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Friday, March 11, 2011

गेम नही यह कलंक है


कोमनवेल्थ
गेम नही
यह कलंक है
भारत की आजादी पर
भारत के स्वाभिमान पर
यह अपमान है
शहीदों की शहादत का
जिन्होंने भारत की
आजादी के लिए
अपना बलिदान दिया
परन्तु सत्तांधे ने
देश के स्वाभिमान को
रौंदते हुए
देश के माथे पर
गुलामी का बदनुमा कलंक
कोमनवेल्थ ही लगा दिया।
आज हम बेशर्मो की तरह
देश के संसाध्नों को
गुलामी के इस कलंक के
जश्न व खेल में
नकटों की तरह
लुटाने में ही अपनी
शान समझ रहे हैं।
अपने शहीदों व
देश के स्वाभिमान को
अपने ही हाथों से
रौंद कर पिफर उसी
पिफरंगी सम्राज्ञी का पट्टा
अपने गले में टोमी की तरह
कोमनवेल्थ के नाम पर
लटका कर इतरा रहे हैं।
अपने ही हाथों से
अपनी भाषा मिटा कर
अपना नाम भारत रौंद कर
उसी पिफरंगी भाषा अंग्रेजी
उसी पिफरंगी नाम इंडिया को
अपना कर अपने विकास के
संसाध्नों को गुलामी का
जश्न मनाने में तबाह कर रहे हैं।
- देवसिंह रावत

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