वो दिन तो आयेगा गिर्दा ...

चले थे साथ हम इसी राहों में साथ,
तुम चले गये तो तुम बरबस याद आये
जिन्दगी है एक सफर इस जहां में
किस मोड़ पर मिल कर कोन बिछुड़ जाये।
तुम भी कहते थे अपनी की धून में
एक दिन तो आलो दिन या दुनि माॅं
पर हमें क्या मालूम था कि कि वो दिन
दलालों, राजनीति के गिरगिटों के लिए 
चैदवीं का चांद बन कर आयेगा
हमारे संघर्षो व बलिदान से गठित 
राज का ताज सजे न द्रोहियों के सर
पर साथी आंसू न बहा सपनों को लुटते हुए
भगवान बदरीनाथ का आशीष रहते हुए
इन दलालों को भी राव मुलायम की तरह
उत्तराखण्ड द्रोह का दण्ड भुगतना पडेगा
तिवारी, खण्डूडी व निशंक ने तो भुगत लिया
बहुगुणा भी इनकी राह चलेगा तो जायेगा
उत्तराखण्ड की जनांकांक्षाओं को रौंदने का 
जो भी करेगा दुशाहस उसको महाकाल 
कभी सपने में भी माफ नहीं करेगा।
शहीदों व आंदोलनकारियों का संघर्ष
व्यर्थ कभी नहीं जायेगा मेरे साथियों 
तुम्हारा वो दिन तो आयेगा इस दुनि मैं
जिसके हम सबने सपने देखे थे कभी।।
देवसिंह रावत 
(उत्तराखण्ड राज्य गठन जनांदोलन के अपने वरिष्ठ आंदोलनकारी साथी व अग्रणी जनकवि, की पावन पुण्यतिथि पर उनकी स्मृति को शतः शतः नमन्।  उन्हीं की स्मृति पर समर्पित यह श्रद्धांजलि रूपि कविता 22 अगस्त 2012 प्रात 9 .14 )

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