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Sunday, March 6, 2011

सारे जहां से अच्छा फिर भी गा रहे हैं।

सारे जहां से अच्छा हिन्दुस्ताॅं हमारा
कभी चंगैजों ने लुटा, लुटा फिरंगियों ने
अब आजादी नाम पर काले अंग्रेजों ने
  लुटते रहे सदा हम, फिर भी गाते रहे तराना
 लुटेरों के आगे फिर भी हम गाते रहे तराना
जय हे, कह कर भी भारत की शान मिटाते
भारत को मिटा कर इंडिया बना रहे हम
फिरंगी जुबान को ताज पहना रहे हम,
भारत को मिटाने वालो को गले लगा रहे हैं
सारे जहां से अच्छा फिर भी गा रहे हैं।

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