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Thursday, March 10, 2011

प्रभु से मांगना भी प्रभु का अपमान है


प्रभु से मांगना भी प्रभु का अपमान है
मांग कर कुछ भी प्रभु का अपमान न करो साथी
मांगना भी क्यों प्रभु से, वे तो कल्याणी सर्वज्ञ हैं
मांगना भी लगाता है उनके सर्वज्ञ पर प्रश्न चिन्ह
उनको मालुम है कि हम को कब क्या जरूरी है
उनको मालुम है कब मिलाना और कब करना विदाई
उनको मालुम है कब हंसाना और कब रूलाना जरूरी
वे ही है सर्वज्ञ, नियंता और विधाता समग्र सृष्टि के
मांगना भी एक अज्ञानता और धृष्ठता की है पहचान
उसकी कृपा पर जरा एक नजर तो मारो साथी
कितनी सुन्दर सृष्टि,देह बिन मांगे दी हमे उसने
हर पल हंसी दुनिया का नजारा हमको दिखाता
कभी हंसाता तो कभी प्यार से रूलाता भी हमको
छोड़ दो जीवन की पतवार उसी के हाथ में साथी
श्री कृष्ण ही एक खेवनहार है इस समग्र सृष्टि के
हरपल उसकी गीत गा कर जिन्दगी का आनन्द ले
(देवसिंह रावत 11 मार्च 2011)

1 comment:

  1. आज इस भागदोड़ भरी जिन्दगी में कुछ पल भगवान के लिये भी निकालना बहुत जरुरी है जिसे मन को शांति और सुकून मिल सके

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