Pages

Tuesday, September 20, 2011

नव प्रभात शुभ प्रभात हो

नव प्रभात शुभ प्रभात हो


नव प्रभात शुभ प्रभात हो
जड़ चेतन का कल्याण हो
सूरज की पहली किरण से
मनमंदिर को आलौकित कर दो
ऐसे सुविचार संचारित हो मस्तिष्क में
शुभागमन परम शांति का हो जग में
मिटे राग द्वेष का तम इस जग से
प्रभु ऐसी सुप्रभात ही अब कर दो
जग में इस जीवन यात्रा में
हर ंतन मन को निर्मल कर दो
ंइस जग में बहे सदा निर्मल प्रेम की गंगा
श्रीकृष्ण ऐसा ही वरदान दे दो जग को ।।
(देवसिंह रावत -21 सितम्बर 2011 ंप्रातः सात बजे)

No comments:

Post a Comment