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Friday, December 23, 2011

बिना गैरसैण राजधानी बनाए पहाड़ी क्षेत्रों के विकास की कल्पना नहीं की जा सकती-मनोहरकांत ध्यानी

बिना गैरसैण राजधानी बनाए पहाड़ी क्षेत्रों के विकास की कल्पना नहीं की जा सकती-मनोहरकांत ध्यानी/
उत्तराखण्ड राज्य गठन के लिए आहुति देने वाले पर्वतीय क्षेत्र की उपेक्षा से भी व्यथित श्री ध्यानी अब सक्रिय राजनीति से संन्यास लेंगे

गोपेश्वर (प्याउ)। ‘उत्तराखण्ड की राजधानी गैरसेंण बनाये बिना पहाड़ी क्षेत्र के विकास की कल्पना ही नहीं की जा सकती’ वरिष्ठ भाजपा नेता व प्रदेश के योजना आयोग के सदस्य मनोहर कांन्त ध्यानी ने अपनी राजनैतिक जीवन की संघ्या में आखिरकार इस सच को प्रकट कर दिया जिस सच को जानते हुए भी सत्तासीन भाजपा के मुख्यमंत्री भुवनचंद खण्डूडी व पूर्व मुख्यमंत्री निशंक सहित वर्तमान भाजपा व कांग्रेस के अधिकांश नेता कहने की हिम्मत तक नहीं जुटा पा रहे है।
24 दिसम्बर को एक राष्ट्रीय समाचार पत्र ‘राष्ट्रीय सहारा ’में प्रकाशित विशेष वार्ता में  इस सच को जुबान पर आखिरकार लाने का साहस करके अब तक की भाजपा व कांग्रेस की तमाम सरकारों को अप्रत्यक्ष रूप से कटघरे में  खडा कर दिया है। 23 दिसम्बर शुक्रवार को गोपेश्वर में चुनाव अभियान में पार्टी के प्रचार के तहत आये भााजपा नेता मनोहर कांत ध्यानी के साथ बदरीनाथ के विधायक केदार सिंह फोनिया, भाजपा के जिला महामंत्री गजेंद्र रावत, भाजपा के अनेक नेता भी मौजूद थे।इस खबर के अनुसार श्री ध्यानी विधानसभा चुनाव के बाद सक्रिय राजनीति से सन्यास लेने की घोषणा भी कर गये । लगता है इस घोषणा के तह में भी  पूर्व सांसद श्री ध्यानी का अपने दल में हो रही वरिष्ठ नेताओं की उपेक्षा व पृथक राज्य गठन के 11 साल बाद भी पहाड़ी क्षेत्रों के हितों व विकास की अनदेखी का दर्द ही रह रह कर उनका भी व्यथित कर रहा हैै। हालांकि उन्होंने  इसके लिए किसी दल या सरकारों का नाम न लिया हो परन्तु उनके शब्दों से साफ झलकता है कि वे अब तक की सभी सरकारों द्वारा पर्वतीय क्षेत्र की उपेक्षाओं व प्रदेश की स्थाई राजधानी गैरसेंण न बनाये जाने से आहत है। इस भेंटवार्ता में श्री ध्यानी ने दो टूक शब्दों में कहा कि ‘ बिना गैरसैण राजधानी बनाए पहाड़ी क्षेत्रों के विकास की कल्पना नहीं की जा सकती। यदि इसमें भी कोई परेशानी है तो फिर ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैण बना कर पर्वतीय जनमानस की भावनाओं पर खरा उतरा जा सकता है।‘पहाड़ी क्षेत्रों के हितों की कदापि अनदेखी नहीं की जानी चाहिए। जिन संघर्षाे के बल पर लोगों ने इस राज्य के निर्माण में अपनी आहुति दी थी अब उन उद्देश्यों को साकार करने की दिशा में कदम बढ़ाए जाने चाहिए। जिस तरह तेजी से पहाड़ी क्षेत्रों से पलायन बढ़ रहा है उसको देखते हुए उद्योगों के विस्तार के साथ ही पहाड़ी क्षेत्रों में सड़क, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को प्रमुखता से स्थान दिया जाना चाहिए।  राज्य योजना आयोग के उपाध्यक्ष मनोहर कांत ध्यानी ने की घोषणा की कि विधानसभा चुनाव निपटने के बाद वे सक्रिय राजनीति से पूरी तरह संन्यास ले लेंगे। मौजूदा राजनीतिक हालातों पर विस्तार से चर्चा करते हुए उनका कहना था कि अब फिलहाल उनका सक्रिय राजनीति में बने रहने का कोई इरादा ही नहीं। चुनाव निपटने के बाद वे सक्रिय राजनीति को अलविदा कह कर हिमालयी सरोकारों से जुड़े सवालों को लेकर गंभीर प्रयासों में जुटेंगे। उन्होंने कहा कि अब जबकि वे 70 वर्ष पार कर चुके है तो अब राजनीति से भी उनका मन भर गया है। वे भी इस बात से व्यथित थे कि मौजूदा विधानसभा चुनाव में इस बार दलीय मुकाबले के बजाय व्यक्ति से व्यक्ति के बीच ही टक्कर होगी। उन्होंने कहा कि देश में इस समय वातावरण भ्रष्टाचार के विरुद्ध बना हुआ है। 

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