सर्वोच्च न्यायालय ने किया घोटाले पर निशंक सरकार को तलब


सर्वोच्च न्यायालय ने किया घोटाले पर निशंक सरकार को तलब
 उत्तराखण्ड प्रदेश में भाजपा सरकार के मुख्यमंत्री निशंक सरकार की सरपरस्ती में हुए  बहु चर्चित सर्टिजिया भूमि घोटाले प्र्रकरण में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा तलब किये जाने से प्रदेश भाजपा सरकार में हडकंप मच गया है। इस प्रकरण से  भाजपा की निशंक सरकार को बेनकाब करने वाले उत्तराखण्ड जनांदोलन के अग्रणी पुरोधा व सर्वोच्च न्यायालय के प्रख्यात अधिवक्ता अवतार सिंह रावत ने इस मामले पर नैनीताल उच्च न्यायालय द्वारा प्रदेश सरकार से ही कराये जाने पर इस मामले को सर्वोच्च न्यायालय में निष्पक्ष जांच के लिए गुहार लगायी। इस पर सर्वोच्च न्यायालय ने प्रकरण की गंभीरता को  देखते हुए प्रदेश सरकार से इस जांच को इस प्रकरण में संलिप्त प्रदेश के शासन प्रशासन के बजाय इसकी जांच उच्च न्यायालय की देखरेख में कराने के लिए प्रदेश सरकार को तलब किया हैं इससे न केवल प्रदेश सरकार अपितु भ्रष्टाचार पर कांग्रेस को धिक्कारने वाली भाजपा ही सांसे थम सी गयी है।  इस प्रकरण पर निशंक सरकार को खुद भाजपा के अध्यक्ष गडकरी ने भी सरकार का शर्मनाक बचाव किया था। गौरतलब है कि तमाम कानूनों को ताक पर रख कर हुए इस करोड़ों रूपये के प्रदेश के खजाने को चूना लगाने वाले इस घोटाले में प्रदेश के मुख्यमंत्री से लेकर प्रदेश की नौकरशाही भी कटघरे में है। इस मामले को उत्तराखण्ड राज्य गठन आंदोलन के अग्रणी संगठन, उत्तराखण्ड जनता संघर्ष मोर्चे के सचिव स्वामी दर्शन भारती ने नैनीताल उच्च न्यायालय में सरकार को कटघरे में खड़ा किया। कई महिनों तक अपनी सरकार को पाक साफ बताने वाले उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री निशंक व उनकी सरकार ने पूरे शासन प्रशासन को इसमें झोंक दिया। अंत में न्यायालय के निर्णय का प्रतिकुल आने की आशंका से सहमें सरकार ने बचने के उदेश्य से उच्च न्यायालय में यह कह कर जान बचाई कि इस मामले में नौकरशाही ने उनको गुमराह किया तथा इस मामले को महिनों तक पाक साफ बताने वाले मुख्यमंत्री निशंक व उनकी सरकार ने बहुत ही चालाकी से उच्च न्यायालय के फैसले को आने से पहले से इस सोदे को रद्द कर दोषी अधिकारियों के खिलाफ जांच का नाटक किया। जो किसी भी निष्पक्ष व्यक्ति के गले नहीं उतरा। क्योंकि इस मामले में प्रदेश सरकार के मुखिया से लेकर नौकरशाही उच्च स्तर पर स्वयं लिप्त रही। सबसे हैरानी की बात है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ दहाडने वाला देश व उत्तराखण्ड के अधिकांश मीडियो को भी इस मामले में सर्वोच्च न्यायालय तक जाने पर भी  अभी तक सांप सा सुंघा हुआ हैं। उनकी जुबान क्यों बंद हैं यह प्रदेश की जनता के लिए सबसे हैरानी की बात है। इस प्रकरण से भाजपा का सुचिता व सुशासन का दावा अपने आप में पूरी तरह तार तार हो गया है। भाजपा व संघ के नेता जो अब तक निशंक सरकार के इस प्रकरण पर उनको शर्मनाक संरक्षण दे रहे थे वे अब दुनिया के आगे इन सवालों पर जवाब देने से अपना मुंह छुपाने में लगे है। प्रदेश के लोग सवाल कर रहे हैं क्या यही भाजपा का राम राज है। कांग्रेस के भ्रष्टाचार पर जमीन आसमान करने वाले भाजपाई नेताओं की जुबाने अब उत्तराखण्ड में अपने पार्टी के शासन में हो रहे भ्रष्टाचारों पर शर्मनाक मूकता उनके नकाब को पूरी तरह से बेनकाब कर रहा है। भाजपा नेतृत्व भले ही निशंक को शर्मनाक संरक्षण दे परन्तु जनता किसी भी कीमत पर माफ नहीं करेगी। प्रदेश की जनता आगामी विधानसभा चुनाव में लोकसभा की तरह भाजपा नेतृत्व की इस शर्मनाक मूकता का सही जवाब देगी।

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