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Saturday, October 27, 2012


2014 के चुनावी भंवर में कांग्रेस को डूबने से नहीं बचा पायेगा मनमोहनी मंत्रीमण्डल के विस्तार का टोटका भी

देष की जनता ने सोनिया गांधी के नेतृत्व पर विष्वास करके जनता की आषाओं पर खरा उतरने में असफल रही एनडीए गठबंधन को सत्ताच्युत किया था। देष को सही षासन दे कर विकास की रहा में चलाने का दायित्व निर्वाह करने के बजाय सोनिया गांधी ने अमेरिका के प्रिय मनमोहन सिंह को देष का प्रधानमंत्री बनाने की हिमालयी भूल की। मनमोहन सिंह को बनाने के बाद जिस ढ़ग से देष की बर्बादी की राह में अपने कुषासन से धकेला उससे देष मंहगाई, भ्रश्टाचार, आतंकवाद के  षिकंजे में बुरी तरह से जकड़ गया। आम जनता का जीना दुष्वार हो रखा है परन्तु क्या मजाल आम जनता के हित में काम करने की दुहाई देने वाली कांग्रेस व उसकी आला कमान सोनिया गांधी व राहुल गांधी के कानो में जूॅं तक नहीं रेंग रही है। वह देष व पार्टी के हित में मनमोहन सिंह को अविलम्ब प्रधानमंत्री के पद से हटाने के बजाय उसके कुषासन को ही बढावा दे रही है।  मनमोहन सरकार अमेरिका के हित में व भारतीय हितों को जिस निर्ममता से रौंद रही है उससे उसका एक पल के लिए ही देष का भाग्य विधाता बने रहना या बनाये रखना किसी बडी त्रासदी से कम नहीं है। देष की जनभावनाओं से खिलवाड़ करने व जनविष्वास से खिलवाड करने का दण्ड कांग्रेस को 2014 के चुनाव में सत्ता से बाहर करके महाकाल देगा। इसके साथ भाजपा ने भी जो दोहरा मापदण्ड अपना रखा हे उसके कारण उसको भी सत्ता से दूर रहने के लिए मुलायम सिंह की तरह ही मजबूर होना पडेगा। देष की सत्ता की मुख्य बागडोर कांग्रेस व भाजपा के हाथ से छिटक कर छोटे दलों के नेतृत्व में देष की सरकार बनेगी। इसमें ममता बनर्जी, या जय ललिता या अन्य देष की बागडोर संभालेगा जिसको बाहर से समर्थन देने में भाजपा व कांग्रेस में उसी प्रकार प्रतियोगिता होगी जिस प्रकार कांग्रेस को समर्थन देने में सपा व बसपा में वर्तमान में प्रतियोगिता होती है।

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