Pages

Wednesday, March 7, 2012

-उत्तराखण्ड विरोधी व दागदार छवि के नेता को कमान न दे सोनिया

-उत्तराखण्ड विरोधी व दागदार छवि के नेता को कमान न दे सोनिया
-शहीदों के लिए समर्पित रही इस साल की भी होली

गत सालों की तरह इस साल  भी होली के दिन में अपने ही कमरे की चार दिवारियों में ही बंद हॅू। इस बात की खुशी है कि उत्तराखण्ड से भगवान बदरीनाथ ने भाजपा की जनविरोधी सरकार व उसके मुख्यमंत्री खंडूडी जी को हरा दिया है। कौन मुख्यमंत्री बने इसमें ही कांग्रेस नेतृत्व का विवेक देख रहा हॅू। हालांकि कांग्रेस नेतृत्व को भाजपा की इस शर्मनाक पराजय व जनादेश से सीख लेनी चाहिए और जनमत का सम्मान करते हुए किसी दागदार व उत्तराखण्ड विरोधी को    प्रदेश की कमान नहीं सोपनी चाहिए। प्रदेश की जनता हरीश रावत को मुख्यमंत्री देखना चाहती है। वेसे प्रदेश के हित में सतपाल महाराज उपयुक्त रहेंगे। हालांकि कांग्रेस नेतृत्व के पास विकल्प के रूप में यशपाल आर्य व सुरेन्द्रसिंह नेगी भी है। परन्तु दागदार व जनविरोधी अलोकशाही लोगों को कांग्रेस नेतृत्व ने बनाया तो प्रदेश की जनता इसे स्वीकार नहीं करेगी और तिवारी, खण्डूडी व निशंक जैसे कुशासकों की तरह उनको करारा सबक सिखायेगी। वेसे सोनिया गांधी को अपने आम जनता से कटे सलाहकार जर्नाजन द्विवेदी, अहमद पटेल, चैधरी बीरेन्द्र आदि की सलाह पर कोई भला जनहितों के लिए समर्पित आदमी को प्रदेश का नेतृत्व सोंपा जाय इसमें मुझे संदेह है। सोनिया को चाहिए कि जनादेश का अनादर करने की धृष्ठता भाजपा की तरह नहीं करनी चाहिए।
इस सप्ताह होली मिलन समारोह के लिए 4 मार्च को  समाजसेवी केसी पाण्डे जी ने अपने निवास कालका जी दिल्ली में व म्यर उत्तराखण्ड संगठन के प्रमुख मोहन बिष्ट ने दिल्ली के द्वारिका क्षेत्र में 4 मार्च को ही होली मिलन में आमंत्रित किया, हालांकि मैं इसी दिन अपने गांव से दिल्ली में आया। परन्तु मैं न तो गांव की होली में सम्मलित होने का मन न होने के कारण गांव में रहा व नहीं दिल्ली में ही होली में सम्मलित होने का मन रहा।  मैं अपने साथी को बोल नहीं पाया, ऐसा ही निमंत्रण म्यर उत्तराखण्ड ग्रुप व दिल्ली के उत्तराखण्डी समाज के अग्रणी समाजसेवी उद्यमी के सी पाण्डे जी ने भी दिया था। गत वर्ष भी होली मिलन का निमंत्रण प्यारा उत्तराखण्ड के प्रबंध सम्पादक बड़े भाई महेश चन्द्रा जी ने भी दिया था। ऐसा ही निमंत्रण हमारे अन्य साथियों ने  भी दिया। इस अवसर पर दिल्ली में भी होली मिलन समारोह का आयोजन हुआ। अन्य कई जगह होली मिलन समारोहों की ध्ूाम रही। परन्तु मैं किसी भी कार्यक्रम में सम्मलित नहीं हो पाया।
सच में कहूूॅं तो 1994 के मुजफ्रपफर नगर काण्ड के बाद एक प्रकार से मेरा मन ही मर चूका है देश की आराजक व निरंकुश व्यवस्था को देख कर। अन्याय को शर्मनाक पोषण को देखकर, अपने जनप्रतिनिधियों व सामाजिक संगठनों की समाज के मान सम्मान व हितों के प्रति शर्मनाक उपेक्षा देख कर। मन का उत्साह ही एक प्रकार से खत्म हो गया। मैं चाहे 1994 के बाद होली में दिल्ली में रहा हो या अपने गांव में। मैं इस समारोह से अपने आप को दूर ही रखा। होली का रंग मुझे 1994 में हमारे साथियों की निर्मम हत्या करने वाले जल्लादों द्वारा किये गये अत्याचार की बरबस याद दिलाता है। वैसे भी जब मन में उत्साह ही न हो तो बाहरी आडंबर से वह उमंग नहीं होती जो मन के उत्साह से होती।
होली के बातावरण में जिस प्रकार से शराब ने पूरी तरह से दुषित कर दिया है उससे भी मै इस त्योहार से दूर ही रहता हॅू। परन्तु सबसे बड़ा सवाल आज इस बात का था कि हमारे समाज के मान सम्मान व मानवता को रौंदने वाली मुजफ्रपफरनगर काण्ड-94 के अभियुक्तों को सजा देने या दिलाने की बात क्यों हमारे जनप्रतिनिध्यिों व उत्तराखण्ड की सरकारों के दिल्लो दिमाग को मेरी तरह क्यों नहीं झकझोरती है।
क्या इस देश में कोई न्याय व्यवस्था व नैतिक मूल्यों पर भरोसा रखने वाले उच्च लोग प्रमुख पदों पर नहीं आसीन है। अगर कोई रहता तो जिस काण्ड को देश की सबसे बड़ी जांच ऐजेन्सी सीबीआई, मानवाध्किार, महिला व स्वतंत्रा आयोगों ने दोषी पाया। जिस काण्ड को इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने नाजी अत्याचारों के समकक्ष रखते हुए तत्कालीन मुलायम व राव सरकार को दोषी ठहराया। उस काण्ड के दोषियों को आज 17 साल बाद भी देश की व्यवस्था दण्डित करने में अक्षम रही तो किस पर विश्वास किया जाय। इतने निल्र्लज काण्ड व विभत्स काण्ड पर मौन रहने वाले जनप्रतिनिध्यिों व उत्तराखण्ड की अब तक की तमाम सरकारों को ध्क्किारने के अलावा मैं कर ही क्या सकता हॅू। पर एक बात मैं तमाम अन्यायियों को बता देना चाहता हॅू। दुनिया की अदालतें भले ही बौनी साबित हो जाय इसके गुनाहगारों को दण्डित करने में परन्तु महाकाल कभी किसी अन्यायी को मापफ नहीं करता। इस काण्ड का अभिशाप आज तक मुलायम सिंह भोग रहा है। इस काण्ड के अभिशाप से तिवारी ही नहीं अब तक के तमाम उत्तराखण्ड कुशासक बेनकाब हो चूके है।
मैने स्वयं पूर्व मुख्यमंत्री से स्पष्ट आगाह किया था कि निशंक जी भगवान बदरीनाथ अंध्े नहीं है। वे हर अन्यायी को दण्डित करते है। महान गायक नरेन्द्रसिंह नेगी के शब्दों में ‘जाग जाग हे उत्तराखण्ड, हे नरसिंह, भैरव बजरंग, की घात उत्तराखण्ड की देवभूमि को अपने निहित स्वार्थों के लिए रौंदने वालों  को कहीं का नहीं छोड़ेगी। इसी लिए इनको आगाह करता रहता हॅू। परन्तु सत्तासीन धृतराष्ट्र पुत्रों ने द्वापर में कुरू सभा में भगवान श्रीकृष्ण के विराट रूप को देखने के बाबजूद भी उनको नहीं पहचान पाये तो मुझ कुरूक्षेत्र के सहज सिपाई को कलयुग के दुशासन कहां पहचान पायेंगे।
परन्तु इनको महाकाल निर्ममता से जनता के समक्ष तिवारी की तरह बेनकाब व मुलायम की तरह असहाय होना पडेगा। इनकी तमाम ध्ूर्तता व मक्कारी तथा तंत्र महाकाल के श्राप के आगे ध्रे के ध्रे रह जायेंगे। देवभूमि के हितों को अपने निहित स्वार्थ के लिए जातिवाद, क्षेत्रावाद, भ्रष्टाचार व व्यभिचार के गर्त में ध्केलने वालों को महाकाल प्रायश्चित करने का भी समय नहीं देगा।

No comments:

Post a Comment