Pages

Wednesday, December 7, 2011

तीन पीड़ियों का एक अधूरा सपना


तीन पीड़ियों का  एक अधूरा सपना
सपना बाप का भी वही
सपना हो दादा का भी वही
एक छोटा सा घर हो अपना
सपना पोता का भी है वही ।
एक पक्का घर बनाने की
आश में मिट जाती है
गरीबों की कई पीडियां
पर न ही वह घर ही बनता
नहीं रहते है वे आदमी ।
पर लुटेरों के महलों को
रोशन करने के लिए
तबाह की जाती है
गरीबों की बस्तियां
पर इन गरीबों का
एक पक्का घर बनाने का
पीडियों का सपना अधूरा।।
सरकार कोई भी बने यहां
बनती सदा गरीबों के मतो से
पर वह गरीबों को मिटा कर
रोशन करती है अमीरों की दुनिया।।
देवसिंह रावत (7दिसम्बर बुद्ववार 2011 रात के 12.27)

1 comment:

  1. Hello Sir,

    Please advise about the above showed house

    where we can buy that please pass me addresses if any body knows

    my mail ID soory.786@gmail.com

    ReplyDelete