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Thursday, November 10, 2011

संगठन की नहीं, सरकार की बागडोर संभाले राहुल गांधी


संगठन की नहीं, सरकार की बागडोर संभाले राहुल गांधी/
-नक्कारे साबित हो चूके प्रधानमंत्री सहित मंत्रियों को बदल कर होगा द ेश व कांग्रेस का भला/
 एक साल में 6 बार पेट्रोलियम पदार्थों की कीमत बड़ा कर कांग्रेसी मनमोहन सरकार ने लोगों का एक प्रकार से जीना ही हराम कर दिया हे। इसके बाबजूद कांग्रेस ऐसे प्रधानमंत्री को बदलने का साहस तक नहीं कर पा  रही है। जबकि आम आदमी चाहता है  मनमोहन को सोनिया गांधी तत्काल प्रधानमंत्री की कुर्सी  से हटाये। मंहगाई में मरणासन्न देष के जख्मों में मरहम लगाये। मनमोहन सिंह ंको एक दिन के लिए भी  प्रधानमंत्री बनाये रखना देष  व आम जनता के हितों से खिलवाड करने के साथ कांग्रेस की जड़ों में मटठा डालना है। इसी को भांप कर मनमोहन सिंह के कुछ समर्थक  सोनिया से राहुल गांधी को संगठन में कार्यकारी अध्यक्ष  का ताज पहना कर किनारा लगाना चाहते हे। परन्तु आज देष व आम कांग्रेसी जनता की आवाज है कि ंवह राहुल गांधी को प्रधानमंत्री के रूप में देखना चाहती है। देष में न केवल मंहगाई, भ्रश्टाचार व आतंकवाद से तबाही के करार पर है वही ं देष की समग्र विदेष नीति भी एक प्रकार से  मनमोहन सिंह के कारण अमेरिका की पूछलग्गू सी बन कर कूंद हो गयी है।
परन्तु लगता हैं कांग्रेस आलाकमान को देश की हवाओं में बह रहे जनसंदेश को भांपने में असफल हैं या वह अमेरिका के भारी दवाब के कारण इतनी लाचार है कि वह देश व कांग्रेस को पतन के गर्त में धकेलने वाली अपनी सरकार के सबसे नक्कारे साबित हो चूके प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को तत्काल हटाने के बजाय केन्द्रीय मंत्रीमण्डल में ही बदलाव करने को समर्थन कर रही है। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को तत्काल हटा कर उनके कुशासन के कारण बेलगाम मंहगाई, भ्रष्टाचार व आतंकवाद से अराजकता के गर्त में पंहुच चूके देश को बचाने के लिए तत्काल राहुल गांधी को प्रधानमंत्री बना कर देश व कांग्रेस की रक्षा करने के अपने दायित्व का निर्वाह करना चाहिए। वहीं दूसरी तरफ प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह  अपनी छवि सुधारने के नाम पर कभी  देश के वरिष्ठ सम्पादकों से मिलने कर अपनी व अपनी सरकार की छवि सुधारने का काम कर रहे हैं,  तो कभी कुछ  और ।
परन्तु मनमोहन सिंह का यह टोटका भी कहीं काम नहीं आने वाला। क्योंकि मनमोहन सिंह ने देश की हालत इतनी शर्मनाक कर दी है कि इसका कोई प्रायश्चित नहीं है। वैसे भी जिन स्वनामधन्य सम्पादकों से वे मिल रहे हैं या मिलेंगे, वे ही ंनहीं देश के तमाम तथाकथित मीडिया धरानों के अधिकांश पत्रकार भी आज देश की आम जनता से पूरी तरह से कटे हुए हैं। आज ंका सम्पादक व पत्रकार अब मीडिया के लिए समर्पित पत्रकार नहीं अपितु एक सेल्समेन से ज्यादा नहीं रह गया है। वेसे भी आज के अधिकांश पत्रकार देश की उस 50 प्रतिशत से अधिक जनसंख्या का प्रतिनिधित्व करने वाली गरीबी के रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाली जनता के सुख दुखों से ही नहीं उनकी दुनिया से पूरी तरह से अनजान हैं जिनके जीवन पर मनमोहनसिंह सरकार ने मंहगाई व भ्रष्टाचार से पूरी तरह ग्रहण लगा दिया है।
देश के दूरस्थ क्षेत्रों की बात तो रहने दें देश की राजधानी दिल्ली में ही आज इस लोकशाही के तथाकथित चोथे स्तम्भ को इतना भान नहीं है कि दिल्ली की आम जनता किस कदर से परिवहन के लिए संचालित डीटीसी की बसों से पीड़ित है। यह तो बहुत जमीनी बात है मीडिया के अधिकांश वर्ग को लोकशाही पर लगाये सरकार की वंदिशों का ही भान नहीं होगा। इन मीडिया के तथाकथित पंचतारा संस्कृति के सम्पादकों व पत्रकारों के भरोसे प्रधानमंत्री सोचते हैं कि वे अपनी व अपनी छवि उस आम जनता के नजरों में सुधार देंगे तो यह उनकी हिमालयी भूल है। उनकी देश सेवा के लिए एक ही विकल्प रह गया कि वे देश व कांग्रेस के हित में यह सर्वोच्च काम कर सकत हैं कि वे अपने पद से इस्तीफा दे कर देश की सच्ची सेवा करें।
लगता है प्रधानमंत्री मनमोहन अब इतने सत्तालोलुप हो गये हैं कि उनको अपनी सरकार से देश की ंहो रही ंभयंकर दुर्दशा भी नहीं दिखाई देगी। आज जिस प्रकारं से कांग्रेस सरकार में आस्कर फर्नाडिस जैसे जनता के लिए समर्पित नेताओं की उपेक्षा मंत्रीमण्डल में हो रही है उसी से कांग्रेसी सरकार आम जनता से दूर हो गयी है। वह कांग्रेस नेतृत्व की सोच को ही कटघरे में रख रही है। राहुल गांधी को प्रधानमंत्री बनाने व मनमोहन की विदाई में कांग्रेस जितनी भी देर करेगी, देश व कांग्रेस के लिए एक एक पल बहुत ही खतरनाक साबित हो रहे है।

1 comment:

  1. nahin ham bhaarat men viraasat ke shakt khilaaf hain. aaj jo desh ki haalat bigad rahee hai vah gaandhee parivaar ki den hai. manmohansinh bechaara beech men fansaa padaa shaasan ki bagdor to sonia ke haath men hai. kyaa kangres men raahul ko takkar dene vaala koeenahin hai, ek ek se diggaj hain lekin sonia jo beech men khadee hai. hamto raahul ke khilaaf hain, jo bihaar aur uttar pradesh ke log aajeevika kamaane mumbai jaate hain unhe begger bataata hai.

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