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Monday, December 26, 2011

राजधानी गैरसैंण बनाने के संकल्प के साथ ‘म्यर उत्तराखण्ड’ ने मनाया 5वां भव्य वार्षिकोत्सव

राजधानी गैरसैंण  बनाने के संकल्प के साथ ‘म्यर उत्तराखण्ड’ ने मनाया  5वां भव्य वार्षिकोत्सव/
म्यर उत्तराखण्ड संस्था से प्रेरणा लें  तथाकथित सामाजिक संस्थायें
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प्यारा उत्तराखण्ड की विशेष रिपोर्ट-

रविवार, दिनाक 25 दिसम्वर 2011 को ‘म्यर उत्तराखंड ग्रुप सोसाएटी ने श्री सत्यसाईं इंटरनेशनल सेंटर में अपना पांचवा वार्षिकोत्सव बहुत ही भव्य ढ़ग से मनाया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि सांसद प्रदीप टम्टा सहित संस्था सहित तमाम वक्ताओं ने एक स्वर में प्रदेश की स्थाई राजधानी गैरसैंण बनाने का संकल्प ले कर मनाया! कार्यक्रम में उत्तराखंडी लोक संस्कृति पर आधारित रंगारंग प्रस्तुति दी गई,। इस समारोह का सबसे सराहनीय बात यह रही कि इसमें गायिका कुसुम पाण्डे को छोड़ कर अधिकांश तमाम कार्यक्रम गीत व नृत्य संस्था के सदस्यों द्वारा ही प्रस्तुत किये गये, इसको उपस्थित जनसमुदाय ने मुक्त कंठ से सराहना की।  गौरतलब है कि यह संस्था प्रतिवर्ष अपने वार्षिकोत्सव पर किसी क्षेत्र में किये गए उल्लेखनीय योगदान के दो विशिष्ठ व्यक्तियों को सम्मानित करती है! और उत्तराखंड की सांस्कृतिक अभिव्यक्ति पर केन्द्रित स्मारिका का लोकार्पण करती है! संस्था ने इस वर्ष अपनी पांचवे वार्षिकोत्सव के अवसर पर गढ़वाली साहित्य के लिए ललितमोहन केसवान जी और कुमाउनी साहित्य के लिए पूरण चन्द्र कांडपाल जी को सम्मानित किया और प्रसस्ति पत्र एवं शाल भेंट किये! और वार्षिक स्मारिका ’बुरांश’-२०११ का लोकार्पण किया!
संस्था के पांचवे वार्षिकोंत्सव समारोह में मुख्य अतिथि अल्मोड़ा, पिथौरागढ़ के वर्तमान सांसद श्री प्रदीप टम्टा थे, और विशिष्ठ अथितियों में प्रवासी समन्वय समिति के अधक्ष श्री पूरण चंद नैनवाल,देव सिंह रावत जी (संपादक- प्यारा उत्तराखंड एवं उत्तराखंड राज्य आन्दोलनकारी),  प्रो. गोपाल सिंह नयाल जी (प्रोफेसर कुमाऊं विश्वविद्यालय), उत्तराखंड यूथ कांग्रेस की महासचिव सुश्री रीतू कनियाल, उक्रांद नेता भुवन पाठक ,जय महाभारत पार्टी के स्वामी अनंत विश्वदेवा ,अखिल भारतीय उत्तराखंड महासभा (सामाजिक संस्था),  धाद (सामाजिक संस्था), उत्तराखंड क्लब (सामाजिक संस्था)  एस के नेगी , जगदीश नेगी जी (उत्तराखंड पब्लिक स्कूल नॉएडा) को सम्मानित किया गया।  एवं अन्य गणमान्य व्यक्ति थे! कार्यकर्म में रंगारंग प्रस्तुति संस्था के ही युवा सदस्यों द्वारा दी गई! समारोह में उपस्थित गणमान्य लोगों में  सहारा समय के ख्याति प्राप्त पत्रकार  मंजीत सिंह नेगी, उत्तराखण्ड जनता संघर्ष मोर्चा के महासचिव जगदीश भट्ट, श्रीमती हेमा उनियाल (समाज सेविका व लेखिका) पत्रकार इन्द्रचंद रजवार, अनिल पंत, वेद भदोला व सतेन्द्र रावत, सहित अनैक गणमान्य लोग उपस्थित थे। कार्यक्रम को सफल बनाने व उपस्थित अथितियों का भव्य स्वागत करने में संस्था के अध्यक्ष मोहन बिष्ट, महासचिव सुदर्शन रावत, धीरेन्द्र अधिकारी (उपाध्यक्ष), मनिज नेगी (सचिव), नीरज पंवार (सांस्कृतिक सचिव) , सुमित बनेशी, त्रिलोक रावत ,नीरज पंवार, मंजू नेगी, शिवानी सिंह, दीपा किरमोलिया, राजन पांडे, भुवन चन्द्र जोशी, रेनू नेगी, हरीश रावत, विनोद शाही, सुमित बिष्ट सहित तमाम पदाधिकारी उपस्थित थे। समारोह में  शेखर शर्मा ‘पाठक‘ ने दयाल पाण्डे द्वारा रचित व नोयडा क्षेत्र की बालिकाओं के मनोहारी नृत्य पर  ‘वंदे मातरम ’ उत्तराखण्डी बोली में गीत गाया तो पूरा सभागार इस गीत से गूंज गया। संस्था के अध्यक्ष मोहन सिंह बिष्ट के नेतृत्व में संस्था के कलाकारों की कालजयी उत्तराखण्डी नाटक ‘रामी बोरामी ’ की जीवंत प्रस्तुति दे कर सभागार में उपस्थित दर्शकों को भावविभोर कर दिया। समारोह का संचालन संस्था के वरिष्ठ सदस्य भूपाल सिंह बिष्ट ने किया।
इस संस्था का सबसे महत्वपूर्ण कार्य यह है कि यह संस्था अन्य उत्तराखण्डी सामाजिक संस्थाओं की तरह मात्र गीत संगीत का कार्यक्रम या नेताओं के गले में माला डालने तक ही सीमित नहीं है अपितु यह संस्था प्रदेश के हक हकूकों की रक्षा के लिए व जनता में व्यापक जनजागृति के लिए व्यापक जन जागृत अभियान व आपदा शिविर का भी आयोजन करती है। अपनी स्थापना के चंद पांच सालों के दौरान जहां इस संस्था ने गत वर्ष प्रदेश में आयी प्राकृतिक आपदा में आगे बढ़ कर पीड़ित परिवारों का हाथ बंटाया, वहीं इस संस्था ने प्रदेश की स्थाई राजधानी गैरसैंण बनाने के लिए गैरसेंण में एक रैली का भी आयोजन किया। वहीं इस संस्था ने उत्तराखण्ड के अग्रणी आंदोलनकारी संगठनों के आवाहान पर 2 अक्टूबर को राष्ट्रीय धरना स्थल जंतर मंतर पर मुजफरनगर काण्ड के दोषियों को सजा दिलाने के लिए काला दिवस मनाने में प्रमुखता से भाग लिया था। इसके अलावा संस्था दिल्ली सहित उत्तराखण्ड में प्रतिभाशाली बच्चों को सम्मानित करके जहां प्रोत्साहित करती है वहीं वह उत्तराखण्ड समाज के महापुरूषों की पावन स्मृति को नमन् करते हुए उन पर विशेष चित्र पोस्टर का भी प्रकाशन करती है। उत्तराखण्ड की तमाम सामाजिक संगठनों को दिल्ली जैसे महानगर में देश विदेश की नामी कम्पनियों व सरकारी सेवा में काम करने वाले उत्तराखण्ड के इन युवाओं की इस संस्था से प्रेरणा लेना चाहिए। इस सस्था से प्रेरणा ले कर अभी दिल्ली सहित देश विदेश में उत्तराखण्डी समाज की कई इंटरनेटी संस्थायें बन चूकी है परन्तु जो मुकाम इस संस्था ने अपने गठन के मात्र 5 साल में हासिल किया, वह मुकाम हासिल करना और संस्थाओं के लिए आज भी दूर की कोड़ी साबित हो रही है। देखने में यह आता है कि  अधिकांश सामाजिक संस्थाओं के कर्णधार या तो खुद दिशाहिन हैं या इनका केवल नेताआंें को फूल मालायें पहनाने तक की समाजसेवक हैं, प्रायः खुद को उत्तराखण्ड समाज की सबसे बड़ी संस्था बताने वाले इन संस्थाओं के कर्णधार कहीं कभी उत्तराखण्ड हितों के लिए संघर्ष करते हुए नहीं देखा गया है। ये अपनी संस्थाओं में या तो कुण्डली मारे हुए रहते हैं या इन संस्थाओं में काबिज हो कर मात्र इस संस्था को अपनी जेबी संस्था बना कर इसके सामाजिक सरोकारों का गला ही घोंट देते है। देखने में यह भी आता है कि ये संस्थायें समाज के हितों के लिए काम करने वाले समाजसेवियों के बजाय समाज का गला घोंटने वालों व धन्ना सेठों को मंचासीन करने में उनका स्वागत करने में ही जुटे रहते है।
इन सबसे हट कर ‘म्यर उत्तराखण्ड’ संस्था  को मात्र पांच साल में मिली अद्वितीय सफलता के पीछे जहां संस्था के अध्यक्ष मोहन सिंह बिष्ट व महासचिव सुदर्शन सिंह रावत तथा उनके तमाम जुझारू सदस्यों का हाथ है जिनके दिलों में अपनीे उत्तराखण्ड जन्म भूमि के लिए अथाह प्रेम व समर्पण है तथा उसकी बदहाली के कारण उनके दिल में गहरा दर्द भी है। इसी दर्द को दूर करने के लिए ये कामकाजी व अच्छी कम्पनियों में कार्यरत प्रतिभाशाली युवा अपनी जन्मभूमि उत्तराखण्ड को सही दिशा देने के लिए म्यर उत्तराखण्ड ’ के बेनर तले एकजूट है।

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