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Tuesday, April 12, 2011

अण्णा के चमत्कार से फट्टी सी रह गयी अमेरिका सहित विश्व की आंखे


अण्णा के चमत्कार से फट्टी सी रह गयी अमेरिका सहित विश्व की आंखे
आज अमेरिका सहित पूरा विश्व के लोग भारत के नये जननायक अण्णा हजारे को किसी आश्चर्य से कम नहीं मान रहे है। पूरा विश्व यह नहीं समझ पा रहा है कि जिस प्रकार भ्रष्टाचारी व निरंकुश हुक्मरानों को झुकाने में मिश्र, अरब देशों व लीबिया में इतना खुन खराबा करने के बाद भी ऐसी महत्वपूर्ण सफलता नहीं मिली, वह सफलता भारत में मात्र 98 घण्टे के आमरण अनशन के बाद 72 वर्षीय समाजसेवी अण्णा हजारे ने पूरी सरकार को झुका कर हासिल कर दिया। इस विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र की जनविरोधी सरकार को झुकाने के लिए किसी भी आंदोलनकारी को एक गोली व बंदुक या टैंक या लाठी नहीं चलानी पड़ी। अभी तक गांधी के रूप में भारत की इस अदभूत आत्मशक्ति से परिचित शेष विश्व इस को किसी अदभूत घटना से कम नहीं मान रहा है। पूरे विश्व में जिस प्रकार से भ्रष्टाचार का आतंक मचा हुआ है। सरकारें जन विरोधी व लोकतंत्र विरोधी हो रही है, ऐसी स्थिति में संसार को मार्ग दर्शन देने के लिए शंाति के मार्ग पर एक नयी राह दिखाने का काम भारत के एक साधारण सा समझा जाने वाले संत अण्णा हजारे ने किया।
 ‘संभवामी युगे युगे...के वचन को मेरे जैसे साधारण व्यक्ति को आगे करके परमात्मा ने साकार किया। यह सब परमात्मा की अपार कृपा है नहीं तो यह काम करना मेरे बस मैं कहां है’। यह कथन देश की सरकार के अपने आमरण अनशन से  घुटने  टिकाने वाले देश के नये जननायक अण्णा हजारे ने उस समय कहे जब वे संसद की चैखट पर मिली अपनी ऐतिहासिक सफलता के बाद पहली बार महाराष्ट्र स्थित अपने गांव रालेगान सिद्धी पंहुच रहे थे। उनके साथ आईबीएन 7 के संवाददाता ने जब उनकी ऐतिहासिक सफलता पर उनसे प्रश्न किया तो उसके उत्तर में अण्णा जी ने दो टूक शब्दों में उपरोक्त उत्तर दिया, इसी उत्तर से उनकी महानता व उनके प्रभु के अनन्य शक्ति को आत्मसात करने का पता चलता है।
इस 98 घण्टे के आमरण अनशन की बदौलत ही देश में गांधी व जयप्रकाश नारायण से जनजनायकों की पंक्ति में रखे जाने वाले महानायक अण्णा हजारे का जीवन भी आजकल के आधुनिक किसी संत व महात्माओं को भी  सीख देने वाला नहीं है।  भले ही वे उनको आज के शिक्षित लोग अल्प शिक्षित व साधारण ड्राइवर समझ कर हल्के में लें परन्तु उन्होने अपने जीवन को लोकोपकार व अन्याय के खिलाफ सदैव समर्पित करने का जो कार्य किया  उसी ने ही उनको देश के महान संतों से उपर व विलक्षण जननायकों की श्रेणी में धु्रव तारे की तरह स्थापित कर दिया है।
भारतीय जनमानस में महानायक की तरह उभरे अण्णा हजारे ने देश की रक्षा के लिए सेना में 1960में  भर्ती हो कर शुरू किया था। सेना में वे ड्राइवर के पद पर कार्यरत रहे। चीन के साथ यु( में शामिल रहे अण्णा हजारे का असली नाम किसन बाबुराव हजारे है, जिन्हें लोग अब अण्णा हजारे के नाम से जानते हे।
1975 अण्णा हजारे ने अपने गांव में स्वैछिक सेवा निवृति के बाद रहने लगे। परन्तु उन्होंने शादी न करने का फेसला करते हुए मंदिर को अपना रहने का ठोर बनाया। आज उनके पास न तो कोई सम्पति है व नहीं कोई बैंक एकाउन्ट। पूरे गांव नहीं क्षेत्र के विकास के बाद उन्होंने यहां पर भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए अपना आंदोलन प्रारम्भ कर दिया।  उनके अनशनों से महाराष्ट्र की राजनीति में कई मंत्रियों व अधिकारियों को इस्तीफा देना पड़ा। अण्णा के क्रांतिकारी पहल से इस क्षेत्र की काया ही पलट गयी। अण्णा किसी भी राजनीतिक पार्टी से न जुड कर सभी भ्रष्टाचारियों को निर्ममता से दूर करने के लिए तीन दशक से संघर्ष करते रहे, उनके निशाने पर एनसीपी, कांग्रेस, भाजपा-शिवसेना के नेता तथा नौकरशाह रहे। उनके जीवन पर स्वामी विवेकानन्द, आचार्य विनोवा भावे, महात्मा गांधी व महान संत ज्ञानेश्वर का गहरा प्रभाव पड़ा।  उनके आमरण अनशन से 1995 में राज्य के दो कबीना मंत्रियों को इस्तीफा देने के लिए मजबूर होना पड़ा। सन् 2003 में भी चार मंत्रियों के खिलाफ उन्होंने आमरण अनशन उनके विरोधियों ने उनको मारने के लिए सुपारी तक दी। इसका खुलाशा होने पर इस प्रकरण पर राजनेताओं का भारी विरोध हुआ। वर्तमान समय में उनके अनशन के समर्थन में उनके कट्टर विरोधी शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे ने भी खुला समर्थन दिया।
अण्णा हजारे के समर्थन में उनके अनशन तक उनका विरोध करने वाली राकांपा भी अब जनभावनाओं के आगे झुकते हुए उनको देश का नायक मान रही है।
जहां तक अण्णा को गांधी या जयप्रकाश नारायण के समकक्ष मानने की तो इसका सबसे बड़ा प्रतिकार स्वयं अण्णा हजारे ने ही किया। उन्होंने कहा कि उनका गांधी जी से कहीं भी तुलना नहीं की जा सकती वे अपने आप को अल्प शिक्षित तथा गांधी जी को उच्च शिक्षित मानते हैं। विनम्र व दृढ़ इच्छा शक्ति के महानायक अण्णा हजारे ने कहा कि महात्मा गांधी महान चिंतक, युग पर्वतक के साथ साथ उच्च शिक्षित थे।
भगवान पर अटूट विश्वास रखने वाले अण्णा हजारे ने अपने गांव पंहुचने वाले दिन अपने मंदिर में अपने भगवान की चरणों में नमन् करने से पहले कुछ भी ग्रहण नहीं किया।
आज उनके विरोधी भले ही उनको गांधी मानने पर इतराज करते हुए कहते हैं कि जब महाराष्ट्र में उत्तर भारतीयों पर गुण्डे अत्याचार कर रहे थे या मुम्बई व गुजरात मंें दंगे हो रहे थे तो अण्णा मूक क्यों रहे। अगर उनमें गांधी का एंकाश भी होता तो वे तुरंत इन दंगों व निरपराध लोगों को मारने वालों का प्रतिकार करने में आगे आते।
यह सही है अण्णा हजारे गांधी जैसे भले न हो परन्तु आज के युग में जब देश के हुक्मरान देश को अपने निहित स्वार्थों व पदलोलुपता के लिए दाव पर लगा रहे हों। चारों तरफ भ्रष्टाचार व हिंसा का तांडव मचा हो, ऐसे में अण्णा जैसे जननेता आगे आ कर आमरण अनशन देश को बचाने के लिए करे तो देश की जनता उनमें गांधी या जय प्रकाश नारायण जैसा तारन हार समझले तो इसमें जनता की बड़ी भूल नहीं होगी। यह सही है कि गांधी का दर्शन व संघर्ष बड़ा महान था परन्तु गांधी हो या जय प्रकाश सभी भारतीय दर्शन के एक सिपाई मात्र रहे, इसी भारत की धरती में कब भगवान किसे गांधी बना दे व कब किसे अण्णा यह सब उसकी ही माया है। एक बार फिर विश्व में अन्याय व अत्याचार के खिलाफ सदैव कुरूक्षेत्र में संघर्षरत रहने का अमर घोष करने वाले भगवान श्रीकृष्ण को इस बात के लिए नमन् करता हॅू कि उन्होंने अपने वचनों को अण्णा के द्वारा साकार करा कर निराश हुए भारतीयों व विश्व को सही दिशा दी।

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