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Tuesday, November 15, 2011

-शांति पुरूष नहीं आतंक पुरूष है गिलानी

-शांति पुरूष नहीं आतंक पुरूष है गिलानी/-अमेरिका के इशारे पर भारत में आतंक फेलाने से हुए क्या गिलानी शांति पुरूष/
-मनमोहन व गिलानी दोनों हैं अमेरिका के प्यारे/

में भी हेरान हूॅ देश के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के बयान पर, जो उन्होंने कुछ दिन पहले पाक के प्रधानमंत्री गिलानी को मिलने के बाद उनको शांति पुरूष के रूप में दिया था। देश भक्तों की तरह मेरा भी सर इस बयान पर चकरा गया। थोड़ी देर में मेने सर खुजलाया, तो मेरी समझ में सारा मजारा आ गया। मनमोहन व गिलानी अगर किसी एक देश के प्यारे हैं वह देश है विश्व का स्वयं भू थानेदार अमेरिका। जिस प्रकार मनमोहन सिंह अमेरिका के लिए प्यारे हैं उसी प्रकार पाक के प्रधानमंत्री गिलानी भी अमेरिका के प्यारे है। मनमोहन सिंह ने अमेरिका के साथ जिस प्रकार परमाणु समझोता व अन्य हितों की रक्षा कर अपनी मित्रता निभाई उसी प्रकार गिलानी ने भी अलकायदा प्रमुख ओसमा बिन लादेन के सफाये सहित अमेरिका के दुश्मनों के तबाही में अपनी पूरी ताकत झोंक कर निभाई। भले हम जिसे आतंक कह रहे हों परन्तु अमेरिका के लिए वह अमेरिका के हितों का विकास है। वह भारत में अपना विकास पाक के सहारे फेलाता हैं । देश की संसद, कारगिल, मुम्बई से लेकर कहां नहीं अमेरिका ने अपने इस विकास के मंत्र को पाक के सहारे नहीं फेलाया। इसी दिव्य ज्ञान को अपनी अर्थशास्त्री दृष्टि से समझ कर मनमोहन सिंह ने बहुत ही बेवाब ढंग से गिलानी को शांति का दूत घोषित किया। शांति वही जो अमेरिका को भाये। अमेरिका को भय है कि भारत, चीन सहित कई देश उसके विकास व उसकी शांति में खतरा उत्पन्न कर सकते है। इसी लिए वह पूरे विश्व में अपने विकास व शांति के लिए अपने प्यादे पाक के हुक्मरानों के सहयोग से उन सभी देशों को तबाह करते है। पाक के हुक्मरानों द्वारा फेलाये गये अमेरिका के लिए खतरा बन सकने वाले देशों में तबाही का आतंक फेलाना अमेरिका की दृष्टि में शांति है। फेस बुक में एक पुलेकेशन ढौंडियाल भी टिण्णणी करके इस गुढ़ रहस्य को नहीं समझ पाये वे कहते हैं कि . जिस शैतान ने हमारी आर्थिक राजधानी मुम्बई पर जेहादी भेज कर देश की अर्थव्यवस्था को तहस नहस करने का षड्यंत्र किया और १६६ निर्दोष भारतियों को मौत के घाट उतार दिया । उसे हमारे प्रधान मंत्री जी ने ‘शान्ति पुरुष’ की उपाधि दे डाली ।
अब तो बस अजमल कसाब को ग्लानी जी का ‘शांति दूत ‘ घोषित करना बाकी है. और हाँ एक दूत के साथ एक परम आदरणीय अतिथि के व्यवहार की तो सभी सीमाएं हम पार कर ही चुके ।  ५५ करोड़ रूपए से भी अधिक , उसकी तीमारदारी पर खर्च कर ! अब तो बस यह ‘ शान्ति दूत ‘ वापिस पाक को बा- इजत सौंपना ही बाकी है या फिर किसी कंधार हाईजैक का इंतजार है !। विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय महामंत्री डा. प्रवीण तोगड़िया ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को पाकिस्तान जाकर चुनाव लड़ने की सलाह दी है।
आज मनमोहन सिंह के बयान से भाजपा ही नहीं अपितु कांग्रेसी भी दिल से स्वीकार नहीं कर पा रहे है। पर मनमोहन सिंह को देश, देशवासी व नैतिकता से क्या लेना देना, उन्हे केवल अमेरिका से ही लेना देना है।

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