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Friday, December 9, 2011

-लूटेरे पंचतारा अस्पतालों के फल फूलने व सरकारी अस्पतालों का दम तोड़ने के लिए जिम्मेदार है निकम्मी सरकारें


-लूटेरे  पंचतारा अस्पतालों के  फल फूलने व सरकारी अस्पतालों का दम तोड़ने के लिए जिम्मेदार है निकम्मी सरकारें /
-कोलकाता के निजी पंचतारा अस्पताल में अग्निकाण्ड प्रकरण से चिकित्सा माफियाओं पर उठे गंभीर सवाल/
-ग्रामीण चिकित्सकों वाली व्यवस्था शीघ्र प्रारम्भ करें स्वास्थ्य मंत्री गुलाम नबी आजाद/

पश्चिम बंगाल प्रदेश की राजधानी कोलकाता के दक्षिण क्षेत्र के एक निजी अस्पताल आमरी (एएमआरआई) के नए भवन के भूतल में 9 दिसम्बर शुक्रवार तड़के 2.10 बजे लगी भीषण आग लगने से दम घुटकर मरीज व अस्पताल कर्मचारी समेत 90 लोगों की मौत हो गई और कई गंभीर रूप से जख्मी हो जाने से देश में तेजी से खुले इन पंचतारा अस्पतालों की पूरी कार्यप्रणाली पर ही प्रश्नचिन्ह लग गया। आज सबसे बड़ा सवाल यह है कि देश में हजारों की संख्या के फेले अस्पताल के नाम पर लूट खसोट के लक्षागृहों का फलने फूलने का तथा सरकारी अस्पतालों का दम तोड़ने का क्या कारण है ?देश के चिकित्सा मंत्री गुलाम नबी आजाद जो क्रांतिकारी ग्रामीण चिकित्सक व्यवस्था देश में लागू करा कर ग्रामीणों के स्वास्थ्य की रक्षा करना चाहते थे । उसको तत्काल शुरू करना चाहिए। देश के चिकित्सा माफिया इसे अपने अस्तित्व के लिए खतरा मान कर विरोध कर रहे है। अब देश के हित में देश की सरकारें कब जागेगी।
 जिस प्रकार से शासन प्रशासन की मिली भगत से गरीबों का भी सस्ता इलाज करने का वायदा करने के नाम पर इन पंचतारा अस्पतालों को कोडियों के भाव से सरकारी जमीन दी जाती है । परन्तु अस्पताल बनते ही इनमें से अधिकांश के दरवाजे जहां गरीबों के लिए बंद कर दिये जाते हैं वहीं ये अधिकांश अस्पताल इनमें चिकित्सा की आश से आने वालों को इलाज के नाम पर जम कर लूटते है। यही नहीं इन अस्पतालों के कारण शासन प्रशासन देश में चल रहे सरकारी अस्पतालों की निरंतर उपेक्षा करते है। इस कारण देश के अधिकांश चिकित्सालय खुद ही बीमार हो गये है। केवल गरीब, असहाय लोगों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने के अड्डो में तब्दील हो गये है। यहां पर भ्रष्टाचार व अराजकता के अड्डे बन कर रह गये हे। चिकित्सक जैसे गरीमामय पेशे के इस अंधा बाजारीकरण करने की सरकारों की अदूरदर्शीता व निकम्मेपन के कारण आज देश के अधिकांश जनता स्वास्थ्य भगवान के भरोसे ही रह गया है। वहीं शासन प्रशासन की मिली भगत से इन पंचतारा अस्पतालों का आत्मघाती जाल पूरे देश में फेल गया हें। देखने में यहां तक आ रहा है कि यहां पर भर्ती हुए मरीजो से बेवजह मंहगे मंहगे अनावश्यक टेस्ट करायी व मंहगी दवाईयां मंगाई जाती हे। यही नहीं इन अस्पतालों के कमरे का किराया ही हजारों रूपये प्रति दिन के रूप में लूटा जाता हे। कई बार तो इनकी लूट बाजारी इतनी अमानवीय हो जाती है कि ये मृतक मरीज का शव तब तक नहीं देने की धृष्ठता करने लगे जब तक लाखों रूपये का इनका चिकित्सा बिल न चूकता किया जाय।
हालांकि प्रशासन ने अपनी जिम्मेदारी पर पर्दा डालने के लिए  मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के निर्देश पर आमरी अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ मामला दायर किया गया और कोलकाता नगर निगम की ओर से लाइसेंस रद्द कर दिया गया। मुख्यमंत्री के आदेश के बाद आमरी अस्पताल प्रबंधन के सात पदाधिकारियों सह उद्योगपतियों श्रवण टोडी, रवि टोडी, राधेश्याम गोयनका, मनीष गोयनका और दयानंद अग्रवाल व दो अन्य को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। उनके खिलाफ गैर जमानती धारा 304 तथा धारा 308 के तहत पुलिस ने मामला दर्ज किया है। इस दर्दनाक हादसे पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने शोक के साथ-साथ नाराजगी भी जताई। उन्होंने मारे गए लोगों के परिजनों को दोदो लाख रुपए देने की घोषणा भी की। राज्य सरकार ने भी बतौर मुआवजा तीन-तीन लाख रुपए देने की घोषणा की।
कोलकोता के इस पंचतारा अस्पताल में हुए इस हादसे में कांग्रेस के दो स्थानीय नेताओं, जिसमें पूर्व विधायक शिशिर सेन शामिल हैं, की मौत हो गई। इसके अलावा मरने वालों में एक बांग्लादेशी नागरिक व त्रिपुरा के 6 मरीज थे जिसमें एक मंत्री का रिश्तेदार भी है। हादसे के वक्त अस्पताल में 160 मरीज थे। बेसमेंट में पार्किग की जगह बनाया गया स्टोर बना हादसे की वजह एसी से फैला धुआं। तीसरी मंजिल, चैथी और पांचवीं मंजिल के मरीजों की मौत दम घुटने से हुई। आग पर काबू पाने के लिए 25 दमकल गाड़ियां मौके पर पहुंचीं। सीढ़ियों की सहायता से ऊपर चढ़े बचावकर्मियों  के पास गैस मास्क न होने के कारण व समय पर अस्पताल प्रशासन ने रात के 2.35 बजे ही शिकायत करने के बाबजूद कुछ कदम नहीं उठाया। रात 3.35 बजे यानी एक घण्टे बाद दमकल विभाग को इसकी शिकायत की गयी। दमकल विभाग की तत्परता को तार तार करते हुए शिकायत के एक घण्टे बाद यानी 4.30 बजे 25 दमकल गाडियां यहां पर पंहुची परन्तु उनके पास सीढ़ियां व गैस मास्क न होने के कारण बचाव कार्य प्रारम्भ नहीं किया गया। आग लगने के 4 घण्टे बाद ही दमकल कर्मियों ने खिड़कियों के शीशे तोड़ कर कमरों में भरा घुंए को बाहर निकलने दिया। यानी 8 बजे शवों को निकाला जा सका।
इस घटना से साफ है कि अगर इस होटल के कर्मचारी जागरूक रहते तो रात के 2.10 मिनट पर एएमआरआई, ठाकुरिया के बेसमेंट में आग लगने के बाद यहां रखे गैस सिलिंडरों व अन्य ज्वलंनशील पदार्थो में लगी आग से निकली गैस के कारण 2.35 बजे चिकित्साधीन रोगियों परिजनों द्वारा गार्डो और रिसेप्शन पर जाकर दम घुटने की शिकायत करने के बाबजूद अस्पताल ने इसको नजरांदाज कर दिया। यही गैरजिम्मेदाराना कार्य इस विभत्स त्रासदी का मूल कारण हुआ। अगर समय पर अस्पताल प्रशासन जागता तो यह त्रासदी से बचा जा सकता था।
इस हादसे से एक बात स्पष्ट हो गयी कि यहां देश में पूरी व्यवस्था देश को आरजकता की गर्त में धकेलने का एक सूत्री काम अपने संकीर्ण स्वार्थो में लिप्त रहने के कारण आज देश का आम अवाम से चिकित्सा व्यवस्था से माहताज हो गयी है। स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर दिन रात कुकुरमुतो की तरह फेल गये इन पंचतारा लक्षागृह रूपि निजी अस्पतालों के लुट से लोग त्रस्त है तथा सरकारी अस्पतालों की हालत शासन प्रशासन की उपेक्षा के कारण खुद ही मरीज बन गये हैं। हालत यह हो गयी कि अधिकांश सरकारी अस्पताल जहां देश के दूरस्थ व पिछड़े क्षेत्रों में दम तोड़ चूके हैं, वहीं ही नहीं देश की राजधानी व प्रदेश की राजधानियों में केवल असहाय व गरीब लोग ही दाखिल होना चाहते हैं। जो चंद सरकारी अस्पताल ठीक काम कर रहे हैं वहां पर आम आदमी एम्स की तरह दाखिला होने व इलाज कराने के लिए महिनों धक्के खाने पड़ने के कारण वहां जाने का साहस ही नहीं जुटा पाते है। वहां पर भी केवल पंहुच वाले लोग ही इलाज करा पाते हे। उत्तराखण्ड जेसे मेरे सीमान्त प्रदेश के सीमान्त जनपदों में अधिकांश चिकित्सालय दम तोड़ चूके है। चिकित्सकों के लिए ही तरस रहे हे। 1980 -85 तक इन दूरस्थ क्षेत्रों के चिकित्सालयों में चिकित्सक नजर आते थे, लोग इलाज कराते थे, आज के दिन ये सब अस्पताल चिकित्सकों व दवाई इत्यादि से वंचित हो कर खुद ही मरीज बन गये है। ग्रामीण क्षेत्रों की बदहाली को दूर करने के लिए न तो समझ सरकार में है न हीं शासन प्रशासन के पास। क्योंकि इन सबको न तो इन क्षेत्रों की वर्तमान हालत का भान है व नहीं इसको जानने की इच्छा शक्ति। हाॅं गुलाम नबी आजाद जो ग्रामीण चिकित्सा में क्रांतिकारी परिवर्तन कर रहे थे, वे इन मठाधीशों ने अपनी दुकानदारी व जत्थेदारी खत्म होने के भय से बंद करा दी है। देश के चिकित्सा मंत्री गुलाम नबी आजाद जो क्रांतिकारी ग्रामीण चिकित्सक व्यवस्था देश में लागू करा कर ग्रामीणों के स्वास्थ्य की रक्षा करना चाहते थे । उसको तत्काल शुरू करना चाहिए। देश के चिकित्सा माफिया इसे अपने अस्तित्व के लिए खतरा मान कर विरोध कर रहे है। अब देश के हित में देश की सरकारें कब जागेगी। आज देश में चिकित्सा सेवाये भी शिक्षा सेवाओं की तरह आम आदमी से कोसों दूर हो गयी हे। देश की जनता को इन पंचतारा लक्षागृहों की मकड़ जाल से कोन बचायेगा। शेष श्रीकृष्ण कृपा। हरि ओम तत्सत्। श्रीकृष्णाय् नमो।

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