तेरी ये खामोशी से देश तबाह हो रहा हे
रहम कर अरे खुदगर्ज अब तो शर्म कर

कायले घोटाले प्रकरण में ‘ मेरी खामोशी ’नामक तुकबंदी का सहारा लेने वाले प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह द्वारा इस घोटाले में उनकी सरकार पाक साफ बताये जाने की परतें खुद ही बेनकाब
 हो रही है कभी उनके कबीना मंत्री सुबोधकांत की चिट्ठी से तो अब 57 कोयला ब्लाकों में से 8 कोल ब्लाक नागपुर के किसी मनोज जायसवाल की कम्पनियां को आवंटन के नाम पर ए हालांकि इस खुलासे के बाद वर्तमान कोयला मंत्री उनको अपना दूर का रिश्तेदार बता रहे है।
आज देश का आम देशभक्त जानता है कि मनमोहन सिंह के कुशासन में देश के हितों पर कितना कुठाराघात हो चूका है। क्यों मनमोहन सिंह देश की आम जनता की आशाओं पर बज्रपात व अमेरिका की आंखों के तारे बने है। दुर्भाग्य यह है कि जिस कांग्रेस आला नेतृत्व में देश की जनता ने इंदिरा व राजीव की सी छवि देख कर उनको देश की बागडोर संभालने का जनादेश दिया है, उन्होंने उस जनादेश को मनमोहन नाम अमेरिका के प्रिय प्यादे को सोंप दिया है। आज देश की जनता मनमोहन सिंह सरकार के कुशासन से मंहगाई, भ्रष्टाचार, आतंकवाद सहित सभी क्षेत्रों में हो रही भयंकर त्रासदी से त्राही-त्राही कर रही है परन्तु भारत का यह नीरो ‘मेरी खामोशियों की बेसुरा राग सुना कर देश के जख्मों को और कुरेदने की धृष्ठता कर रहे हैं। देशहित में मनमोहन सिंह इतनी ही कृपा करे, देश के प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दे कर तुरंत अमेरिका जा कर वहीं की सेवा करां।
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