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Sunday, October 21, 2012


नीरो से बदतर साबित हुए सोनिया, मनमोहन, मंत्री व देश के नेता

-भ्रष्टाचार व मंहगाई से आम जनता त्रस्त परन्तु मनमोहन व उनकी सरकार मस्त 

-जयराम में हिम्मत है तो जनता से पहले जनता को खुले में शौंच करने के लिए मजबूर करने वाले हुक्मरानों को डालें जेल 

‘सलमान खुर्शीद प्रकरण पर कांग्रेस आला कमान सोनिया गांधी व मनमोहन सिंह की शर्मनाक मूकता को देख कर व कांग्रेसी नेताओं व मंत्रियों के शर्मसार करने वाले बयानों को सुन कर मेरे मन में एक विचार क्रोंधा नीरो तू मरा नहीं तू आज भले ही रोम में जींदा न हो पर तू भारत में जींदा है। सोनिया व मनमोहन सिंह की सरकार के रूप में आम आदमियों के जख्मों को कुरेद रहा है।
बचपन में मेरी तरह आपने भी सुना होगा कि जब रोम जल रहा था तो उस समय वहां का सत्तालोलुपु शासक नीरों चैन की बंसी बजा रहा था। इस कहावत को पढ़ते या सुनते मुझे लगता था कि शायद यह बहुत ही अतिश्योक्ति पूर्ण कहावत है। सच में ऐसा थोड़ी हुआ होगा। परन्तु आज भारत में सोनिया गांधी के नेतृत्व वाली मनमोहन सिंह की सरकार के कारनामों को देख कर लगता है कि सच में नीरो अब रोम में नहीं भारत में ही जींदा है।  देश में मंहगाई, भ्रष्टाचार, आतंकवाद व कुशासन से त्रस्त है। जनता का जीना दूश्वार हो रखा है। कभी लाखों करोड़ रूपये का 2जी घोटाला तो कभी इसको मात करने वाला कोयला घोटाला। अब तो हद हो गयी जिन विकलांग व्यक्तियों पर आम आदमी भी रहम करता है उनके कल्यार्थ योजनाओं को मनमोहन सिंह के मंत्री द्वारा संचालित ट्रस्ट ने ही चूना लगा कर डकार दिया। सबकुछ  देख कर भी न तो सोनिया गांधी को व नहीं मनमोहन सिंह को नेतिकता याद आ रही है अपना दायित्व का ही बोध हो रहा है। मंत्री व अन्य नेताओं के कारनामों व बयानबाजी की बात लोगों के जख्मों को कुरेदने का काफी है। यह केवल कांग्रेस व उनके नेताओं की बात नहीं आज देश की अधिकांश राजनीति ही इतनी भ्रष्ट हो गयी कि आम जनता का विश्वास ही इनसे उठ गया है। आज कांग्रेसी सरकार के कृत्यों को देख कर आम आदमी को कांग्रेस का हाथ आम आदमी के साथ का नारा भी जख्मों को कुरेदने वाला ही प्रतीत हो रहा है।
केन्द्रीय मंत्री जयराम रमेश भी लगता है अपने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की तरह ही हवाई बातें करके सरकार के कुशासन, मंहगाई व भ्रष्टाचार से मरणाशन देश की जनता के जख्मों को कुरेदने की धृष्ठता कर रहे है। जिस प्रकार केन्द्रीय मंत्री जयराम रमेश ने राजस्थान के कोटा जनपद के दौरे के समय सांगोड में निर्मल यात्रा कार्यक्रम में तुगलकी फरमान किया कि देश में खुले में शौंच करने वालों को जेल भेज दिया जायेगा। केन्द्रीय मंत्री जयराम रमेश को इस बात का भान होना चाहिए कि देश की आधी से अधिक आवादी के पास आज शौचालय की सुविधा से वंचित यहां के हुक्मरानों ने रखा हैं उनको आम जनता को जेल डालने का साहस है तो वे  पहले अपने सरकार के मुखिया मनमोहन सिंह सहित तमाम अब तक की सरकार में मंत्री रहे व मुख्यमंत्री आदि रहे नेताओं तथा नौकरशाहों को जेल में डाल देना चाहिए, जिन्होने देश की आम जनता की इतनी उपेक्षा व शोषण किया कि वे आजादी के 65 साल बाद भी खुले में शौंच करने के लिए मजबूर हैं। शायद प्रधानमंत्री सहित कांग्रेस के अन्य नेताओं को इस बात का भान ही नहीं है कि देश में आम आदमियों की माली हालत उनके कुशासन से कितनी चरमा गयी है। देश की संस्कृति क्या है।  जिस प्रकार से कबीना मंत्री जयराम रमेश ने उक्त धमकी बेहाल जनता को दी उससे साफ लगता है कि केन्द्रीय मंत्री को देश की हकीकत का भान उसी प्रकार नहीं है । शायद उनको लगता है कि देश के अधिकांश गरीब जनता जो सरकार की नालायकी के कारण खुले में शौंच जाने के लिए विवश है वे अपनी खुशी से जानबुझ कर ऐसा काम करते हैं। अभी जयराम रमेश व उनके प्रधानमंत्री को इस बात का अहसास ही नहीं होगा कि देश की आम जनता पानी, बिजली, शिक्षा, स्वास्थ्य व सम्मान ही नहीं दो वक्त की रोजी रोटी के लिए कितने पापड़ बेलने पडने के बाबजूद इससे वंचित है।
जिस प्रकार योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक जो अपने प्रयोग के लिए शौंचालय तो लाखों का खर्च कर देते हैं परन्तु आम गरीब जनता के लिए एक दिन के गुजारे के लिए 30-35 रूपया भी काफी बताते है। कांग्रेसी सरकार के कुशासन से गैस सिलेण्डर की कीमते बढ़ने पर जिस बेहुदा ढ़ग से गुस्से में रेणुका चैधरी झलाते हुए कही कि 900 रूपये में गैस सिलेण्डर कौन नहीं ले सकता है ? इसी प्रकार जयराम रमेश भी कभी शौचालय की जरूरत पर उसकी तुलना मंदिर से करके देश के बहुसंख्यक समाज के लोगों की भावनाओं को अपनी मूर्खता से रौदने का कृत्य करते है।  केन्द्रीय मंत्री जयराम रमेश को जहां मनमोहन व मोंटेक सिंह से सो गुना ईमानदार व कर्मठ मंत्री माना जाता परन्तु जिस प्रकार वे बेवजह ज्यादा बोलजाते हैं उससे वे जनता की आंखों में खटकने लगते है।
केन्द्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद व उनकी पत्नी द्वारा संचालित ट्रस्ट पर लगे घोटेले पर जिस प्रकार से कबीना मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा, सूचना प्रसारण मंत्री अम्बिका सोनी व राज्य मंत्री हरीश रावत ने सलमान खुर्शीद जैसे दिग्गज मंत्री पर मात्र 71 लाख रूपये का घोटाले का आरोप को इस लिए मान नहीं रहे थे कि यह रकम इन मंत्रियों के लिए सम्मानजनक नहीं है। जिस प्रकार बेनी प्रसाद ने आश्चर्य प्रकट किया कि अगर 71 करोड़ रूपये घोटाले का आरोप लगता तो हम इसे घोटाला समझते। इन नादानों को क्या मालुम की देश की आम जनता आज उनके कुशासन से एक एक रूपये जुटाने के लिए कितना खून पसीना बहाना पड़ता है। जिस प्रकार से कांग्र्रेस आला कमान सोनिया गांधी, महामंत्री राहुल गांधी व प्रधानमंत्र.ी इस घोटाले पर मूक बने हुए हैं और लाखों करोड़ के घोटालों को आराम से बेसर्मी से पचाने वाली सरकार व उसके आत्मघाती मंत्री -नेताओं को 71 लाख रूपये की कोई कीमत ही नजर नहीं आती। इनके कहने के अनुसार इन्होंने धारणा बना ली कि एक कबीना मंत्री हजारों लाखों करोड़ रूपये का घोटाला तो कर सकता है परन्तु 71 लाख जैसे मामूली कीमत का कोई घोटाला कर ही नहीं सकता। दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित द्वारा संरक्षित बिजली की कम्पनियों के आम आदमी का जीना हराम करने वाले बिजली के बिल के दंश से बुरा हाल किया हुआ है उस पर मूक रहने पर सोनिया गांधी भी खुद जनता की नजरों में कटघरे में खड़ी हो गयी है। जनता को समझ में नहीं आ रहा है कि वह किससे इस खुली लूट की फरियाद करे।
आम जनता के लिए आज नीरो बन चूक मनमोहन व उसकी सरकार के मंत्रियों की आम जनता के जख्मों को कुरेदने वाले बयानों का यहीं पर अंत नहीं होता है। इन नेताओं व इनकी सरकार के नजर में आम आदमी की क्या कीमत है यह सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सरकार को अनाज के उचित भण्डारन न करने के कारण खुले में सड़ रहे अनाज को देश के गरीबों में बांटने के आदेश पर भी उसे  भूख से बेहाल लोगों को देने के बजाय सड़ने देने वाले प्रधानमंत्री मनमोहन व कृषि मंत्री शरद पवार के  अमानवीय कृत्य से ही उजागर हो गयी। इस प्रकरण से पूरे विश्व की नजरों में भारत शर्मसार हुआ। यह सरकार कितनी निष्ठुर है इसका नमुना प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के कुशासन से बेलगाम हुई मंहगाई को रोकने के बजाय प्रधानमंत्री की ‘मैं कोई ज्योतिषी नहीं हॅू जो यह बताये कि मंहगाई कब रूकेगी’ ही काफी है। इस सरकार में आम आदमी की क्या कीमत है इसके एक पूर्व मंत्री द्वारा हवाई जहाज के विशेष श्रेणी के सफर को जानवरों यानी केटल क्लास  कहा था। शायद उस मंत्री को इस बात का भान नहीं होगा कि देश के एक चैथाई जनता के लिए आज भी मोटर रोड़  की सुविधाओं के लिए तरस रही है। देश में आम लोग रोजगार व मंहगाई से त्रस्त हैं परन्तु भारत के प्रधानमंत्री को देश में अमेरिकी कम्पनियों को रोजगार देने की ज्यादा चिंता है वे एफडीआई से उनको स्वागत कर अपने लोगों को बेरोजगार बना रहे है। यहां स्पष्ट कर दूं ऐसा नहीं कि केवल नीरो कांग्रेस में ही फलफूल रहा है वह तो अन्य सभी राजनैतिक दलों में भी बेहतर फल फूल रहा है। केवल रो रहा है तो यहां का आम आदमी जो इनको अपना तारनहार मान कर इनको लोकशाही का ताज सौंप देता है।

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