हिन्दी दिवस मनाना देष के षहीदों व सम्मान का घोर अपमान है। www.rawatdevsingh.blogspot.com

Monday, September 12, 2011

-खंडूडी के तारनहार फिर बने जनरल रावत की हुंकार से भौचंक्का भाजपा नेतृत्व

-खंडूडी के तारनहार फिर बने जनरल रावत की हुंकार से भौचंक्का भाजपा नेतृत्व
-खंडूडी कराये निशंक के घोटालों की शीघ्र सीबीआई से जाॅंच कराये
-खंडूडी के मुख्यमंत्री बनने के बाबजूद रक्षा मोर्चा का तेज अभियान से भाजपा नेतृत्व हैरान
-भाजपा व कांग्रेस ने उत्तराखण्ड को बनाया घोटालों का प्रदेश व सचिवालय को दलालो का अड्डा
-टिहरी जिला पंचायत अध्यक्ष गुनसोला ने दिया भाजपा से इस्तीफा
-गायक नरेन्द्रसिंह नेगी ने बताया खण्डूडी को तपीयों घाम


नई टिहरी (प्याउ)। जिस जनरल तेजपाल सिंह रावत के नेतृत्व में गठित उत्तराखण्ड रक्षा मोर्चा की हुंकार से अपने अस्तित्व को बचाने के खातिर भाजपा आला नेतृत्व ने प्रदेश से चुनाव के ठीक पहले हडबड़ी में अपने आंखों के तारे रमेश पोखरियाल को मुख्यमंत्री की कुर्सी से हटा कर पूर्व मेजर जनरल खंडूडी को आसीन करने का दाव चला था, वह दाव भी जनरल तेजपाल रावत की हुंकारं के आगे कुंद होते देख भाजपा व संघ के मठाधीश हस्तप्रद है। क्योंकि संघ व भाजपा नेतृत्व का यह भरोसा दिलाया गया था कि ये सब खंडूडी जी को प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाते ही अपने आप भाजपा में जुड जायेंगे। सुत्रों के अनुसार इसी झांसे में आ कर शायद आला नेतृत्व ने प्रदेश की कमान खंडूडी के कंधों में सोंपी। जिसकी कलई उनके शपथ ग्रहण के तीसरे दिन ही उस समय खुल गयी जब ले. जनरल तेजपाल सिंह रावत के नेतृत्व में उत्तराखण्ड रक्षा मोर्चा के आवाहन पर भाजपा के वरिष्ठ नेता नव जिला पंचायत अध्यक्ष टिहरी रतनसिंह गुनसोला ने भाजपा से इस्तीफा देने का ऐलान करते हुए कडे प्रहार किये । इस अवसर पर टिहरी जिले के जिला पंचायत अध्यक्ष रतन सिंह गुनसोला ने कहा कि जलविद्युत परियोजना के आवंटन में भारी भ्रष्टाचार हुआ है और राज्य के लोगों की अनदेखी की गई है और उनके द्वारा जब आवाज उठाई गई तो उनकी आवाज को दबाने की कोशिश की गई है। इसी सम्मेलन में रक्षा मोर्चा के आला नेतृत्व के साथ भ्रष्टाचार के खिलाफ खुली मुहिम छेड़ने वाले प्रदेश के अग्रणी लोकप्रिय गायक गायक नरेन्द्रंिसंह नेगी ने खंडूडी की पदलोलुपता पर गहरा कटाक्ष करते हुए कहा कि तपीयू घाम क्या तापण,। ंउन्होंने खंडूडी ंको अपने दल व कुर्सी के लिए समर्पित नेता बताते हुए उनसे उत्तराखण्ड के हितों के लिए एक संघर्ष या खडे होने की आश करना भी निरर्थक माना। खंडूडी के शपथ ग्रहण के बाद जिस प्रकार से प्रदेश में मीडिया ने उनको महिमा मण्डित किया उसके बाबजूद टिहरी सम्मेलन में बड़ी संख्या उमडे लोगों को देख कर भाजपा ही नहीं कांग्रेस भी भोचंक्की है। गत दिनों दिल्ली में हिमालय दिवस के अवसर पर आयोजित सम्मेलन के बाद अपने मंत्रालय लोटते हुए कार में स्वयं कांग्रेस के दिग्गज नेता हरीश रावत ने टिहरी के विधायक किशोर उपाध्याय की उपस्थिति में प्यारा उत्तराखण्ड से इस बात का खुलाशा किया कि जिस प्रकार जनरल रावत की मोर्चे के साथ हजारों की संख्या में लोग जुड रहे हैं, खासकर श्रीनगर रेली में उमड़ी अप्रत्याशित भीड़ से भाजपा ही नहंी कांग्रेस भी घबरा गयी है। वे प्यारा उत्तराखण्ड के सम्पादक देवसिंह रावत की इस टिप्पणी का समर्थन कर रहे थे कि टी पी एस ही दोनों बार खंडूडी के तारनहार बन कर उभरे। उन्होंने स्पष्ट किया कि पहली बार जब खंडूडी के लिए कोई विधानसभा सीट छोडने के लिए उनके अपने करीबी विधायक भी तैयार नहीं थे उस समय टीपीएस ने अपनी सीट छोड़ कर न केवल खंडूडी का ताज बचाया अपितु अपनी राजनैतिक जीवन को भी कांग्रेस से इस्तीफा दे कर दाव पर लगा दिया। दूसरी बार अब जब जातिवाद व क्षेत्रवाद के मोह में डूब कर खंडूडी ने जिस अपने विरोधी निशंक को जनरल रावत के तमाम विरोध को नजरांदाज करते हुए प्रदेश के मुख्यमंत्री की कुर्सी पर आसीन किया , मुख्यमंत्री बन कर निशंक ने जिस प्रकार से जनरल खंडूडी का राजनैतिक कोर्ट मार्शल किया उससे खंडूडी को राजनैतिक में हासिये से बदतर स्थिति में पंहुचा दिया था। ऐसे समय में जब जनरल तेजपाल सिंह रावत ने निशंक के कुशासन के खिलाफ जब भाजपा आला नेताओं का शर्मनाक संरक्षण देख कर खुला विद्रोह किया और इसमें उत्तराखण्ड की प्रबुद्व जनता ने चढ़ बढ़ कर हिस्सा लिया तो भाजपा के आला नेताओं को खंडूडी ने अपने सम्पर्को से यह समझाने में सफलता हासिल की कि ये सब खंडूडी जी की उपेक्षा से आहत है। अगर प्रदेश में भाजपा को बचाना है तो निशंक को हर हाल में हटा कर प्रदेश की कमान खंडूडी जी के हाथों में सोंप दी जाय।
प्रदेश की कमान निशंक के हाथों से छिन कर मेजर जनरल खंडूडी के हाथों में सौंपने के लिए विवश हुई भाजपा के केन्द्रीय नेतृत्व उस समय भौचंक्का रह गया जब खंडूडी की तापपोशी होने के बाबजूद भ्रष्टाचार के मुद्दे पर भाजपा को कटघरे में रखते हुए भाजपा से त्यागपत्र दे कर पूर्व सैनिक बाहुल्य उत्तराखण्ड में पूर्व सैनिकों व समर्पित समाजसेवियों व चिंतकों को एकजूट करके पूर्व सांसद ले. जनरल ने उत्तराखण्ड रक्षा मोर्चा का गठन कर प्रदेश में भाजपा की चूलें हिला दी। इसमें उत्तरा खण्ड के दिग्गज गायक नरेन्द्रसिंह नेगी, अग्रणी चिंतक व वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी सुरेन्द्रसिंह पांगती सहित तमाम समाजेवी व व बड़ी संख्या में वरिष्ठ अधिकारी जुडने लगे। इसे देख कर ही भाजपा के आला नेतृत्व ने प्रदेश में भाजपा का अस्तित्व बचाने के खातिर प्रदेश में मुख्यमंत्री की कमान निशंक के हाथों से छीन कर पूर्व सैनाधिकारी खंडूडी के हाथों में सौंपा था कि इससे पूर्व सैनिको का गुस्सा शांत होगा व जनरल टीपीएस की मुहिम कुंद होगी।
नई टिहरी से प्यारा उत्तराखण्ड से इस सम्मेलन के बारे में जानकारी देते हुए मोर्चा के वरिष्ट नेता राजेन्द्र भण्डारी व रघुवीर सिंह बिष्ट ने बताया कि उत्तराखंड रक्षा मोर्चा के अध्यक्ष टीपीएस रावत ने नई टिहरी में खचाखच भरे बोरारी स्टेडियम में आयोजित सम्मेलन में हुंकार भरते हुए कहा कि अगर खंडूडी जरा सा भी ईमानदार है तो वे तत्काल निशंक के कार्यकाल में हुए घोटालों की सीबीआई से जांच कराने से पीछे अब क्यों हट रहे है। उन्होंने कहा कि निशंक के राज में बंद कमरों में सीबीआई की जांच की मांग करने वाले खंडूडी का अब प्रदेश प्रेम कहां चला गया। जनरल तेजपाल सिंह रावत ने दो टूक शब्दों में कहा कि मोर्चा अब प्रदेश में न केवल तीसरे विकल्प के रूप में लोगों के सामने होगा अपितु प्रदेश को भ्रष्टाचार से रौंदने वाले भाजपा व कांग्रेस को प्रदेश की सत्ता से उखाड़ फेंक कर उत्तराखण्ड की रक्षा करके ही दम लेगा । उन्होंने प्रदेश की वर्तमान भाजपा सरकार के मुखिया भुवन चंद्र खंडूड़ी के सामने अपनी तीन मांगें भी रखीं जिसमें राज्य में भाजपा सरकार के दौरान कराये गये विभिन्न घोटालों की जांच सीबीआई से कराने की मांग की गई है। उन्होंने कहा कि अधिकारियों से उनकी आय के बारे में मांगा गया ब्योरा तब तक बेमानी है, जब तक कोई समय सीमा न बांधी गई हो। नई टिहरी में आयोजित रक्षा मोच्रे के सम्मेलन में मोर्चा के अध्यक्ष टीपीएस रावत ने मोर्चा को राजनीतिक दल घोषित करते हुए कहा कि भाजपा और कांग्रेस राज्य को खोखला करने में लगे हुए हैं। राज्य में स्थित सचिवालय दलालों की श्रेणी में शामिल हो गया है जहां बिना लिये दिये कोई काम नहीं होता है। उन्होंने कहा कि दोनों पार्टियां फैक्टरियों की तरह हो गई हैं जिसमें पहले नोट और फिर वोट पैदा किया जाता है। उत्तराखंड के गांव के गांव इन्ही की गलत नीतियों से खाली हो गये है। खेत बंजर हो रहे हैं, बड़े-बड़े ठेकेदारों की पौ बारह हो रखी हैं और राज्य के लोग रोजगार के लिए भटक रहे हैं। चारों तरफ लूट खसोट का सम्राज्य बना हुआ है। टीपीएस रावत ने मुख्यमंत्री श्री खंडूड़ी के सामने अपनी मांगों का मसौदा पेश करते हुए कहा कि यदि दम है तो भाजपा सरकार के तमाम घोटालों की जांच सीबीआई से करवाई दाए। उन्होंने कहा कि अधिकारियों से ब्योरा मांगने की बात की जाए तो इसमें नेताओं, संगठन के लोगों और दर्जाधारियों की भी गुप्त जांच की जानी चाहिए और समय सीमा निश्चित किया जाना चाहिए। सम्मेलन का संचालन पूर्व सैनिको व अन्य आंदोलनकारी संगठनों की धुरी बने रहे पीसी थपलियाल ने किया। इस सम्मेलन में पूर्व कमिश्नर सुरेन्द्र सिंह पांगती,पूर्व आईएएस बीसी चंदोला, राजेन्द्र भंडारी, केन्द्रीय विवि की डा. सुरेखा डंगवाल, महिपाल नेगी, डा. एसबी सती, डा. प्रदीप सकलानी, गोविन्द सिंह बिष्ट, रघुवीर सिंह बिष्ट सहित अनैक प्रतिष्ठित लोगों ने सम्मेलन को सम्बोधित किया। जिस प्रकार से इस सम्मेलन को मीडिया खासकर इलेक्ट्रोनिकस मीडिया ने नजरांदाज किया उससे साफ लग गया कि भले में प्रदेश में निजाम बदला हो परन्तु प्रदेश की नीतियां नही ं बदली। खंडूडी के शासन में भी मीडिया मनेजमेंट को देख कर कई दबे स्वर में बोलते दिखे कि निशंक तो इस मामले में खंडूडी के आगे बच्चा ही साबित होगे।

आतंकियों की सरजमी में तांडव मचा कर की अमेरिका की रक्षा/ नपुंसक हुक्मरानों ने भारत को ही बनाया आतंक की तांडव स्थली

आतंकियों की सरजमी में तांडव मचा कर की अमेरिका की रक्षा/ नपुंसक हुक्मरानों ने भारत को ही बनाया आतंक की तांडव स्थली


-अमेरिका ने आतंकियों की सरजमी में ही तांडव मचा कर की अमेरिका की रक्षा/
-भारतीय हुक्मरानों ंने नपुंसक बन भारत को ही बनाया आतंक की तांडव स्थली/
-आखिर कब तक आतंकी हमलों योंही मारे जायेंगे भारतीय/
-आतंकी सरगनों से जब गले लगेंगें हुकमरान तो कैसे रूकेंगें आतंकी हमले/


अमेरिका में 10 साल पहले हुए 11 सितम्बर 2001 की दसवीं बरसी से मात्र पांच दिन पहले यानी 6 सितम्बर 2011 को आतंकियों ने भारत की राजधानी दिल्ली के उच्च सुरक्षा जोन में स्थित उच्च न्यायालय पर बम का धमाका किया उसने पूरे देश को एक बार फिर झकझोर कर रख दिया कि आखिर अमेरिका में 10 साल हुए आतंकी हमले के बाद तमाम हवाई दावों के बाबजूद आतंकी अमेरिका में फिर से असरदार हमला करने में नाकामयाब रहे। वहीं भारत में कश्मीर के हर क्षेत्र से लेकर भारत की सर्वोच्च संसद पर आतंकी हमले पर हमले करते रहे। परन्तु अमेरिका के स्वयंभू कहार बने भारतीय हुक्मरानों (चाहे शासन राजग के बेनर तले अटल का रहा हो या सप्रंग के तले मनमोहन का रहा हो ) को यह भी देख कर श र्म नहीं आ रही थी कि कैसे अमेरिका ने आतंकवाद का सरकुचल कर उनकी दूबारा अमेरिका की सरजमी पर ऐसा हमला करने की हिम्माकत तक नही ं कर पाये। वहीं भारत पर एक के बाद एक करके दर्जनों हमले, दिल्ली, मुम्बई, कश्मीर स्थित महत्वपूर्ण स्थानों पर ही नही ं अपितु भारतीय लोकशाही के सर्वोच्च संस्थान ‘संसद ’व लालकिले पर हमले करके हमारे देश व यहा ं हुक्मरानों को एक प्रकार से न केवल खुली चुनौती दी ,इसका अमेरिका जैसे मुंहतोड़ देने के बजाय वे पाक से गलबहिया करके पीड़ितों के जख्मों को कुरेदने में गले हुए हैं। जहां 11 सितम्बर की दसवीं बरसी पर भी अमेरिका के वर्तमान राष्ट्रपति ओबामा के साथ अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति जार्ज बुश सहित पूरे अमेरिका ने ही नहीं विश्व ने इस बरसी पर एकजूटता दिखाई । वहीं हम आज तक भी देश के हुक्मरानों के हाथ संसद हमले के दोषियों को फांसी की सजा तक देने से कांप रहे हैं। चही नहीं हमारे हुक्मरान देश पर हो रहे आतंकी हमलों को रोकने तक में नाकामयाब रहे।
6 सितम्बर 2011 को फिर आतंकियों ने देश की राजधानी दिल्ली स्थित उच्च न्यायालय के गेट नम्बर 5 पर बम विस्फोट कर एक दर्जन से अधिक लोगों को मौत के घाट उतार दिया और इस विस्फोट में आठ दर्जन से अधिक लोग घायल हो गये। इस घटना के बाद वही हर आतंकी घटना के बाद सरकारी व विपक्ष की तरफ से रट्टे रटाये बयान। फिर ढ़ाक के वहीं तीन पात। सबसे हैरानी की बात यह है कि जब देश के हुक्मरान संसद पर हमले के दोषी आतंकी, पूर्व प्रधानमंत्री के हत्या के दोषी हत्यारों, आतंकवाद के खिलाफ खुली जंग लडने वाले बिट्टा पर बम हमले के दोषी व अन्य आतंकी हमलों के दोषियों को सर्वोच्च न्यायालय द्वारा कई वर्षों पहले सजाये मौत पर अपनी सहमति देने के बाबजूद देश के हुक्मरान अपने निहित दलीय स्वार्थ के खातिर इन देश के गुनाहगारों को जीवनदान दे कर देश की एकता अखण्डता व सुरक्षा से भयंकर खिलवाड़ करने की शर्मनाक धृष्ठता कर रहे हैं।
आज देश का दुर्भाग्य है कि देश में इंदिरा गांधी जेसी फौलादी कदम उठाने वाली व आंतंकियों के आका बने अमेरिका व पाक को मुंहतोड़ जवाब देने वाला नेतृत्व का नितांत अभाव है। देश का दुर्भाग्य यह है कि देश में अटल व मनमोहन सिंह जैसे अमेरिका परस्त शासकों को ढोना पड रहा है। यहां पर सरकारें चाहे अटल बिहारी वाजपेयी नेतृत्व वाली राजग की सरकार रही या मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली सप्रंग सरकार सत्तासीन रही दोनों सरकारें भारत को आतंकी हमलों से रौंदने वाले आतंकवाद के रहनुमा अमेरिका व पाक को मुंहतोड़ जवाद देने के बजाय नपुंसकों की तरह अमेरिका व पाक से गलबहियां करने की शर्मनाक प्रतियोगिता कर रही है। अमेरिका व पाक के भारत को आतंकी षडयंत्र का जीता जागता उदाहरण सीआईए व आईएसआई का डब्बल ऐजेन्ट हेडली व राणा से उजागर हो गया। यही नहीं किस प्रकार अमेरिका कश्मीर में आतंकी हमले व आतंक फेलाता है यह अमेरिका में अभी तक संरक्षण प्राप्त ऐजेन्ट को अब गिरफतार करने से भी उजागर हो गयी।
जब तक भारत सरकार व यहां के राजनैतिक दल दलगत संकीर्ण स्वार्थों से उपर उठ कर अमेरिका, चीन व इस्राइल की तर्ज पर एक मजबूत राष्ट्रीय सुरक्षा व स्वाभिमान की नीति नहीं बनायेंगे तथा उस पर मजबूती से अमल नहीं करेंगे तो तब तक भारत में आये दिन इसी प्रकार के आतंकी हमलों की आशंका बनी रहेगी। देश की आम जनता को इसी प्रकार के आतंकी हमलों का शिकार बनना पडेगा। अगर भारत सरकार को जरा सी भी शर्म होती तो वह अविलम्ब संसद हमले से लेकर अब तक आतंकी हमलों के सर्वा ेच्च न्यायालय से भी मौत की सजा पाये आतंकियों को फांसी के फंदे पर चढ़ाने का काम करते हुए अमेरिका व पाक से दो टूक बात करे। पाक से तब तक सभी प्रकार के सम्बंध तोड़ लिये जाय जब तक वह मुम्बई हमलों के दोषियों को भारत के हवाले तथा पाकिस्तान में तमाम आतंकी प्रशिक्षण शिविरों को बंद नहीं करता। अमेरिका से भी दो टूक शब्दों से भारत को तबाह करने के अपने नापाक हथकण्डों पर विराम लगाने की दो टूक बात की जाय। परन्तु करेगा कौन यहां तो सभी राजनैतिक दलों में वाम दलों को छोड कर सभी दलों में अमेरिका का हितैषी साबित करने की अंधी प्रतियोगिता चल रही है। देश की सुरक्षा व एकता अखण्डता की रक्षा के लिए सरकार को देश में समान नागरिक संहिता लागू करना चाहिए न की केवल बहुसंख्यक व अल्पसंख्यक समाज के नाम पर पक्षपाती व आतंकवाद पोषक कानून नहीं बनाना चाहिए। देश मे ं पक्षपात शासन ही आतंकवाद का सबसे बड़ा पोषक है। एक तरफ अमेरिका ने अपने देश पर हमले करने के गुनाहगारों के साथ उनके आका ओसमा बिन लादेन को मार गिराने में सफलता हासिल की। आतंकियों को उनके घरों व देशों में घुस कर अमेरिका ने तबाह करके आतंकियों को इतना रौद दिया कि वे अमेरिका पर हमला करने की हिम्मत दिखानी तो रहीं दूर आतंकी अपनी जान बचाने के खातिर इधर उधर दुबके फिरे रहे है। अमेरिका अपने गुनाहगारों को एक एक कर उनके घरों में मारने का काम कर रहा है। ओसमा बिन लादेन को उसी पाकिस्तान में घुस कर अमेरिकी जाबांजों ने की। वहीं भारत के हुक्मरानों ने पाक स्थित भारत को तबाह करने वाले आतंकी प्रशिक्षण अड्डों को तबाह करने की कोशिश करना तो रहा दूर वे सर्वोच्च न्यायालय द्वारा भारत के स्वाभिमान व लोकशाही के सर्वोच्च संस्थान संसद पर आतंकी हमले के दोषी सहित अन्य फांसी की सजा की पुष्टि की गये आतंकियों को फांसी देने की हिम्मत तक नहीं जुटा पा रहे हैं। यह तो एक सामान्य सा मामला है। जो असली मामला है कि अमेरिका की तरह भारतीय हुक्मरान न तो भारत को तबाह करने वाले आतंकियों को प्रशिक्षण व संरक्षण देने वाले पाकिस्तान व अमेरिका से अपने नापाक इरादों पर अंकुश लगाने की दो टूक बात करने का पहला व महत्वपूर्ण कदम अभी तक उठाने का साहस तक नहीं जुटा पा रहे है। जब भारत में फेलाये जा रहे आतंक की जड़ में जा कर उसमें मट्ठा डालने का काम ही हुक्मरान नहीं करेंगे तो भारत में निरंतर फेल रहे आतंकवाद पर अंकुश कैसे लग ाया जायेगा। अमेरिकी हुक्मरानों ने अपनी कुशल व सटीक देशहितों की रक्षा करने वाली रणनीति के तहत ही आतंकियों द्वारा अमेरिका को आतंक की सरजमी बनाने के मंसूबों को न केवल पूरी तरह से विफल किया अपितु अमेरिकी हुक्मरानों ने आतंकियों की सरजमी को ही आतंक की तांडव स्थली बना कर तबाह कर दिया है। आज अफगानिस्तान व पाकिस्तान आज ंअमेरिका के इसी दंश से तबाही के कगार पर पंहुच चूके है। वहीं भारतीय हुकमरानों ने आतंकियों को उसकी सरजमी पर तबाह करने के बजाय अपनी नालायकी व आत्मघाति रणनीति से भारत को ही आतंकियों की तांडव स्थली बना कर रख दिया है। आतंकियों व उनके आकाओं का समूल नाश करने के बजाय भारतीय हुक्मरान देशवासियों को एकजूट हो कर आतंक को रौंदने की मुहिम में सम्मलित करने के बजाय धार्मिक विद्वेष को हवा दे कर आपस में ही लडाने का काम कर रही है। देश के हुक्मरान व जनता को एक बात साफ समझ लेनी चाहिए कि भारत कोई 1947 के बाद का निर्मित देश नहीं अपितु यह हजारों साल पुराना संसार का सनातन देश है। इस देश की समृद्व संस्कृति ने कई शासकों को देखा। कई आततायियों का दंश झेला। इसलिए भारत से आतंक का समुल नाश के लिए धार्मिक संकीर्णता व तुष्टिकरण से उपर उठ कर भारत में फेलाये जा रहे अमेरिका, पाव व चीन द्वारा फेलाये जा रहे धार्मिक व नक्सली आतंक के साथ साथ देश की व्यवस्था को दीमक की तरह चपट कर रहे भ्रष्ट शासन प्रशासन पर भी कठोरता से अंकुश लगाना होगा । तभी भारत से आतंकवाद पर सही अर्थों में अंकुश लग पायेगा। शेष श्रीकृष्ण । हरि ओम तत्सत्। श्रीकृष्णाय नमो।

उत्तराखण्ड की आशाओं को रौंदने के गुनाहगार हैं भाजपा व कांग्रेस के मुख्यमंत्री

उत्तराखण्ड की आशाओं को रौंदने के गुनाहगार हैं भाजपा व कांग्रेस के मुख्यमंत्री


इन दस सालों में प्रदेश ने जहां कांग्रेस का एक मुख्यमंत्री नारायणदत्त तिवारी पांच साल तक प्रथम निर्वाचित सरकार के आलाकमान द्वारा थोपे गये मुख्यमंत्री रहे। वहीं भाजपा के स्वामी, भगतसिंह कोश्यारी, भुवनचंद खंडूडी व रमेश पोखरियाल रहे। खंडूडी दो साल बाद फिर चंद महिनों के लिए मुख्यमंत्री बनाये गये। भाजपा के भी सभी मुख्यमंत्री आलाकमान द्वारा अभी तक थोपे गये। कांग्रेसी जहां इतरा रहे हैं कि भाजपा ने पांच सालों में 5 मुख्यमंत्री बनाये व कांग्रेस ने एक ही । परन्तु ये सब भूल गये कि उत्तराखण्ड के पडोसी प्रदेश हिमाचल में गत 40 सालों में केवल 5 ही मुख्यमंत्री हुए। अधिकांशों ने हिमाचल को विकास की दोड़ में जहां मजबूत किया वहीं हिमाचल को देश का सबसे ईमानदार व शांत विकासोनुमुख राज्य बना दिया।
कांग्रेस केे इसी एक ने तो पूरे प्रदेश के वर्तमान पर ही नहीं भविष्य पर अपनी मानसिक कुंठाओं व संकीर्णताओं तथा पदलोलुपता का ऐसा खतरनाक ग्रहण लगा दिया है भाजपा के पांचों महारथी उस ग्रहण में ही फंस कर प्रदेश की जनता की आशाओं पर बज्रपात कर गये। स्वामी से आशा करनी भी बेईमानी है वहीं कोश्यारी को तो समय ही नही ं मिला कुछ करने का। वहीं भाजपा के खंडूडी व निशंक जैसे महारथी के कुशासन ने उत्तराखण्डी आशाओं पर ग्रहण लगाया। इसके साथ भाजपा व कांग्रेस के इन सुरमाओं ने उत्तराखण्ड के हितों के लिए नहीं अपितु अपने कुसी्र्र बचाने के लिए ही अपना सारा समय व साधन लगाये।
उत्तराखण्ड राज्य की आशाओं पर भाजपा व कांग्रेसी इन सूरमाओं ने अपने दलगत संकीर्ण स्वार्थों के खातिर विधानसभाई क्षेत्रों का जनसंख्या पर आधारित परिसीमन थोपा। उत्तराखण्ड के आत्म सम्मान को मुजफरनगर काण्ड-94 के गुनाहगारों को दण्डित कराने के बजाय इनको शर्मनाक संरक्षण दिया गया। प्रदेश की जनांकांक्षाओं को साकार करने व लोकशाही के प्रतीक राजधानी गैरसैण बना ने के बजाय इन राजनेताओं ने इन दस सालों में बलात राजधानी देहरादून में थोप दी है। स्थाई राजधानी के ऐलान से पहले गुप चुप देहरादून में राजधानी के तमाम महत्वपूर्ण भवनों का निर्माण करके प्रदेश की लोकशाही के साथ शर्मनाक विश्वासघात किया गया। प्रदेश में सदियों से चली आ रही सामाजिक सौहार्द के विश्वास को इन दलीय मोहरों ने जातिवाद व क्षेत्रवाद की अंधी खाई में धकेल कर प्रदेश को भ्रष्टाचार की गर्त में न केवल धकेला गया अपितु अपने आकाओं व प्यादों के लिए यहां के संसाधनों को लुटाया भी गया ।

Saturday, September 10, 2011

भाजपा में अंधा बांटे रेवड़ी व साफ छवि के जननेताओं से परहेज क्यों ?



भाजपा आला कमान के आदेश पर निशंक ने अपना इस्तीफा राज्यपाल कों सोंपा और पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद खंडूडी ली प्रदेश के नये मुख्यमंत्री की शपथ। सबसे हैरानी की बात यह है कि भ्रष्टाचार के आरोपों के चलते जिन निशंक को उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री के पद से चुनाव से चंद चार माह पहले बदलने के लिए मजबूर होना पड़ा, उनको भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष गडकरी ने ,भाजपा में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सोंपने का ऐलान किया। इसके अलावा निशंक को हटा कर भाजपा आलो नेतृत्व को संघ भाजपा के समर्पित वरिष्ठ नेता भगतसिंह कोश्यारी, केदार सिंह फोनिया व मोहनसिंह ग्रामवासी जैसे साफ छवि के नेता तो नजर नहीं आये, उन्हें फिर केवल वही खंडूडी नजर आये, जिनको जनता ने लोकसभा चुनाव में न केवल नकार दिया था अपितु पूरे प्रदेश से भाजपा का सफाया कर दिया था। जिन खंडूडी पर प्रदेश के विरोधी दल के नेताओं ने नहीं अपितु उनके कबीना मंत्रियों व अधिकांश विधायकों ने अलोकशाही प्रवृति के कारण प्रदेश के मुख्यमंत्री पद से हटाने के लिए भाजपा आला नेतृत्व के दर पर कई बार गुहार लगायी थी। उनके करीबी नौकरशाह व थैलीशाह के भ्रष्टाचार के किस्से से पूरा प्रदेश मर्माहित रहा। क्या गडकरी देश की जनता को बतायेंगे कि भाजपा में भ्रष्टाचार को सम्मानित करने की महान परंपरा है या खाये हुए सेवा मेवाओं का प्रतिफल देने के लिए उनका मन बैचेन है ?