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Tuesday, October 9, 2012


लोकशाही के बेशर्म लूटेरे

क्या कहू इन बेशर्मो को जो कभी चारा तो कभी ताबूत डकारते है।
कभी बफोर्स घोटाला तो   कभी  बर्दी घोटाले से देश को लूटते हो। 
कभी कामनवेल्थ खेल के नाम पर तो कभी कोयला को डकारते हो
कभी सेज के नाम पर जमीने छीन कर  बिल्डिरों से मिल लूटते हो
कभी बारूद घोटाला, तो कभी 2जी घोटाला कर देश को लुटाते हो
इन लूटेरों ने तो माॅ भारती की जुबान भी लगाया है अंग्रेजी ताला ।
जब लूटने से दिल न भरा तो अपने फिरंगी आकाओं को बुला डाला।
इतने खुदगर्ज लूटेरे हैं इन्होंने तो विकलांगों का धन भी उडा डाला। 
कभी दुनिया को न्याय व ईमानदारी का पाठ पढ़ाने वाला भारत आज।
लूटशाही के लूटेरों का ऐशगाह बनकर कर नपुंसक आंसू बहा रहा है।
कोई धर्म तो कोई जाति के नाम पर देखो मेरे भारत को लूट रहा है 
कोई क्षेत्र तो कोई जनसेवा के नाम पर मेरे भारत को लूट रहा है। 
देवसिंह रावत
(मंगलवार 9 अक्टूबर 2012 रात के 11.57)

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