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Wednesday, June 8, 2011

लोकशाही का गला घोंट कर की कांग्रेस ने आत्महत्या

-लोकशाही का गला घोंट कर की कांग्रेस ने आत्महत्या
-रामदेव संिहत अनशनकारियों व राष्ट्रीय धरनास्थल जंतर मंतर पर पुलिसिया दमन से रौंदने का कुकृत्य से शर्मसार हुई लोकशाही/
आज भले ही प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह व कांग्रेसी सिपाहेसलार बाबा रामदेव व उनके पचास हजार से अधिक देश के हित के लिए अनशन कर रहे शांतिपूर्ण आंदोलनकारियों को बर्बर पुलिसिया दमन के दम पर खदेड़ने वाले लोकशाही के गला घोंटने वाले कृत्य को जायज ठहराने के लिए कुतर्क पर कुतर्क गढ़ रहे हों परन्तु देश का आम आदमी के गले उनके ये तमाम तर्क किसी भी सूरत में नहीं उतर रहे है। देश की जनता एक ही सवाल कर रही है कि जो सरकार देश द्रोहियों को दिल्ली में देश के खिलाफ विष वमन करते हुए भी नपुंसकों की तरह मूक रहती हो, जो सरकारें भारतीय संसद पर हमला करने के दोषी फांसी पाये हुए आतंकी को फांसी पर लटकाने की हिम्मत नहीं कर पा रही हो, वो सरकार देश के हित में भ्रष्टाचारियों द्वारा विदेशों में जमा अकूत भारतीय धन को वापस लेने की मांग करने वाले सत्याग्रहियों को पुलिसिया दमन क्यों किया गया। वह भी खासकर सोते हुए लोगों पर। बच्चे बुढ़े, महिलाओं पर। भारतीय भाषाओं के लिए देश में ऐतिहासिक आंदोलन करने वाले राजकरण सिंह का कहना है कि हिंसक जंगली जानवर भी कभी सोते हुए प्राणी पर हमला नहीं करता है।
मेरा भी साफ मानना है कि सरकार ने जलियावाले बाग से बदतर काण्ड करके अपनी जड़ों में जहां मट्ठा डाला वहीं जनता की नजरों में पूरी तरह से जमीदोज हो चूके भाजपा को फिर प्राण वायु दी। जलियावाले बाग में तो फिरंगियों ने अपनी सत्ता को चुनौती देने वालों को रौंदा। परन्तु यह तो यहां की सरकार ने अपने देश की मजबूती के लिए कार्य कर रहे शांतिपूर्ण आंदोलनकारियों को रौंदा।
4 जून को मैं भी दोपहर को यहां बाबा रामदेव के अनशन स्थल पर उनकी राष्ट्रवादी मांगों का समर्थन करने वहां अपने भाषा आंदोलन के साथी राजकरण सिंह के साथ दोपहर 12 बजे वहां गया। वहां पर एक घंटा रहने के बाद मैं व राजकरण सिंह राष्ट्रीय धरना स्थल जंतर मंतर पर पंहुचे। क्योंकि ऐसी घोषणा की गयी थी कि बाबा रामदेव 2 बजे के करीब जंतर मंतर आयेंगे। शायद ज्ञापन देने के लिए। जंतर मंतर पंहुच कर हमने देखा कि सरकार ने चारों तरफ से पुलिस के जवानों से इस स्थल को घेर दिया था। इससे साफ लग रहा था कि बाबा किसी भी कीमत पर वहां पर न जा सके।
इसके बाद मैं जंतर मंतर का अध्ययन बारीकी से किया। यहां पर देश के विभिन्न भागों से लोग न्याय की गुहार करने यहां आये थे। यहां पर वे लोग आते हैं जो देश में अपनी प्रदेश सरकारों से भी न्याय नहीं मिलता है। जिनको कोर्ट कचहरी के द्वार भी बंद लगते है। ऐसे सताये हुए लोग जो भारतीय लोकशाही को मजबूत करते हैं वे यहां पर धरने पर थे। इनमें नोयडा में मायावती सरकार के जुल्मों के सताये गये किसान, दिल्ली में पुलिसिया दमन के सताये लोग, राजीव गांधी के हत्यारों को सजा देने की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन। इसके साथ ही यहां पर भ्रष्टाचार के खिलाफ अपने वर्षो से चलाये जा रहे जूता मार आंदोलन के प्रणेता सूर्यवंशी, इसके अलावा कई आंदोलन के संगठन यहां पर आंदोलन रत थें। परन्तु सरकार ने बाबा रामदेव को आर एस एस का मुखोटा बता कर अपनी खाज उन निरापराध लोगों पर उतारा जो माॅं भारती के सम्मान व कल्याण के लिए हजारों किमी दूर से दिल्ली में में न्याय की आशा से आये थे। देश के हित में आये थे। ऐसे लोगों पर रात में सोते समय हमला किया गया। यह लोकशाही व मानवता के प्रति ऐसा धृर्णित अपराध हे जिसका प्रायश्चित कांग्रेस को हर हाल में करना पड़ेगा।
बाबा रामदेव को आर एस एस का मुखोटा बता कर वहां पर पुलिसिया दमन करने को उचित ठहराने वाले कांग्रेसी मठाधीशों की कार्यवाही से देश की जनता बहुत खिन्न है। कांग्रेसी सरकार बाबा को फिर किसी होटल या वार्ता के नाम पर बुला कर नजरबंद कर सकते थे। हालांकि बाबा को बंद करने की नौबत ही नहीं थी। बाबा तो 4 जून को सरकार द्वारा मांगे माने जाने पर खुश थे वे जाने ही वाले थे कि कबीना मंत्री कपिल सिब्बल ने जो चिट्ठी दिखाई उससे बाबा व उसके समर्थकों का गुस्सा जायज ही था। वास्तव में सरकार तो बाबा को हर हाल में सबक सिखाना ही चाह रही थी। सुत्रों के अनुसार बाबा के इस अनशन स्थल पर पुलिसिया दमन के लिए कुख्यात अधिकारी पहले से यहां पर सादी वर्दी में डेरा डाले हुए थे। यही नहंी कांग्रेसी नेता जिस प्रकार से बाबा रामदेव को ठग बता रहे हैं तो लोग प्रश्न करते हैं अगर बाबा ने कुछ गलत किया तो उन पर सरकार ने पहले कार्यवाही क्यों नहीं की। उन पर कार्यवाही केवल तब ही किया जा रहा है जब उन्होंने विदेशों में जमा भारतीय धन को वापस लाने के लिए जनांदोलन किया। इससे साफ हो गया कि विदेशों में अधिकांश पैसा कांग्रेसी नेताओं या उनके करीबियों का है। नहीं तो इस देशहित की मांग पर नाहक ही डण्डा बरसाने का क्या तुक है।
बाबा रामदेव को संघ का समर्थन यकायक नहीं मिला कई महिनों से मिल रहा था। तब क्यों चार मंत्री बाबा रामदेव को मनाने हवाई अड्डे पर गये। कांग्रेस के तमाम तर्क कहीं दूर-दूर तक तर्क संगत नहीं है। सरकार को चाहिए कि वह अपनी भूल को प्रायश्चित करके तुरंत राष्ट्रीय धरना स्थल पर आपात काल खत्म करे। इससे पहले भी सरकार ने इस स्थल पर जहां पर ही देश में लोकशाही जीवित है उस पर प्रतिबंध लगाया। गुलामी के बदनुमा कलंक के प्रतीक राष्ट्रमण्डल खेलों के समय भी सरकार ने ऐसी ही आत्म घाति कदम उठाये परन्तु तब भी न तो विपक्ष ने अपितु किसी भी मीडिया ने इस पर प्रश्न तक न करके अपना मुखोर्ट भी बेनकाब कर दिये। ऐसे में बाबा रामदेव को आर एस एस का ऐजेन्ट कह देने से जनता उनको गुनाह गार नहीं मानती। परन्तु बाबा रामदेव को भी समझमें आ ही गया होगा कि सरकार से लड़ाई उतनी सहज नहीं है जितना वे समझ रहे थे। उनको निशंक व तिवारी जैसे नेताओं से निरंतर दूरी बनायी रखनी होगी। अपने हर कार्य को पारदर्शिता के साथ आंदोलन में अपने आप को बचाने के लिए नहीं अपितु उस जनता को जो उन पर विश्वास करके वहां पर आयी थी उनकी ढाल बनने का काम करना चाहिए। अपने संगठन को किसी के समर्थन की बेशाखियों के बजाय ऐसे जांबाज व सदचरित्र लोगों की पूरे भारत में ऐसा जांबाजी संगठन बनाये जो ऐसे दमनकारी तत्वों से बचने में सक्षम हो। देश की जनता जानना चाहती है कि मनमोहन सिंह जो पुलिसिया दमन करने का इतना ही शोक था तो वे क्यों जमाखोरों व देश को मंहगाई की गर्त में धकेलने वाले भ्रष्टाचारियों व आतंकी पर ऐसा करे।
परन्तु उन पर कार्यवाही करने की हिम्मत तो प्रधानमंत्री व उनकी सरकार ने दिखाई नहीं हाॅं देश की महानायिका रही इंदिरा गांध्ंाी जिनके देश हित के कार्यो के कारण कांग्रेस सत्तासीन है उनको गुनाहगार बताने का काम उनकी कांग्रेस ने किया तो इंदिरा के नाम की दुहाई लेने वाले कांग्रेसियों को सांप सुंघ गया। किसी मंत्री से लेकर संगठन के नेता में इतनी हिम्मत भी नहीं रही कि वे अपने पद से इस काण्ड के विरोध में इस्तीफा दें।
शेष श्री कृष्ण कृपा। हरि ओम तत्सत्। श्रीकृष्णाय नमो।

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