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Friday, July 8, 2011

मुजफरनगर काण्ड के दोषियों को सजा दिलाने व राजधानी गैरसैंण बनाने के लिए कांग्रेस पर बढ़ा दवाब

मुजफरनगर काण्ड के दोषियों को सजा दिलाने व राजधानी गैरसैंण बनाने के लिए कांग्रेस पर बढ़ा दवाब/
केन्द्रीय मंत्री हरीश रावत के आवास पर उत्तराखण्डी पत्रकारों के भोज में कांग्रेस प्रभारी चैधरी वीरेन्द्र के सम्मुख प्रखरता से उठा मामला/

नई दिल्ली( प्याउ)। नई दिल्ली में केन्द्रीय कृषि राज्यमंत्री हरीश रावत के आवास पर दिल्ली में रहने वाले उत्तराखण्ड के पत्रकारों के लिए 8 जुलाई की रात 8 बजे आयोजित एक विशेष भोज में कांग्रेस के केन्द्रीय महासचिव व उत्तराखण्ड प्रभारी चै. वीरेन्द्रसिंह व मुजफरनगर काण्ड-94 के दोषियों को सजा दिलाने व प्रदेश की स्थाई राजधानी गैरसैण बनाने की मांग प्रमुखता से उठी। इस मांग को उठाते हुए उत्तराखण्ड राज्य गठन के अग्रणी आंदोलनकारी व प्यारा उत्तराखण्ड के पत्रकार देवसिंह रावत ने कांग्रेस प्रभारी चैधरी वीरेन्द्रसिंह का ध्यान आकृष्ठ करते हुए कहा कि एक तरफ कांग्रेस मानवता व न्याय की रक्षा के नाम पर गुजरात दंगों के दोषियों को सजा दिलाने व 1984 के सिख दंगों के पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए जांच आयोग गठित कर रही है परन्तु अफसोस है कि देशभक्त उत्तराखण्डियों के साथ मुजफरनगर में 2 अक्टॅूबर 1994 में जो जघन्य काण्ड पुलिस प्रशासन ने किया, उसके दोषियों को आज 17 साल बाद भी सजा देनी तो रही दूर उनको ईमानदारी से कटघरे पर खड़ा करने में भारत की व्यवस्था असफल रही। सम्पादक देवसिंह रावत ने कहा कि इस बात के लिए प्रदेश की वर्तमान सरकार ही नहीं अपितु उत्तराखण्ड की मुख्यमंत्री नारायणदत्त तिवारी के नेतृत्व में आसीन रही प्रथम निर्वाचित कांग्रेसी सरकार भी पूरी तरह इन दोषियों को सजा दिलाने के बजाय इनकों शर्मनाक संरक्षण देने में लिप्त रही। श्री रावत ने प्रदेश प्रभारी से मांग की कि आगामी विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस प्रदेश की जनता से वायदा करे कि अगर कांग्रेस प्रदेश में सत्ता में आती है तो वह मुजफरनगर काण्ड-94 के दोषियों को सजा दिलाने के साथ साथ प्रदेश की स्थाई राजधानी जनभावनाओं के अनरूप गैरसैंण बनायेगी। श्री रावत ने केन्द्रीय प्रभारी चै. वीरेन्द्रसिंह का ध्यान मुजफरनगर काण्ड-94 पर इलाहाबाद उच्च न्यायालय की टिप्पणी पर भी दिलाया, जिसमें इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने तत्कालीन केन्द्र की नरसिंह राव सरकार व उप्र की मुलायम सिंह सरकार के इस कृत्य को नाजी अत्याचारों के समकक्ष रखा। श्री रावत ने अफसोस प्रकट किया कि जिस काण्ड पर जिन दोषियों को हाईकोर्ट ने ही नहीं अपितु देश की सर्वोच्च जांच ऐजेन्सी सीबीआई, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, महिला आयोग सहित तमाम निष्पक्ष मानवाधिकार संगठनों ने दोषी ठहराया था उन दोषियों को आज 17 साल बाद भी देश की व्यवस्था दण्ड देने में असफल रही।
केन्द्रीय मंत्री हरीश रावत के यहां पत्रकारों के लिए आयोजित इस भोज में बड़ी संख्या में दिल्ली के उत्तराखण्डी पत्रकारों ने भाग लिया। इनमें देश के अग्रणी पत्रकार भारत भूषण, हिन्दुस्तान दैनिक के कार्यकारी सम्पादक गोविन्द सिंह, पंजाब केशरी के एम एस मेहता, पूर्व सम्पादक पपनैं, लोकसभा चैनल के ज्ञानेन्द्र पाण्डे, दूरदर्शन के पूर्व समाचार सम्पादक राजेन्द्र धस्माना, व्योमेश जुगरान, सुनील नेगी, जनसत्ता के राकेश तिवारी, उमाकांत लखेड़ा, दाताराम चमोली, एनडीटीवी के सुशील बहुगुणा, भूपेन्द्र सिंह, हर्ष डोभाल, सहारा समय के मंजीत नेगी, राष्ट्रीय सहारा के रोशन गौड, देवेन्द्र उपाध्याय, अवतार नेगी, अमर उजाला के हरीश लखेडा,स्टार न्यूज से मनू पंवार, राजेश डोबरियाल साधना न्यूज, शिवानन्द चंदोला, खुशहाल जीना व श्रीमती नीलम जीना, एडीटीवी के हरीश जोशी, अर्चना ज्योति, अमर उजाला से वेद उनियाल, पीटीआई से विवेक जोशी, डेक्कन हेरड से दीपक उप्रेती, एन एस नेगी, उत्तर उजाला से के एन जोशी, अनिल पंत, वेद भदोला, नीरज जोशी गिरीश बलूनी, जगदीश भट्ट, चारू तिवारी, टाइम पास के कैलाश धुलिया सहित अनैक वरिष्ठ पत्रकार उपस्थित थे। इस भोज में सम्मलित होने वाले अग्रणी समाजसेवियों में प्यारा उत्तराखण्ड के प्रबंधक सम्पादक महेश चंद्र भी सम्मलित थे। यहां पर भाग लेने वाले पत्रकारों का स्वागत करने वालों में वरिष्ठ कांग्रेसी नेता एम एस रावत, हरिपाल रावत व नन्दन सिंह घुघत्याल, हरीश रावत के बड़े बेटे वीरेन्द्र रावत, करण सिंह बुटोला, एस के जैन, रवीन्द्र नेगी, हरीश रावत के साहयक श्री जीना व शंकर सिंह रावत, हरीश आर्य, हुकमसिंह कण्डारी आदि प्रमुख थे।

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