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Wednesday, March 9, 2011

धुमाकोट जिला बनाने की मांग को लेकर 16 मार्च को देहरादून में विधानसभा का घेराव


धुमाकोट जिला बनाने की मांग को लेकर 
16 मार्च को देहरादून में विधानसभा का घेराव
नई दिल्ली/धुमाकोट (प्याउ)। उत्तराखण्ड राज्य गठन के दस साल बाद भी प्रदेश सरकार द्वारा राज्य गठन से पहले से लंबित पड़ी धुमाकोट जिला बनाओं की घोर उपेक्षा से आहत क्षेत्र की जनता ने अविलम्ब धुमाकोट जिला बनाने की मांग को लेकर आगामी 16 मार्च को ध्ुमाकोट क्षेत्र की जनता देहरादून स्थित विधनसभा को घेराव करने का ऐलान किया है। आगामी विधानसभा घेराव में धुमाकोट क्षेत्रा के उत्तराखण्ड में रहने वाले सैकड़ों लोगों के अलावा दिल्ली सहित देश के तमाम महानगरों में रहने वाले लोग भी भाग लेंगे। इसके साथ सभी जनप्रतिनिधियों से इस जनपद के निर्माण के लिए अपना समर्थन देने की गुहार भी लगायी है।  गौरतलब है कि धुमाकोट जिला बनाने की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन में उस समय एक नया मोड़ लिया जब इस आंदोलन का केन्द्रीय संरक्षक पद पर उत्तराखण्ड गौरव से सम्मानित व अग्रणी समाजसेवी महेश चन्द्रा को आसीन किया गया। इस रविवार 6 मार्च को दिल्ली के गढ़वाल भवन में आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक में इसका निर्णय लिया गया। बैठक में नैनीडाण्डा विकास क्षेत्र के अग्रणी समाजसेवी व केन्द्रीय पीएपफ आयुक्त वी एन शर्मा, दिल्ली प्रदेश कांग्रेस के सचिव हरिपाल रावत, कांग्रेसी नेता गोपाल सिंह रावत, धुमाकोट जिला बनाओं संघर्ष समिति के केन्द्रीय अध्यक्ष नरेन्द्र रौथान, महासचिव पृथ्वीपाल पर्णवाल, उद्यमी दीन दयाल, रतन दास,कामरूप शाह सुदामा जुयाल, सुभाष चंद, वीरेन्द्र बिष्ट, नैनीडाण्डा विकास संघ के अध्यक्ष हरिसिंह, महासचिव जगपाल सिंह रावत, शेखर रावत, नारायणसिंह, मनवर सिंह, जसपाल सिंह, केशर सिंह पटवाल, बुराड़ी क्षेत्र से उभरते हुए नौजवान नेता दीनदयाल सिंह रावत, जगपाल सिंह रावत, सल्ट क्षेत्रा से अग्रणी समाजसेवी हरीश आर्य, भारत सरकार के उप सचिव पद से सेवा निवृत समाजसेवी जगदीश चन्द्रा, उत्तराखण्ड राज्य आंदोलन के अग्रणी संगठन उत्तराखण्ड जनता संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष व प्यारा उत्तराखण्ड के सम्पादक देवसिंह रावत, अग्रणी चिंतक सत्येन्द्र प्रयासी, भूपाल सिंह, आनन्द सिंह, पृथ्वी ध्यानी, राजेन्द्र रौथाण, सुरेशानन्द, पत्रकार सुदर्शनसिंह रावत सहित बड़ी संख्या में धुमाकोट जनपद के प्रस्तावित क्षेत्र से जुड़े दिल्ली में रहने वाले उत्तराखण्डी उपस्थित थे। इस महत्वपूर्ण बैठक  में इस आंदोलन की जरूरत पर बल देते हुए सभी वक्ताओं ने इस बात की आवश्यकता पर बल दिया कि धुमाकोट क्षेत्र के लोगों को जहां पौड़ी जाने में कम से कम 12 घण्टे का समय लगता है। उनके लिए दिल्ली नजदीक व पौड़ी दूर होने के कारण आम आदमी की पंहुच से किसी सामान्य से काम के लिए तीन दिन तथा कम से कम 3 हजार रूपये को खर्च करना पड़ता है। इस अवसर पर जिला बनाओं संघर्ष समिति के अध्यक्ष नरेन्द्र रौथान ने बताया कि यह समिति ने प्रस्तावित धुमाकोट जिले में नैनीडाण्डा, वीरोंखाल, रिखणीखाल, पोखड़ा, थैलीसैण, सल्ट व स्याल्दे विकासखण्डों को सम्मलित करने करके विशाल जनपद पौड़ी से एक अलग जनपद बनाने के लिए उनकी समिति ने 28 मार्च 2010 को   जडाऊखान में इस आंदोलन का शंखनाद किया।
इस समिति की उपाध्यक्ष श्रीमती मधु बिष्ट तथा नैनीडाण्डा विकासखण्ड में इस समिति की कमान अग्रणी समाजसेवी गोपाल सिंह रावत को सौंपी गयी है। वहीं इस ब्लाक में महामंत्री के पद पर सुरेन्द्रसिंह बिष्ट कोच्चियार वालों को नियुक्त किया गया है। समिति द्वारा संरक्षक पद पर आसीन किये जाने पर समिति के सदस्यों को अपने पर विश्वास जताने पर समिति के सभी सदस्यों को धन्यवाद करते हुए भारत सरकार के विदेश व्यापार सेवा के उच्चाध्किारी रहे गुजडू पट्टी के पंजारा गांव के मूल निवासी महेशचन्द्रा ने प्रदेश सरकार सहित सभी जनप्रतिनिध्यिों से अविलम्ब प्रदेश के दूरस्थ व धुमाकोट जैसे पिछड़े क्षेत्रों के विकास के लिए अविलम्ब पृथक जनपद बना कर जनभावनाओं का सम्मान करने की खुली अपील की। उन्होंने कहा कि आज जनता को विकास की मुख्यधरा में सबसे जरूरत है। इस अवसर पर बड़ी संख्या में रहने वाले धुमाकोट क्षेत्र की जनता को जोड़ने के लिए दिल्ली प्रदेश धुमाकोट जिला बनाओं संघर्ष समिति की कमान नैनीडाण्डा विकास क्षेत्र के अग्रणी समाजसेवी पंचम सिंह को
सौंपी गयी।
इस अवसर पर अपने संबोध्न में राज्य गठन आंदोलनकारी देवसिंह रावत ने आंदोलनकारियों को मोर्चे का पूरा समर्थन देते हुए कहा कि इस धुमाकोट क्षेत्र में  जहां देश के  चिंतक महेश चन्द्रा, वरिष्ठ पीएपफ आयुक्त वी एन शर्मा, विश्व विख्यात वेज्ञानिक रामप्रसाद ध्यानी, प्रदेश के सबसे बड़े उद्यमी गजेन्द्र सिंह रावत, प्रदेश के पूर्व मंत्री व पूर्व सांसद ले. जनरल तेजपाल सिंह रावत, भाजपा नेता खुशहाल मणि घिल्डियाल, कांग्रेसी नेता ध्ीरेन्द्र प्रताप, हरिपाल रावत व शिक्षाविद रामप्रसाद भदूला जैसे प्रदेश की शान में चार चांद लगाने वाले अग्रणी लोगों के होते हुए भी इस क्षेत्र की शासन प्रशासन ने जो उपेक्षा की है वह निंदनीय है। इस सभा में सभी वक्ताओं ने ध्ुमाकोट क्षेत्रा के विधायक के रूप में प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री भुवनचंद खंडूडी ने जो क्षेत्र की उपेक्षा की उसकी सभी ने कड़ी भत्र्सना की।

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