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Wednesday, August 29, 2012


भाजपा ही नहीं संघ भी है जिम्मेदार भाजपा के शर्मनाक पतन का

अरूण प्रताप सिंह जैसे जमीनी नेताओं की उपेक्षा का दंश झेल रही है भाजपा 

उत्तर प्रदेश में रामजन्मभूमि आंदोलन के पहले व बाद में प्रदेश की राजनीति में परचम फेहराने वाली भाजपा की आज दुर
्गति कांग्रेस से बदतर हो गयी है। इसके लिए और कोई दूसरा नहीं अपितु भाजपा का शीर्ष नेतृत्व अटल-आडवाणी व उनकी कटोरी के रूप में भाजपा को जनता की नजर में बेगाना बनाने वाली मण्डली ही जिम्मेदार है। जिस जनता ने देश में कांग्रेस के कुशासन को उखाड़ फैंक कर भाजपा के रामराज्य रूपि सुशासन पर विश्वास करके देश व प्रदेश में जनादेश दिया, उस जनादेश का सम्मान करने के बजाय भाजपा के आला नेताओं ने जनांकांक्षाओं व जनविश्वास को इस कदर रौंदा कि जनता ने भाजपा को ऐसा सबक सिखाया कि भाजपा उप्र में अपने कल्याणसिंह के नेतृत्व वाले दिनों के लिए तरस रही है। हालांकि उत्तराखण्ड में भी भाजपा ऐसा ही कार्य करती रही वहां के जमीनी व वरिष्ट संघ समर्पित जनप्रिय नेता भगतसिंह कोश्यारी की उपेक्षा कर जबरन जनता की नजर में उतरे हुए नेताओं को बार बार थोप कर भाजपा की ऐसी दुर्गति कर रहे हैं कि लोगों को इनकी जातिवादी मानसिकता पर तरस आ रहा है और राष्ट्रवादी दंभ पर हंसी आती है।

भाजपा के जिन जमीनी नेताओं व समर्पित कार्यकत्र्ताओं ने दिन रात मेहनत करके भाजपा को जनता के दिलों में आसीन करा था, उन एक एक नेताओं व कार्यकत्र्ताओं को गोविन्दाचार्य, कल्याणसिंह, उमा भारती, मदन लाल खुराना आदि की तरह उपेक्षित व अपमानित किया। भाजपा में काबिज इस कटोरी गिरोह ने एक एक कर जमीनी व समर्पित साफ छवि के जननेताओं को उपेक्षित व अपमानित कर भाजपा से बाहर होने के लिए मजबूर किया। वहीं ऐसा ही काम भाजपा नेतृत्व के प्यादे देश के तमाम प्रदेशों में वहां के जमीनी नेताओं की उपेक्षा कर अपने हवाई प्यादों को आसीन करके भाजपा की जड़ों में मट्ठा डाल रहे थे। ऐसा ही एक आत्मघाती कृत्य भाजपा के नेताओं ने सुलतानपुर में भी किया। भाजपा नेतृत्व ने छांट छांट कर सुलतानपुर से दो बार विधायक रहे संघ के वरिष्ठ समर्पित जमीनी साफ छवि के नेताओं को अपमानित कर दागदार छवि के लोगों को यहां से पार्टी का प्रत्याशी बनाया। भले ही अरूण प्रताप सिंह संघ व भाजपा के नेता रहे परन्तु जनता में हर वर्ग व हर धर्म के लोगों के वे प्रिय थे। दो बार बिधायक होने के बाबजूद वे सरकारी बसों में सफर करके लखनऊ व अपने क्षेत्र में भ्रमण करते थे। सुलतानपुर के समाजसेवी मोहम्मद आजाद के अनुसार प्रातः काल अपने खेतों में खुद काम करके आम जनता के सुख दुख में सदा समर्पित रहने वाले अरूण प्रताप सिंह के सदव्यवहार के कारण संघ के समर्पित कार्यकत्र्ता होने के बाबजूद वे आम जनता की तरह ही इस क्षेत्र में रहने वाले मुसलिमों के भी चेहते रहे। परन्तु भाजपा के नेतृत्व ने जनता को अपनी शक्ति मान कर सुरक्षा बल भी न लेने वाले जनप्रिय विधायक को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी देने के बजाय उनकी विधायक की टिकट से वंचित करके ऐसे लोगों को यहां पर टिकट दिया गया जिनको जनता ने हराया ही नहीं अपितु भाजपा को तीसरे व चोथे नम्बर पर धकेल कर सबक सिखाया। कई बार पार्टी को यहां पर मिली पराजय के बाबजूद भाजपा के मठाधीशों ने अपनी भूल को सुधारने की कोशिश तक नहीं की। वहीं जनता की पुरजोर मांग के बाबजूद भाजपा नेतृत्व ने अपने इस जमीनी नेता की कोई सुध नहीं ली। अरूण प्रताप सिंह की लोकप्रियता व भाजपा द्वारा उनकी उपेक्षा की जाने के कारण कांग्रेस के युवराज राहुल गांधी ने अरूण प्रताप सिंह को कांग्रेस में जोड़ने की असफल कोशिश की। परन्तु अरूण प्रताप सिंह कांग्रेस में नहीं सम्मलित हुए। भाजपा व कांग्रेसी नेताओं आत्मघाती प्रवृति का लाभ उठाते हुए समाजवादी पार्टी के प्रमुख मुलायमसिंह ने सुलतान के लोगों के दिलों में राजकरने वाले जमीनी नेता अरूण प्रताप सिंह को सम्मानित करने खुद उनके घर गये और उनको अपने दल में सम्मलित होने का न्योता दिया। यही कारण है कि आज तमाम कमियों के बाबजूद मुलायम सिंह प्रदेश में भाजपा, कांग्रेस व बसपा को धकेल कर अपने ही दम पर सत्तासीन हो गये है। सपा प्रमुख के इस कार्य से सुलतानपुर के लोगों में एक ही चर्चा है कि जहां भाजपा कांग्रेस के मठाधीश अपने जमीनी नेताओं की उपेक्षा करके अपमानित करते हैं वहीं मुलायम सिंह जमीनी नेताओं व कार्यकत्र्ता को खुद गले लगा कर उनको सम्मानित करते है। सुत्रों के अनुसार उप्र में कांग्रेस व भाजपा के पतन का कारण और कोई नहीं कांग्रेस व भाजपा के खुद मठाधीश रहे जो जातिवाद में इतने अंधे हैं कि उनको जमीनी कार्यकत्र्ता व अपने समर्थक जनता ही दिखाई नहीं देती। भाजपा का उप्र में पतन में राजनाथ सिंह व केशरीनाथ त्रिपाठी का सहयोग रहा वहीं कांग्रेस के पतन में खुद सोनिया गांधी के दरवारियों का रहा जो रीता बहुगुणा व निर्मल खत्री जैसे हवाई लोगों को प्रदेश की कमान सौंप कर पार्टी की आशाओं पर खुद बज्रपात करते नजर आते। हालत यह है कि जातिवाद व व्यक्तिवाद के अंध मोह में भाजपा ही नहीं संघ को भी अपने समर्पित कार्यकत्र्ताओं की हो रही दुर्गति पर उफ करने या उनकी सुध लेने की होश तक नहीं है। संघ इतना कमजोर व निश्तेज हो गया कि भाजपा के आला नेतृत्व के समर्पित नेताओं को अपमानित करके हाशिये में डालते समय भी वह भीष्म पितामह की तरह बेवश नजर आता। इसी कारण आज भाजपा भी कांग्रेस की तरह चंद नेताओं की जागिर बन कर रह गयी है।
 

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