असत्य पर सत्य की जय हो


असत्य पर सत्य की जय हो
अधर्म पर धर्म की जय हो 
अन्याय न कहीं फले फूले
अधर्म भी सर उठा न सके
पाप जग को रूला न सके
ऐसा दीप ज्ञान का ही जले
मन में कभीं राग द्वेश न रहे 
सबके हित में जिन्दगी जीयें
आओ सभी के लिए हम जींये
असत्य पर सत्य की जय करें।
-देवसिंह रावत
(विजय दषमी के पावन पर्व पर 24 अक्टूबर 2012 रात के 9.30 बजे)

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