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Friday, October 26, 2012




-देशहित में मनमोहन को प्रधानमंत्री पद व गडकरी भाजपा अध्यक्ष पद से हटें

-कांग्रेस की तरह भ्रश्टाचार को आत्मसात कर आत्महत्या न करे भाजपा, 

-गडकरी हटा कर गोविन्दाचार्य को बनाये अध्यक्ष भाजपा 

आज भारत बहुत ही संकट के दौर से गुजर रहा है। यहां देष की एकता व अखण्डता के रक्षक होने साथ साथ  देष में लोकषाही को संचालित करने वाली देष की प्रमुख दोनों  राश्ट्रीय पार्टी कांग्रेस व भाजपा दोनों पर दिषाहीन व कमजोर नेतृत्व होने के कारण संकट के बादल मंडराने लगे है। इसी कारण देष भ्रश्टाचार, मंहगाई, आतंकवाद आदि समस्याओं से बुरी तरह जकड़ गया है उसके लिए मुख्य रूप से जिम्मेदार देष के हितों के प्रति उदासीन अमेरिकापरस्त प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को अविलम्ब अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए। वहीं भ्रश्टाचार के आरोप में बुरी तरह से घिरे देष की मुख्य विपक्षी दल के अध्यक्ष नितीन गड़करी भी तत्काल अपने पद से इस्तीफा दे। अगर दोनों अपने विवेक से षीघ्र इस्तीफा नहीं देते हैं तो प्रधानमंत्री को कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी व गडकरी को संघ तत्काल पद से बर्खास्त करने का काम करें। आज देष के आम जनता का जीना मनमोहन सिंह सरकार के मंहगाई व भ्रश्टाचार रूपि कुषासन ने हराम कर रखा है। ऐसे में उनको बनाय रखते हुए मंत्री मण्डल में किसी प्रकार का फेरबदल या राहुल गांधी को संगठन का उपाध्यक्ष या कार्यकारी अध्यक्ष बनाने के टोटके से कांग्रेस व देष को कोई लाभ नहीं होगा। उन्हें देष में जमीने खरीदने के बजाय जनादेष का सम्मान करना सीखना चाहिए।
सोनिया गांधी व राहुल गांधी को इस बात का भान होना चाहिए कि देष को  मनमोहन जैसे पदलोलुपु व अपने दायित्वों को नजरांदाज करने वाले व्यक्ति को झेलना बेहद आत्मघाती साबित होगा। वहीं इसके साथ कांग्रेस आला नेतृत्व को चाहिए कि वह सलमान खुर्षीद, जैसे भ्रश्टाचार के आरोपों से घिरे व कपिल सिब्बल, आनन्द षर्मा आदि जनता व संगठन से दूर  रहने वाले मंत्रियों को तत्काल सरकार से हटाये।  इसके साथ संगठन से जनार्जन द्विवेदी जैसे जनता से कटे हुए व्यक्ति को दूर रखें।
 वहीं दूसरी तरफ भाजपा जो देष में भारतीय संस्कृति व लोकषाही को बचाने का दंभ भर रही है और जिसके कंधों पर मुख्य विपक्षी दल का गुरूतर दायित्व भी है उसमें गडकरी और सुशमा जेसे नेता जब दल की खेवनहार बनेंगे तो ऐसी पार्टी का क्या भविश्य होगा?  जिस प्रकार से कांग्रेस में देषभक्त, जनसेवकों, साफ छवि के नेताओं के बजाय भ्रश्टाचारियों को संगठन व सत्ता दोनों में वरियता दे कर अपनी आत्महत्या करने में उतारू है वही रोग लगता है भाजपा को भी लग गया है। कम से कम भ्रश्टाचार के आरोपों मंे घिरे अपने राश्ट्रीय अध्यक्ष को जिस षर्मनाक ढ़ग से यानी कांग्रेस की तरह बचाव करके उसको बनाये रखने का काम भाजपा कर रही है। उससे भाजपा को भी कांग्रेस की तरह सत्ताच्युत होने का दण्ड मिलेगा। आगामी 2014 में दोनों पार्टियां देष की सत्ता से दूर रहेगी।
संघ भले ही गडकरी के ताजा विवाद से अपने आप को अलग रखने की कोषिष कर रहा हो परन्तु जिस प्रकार से उन्होंने गडकरी को महाराश्ट्र की प्रदेष की राजनीति के एक क्षत्रप गडकरी को भाजपा का राश्ट्रीय अध्यक्ष बनाने का काम किया अब संघ का प्रायष्चित केवल इसे भाजपा का आन्तरिक मामला बता कर नहीं दूर होने वाला। संघ को अविलम्ब गडकरी को अध्यक्ष पद से इस्तीफा दिला कर भाजपा का राश्ट्रीय अध्यक्ष या कार्यकारी अध्यक्ष आडवाणी, जेटली, सुशमा, राजनाथ, जोषी आदि पदलोलुपु लोगों के कंधों पर सौंपने के बजाय देश के सबसे जमीनी व अनुभवी जनप्रिय नेता गोविन्दाचार्य जो भाजपा के राश्ट्रीय संगठन महामंत्री भी रहे उनकी ताजपोषी करके भाजपा की रक्षा करनी चाहिए। संघ व भाजपा के  कुछ संकीर्ण नेताओं ने जिस प्रकार से गोविन्दाचार्य जैसे अनुभवी व देश-जनता की नब्ज पहचानने वाले नेता की शर्मनाक उपेक्षा की वह देष व भाजपा के लिए बहुत ही मंहगा पडा। अगर आज गोविन्दाचार्य की उपेक्षा भाजपा व संघ नहीं करता तो आज  भाजपा को गडकरी जैसे प्रकरणों से शर्मसार नहीं होना पड़ता। गडकरी को बनाये रखने का दण्ड हिमाचल के साथ गुजरात में भी भुगतना पडेगा।   यहां पर एक बात स्पश्ट कर दे की भाजपा व कांग्रेस दोनों मात्र राजनैतिक दल ही नहीं वर्तमान में देश की एकता अखण्डता के साथ लोकषाही की जीवन धारा संचालित करने वाली पार्टी भी है। इसलिए दोनों पार्टियों का कमजोर होना या गलत या  कमजोर हाथों में नेतृत्व रहने का दण्ड देश को भुगतना पड रहा है। इनकी कमजोरी के कारण आज देश में आरजकता के साथ साथ दिषाहिन षासन प्रषासन हो गया है।


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