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Sunday, April 10, 2011

नक्कारे हुक्मरानों के कारण वरदान साबित हो सकने वाली जनशक्ति बनी अभिशाप


नक्कारे हुक्मरानों के कारण वरदान साबित हो सकने वाली जनशक्ति बनी अभिशाप
भारत की जनसंख्या 1.21 अरब
उत्तराखण्ड की हुई 1.67करोड़
ॅभारत के महापंजीयक व जनगणना आयुक्त सी. चंद्रमौली ने सन्2011  की जनगणना की घोषणा करते हुए देश की  जनसंख्या अब 1 अरब 21 करोड़ हो गया है। तथा देश की राजधानी दिल्ली की जनसंख्या 1 करोड़ 67 लाख से अधिक हो गयी है तथा देश के पर्वतीय राज्य उत्तराखण्ड प्रदेश की जनसंख्या 10116752 हो गयी है। संसार में जिस महान जनशक्ति का सही सदप्रयोग करके आज चीन विश्व को अपना गुलाम बनाने को तुले हुए स्वयं भू विश्व सम्राट अमेरिका के बर्चस्व को खुली चुनौती देने की स्थिति में है। उसी अपार जनशक्ति की घोर उपेक्षा करके विश्व के चीन के बाद के सबसे बड़े आबादी वाले देश भारत में यह वरदान साबित हो सकती जनशक्ति अभिशाप सी बन गयी है। देश के हुक्मरानों के गैरजिम्मेदार व राष्ट्रघाती निर्णयों के कारण आज देश के आम आदमी जहां मंहगाई, भ्रष्टाचार व आतंकी हिंसा से पीड़ित है। वही आधी सी अधिक जनता शिक्षा, चिकित्सा व मानक जीवन जन सुविधाओं से वंचित है। देश की सत्ता में काबिज नेता, नोकरशाह व दलालों के नापाक गिरोह के कारण देश की सारी सम्पति जो देश के विकास के काम में आ सकती थी वह विदेश व देश में काले धन के रूप में छुपी हुई है। देश के हुक्मरान खेल तमाशों में ही मस्त है उनको देश की दयनीय स्थिति से कोई लेना देना नहीं है। देश के आधे से अधिक लोग गरीबी की रेखा के नीचे जीवन यापन करने में विवश हैं। आज जहां आस्ट्रेलिया से लेकर यूरोप, जापान सहित विश्व के कई विकसित देश अपनी जनसंख्या दर में बढ़ोतरी न होने के कारण परेशान है वहीं भारत अपनी विश्व में सबसे अधिक युवा, तकनीकी, शिक्षित जनशक्ति का सदप्रयोग कर देश के विकास की मजबूत नींव तक रखने की हिम्मत तक नहीं जुटा पा रहा है।वहीं  देश की जनसंख्या विगत दस सालों में 17.64 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। हालांकि यह आजादी के बाद की तमाम जनगणनाओं की दृष्टि से सबसे कम बढ़ोतरी हुई। इसमें गत जनगणना के मुकाबले 4 प्रतिशत कम बढ़ोतरी हुई। इस प्रकार जहां जनसंख्या के आधार पर उत्तराखण्ड देश का 20 वां तथा साक्षरता की दृष्टि से देश का 17 वां राज्य बन गया है। केंद्रीय गृह सचिव जीके पिल्लै और भारत के महापंजीयक सी. चंद्रमौलि ने बताया कि इस जनगणना में देश के 35 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के सभी 640 जिलों को शामिल किया गया । इस जनगणना पर 2200 करोड़ रूपये का खर्च आया। वहीं घर-घर जाकर देश के हर नागरिक को जनगणना के कार्यक्रम में करीब 27 लाख कर्मचारी लगाए गए थे। देश की इस 15वीं जनगणना का यह कार्यक्रम दो चरण में पूरा किया गया। पहला चरण अप्रैल से सितंबर, 2010 और दूसरा चरण 9 से 29 फरवरी, 2011 के बीच संपन्न हुआ।
वहीं उत्तराखण्ड राज्य की जनगणना के आंकडों पर प्रकाश डालते हुए प्रदेश की निदेशक स्नेहलता शर्मा ने गत सप्ताह सन् 2011 की जनगणना का ऐलान करते हुए बताया कि वर्ष 2001 में उत्तराखंड की आबादी 8489349 थी, जो वर्ष 2011 में 16 लाख से अधिक बढ़कर 10116752 हो गयी है। इसमें पुरूषों की संख्या 5154178 और महिलाओं की आबादी 4962574 है। इन आंकड़ों के अनुसार प्रदेश के पर्वतीय जनपदों की तुलना में मैदानी जनपदों देहरादून, नैनीताल, हरिद्वार और उधमसिंहनगर जिलों की आबादी में अच्छी खासी बढ़ोत्तरी हुई है।  जनगणना के अनुसार उत्तराखंड में साक्षरता दर में भी 8प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। वर्ष 2001 में यह 71 प्रतिशत थी, जो अब बढ़कर 79.63 फीसदी हो गयी है।प्रदेश में लिंगानुपात में  अल्मोड़ा जिले ने देश भर में दूसरा स्थान हासिल किया है,  लिंगानुपात में अल्मोड़ा जिला पूरे देश के लिए प्रेरणादायक बनकर उभरा है। यहां पर प्रति एक हजार पुरुषों पर 1142 महिलाएं हैं। साक्षरता दर में जहां महिलाओं का अनुपात 60 फीसदी से भी कम था, वहीं अब यह आंकड़ा 70 फीसदी पार कर गया है।  देश में साक्षरता की दृष्टि से 74 फीसदी आबादी साक्षर हो चुकी है। लेकिन शर्मनाक बात है कि इस दौरान गर्भ में बच्चियों की हत्या के कारण छह साल तक की आबादी में इस समय एक हजार लड़कों के मुकाबले  गत जनसंख्या में 927 से घटकर 914 लड़कियां ही हैं।
उत्तर प्रदेश 20 करोड़ आबादी के साथ अब भी पहले स्थान पर बना हुआ है। इस अकेले राज्य की आबादी ब्राजील से ज्यादा है। 11.23 करोड़ के साथ महाराष्ट्र दूसरे और 10.38 करोड़ के साथ बिहार तीसरे नंबर पर है। सबसे कम आबादी लक्ष्यद्वीप की है। यहां कुल 64,429 लोग हैं।
वर्तमान जनगणना के अनुसार प्रति हजार पुरुषों के मुकाबले महिलाओं का औसत पहले के 933 के मुकाबले बढ़ कर 940 हो गया है। सिर्फ बिहार, गुजरात और जम्मू-कश्मीर ही ऐसे तीन राज्य रहे, जिनमें महिलाओं का औसत कम हुआ है।  पिछली जनगणना के 927 से भी घट कर 914 हो गया है। छह साल तक की आबादी में लड़कियों के औसत के मामले में हरियाणा और पंजाब 830 और 846 के औसत के साथ सबसे निचले पायदान पर हैं।
जनगणना के ताजा आंकड़ों के मुताबिक देश में सात साल से ऊपर की आबादी में 74 फीसदी लोग अब साक्षर हो चुके हैं। 2001 में हुई जनगणना के दौरान देश भर में सिर्फ 64.83 फीसदी लोग ही साक्षर पाए गए थे। साक्षरता के मामले में बिहार और अरुणाचल प्रदेश 63.82 और 66.95 फीसदी साक्षरता के साथ सबसे निचले पायदान पर हैं। जबकि 93.91 फीसदी के साथ केरल अव्वल है। तेजी से साक्षर बनने के मामले में महिलाओं ने पुरुषों से बाजी मारी है। जहां पुरुषों में साक्षरता दर 6.88 फीसदी ही बढ़ी, वहीं महिलाओं में यह 11.79 फीसदी की दर से बढ़ी।
 अगर देश के हुक्मरान देश की जनसंख्या का सही ढ़ग से सदप्रयोग करते तो आज विश्व के तमाम बाजारों में चीन के साथ साथ भारत के उत्पादों का बर्चस्व भी बना रहता।  हमारे हर हाथ को काम मिलता व हम विश्व में अपना महत्वपूर्ण योगदान देने का ही काम नहीं करते अपितु विश्व को सही दिशा देने का भी काम करते।
शेष श्रीकृष्ण कृपा। हरि ओम तत्सत्। श्री कृष्णाय् नमो।

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