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Wednesday, November 2, 2011

गरीब सुदामा फिर बना करोड़पति


        गरीब सुदामा फिर बना करोड़पति
नई दिल्ली(प्याउ)। लक्ष्मीपति के दरवार में एक बार फिर एक गरीब सुदामा करोड़पति बन गया। भले ही सतयुग का सुदामा भगवान श्रीकृष्ण द्वारा अपने चमत्कार से करोड़पति बना होे परन्तु कलयुग का सुदामा ‘सुशील’ अपनी किस्मत के साथ अपनी  प्रतिभा के ंदम पर करोड़पति बन गया। हां कलयुग का यह सुदामा भगवान श्रीकृष्ण के नहीं अपितु इस सदी के महानायक अमिताभ बच्चन के हाथों करोड़पति बना। परन्तु  अपहरण व फिरोती  के लिए कुख्यात रहे बिहार  म ें यहां क े आम लोगों को ही नहीं अपितु खुद  गरीब सुदामा से करोड़पति बने  सुशील क ो अब  अपने या अपनों में से किसी के अपहरण की आशंका हो रहीं है। मासिक 6000 रूपये का वेतन  लेने वाले  कम्प्यूटर ओपरेटर कम शिक्षक  सुशील को जहां इस पुरस्कार  से अनहोनी खुसियां  िमल रही ह ैं वहीं उनको कभी सपने में भी न सोच सकने वाली परेशानी  का  सामना भी करना पड रहा है।  गुमनामी  के अंधेरों में गरीबी का दंश झेलने के लिए मजबूर इस सुदामा को कौन बनेगा करोडपति कार्यक्रम ने आज 5 क रोड़  का इनाम दे कर  बिहार सहित पूरे देश के आंखों का तारा बना दिया है।
इसी को कहते हैं भगवान जब देता है तो छप्पर फाड़ कर देता है, जिसे देख  कर पूरी दुनियां की आंखें फटी की फटी रह जाती है। ऐसा ही एक किस्सा बिहार के गरीब परिवार का  बोझ ढो रहे नवयुवक सुशील कुमार के साथ हुआ। वह इसी पखवाड़े छोटे पर्दे पर बडे पर्दे के महानायक अमिताभ बच्चन द्वारा संचालित कौन बनेगा करोड़पति कार्यक्रम में 5 करोड़ का सर्वोच्च पुरस्कार जीत कर अर्जित किया। पेशे से शिक्षक सुशील के परिवार पर दीपावली के अवसर पर माॅ लक्ष्मी की अपार कृपा पर पूरे देश के लोग उसके भाग्य को रह रह  कर  सराहाना कर रहे हैं।
  इस कार्यक्रम बिहार के मोतिहारी जिले के हनुमानगढ़ी टोला निवासी सुशील कुमार के 5 करोड़ जीतने की खबर पर गरीबी के दंश को झेलते हुए अपने पांच बेटों व पत्नी के साथ छोटे से घर में गुजर-बसर कर रहे सुशील के पिता अमरनाथ प्रसाद को ही यकीन नहीं हुआ कि उनका बेटा यकायक करोड़पति बन गया है। सुशील की मां रंजू देवी खुशी में लक्ष्मी मां की अपार कृपा बताती है। सुशील की माॅं की आंखों में खुशी के झलकते आंसुओं में यह आशा छिपी हुई है कि अब वह  अपने बेटे को मिले इस पुरस्कार से अपने तीन कमरों वाले गिरवी घर को छुड़ाकर अपने पांचों बेटों के लिए घर बनाने के सपने को साकार कर पायेगी। सुशील के भाग्य के इस चमत्कार के साथ साथ विगत  दस साल से उसका निरंतर इस कार्यक्रम को अपने घर में टीबी न होने के बाबजूद  पडोसी के घर मे टीबी देखने का जनून भी सहायक  रहा। कुशाग्र बुद्वि के सुशील के परिवार में हैं कि उसके माता पिता, पांच भाई, जिनमें सुशील व उसका एक अन्य भाई विवाहित है,  चार बेटियां और एक छोटा बेटा है।  बरसातों में एक कमरे में पानी आने व घर की दयनीय आर्थिक हालत के बाबजूद सुशील ने मनोविज्ञान में स्नातकोत्तर की शिक्षा ग्रहण की  छह माह पहले ही सुशील की शादी  (12 मई 2011 को ) सीमा के साथ हुआ। आज पूरे देश में कलयुग के सुदामा की चमत्कारी किस्मत के किस्सा लोगों के जुबान पर है। कलयुग  के इस सुदामा सुशील की इस सफलता पर पूरा बिहार ही नहीं पूरा देश खुद को गौरवान्वित महसूस कर रहा है।  शहर व गांव के चरित्र में एक भारी अंतर साफ नजर आ रहा है  कि अगर यह सुदामा शहर का होता तो वह अपनी इस चकाचैंध करने वाली करोड़पति बनने की आंधी में अपने भाई, बहन, माता पिता क्या अपनी पत्नी को भी चंद दिनों बाद किनारा करके कहीं किसी स्वप्नसुंदरी के मोहपाश में बंध कर अपने परिजनों को अपने हाल पर छोड़ देता। परन्तु गांव का यह सुदामा सुशील अपने पुरे परिवार, माता पिता, भाईयों व उनके बच्चों के भविष्य को उज्जवल बनाने के लिए अपने आप को समर्पित कर देगा।

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