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उत्तराखण्ड में हार की भी जीत गये जनरल रावत व उत्तराखण्ड रक्षा मोर्चा

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उत्तराखण्ड में हार की भी जीत गये जनरल रावत व उत्तराखण्ड रक्षा मोर्चा उत्तराखण्ड के हक हकूकों की उत्तराखण्ड विधानसभा चुनाव-2012 में उत्तराखण्ड की जनांकांक्षाओं के आषा के सूर्य बन कर उभरे ले. जनरल तेजपाल सिंह रावत व उनकी अध्यक्षता वाले उत्तराखण्ड रक्षा मोर्चा ने भले ही चुनावी जंग में विजय श्री को वरण न कर पायी हो, परन्तु उन्होने भाजपा व कांग्रेस जैसे सत्तालोलुपु दिल्ली के मठाधीषों के षिकंजे में जकड़े उत्तराखण्डियों को अपने स्वाभिमान व विकास के लिए एक मजबूत राह दिखाने का काम किया।  इस महान कार्य के लिए मैं उत्तराखण्ड के महान राजनेता ले. जनरल तेजपाल सिंह रावत, युगांन्तकारी महानगायक नरेन्द्रसिंह नेगी, पूर्व आईएएस अधिकारी सुरेन्द्रसिंह पांगती, ले. जनरल जगमोहन सिंह रावत, ले. जनरल काला, मेजर जनरल षेलेन्द्र राज बहुगुणा सहित सभी पदाधिकारियों, प्रत्याषियों व समर्थकों को षतः षतः नमन् करता हॅू। भाजपा व कांग्रेस द्वारा प्रदेष में चलायी जा रही भ्रश्ट राजनीति को चुनौती देने का अदम्य साहस जनरल टीपीएस रावत ने दिखाया वेसा साहस कभी खण्डूडी, निषंक व तिवारी जैसे मुख्यमंत्री के पद पर आसीन रह कर भी नही...

-उत्तराखण्ड विरोधी व दागदार छवि के नेता को कमान न दे सोनिया

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-उत्तराखण्ड विरोधी व दागदार छवि के नेता को कमान न दे सोनिया -शहीदों के लिए समर्पित रही इस साल की भी होली गत सालों की तरह इस साल  भी होली के दिन में अपने ही कमरे की चार दिवारियों में ही बंद हॅू। इस बात की खुशी है कि उत्तराखण्ड से भगवान बदरीनाथ ने भाजपा की जनविरोधी सरकार व उसके मुख्यमंत्री खंडूडी जी को हरा दिया है। कौन मुख्यमंत्री बने इसमें ही कांग्रेस नेतृत्व का विवेक देख रहा हॅू। हालांकि कांग्रेस नेतृत्व को भाजपा की इस शर्मनाक पराजय व जनादेश से सीख लेनी चाहिए और जनमत का सम्मान करते हुए किसी दागदार व उत्तराखण्ड विरोधी को    प्रदेश की कमान नहीं सोपनी चाहिए। प्रदेश की जनता हरीश रावत को मुख्यमंत्री देखना चाहती है। वेसे प्रदेश के हित में सतपाल महाराज उपयुक्त रहेंगे। हालांकि कांग्रेस नेतृत्व के पास विकल्प के रूप में यशपाल आर्य व सुरेन्द्रसिंह नेगी भी है। परन्तु दागदार व जनविरोधी अलोकशाही लोगों को कांग्रेस नेतृत्व ने बनाया तो प्रदेश की जनता इसे स्वीकार नहीं करेगी और तिवारी, खण्डूडी व निशंक जैसे कुशासकों की तरह उनको करारा सबक सिखायेगी। वेसे सोनिया गांधी को अपने आम जनता से ...

होली हो मुबारक

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े होली हो मुबारक हरि चरणों में करूं नमन् मैं, होली हो मुबारक सृश्टि में हर पल बरसे श्रीकृश्ण रंग सनातन। देष मेरा गुलामी के रंग में रंगा हुआ है साथी प्रदेष भी चंगेजों की चंुंगल में जकडा साथी।। फिर भी केसे खेलूं होली देख कर ये तबाही यही कामना है मेरी अब बचाओं कृश्ण कन्हाई। इस जग से दूर रखो जात-धर्म के दलालों से जग को बचाये श्रीकृश्ण भ्रश्टाचारी दलालों से।। जग में हर पल आये साथी खुसियों की बहार राग-द्वेश से हट कर मनाओं होली का त्यौहार।।     - देवसिंह रावत  (होली, 8 मार्च 2012 प्रात 8.56 बजे)

स्वयंभू गुलाम क्यों तिलमिला रहे हैं ग्रेक चैपल पर

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स्वयंभू गुलाम क्यों तिलमिला रहे हैं ग्रेक चैपल पर भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कोच ग्रेक चैपल के बयान पर हाय तौबा मचाने वाले पहले अपनी गिरेवान में झांके। ग्रेक चैपल ने सही कहा कि अंग्रेजों ने भारतीयों को सर झुका कर रहना सिखाया। जिन लोगों को ग्रेक चैपल के बयान पर भारतीय अस्मिता पर प्रहार नजर आता है वे बतायें कि क्यों आज तथाकथित आजादी के 65 साल बाद भी  न तो अपना नाम भारत ही देष को दे पाये, व नहीं अपनी भारतीय भाशा तथा नहीं भारतीय संस्कृति कमो ही अंगीकार ही कर सके। केवल गुलामी के बदनुमा फिरंगी नाम इंडिया, फिरंगियों की भाशा अंग्रेजी व उनकी फिरंगी संस्कृति को ही आज तक अपना पाये। यही नहीं फिरंगी गुलामी को सरमाथे पर रखते हुए आज तक भी हम भारत को गुलामी दासता के बदनुमा प्रतीक  महारानी ब्रिटेन की सरपरस्थी में बने अंग्रेजी सम्राज्ञी के गुलाम देषों के संगठन कोमनवेल्थ यानी राश्ट्रमण्डल का सदस्य बन कर देष की आजादी के लिए षहादत देने वाले षहीदों की षहादत का घोर अपमान करने की धृश्ठता की है। देष में षासन चाहे गांधी के नाम का जाप करने वाली कांग्रेस पार्टी का रहा हो या भारतीय संस्कृति की दुहाई दे...

साफ छवि के जनहितों के लिए समर्पित नेता को बनाये मुख्यमंत्री सोनिया

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साफ छवि के जनहितों के लिए समर्पित नेता को बनाये मुख्यमंत्री सोनिया उत्तराखण्ड की जनता ने भाजपा, अण्णा व रामदेव के तमाम कोषिषों के बाबजूद प्रदेष में सत्तासीन भाजपा को जिस प्रकार से ठुकरा कर सत्ताच्युत करने का ऐतिहासिक जनादेष दिया, उससे सबक ले कर सोनिया गांधी को चाहिए कि वह कांग्रेस की सरकार बनाते समय अपने उन तमाम असफल प्रदेष प्रभारी, प्रदेष के हितों को दाव पर लगाने वाले तिवारी के प्यादों व दिल्ली में कांग्रेस की लुटिया डुबोने वाले बंद कमरे में बैठे सलाहकारों की आत्मघाति सलाह को दरकिनारे करके किसी साफ छवि के नेता को ही प्रदेष के मुख्यमंत्री के पद पर आसीन करे। जिस जातिवादी अंध मोह में लिप्त होकर भाजपा के मठाधीषों ने प्रदेष को खंडूडी व निषंक के कुषासन से रौंदा उससे सबक लेकर सोनिया प्रदेष में जातिवादी व भ्रश्टाचारी दागदार नेताओं को सत्तासीन करने का काम न करे। नहीं तो भाजपा की जिस जातिवादी अंध मोह से त्रस्त हो कर प्रदेष की जनता में खण्डूडी के नेतृत्व वाली प्रदेष सरकार के रहते हुए भाजपा का प्रदेष से लोकसभा व विधानसभा में हराने का कार्य किया, अगर वही भूल सोनिया गांधी ने तिवारी जेसे उत्तराखण्ड...

दल या नेताओं के लिए नहीं अपितु जनहित के लिए समर्पित हो लोग

दल या नेताओं के लिए नहीं अपितु जनहित के लिए समर्पित हो लोग षायद कुछ लोग प्रदेष के हितों व नेताओं के काम का आंकलन किये बिना अंध पार्टी या नेताओं के प्रति मोह से ग्रसित हैं। मेरा कभी न किसी नेता या पार्टी से मोह नहीं रहा। मेरा मानना है कि जनहित, मूल्य, प्रदेष के हित व लोकषाही इन तमाम पार्टी, नेताओं व रिष्ते नातों से बढ़ कर है। जो भी नेता चाहे वह कितना भी बड़ा न हो अगर वह देष प्रदेष सहित मानवता के हितों, न्याय, नैतिक मूल्यों व लोकषाही पर अपने संकीर्ण हितों की पूर्ति के लिए कुठाराघात करता है तो मैने सदैव उसका विरोध किया। नेता चाहे प्रदेष के रहे हो या देष या विदेष के। राव-मुलायम-वाजपेयी, मनमोहन, तिवारी, खण्डूडी, निषंक ही नहीं बुष सहित उन तमाम नेताओं का विरोध किया जो लोकषाही व न्याय का गला घोंटने को उतारू रहे। मैने समय समय पर हरीष रावत, महाराज, कोष्यारी सहित उन तमाम नेताओं, सामाजिक संगठनों के गलत कामों का भी विरोध किया। मैं सदैव जाति, धर्म,लिंग, क्षेत्र के नाम पर संकीर्ण राजनीति करने वालों को किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं कर सकता। जहां तक खंडूडी जी की सहित प्रदेष के अब तक के किसी भी हुक्मरान न...

जनादेष का सम्मान करे भाजपा , कहां गयी अब भाजपा की नैतिकता

जनादेष का सम्मान करे भाजपा , कहां गयी अब भाजपा की नैतिकता भाजपा के पूर्व अध्यक्ष राजनाथ सिंह व अनन्त कुमार जेसे नेता देहरादून पंहुच चूके है। प्रदेष की जनता ने जब भाजपा को सत्ता से बाहर कर दिया, इसके बाबजूद भाजपाई नेताओं की सत्तालोलुपता षांत होने के बजाय प्रदेष में ऐन केन प्रकारेण से सत्ता में काबिज होने के लिए तमाम हथकण्डे अपनाने के लिए उतारू है। भाजपा प्रदेष में सत्तासीन थी जिन तिवारी सरकार के भ्रश्टाचार व कुषासन के विरोध करके प्रदेष में भाजपा को जनता ने स्पश्ट जनादेष दिया, भाजपा ने प्रदेष में सत्तासीन होने के बाद उसी तिवारी का महिमामण्डित करने के अलावा दूसरा काम अगर किया तो प्रदेष में भ्रश्टाचार व कुषासन की गर्त में धकेलना। इसी से आक्रोषित प्रदेष की जनता ने भाजपा को सत्ता से बेदखल कर दिया। प्रदेष की जनता ने उसे विधायक संख्या की दृश्टि से भाजपा अब दूसरी नम्बर की पार्टी बना दिया है। मर्यादा के अनुसार अब राज्यपाल सबसे बडे दल को पहले सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करेगा। भाजपा के नेताओं को चाहिए कि वह जनादेष का सम्मान करते हुए तथा प्रदेष में खरीद परोख्त की अपनी पिछली भूल से सबक लेते हुए सर...