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Tuesday, November 22, 2011

.दिल्ली में भी नहीं है आपदा से बचाव की आपात व्यवस्था दुरस्थ /

‎.दिल्ली में भी नहीं है आपदा से बचाव की आपात व्यवस्था दुरस्थ /
.नन्द नगरी टेन्ट प्रकरण ही नहीं कांग्रेस मुख्यालय के समक्ष कार दहन प्रकरण से जाहिर हुआ आपदा प्रबंधन बेनकाब/

दिल्ली देश की राजधानी है। यहां पर राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री व गठबंधन सरकार की प्रमुख सहित देश के तमाम मंत्रियों, सांसदों, सेना नायकों, प्रमुख नौकरशाहों का आवास व कार्यालय है। इसी महत्व के कारण दिल्ली आतंकियों के निशाने पर रही। यहां पर कई आतंकी कार्यवाही को आतंकियों ने बम धमाके व गोलियों से दिल्ली के दिल को छलनी करके लहू लुहान करने का नापाक कृत्य किया। अमेरिका में एक ही बार आतंकी हमला हुआ परन्तु उसके बाद अमेरिकी प्रशासन ने इतनी मजबूत आपदा व सुरक्षा व्यवस्था का गठन किया कि लाख कोशिश करने के बाबजूद आतंकी दुबारा कई वर्ष बीत जाने के बाबजूद अमेरिका में एक मच्छर तक नहीं मार सके। परन्तु भारत में संसद, लाल किला ही नहीं सरोजनी नगर, करोल बाग, कनाट प्लेस व वटाला हाउस पर हमला करके आतंकियों ने भारतीय व्यवस्था के तमाम आपदा प्रबंधों व सुरक्षा दावों को बेनकाब ही कर दिया। सरकार हर आतंकी हमले के बाद सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के दावे करते रहे परन्तु आतंकियों ने एक के बाद एक हमला करके इनके दावों की पूरी कलई ही खोल दी। हाल में हाईकोर्ट के प्रवेश द्वार पर हुए हमले से शासन प्रशासन के दावों की हवाई ही उड गयीं।
यह बात तो आतंकी हमले की रही। उनको रोकने में सरकार अब तक असफल रही। परन्तु देश में हजारों करोड़ का हर साल आपदा प्रबंधन के नाम पर केन्द्र से लेकर राज्यों में अरबों रूपये पानी की तरह हर साल बहाये जाते हैं। परन्तु हकीकत यह है कि अभी आतंकियों के हमले के बाद तत्काल आपदा प्रबंधन के तहत अग्नि बुझाने वाला दस्ते, चिकित्सालय एम्बुलेंस, बिजली व पानी व सुरक्षा व्यवस्था सुचारू रखने का एक युद्वस्तरीय तंत्र पूरी तरह दम तोड़ चुका हे। इसका नजारा खुद 21 नवम्बर को कांग्रेस मुख्यालय 24 अकबर रोड़ व सोनिया गांधी के घर के समीप 10 जनपत के आगे हुई दुर्घटना को तत्काल सूचना मिलने के बाबजूद 20 मिनट बाद दमकल गाडी पंहुचती है तो देश के दूरस्थ क्षेत्रों के क्या हाल होंगे। इस घटना से सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है कि यह व्यवस्था कहां तक मृतप्राय हो चूकी हे। कांग्रेस मुख्यालय व सोनिया गांधी के आवास के समीप एक जलती हुई कार को समय पर तत्काल सूचना के बाबजूद 20 मिनट देर से आना यही प्रदर्शित करता है कि आपद काल में हो सकने वाली व्यवस्था से निपटने के लिए देश में क्या क्या व्यवस्था है।
भले ही 20 नवम्बर को दिल्ली के नन्द नगरी में किन्नर सम्मेलन के पण्डाल में लगी आग से हुई दुर्घटना से अपना पल्ला बचाने के लिए बहाना बनाया गया कि ‘ आयोजकों ने दमकल विभाग से एनओसी नहीं ली थी । परन्तु इसके अगले ही दिन 21 नवम्बर को दोपहर को (देश व संसद, सेना मुख्यालय, व देश के उपराष्ट्रपति के निवास के समीपवर्ती क्षेत्र) 24 अकबर रोड़ यानी कांग्रेस मुख्यालय, सोनिया गांधी के निवास 10 जनपत के प्रवेश द्वार व उच्च सैनिक अधिकारी के घर के सामने वाली अकबर रोड़ पर एक कार में सुरक्षा, यातायत पुलिस व कई लोगों की उपस्थिति में एक चलती कार में से धुंआ आने लगा। उसके चालक ने यकायक गाड़ी को रोक कर उसको देखने की कोशिश की परन्तु तब तक हल्की आग, गाड़ी में लगने लगी। ड्राइवर ने एक छोटे से पानी की बोतल से आग बुझाने का असफल प्रयास भी किया। यातायात पुलिस की महिला सिपाई ने तत्काल इस दुर्घटना की सूचना दमकल विभाग को दी । परन्तु दमकल विभाग की गाड़ी इस उच्च संवेदनशील व अतिविशिष्ट क्षेत्र में ही पूरे 20 मिनट बाद तब पंहुची जब गाड़ी आसमान को छू रही लपटों से आधी गाड़ी को श्वाहा कर गयी थी। असहाय पुलिस कर्मी व दर्जनों खबरिया चैनल के केमरे असहाय हो कर इस दुर्घटना को देखते रहे। इस घटना को देख कर देहरादून कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष चैधरी महेन्द्रसिंह ने आश्चर्य प्रकट किया कि ऐसे उच्च संवेदनशील क्षेत्र में हुई इस दुर्घटना पर दमकल विभाग का यह हाल है तो और जगह क्या स्थिति होगी। यानी देश की राजधानी के अतिविशिष्ठ क्षेत्रों में भी किसी प्रकार से आपात स्थिति को निपटने के लिए अभी देश में कोई ऐसा चुस्त दुरस्त तंत्र तक नहीं है। तो देश के दूरस्थ क्षेत्रों में इस प्रकार की आपदा से निपटने के लिए देश का आपदा प्रबंधन के नाम पर करोड़ों रूपये डकारने वाला तंत्र की स्थिति कितनी लच्चर होगी इसका इस घटना से सहज ही अनुमान लगाया जा सकता हे।
देश की राजधानी दिल्ली में अखिल भारतीय किन्नर समाज सर्वधर्म महासम्मेलन में पण्डाल में लगी आग से हुई भयंकर दुघर्टना से दर्जनों किन्नर जलने व भगदड़ में कुचलने के कारण मारे गये और चार दर्जन से अधिक बुरी तरह से घायल हो गये। 20 नवम्बर की सांय 6.30 बजे नन्द नगरी के सामुदायिक भवन से उससे सटे खाली पार्क तक 1500 गज में लगे इस विशाल पण्डाल में बिजली की तार में शार्ट सर्किट हेने से अचानक आग लग जाने से यह दिल दहलाने वाला हादशा हुआ। उस समय इस पण्डाल में देश भर से आये 3000 किन्नरों सहित इस सम्मेलन का आनन्द ले रहे लोगों सहित करीब 5 हजार लोग उपस्थित थे। अचानक लगी इस आग से भगदड़ मच गयी। आग की चपेट में आये दो सिलेण्डर भी फट गये। सभी लोग गेट से बाहर निकलने के लिए भागे परन्तु एक ही 8 फुटी गेट होने के कारण लोग एक दूसरे को धकेलते कुचलते निकलते रहे, जो नीचे गिर गया उसको उठ भी नहीं पाया, हजारों लोग उसके उपर से गुजर गये। देर रात दर्जनों आग बुझाने वाली दमकलों के सहयोग से 11 बजे रात आग बुझायी जा सकी। इस दुर्घटना के घायलों को अस्पतालों में भर्ती किया गया। इस दुर्घटना पर दमकल विभाग अनापत्रित प्रमाण पत्र न लेने की बात कह कर अपना पल्ला झाड रहा है वहीं किन्नर समाज की अध्यक्षा सोनिया ने प्रशासन पर असहयोग का आरोप लगाते हुए कहा कि प्रशासन ने उनके आवेदनों पर कभी ध्यान तक नहीं देने का आरोप भी लगाया।
इस प्रकार की व्यवस्था को देखने के बाद हम चाहे दुनिया में कहीं भी विकास के नाम पर कितना भी हांके परन्तु देश की व्यवस्था अभी पूरी तरह से पटरी से उतर चूकी है। उसको सटीक व चूक रहित बनाने के लिए व्यवस्था का ढांचा ही नहीं व्यवस्था में आमूल सुधार की सक्त जरूरत है। शेष श्रीकृष्ण कृपा। हरि ओम तत्सत्। श्रीकृष्णाय् नमों।

1 comment:

  1. बेहद ही बढिया समझाते हुए लिखा है। हमेशा लगे रहो ऐसे बेहतरीन जानकारी देने में।

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