अमेरिका के दवाब में भारत के स्वाभिमान को रौंदने के विरोध में लन्दन ओलंपिक का बहिष्कार करे भारत

लन्दन ओलंपिक खेलों में अमेरिका के दवाब में आकर दो दिन बाद जिस प्रकार ने जूरी ने जीते हुए भारतीय खिलाड़ी को हारा हुआ घोषित करके अमेरिकी हारे हुए खिलाड़ी ऐरल को विजयी घोषित किया, यह ओलंपिक जैसे विश्व के सबसे बड़ी खेल प्रतियोगिता में अमेरिका की जहां सीधे दादागिरी है वहीं भारतीय स्वाभिमान को रौंदने वाली शर्मनाक घटना है। क्या ओलंपिक जूरी या मेजवान ब्रिट्रेन में इतनी ताकत है कि ऐसा शर्मनाक फेसला अमेरिका या चीन के जीते हुए खिलाडियों के साथ करके दिखाये। ओलंपिक मुक्केबाजी के  प्री क्वाटर फाइनल मुकाबले में 69 किग्रा वर्ग में जीते हुए भारतीय मुक्केबाज विकास कृष्णन को जिस प्रकार अमेरिका के दवाब में 13-11 से जीते फेसले  को 11-15 से हारा घोषित किया गया। यह न केवल ओलंपिक समिति की खुले आम बेईमानी है अपितु यह ताकत क दम पर विश्व लोकशाही व मानवता को रोंदने के बाद खेलों में अपना दबदबा चीन द्वारा रोंदे जाने से बोखलाये हुए अमेरिका का निकृष्ठ हथकण्डा भी है। भारत सरकार को अगर देश स्वाभिमान व विश्व खेलों की प्रतिष्ठा बचाने के बारे में जरा सा भी विवेक है तो वह अविलम्ब् ही इस शर्मनाक कृत्य के विरोध में लन्दन ओलम्पिक खेल से अपने सभी खिलाडियों को वापस बुला कर अपना प्रचण्ड विरोध करना चाहिए

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