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Tuesday, April 26, 2011

कलमाड़ी से गुनाहगार है भारत पर राष्ट्रमण्डल का कलंक लगाने वाले

-कलमाड़ी से गुनाहगार है भारत पर राष्ट्रमण्डल का कलंक लगाने वाले
-कलमाड़ी पर फंदा तो शीला पर मौन क्यों?
आज देष के सम्मुख राष्ट्रमंडल खेलों में हुए भ्रश्टाचार से बढ़ कर यह सवाल है कि देष पर गुलामी के इस बदनुमा कलंक राश्ट्रमण्डल की सदस्यता व एक स्वतंत्र देष में गुलामी के बदनुमा प्रतीक राश्ट्रमण्डल खेलों का आयोजन ही क्यों किया जा रहा है। देश में भ्रष्टाचारियों से बढ़कर सबसे बड़े गुनाहगार हैं वो लोग जिन्होंने देष में गुलामी के बदनुमा प्रतीक राश्ट्रमण्डल की सदस्यता व राश्ट्रमण्डल खेलों का आयोजन
कराने वाले।
यह न केवल देष के स्वतंत्रता संग्राम सैनानियों का अपमान है इसके साथ ही यह मानवता के भी गुनाहगार हैं। जिस देष में 45 प्रतिषत से अधिक लोग गरीबी की रेखा से नीचे जीवन बसर कर रहे हों, करोड़ों लोग दो जून की रोटी के लिए मोहताज हो, षिक्षा -चिकित्सा आदि से वंचित हों तो ऐसे देष में करोड़ों लोगों के पेट पर लात मार कर चंद लोगों के मनोरंजन व देष पर गुलामी का बदनुमा कलंक लगाना है।
राश्ट्रमण्डल खेलों में हुए भ्रश्टाचार के मामले में सीबीआई के षिकंजे में जकड़े कलमाड़ी के बयानों से दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित, उपराज्यपाल तेजेंद्र खन्ना समेत पूर्व खेलमंत्री एम एस गिल व कई केंद्रीय मंत्रालयों के दस से ज्यादा बड़े अधिकारियों के लिए मुश्किल हो सकती है। केंद्र सरकार के कई अधिकारी आयोजन समिति के फाइनेंस, प्रशासन, निगरानी जैसी विभिन्न समितियों में मौजूद थे। वहीं खेलों की निगरानी करने वाली केंद्रीय मंत्रियों की समिति और प्रधानमंत्री कार्यालय तक की भूमिका पर कलमाड़ी के बयान महत्वपूर्ण होने वाले हैं। राष्ट्रमंडल खेल महासंघ अध्यक्ष के माइक फेनेल और माइक हूपर को लेकर कलमाड़ी क्या बताते हैं यह देखना दिलचस्प होगा। राश्ट्रमण्डल खेलों के आयोजन में हुए भ्रश्टाचार के आरोप में जहां सीबीआई ने अब तक जांच एजेंसियों की पकड़ से बचते रहे राष्ट्रमंडल खेल आयोजन समिति के पूर्व अध्यक्ष सुरेश कलमाड़ी पर आखिरकार सीबीआइ का शिकंजा कसने के बाद उन्है छह महीने की जांच के बाद सीबीआइ ने सोमवार 25 अप्रैल को उन्हें एक स्विस कंपनी को दिए गए 107 करोड़ रुपये ठेके में भ्रष्टाचार के आरोप में गिरफ्तार कर लिया। परन्तु वहीं इस खेल के आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही दिल्ली सरकार की भूमिका पर प्रधानमंत्री के आदेष से इन खेलों मंे हुए भ्रश्टाचार की जांच के लिए बनी षुगलू कमेटी की रिपोर्ट में कटघरे में बुरी तरह से घिरी दिल्ली सरकार की मुखिया षीला दीक्षित पर मौन रखने से लोगों की नजर में सीबीआई सहित पूरी प्रक्रिया ही संदेह की घेरे में खडी हो गयी है। दिल्ली सरकार व केन्द्रीय खेल मंत्रालय की भूमिका पर स्वयं कलमाड़ी भी खुले आम प्रष्न उठा चूके है। सबसे हैरानी की बात यह है ़कि दिल्ली सरकार व उसकी मुखिया पर षुगलू कमेटी ने काफी कठोर टिप्पणियां की है। इसके साथ जिस प्रकार से दिल्ली सरकार के एक मंत्री राजकुमार चैहान की भूमिका पर भी कांग्रेस आलाकमान सहित दिल्ली की मुख्यमंत्री ने षर्मनाक मौन रखा हुआ है, इससे लोगों को दाल ही पूरी तरह से काली नजर आ रही है। क्योंकि अगर कलमाड़ी ही नहीं इन खेलों में भ्रश्टाचार कराने वाले तमाम लोगों को सरकार को एक ही डण्डे से हांकना चाहिए। कानून की नजर में सब समान होने का जुलमा प्रत्यक्ष व्यवहार में भी दिखाई देना चाहिए। दूसरी तरफ अपने को पाक साफ दिखाते हुए कांग्रेस पार्टी ने भले ही कलमाड़ी को कांग्रेस से बाहर कर दिया हो परन्तु इससे कांग्रेस पर लगे दाग अन्य लोगों को संरक्षण देने से नहीं धूलने वाले। इस जांच से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि स्विटजरलैंड की कंपनी स्विस टाइमिंग को राष्ट्रमंडल खेलों के दौरान टाइम, स्कोर व रिजल्ट ख्टीएसआर, सिस्टम लगाने के लिए दिए गए ठेके में कलमाड़ी के शामिल होने के ठोस सुबूत मिलने के बाद उन्हें गिरफ्तार करने का फैसला लिया गया। इस मामले में गड़बड़ी के संकेत जांच एजेंसी को बहुत पहले मिल गए थे और जनवरी के पहले हफ्ते में एफआइआर भी दर्ज कर ली गई थी। पहली गिरफ्तारी 23 फरवरी को आयोजन समिति के महासचिव ललित भनोट और महानिदेशक वीके वर्मा के रूप में हुई। इसके बाद कलमाड़ी की गिरफ्तारी तय मानी जा रही थी। सीबीआइ ने सोमवार को कलमाड़ी के साथ ही आयोजन समिति के अतिरिक्त महानिदेशक खरीद, सुरजीत लाल और संयुक्त निदेशक ख्खेल, एसबी प्रसाद को भी गिरफ्तार कर लिया है।
सुत्रों टीएसआर का काम करने वाली स्विस टाइमिंग द्वारा फरीदाबाद की कंपनी जेम इंटरनेशनल के माध्यम से 23 करोड़ रुपये की रिश्वत दिए के बारे में अहम सुराग हाथ लगे हैं। गौरतलब है कि दैनिक जागरण ने तीन मार्च को श्स्विस कंपनी से कलमाड़ी को 30 करोड़ रुपये रिश्वत मिलने के संकेतश् शीर्षक खबर में बताया था कि किस तरह से स्विस टाइमिंग से मिली रकम को जेम इंटरनेशनल ने सिंगापुर स्थित एशियन एथलेटिक्स फेडरेशन को भेज दिया था, जिसके अध्यक्ष खुद सुरेश कलमाड़ी हैं। साथ ही स्विस टाइमिंग द्वारा आंध्र प्रदेश की एक कंपनी को मिले लगभग 13 करोड़ की रकम भी कलमाड़ी तक पहुंचने के संकेत मिल रहे हैं।
हिरासत के दौरान इन सभी लेन-देन के बारे में कलमाड़ी से विस्तार से पूछताछ की जाएगी। इसके साथ ही उनसे लंदन में हुए क्वींस बेटन रिले के दौरान एएम फिल्म्स व एएम कार्स व वैंस को दिए ठेके के बारे में पूछताछ की जाएगी। सीबीआइ की एक उच्च स्तरीय टीम लंदन से इस मामले में अहम दस्तावेज लेकर लौटी है। राष्ट्रमंडल खेल के केंद्र में रहे सुरेश कलमाड़ी की गिरफ्तारी पूरे प्रकरण को नया मोड़ दे सकती है। सामूहिक जिम्मेदारी की बात कर खुद को बचाने में जुटे कलमाड़ी के बयान तय करेंगे कि राष्ट्रमंडल घोटाला और किस-किस को लपेटेगा है। वैसे उनका पिछला रुख बरकरार रहा तो दिल्ली और केंद्र सरकार के कई बड़े नेताओं समेत अधिकारियों के लिए कलमाड़ी के बयान मुसीबत होंगे।
षेश श्री कृश्ण कृपा। हरि ओम तत्सत्। श्री कृश्णाय् नमो।

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