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Saturday, October 8, 2011

अब तक भाजपा की उत्तराखण्ड सरकार के भ्रष्टाचार पर मूक रहने वाले बाबा रामदेव व अण्णा माफी मांगे

अब तक भाजपा की उत्तराखण्ड सरकार के भ्रष्टाचार पर मूक रहने वाले बाबा रामदेव व अण्णा माफी मांगे by Dev Singh Rawat on Sunday, 09 October 2011 at 11:00 अब तक भाजपा की उत्तराखण्ड सरकार के भ्रष्टाचार पर मूक रहने वाले बाबा रामदेव व अण्णा माफी मांगे बाबा रामदेव देश में भ्रष्टाचार के खिलाफ व विदेशी बैंकों में जमा भारतीयों के काले धन को देश में वापस लाने की मांग करने के अपने जनांदोलन के दूसरे चरण में ंउत्तराखण्ड की पावन धरती पर पंहुच कर अपना अभियान में जनता से आगामी चुनाव में कांग्रेस पार्टी के खिलाफ ंमतदान का आवाहन कर रहे है। परन्तु उत्तराखण्ड की ंमहान जनता जो अनादिकाल से भ्रष्टाचार व कुशासन के खिलाफ ंनिरंतर कुरूक्षेत्र के मैदान में उतर कर पूरे विश्व को दिश्ंाा देने का काम करते आ रहे हैं, चाहे विदेशी लुटेरों के शासन के खिलाफ हो या आजादी के बाद के लोकशाही को रोंदने वाले कुशासकों के नापाक इरादों को जमीदोज करके करारा सबक सिखाने का काम करने के लिए विख्यात रही। उत्तराखण्ड की जनता यह देख कर हैरान रही कि अण्णा हजारे के सिपाहेसलार जो कुछ समय पहले भाजपा सरकार ंके आवभगत से चकाचैंध हो कर प्रदेश की छाती पर प्रदेश की भाजपा सरकार द्वारा मूंग दले जाने पर एक शब्द भी बोलने से बचते रहे व बाबा राम देव जो स्वयं उत्तराखण्ड ंके निवासी हैं उनके मुखारविंद से एक भी शब्द प्रदेश को भ्रष्टाचार की गर्त में धकेलने वाले भाजपा सरकार के खिलाफ मुंह खोलना तो रहा दूर उल्टा उनके गरिमामय समर्थन से अपने आप को गौरवान्वित समझते रहे।
भ्रष्टाचार का विरोध में देश की जनता का नैतिक समर्थन की आश में पूरे देश में जनांदोलन करने वाले बाबा रामदेव व अण्णा हजारे कोे एक बात का भान रहना चाहिए कि देश की जनता भ्रष्टाचार के मामले में उनकी निष्पक्षता को ही स्वीकार करेगी न की उनके पक्षपातपूर्ण रवैये को। ंअण्णा हजारे के सिपाहे सलार अरविन्द केजरीवाल व प्रशांत भंूषण को चाहिए था कि भाजपा सरकार के मुखोटे भुवनचंद खंडूडी से दो टूक शब्दों में कहते कि आप कडा लोकपाल विधेयक बनाओ परन्तु इससे पहले आप अपनी भाजपा सरकार के कार्यकाल में हुए स्टर्जिया व जल विद्युत परियोजनाएं आदि घोटाले के दोषियों को सलाखों की पीछे डाल कर जनविश्वास की रक्षा करेें न कि केवल महज शब्दों के कानूनी जाल की धूल झोंक कर जनता का वोट हरण का कृत्य करो। वहीं बाबा रामदेव भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग का ऐलान उस उत्तराखण्ड की धरती पर करने का कृत्य किस मुंह से कर रहे हैं जिस प्रदेश की सरकार के खिलाफ एक शब्द बोलने का उनको नैतिक साहस तक नहीं रहा । वे दिल्ली जनांदोलन के बाद किसी महात्मा या सदचरित्र ंसमाजसेवी से अधिक भरोसा ंउत्तराखण्ड प्रदेश के भाजपा सरकार के तत्कालीन मुख्यमंत्री निशंक पर प्रकट कर रहे थे जिसकी सरकार के भ्रष्टाचार से प्रदेश की जनता ं त्राही-त्राही कर रही थी। बाबा रामदेव ने ंअपने इस अभियान में उत्तराखण्ड ंकी अस्मिता व देश की संस्कृति से खिलवाड़ करने वाले मुजफरनगर काण्ड-94 के खलनायक रहे मुलायम सिंह के खिलाफ एक शब्द बोलने का साहस व नैतिकता तक नहीं ंप्रदर्शित कर पाये। यही नहीं ंभू माफियाआंे द्वारा सीमान्त प्रदेश उत्तराखण्ड की भूमि पर कब्जा करने के कृत्यों पर मुंह खोलने का साहस तक नहीं जुटा पाया। यही नहीं बाबा रामदेव उत्तराखण्ड के उस मंत्री का नाम भी बतानेे का साहस नहीं जुटा पाये जिसने उनसे करोड़ रूपये रिश्वत मांगने का कृत्य किया था। बाबा रामदेव व अण्णा हजारे को एक बात समझना चाहिए नैतिकता का दोहरा मापदण्ड उत्तराखण्ड की उस स्वाभिमान व भारतीय संस्कृति के मूल आधार उत्तराखण्डी जनता कभी सपने में भी स्वीकार नहीं करती । इस पावन धरा के भू पुत्रों ने अत्याचारी मुगलों, फिरंगियों, चीन व पाक के दांत खट्टे करने का अदम्य साहस किया तो इसके साथ उन्होंने ंआजादी के बाद लोकशाही को रौंदने वाली इंदिरा गांधी, ंराव व ंमुलायम सिंह, तिवारी, खंडूडी आदि जनादेश से करारा सबक सिखाने का गौरवाशाली कीर्तिमान स्थापित भी किया है। बाबा रामदेव हो या अण्णा हजारे या अन्य कोई समाजसेवी या राजनेता एक बात समझ लेनी चाहिए कि इस देश में अनादिकाल से भ्रष्टाचारियों, कुशासकों व दमनकारियों के खिलाफ संघर्ष करने का युगों युगों का सनातनी इतिहास रहा है। संसद की चैखट जंतर मंतर पर पृथक उत्तराखण्ड राज्य गठन के लिए ऐतिहासिक 6 साल (अगस्त 1994 से 16 अगस्त 2000) का ऐतिहासिक सफल धरना जन ांदोलन का एक प्रमुख सिपाई रहने के अदभूत अनुभव के अनुसार में भगवान श्रीकृष्ण व काला बाबा के आर्शीवाद से प्राप्त अनुभव की बदोलत मैं यह कह सकता हॅू कि उत्तराखण्ड सहित देश की जनता हर उस व्यक्ति के साथ है हर उस व्यक्ति के साथ है जो देश के हित में कार्य करते हुए संघर्ष कर रहा होता है। देश हित के लिए निष्पक्ष हो कर संघर्ष करने वाले व्यक्ति के साथ जनता ंतनमनधन अर्पित करने के लिए जहां तत्पर है वहीं वह दोहरे मापदण्ड को लेकर ंसंघर्ष करने वालो को बेनकाब करना भी जानती है। अण्णा हजारे व बाबा रामदेव को यह समझ लेना चाहिए कि नासते विध्यते भावो, ना भावो विध्यते सत्। असत् का साथ लेने वाले भीष्म, कर्ण, आचार्य जैसे महाबली को भी पराजय को ही वरण करना पड़ा। इसलिए देश हित में उनसे आशा है कि वे पक्षपात रहित हो कर दलों के मोह से उपर उठ कर अपना आंदोलन चलाये। तभी देश व उनके संकल्प की रक्षा होगी। देवभूमि उत्तराखण्ड मे इस दोहरे मापदण्ड के साथ अपना अभियान चलाने वाले बाबा रामदेव व कुछ समय बाद उत्तराखण्ड में अभियान चलाने वाले अण्णा हजारे को उत्तराखण्ड की पावन धरती व जनता से माफी मांगते हुए पक्षपात रहित मात्र देशहित कार्य करना चाहिए। उत्तराखण्ड की जनता भ्रष्टाचार से उत्तराखण्ड की धरती को रौदने वाली भाजपा को कैसे माफ करेगी? क्या करेंगे ऐसे जनलोकपाल या कानूनों का जिसका बागडोर ही भ्रष्टाचार को संरक्षण देने वाले कुशासकों के हाथों में हो ? भ्रष्टाचार जो भी करे उसका जनमत द्वारा सफाया करने से ही जनतंत्र व देश मजबूत होता है। चाहे वह कांग्रेस का हंो या भाजपा या अन्य दलों का। 20 14 में होने वाले लोकसभा चुनाव मेें कांग्रेस ंको व 2012 में हो रहे विधानसभा चुनाव में प्रदेश की जनता भाजपा को प्रदेश से उखाड ़ फैंकेने का काम करेगी। एक बात साफ करना चाहता हूॅ कि महाकाल कभी दुशासन, भ्रष्टाचारी, ंकालनेमी व तानाशाह को उत्तराखण्ड की पावन धरती पर अपने नापाक इरादों का साकार करने की इजाजत नहीं देता। उत्तराखण्ड सहित देेश की जनता भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान में अनादिकाल से संघर्षरत है। मुर्गे की तरह अपनी बाग पर सुबह होने का भ्रम रखने वालों को इस बात का ऐहसास होना चाहिए कि भगवान श्रीकृष्ण व भगवान राम के इस सृष्टि में कुशासन के खिलाफ मर्यादाओं की रक्षा के लिए गुरूगोविन्दसिंह, विवेकानन्द, अमर शहीद भगतसिंह, गांधी जी, नेताजी सुभाष चंद्र बोस सहित असंख्य महापुरूषों व ंसमाजसेवियों ंने देश को अपने ंसंघर्षों से शताब्दियों तक मार्गदर्शन इसी लिए करने में सफल रहे कि उनका जीवन पक्षपात रहित ंपूर्ण रूप से देश व मर्यायादाओं के लिए समर्पित रहा। मैं आशा करता हॅू कि अण्णा व रामदेव भ्रष्टाचार के खिलाफ अपने राष्ट्र व्यापी अभियान में अपने मार्ग में आ रहे ंआसक्ति पूर्ण व्यवहार को दूर करके समदर्शी व्यक्तित्व बना कर राष्ट्र सेवा में ंसमर्पित हो कर राष्ट्र की लोकशाही को मजबूत बनायेंगे। शेष श्री कृष्ण। हरि ओम तत्सत्। श्रीकृष्णाय् नमो।

4 comments:

  1. सत्ताओं से लड़ना सब के बूते की बात नहीं
    सबकी किस्मत में लेकिन 'दिल्ली की सी' रात नहीं
    बाबा, अन्ना, अरविन्द, किरण या लड़ता हो और कोई
    चोर - डकैतों को 'गद्दी' अब और नहीं, और नहीं .....

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  2. सत्य अहिंसा की बाते तो नारों तक ही सीमित हैं !

    चापलूस नाकारा तो राजकोष से बीमित हैं !!
    ग्यानी लोगो का नित अपमान यहाँ पर होता है !
    अन्याय, न्याय की कुर्सी पर पैर पसारे सोता है !!
    कल तक का वैभवशाली देश अपना वैभव खोता है !
    भ्रष्ट राजनीती के फंदे में देश बिलख कर रोता है !!
    जिसका यश गान धरा औ अम्बर जोर-शोर से गाते थे ,
    जिसकी गौरवगाथा के आगे बड़े - बड़े झुक जाते थे !
    तुम उसे स्वयं अन्धकार में ढकेल रहे हो रिश्वतखोरों,
    जिसके पालित ज्ञान-मान-सम्मान सहित राह दिखाते जाते थे !!
    धिक् - धिक् - धिक्कार तुम्हे , तुम देश बेचने वालों को !
    शेर सरीखा समझा हमने तुम मूषक दिल वालों को !!

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  3. नासते विध्यते भावो, ना भावो विध्यते सत्। असत् का साथ लेने वाले भीष्म, कर्ण, आचार्य जैसे महाबली को भी पराजय को ही वरण करना पड़ा। ye baaten...rajniti k mahabhraston ko jaroor samjhni chahiye....

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  4. bhai ye batawo baba ramdev ya anna hi lad rahe hain kewal bhrastachar se,
    bhrastachar ke khilap anadikal se bhartiya ladte rahte hain, anyay or bhrastachar ke khilap khud main warson se lad raha hun, mudon par anna or baba ko sath diya par utrakhand or ngo par mook bane rahne par hum kese dohra pan swikar kar sakte hain

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