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Sunday, December 18, 2011

गीता पर प्रतिबंध लगाना सामुहिक आत्महत्या के समान है

गीता पर प्रतिबंध लगाना सामुहिक आत्महत्या के समान है
महान श्रीकृष्ण भक्त प्रभुपाद ने जड़ चेतन में भगवान श्रीकृष्ण को मानते हुए पूरे विश्व के कल्याणार्थ गीता की दिव्य ज्ञान की गंगा से उद्वार कराने का भागीरथ प्रयत्न किया। उनके इस श्रेयकर प्रयास से पूरे विश्व के लाखों लोगों ने अपना जीवन को धन्य किया। परन्तु गीता रूपि दिव्य ज्ञान के प्रकाश से अज्ञानी लोगों को अपनी धर्म के नाम से चलने वाली भ्रमित करने वाली दुकाने बंद होने का भय सताने लगा। इसी भय से भयभीत हो कर रूस में गीता को अलगाववाद का प्रतीक मानते हुए उस को बंद करने के लिए कुतर्क दे कर ऐन केन प्रकार से गीता व इस्कान पर प्रतिबंध लगाने का षडयंत्र रच रहे है। इसी का एक छोटा सा नमुना है रूस की कोर्ट में इस मामले में एक वाद। गीता पर प्रतिबंध की मांग करके रूस के धर्म के ठेकेदारों ने अपने समाज की एक प्रकार से सामुहिक आत्महत्या करने के लिए धकेलने का निकृष्ठ काम कर रहे है। ये सब केवल रूस में हो रहा षडयंत्र नहीं अपितु पूरे विश्व में ईसायत व आतंकवादियों का इस दिशा में सामुहिक शर्मनाक प्रयास है। गीता जडतावादी नहीं चेतनवादी प्रवृति की प्रवाहिका है। इससे रूस का ही सबसे अधिक अहित होगा क्योंकि रूसी दिव्य ज्ञान से वंचित होंगे।

1 comment:

  1. I take the opportunity on the behalf of not only the all people of Bharata [India] but all the people of all around the world who believe in the basic norms of humanity ..........and would like to lodge a strong concern over the issue on the holy scripture "Shrimadbhagwadgeeta" ..........it very sad to listen such a controvery over this scripture which is beyond the geo-boundries and any limits but created only for the betterment of the human race in common............... I assure you all Russian brothers and sisters that .....boycotting such scripture will not going to be fruitful for you all as it declares the anti-human mentality/suicidal.. which is definitely not in Russians........thanks God bless you all plz.

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