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Thursday, June 16, 2011

अण्णा के भ्रश्टाचार मुहिम पर ग्रहण हैं एनजीओ

अण्णा के भ्रश्टाचार मुहिम पर ग्रहण हैं एनजीओ /
नई दिल्ली(प्याउ)। भले ही आज अण्णा हजारे व उनकी सिविल सोसायटी के साथी बहुत ही जोष खरोस के साथ देष की जनता से उनके आंदोलन में समर्थन देने के लिए अपील कर रहे हैं कि देष में व्याप्त तमाम भ्रश्टाचार पर अंकुष लगाने के लिए एकमात्र रामवाण दवा जन लोकपाल कानून है। लोगों को यह भरोसा दिलाया जा रहा है कि अगर यह कानून बन गया तो देष से भ्रश्टाचार पर काफी हद तक देष में भ्रश्टाचार पर अंकुष लग जायेगा। परन्तु सच्चाई यह है कि उनके सबसे करीबी साथी श्री रेसरदा ओरंगाबाद वालों को ही इस बात पर विष्वास नहीं है कि जो लड़ाई भ्रश्टाचार पर अंकुष लगाने के लिए जनलोकपाल कानून बनाने के नाम पर अन्ना हजारे लड़ रहे हैं वह षायद ही मुकाम पर पंहुच पायेगा। अण्णा के अपने आमरण अनषन के लिए दिल्ली आने से अब तक हर निर्णायक संघर्श में साये की तरह साथ रहने वाले अण्णा के साथी श्री देसरदा ने दो टूक षब्दों में कहा कि अण्णा के आंदोलन को जिस प्रकार से एनजीओ ने चारों तरफ से अपने चुंगुल में ले रखा है उन्होंने स्पश्ट षब्दों में कहा कि देष में अधिकांष एनजीओ एक प्रकार से भ्रश्टाचार में आकण्ठ डुबे हुए हैं, ऐसे में एनजीओं के भरोसे भ्रश्टाचार की लड़ाई षायद ही जीती जा सकती है। अण्णा हजारे के करीबी साथी श्री रेसरदा ने यह उदगार षनिवार 11 जून को सांय दिल्ली में संसद के समीप कांस्टीटयूषन क्लब के डिप्टी स्पीकर हाल में ‘ ऊर्जा क्षेत्र भूअर्जन-पर्यावरण एवं मानव अधिकारों का हनन के मुद्दे पर आयोजित एक सम्मेलन को संबोधित करते हुए कही। इस सम्मेलन में पीयूसीएल के राश्ट्रीय अध्यक्ष न्यायमूर्ति राजेन्द्र सच्चर, समाजवादी पार्टी के महासचिव सांसद मोहन सिंह, समाजवादी नेता व किसान संघर्श समिति के संस्थापक अध्यक्ष डाॅ सुनीलम्, श्रीमती मंजू मोहन आदि ने संबोधित किया। सम्मेलन का संचालन सोषलिस्ट फ्रंट के विजय प्रताप कर रहे थे। सम्मेलन में हर वक्ता ने जहां सरकार की दमनकारी व षोशणवादी कुनीतियों से किसान, मजदूर व आम आदमी के जीवन पर ग्रहण लगाने वाली बताया वहीं मध्य प्रदेष में अदानी पावर प्रोजेक्ट लिमिटेड के गुण्डों द्वार डा सुनीलम व एडवोकेट आराधना भार्गव पर किये गये कातिलाना हमले की कडी भत्र्सना की। इसके साथ ही सरकार से मांग की गयी कि किसानों की जमीनों का जबरन छिनने की प्रवृति पर अंकुष लगाया जाय। इसके अलावा सम्मेलन में 4 जून की रात को बाबा रामदेव के जनांदोलन पर पुलिसिया दमन की भी कड़ी भ्रत्र्सना की गयी। सम्मेलन में प्रतिश्ठित समाजसेवियों में राजेन्द्र रवि, भूपेन्द्र सिंह रावत, समाजवादी नेता राजेष कुमार, भाशा आंदोलन के राजकरण सिंह, उत्तराखण्ड राज्य गठन जनांदोलन के देवसिंह रावत, जगदीष भट्ट व जगमोहन रावत, एनएपीएम की सुनीता, धर्मेन्द्र मित्रा, योगेष कमाल, देव षास्त्री, प्रीति आदि प्रमुख थे।

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