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Sunday, December 25, 2011

राहुल गांधी की मेहनत पर ग्रहण लगा रहे हैं कांग्रेसी के क्षत्रप

राहुल गांधी की मेहनत पर ग्रहण लगा रहे हैं कांग्रेसी के क्षत्रप
राहुल की रेली में दो सांसदों की उपेक्षा से हैरान कांग्रेसी

 देहरादून (प्याउ)। एक तरफ राहुल सोनिया गांधी आगामी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को सत्तासीन कराने के लिए दिन रात मेहनत कर रहे हैं वहीं उनकी मेहनत पर कांग्रेसी मठाधीश पानी फेरने का काम कर रहे है। ऐसा ही उत्तराखण्ड में चुनाव 30 जनवरी को होने वाले हैं परन्तु कांग्रेसी मठाधीश प्रदेश में कांग्रेस की राजनैतिक विरोधी भाजपा पर प्रहार करने के बजाय अपने ही दल के अपने विरोधी क्षत्रपों को पटकनी देने में व्यस्त है।
भले ही कांग्रेसी उत्तराखण्ड में राहुल गांधी के दौरे को ऐतिहासिक व आगामी विधानसभा चुनाव में विजय का डंका बजाने वाला बता रहे हो परन्तु हकीकत यह हे प्रदेश कांग्रेस के मठाधीशों ने इस रेली में कांग्रेस का परचम फेहराने से अधिक अपनी नाक ऊंची रखने के ,खातिर राहुल सोनिया की मेहनत पर पानी फेरने का काम किया। यह सब राहुल गांधी की उपस्थिति में व प्रदेश प्रभारी चोधरी वीरेन्द्र की उपस्थिति में हुआ। राहुल गांधी को इसकी भनक तक नहीं लगी। जब लगने लगी तो किसी तरह उस पर पर्दा डालने की असफल प्रयास किया गया। इस रेली में राहुल गांधी का जोशीला व भाजपा के कुशासन पर करारा प्रहार करने वाला भाषण हुआ। इससे प्रदेश कांग्रेस के आम कार्यकत्र्ताओं में जहां जोश भर गया वहीं कांग्रेस के मठाधीश नेता जो प्रदेश में कांग्रेस को लाने के लिए मेहनत करने के बजाय खुद को मुख्यमंत्री बनाने के लिए अपने ही कांग्रेस के क्षत्रपों की जडों में मठा डालने का काम कर रहे है। हुआ यो कि राहुल गांधी की 23 जनवरी की देहरादून रैली में मंच में कांग्रेस कें दो साफ छवि के संघर्षशील व साफ छवि के सांसदों को जगह न दिये जाने से न केवल कांग्रेसी हैरान थे अपितु उपेक्षित सांसद प्रदीप टम्टा व के सी बाबा भी अपने आप को असहज महसूस कर रहे थे। मंच में अपने सांसदों को न देख कर अल्मोड़ा व नैनीताल के सांसद को मंच पर जगह न देख कर कार्यकत्र्ताओं में गहरी नाराजगी छा गयी। इसकी भनक कहीं राहुल गांधी को न लगे इसके लिए बाद में दोनों सांसदों से राहुल गांधी को गुलदस्ते दिलाये गये।
यही नहीं कांग्रेसी रणनीतिकारों ने प्रदेश में आजादी के बाद से पहली बार सप्रंग सरकार द्वारा दिये गये रेल परियोजना की उपलब्धी का बखान राहुल गांधी व सतपाल महाराज द्वारा एक दूसरे से न कराये जाने से साफ हो गया कि कांग्रेस को अपनी उपलब्धियों को जनता के समक्ष रखना व उसको भूनाना तक नहीं आता। वहीं भाजपा द्वारा बनाये गये कमजोर लोकायुक्त बिल पर करारा प्रहार करने से राहुल व कांग्रेसी दिग्गज चूक गये।

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