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Thursday, December 22, 2011

संसद, सरकार, अण्णा व जंतर-मंतर पर लोकपाल के नजारे

संसद, सरकार, अण्णा  व जंतर-मंतर पर लोकपाल के नजारे
आखिरकार काफी जिद्दोजहद के बाद 22 दिसम्बर को आज कांग्रेस गठबंधन वाली सप्रंग सरकार ने देश में व्याप्त भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने वाले बहुचर्चित लोकपाल विधेयक को संसद में पेश कर ही दिया। जहां सप्रंग प्रमुख सोनिया गांधी, प्रधानमंत्री सहित कांग्रेस के सभी नेता इसका समर्थन कर रहे हैं वहीं इस विधेयक को पेश करने के लिए देशव्यापी जनांदोलन छेड कर देश की सरकार व जनता को झकझोरने वाले अण्णा हजारे ने इसका पुरजोर विरोध करते हुए इसे भ्रष्टाचार को ओर बढ़ाने वाला विधेयक बताया। वहीं संसद की चैखट यानी राष्ट्रीय धरना स्थल जंतर मंतर पर कभी अण्णा के आंदोलन के हिस्सा रहे इंडिया अगेनस्ट करपशन के असंतुष्ट कार्यकत्र्ताओं  ने न केवल जनलोकपाल को लोकशाही के लिए खतरनाक बताया अपितु अण्णा हजारे के चार प्रमुख सिपाहे सलार अरविन्द केजरीवाल, किरण वेदी, प्रशांत भूषण व सिसोदिया के प्रति अंध मोह के कारण अण्णा की अलोकशाही प्रवृति को भी उजागर किया। जंतर मंतर के आंदोलनकारी क्षेत्र में लोग उस समय अचम्भित रह गये जब एक बडा मंच अण्णा के जनलोकपाल व अपने चार सिपाहेसिलारों का अंध मोह पर कई प्रश्न खडे करने वाले तस्वीर युक्त बडे बडे पर्दा नुमा बेनर टंके मिले। लोग बड़ी उत्सुकता से इसको पड़ने लगे। इन्हे देख कर मैं भी उस मंच पर गया। वहां पर दो आंदोलनकारियों को मैं अण्णा के 11 दिसम्बर वाले आंदोलन के दिन मिला था। इनमें एक का नाम श्रीओम व सुश्री शुक्ला भी सक्रिय थी। इन दोनों को मैने डेढ़ दो महिने पहले इंडिया अगेनस्ट करपशन वाले संगठन में चंदे के मामले में हो रही तथाकथित अनिमियता के विरोध में जंतर मंतर पर मंच लगा कर आंदोलन करते हुए देखा था।
आज में जब वहां पर पंहुचा तो वहां पर इंडिया अगेनस्ट करप्शन का एक वोलेन्टर विपिन नैयर मिला। जिसने मुझे 21 दिसम्बर वाला एक प्रेस विज्ञप्ति भी सोंपी। लामेडस्टोन.डाट काम वाले विपिन का राजस्थान के कोटा के उमेदपुरा गांव का निवासी है। दिल्ली के अशोक विहार में निवास करता हे। उनका अपना व्यवसाय है। उनके अनुसार वे अण्णा के भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन में 19 अगस्त 2011 से जुडा । उसने अण्णा के आंदोलन में जहां कम से कम 50 हजार का पानी भी वितरित किया। 21 हजार का दान रसीद सहित दिया। यही नहीं इसके अलावा भी हजारों का दान दिया। उनके अनुसार उन्होंने जब अण्णा के 11 दिसम्बर वाले आंदोलन के संदर्भ में दिल्ली के प्रेस क्लब में 10 दिसम्बर को आयोजित अण्णा की प्रेसवार्ता में केवल एक प्रश्न पूछने की कोशिश की तो उनको अण्णा के लोगों ने पीटा। इन हिंसक लोगों से दिल्ली पुलिस ने उसको किसी तरह से बचाया।  उन्होंने कहा कि अण्णा व उनके समर्थकों में जरा सी भी लोकशाही के प्रति सम्मान नहीं हे। वे बहुत व्यथित थे। वे अब अण्णा से ही नहीं अण्णा के जनलोकपाल को देश के लिए खतरा मान रहे हैं। जंतर मंतर में ही एक अन्य आंदोलनकारी अलग से मंच लगा कर अण्णा के लोकपाल या संसद में प्रस्तुत लोकपाल के खिलाफ अनशन कर रहे है।
वहीं संसद में लालू मुलायम व शरद का विरोध रहा लोकपाल बिल के खिलाफ। भाजपा का भी विरोध रहा। उधर अपने गांव में अण्णा हजारे व उनकी टीम ने सरकार
द्वारा संसद में पेश किये गये लोकपाल बिल का भारी विरोध किया। टीम अण्णा का विरोध है कि सरकार लोकपाल बिल में सीबीआई को सम्मलित नहीं किया। वहीं इसमें सरकार द्वारा पूरी तरह से नियंत्रित है। वहीं सरकार इसे मजबूत लोकपाल बता रही है। इस लोकपाल की नियुक्ति के लिए प्रधानमंत्री, नेता प्रतिपक्ष, भारत के मुख्य न्यायाधीश व लोकसभाध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण उच्च लोक रहेंगे। परन्तु टीम अण्णा इससे सहमत नहीं है। इसके विरोध में अण्णा मुम्बई में तीन दिवसीय अनसन व दिल्ली में सोनिया राहुल के द्वार पर धरना देने का ऐलान कर चूके है। कुल मिला कर अब सरकार व अण्णा हजारे की टीम आर पार का निर्णायक संघर्ष करने के लिए कमर कस चूके है। जनता में लोकपाल को लेकर जो उत्सुकता थी वह धीरे धीरे कम हो रही है। देखना है लोकपाल का हस्र भी महिला आरक्षण की तरह ही होता है या यह अपना मुकाम हासिल कर पाता है। परन्तु इस प्रकरण में भी अण्णा के प्रति आम जनता का वह समर्थन नहीं दिखाई दे रहा है जो रामलीला मैदान या जंतर मंतर पर अनशन के दौरान दिखा। इस दोरान टीम अण्णा पर भी जो आरोपों के छिंटे पडे उससे सुलझाने में अण्णा लोगों की अपेक्षा के अनरूप खरे नहीं उतर पाये। इसी लिए धीरे धीरे लोगों का समर्थन कम होता जा रहा है।

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