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Sunday, March 20, 2011

मुस्कराओं प्रभु की कृपा के लिए


मुस्कराओं प्रभु की कृपा के लिए
ये रात दिन कब गुजर जाते हैं
बस यादें बाकी रह जाती है
समुन्दर की लहरों की तरह
जिनका कोई पता ठिकाना
नहीं होता बादलों की तरह
जिन्दगी भी इसी तरह
कब मिल जाय कब छूट जाय
हवा के झोंकों की तरह
बस मुस्कराते रहो हर पल
प्रभु की कृपा के लिए

शुभ रात्रि (20-03-2011 midnight)

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