विदेश में पैदा होने मात्रा से करना एक प्रकार से भारतीय संस्कृति का अनादर करना ही है।

भारतीय संस्कृति कभी स्व व पर की लडाई की आज्ञा नहीं अपितु सदैव सत व असत के संघर्ष की आज्ञा देती है। महाभारत ही नहीं अपितु राम रावण संग्राम भी केवल सत असत की लड़ाई पर लडा गया। कौन कहां, किस जाति, ध्र्म, लिंग, स्थान, रंग या जीव में पैदा हो गया यह ईश्वर की इच्छा है। इस आधर पर किसी को श्रेष्ठ व किसी को तुच्छ मानने वाले ईश्वर के ही नहीं अपितु भारतीय संस्कृति के विरोध्ी होते है। सोनिया का विरोध् उसके गुण व दोष के आधर पर किया जा सकता है परन्तु उसका विरोध् विदेश में पैदा होने मात्रा से करना एक प्रकार से भारतीय संस्कृति का अनादर करना ही है।

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